हाईवे पर खड़े वाहनों से हादसे, सुप्रीम कोर्ट ने NHAI से पूछे सवाल
Supreme Court asks NHAI why it can't electronically track vehicles parked on highways
Kanpur Live News Desk ·

देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर रोजाना होने वाले सड़क हादसों में एक बड़ी वजह सड़क किनारे या सड़क पर ही खड़े भारी वाहन हैं। रात के अंधेरे में या तेज रफ्तार में आते वाहन अक्सर इन खड़े ट्रकों और ट्रेलरों से टकरा जाते हैं, जिससे कई जानें चली जाती हैं। इसी गंभीर समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई से पूछा कि उसके पास ऐसा इलेक्ट्रॉनिक निगरानी तंत्र क्यों नहीं हो सकता, जिससे हाईवे पर खड़े किसी भी वाहन की तुरंत पहचान की जा सके।
किस मामले की हो रही सुनवाई
यह टिप्पणी राजस्थान के फलोदी में नवंबर 2025 में हुए एक भीषण सड़क हादसे से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान आई। 2 नवंबर 2025 को भारतमाला हाईवे पर माटोड़ा गांव के पास एक टेंपो ट्रैवलर सड़क पर खड़े ट्रेलर ट्रक से टकरा गया था। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई थी। टेंपो ट्रैवलर बीकानेर के कोलायत मंदिर से जोधपुर जा रहा था। इस हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया था।
कोर्ट ने क्या पूछा
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता और एमिकस क्यूरी एएनएस नाडकर्णी ने हाईवे पर खड़े वाहनों से जुड़े कुछ हालिया हादसों का जिक्र किया। इसके बाद पीठ ने सवाल किया कि एनएचएआई के पास पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद ऐसा इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस सिस्टम क्यों नहीं हो सकता, जिससे हाईवे पर रुके या खड़े किसी वाहन की तुरंत पहचान हो सके। सुनवाई के दौरान एक वकील ने अदालत को बताया कि एनएचएआई हाईवे पर पेट्रोलिंग करता है।
पहले भी उठ चुका है मुद्दा
सितंबर में इस मामले की सुनवाई के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे पर अतिक्रमण और खड़े वाहनों का मुद्दा उठाया था। तब एनएचएआई की ओर से बताया गया था कि हाईवे पर अनधिकृत पार्किंग की जांच के लिए नियमित निरीक्षण और पेट्रोलिंग से जुड़े सर्कुलर जारी किए गए हैं। वहीं एमिकस क्यूरी ने कहा था कि हाईवे पर वाहनों की अवैध पार्किंग सड़क हादसों का एक प्रमुख कारण है।
अप्रैल में दिए थे अहम निर्देश
13 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा से जुड़े कई अंतरिम निर्देश जारी किए थे। इनमें कहा गया था कि कोई भी भारी या व्यावसायिक वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग के कैरिजवे या पक्के शोल्डर पर तब तक पार्क या खड़ा नहीं किया जा सकता, जब तक उसके लिए तय बे, ले-बाय या वे-साइड सुविधा उपलब्ध न हो। अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्ग की राइट ऑफ वे सीमा के भीतर नए ढाबे, भोजनालय या व्यावसायिक ढांचे के निर्माण और संचालन पर भी रोक लगाई थी।
ब्लैकस्पॉट की पहचान का निर्देश
कोर्ट ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय और एनएचएआई को दुर्घटना संभावित ब्लैकस्पॉट और महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान करने का निर्देश दिया था। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों पर मौजूद दुर्घटना ब्लैकस्पॉट की विस्तृत सूची प्रकाशित करने को कहा गया था।
2 प्रतिशत सड़कें, 30 प्रतिशत मौतें
