व्हाट्सएप पर भेजा "पेंशनर कार्ड", खोलते ही मोबाइल हैक: कानपुर के बुजुर्ग के खाते से 5.40 लाख रुपये उड़ाए, बैंक प्रतिनिधि बनकर आया था फोन
Kanpur Pensioner Loses ₹5.40 Lakh After Opening "Pensioner Card" File Sent on WhatsApp by Caller Posing as Bank Representative
Kanpur Live News Desk ·

मुख्य बातें:
बाबूपुरवा कॉलोनी निवासी बुजुर्ग प्रदीप कुमार के साथ 5.40 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई।
8 अक्टूबर की शाम एक व्यक्ति ने खुद को आईसीआईसीआई बैंक का प्रतिनिधि बताकर फोन किया।
उसने व्हाट्सएप पर "सीनियर सिटीजन पेंशनर कार्ड" भेजने की बात कही।
पीड़ित के अनुसार फाइल खोलते ही उनका मोबाइल हैक हो गया और खाते से 5.40 लाख रुपये निकाल लिए गए।
पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत की और बाबूपुरवा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
साइबर ठग अब बुजुर्गों को निशाना बनाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। कानपुर में एक बुजुर्ग पेंशनर के साथ ऐसा ही मामला सामने आया है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार बैंक प्रतिनिधि बनकर फोन करने वाले एक व्यक्ति ने व्हाट्सएप पर "पेंशनर कार्ड" के नाम से फाइल भेजी। फाइल खोलते ही बुजुर्ग का मोबाइल हैक हो गया और उनके खाते से 5.40 लाख रुपये निकाल लिए गए।
कैसे हुई ठगी?
रिपोर्टों के अनुसार घटनाक्रम इस प्रकार रहा:
फोन कॉल: 8 अक्टूबर की शाम बाबूपुरवा कॉलोनी निवासी प्रदीप कुमार के पास एक फोन आया।
बैंक प्रतिनिधि का दावा: फोन करने वाले ने खुद को आईसीआईसीआई बैंक का प्रतिनिधि बताया।
कार्ड का झांसा: उसने कहा कि उनके मोबाइल पर व्हाट्सएप के जरिए "सीनियर सिटीजन पेंशनर कार्ड" भेजा जा रहा है।
फाइल खोली: बुजुर्ग ने भेजी गई फाइल खोल ली।
मोबाइल हैक: पीड़ित के अनुसार फाइल खोलते ही उनका मोबाइल हैक हो गया।
रकम निकली: इसके बाद उनके खाते से कुल 5.40 लाख रुपये निकाल लिए गए।
पुलिस में शिकायत
पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और बाबूपुरवा थाने में भी एफआईआर दर्ज कराई। बाबूपुरवा थाना प्रभारी नीरज ओझा के अनुसार रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
यह ठगी का कौन सा तरीका है?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार यह "एपीके फाइल फ्रॉड" या "मालवेयर फ्रॉड" का तरीका हो सकता है। इसमें ठग:
किसी सरकारी योजना, बैंक कार्ड, बिजली बिल, शादी के कार्ड या चालान के नाम पर फाइल भेजते हैं।
यह फाइल दरअसल एक खतरनाक ऐप (एपीके) होती है।
फाइल खोलकर इंस्टॉल करते ही ठगों को मोबाइल के मैसेज, ओटीपी और दूसरी जानकारी तक पहुंच मिल जाती है।
इसके बाद वे बैंक खाते से रकम निकाल लेते हैं, कई बार पीड़ित को पता भी नहीं चलता।
बुजुर्ग क्यों बनते हैं निशाना?
पेंशन खाते में अक्सर अच्छी जमा राशि होती है।
कई बुजुर्ग नई तकनीक और ठगी के तरीकों से कम परिचित होते हैं।
बैंक या सरकारी विभाग के नाम पर आए फोन पर वे आसानी से भरोसा कर लेते हैं।
"पेंशनर कार्ड" या "जीवन प्रमाण पत्र" जैसे शब्द उन्हें असली लगते हैं।
साइबर ठगी होने पर तुरंत क्या करें?
