सितंबर में बेरोजगारी दर घटकर 5%, शहरों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी
PLFS September 2026: Unemployment rate falls to 5%, urban female participation rises
Kanpur Live News Desk ·

देश में रोजगार की स्थिति को लेकर नए आंकड़े आए हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने सितंबर 2026 का आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) मासिक बुलेटिन जारी किया है। इसके अनुसार देश में बेरोजगारी दर पिछले साल के मुकाबले 0.2 प्रतिशत अंक घटकर 5.0 प्रतिशत रह गई है। वहीं श्रम बल भागीदारी दर 0.2 प्रतिशत अंक बढ़कर 55.5 प्रतिशत हो गई है। यह एनएसओ का 18वां मासिक पीएलएफएस बुलेटिन है। आंकड़े बताते हैं कि रोजगार के मोर्चे पर धीमा लेकिन सकारात्मक सुधार हो रहा है।
आंकड़े एक नजर में
बेरोजगारी दर (सितंबर 2026):
कुल: 5.0 प्रतिशत
ग्रामीण: 4.2 प्रतिशत
शहरी: 6.9 प्रतिशत
पुरुष: 4.9 प्रतिशत
महिला: 5.2 प्रतिशत
श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर):
कुल: 55.5 प्रतिशत
महिला: 34.6 प्रतिशत (अगस्त में 34.8 प्रतिशत)
शहरी महिला: 25.9 प्रतिशत (पहले 25.4 प्रतिशत)
श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर):
कुल: 52.7 प्रतिशत (सितंबर 2025 में 52.4 प्रतिशत)
शहरी: 47.2 प्रतिशत
शहरी पुरुष: 71.0 प्रतिशत
शहरी महिला: 23.5 प्रतिशत
इन शब्दों का मतलब समझें
बेरोजगारी दर: काम करने के इच्छुक और काम तलाश रहे लोगों में से कितने प्रतिशत लोगों को काम नहीं मिला। 5 प्रतिशत बेरोजगारी दर का मतलब है कि काम खोज रहे हर 100 लोगों में से 5 बेरोजगार हैं।
श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर): कुल आबादी (आम तौर पर 15 वर्ष से ऊपर) में से कितने लोग काम कर रहे हैं या काम तलाश रहे हैं। यह बताता है कि कितने लोग श्रम बाजार में सक्रिय हैं।
श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर): कुल आबादी में से कितने प्रतिशत लोग वास्तव में काम कर रहे हैं।
ये आंकड़े मौजूदा साप्ताहिक स्थिति (सीडब्ल्यूएस) के आधार पर तैयार किए जाते हैं, यानी सर्वे से पहले के एक हफ्ते में व्यक्ति की काम की स्थिति के आधार पर।
शहरों में बेरोजगारी ज्यादा
आंकड़ों से साफ है कि शहरी इलाकों में बेरोजगारी दर (6.9 प्रतिशत) ग्रामीण इलाकों (4.2 प्रतिशत) से काफी ज्यादा है। इसकी एक वजह यह है कि गांवों में खेती और उससे जुड़े कामों में ज्यादातर लोग किसी न किसी रूप में लगे रहते हैं, भले ही वह काम पूरा समय या अच्छी कमाई वाला न हो। वहीं शहरों में पढ़े-लिखे युवा अपनी योग्यता के हिसाब से नौकरी तलाशते हैं और सही नौकरी न मिलने पर बेरोजगार गिने जाते हैं।
महिलाओं की भागीदारी: अच्छी और चिंताजनक खबर
शहरी महिलाओं की श्रम बल भागीदारी 25.4 से बढ़कर 25.9 प्रतिशत होना एक सकारात्मक संकेत है। इसका मतलब है कि शहरों में ज्यादा महिलाएं नौकरी या कारोबार के लिए आगे आ रही हैं। लेकिन कुल महिला भागीदारी अगस्त के 34.8 प्रतिशत से घटकर 34.6 प्रतिशत रह गई।
शहरी पुरुषों के 71 प्रतिशत के मुकाबले शहरी महिलाओं का श्रमिक जनसंख्या अनुपात केवल 23.5 प्रतिशत है। यह बड़ा अंतर बताता है कि शहरों में अब भी बड़ी संख्या में महिलाएं कामकाजी दुनिया से बाहर हैं। इसके पीछे सुरक्षा, परिवहन, बच्चों की देखभाल की सुविधा की कमी और सामाजिक कारण जैसी कई वजहें मानी जाती हैं।
युवाओं के लिए क्या संकेत
कुल बेरोजगारी दर में गिरावट अच्छी खबर है, लेकिन युवाओं, खासकर पढ़े-लिखे युवाओं में बेरोजगारी अब भी बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि डिग्री और उद्योगों की जरूरत के बीच के अंतर को कम करना जरूरी है। कौशल विकास, अप्रेंटिसशिप और व्यावसायिक प्रशिक्षण इस अंतर को भरने में मदद कर सकते हैं।
