भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता लागू, भारतीय सामान को 100% शुल्क मुक्त पहुंच
India-New Zealand FTA comes into force; 100% duty-free access for Indian exports, new visa pathways
Kanpur Live News Desk ·

भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 20 अक्टूबर 2026 से लागू हो गया है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले के साथ वर्चुअल बातचीत में इसकी घोषणा की। इस समझौते के तहत भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले 100 प्रतिशत सामान को शुल्क मुक्त पहुंच मिलेगी। साथ ही भारतीय युवाओं, छात्रों और कुशल पेशेवरों के लिए न्यूजीलैंड में काम करने और पढ़ने के नए रास्ते भी खुले हैं। पीयूष गोयल ने कहा कि समझौता लागू होने से सभी बाधाएं दूर होंगी।
कब हुआ था समझौता
इस समझौते पर 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में हस्ताक्षर हुए थे। दोनों देशों के बीच इसकी बातचीत दिसंबर 2025 में पूरी हुई थी। अब सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इसे लागू कर दिया गया है। राजस्व विभाग ने सीमा शुल्क अधिनियम के तहत अधिसूचना जारी कर शुल्क दरों में जरूरी बदलाव भी कर दिए हैं।
व्यापार के मुख्य प्रावधान
भारतीय निर्यात: भारत के 100 प्रतिशत सामान को न्यूजीलैंड में बिना शुल्क के प्रवेश मिलेगा। इसमें 8,284 टैरिफ लाइनें शामिल हैं।
भारत की ओर से: भारत ने अपनी 70.03 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को उदार बनाया है, जो दोनों देशों के बीच व्यापार मूल्य का 95 प्रतिशत हिस्सा कवर करती हैं।
लक्ष्य: अगले चार-पांच वर्षों में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार लगभग दोगुना करना।
युवाओं के लिए वर्किंग हॉलिडे वीजा
समझौते का सबसे दिलचस्प हिस्सा भारतीय युवाओं के लिए वर्किंग हॉलिडे वीजा है:
न्यूजीलैंड हर साल 1,000 मल्टीपल एंट्री वर्किंग हॉलिडे वीजा देगा।
इस वीजा पर 12 महीने तक न्यूजीलैंड में रहा जा सकेगा।
18 से 30 वर्ष के ऐसे युवा पात्र होंगे, जिनके पास उच्च शिक्षा की डिग्री हो और जो कामचलाऊ अंग्रेजी जानते हों।
वीजा धारक किसी एक नियोक्ता के साथ अधिकतम छह महीने काम कर सकेंगे और चार महीने तक पढ़ाई कर सकेंगे।
न्यूजीलैंड को समझौता लागू होने के दो साल के भीतर यह व्यवस्था शुरू करनी है।
यह वीजा युवाओं को विदेश में घूमने के साथ-साथ काम का अनुभव लेने का मौका देगा।
कुशल पेशेवरों के लिए 5,000 वीजा
अस्थायी रोजगार प्रवेश के तहत एक समय में 5,000 कुशल पेशेवरों को वीजा मिल सकेगा, जो तीन साल तक के लिए मान्य होगा। इनमें से 600 स्थान खास पेशों के लिए आरक्षित हैं, जैसे:
शेफ (रसोइया)
योग प्रशिक्षक
आयुष चिकित्सक
संगीत शिक्षक
यह भारतीय संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान से जुड़े पेशेवरों के लिए बड़ा अवसर है। भारतीय खाना, योग और आयुर्वेद विदेशों में काफी लोकप्रिय हैं।
छात्रों के लिए राहत
न्यूजीलैंड पढ़ाई के लिए भारतीय छात्रों का पसंदीदा देश बनता जा रहा है। समझौते में छात्रों के लिए भी अहम प्रावधान हैं:
पढ़ाई के दौरान हफ्ते में 20 घंटे काम करने का अधिकार।
डॉक्टरेट (पीएचडी) पूरी करने वालों को चार साल तक का पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा।
रिपोर्टों के अनुसार भारतीय छात्रों की संख्या पर लगने वाली सीमा हटाने का भी प्रावधान है।
किन क्षेत्रों को होगा फायदा
