एशियाई पैरा खेल: भारत के 30 पदक, दीप्ति और सिमरन ने बनाए खेलों के रिकॉर्ड
Asian Para Games 2026: India reaches 30 medals; Deepthi Jeevanji, Simran set Games records
Kanpur Live News Desk ·

एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन के बाद अब भारत के पैरा खिलाड़ी भी पदकों की झड़ी लगा रहे हैं। जापान के आइची-नागोया में 18 से 24 अक्टूबर तक चल रहे एशियाई पैरा खेल 2026 में भारत ने 20 अक्टूबर तक 7 स्वर्ण, 10 रजत और 13 कांस्य समेत कुल 30 पदक जीत लिए थे। इस दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने कई नए रिकॉर्ड भी बनाए। दीप्ति जीवनजी ने अपना खिताब बचाते हुए नया खेल रिकॉर्ड बनाया, वहीं सिमरन और प्रणव सूरमा ने भी रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया।
पदक तालिका (20 अक्टूबर तक)
स्वर्ण: 7
रजत: 10
कांस्य: 13
कुल: 30
खेल अभी जारी हैं, इसलिए आने वाले दिनों में भारत के पदकों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।
दीप्ति जीवनजी ने बचाया खिताब
तेलंगाना की दीप्ति जीवनजी ने महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने 56.36 सेकंड का समय निकालकर नया खेल रिकॉर्ड बनाया। दीप्ति ने पिछले एशियाई पैरा खेलों में भी इसी स्पर्धा में स्वर्ण जीता था और इस बार अपना खिताब सफलतापूर्वक बचाया। टी20 श्रेणी बौद्धिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ियों के लिए होती है। दीप्ति की कहानी संघर्ष से सफलता तक पहुंचने की प्रेरक कहानी है।
सिमरन की तेज दौड़
महिलाओं की 200 मीटर टी12 स्पर्धा में सिमरन ने 24.80 सेकंड में दौड़ पूरी कर स्वर्ण पदक जीता और नया खेल रिकॉर्ड बनाया। टी12 श्रेणी दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए होती है। इस श्रेणी में खिलाड़ी चाहें तो गाइड रनर के साथ दौड़ सकते हैं, जो उन्हें दिशा बताने में मदद करता है।
प्रणव सूरमा का एशियाई रिकॉर्ड
पुरुषों की डिस्कस थ्रो एफ51/52/53 स्पर्धा में प्रणव सूरमा ने 932 अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने एफ51 श्रेणी में 11.66 मीटर का नया एशियाई रिकॉर्ड भी बनाया। एफ51 से एफ53 श्रेणियां उन खिलाड़ियों के लिए होती हैं, जो बैठकर थ्रो करते हैं और जिनके हाथ-पैरों की गतिविधि सीमित होती है। अलग-अलग श्रेणियों के खिलाड़ियों के एक साथ मुकाबले में अंक प्रणाली से विजेता तय होता है।
निषाद कुमार का दूसरा स्वर्ण
रिपोर्टों के अनुसार ऊंची कूद के स्टार खिलाड़ी निषाद कुमार ने भी स्वर्ण पदक जीता है। यह एशियाई पैरा खेलों में उनका दूसरा स्वर्ण बताया गया है। निषाद पैरालंपिक खेलों में भी भारत के लिए पदक जीत चुके हैं और लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं।
पैरा खेलों की श्रेणियां
पैरा खेलों में खिलाड़ियों को उनकी दिव्यांगता के प्रकार और स्तर के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है, ताकि मुकाबला बराबरी का हो।
"टी" (ट्रैक): दौड़ और कूद की स्पर्धाएं
"एफ" (फील्ड): थ्रो की स्पर्धाएं
11 से 13: दृष्टिबाधित खिलाड़ी
20: बौद्धिक दिव्यांगता
31 से 38: सेरेब्रल पाल्सी जैसी समन्वय से जुड़ी दिव्यांगता
40 से 47: कद, अंग विच्छेदन या अंगों से जुड़ी दिव्यांगता
51 से 57: व्हीलचेयर या बैठकर खेलने वाले खिलाड़ी
भारत में पैरा खेलों का बढ़ता कद