रोजगार के बढ़ते क्षेत्र
हाल के समय में कई क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं:
मैन्युफैक्चरिंग: मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो पार्ट्स उत्पादन
सेवा क्षेत्र: आईटी, बैंकिंग, बीमा और स्वास्थ्य सेवाएं
ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स: डिलीवरी, वेयरहाउस और सप्लाई चेन
पर्यटन और आतिथ्य: होटल, ट्रैवल और खान-पान
निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर: सड़क, मेट्रो और भवन निर्माण
निर्यात में हालिया तेजी से भी उद्योगों में रोजगार बढ़ने की उम्मीद है।
कानपुर के युवाओं के लिए अवसर
कानपुर औद्योगिक शहर होने के कारण यहां चमड़ा, होजरी, इंजीनियरिंग, प्लास्टिक और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में रोजगार के अवसर हैं। कानपुर मेट्रो, एक्सप्रेसवे और डिफेंस कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं से भी नए काम पैदा हो रहे हैं। शहर के युवा इन तरीकों से रोजगार की तलाश में मदद ले सकते हैं:
सेवायोजन पोर्टल: उत्तर प्रदेश सरकार के सेवायोजन पोर्टल पर पंजीकरण कर रोजगार मेलों और नौकरियों की जानकारी पाएं।
नेशनल करियर सर्विस पोर्टल: केंद्र सरकार के इस पोर्टल पर नौकरियां और करियर काउंसलिंग उपलब्ध है।
आईटीआई और कौशल केंद्र: तकनीकी कौशल सीखकर उद्योगों में नौकरी के अवसर बढ़ाएं।
अप्रेंटिसशिप: उद्योगों में प्रशिक्षण के साथ स्टाइपेंड भी मिलता है।
स्वरोजगार: मुद्रा योजना और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना जैसी योजनाओं से अपना काम शुरू करें।
फर्जी नौकरी से सावधान
नौकरी की तलाश में युवाओं को धोखाधड़ी से भी बचना चाहिए। नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे मांगने वाले, घर बैठे भारी कमाई का लालच देने वाले और सोशल मीडिया पर फर्जी ऑफर भेजने वाले ठगों से सावधान रहें। कोई भी असली कंपनी नौकरी देने के लिए पैसे नहीं मांगती। संदेह होने पर 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें।
मासिक सर्वे क्यों अहम
पहले पीएलएफएस के आंकड़े सालाना और तिमाही आधार पर आते थे। अब मासिक बुलेटिन आने से सरकार और नीति निर्माताओं को रोजगार की स्थिति की ताजा तस्वीर हर महीने मिल जाती है। इससे किसी क्षेत्र में अचानक आई मंदी या तेजी को जल्दी पहचाना जा सकता है और समय रहते कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि मासिक आंकड़ों में मौसम और त्योहारों के कारण उतार-चढ़ाव भी दिखता है, इसलिए विशेषज्ञ लंबे समय के रुझान को देखकर ही निष्कर्ष निकालने की सलाह देते हैं।
कौशल पर दें ध्यान
आज के दौर में डिग्री के साथ कौशल भी जरूरी है। कंप्यूटर, डिजिटल मार्केटिंग, डेटा एंट्री, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबिंग, वेल्डिंग, मोबाइल रिपेयरिंग, नर्सिंग और ड्राइविंग जैसे कौशल युवाओं को जल्दी रोजगार दिला सकते हैं। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत कई मुफ्त प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
निष्कर्ष
सितंबर 2026 के पीएलएफएस आंकड़े रोजगार के मोर्चे पर धीमे लेकिन सकारात्मक सुधार की ओर इशारा करते हैं। बेरोजगारी दर का 5 प्रतिशत पर आना और श्रम बल भागीदारी का बढ़ना अच्छे संकेत हैं। हालांकि शहरी बेरोजगारी और महिलाओं की कम भागीदारी अब भी बड़ी चुनौतियां हैं, जिन पर नीतिगत ध्यान देने की जरूरत है।
रोजगार, करियर और अर्थव्यवस्था की हर खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