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के निर्देशों में एक चौंकाने वाले तथ्य पर चिंता जताई थी। देश की कुल सड़क लंबाई में राष्ट्रीय राजमार्गों की हिस्सेदारी करीब 2 प्रतिशत है, लेकिन सड़क हादसों में होने वाली कुल मौतों में इनकी हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है। अदालत ने कहा था कि तेज रफ्तार वाले एक्सप्रेसवे और हाईवे प्रशासनिक लापरवाही या बुनियादी ढांचे की कमियों के कारण खतरे का गलियारा नहीं बनने चाहिए।
क्यों खतरनाक हैं खड़े वाहन
हाईवे पर तेज रफ्तार से चलते वाहन के चालक के पास किसी अचानक सामने आई रुकावट से बचने के लिए बहुत कम समय होता है। अगर कोई ट्रक बिना रोशनी, बिना रिफ्लेक्टर या बिना चेतावनी संकेत के सड़क पर खड़ा हो, तो खासकर रात या कोहरे में वह लगभग दिखाई नहीं देता। ऐसे में पीछे से आने वाला वाहन सीधे उससे टकरा जाता है। भारी वाहनों के पीछे का हिस्सा ऊंचा होने के कारण कार जैसे छोटे वाहन उसके नीचे घुस जाते हैं, जिससे हादसे और भी जानलेवा हो जाते हैं।
तकनीक से कैसे मिल सकता है समाधान
आज के दौर में कैमरों, सेंसरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से हाईवे की निगरानी काफी आसान हो गई है। कई आधुनिक एक्सप्रेसवे पर उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली लगाई जाती है, जो सड़क पर रुके वाहनों, दुर्घटनाओं और असामान्य गतिविधियों का तुरंत पता लगाकर नियंत्रण कक्ष को सूचना भेज सकती है। ऐसी व्यवस्था से पेट्रोलिंग टीम को तुरंत मौके पर भेजा जा सकता है और पीछे से आने वाले वाहनों को डिजिटल संकेतों के जरिये चेतावनी दी जा सकती है।
वाहन चालक क्या सावधानी बरतें
हाईवे पर वाहन खराब हो जाए, तो उसे सड़क से पूरी तरह हटाकर किनारे पर खड़ा करें।
खड़े वाहन की हैजर्ड लाइट जलाएं और पीछे चेतावनी त्रिकोण लगाएं।
रात के समय तय गति सीमा से कम रफ्तार में चलें और हेडलाइट का सही इस्तेमाल करें।
कोहरे में फॉग लाइट और लो बीम का इस्तेमाल करें।
भारी वाहन चालक केवल तय पार्किंग या ले-बाय में ही रुकें।
थकान होने पर सुरक्षित जगह पर रुककर आराम करें, सड़क किनारे नहीं।
आपात स्थिति में राष्ट्रीय राजमार्ग हेल्पलाइन 1033 पर संपर्क करें।
कानपुर के आसपास के हाईवे
कानपुर से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे जैसे मार्गों पर भी रोजाना बड़ी संख्या में भारी वाहन गुजरते हैं। ढाबों के आसपास और सड़क किनारे खड़े ट्रक यहां भी अक्सर देखे जाते हैं। सर्दियों में घना कोहरा पड़ने पर ऐसे खड़े वाहन और बड़ा खतरा बन जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट की यह सख्ती इन मार्गों पर भी सुरक्षा बढ़ाने में मददगार हो सकती है।
अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को
इस मामले में कई अंतरिम आवेदन भी दाखिल किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर की तारीख तय की है और कहा है कि वह हाईवे से अतिक्रमण हटाने से जुड़े आवेदनों पर भी सुनवाई करेगा।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह सवाल सड़क सुरक्षा के मोर्चे पर एक अहम कदम है। अगर हाईवे पर खड़े वाहनों की तुरंत पहचान और हटाने की प्रभावी व्यवस्था बनती है, तो हर साल हजारों जानें बचाई जा सकती हैं। साथ ही वाहन चालकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी, क्योंकि सड़क सुरक्षा सरकार और नागरिकों, दोनों की साझा जिम्मेदारी है।
