अर्मापुर मेले में चलते-चलते पलटा 'जीरो ग्रेविटी' झूला, मची चीख-पुकार
Kanpur: 'Zero gravity' ride tilts mid-operation at Armapur fair, panic among riders
Kanpur Live News Desk ·

कानपुर के अर्मापुर में दशहरा मेले के आखिरी दिन गुरुवार रात एक बड़ा हादसा होते-होते टला। मेले में लगा "जीरो ग्रेविटी" झूला चलते-चलते अपनी नींव से उखड़कर एक तरफ तेजी से झुक गया। झूले पर सवार लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े और चारों ओर चीख-पुकार मच गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, फंसे लोगों को बाहर निकाला और मेला बंद करा दिया। पुलिस ने कहा है कि लापरवाही की जांच की जाएगी।
रफ्तार पकड़ते ही उखड़ा झूला
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार झूला शुरू होने के करीब 30 सेकंड बाद, जब उसने रफ्तार पकड़नी शुरू की, तभी वह अपनी नींव से टूटकर एक तरफ झुक गया। झूले पर बैठे लोग संभल नहीं पाए और एक-दूसरे पर गिर गए। झूले पर कितने लोग सवार थे, इसे लेकर अलग-अलग दावे हैं। एक अनुमान के अनुसार 35 से 40 लोग झूले पर थे, जबकि दूसरे दावे में 7-8 लड़कियों और करीब 27-28 लड़कों के सवार होने की बात कही गई है।
चोटों को लेकर अलग-अलग दावे
रिपोर्ट के अनुसार कई लोगों को अंदरूनी चोटें आईं। हालांकि अपर पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) योगेश कुमार ने बताया कि किसी को गंभीर चोट नहीं आई है और सभी को घर भेज दिया गया है। चोटों की सही स्थिति को लेकर फिलहाल स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
गीली जमीन बनी वजह?
हादसे की असली वजह की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नवरात्र से पहले हुई भारी बारिश के कारण मेला मैदान की जमीन गीली थी। मैदान को सुखाने के लिए समिति ने उस पर मिट्टी डलवाई थी। लोगों का आरोप है कि झूले के बोल्ट इसी नरम जमीन में कसे गए थे और आशंका है कि झूला चलने के दौरान ये बोल्ट ढीले हो गए। यह अभी केवल आशंका है, जांच के बाद ही असली कारण सामने आएगा।
पुलिस ने बंद कराया मेला
घटना की सूचना मिलते ही एडीसीपी पश्चिम योगेश कुमार और एसीपी पनकी अमित चौरसिया के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने झूले में फंसे लोगों को बाहर निकाला, इसके बाद मेला बंद कराकर पूरा परिसर खाली कराया। पुलिस ने कहा है कि मामले में लापरवाही की जांच की जाएगी।
ठेकेदार और कर्मचारी फरार
रिपोर्टों के अनुसार हादसे के बाद झूले का ठेकेदार और उसके कर्मचारी मौके से भाग गए और उनके फोन बंद हो गए। अर्मापुर एस्टेट मैदान में श्री श्री रामलीला समिति रामलीला, रावण दहन और मेले का आयोजन करती है। आरोप है कि झूलों का ठेका एक व्यक्ति के पास था, जो कई स्थानीय लोगों के जरिये झूले चलवा रहा था।
दो किशोरों की तलाश
रिपोर्ट के अनुसार हादसे के बाद 13 और 14 वर्ष के दो चचेरे भाई रात 11 बजे तक घर नहीं लौटे थे। परिवार का कहना था कि मेला प्रबंधन उनके बारे में कोई जानकारी नहीं दे पाया। रिपोर्ट में यह साफ नहीं है कि बाद में दोनों बच्चे मिले या नहीं। उम्मीद है कि दोनों सुरक्षित होंगे।
अनुमति और सुरक्षा पर सवाल
इस हादसे ने मेलों में लगने वाले बड़े झूलों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभी यह साफ नहीं है कि झूले के लिए जरूरी अनुमति और तकनीकी सुरक्षा जांच कराई गई थी या नहीं।
ऐसे सवाल जिनके जवाब जरूरी हैं:
क्या झूले को लगाने से पहले किसी इंजीनियर से उसकी मजबूती की जांच कराई गई थी?
क्या गीली और नरम जमीन पर भारी झूला लगाना सुरक्षित था?
झूले की अधिकतम क्षमता कितनी थी और क्या उससे ज्यादा लोग बैठाए गए?
क्या मौके पर आपात स्थिति से निपटने की कोई व्यवस्था थी?
