कानपुर में फर्जी स्क्रैप सिंडिकेट पकड़ा, 262 करोड़ की बोगस सप्लाई
SGST busts fake scrap syndicate in Kanpur, ₹262 crore bogus supply detected
Kanpur Live News Desk ·

कानपुर में राज्य माल एवं सेवा कर (एसजीएसटी) विभाग ने फर्जी बिलों के जरिये टैक्स चोरी करने वाले कथित स्क्रैप सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। विभाग की 15 अफसरों की टीम ने कानपुर नगर और कानपुर देहात में सात फर्मों पर एक साथ छापेमारी की। जांच में करीब 262 करोड़ रुपये की कथित फर्जी सप्लाई और 47.05 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का मामला सामने आया है। विभाग ने करीब 10 करोड़ रुपये का आईटीसी ब्लॉक कर दिया है, संबंधित फर्मों के जीएसटी पंजीकरण रद्द कर दिए हैं और एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है।
कैसे हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई अपर आयुक्त सान्या छाबड़ा, कुमार आनंद और एसआईबी (विशेष अनुसंधान शाखा) के अपर आयुक्त प्रशांत कुमार के निर्देशन में की गई। अफसरों की टीमों ने पहले से जुटाए गए आंकड़ों और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर संदिग्ध फर्मों की पहचान की। इसके बाद एक साथ सभी ठिकानों पर पहुंचकर जांच की गई, ताकि किसी को सबूत मिटाने या रिकॉर्ड बदलने का मौका न मिले।
जांच के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने अफसरों को भी चौंका दिया। कई फर्में उन पतों पर मौजूद ही नहीं थीं, जो जीएसटी पंजीकरण में दर्ज थे। कुछ जगहों पर ऐसे लोग मिले, जिन्हें पता ही नहीं था कि उनके पते पर किसी फर्म का जीएसटी पंजीकरण कराया गया है।
10x10 की दुकान में करोड़ों का कारोबार
एक मामले में अफसर जब एक दुकान पर पहुंचे, तो वह मात्र 10 बाय 10 फुट की थी। वहां न तो कोई माल था, न गोदाम और न ही कारोबार के कोई निशान। दुकान में केवल एक मेज, दो कुर्सियां और एक फ्लेक्स बोर्ड लगा था। लेकिन कागजों में इसी फर्म के खाते में 1.38 करोड़ रुपये का आईटीसी दर्ज था। यह साफ संकेत है कि कारोबार केवल कागजों पर चल रहा था।
फर्जी आईटीसी का खेल क्या है
जीएसटी व्यवस्था में इनपुट टैक्स क्रेडिट एक अहम सुविधा है। जब कोई कारोबारी कच्चा माल या सामान खरीदता है, तो उस पर चुकाए गए टैक्स का क्रेडिट उसे मिलता है। बाद में माल बेचने पर उसे जो टैक्स देना होता है, उसमें से वह यह क्रेडिट घटा सकता है।
फर्जीवाड़ा करने वाले इसी व्यवस्था का गलत फायदा उठाते हैं। वे कागजों पर फर्में बनाते हैं और बिना असली माल की आवाजाही के केवल बिल जारी करते हैं। इन फर्जी बिलों के आधार पर दूसरी फर्में आईटीसी का दावा करती हैं और सरकार को मिलने वाला टैक्स कम हो जाता है। इसे आम भाषा में "बिल ट्रेडिंग" भी कहा जाता है। स्क्रैप यानी कबाड़ का कारोबार इस तरह के फर्जीवाड़े के लिए खास तौर पर इस्तेमाल होता है, क्योंकि इसमें माल की सही मात्रा और स्रोत का पता लगाना मुश्किल होता है।
सरकारी खजाने को चूना
जीएसटी चोरी का सीधा नुकसान सरकारी खजाने को होता है। यही पैसा सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और जनकल्याण की योजनाओं पर खर्च होना चाहिए। जब कुछ लोग फर्जी बिलों से टैक्स बचाते हैं, तो ईमानदारी से टैक्स भरने वाले कारोबारियों के साथ भी अन्याय होता है, क्योंकि उन्हें बाजार में ऐसे लोगों से अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।