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हाईवे पर खड़े वाहनों से हादसे, सुप्रीम कोर्ट ने NHAI से पूछे सवाल
देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर रोजाना होने वाले सड़क हादसों में एक बड़ी वजह सड़क किनारे या सड़क पर ही खड़े भारी वाहन हैं। रात के अंधेरे में या तेज रफ्तार में आते वाहन अक्सर इन खड़े ट्रकों और ट्रेलरों से टकरा जाते हैं, जिससे कई जानें चली जाती हैं। इसी गंभीर समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई से पूछा कि उसके पास ऐसा इलेक्ट्रॉनिक निगरानी तंत्र क्यों नहीं हो सकता, जिससे हाईवे पर खड़े किसी भी वाहन की तुरंत पहचान की जा सके।
किस मामले की हो रही सुनवाई
यह टिप्पणी राजस्थान के फलोदी में नवंबर 2025 में हुए एक भीषण सड़क हादसे से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान आई। 2 नवंबर 2025 को भारतमाला हाईवे पर माटोड़ा गांव के पास एक टेंपो ट्रैवलर सड़क पर खड़े ट्रेलर ट्रक से टकरा गया था। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई थी। टेंपो ट्रैवलर बीकानेर के कोलायत मंदिर से जोधपुर जा रहा था। इस हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया था।
कोर्ट ने क्या पूछा
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता और एमिकस क्यूरी एएनएस नाडकर्णी ने हाईवे पर खड़े वाहनों से जुड़े कुछ हालिया हादसों का जिक्र किया। इसके बाद पीठ ने सवाल किया कि एनएचएआई के पास पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद ऐसा इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस सिस्टम क्यों नहीं हो सकता, जिससे हाईवे पर रुके या खड़े किसी वाहन की तुरंत पहचान हो सके। सुनवाई के दौरान एक वकील ने अदालत को बताया कि एनएचएआई हाईवे पर पेट्रोलिंग करता है।
पहले भी उठ चुका है मुद्दा
सितंबर में इस मामले की सुनवाई के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे पर अतिक्रमण और खड़े वाहनों का मुद्दा उठाया था। तब एनएचएआई की ओर से बताया गया था कि हाईवे पर अनधिकृत पार्किंग की जांच के लिए नियमित निरीक्षण और पेट्रोलिंग से जुड़े सर्कुलर जारी किए गए हैं। वहीं एमिकस क्यूरी ने कहा था कि हाईवे पर वाहनों की अवैध पार्किंग सड़क हादसों का एक प्रमुख कारण है।
अप्रैल में दिए थे अहम निर्देश
13 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा से जुड़े कई अंतरिम निर्देश जारी किए थे। इनमें कहा गया था कि कोई भी भारी या व्यावसायिक वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग के कैरिजवे या पक्के शोल्डर पर तब तक पार्क या खड़ा नहीं किया जा सकता, जब तक उसके लिए तय बे, ले-बाय या वे-साइड सुविधा उपलब्ध न हो। अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्ग की राइट ऑफ वे सीमा के भीतर नए ढाबे, भोजनालय या व्यावसायिक ढांचे के निर्माण और संचालन पर भी रोक लगाई थी।
ब्लैकस्पॉट की पहचान का निर्देश
कोर्ट ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय और एनएचएआई को दुर्घटना संभावित ब्लैकस्पॉट और महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान करने का निर्देश दिया था। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों पर मौजूद दुर्घटना ब्लैकस्पॉट की विस्तृत सूची प्रकाशित करने को कहा गया था।
2 प्रतिशत सड़कें, 30 प्रतिशत मौतें