पिछले एक दशक में भारत ने पैरा खेलों में जबरदस्त प्रगति की है। टोक्यो और पेरिस पैरालंपिक में भारतीय खिलाड़ियों ने रिकॉर्ड पदक जीते। एशियाई पैरा खेलों में भी भारत लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स), खेलो इंडिया और भारतीय पैरालंपिक समिति के प्रयासों से खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, उपकरण और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का मौका मिला है।
समाज की सोच में बदलाव
पैरा खिलाड़ियों की सफलता ने समाज की सोच को भी बदला है। पहले दिव्यांगता को कमजोरी माना जाता था, लेकिन अब ये खिलाड़ी साबित कर रहे हैं कि हौसले के आगे कोई बाधा बड़ी नहीं होती। पदक जीतने वाले पैरा खिलाड़ी आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा हैं। उनकी कहानियां बताती हैं कि सही मौका और समर्थन मिलने पर हर व्यक्ति अपनी क्षमता का पूरा उपयोग कर सकता है।
उत्तर प्रदेश के पैरा खिलाड़ी
उत्तर प्रदेश ने भी देश को कई बेहतरीन पैरा खिलाड़ी दिए हैं। पैरा बैडमिंटन, पैरा एथलेटिक्स और पैरा तीरंदाजी में प्रदेश के खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हैं। प्रदेश सरकार पदक विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार राशि और सरकारी नौकरी देकर प्रोत्साहित करती है।
कानपुर के दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए राह
कानपुर में भी कई दिव्यांग युवा खेलों में आगे बढ़ना चाहते हैं। उनके लिए कुछ जरूरी कदम:
जिला खेल कार्यालय और ग्रीन पार्क स्टेडियम में उपलब्ध प्रशिक्षण सुविधाओं की जानकारी लें।
उत्तर प्रदेश पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन और भारतीय पैरालंपिक समिति से जुड़ी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लें।
दिव्यांगता प्रमाणपत्र और यूडीआईडी कार्ड बनवाएं, क्योंकि खेलों में वर्गीकरण के लिए यह जरूरी होता है।
खेलो इंडिया पैरा गेम्स जैसी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर नजर रखें।
अनुभवी कोच और फिजियोथेरेपिस्ट से मार्गदर्शन लें।
परिवार का साथ जरूरी
पैरा खिलाड़ियों की सफलता में परिवार का साथ सबसे अहम होता है। कई खिलाड़ियों ने बताया है कि शुरुआती दिनों में उन्हें समाज के ताने सुनने पड़े, लेकिन परिवार के भरोसे ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। अगर आपके परिवार में कोई दिव्यांग बच्चा खेलों में रुचि रखता है, तो उसे प्रोत्साहित करें।
आगे की उम्मीदें
24 अक्टूबर तक चलने वाले इन खेलों में अभी कई स्पर्धाएं बाकी हैं। तीरंदाजी, बैडमिंटन, निशानेबाजी, पावरलिफ्टिंग और एथलेटिक्स में भारत को और पदकों की उम्मीद है। एशियाई खेलों में 85 पदक जीतने के बाद अब पैरा खिलाड़ियों के प्रदर्शन से भारतीय खेलों के लिए यह साल और भी यादगार बन सकता है।
पैरा खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं
सरकार और खेल संस्थाएं पैरा खिलाड़ियों के लिए विशेष सुविधाएं दे रही हैं। व्हीलचेयर, कृत्रिम अंग और खेल उपकरणों के लिए आर्थिक मदद, विदेशी कोच, खेल विज्ञान सहायता और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी का खर्च इसमें शामिल है। स्टेडियमों को दिव्यांगों के अनुकूल बनाने पर भी काम हो रहा है। ऐसी सुविधाएं खिलाड़ियों को बराबरी का मौका देती हैं।
निष्कर्ष
एशियाई पैरा खेल 2026 में भारतीय खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। 30 पदक, नए खेल रिकॉर्ड और एशियाई रिकॉर्ड इस बात का सबूत हैं कि भारत के पैरा खिलाड़ी एशिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में शामिल हैं। उनकी सफलता पूरे देश के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत है।
