कानपुर कैंट में अतिक्रमण हटा, अगले ही दिन फिर सजी दुकानें: छह दिन में 250 अतिक्रमण हटाए, जयपुरिया पुल पर लगा जाम; अगले हफ्ते फिर चलेगा बुलडोजर
Encroachments Return a Day After Removal in Kanpur Cantonment: 250 Cleared in Six Days, Traffic Jam at Jaipuria Bridge
Kanpur Live News Desk ·

मुख्य बातें:
छावनी परिषद ने छह दिन के अभियान में कैंट क्षेत्र से कानपुर सेंट्रल स्टेशन तक करीब 250 छोटे-बड़े अतिक्रमण हटाए।
सोमवार को पनचक्की चौराहे से जयपुरिया पुल और झाड़ी बाबा पड़ाव से वीरेंद्र स्वरूप स्कूल तक करीब 40 अतिक्रमण हटाए गए।
मंगलवार को इन्हीं जगहों पर फिर से दुकानें सज गईं, जिससे दिनभर जाम लगा रहा।
कुछ बंगलों के बाहर की लोहे की ग्रिल भी तोड़ी गईं। निवासियों ने बिना नोटिस कार्रवाई का आरोप लगाया।
छावनी परिषद के नामित सदस्य के अनुसार अगले हफ्ते फिर बुलडोजर कार्रवाई होगी।
कानपुर में अतिक्रमण हटाओ अभियान और अतिक्रमणकारियों के बीच "चूहे-बिल्ली" का खेल एक बार फिर देखने को मिला। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार छावनी परिषद (कैंटोनमेंट बोर्ड) ने सोमवार को जिन इलाकों से अतिक्रमण हटाया था, वहां मंगलवार को ही फिर से दुकानें सज गईं। नतीजा यह हुआ कि सड़कें फिर संकरी हो गईं और दिनभर जाम की स्थिति बनी रही।
छह दिन में 250 अतिक्रमण हटाए
रिपोर्टों के अनुसार छावनी परिषद ने छह दिन तक चले अभियान में कैंट क्षेत्र से लेकर कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन तक करीब 250 छोटे-बड़े अवैध अतिक्रमण हटाए:
8 अक्टूबर: फेथफुलगंज रोड पर मीरपुर से कानपुर रेलवे स्टेशन तक करीब 210 अतिक्रमण हटाए गए।
सोमवार (12 अक्टूबर): पनचक्की चौराहे से जयपुरिया पुल तक और झाड़ी बाबा पड़ाव से वीरेंद्र स्वरूप स्कूल तक करीब 40 अतिक्रमण हटाए गए।
अगले ही दिन लौट आए अतिक्रमणकारी
अभियान के अगले ही दिन, यानी मंगलवार को, हालात फिर पहले जैसे हो गए:
झाड़ी बाबा पुल: पुल के पास फिर से अतिक्रमण हो गया।
जयपुरिया पुल: पुल के पास फूल और माला की दुकानें फिर लग गईं।
जयपुरिया पुल पर लगा जाम
रिपोर्टों के अनुसार मंगलवार को जयपुरिया पुल से उतरने वाले वाहनों के कारण दोनों लेन में जाम लग गया। वाहनों की कतार पुल तक पहुंच गई। करीब आधे घंटे तक जाम लगा रहा, जिसमें वीरेंद्र स्वरूप स्कूल के बच्चे भी फंसे। मौके पर केवल दो ट्रैफिक पुलिसकर्मी मौजूद थे, जिन्हें व्यवस्था संभालने में मुश्किल हुई।
बंगलों की ग्रिल तोड़ने पर नाराजगी
सोमवार की कार्रवाई में कई बंगलों के बाहर लगी लोहे की ग्रिल भी तोड़ी गईं। रिपोर्टों के अनुसार निवासियों ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई बिना नोटिस दिए की गई। इस मुद्दे पर छावनी परिषद का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।
टैगोर रोड पर बनेगा फुटपाथ
रिपोर्टों के अनुसार हादसों पर रोक लगाने के लिए टैगोर रोड पर 10 दिन के भीतर फुटपाथ बनाया जाएगा। फुटपाथ बनने से पैदल चलने वालों को सड़क पर चलने की मजबूरी नहीं रहेगी और दुर्घटनाओं का खतरा कम होगा।
अगले हफ्ते फिर चलेगा बुलडोजर
छावनी परिषद के नामित सदस्य लखन लाल ओमर ने बताया कि अगले हफ्ते फिर से बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी। यानी अभियान अभी जारी रहेगा।
छावनी परिषद क्या है?