आम लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग
इस मामले का एक चिंताजनक पहलू यह है कि कुछ लोगों के पते और दस्तावेजों का इस्तेमाल उनकी जानकारी के बिना फर्जी पंजीकरण में किया गया। अक्सर ऐसे गिरोह गरीब या कम पढ़े-लिखे लोगों को थोड़े पैसों का लालच देकर उनके आधार, पैन और बैंक खाते के दस्तावेज ले लेते हैं। कई बार किरायेदारी या नौकरी के नाम पर लिए गए दस्तावेजों का भी गलत इस्तेमाल हो जाता है। बाद में जब जांच होती है, तो कानूनी परेशानी उन्हीं लोगों पर आ सकती है, जिनके नाम पर फर्म दर्ज होती है।
अपने दस्तावेजों को कैसे सुरक्षित रखें:
आधार, पैन और बैंक के दस्तावेज किसी अनजान व्यक्ति को न दें।
फोटोकॉपी देते समय उस पर उद्देश्य और तारीख लिख दें।
जीएसटी पोर्टल पर अपने पैन से जुड़े पंजीकरण की जांच कर सकते हैं।
किसी संदिग्ध पंजीकरण की जानकारी मिले, तो तुरंत जीएसटी विभाग में शिकायत करें।
पैसों के लालच में अपने नाम पर फर्म खुलवाने के प्रस्ताव से दूर रहें।
विभाग की आगे की कार्रवाई
विभाग ने संबंधित फर्मों का पंजीकरण रद्द कर दिया है और करीब 10 करोड़ रुपये का आईटीसी ब्लॉक किया गया है, ताकि उसका आगे इस्तेमाल न हो सके। एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को तहरीर दी गई है। अफसरों का कहना है कि इन फर्मों से जुड़े लेनदेन की पूरी श्रृंखला की जांच की जा रही है। जिन फर्मों ने इन फर्जी बिलों के आधार पर आईटीसी का लाभ लिया है, उन पर भी कार्रवाई हो सकती है। मामले की जांच अभी जारी है, इसलिए फर्मों और उनसे जुड़े लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी कार्रवाइयां
कानपुर में फर्जी फर्मों और फर्जी आईटीसी के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। प्रदेश सरकार और जीएसटी विभाग ने टैक्स चोरी रोकने के लिए डेटा एनालिटिक्स और तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया है। ई-वे बिल, ई-इनवॉइस और रिटर्न के आंकड़ों का मिलान कर संदिग्ध लेनदेन की पहचान की जाती है। इसी तरह के विश्लेषण के आधार पर इस बार भी कार्रवाई की गई।
ईमानदार कारोबारियों के लिए संदेश
कानपुर के व्यापारी संगठनों का कहना है कि फर्जी फर्मों पर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन जांच के दौरान ईमानदार कारोबारियों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। कई बार कारोबारी अनजाने में ऐसे सप्लायर से माल खरीद लेते हैं, जो बाद में फर्जी निकलता है। ऐसे में उनका आईटीसी भी अटक जाता है।
कारोबारी इन बातों का रखें ध्यान:
नए सप्लायर से लेनदेन से पहले जीएसटी पोर्टल पर उसकी स्थिति जांचें।
देखें कि सप्लायर नियमित रूप से रिटर्न दाखिल कर रहा है या नहीं।
माल की वास्तविक आवाजाही के दस्तावेज, जैसे ई-वे बिल और ट्रांसपोर्ट बिल, संभालकर रखें।
भुगतान बैंकिंग माध्यम से करें, नकद लेनदेन से बचें।
बहुत सस्ते दाम पर बिल देने वाले प्रस्तावों से सावधान रहें।
निष्कर्ष
कानपुर में पकड़ा गया यह कथित फर्जी स्क्रैप सिंडिकेट दिखाता है कि टैक्स चोरी करने वाले किस तरह कागजी फर्मों का जाल बुनते हैं। एसजीएसटी विभाग की इस कार्रवाई से ऐसे गिरोहों पर लगाम लगने की उम्मीद है। साथ ही यह आम लोगों के लिए भी चेतावनी है कि अपने दस्तावेजों को सुरक्षित रखें, ताकि कोई उनका गलत इस्तेमाल न कर सके। जांच आगे बढ़ने पर और खुलासे होने की संभावना है।
