वीबीजी-रामजी रोजगार दिवस: कानपुर की 195 ग्राम पंचायतों में एक भी श्रमिक नहीं पहुंचा, 29,500 के लक्ष्य में से 3,713 को ही मिला काम; पोर्टल की खराबी बनी वजह
VBG-RAM G Employment Day in Kanpur: Zero Workers in 195 Gram Panchayats, Only 3,713 of 29,500 Target Got Work
Kanpur Live News Desk ·

मुख्य बातें:
कानपुर जिले की सभी 590 ग्राम पंचायतों में सोमवार को वीबीजी-रामजी योजना के तहत विशेष रोजगार दिवस मनाया गया।
29,500 श्रमिकों को काम देने का लक्ष्य था, लेकिन पोर्टल पर केवल 3,713 श्रमिकों (12.59%) की हाजिरी दर्ज हुई।
195 ग्राम पंचायतों में एक भी श्रमिक की हाजिरी दर्ज नहीं हुई।
जिले में 48,740 सक्रिय जॉब कार्ड हैं।
प्रभारी उपायुक्त (मनरेगा) के अनुसार पोर्टल में तकनीकी खराबी के कारण हाजिरी पूरी दर्ज नहीं हो पाई। उनका दावा है कि करीब 20 हजार श्रमिकों को रोजगार मिला।
ग्रामीण इलाकों में रोजगार बढ़ाने के लिए शुरू की गई वीबीजी-रामजी योजना के विशेष रोजगार दिवस के आंकड़े कानपुर में उम्मीद से काफी कम रहे। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार सोमवार को जिले की सभी 590 ग्राम पंचायतों में रोजगार दिवस आयोजित करने के निर्देश थे, लेकिन पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों में लक्ष्य का केवल 12.59 प्रतिशत ही पूरा हो सका। दूसरी ओर, विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पोर्टल में तकनीकी खराबी के कारण असली संख्या दर्ज नहीं हो पाई।
वीबीजी-रामजी योजना क्या है?
वीबीजी-रामजी (VB-G RAM G) का पूरा नाम "विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)" है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को रोजगार और आजीविका देने के लिए चलाई जा रही योजना है। इसके तहत गांवों में पौधरोपण, सड़क निर्माण, पोषण वाटिका, तालाब और दूसरे सामुदायिक कार्य कराए जाते हैं, जिनमें जॉब कार्ड धारक श्रमिकों को काम मिलता है।
आंकड़ों में रोजगार दिवस
विवरण आंकड़ा
कुल ग्राम पंचायतें 590
श्रमिकों का लक्ष्य 29,500
पोर्टल पर दर्ज श्रमिक 3,713 (12.59%)
लक्ष्य से कम 25,787 (87.41%)
शून्य हाजिरी वाली पंचायतें 195
जिले में सक्रिय जॉब कार्ड 48,740
प्रति पंचायत औसत लक्ष्य करीब 50 श्रमिक
ब्लॉकवार स्थिति
रिपोर्ट में दिए गए ब्लॉकवार आंकड़े इस प्रकार हैं:
ब्लॉक ग्राम पंचायतें श्रमिक
भीतरगांव 49 349
बिल्हौर 43 483
चौबेपुर 13 62
घाटमपुर 85 736
ककवन 22 470
कल्याणपुर 49 237
पतारा 51 560
सरसौल 24 122
शिवराजपुर 24 236
बिधनू 35 458
इन आंकड़ों में घाटमपुर ब्लॉक में सबसे ज्यादा 736 और चौबेपुर में सबसे कम 62 श्रमिकों की हाजिरी दर्ज हुई।
दो पंचायतों की तस्वीर
बगदौधी बांगर (कल्याणपुर ब्लॉक): रिपोर्टों के अनुसार यहां मनरेगा के 121 सक्रिय जॉब कार्ड हैं, लेकिन पोर्टल पर केवल 8 श्रमिकों की हाजिरी दर्ज हुई। इन सभी को पोषण वाटिका के काम पर लगाया गया।
टिकवापुर (घाटमपुर ब्लॉक): यहां 70 सक्रिय जॉब कार्ड हैं, लेकिन केवल एक श्रमिक की हाजिरी दर्ज हुई, जिसे अमृत सरोवर योजना के तहत पौधरोपण के काम पर लगाया गया।
रिपोर्टों के अनुसार कुछ पंचायतों में 50 से 70 जॉब कार्ड सक्रिय होने के बावजूद केवल एक श्रमिक पहुंचा।
पोर्टल की खराबी बनी बड़ी वजह
ब्लॉक स्तर के अधिकारियों के अनुसार वीबीजी-रामजी पोर्टल सुबह कुछ देर चला और फिर बंद हो गया। रिपोर्टों के अनुसार ऐसी समस्या दूसरे जिलों में भी आई। इसके बाद "जनग्राम" नाम का दूसरा पोर्टल शुरू किया गया, लेकिन कर्मचारी उससे परिचित नहीं थे। इस वजह से हाजिरी दो अलग-अलग पोर्टल पर बंट गई और कई श्रमिकों की हाजिरी अपडेट नहीं हो पाई।
