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आरटीओ सेवाओं में मोबाइल नंबर का सत्यापन सख्त, अब दूसरे के सिम से नहीं कर सकेंगे आवेदन

Kanpur RTO tightens mobile number verification, applications only via own-name SIM

Kanpur Live News Desk ·

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आरटीओ सेवाओं में मोबाइल नंबर का सत्यापन सख्त, अब दूसरे के सिम से नहीं कर सकेंगे आवेदन
अगर आप ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, वाहन ट्रांसफर कराने या एनओसी लेने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। परिवहन विभाग ने ऑनलाइन सेवाओं में मोबाइल नंबर से जुड़ा बड़ा बदलाव किया है। अब किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड सिम से आवेदन करना संभव नहीं होगा। फर्जीवाड़ा रोकने के लिए नई व्यवस्था वाहन खरीद-बिक्री और आरटीओ की ऑनलाइन सेवाओं में धोखाधड़ी रोकने के लिए परिवहन विभाग ने मोबाइल नंबर सत्यापन को सख्त कर दिया है। अब डीएल, वाहन ट्रांसफर, एनओसी समेत 50 से ज्यादा ऑनलाइन सेवाओं में मोबाइल नंबर की जांच दूरसंचार विभाग के रिकॉर्ड से होगी, और परिवहन पोर्टल को दूरसंचार विभाग की टीएएफसीओपी व्यवस्था से जोड़ा गया है। टीएएफसीओपी क्या है टीएएफसीओपी (Telecom Analytics for Fraud Management and Consumer Protection) दूरसंचार विभाग की एक व्यवस्था है, जिसके जरिये यह पता लगाया जा सकता है कि कोई मोबाइल नंबर किसके नाम पर रजिस्टर्ड है। आम लोग भी इसके पोर्टल पर जाकर देख सकते हैं कि उनके पहचान पत्र पर कितने मोबाइल कनेक्शन चल रहे हैं। अब इसी रिकॉर्ड को परिवहन सेवाओं से जोड़ दिया गया है। नाम मेल नहीं खाया तो नहीं आएगा ओटीपी आवेदन के समय मोबाइल नंबर के मालिकाना हक की जांच होगी। अगर दस्तावेजों में दर्ज नाम और मोबाइल कनेक्शन के नाम में अंतर मिला, तो ओटीपी नहीं आएगा और आवेदन आगे नहीं बढ़ेगा। इसका सीधा मतलब है कि अब परिवार के किसी सदस्य, दोस्त या एजेंट के मोबाइल नंबर से आपका आवेदन पूरा नहीं होगा। अब तक बहुत से लोग सुविधा के लिए दलालों या दूसरे लोगों के नंबर का इस्तेमाल कर लेते थे, जिससे धोखाधड़ी की गुंजाइश बनती थी। आरआई ने दी सलाह आरआई संतोष कुमार के मुताबिक वाहन स्वामी अब किसी दूसरे व्यक्ति का मोबाइल नंबर इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। विभाग ने सलाह दी है कि लोग अपने नाम पर रजिस्टर्ड सिम का ही