1930 पर कॉल करें: राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें। जितनी जल्दी शिकायत होगी, रकम रोकने की संभावना उतनी ज्यादा होगी।
ऑनलाइन शिकायत: cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
बैंक को सूचना: बैंक के कस्टमर केयर पर कॉल कर खाता, डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग तुरंत ब्लॉक कराएं।
मोबाइल अलग करें: संदिग्ध फाइल खुलने के बाद मोबाइल का इंटरनेट बंद करें और फोन को फैक्टरी रीसेट कराने पर विचार करें।
पासवर्ड बदलें: किसी दूसरे सुरक्षित फोन से बैंकिंग और ईमेल के पासवर्ड बदलें।
थाने में एफआईआर: नजदीकी थाने या साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराएं।
ठगी से बचने के 10 जरूरी नियम
बैंक कभी व्हाट्सएप पर कार्ड या फाइल नहीं भेजता।
अनजान नंबर से आई .apk फाइल कभी न खोलें।
ऐप केवल गूगल प्ले स्टोर या ऐपल ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें।
फोन की सेटिंग में "अनजान स्रोत से ऐप इंस्टॉल" का विकल्प बंद रखें।
ओटीपी, पिन या पासवर्ड किसी को न बताएं।
बैंक से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए खुद बैंक की शाखा या आधिकारिक नंबर पर संपर्क करें।
स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करने को कहा जाए तो तुरंत फोन काट दें।
खाते में एसएमएस और ईमेल अलर्ट चालू रखें।
बुजुर्ग माता-पिता को ऐसी ठगी के बारे में बताएं।
डर या लालच दिखाने वाले फोन पर जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं।
परिवार की भूमिका अहम
घर के युवा सदस्य बुजुर्गों के मोबाइल में सुरक्षा सेटिंग्स ठीक कर सकते हैं और उन्हें समझा सकते हैं कि बैंक या सरकारी विभाग के नाम पर आने वाले फोन पर बिना जांचे भरोसा न करें। बुजुर्गों को यह भी बताना जरूरी है कि ठगी होने पर शर्म या डर के बिना तुरंत परिवार और पुलिस को बताएं।
हाल के दिनों में बढ़े ऐसे मामले
देशभर में बैंक, बिजली विभाग, परिवहन विभाग या सरकारी योजनाओं के नाम पर फाइल भेजकर मोबाइल हैक करने के मामले बढ़े हैं। ठग कई बार "ई-चालान", "पीएम किसान", "राशन कार्ड अपडेट", "बिजली बिल बकाया" या "शादी का निमंत्रण" जैसे नाम से फाइल भेजते हैं, ताकि लोग बिना सोचे उसे खोल लें। ऐसे किसी भी संदेश को खोलने से पहले संबंधित विभाग या बैंक से खुद पुष्टि करना सबसे सुरक्षित तरीका है। अगर फाइल का नाम .apk पर खत्म होता है, तो उसे बिल्कुल न खोलें।
बैंक की जिम्मेदारी और ग्राहक के अधिकार
भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन की सूचना जल्द से जल्द बैंक को देने पर ग्राहक की देनदारी सीमित हो सकती है। इसलिए ठगी का पता चलते ही बैंक को लिखित रूप में सूचना देना और उसकी पावती लेना जरूरी है।
kanpur.live की राय
साइबर ठगी का यह मामला बताता है कि एक फाइल खोलना भी जीवनभर की जमा पूंजी पर भारी पड़ सकता है। जागरूकता ही इससे बचने का सबसे बड़ा हथियार है। हम पाठकों से अपील करते हैं कि यह जानकारी अपने घर के बुजुर्गों तक जरूर पहुंचाएं। पुलिस जांच से जुड़ी आगे की जानकारी हम देते रहेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. ठगी किसके साथ हुई? बाबूपुरवा कॉलोनी निवासी बुजुर्ग प्रदीप कुमार के साथ।
प्रश्न 2. कितनी रकम निकाली गई? 5.40 लाख रुपये।
प्रश्न 3. ठग ने खुद को कौन बताया? आईसीआईसीआई बैंक का प्रतिनिधि।
प्रश्न 4. फाइल किस नाम से भेजी गई? "सीनियर सिटीजन पेंशनर कार्ड"।