शुल्क मुक्त पहुंच से भारत के कई उद्योगों को फायदा होगा। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई), कुशल रोजगार, पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र को इससे खास लाभ की उम्मीद है। भारतीय कपड़ा, चमड़ा उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, दवाएं, रत्न-आभूषण और प्रोसेस्ड फूड जैसे उत्पाद न्यूजीलैंड के बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकेंगे।
संस्कृति और पर्यटन
समझौते के एक अध्याय में सांस्कृतिक व्यापार, पारंपरिक ज्ञान और पर्यटन सहयोग को भी शामिल किया गया है। इससे दोनों देशों के बीच लोगों का आना-जाना बढ़ेगा। न्यूजीलैंड में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करते हैं।
कानपुर के लिए क्या मायने
कानपुर का चमड़ा उद्योग जूते, बैग, बेल्ट और सैडलरी जैसे उत्पादों के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। होजरी, इंजीनियरिंग और खाद्य उत्पादों में भी शहर की मजबूत पहचान है। न्यूजीलैंड में शुल्क मुक्त पहुंच से कानपुर के निर्यातकों के लिए एक नया बाजार खुला है। हालांकि न्यूजीलैंड का बाजार आकार में छोटा है, लेकिन वहां प्रीमियम उत्पादों की अच्छी मांग है।
कानपुर के युवाओं, खासकर होटल मैनेजमेंट, योग, आयुष और संगीत से जुड़े लोगों के लिए भी नए वीजा प्रावधान रोजगार के अवसर बन सकते हैं।
निर्यातक क्या करें
अपने उत्पाद की एचएस कोड के हिसाब से न्यूजीलैंड में शुल्क छूट की पुष्टि करें।
समझौते का लाभ लेने के लिए सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जरूर लें।
न्यूजीलैंड के गुणवत्ता और लेबलिंग मानकों की जानकारी जुटाएं।
एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल और वाणिज्य मंत्रालय की ओर से होने वाले जागरूकता कार्यक्रमों में हिस्सा लें।
वीजा के लिए आवेदन से पहले
वर्किंग हॉलिडे और दूसरे वीजा से जुड़ी व्यवस्था लागू होने में कुछ समय लग सकता है। आवेदन से पहले न्यूजीलैंड सरकार की आधिकारिक इमिग्रेशन वेबसाइट पर ताजा जानकारी जरूर देखें। विदेश में नौकरी दिलाने का दावा करने वाले फर्जी एजेंटों से सावधान रहें और किसी को भी पैसे देने से पहले पूरी जांच करें।
व्यापार समझौतों की कड़ी
यह समझौता भारत की उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ व्यापार समझौते कर रहा है। ब्रिटेन के साथ समझौता पहले ही लागू हो चुका है। कनाडा के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर बातचीत चल रही है, जिसे दिसंबर 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। ऐसे समझौते भारतीय उद्योग को नए बाजार देने के साथ-साथ निर्यात बढ़ाने में मदद करते हैं।
मुक्त व्यापार समझौता क्या होता है
मुक्त व्यापार समझौता दो या ज्यादा देशों के बीच ऐसा समझौता होता है, जिसमें वे एक-दूसरे के सामान पर लगने वाले आयात शुल्क को खत्म या कम कर देते हैं। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार सस्ता और आसान हो जाता है। ऐसे समझौतों में अक्सर सेवाओं, निवेश, लोगों की आवाजाही और बौद्धिक संपदा जैसे विषय भी शामिल होते हैं। हर देश अपने संवेदनशील क्षेत्रों, जैसे खेती और डेयरी, को बचाने के लिए कुछ उत्पादों को छूट से बाहर भी रख सकता है।
निष्कर्ष
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता केवल व्यापार का समझौता नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने वाला समझौता भी है। भारतीय सामान को 100 प्रतिशत शुल्क मुक्त पहुंच से निर्यातकों को फायदा होगा, वहीं वर्किंग हॉलिडे वीजा, स्किल्ड वीजा और छात्रों के लिए नए प्रावधान युवाओं के लिए नए अवसर लेकर आए हैं।