इस्तेमाल करें, आरसी और डीएल जैसे दस्तावेजों में नाम की स्पेलिंग सही रखें, जरूरत पड़ने पर मोबाइल रिकॉर्ड पहले ठीक कराएं और ट्रांसफर या एनओसी से पहले नंबर का स्वामित्व जांच लें। आवेदन से पहले ये काम जरूर करें मोबाइल नंबर किसके नाम पर है, जांचें: अगर सिम परिवार के किसी दूसरे सदस्य के नाम पर है, तो अपने नाम पर नया कनेक्शन लें या मौजूदा कनेक्शन अपने नाम ट्रांसफर कराएं। नाम की स्पेलिंग मिलाएं: आधार, डीएल, आरसी और सिम रिकॉर्ड में नाम एक जैसा होना चाहिए। छोटा-सा अंतर भी दिक्कत दे सकता है। आधार से लिंक मोबाइल अपडेट रखें: कई सेवाओं में आधार आधारित सत्यापन होता है। पुराना वाहन खरीदते समय सावधानी: विक्रेता का मोबाइल नंबर उसके नाम पर हो, यह सुनिश्चित करें, ताकि ट्रांसफर प्रक्रिया में अड़चन न आए। किन सेवाओं पर पड़ेगा असर नई व्यवस्था 50 से अधिक ऑनलाइन सेवाओं पर लागू है। इनमें आम तौर पर इस्तेमाल होने वाली सेवाएं शामिल हैं, जैसे नया ड्राइविंग लाइसेंस और लर्निंग लाइसेंस, डीएल का नवीनीकरण और डुप्लीकेट डीएल, वाहन का स्वामित्व ट्रांसफर, दूसरे राज्य या जिले के लिए एनओसी, और पते में बदलाव। किसी खास सेवा को लेकर संदेह हो, तो आरटीओ कार्यालय या परिवहन विभाग के आधिकारिक पोर्टल से जानकारी लें। आम लोगों को क्या फायदा पहली नजर में यह नियम थोड़ा सख्त लग सकता है, लेकिन इसका मकसद आम लोगों की सुरक्षा है। कई बार धोखेबाज किसी और के वाहन को फर्जी तरीके से अपने नाम ट्रांसफर करा लेते थे या फर्जी एनओसी हासिल कर लेते थे। मोबाइल नंबर का स्वामित्व जांचने से ऐसे मामलों पर रोक लगेगी। वाहन मालिक को हर बदलाव की सूचना सीधे अपने नंबर पर मिलेगी। दलालों से बचें आरटीओ से जुड़े काम के लिए दलालों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। ज्यादातर सेवाएं अब ऑनलाइन उपलब्ध हैं। आवेदन खुद करें या अधिकृत जनसेवा केंद्र की मदद लें। अपना ओटीपी किसी के साथ साझा न करें, चाहे वह खुद को विभाग का कर्मचारी क्यों न बताए। साइबर ठगी से सावधान नई व्यवस्था की आड़ में ठग भी सक्रिय हो सकते हैं। "आपका डीएल ब्लॉक हो जाएगा" या "मोबाइल वेरिफिकेशन के लिए लिंक पर क्लिक करें" जैसे संदेशों पर भरोसा न करें। परिवहन विभाग किसी अनजान लिंक के जरिये सत्यापन नहीं कराता। संदेह होने पर साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें। परिवहन और आरटीओ से जुड़ी हर जरूरी अपडेट के लिए कानपुर लाइव पढ़ते रहें।