छावनी परिषद (कैंटोनमेंट बोर्ड) सेना के छावनी क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन चलाने वाली संस्था होती है। यह रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करती है। कानपुर कैंट क्षेत्र में सड़क, सफाई, पानी, स्ट्रीट लाइट और अतिक्रमण जैसे नागरिक मामलों की जिम्मेदारी छावनी परिषद के पास है, जबकि शहर के बाकी हिस्सों में यह काम नगर निगम करता है।
बार-बार क्यों लौटता है अतिक्रमण?
अतिक्रमण हटने के बाद दोबारा लौटने की कई वजहें होती हैं:
रोजी-रोटी का सवाल: सड़क किनारे दुकान लगाने वाले कई छोटे दुकानदारों के पास रोजगार का कोई दूसरा साधन नहीं होता।
वैकल्पिक जगह की कमी: उन्हें दुकान लगाने के लिए कोई तय वेंडिंग जोन नहीं मिलता।
निगरानी की कमी: अभियान के बाद लगातार निगरानी न होने से अतिक्रमणकारी फिर लौट आते हैं।
त्योहारों की मांग: नवरात्र के दौरान फूल, माला और पूजा सामग्री की मांग बढ़ जाती है।
स्ट्रीट वेंडर कानून क्या कहता है?
पथ विक्रेता (जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 के तहत शहरों में रेहड़ी-पटरी वालों के लिए वेंडिंग जोन तय करने और उनका सर्वे कर पहचान पत्र जारी करने का प्रावधान है। इसका मकसद यह है कि छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी भी चले और सड़कें भी जाम न हों। जानकारों का मानना है कि जब तक तय वेंडिंग जोन नहीं बनेंगे, तब तक अतिक्रमण की समस्या का स्थायी हल मुश्किल है।
आम लोगों की परेशानी
अतिक्रमण से सबसे ज्यादा परेशानी पैदल चलने वालों, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और एंबुलेंस जैसे आपात वाहनों को होती है। संकरी सड़कों पर जाम लगने से समय और ईंधन दोनों बर्बाद होते हैं। रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों को भी ट्रेन छूटने का डर रहता है।
दुकानदारों का पक्ष
सड़क किनारे फूल-माला और छोटा सामान बेचने वाले कई दुकानदारों का कहना है कि नवरात्र के दिनों में ही उनकी सबसे ज्यादा बिक्री होती है और इसी कमाई से परिवार का खर्च चलता है। उनकी मांग है कि प्रशासन उन्हें हटाने से पहले कोई वैकल्पिक जगह दे, जहां वे बिना डर के दुकान लगा सकें। दूसरी ओर, राहगीरों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क पर दुकानें लगने से रोज जाम लगता है और हादसों का खतरा बना रहता है। दोनों पक्षों की बात में दम है, इसलिए संतुलित समाधान की जरूरत है।
क्या हो सकता है स्थायी समाधान?
तय वेंडिंग जोन बनाकर पटरी दुकानदारों को वहां शिफ्ट किया जाए।
अभियान के बाद कुछ दिनों तक नियमित निगरानी हो।
अतिक्रमण की जगहों पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती बढ़ाई जाए।
कार्रवाई से पहले स्पष्ट नोटिस और समय सीमा दी जाए।
फुटपाथों को पैदल चलने वालों के लिए खाली रखा जाए।
kanpur.live की राय
अतिक्रमण हटाना जरूरी है, लेकिन अगले ही दिन उसका लौट आना बताता है कि केवल बुलडोजर काफी नहीं है। लगातार निगरानी, वैकल्पिक वेंडिंग जोन और पारदर्शी नोटिस प्रक्रिया से ही स्थायी समाधान निकल सकता है। हम इस अभियान से जुड़ी आगे की जानकारी देते रहेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. छह दिन में कितने अतिक्रमण हटाए गए? करीब 250।
प्रश्न 2. 8 अक्टूबर को कहां कार्रवाई हुई? फेथफुलगंज रोड पर मीरपुर से कानपुर रेलवे स्टेशन तक, करीब 210 अतिक्रमण हटाए गए।
प्रश्न 3. अतिक्रमण फिर कहां लौटा? झाड़ी बाबा पुल और जयपुरिया पुल के पास।
प्रश्न 4. जाम कितनी देर लगा? करीब आधे घंटे।