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एशियाई पैरा खेल: भारत के 30 पदक, दीप्ति और सिमरन ने बनाए खेलों के रिकॉर्ड
एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन के बाद अब भारत के पैरा खिलाड़ी भी पदकों की झड़ी लगा रहे हैं। जापान के आइची-नागोया में 18 से 24 अक्टूबर तक चल रहे एशियाई पैरा खेल 2026 में भारत ने 20 अक्टूबर तक 7 स्वर्ण, 10 रजत और 13 कांस्य समेत कुल 30 पदक जीत लिए थे। इस दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने कई नए रिकॉर्ड भी बनाए। दीप्ति जीवनजी ने अपना खिताब बचाते हुए नया खेल रिकॉर्ड बनाया, वहीं सिमरन और प्रणव सूरमा ने भी रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया।
पदक तालिका (20 अक्टूबर तक)
स्वर्ण: 7
रजत: 10
कांस्य: 13
कुल: 30
खेल अभी जारी हैं, इसलिए आने वाले दिनों में भारत के पदकों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।
दीप्ति जीवनजी ने बचाया खिताब
तेलंगाना की दीप्ति जीवनजी ने महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने 56.36 सेकंड का समय निकालकर नया खेल रिकॉर्ड बनाया। दीप्ति ने पिछले एशियाई पैरा खेलों में भी इसी स्पर्धा में स्वर्ण जीता था और इस बार अपना खिताब सफलतापूर्वक बचाया। टी20 श्रेणी बौद्धिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ियों के लिए होती है। दीप्ति की कहानी संघर्ष से सफलता तक पहुंचने की प्रेरक कहानी है।
सिमरन की तेज दौड़
महिलाओं की 200 मीटर टी12 स्पर्धा में सिमरन ने 24.80 सेकंड में दौड़ पूरी कर स्वर्ण पदक जीता और नया खेल रिकॉर्ड बनाया। टी12 श्रेणी दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए होती है। इस श्रेणी में खिलाड़ी चाहें तो गाइड रनर के साथ दौड़ सकते हैं, जो उन्हें दिशा बताने में मदद करता है।
प्रणव सूरमा का एशियाई रिकॉर्ड
पुरुषों की डिस्कस थ्रो एफ51/52/53 स्पर्धा में प्रणव सूरमा ने 932 अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने एफ51 श्रेणी में 11.66 मीटर का नया एशियाई रिकॉर्ड भी बनाया। एफ51 से एफ53 श्रेणियां उन खिलाड़ियों के लिए होती हैं, जो बैठकर थ्रो करते हैं और जिनके हाथ-पैरों की गतिविधि सीमित होती है। अलग-अलग श्रेणियों के खिलाड़ियों के एक साथ मुकाबले में अंक प्रणाली से विजेता तय होता है।
निषाद कुमार का दूसरा स्वर्ण
रिपोर्टों के अनुसार ऊंची कूद के स्टार खिलाड़ी निषाद कुमार ने भी स्वर्ण पदक जीता है। यह एशियाई पैरा खेलों में उनका दूसरा स्वर्ण बताया गया है। निषाद पैरालंपिक खेलों में भी भारत के लिए पदक जीत चुके हैं और लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं।
पैरा खेलों की श्रेणियां
पैरा खेलों में खिलाड़ियों को उनकी दिव्यांगता के प्रकार और स्तर के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है, ताकि मुकाबला बराबरी का हो।
"टी" (ट्रैक): दौड़ और कूद की स्पर्धाएं
"एफ" (फील्ड): थ्रो की स्पर्धाएं
11 से 13: दृष्टिबाधित खिलाड़ी
20: बौद्धिक दिव्यांगता
31 से 38: सेरेब्रल पाल्सी जैसी समन्वय से जुड़ी दिव्यांगता
40 से 47: कद, अंग विच्छेदन या अंगों से जुड़ी दिव्यांगता
51 से 57: व्हीलचेयर या बैठकर खेलने वाले खिलाड़ी
भारत में पैरा खेलों का बढ़ता कद
पिछले एक दशक में भारत ने पैरा खेलों में जबरदस्त प्रगति की है। टोक्यो और पेरिस पैरालंपिक में भारतीय खिलाड़ियों ने रिकॉर्ड पदक जीते। एशियाई पैरा खेलों में भी भारत लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स), खेलो इंडिया और भारतीय पैरालंपिक समिति के प्रयासों से खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, उपकरण और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का मौका मिला है।