प्रश्न 5. फोन कब आया था? 8 अक्टूबर की शाम।
प्रश्न 6. साइबर ठगी की शिकायत किस नंबर पर करें? राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर या cybercrime.gov.in पर।
प्रश्न 7. क्या बैंक व्हाट्सएप पर कार्ड भेजता है? नहीं। ऐसी फाइल खोलने से बचें।
स्रोत: पीड़ित की शिकायत और पुलिस के बयान पर आधारित स्थानीय रिपोर्ट, 15 अक्टूबर 2026।
व्हाट्सएप पर भेजा "पेंशनर कार्ड", खोलते ही मोबाइल हैक: कानपुर के बुजुर्ग के खाते से 5.40 लाख रुपये उड़ाए, बैंक प्रतिनिधि बनकर आया था फोन
मुख्य बातें:
बाबूपुरवा कॉलोनी निवासी बुजुर्ग प्रदीप कुमार के साथ 5.40 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई।
8 अक्टूबर की शाम एक व्यक्ति ने खुद को आईसीआईसीआई बैंक का प्रतिनिधि बताकर फोन किया।
उसने व्हाट्सएप पर "सीनियर सिटीजन पेंशनर कार्ड" भेजने की बात कही।
पीड़ित के अनुसार फाइल खोलते ही उनका मोबाइल हैक हो गया और खाते से 5.40 लाख रुपये निकाल लिए गए।
पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत की और बाबूपुरवा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
साइबर ठग अब बुजुर्गों को निशाना बनाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। कानपुर में एक बुजुर्ग पेंशनर के साथ ऐसा ही मामला सामने आया है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार बैंक प्रतिनिधि बनकर फोन करने वाले एक व्यक्ति ने व्हाट्सएप पर "पेंशनर कार्ड" के नाम से फाइल भेजी। फाइल खोलते ही बुजुर्ग का मोबाइल हैक हो गया और उनके खाते से 5.40 लाख रुपये निकाल लिए गए।
कैसे हुई ठगी?
रिपोर्टों के अनुसार घटनाक्रम इस प्रकार रहा:
फोन कॉल: 8 अक्टूबर की शाम बाबूपुरवा कॉलोनी निवासी प्रदीप कुमार के पास एक फोन आया।
बैंक प्रतिनिधि का दावा: फोन करने वाले ने खुद को आईसीआईसीआई बैंक का प्रतिनिधि बताया।
कार्ड का झांसा: उसने कहा कि उनके मोबाइल पर व्हाट्सएप के जरिए "सीनियर सिटीजन पेंशनर कार्ड" भेजा जा रहा है।
फाइल खोली: बुजुर्ग ने भेजी गई फाइल खोल ली।
मोबाइल हैक: पीड़ित के अनुसार फाइल खोलते ही उनका मोबाइल हैक हो गया।
रकम निकली: इसके बाद उनके खाते से कुल 5.40 लाख रुपये निकाल लिए गए।
पुलिस में शिकायत
पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और बाबूपुरवा थाने में भी एफआईआर दर्ज कराई। बाबूपुरवा थाना प्रभारी नीरज ओझा के अनुसार रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
यह ठगी का कौन सा तरीका है?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार यह "एपीके फाइल फ्रॉड" या "मालवेयर फ्रॉड" का तरीका हो सकता है। इसमें ठग:
किसी सरकारी योजना, बैंक कार्ड, बिजली बिल, शादी के कार्ड या चालान के नाम पर फाइल भेजते हैं।
यह फाइल दरअसल एक खतरनाक ऐप (एपीके) होती है।
फाइल खोलकर इंस्टॉल करते ही ठगों को मोबाइल के मैसेज, ओटीपी और दूसरी जानकारी तक पहुंच मिल जाती है।
इसके बाद वे बैंक खाते से रकम निकाल लेते हैं, कई बार पीड़ित को पता भी नहीं चलता।
बुजुर्ग क्यों बनते हैं निशाना?
पेंशन खाते में अक्सर अच्छी जमा राशि होती है।
कई बुजुर्ग नई तकनीक और ठगी के तरीकों से कम परिचित होते हैं।
बैंक या सरकारी विभाग के नाम पर आए फोन पर वे आसानी से भरोसा कर लेते हैं।
"पेंशनर कार्ड" या "जीवन प्रमाण पत्र" जैसे शब्द उन्हें असली लगते हैं।
साइबर ठगी होने पर तुरंत क्या करें?