पहले भी हो चुके हैं हादसे
देश के अलग-अलग हिस्सों में मेलों में झूलों से जुड़े हादसे पहले भी सामने आते रहे हैं। कई बार झूले टूटने या गिरने से लोगों की जान तक चली गई है। ज्यादातर मामलों में लापरवाही, पुराने और कमजोर उपकरण, क्षमता से ज्यादा लोगों को बैठाना और सुरक्षा जांच न होना वजह बनते हैं। मेलों में लगने वाले कई झूले बार-बार खोलकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाए जाते हैं, जिससे उनके पुर्जे कमजोर हो सकते हैं।
मेले में झूला झूलते समय रखें ये सावधानियां
त्योहारों का मौसम चल रहा है और आगे भी कई मेले लगेंगे। ऐसे में परिवारों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
झूले की हालत देखें: जंग लगे, हिलते-डुलते या ढीले पुर्जों वाले झूले पर न बैठें।
नींव जांचें: झूला समतल और मजबूत जमीन पर लगा हो। गीली या धंसी जमीन पर लगे झूले से बचें।
भीड़ से बचें: जिस झूले पर क्षमता से ज्यादा लोग बैठाए जा रहे हों, उस पर न बैठें।
सीट बेल्ट और लॉक: तेज झूलों में सेफ्टी बेल्ट या लॉकिंग बार जरूर लगवाएं।
बच्चों पर नजर: छोटे बच्चों को अकेले बड़े झूलों पर न जाने दें। उम्र और लंबाई की सीमा का पालन करें।
बीमार लोग न बैठें: दिल के मरीज, गर्भवती महिलाएं और चक्कर आने की समस्या वाले लोग तेज झूलों से दूर रहें।
मिलने की जगह तय करें: मेले में बच्चों के साथ जाएं, तो बिछड़ने की स्थिति में मिलने की एक जगह पहले से तय कर लें और बच्चों को अपना मोबाइल नंबर याद कराएं।
कुछ गड़बड़ लगे तो रुकें: झूला चलते समय अजीब आवाज या झटके महसूस हों, तो तुरंत संचालक को झूला रोकने को कहें।
प्रशासन की जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का कहना है कि मेलों में बड़े झूलों को लगाने से पहले तकनीकी जांच अनिवार्य होनी चाहिए। प्रशासन को मेला आयोजकों और झूला संचालकों से सुरक्षा प्रमाणपत्र मांगना चाहिए। मेले के दौरान भी समय-समय पर निरीक्षण होना चाहिए। साथ ही मेला स्थल पर एंबुलेंस, प्राथमिक उपचार और खोया-पाया केंद्र जैसी व्यवस्थाएं जरूरी हैं।
निष्कर्ष
अर्मापुर मेले में झूला हादसा एक बड़ी चेतावनी है। गनीमत रही कि कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई, लेकिन लापरवाही की कीमत कभी भी भारी पड़ सकती है। पुलिस जांच में यह साफ होना चाहिए कि गलती किसकी थी, और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही आगे लगने वाले मेलों में झूलों की सुरक्षा जांच को सख्ती से लागू करना जरूरी है।
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अर्मापुर मेले में चलते-चलते पलटा 'जीरो ग्रेविटी' झूला, मची चीख-पुकार
कानपुर के अर्मापुर में दशहरा मेले के आखिरी दिन गुरुवार रात एक बड़ा हादसा होते-होते टला। मेले में लगा "जीरो ग्रेविटी" झूला चलते-चलते अपनी नींव से उखड़कर एक तरफ तेजी से झुक गया। झूले पर सवार लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े और चारों ओर चीख-पुकार मच गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, फंसे लोगों को बाहर निकाला और मेला बंद करा दिया। पुलिस ने कहा है कि लापरवाही की जांच की जाएगी।
रफ्तार पकड़ते ही उखड़ा झूला
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार झूला शुरू होने के करीब 30 सेकंड बाद, जब उसने रफ्तार पकड़नी शुरू की, तभी वह अपनी नींव से टूटकर एक तरफ झुक गया। झूले पर बैठे लोग संभल नहीं पाए और एक-दूसरे पर गिर गए। झूले पर कितने लोग सवार थे, इसे लेकर अलग-अलग दावे हैं। एक अनुमान के अनुसार 35 से 40 लोग झूले पर थे, जबकि दूसरे दावे में 7-8 लड़कियों और करीब 27-28 लड़कों के सवार होने की बात कही गई है।
चोटों को लेकर अलग-अलग दावे
रिपोर्ट के अनुसार कई लोगों को अंदरूनी चोटें आईं। हालांकि अपर पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) योगेश कुमार ने बताया कि किसी को गंभीर चोट नहीं आई है और सभी को घर भेज दिया गया है। चोटों की सही स्थिति को लेकर फिलहाल स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
गीली जमीन बनी वजह?