समाज की सोच में बदलाव
पैरा खिलाड़ियों की सफलता ने समाज की सोच को भी बदला है। पहले दिव्यांगता को कमजोरी माना जाता था, लेकिन अब ये खिलाड़ी साबित कर रहे हैं कि हौसले के आगे कोई बाधा बड़ी नहीं होती। पदक जीतने वाले पैरा खिलाड़ी आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा हैं। उनकी कहानियां बताती हैं कि सही मौका और समर्थन मिलने पर हर व्यक्ति अपनी क्षमता का पूरा उपयोग कर सकता है।
उत्तर प्रदेश के पैरा खिलाड़ी
उत्तर प्रदेश ने भी देश को कई बेहतरीन पैरा खिलाड़ी दिए हैं। पैरा बैडमिंटन, पैरा एथलेटिक्स और पैरा तीरंदाजी में प्रदेश के खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हैं। प्रदेश सरकार पदक विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार राशि और सरकारी नौकरी देकर प्रोत्साहित करती है।
कानपुर के दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए राह
कानपुर में भी कई दिव्यांग युवा खेलों में आगे बढ़ना चाहते हैं। उनके लिए कुछ जरूरी कदम:
जिला खेल कार्यालय और ग्रीन पार्क स्टेडियम में उपलब्ध प्रशिक्षण सुविधाओं की जानकारी लें।
उत्तर प्रदेश पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन और भारतीय पैरालंपिक समिति से जुड़ी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लें।
दिव्यांगता प्रमाणपत्र और यूडीआईडी कार्ड बनवाएं, क्योंकि खेलों में वर्गीकरण के लिए यह जरूरी होता है।
खेलो इंडिया पैरा गेम्स जैसी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर नजर रखें।
अनुभवी कोच और फिजियोथेरेपिस्ट से मार्गदर्शन लें।
परिवार का साथ जरूरी
पैरा खिलाड़ियों की सफलता में परिवार का साथ सबसे अहम होता है। कई खिलाड़ियों ने बताया है कि शुरुआती दिनों में उन्हें समाज के ताने सुनने पड़े, लेकिन परिवार के भरोसे ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। अगर आपके परिवार में कोई दिव्यांग बच्चा खेलों में रुचि रखता है, तो उसे प्रोत्साहित करें।
आगे की उम्मीदें
24 अक्टूबर तक चलने वाले इन खेलों में अभी कई स्पर्धाएं बाकी हैं। तीरंदाजी, बैडमिंटन, निशानेबाजी, पावरलिफ्टिंग और एथलेटिक्स में भारत को और पदकों की उम्मीद है। एशियाई खेलों में 85 पदक जीतने के बाद अब पैरा खिलाड़ियों के प्रदर्शन से भारतीय खेलों के लिए यह साल और भी यादगार बन सकता है।
पैरा खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं
सरकार और खेल संस्थाएं पैरा खिलाड़ियों के लिए विशेष सुविधाएं दे रही हैं। व्हीलचेयर, कृत्रिम अंग और खेल उपकरणों के लिए आर्थिक मदद, विदेशी कोच, खेल विज्ञान सहायता और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी का खर्च इसमें शामिल है। स्टेडियमों को दिव्यांगों के अनुकूल बनाने पर भी काम हो रहा है। ऐसी सुविधाएं खिलाड़ियों को बराबरी का मौका देती हैं।
निष्कर्ष
एशियाई पैरा खेल 2026 में भारतीय खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। 30 पदक, नए खेल रिकॉर्ड और एशियाई रिकॉर्ड इस बात का सबूत हैं कि भारत के पैरा खिलाड़ी एशिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में शामिल हैं। उनकी सफलता पूरे देश के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत है।
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