1930 पर कॉल करें: राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें। जितनी जल्दी शिकायत होगी, रकम रोकने की संभावना उतनी ज्यादा होगी।
ऑनलाइन शिकायत: cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
बैंक को सूचना: बैंक के कस्टमर केयर पर कॉल कर खाता, डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग तुरंत ब्लॉक कराएं।
मोबाइल अलग करें: संदिग्ध फाइल खुलने के बाद मोबाइल का इंटरनेट बंद करें और फोन को फैक्टरी रीसेट कराने पर विचार करें।
पासवर्ड बदलें: किसी दूसरे सुरक्षित फोन से बैंकिंग और ईमेल के पासवर्ड बदलें।
थाने में एफआईआर: नजदीकी थाने या साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराएं।
ठगी से बचने के 10 जरूरी नियम
बैंक कभी व्हाट्सएप पर कार्ड या फाइल नहीं भेजता।
अनजान नंबर से आई .apk फाइल कभी न खोलें।
ऐप केवल गूगल प्ले स्टोर या ऐपल ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें।
फोन की सेटिंग में "अनजान स्रोत से ऐप इंस्टॉल" का विकल्प बंद रखें।
ओटीपी, पिन या पासवर्ड किसी को न बताएं।
बैंक से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए खुद बैंक की शाखा या आधिकारिक नंबर पर संपर्क करें।
स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करने को कहा जाए तो तुरंत फोन काट दें।
खाते में एसएमएस और ईमेल अलर्ट चालू रखें।
बुजुर्ग माता-पिता को ऐसी ठगी के बारे में बताएं।
डर या लालच दिखाने वाले फोन पर जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं।
परिवार की भूमिका अहम
घर के युवा सदस्य बुजुर्गों के मोबाइल में सुरक्षा सेटिंग्स ठीक कर सकते हैं और उन्हें समझा सकते हैं कि बैंक या सरकारी विभाग के नाम पर आने वाले फोन पर बिना जांचे भरोसा न करें। बुजुर्गों को यह भी बताना जरूरी है कि ठगी होने पर शर्म या डर के बिना तुरंत परिवार और पुलिस को बताएं।
हाल के दिनों में बढ़े ऐसे मामले
देशभर में बैंक, बिजली विभाग, परिवहन विभाग या सरकारी योजनाओं के नाम पर फाइल भेजकर मोबाइल हैक करने के मामले बढ़े हैं। ठग कई बार "ई-चालान", "पीएम किसान", "राशन कार्ड अपडेट", "बिजली बिल बकाया" या "शादी का निमंत्रण" जैसे नाम से फाइल भेजते हैं, ताकि लोग बिना सोचे उसे खोल लें। ऐसे किसी भी संदेश को खोलने से पहले संबंधित विभाग या बैंक से खुद पुष्टि करना सबसे सुरक्षित तरीका है। अगर फाइल का नाम .apk पर खत्म होता है, तो उसे बिल्कुल न खोलें।
बैंक की जिम्मेदारी और ग्राहक के अधिकार
भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन की सूचना जल्द से जल्द बैंक को देने पर ग्राहक की देनदारी सीमित हो सकती है। इसलिए ठगी का पता चलते ही बैंक को लिखित रूप में सूचना देना और उसकी पावती लेना जरूरी है।
kanpur.live की राय
साइबर ठगी का यह मामला बताता है कि एक फाइल खोलना भी जीवनभर की जमा पूंजी पर भारी पड़ सकता है। जागरूकता ही इससे बचने का सबसे बड़ा हथियार है। हम पाठकों से अपील करते हैं कि यह जानकारी अपने घर के बुजुर्गों तक जरूर पहुंचाएं। पुलिस जांच से जुड़ी आगे की जानकारी हम देते रहेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. ठगी किसके साथ हुई? बाबूपुरवा कॉलोनी निवासी बुजुर्ग प्रदीप कुमार के साथ।
प्रश्न 2. कितनी रकम निकाली गई? 5.40 लाख रुपये।
प्रश्न 3. ठग ने खुद को कौन बताया? आईसीआईसीआई बैंक का प्रतिनिधि।
प्रश्न 4. फाइल किस नाम से भेजी गई? "सीनियर सिटीजन पेंशनर कार्ड"।
प्रश्न 5. फोन कब आया था? 8 अक्टूबर की शाम।
प्रश्न 6. साइबर ठगी की शिकायत किस नंबर पर करें? राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर या cybercrime.gov.in पर।
प्रश्न 7. क्या बैंक व्हाट्सएप पर कार्ड भेजता है? नहीं। ऐसी फाइल खोलने से बचें।
स्रोत: पीड़ित की शिकायत और पुलिस के बयान पर आधारित स्थानीय रिपोर्ट, 15 अक्टूबर 2026।
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