हादसे की असली वजह की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नवरात्र से पहले हुई भारी बारिश के कारण मेला मैदान की जमीन गीली थी। मैदान को सुखाने के लिए समिति ने उस पर मिट्टी डलवाई थी। लोगों का आरोप है कि झूले के बोल्ट इसी नरम जमीन में कसे गए थे और आशंका है कि झूला चलने के दौरान ये बोल्ट ढीले हो गए। यह अभी केवल आशंका है, जांच के बाद ही असली कारण सामने आएगा।
पुलिस ने बंद कराया मेला
घटना की सूचना मिलते ही एडीसीपी पश्चिम योगेश कुमार और एसीपी पनकी अमित चौरसिया के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने झूले में फंसे लोगों को बाहर निकाला, इसके बाद मेला बंद कराकर पूरा परिसर खाली कराया। पुलिस ने कहा है कि मामले में लापरवाही की जांच की जाएगी।
ठेकेदार और कर्मचारी फरार
रिपोर्टों के अनुसार हादसे के बाद झूले का ठेकेदार और उसके कर्मचारी मौके से भाग गए और उनके फोन बंद हो गए। अर्मापुर एस्टेट मैदान में श्री श्री रामलीला समिति रामलीला, रावण दहन और मेले का आयोजन करती है। आरोप है कि झूलों का ठेका एक व्यक्ति के पास था, जो कई स्थानीय लोगों के जरिये झूले चलवा रहा था।
दो किशोरों की तलाश
रिपोर्ट के अनुसार हादसे के बाद 13 और 14 वर्ष के दो चचेरे भाई रात 11 बजे तक घर नहीं लौटे थे। परिवार का कहना था कि मेला प्रबंधन उनके बारे में कोई जानकारी नहीं दे पाया। रिपोर्ट में यह साफ नहीं है कि बाद में दोनों बच्चे मिले या नहीं। उम्मीद है कि दोनों सुरक्षित होंगे।
अनुमति और सुरक्षा पर सवाल
इस हादसे ने मेलों में लगने वाले बड़े झूलों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभी यह साफ नहीं है कि झूले के लिए जरूरी अनुमति और तकनीकी सुरक्षा जांच कराई गई थी या नहीं।
ऐसे सवाल जिनके जवाब जरूरी हैं:
क्या झूले को लगाने से पहले किसी इंजीनियर से उसकी मजबूती की जांच कराई गई थी?
क्या गीली और नरम जमीन पर भारी झूला लगाना सुरक्षित था?
झूले की अधिकतम क्षमता कितनी थी और क्या उससे ज्यादा लोग बैठाए गए?
क्या मौके पर आपात स्थिति से निपटने की कोई व्यवस्था थी?
पहले भी हो चुके हैं हादसे
देश के अलग-अलग हिस्सों में मेलों में झूलों से जुड़े हादसे पहले भी सामने आते रहे हैं। कई बार झूले टूटने या गिरने से लोगों की जान तक चली गई है। ज्यादातर मामलों में लापरवाही, पुराने और कमजोर उपकरण, क्षमता से ज्यादा लोगों को बैठाना और सुरक्षा जांच न होना वजह बनते हैं। मेलों में लगने वाले कई झूले बार-बार खोलकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाए जाते हैं, जिससे उनके पुर्जे कमजोर हो सकते हैं।
मेले में झूला झूलते समय रखें ये सावधानियां
त्योहारों का मौसम चल रहा है और आगे भी कई मेले लगेंगे। ऐसे में परिवारों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
झूले की हालत देखें: जंग लगे, हिलते-डुलते या ढीले पुर्जों वाले झूले पर न बैठें।
नींव जांचें: झूला समतल और मजबूत जमीन पर लगा हो। गीली या धंसी जमीन पर लगे झूले से बचें।
भीड़ से बचें: जिस झूले पर क्षमता से ज्यादा लोग बैठाए जा रहे हों, उस पर न बैठें।
सीट बेल्ट और लॉक: तेज झूलों में सेफ्टी बेल्ट या लॉकिंग बार जरूर लगवाएं।
बच्चों पर नजर: छोटे बच्चों को अकेले बड़े झूलों पर न जाने दें। उम्र और लंबाई की सीमा का पालन करें।
बीमार लोग न बैठें: दिल के मरीज, गर्भवती महिलाएं और चक्कर आने की समस्या वाले लोग तेज झूलों से दूर रहें।
मिलने की जगह तय करें: मेले में बच्चों के साथ जाएं, तो बिछड़ने की स्थिति में मिलने की एक जगह पहले से तय कर लें और बच्चों को अपना मोबाइल नंबर याद कराएं।
कुछ गड़बड़ लगे तो रुकें: झूला चलते समय अजीब आवाज या झटके महसूस हों, तो तुरंत संचालक को झूला रोकने को कहें।
प्रशासन की जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का कहना है कि मेलों में बड़े झूलों को लगाने से पहले तकनीकी जांच अनिवार्य होनी चाहिए। प्रशासन को मेला आयोजकों और झूला संचालकों से सुरक्षा प्रमाणपत्र मांगना चाहिए। मेले के दौरान भी समय-समय पर निरीक्षण होना चाहिए। साथ ही मेला स्थल पर एंबुलेंस, प्राथमिक उपचार और खोया-पाया केंद्र जैसी व्यवस्थाएं जरूरी हैं।
निष्कर्ष
अर्मापुर मेले में झूला हादसा एक बड़ी चेतावनी है। गनीमत रही कि कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई, लेकिन लापरवाही की कीमत कभी भी भारी पड़ सकती है। पुलिस जांच में यह साफ होना चाहिए कि गलती किसकी थी, और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही आगे लगने वाले मेलों में झूलों की सुरक्षा जांच को सख्ती से लागू करना जरूरी है।
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