बिजनेस और अंतरराष्ट्रीय खबरों के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता लागू, भारतीय सामान को 100% शुल्क मुक्त पहुंच
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 20 अक्टूबर 2026 से लागू हो गया है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले के साथ वर्चुअल बातचीत में इसकी घोषणा की। इस समझौते के तहत भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले 100 प्रतिशत सामान को शुल्क मुक्त पहुंच मिलेगी। साथ ही भारतीय युवाओं, छात्रों और कुशल पेशेवरों के लिए न्यूजीलैंड में काम करने और पढ़ने के नए रास्ते भी खुले हैं। पीयूष गोयल ने कहा कि समझौता लागू होने से सभी बाधाएं दूर होंगी।
कब हुआ था समझौता
इस समझौते पर 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में हस्ताक्षर हुए थे। दोनों देशों के बीच इसकी बातचीत दिसंबर 2025 में पूरी हुई थी। अब सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इसे लागू कर दिया गया है। राजस्व विभाग ने सीमा शुल्क अधिनियम के तहत अधिसूचना जारी कर शुल्क दरों में जरूरी बदलाव भी कर दिए हैं।
व्यापार के मुख्य प्रावधान
भारतीय निर्यात: भारत के 100 प्रतिशत सामान को न्यूजीलैंड में बिना शुल्क के प्रवेश मिलेगा। इसमें 8,284 टैरिफ लाइनें शामिल हैं।
भारत की ओर से: भारत ने अपनी 70.03 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को उदार बनाया है, जो दोनों देशों के बीच व्यापार मूल्य का 95 प्रतिशत हिस्सा कवर करती हैं।
लक्ष्य: अगले चार-पांच वर्षों में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार लगभग दोगुना करना।
युवाओं के लिए वर्किंग हॉलिडे वीजा
समझौते का सबसे दिलचस्प हिस्सा भारतीय युवाओं के लिए वर्किंग हॉलिडे वीजा है:
न्यूजीलैंड हर साल 1,000 मल्टीपल एंट्री वर्किंग हॉलिडे वीजा देगा।
इस वीजा पर 12 महीने तक न्यूजीलैंड में रहा जा सकेगा।
18 से 30 वर्ष के ऐसे युवा पात्र होंगे, जिनके पास उच्च शिक्षा की डिग्री हो और जो कामचलाऊ अंग्रेजी जानते हों।
वीजा धारक किसी एक नियोक्ता के साथ अधिकतम छह महीने काम कर सकेंगे और चार महीने तक पढ़ाई कर सकेंगे।
न्यूजीलैंड को समझौता लागू होने के दो साल के भीतर यह व्यवस्था शुरू करनी है।
यह वीजा युवाओं को विदेश में घूमने के साथ-साथ काम का अनुभव लेने का मौका देगा।
कुशल पेशेवरों के लिए 5,000 वीजा
अस्थायी रोजगार प्रवेश के तहत एक समय में 5,000 कुशल पेशेवरों को वीजा मिल सकेगा, जो तीन साल तक के लिए मान्य होगा। इनमें से 600 स्थान खास पेशों के लिए आरक्षित हैं, जैसे:
शेफ (रसोइया)
योग प्रशिक्षक
आयुष चिकित्सक
संगीत शिक्षक
यह भारतीय संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान से जुड़े पेशेवरों के लिए बड़ा अवसर है। भारतीय खाना, योग और आयुर्वेद विदेशों में काफी लोकप्रिय हैं।
छात्रों के लिए राहत
न्यूजीलैंड पढ़ाई के लिए भारतीय छात्रों का पसंदीदा देश बनता जा रहा है। समझौते में छात्रों के लिए भी अहम प्रावधान हैं:
पढ़ाई के दौरान हफ्ते में 20 घंटे काम करने का अधिकार।
डॉक्टरेट (पीएचडी) पूरी करने वालों को चार साल तक का पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा।
रिपोर्टों के अनुसार भारतीय छात्रों की संख्या पर लगने वाली सीमा हटाने का भी प्रावधान है।
किन क्षेत्रों को होगा फायदा