सितंबर में बेरोजगारी दर घटकर 5%, शहरों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी
देश में रोजगार की स्थिति को लेकर नए आंकड़े आए हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने सितंबर 2026 का आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) मासिक बुलेटिन जारी किया है। इसके अनुसार देश में बेरोजगारी दर पिछले साल के मुकाबले 0.2 प्रतिशत अंक घटकर 5.0 प्रतिशत रह गई है। वहीं श्रम बल भागीदारी दर 0.2 प्रतिशत अंक बढ़कर 55.5 प्रतिशत हो गई है। यह एनएसओ का 18वां मासिक पीएलएफएस बुलेटिन है। आंकड़े बताते हैं कि रोजगार के मोर्चे पर धीमा लेकिन सकारात्मक सुधार हो रहा है।
आंकड़े एक नजर में
बेरोजगारी दर (सितंबर 2026):
कुल: 5.0 प्रतिशत
ग्रामीण: 4.2 प्रतिशत
शहरी: 6.9 प्रतिशत
पुरुष: 4.9 प्रतिशत
महिला: 5.2 प्रतिशत
श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर):
कुल: 55.5 प्रतिशत
महिला: 34.6 प्रतिशत (अगस्त में 34.8 प्रतिशत)
शहरी महिला: 25.9 प्रतिशत (पहले 25.4 प्रतिशत)
श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर):
कुल: 52.7 प्रतिशत (सितंबर 2025 में 52.4 प्रतिशत)
शहरी: 47.2 प्रतिशत
शहरी पुरुष: 71.0 प्रतिशत
शहरी महिला: 23.5 प्रतिशत
इन शब्दों का मतलब समझें
बेरोजगारी दर: काम करने के इच्छुक और काम तलाश रहे लोगों में से कितने प्रतिशत लोगों को काम नहीं मिला। 5 प्रतिशत बेरोजगारी दर का मतलब है कि काम खोज रहे हर 100 लोगों में से 5 बेरोजगार हैं।
श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर): कुल आबादी (आम तौर पर 15 वर्ष से ऊपर) में से कितने लोग काम कर रहे हैं या काम तलाश रहे हैं। यह बताता है कि कितने लोग श्रम बाजार में सक्रिय हैं।
श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर): कुल आबादी में से कितने प्रतिशत लोग वास्तव में काम कर रहे हैं।
ये आंकड़े मौजूदा साप्ताहिक स्थिति (सीडब्ल्यूएस) के आधार पर तैयार किए जाते हैं, यानी सर्वे से पहले के एक हफ्ते में व्यक्ति की काम की स्थिति के आधार पर।
शहरों में बेरोजगारी ज्यादा
आंकड़ों से साफ है कि शहरी इलाकों में बेरोजगारी दर (6.9 प्रतिशत) ग्रामीण इलाकों (4.2 प्रतिशत) से काफी ज्यादा है। इसकी एक वजह यह है कि गांवों में खेती और उससे जुड़े कामों में ज्यादातर लोग किसी न किसी रूप में लगे रहते हैं, भले ही वह काम पूरा समय या अच्छी कमाई वाला न हो। वहीं शहरों में पढ़े-लिखे युवा अपनी योग्यता के हिसाब से नौकरी तलाशते हैं और सही नौकरी न मिलने पर बेरोजगार गिने जाते हैं।
महिलाओं की भागीदारी: अच्छी और चिंताजनक खबर
शहरी महिलाओं की श्रम बल भागीदारी 25.4 से बढ़कर 25.9 प्रतिशत होना एक सकारात्मक संकेत है। इसका मतलब है कि शहरों में ज्यादा महिलाएं नौकरी या कारोबार के लिए आगे आ रही हैं। लेकिन कुल महिला भागीदारी अगस्त के 34.8 प्रतिशत से घटकर 34.6 प्रतिशत रह गई।
शहरी पुरुषों के 71 प्रतिशत के मुकाबले शहरी महिलाओं का श्रमिक जनसंख्या अनुपात केवल 23.5 प्रतिशत है। यह बड़ा अंतर बताता है कि शहरों में अब भी बड़ी संख्या में महिलाएं कामकाजी दुनिया से बाहर हैं। इसके पीछे सुरक्षा, परिवहन, बच्चों की देखभाल की सुविधा की कमी और सामाजिक कारण जैसी कई वजहें मानी जाती हैं।
युवाओं के लिए क्या संकेत
कुल बेरोजगारी दर में गिरावट अच्छी खबर है, लेकिन युवाओं, खासकर पढ़े-लिखे युवाओं में बेरोजगारी अब भी बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि डिग्री और उद्योगों की जरूरत के बीच के अंतर को कम करना जरूरी है। कौशल विकास, अप्रेंटिसशिप और व्यावसायिक प्रशिक्षण इस अंतर को भरने में मदद कर सकते हैं।