प्रश्न 5. टैगोर रोड पर क्या बनेगा? 10 दिन में फुटपाथ।
प्रश्न 6. अगली कार्रवाई कब होगी? छावनी परिषद के नामित सदस्य के अनुसार अगले हफ्ते।
प्रश्न 7. सोमवार को कितने अतिक्रमण हटाए गए थे? करीब 40, पनचक्की चौराहे से जयपुरिया पुल और झाड़ी बाबा पड़ाव से वीरेंद्र स्वरूप स्कूल तक।
स्रोत: छावनी परिषद से जुड़े लोगों के बयानों पर आधारित स्थानीय रिपोर्ट, 13 अक्टूबर 2026।
कानपुर कैंट में अतिक्रमण हटा, अगले ही दिन फिर सजी दुकानें: छह दिन में 250 अतिक्रमण हटाए, जयपुरिया पुल पर लगा जाम; अगले हफ्ते फिर चलेगा बुलडोजर
मुख्य बातें:
छावनी परिषद ने छह दिन के अभियान में कैंट क्षेत्र से कानपुर सेंट्रल स्टेशन तक करीब 250 छोटे-बड़े अतिक्रमण हटाए।
सोमवार को पनचक्की चौराहे से जयपुरिया पुल और झाड़ी बाबा पड़ाव से वीरेंद्र स्वरूप स्कूल तक करीब 40 अतिक्रमण हटाए गए।
मंगलवार को इन्हीं जगहों पर फिर से दुकानें सज गईं, जिससे दिनभर जाम लगा रहा।
कुछ बंगलों के बाहर की लोहे की ग्रिल भी तोड़ी गईं। निवासियों ने बिना नोटिस कार्रवाई का आरोप लगाया।
छावनी परिषद के नामित सदस्य के अनुसार अगले हफ्ते फिर बुलडोजर कार्रवाई होगी।
कानपुर में अतिक्रमण हटाओ अभियान और अतिक्रमणकारियों के बीच "चूहे-बिल्ली" का खेल एक बार फिर देखने को मिला। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार छावनी परिषद (कैंटोनमेंट बोर्ड) ने सोमवार को जिन इलाकों से अतिक्रमण हटाया था, वहां मंगलवार को ही फिर से दुकानें सज गईं। नतीजा यह हुआ कि सड़कें फिर संकरी हो गईं और दिनभर जाम की स्थिति बनी रही।
छह दिन में 250 अतिक्रमण हटाए
रिपोर्टों के अनुसार छावनी परिषद ने छह दिन तक चले अभियान में कैंट क्षेत्र से लेकर कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन तक करीब 250 छोटे-बड़े अवैध अतिक्रमण हटाए:
8 अक्टूबर: फेथफुलगंज रोड पर मीरपुर से कानपुर रेलवे स्टेशन तक करीब 210 अतिक्रमण हटाए गए।
सोमवार (12 अक्टूबर): पनचक्की चौराहे से जयपुरिया पुल तक और झाड़ी बाबा पड़ाव से वीरेंद्र स्वरूप स्कूल तक करीब 40 अतिक्रमण हटाए गए।
अगले ही दिन लौट आए अतिक्रमणकारी
अभियान के अगले ही दिन, यानी मंगलवार को, हालात फिर पहले जैसे हो गए:
झाड़ी बाबा पुल: पुल के पास फिर से अतिक्रमण हो गया।
जयपुरिया पुल: पुल के पास फूल और माला की दुकानें फिर लग गईं।
जयपुरिया पुल पर लगा जाम
रिपोर्टों के अनुसार मंगलवार को जयपुरिया पुल से उतरने वाले वाहनों के कारण दोनों लेन में जाम लग गया। वाहनों की कतार पुल तक पहुंच गई। करीब आधे घंटे तक जाम लगा रहा, जिसमें वीरेंद्र स्वरूप स्कूल के बच्चे भी फंसे। मौके पर केवल दो ट्रैफिक पुलिसकर्मी मौजूद थे, जिन्हें व्यवस्था संभालने में मुश्किल हुई।
बंगलों की ग्रिल तोड़ने पर नाराजगी
सोमवार की कार्रवाई में कई बंगलों के बाहर लगी लोहे की ग्रिल भी तोड़ी गईं। रिपोर्टों के अनुसार निवासियों ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई बिना नोटिस दिए की गई। इस मुद्दे पर छावनी परिषद का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।
टैगोर रोड पर बनेगा फुटपाथ
रिपोर्टों के अनुसार हादसों पर रोक लगाने के लिए टैगोर रोड पर 10 दिन के भीतर फुटपाथ बनाया जाएगा। फुटपाथ बनने से पैदल चलने वालों को सड़क पर चलने की मजबूरी नहीं रहेगी और दुर्घटनाओं का खतरा कम होगा।
अगले हफ्ते फिर चलेगा बुलडोजर
छावनी परिषद के नामित सदस्य लखन लाल ओमर ने बताया कि अगले हफ्ते फिर से बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी। यानी अभियान अभी जारी रहेगा।
छावनी परिषद क्या है?