शुल्क मुक्त पहुंच से भारत के कई उद्योगों को फायदा होगा। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई), कुशल रोजगार, पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र को इससे खास लाभ की उम्मीद है। भारतीय कपड़ा, चमड़ा उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, दवाएं, रत्न-आभूषण और प्रोसेस्ड फूड जैसे उत्पाद न्यूजीलैंड के बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकेंगे।
संस्कृति और पर्यटन
समझौते के एक अध्याय में सांस्कृतिक व्यापार, पारंपरिक ज्ञान और पर्यटन सहयोग को भी शामिल किया गया है। इससे दोनों देशों के बीच लोगों का आना-जाना बढ़ेगा। न्यूजीलैंड में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करते हैं।
कानपुर के लिए क्या मायने
कानपुर का चमड़ा उद्योग जूते, बैग, बेल्ट और सैडलरी जैसे उत्पादों के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। होजरी, इंजीनियरिंग और खाद्य उत्पादों में भी शहर की मजबूत पहचान है। न्यूजीलैंड में शुल्क मुक्त पहुंच से कानपुर के निर्यातकों के लिए एक नया बाजार खुला है। हालांकि न्यूजीलैंड का बाजार आकार में छोटा है, लेकिन वहां प्रीमियम उत्पादों की अच्छी मांग है।
कानपुर के युवाओं, खासकर होटल मैनेजमेंट, योग, आयुष और संगीत से जुड़े लोगों के लिए भी नए वीजा प्रावधान रोजगार के अवसर बन सकते हैं।
निर्यातक क्या करें
अपने उत्पाद की एचएस कोड के हिसाब से न्यूजीलैंड में शुल्क छूट की पुष्टि करें।
समझौते का लाभ लेने के लिए सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जरूर लें।
न्यूजीलैंड के गुणवत्ता और लेबलिंग मानकों की जानकारी जुटाएं।
एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल और वाणिज्य मंत्रालय की ओर से होने वाले जागरूकता कार्यक्रमों में हिस्सा लें।
वीजा के लिए आवेदन से पहले
वर्किंग हॉलिडे और दूसरे वीजा से जुड़ी व्यवस्था लागू होने में कुछ समय लग सकता है। आवेदन से पहले न्यूजीलैंड सरकार की आधिकारिक इमिग्रेशन वेबसाइट पर ताजा जानकारी जरूर देखें। विदेश में नौकरी दिलाने का दावा करने वाले फर्जी एजेंटों से सावधान रहें और किसी को भी पैसे देने से पहले पूरी जांच करें।
व्यापार समझौतों की कड़ी
यह समझौता भारत की उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ व्यापार समझौते कर रहा है। ब्रिटेन के साथ समझौता पहले ही लागू हो चुका है। कनाडा के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर बातचीत चल रही है, जिसे दिसंबर 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। ऐसे समझौते भारतीय उद्योग को नए बाजार देने के साथ-साथ निर्यात बढ़ाने में मदद करते हैं।
मुक्त व्यापार समझौता क्या होता है
मुक्त व्यापार समझौता दो या ज्यादा देशों के बीच ऐसा समझौता होता है, जिसमें वे एक-दूसरे के सामान पर लगने वाले आयात शुल्क को खत्म या कम कर देते हैं। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार सस्ता और आसान हो जाता है। ऐसे समझौतों में अक्सर सेवाओं, निवेश, लोगों की आवाजाही और बौद्धिक संपदा जैसे विषय भी शामिल होते हैं। हर देश अपने संवेदनशील क्षेत्रों, जैसे खेती और डेयरी, को बचाने के लिए कुछ उत्पादों को छूट से बाहर भी रख सकता है।
निष्कर्ष
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता केवल व्यापार का समझौता नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने वाला समझौता भी है। भारतीय सामान को 100 प्रतिशत शुल्क मुक्त पहुंच से निर्यातकों को फायदा होगा, वहीं वर्किंग हॉलिडे वीजा, स्किल्ड वीजा और छात्रों के लिए नए प्रावधान युवाओं के लिए नए अवसर लेकर आए हैं।
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