रोजगार के बढ़ते क्षेत्र
हाल के समय में कई क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं:
मैन्युफैक्चरिंग: मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो पार्ट्स उत्पादन
सेवा क्षेत्र: आईटी, बैंकिंग, बीमा और स्वास्थ्य सेवाएं
ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स: डिलीवरी, वेयरहाउस और सप्लाई चेन
पर्यटन और आतिथ्य: होटल, ट्रैवल और खान-पान
निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर: सड़क, मेट्रो और भवन निर्माण
निर्यात में हालिया तेजी से भी उद्योगों में रोजगार बढ़ने की उम्मीद है।
कानपुर के युवाओं के लिए अवसर
कानपुर औद्योगिक शहर होने के कारण यहां चमड़ा, होजरी, इंजीनियरिंग, प्लास्टिक और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में रोजगार के अवसर हैं। कानपुर मेट्रो, एक्सप्रेसवे और डिफेंस कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं से भी नए काम पैदा हो रहे हैं। शहर के युवा इन तरीकों से रोजगार की तलाश में मदद ले सकते हैं:
सेवायोजन पोर्टल: उत्तर प्रदेश सरकार के सेवायोजन पोर्टल पर पंजीकरण कर रोजगार मेलों और नौकरियों की जानकारी पाएं।
नेशनल करियर सर्विस पोर्टल: केंद्र सरकार के इस पोर्टल पर नौकरियां और करियर काउंसलिंग उपलब्ध है।
आईटीआई और कौशल केंद्र: तकनीकी कौशल सीखकर उद्योगों में नौकरी के अवसर बढ़ाएं।
अप्रेंटिसशिप: उद्योगों में प्रशिक्षण के साथ स्टाइपेंड भी मिलता है।
स्वरोजगार: मुद्रा योजना और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना जैसी योजनाओं से अपना काम शुरू करें।
फर्जी नौकरी से सावधान
नौकरी की तलाश में युवाओं को धोखाधड़ी से भी बचना चाहिए। नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे मांगने वाले, घर बैठे भारी कमाई का लालच देने वाले और सोशल मीडिया पर फर्जी ऑफर भेजने वाले ठगों से सावधान रहें। कोई भी असली कंपनी नौकरी देने के लिए पैसे नहीं मांगती। संदेह होने पर 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें।
मासिक सर्वे क्यों अहम
पहले पीएलएफएस के आंकड़े सालाना और तिमाही आधार पर आते थे। अब मासिक बुलेटिन आने से सरकार और नीति निर्माताओं को रोजगार की स्थिति की ताजा तस्वीर हर महीने मिल जाती है। इससे किसी क्षेत्र में अचानक आई मंदी या तेजी को जल्दी पहचाना जा सकता है और समय रहते कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि मासिक आंकड़ों में मौसम और त्योहारों के कारण उतार-चढ़ाव भी दिखता है, इसलिए विशेषज्ञ लंबे समय के रुझान को देखकर ही निष्कर्ष निकालने की सलाह देते हैं।
कौशल पर दें ध्यान
आज के दौर में डिग्री के साथ कौशल भी जरूरी है। कंप्यूटर, डिजिटल मार्केटिंग, डेटा एंट्री, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबिंग, वेल्डिंग, मोबाइल रिपेयरिंग, नर्सिंग और ड्राइविंग जैसे कौशल युवाओं को जल्दी रोजगार दिला सकते हैं। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत कई मुफ्त प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
निष्कर्ष
सितंबर 2026 के पीएलएफएस आंकड़े रोजगार के मोर्चे पर धीमे लेकिन सकारात्मक सुधार की ओर इशारा करते हैं। बेरोजगारी दर का 5 प्रतिशत पर आना और श्रम बल भागीदारी का बढ़ना अच्छे संकेत हैं। हालांकि शहरी बेरोजगारी और महिलाओं की कम भागीदारी अब भी बड़ी चुनौतियां हैं, जिन पर नीतिगत ध्यान देने की जरूरत है।
रोजगार, करियर और अर्थव्यवस्था की हर खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
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