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कानपुर में फर्जी स्क्रैप सिंडिकेट पकड़ा, 262 करोड़ की बोगस सप्लाई
कानपुर में राज्य माल एवं सेवा कर (एसजीएसटी) विभाग ने फर्जी बिलों के जरिये टैक्स चोरी करने वाले कथित स्क्रैप सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। विभाग की 15 अफसरों की टीम ने कानपुर नगर और कानपुर देहात में सात फर्मों पर एक साथ छापेमारी की। जांच में करीब 262 करोड़ रुपये की कथित फर्जी सप्लाई और 47.05 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का मामला सामने आया है। विभाग ने करीब 10 करोड़ रुपये का आईटीसी ब्लॉक कर दिया है, संबंधित फर्मों के जीएसटी पंजीकरण रद्द कर दिए हैं और एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है।
कैसे हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई अपर आयुक्त सान्या छाबड़ा, कुमार आनंद और एसआईबी (विशेष अनुसंधान शाखा) के अपर आयुक्त प्रशांत कुमार के निर्देशन में की गई। अफसरों की टीमों ने पहले से जुटाए गए आंकड़ों और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर संदिग्ध फर्मों की पहचान की। इसके बाद एक साथ सभी ठिकानों पर पहुंचकर जांच की गई, ताकि किसी को सबूत मिटाने या रिकॉर्ड बदलने का मौका न मिले।
जांच के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने अफसरों को भी चौंका दिया। कई फर्में उन पतों पर मौजूद ही नहीं थीं, जो जीएसटी पंजीकरण में दर्ज थे। कुछ जगहों पर ऐसे लोग मिले, जिन्हें पता ही नहीं था कि उनके पते पर किसी फर्म का जीएसटी पंजीकरण कराया गया है।
10x10 की दुकान में करोड़ों का कारोबार
एक मामले में अफसर जब एक दुकान पर पहुंचे, तो वह मात्र 10 बाय 10 फुट की थी। वहां न तो कोई माल था, न गोदाम और न ही कारोबार के कोई निशान। दुकान में केवल एक मेज, दो कुर्सियां और एक फ्लेक्स बोर्ड लगा था। लेकिन कागजों में इसी फर्म के खाते में 1.38 करोड़ रुपये का आईटीसी दर्ज था। यह साफ संकेत है कि कारोबार केवल कागजों पर चल रहा था।
फर्जी आईटीसी का खेल क्या है
जीएसटी व्यवस्था में इनपुट टैक्स क्रेडिट एक अहम सुविधा है। जब कोई कारोबारी कच्चा माल या सामान खरीदता है, तो उस पर चुकाए गए टैक्स का क्रेडिट उसे मिलता है। बाद में माल बेचने पर उसे जो टैक्स देना होता है, उसमें से वह यह क्रेडिट घटा सकता है।
फर्जीवाड़ा करने वाले इसी व्यवस्था का गलत फायदा उठाते हैं। वे कागजों पर फर्में बनाते हैं और बिना असली माल की आवाजाही के केवल बिल जारी करते हैं। इन फर्जी बिलों के आधार पर दूसरी फर्में आईटीसी का दावा करती हैं और सरकार को मिलने वाला टैक्स कम हो जाता है। इसे आम भाषा में "बिल ट्रेडिंग" भी कहा जाता है। स्क्रैप यानी कबाड़ का कारोबार इस तरह के फर्जीवाड़े के लिए खास तौर पर इस्तेमाल होता है, क्योंकि इसमें माल की सही मात्रा और स्रोत का पता लगाना मुश्किल होता है।
सरकारी खजाने को चूना
जीएसटी चोरी का सीधा नुकसान सरकारी खजाने को होता है। यही पैसा सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और जनकल्याण की योजनाओं पर खर्च होना चाहिए। जब कुछ लोग फर्जी बिलों से टैक्स बचाते हैं, तो ईमानदारी से टैक्स भरने वाले कारोबारियों के साथ भी अन्याय होता है, क्योंकि उन्हें बाजार में ऐसे लोगों से अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।
आम लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग
इस मामले का एक चिंताजनक पहलू यह है कि कुछ लोगों के पते और दस्तावेजों का इस्तेमाल उनकी जानकारी के बिना फर्जी पंजीकरण में किया गया। अक्सर ऐसे गिरोह गरीब या कम पढ़े-लिखे लोगों को थोड़े पैसों का लालच देकर उनके आधार, पैन और बैंक खाते के दस्तावेज ले लेते हैं। कई बार किरायेदारी या नौकरी के नाम पर लिए गए दस्तावेजों का भी गलत इस्तेमाल हो जाता है। बाद में जब जांच होती है, तो कानूनी परेशानी उन्हीं लोगों पर आ सकती है, जिनके नाम पर फर्म दर्ज होती है।
अपने दस्तावेजों को कैसे सुरक्षित रखें:
आधार, पैन और बैंक के दस्तावेज किसी अनजान व्यक्ति को न दें।
फोटोकॉपी देते समय उस पर उद्देश्य और तारीख लिख दें।
जीएसटी पोर्टल पर अपने पैन से जुड़े पंजीकरण की जांच कर सकते हैं।
किसी संदिग्ध पंजीकरण की जानकारी मिले, तो तुरंत जीएसटी विभाग में शिकायत करें।
पैसों के लालच में अपने नाम पर फर्म खुलवाने के प्रस्ताव से दूर रहें।
विभाग की आगे की कार्रवाई
विभाग ने संबंधित फर्मों का पंजीकरण रद्द कर दिया है और करीब 10 करोड़ रुपये का आईटीसी ब्लॉक किया गया है, ताकि उसका आगे इस्तेमाल न हो सके। एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को तहरीर दी गई है। अफसरों का कहना है कि इन फर्मों से जुड़े लेनदेन की पूरी श्रृंखला की जांच की जा रही है। जिन फर्मों ने इन फर्जी बिलों के आधार पर आईटीसी का लाभ लिया है, उन पर भी कार्रवाई हो सकती है। मामले की जांच अभी जारी है, इसलिए फर्मों और उनसे जुड़े लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी कार्रवाइयां
कानपुर में फर्जी फर्मों और फर्जी आईटीसी के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। प्रदेश सरकार और जीएसटी विभाग ने टैक्स चोरी रोकने के लिए डेटा एनालिटिक्स और तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया है। ई-वे बिल, ई-इनवॉइस और रिटर्न के आंकड़ों का मिलान कर संदिग्ध लेनदेन की पहचान की जाती है। इसी तरह के विश्लेषण के आधार पर इस बार भी कार्रवाई की गई।
ईमानदार कारोबारियों के लिए संदेश
कानपुर के व्यापारी संगठनों का कहना है कि फर्जी फर्मों पर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन जांच के दौरान ईमानदार कारोबारियों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। कई बार कारोबारी अनजाने में ऐसे सप्लायर से माल खरीद लेते हैं, जो बाद में फर्जी निकलता है। ऐसे में उनका आईटीसी भी अटक जाता है।
कारोबारी इन बातों का रखें ध्यान:
नए सप्लायर से लेनदेन से पहले जीएसटी पोर्टल पर उसकी स्थिति जांचें।
देखें कि सप्लायर नियमित रूप से रिटर्न दाखिल कर रहा है या नहीं।
माल की वास्तविक आवाजाही के दस्तावेज, जैसे ई-वे बिल और ट्रांसपोर्ट बिल, संभालकर रखें।
भुगतान बैंकिंग माध्यम से करें, नकद लेनदेन से बचें।
बहुत सस्ते दाम पर बिल देने वाले प्रस्तावों से सावधान रहें।
निष्कर्ष
कानपुर में पकड़ा गया यह कथित फर्जी स्क्रैप सिंडिकेट दिखाता है कि टैक्स चोरी करने वाले किस तरह कागजी फर्मों का जाल बुनते हैं। एसजीएसटी विभाग की इस कार्रवाई से ऐसे गिरोहों पर लगाम लगने की उम्मीद है। साथ ही यह आम लोगों के लिए भी चेतावनी है कि अपने दस्तावेजों को सुरक्षित रखें, ताकि कोई उनका गलत इस्तेमाल न कर सके। जांच आगे बढ़ने पर और खुलासे होने की संभावना है।
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