छावनी परिषद (कैंटोनमेंट बोर्ड) सेना के छावनी क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन चलाने वाली संस्था होती है। यह रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करती है। कानपुर कैंट क्षेत्र में सड़क, सफाई, पानी, स्ट्रीट लाइट और अतिक्रमण जैसे नागरिक मामलों की जिम्मेदारी छावनी परिषद के पास है, जबकि शहर के बाकी हिस्सों में यह काम नगर निगम करता है।
बार-बार क्यों लौटता है अतिक्रमण?
अतिक्रमण हटने के बाद दोबारा लौटने की कई वजहें होती हैं:
रोजी-रोटी का सवाल: सड़क किनारे दुकान लगाने वाले कई छोटे दुकानदारों के पास रोजगार का कोई दूसरा साधन नहीं होता।
वैकल्पिक जगह की कमी: उन्हें दुकान लगाने के लिए कोई तय वेंडिंग जोन नहीं मिलता।
निगरानी की कमी: अभियान के बाद लगातार निगरानी न होने से अतिक्रमणकारी फिर लौट आते हैं।
त्योहारों की मांग: नवरात्र के दौरान फूल, माला और पूजा सामग्री की मांग बढ़ जाती है।
स्ट्रीट वेंडर कानून क्या कहता है?
पथ विक्रेता (जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 के तहत शहरों में रेहड़ी-पटरी वालों के लिए वेंडिंग जोन तय करने और उनका सर्वे कर पहचान पत्र जारी करने का प्रावधान है। इसका मकसद यह है कि छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी भी चले और सड़कें भी जाम न हों। जानकारों का मानना है कि जब तक तय वेंडिंग जोन नहीं बनेंगे, तब तक अतिक्रमण की समस्या का स्थायी हल मुश्किल है।
आम लोगों की परेशानी
अतिक्रमण से सबसे ज्यादा परेशानी पैदल चलने वालों, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और एंबुलेंस जैसे आपात वाहनों को होती है। संकरी सड़कों पर जाम लगने से समय और ईंधन दोनों बर्बाद होते हैं। रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों को भी ट्रेन छूटने का डर रहता है।
दुकानदारों का पक्ष
सड़क किनारे फूल-माला और छोटा सामान बेचने वाले कई दुकानदारों का कहना है कि नवरात्र के दिनों में ही उनकी सबसे ज्यादा बिक्री होती है और इसी कमाई से परिवार का खर्च चलता है। उनकी मांग है कि प्रशासन उन्हें हटाने से पहले कोई वैकल्पिक जगह दे, जहां वे बिना डर के दुकान लगा सकें। दूसरी ओर, राहगीरों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क पर दुकानें लगने से रोज जाम लगता है और हादसों का खतरा बना रहता है। दोनों पक्षों की बात में दम है, इसलिए संतुलित समाधान की जरूरत है।
क्या हो सकता है स्थायी समाधान?
तय वेंडिंग जोन बनाकर पटरी दुकानदारों को वहां शिफ्ट किया जाए।
अभियान के बाद कुछ दिनों तक नियमित निगरानी हो।
अतिक्रमण की जगहों पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती बढ़ाई जाए।
कार्रवाई से पहले स्पष्ट नोटिस और समय सीमा दी जाए।
फुटपाथों को पैदल चलने वालों के लिए खाली रखा जाए।
kanpur.live की राय
अतिक्रमण हटाना जरूरी है, लेकिन अगले ही दिन उसका लौट आना बताता है कि केवल बुलडोजर काफी नहीं है। लगातार निगरानी, वैकल्पिक वेंडिंग जोन और पारदर्शी नोटिस प्रक्रिया से ही स्थायी समाधान निकल सकता है। हम इस अभियान से जुड़ी आगे की जानकारी देते रहेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. छह दिन में कितने अतिक्रमण हटाए गए? करीब 250।
प्रश्न 2. 8 अक्टूबर को कहां कार्रवाई हुई? फेथफुलगंज रोड पर मीरपुर से कानपुर रेलवे स्टेशन तक, करीब 210 अतिक्रमण हटाए गए।
प्रश्न 3. अतिक्रमण फिर कहां लौटा? झाड़ी बाबा पुल और जयपुरिया पुल के पास।
प्रश्न 4. जाम कितनी देर लगा? करीब आधे घंटे।
प्रश्न 5. टैगोर रोड पर क्या बनेगा? 10 दिन में फुटपाथ।
प्रश्न 6. अगली कार्रवाई कब होगी? छावनी परिषद के नामित सदस्य के अनुसार अगले हफ्ते।
प्रश्न 7. सोमवार को कितने अतिक्रमण हटाए गए थे? करीब 40, पनचक्की चौराहे से जयपुरिया पुल और झाड़ी बाबा पड़ाव से वीरेंद्र स्वरूप स्कूल तक।
स्रोत: छावनी परिषद से जुड़े लोगों के बयानों पर आधारित स्थानीय रिपोर्ट, 13 अक्टूबर 2026।
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