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के निर्देशों में एक चौंकाने वाले तथ्य पर चिंता जताई थी। देश की कुल सड़क लंबाई में राष्ट्रीय राजमार्गों की हिस्सेदारी करीब 2 प्रतिशत है, लेकिन सड़क हादसों में होने वाली कुल मौतों में इनकी हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है। अदालत ने कहा था कि तेज रफ्तार वाले एक्सप्रेसवे और हाईवे प्रशासनिक लापरवाही या बुनियादी ढांचे की कमियों के कारण खतरे का गलियारा नहीं बनने चाहिए।
क्यों खतरनाक हैं खड़े वाहन
हाईवे पर तेज रफ्तार से चलते वाहन के चालक के पास किसी अचानक सामने आई रुकावट से बचने के लिए बहुत कम समय होता है। अगर कोई ट्रक बिना रोशनी, बिना रिफ्लेक्टर या बिना चेतावनी संकेत के सड़क पर खड़ा हो, तो खासकर रात या कोहरे में वह लगभग दिखाई नहीं देता। ऐसे में पीछे से आने वाला वाहन सीधे उससे टकरा जाता है। भारी वाहनों के पीछे का हिस्सा ऊंचा होने के कारण कार जैसे छोटे वाहन उसके नीचे घुस जाते हैं, जिससे हादसे और भी जानलेवा हो जाते हैं।
तकनीक से कैसे मिल सकता है समाधान
आज के दौर में कैमरों, सेंसरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से हाईवे की निगरानी काफी आसान हो गई है। कई आधुनिक एक्सप्रेसवे पर उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली लगाई जाती है, जो सड़क पर रुके वाहनों, दुर्घटनाओं और असामान्य गतिविधियों का तुरंत पता लगाकर नियंत्रण कक्ष को सूचना भेज सकती है। ऐसी व्यवस्था से पेट्रोलिंग टीम को तुरंत मौके पर भेजा जा सकता है और पीछे से आने वाले वाहनों को डिजिटल संकेतों के जरिये चेतावनी दी जा सकती है।
वाहन चालक क्या सावधानी बरतें
हाईवे पर वाहन खराब हो जाए, तो उसे सड़क से पूरी तरह हटाकर किनारे पर खड़ा करें।
खड़े वाहन की हैजर्ड लाइट जलाएं और पीछे चेतावनी त्रिकोण लगाएं।
रात के समय तय गति सीमा से कम रफ्तार में चलें और हेडलाइट का सही इस्तेमाल करें।
कोहरे में फॉग लाइट और लो बीम का इस्तेमाल करें।
भारी वाहन चालक केवल तय पार्किंग या ले-बाय में ही रुकें।
थकान होने पर सुरक्षित जगह पर रुककर आराम करें, सड़क किनारे नहीं।
आपात स्थिति में राष्ट्रीय राजमार्ग हेल्पलाइन 1033 पर संपर्क करें।
कानपुर के आसपास के हाईवे
कानपुर से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे जैसे मार्गों पर भी रोजाना बड़ी संख्या में भारी वाहन गुजरते हैं। ढाबों के आसपास और सड़क किनारे खड़े ट्रक यहां भी अक्सर देखे जाते हैं। सर्दियों में घना कोहरा पड़ने पर ऐसे खड़े वाहन और बड़ा खतरा बन जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट की यह सख्ती इन मार्गों पर भी सुरक्षा बढ़ाने में मददगार हो सकती है।
अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को
इस मामले में कई अंतरिम आवेदन भी दाखिल किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर की तारीख तय की है और कहा है कि वह हाईवे से अतिक्रमण हटाने से जुड़े आवेदनों पर भी सुनवाई करेगा।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह सवाल सड़क सुरक्षा के मोर्चे पर एक अहम कदम है। अगर हाईवे पर खड़े वाहनों की तुरंत पहचान और हटाने की प्रभावी व्यवस्था बनती है, तो हर साल हजारों जानें बचाई जा सकती हैं। साथ ही वाहन चालकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी, क्योंकि सड़क सुरक्षा सरकार और नागरिकों, दोनों की साझा जिम्मेदारी है।
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