आरटीओ सेवाओं में मोबाइल नंबर का सत्यापन सख्त, अब दूसरे के सिम से नहीं कर सकेंगे आवेदन

अगर आप ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, वाहन ट्रांसफर कराने या एनओसी लेने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। परिवहन विभाग ने ऑनलाइन सेवाओं में मोबाइल नंबर से जुड़ा बड़ा बदलाव किया है। अब किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड सिम से आवेदन करना संभव नहीं होगा। फर्जीवाड़ा रोकने के लिए नई व्यवस्था वाहन खरीद-बिक्री और आरटीओ की ऑनलाइन सेवाओं में धोखाधड़ी रोकने के लिए परिवहन विभाग ने मोबाइल नंबर सत्यापन को सख्त कर दिया है। अब डीएल, वाहन ट्रांसफर, एनओसी समेत 50 से ज्यादा ऑनलाइन सेवाओं में मोबाइल नंबर की जांच दूरसंचार विभाग के रिकॉर्ड से होगी, और परिवहन पोर्टल को दूरसंचार विभाग की टीएएफसीओपी व्यवस्था से जोड़ा गया है। टीएएफसीओपी क्या है टीएएफसीओपी (Telecom Analytics for Fraud Management and Consumer Protection) दूरसंचार विभाग की एक व्यवस्था है, जिसके जरिये यह पता लगाया जा सकता है कि कोई मोबाइल नंबर किसके नाम पर रजिस्टर्ड है। आम लोग भी इसके पोर्टल पर जाकर देख सकते हैं कि उनके पहचान पत्र पर कितने मोबाइल कनेक्शन चल रहे हैं। अब इसी रिकॉर्ड को परिवहन सेवाओं से जोड़ दिया गया है। नाम मेल नहीं खाया तो नहीं आएगा ओटीपी आवेदन के समय मोबाइल नंबर के मालिकाना हक की जांच होगी। अगर दस्तावेजों में दर्ज नाम और मोबाइल कनेक्शन के नाम में अंतर मिला, तो ओटीपी नहीं आएगा और आवेदन आगे नहीं बढ़ेगा। इसका सीधा मतलब है कि अब परिवार के किसी सदस्य, दोस्त या एजेंट के मोबाइल नंबर से आपका आवेदन पूरा नहीं होगा। अब तक बहुत से लोग सुविधा के लिए दलालों या दूसरे लोगों के नंबर का इस्तेमाल कर लेते थे, जिससे धोखाधड़ी की गुंजाइश बनती थी। आरआई ने दी सलाह आरआई संतोष कुमार के मुताबिक वाहन स्वामी अब किसी दूसरे व्यक्ति का मोबाइल नंबर इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। विभाग ने सलाह दी है कि लोग अपने नाम पर रजिस्टर्ड सिम का ही इस्तेमाल करें, आरसी और डीएल जैसे दस्तावेजों में नाम की स्पेलिंग सही रखें, जरूरत पड़ने पर मोबाइल रिकॉर्ड पहले ठीक कराएं और ट्रांसफर या एनओसी से पहले नंबर का स्वामित्व जांच लें। आवेदन से पहले ये काम जरूर करें मोबाइल नंबर किसके नाम पर है, जांचें: अगर सिम परिवार के किसी दूसरे सदस्य के नाम पर है, तो अपने नाम पर नया कनेक्शन लें या मौजूदा कनेक्शन अपने नाम ट्रांसफर कराएं। नाम की स्पेलिंग मिलाएं: आधार, डीएल, आरसी और सिम रिकॉर्ड में नाम एक जैसा होना चाहिए। छोटा-सा अंतर भी दिक्कत दे सकता है। आधार से लिंक मोबाइल अपडेट रखें: कई सेवाओं में आधार आधारित सत्यापन होता है। पुराना वाहन खरीदते समय सावधानी: विक्रेता का मोबाइल नंबर उसके नाम पर हो, यह सुनिश्चित करें, ताकि ट्रांसफर प्रक्रिया में अड़चन न आए। किन सेवाओं पर पड़ेगा असर नई व्यवस्था 50 से अधिक ऑनलाइन सेवाओं पर लागू है। इनमें आम तौर पर इस्तेमाल होने वाली सेवाएं शामिल हैं, जैसे नया ड्राइविंग लाइसेंस और लर्निंग लाइसेंस, डीएल का नवीनीकरण और डुप्लीकेट डीएल, वाहन का स्वामित्व ट्रांसफर, दूसरे राज्य या जिले के लिए एनओसी, और पते में बदलाव। किसी खास सेवा को लेकर संदेह हो, तो आरटीओ कार्यालय या परिवहन विभाग के आधिकारिक पोर्टल से जानकारी लें। आम लोगों को क्या फायदा पहली नजर में यह नियम थोड़ा सख्त लग सकता है, लेकिन इसका मकसद आम लोगों की सुरक्षा है। कई बार धोखेबाज किसी और के वाहन को फर्जी तरीके से अपने नाम ट्रांसफर करा लेते थे या फर्जी एनओसी हासिल कर लेते थे। मोबाइल नंबर का स्वामित्व जांचने से ऐसे मामलों पर रोक लगेगी। वाहन मालिक को हर बदलाव की सूचना सीधे अपने नंबर पर मिलेगी। दलालों से बचें आरटीओ से जुड़े काम के लिए दलालों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। ज्यादातर सेवाएं अब ऑनलाइन उपलब्ध हैं। आवेदन खुद करें या अधिकृत जनसेवा केंद्र की मदद लें। अपना ओटीपी किसी के साथ साझा न करें, चाहे वह खुद को विभाग का कर्मचारी क्यों न बताए। साइबर ठगी से सावधान नई व्यवस्था की आड़ में ठग भी सक्रिय हो सकते हैं। "आपका डीएल ब्लॉक हो जाएगा" या "मोबाइल वेरिफिकेशन के लिए लिंक पर क्लिक करें" जैसे संदेशों पर भरोसा न करें। परिवहन विभाग किसी अनजान लिंक के जरिये सत्यापन नहीं कराता। संदेह होने पर साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें। परिवहन और आरटीओ से जुड़ी हर जरूरी अपडेट के लिए कानपुर लाइव पढ़ते रहें।

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