यानी कुछ पंचायतों में श्रमिक वास्तव में नहीं पहुंचे, जबकि कुछ जगह श्रमिक काम पर थे, लेकिन तकनीकी दिक्कत के कारण उनकी हाजिरी दर्ज नहीं हो सकी।
अधिकारी का पक्ष
कानपुर के प्रभारी उपायुक्त (मनरेगा) आलोक कुमार ने बताया कि विभाग ने ज्यादा से ज्यादा श्रमिकों को रोजगार देने की कोशिश की। उनके अनुसार वीबीजी-रामजी पोर्टल में तकनीकी खराबी आने से हाजिरी दूसरे पोर्टल पर दर्ज की गई, जिसका अपडेशन चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि जिले में करीब 20 हजार श्रमिकों को रोजगार मिला।
यानी पोर्टल पर दर्ज 3,713 और विभाग के दावे वाले करीब 20 हजार के आंकड़े में बड़ा अंतर है। दूसरे पोर्टल का अपडेशन पूरा होने के बाद ही सही तस्वीर सामने आ पाएगी।
किन कामों पर लगे श्रमिक?
पोर्टल पर दर्ज ज्यादातर काम इन श्रेणियों के रहे:
पौधरोपण: गांवों में हरियाली बढ़ाने और अमृत सरोवरों के किनारे पेड़ लगाने का काम।
सड़क निर्माण: गांवों की कच्ची सड़कों और संपर्क मार्गों का काम।
पोषण वाटिका: स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में सब्जी और फलों की वाटिका तैयार करना।
श्रमिकों के कम पहुंचने की संभावित वजहें
जानकारों के अनुसार कई कारणों से रोजगार दिवस पर श्रमिकों की संख्या प्रभावित हो सकती है:
खेती का मौसम: अक्टूबर में धान की कटाई और रबी की बुवाई की तैयारी चलती है, जिसमें ग्रामीण व्यस्त रहते हैं।
त्योहारों का समय: नवरात्र और आने वाले दशहरा-दीपावली के कारण लोग घरेलू कामों में लगे रहते हैं।
शहर में बेहतर मजदूरी: कानपुर जैसे औद्योगिक शहर के पास होने से कई ग्रामीण शहर में काम करना पसंद करते हैं।
जानकारी की कमी: कई श्रमिकों तक रोजगार दिवस की सूचना समय पर नहीं पहुंच पाती।
तकनीकी दिक्कतें: पोर्टल बंद होने से हाजिरी दर्ज न होना।
जॉब कार्ड धारकों के अधिकार
ग्रामीण रोजगार योजनाओं में जॉब कार्ड धारक श्रमिक को काम मांगने का अधिकार होता है। श्रमिक अपनी ग्राम पंचायत, ग्राम रोजगार सेवक या ब्लॉक कार्यालय में काम के लिए आवेदन कर सकते हैं। मजदूरी का भुगतान सीधे बैंक खाते में होता है। किसी तरह की शिकायत होने पर ब्लॉक कार्यालय या जिले के मनरेगा कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।
डिजिटल हाजिरी की चुनौती
ग्रामीण योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था लागू की गई है। इससे फर्जी हाजिरी पर रोक लगती है और भुगतान समय पर होता है। लेकिन गांवों में इंटरनेट की कमजोर कनेक्टिविटी, पोर्टल पर एक साथ ज्यादा लोड और कर्मचारियों के प्रशिक्षण की कमी जैसी चुनौतियां भी सामने आती हैं। इस रोजगार दिवस पर भी यही दिक्कतें दिखीं।
kanpur.live की राय
रोजगार दिवस का मकसद ग्रामीणों को उनके गांव में ही काम देना है। अगर पोर्टल की खराबी के कारण श्रमिकों की मेहनत रिकॉर्ड में नहीं आती, तो इससे उनके भुगतान पर भी असर पड़ सकता है। उम्मीद है कि दूसरे पोर्टल का अपडेशन जल्द पूरा होगा और सही आंकड़े सामने आएंगे। तकनीकी व्यवस्था मजबूत करना और कर्मचारियों को नए पोर्टल का प्रशिक्षण देना आगे के लिए जरूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. वीबीजी-रामजी का पूरा नाम क्या है? विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)।
प्रश्न 2. कानपुर में रोजगार दिवस पर कितना लक्ष्य था? 29,500 श्रमिकों को काम देने का।
प्रश्न 3. पोर्टल पर कितने श्रमिकों की हाजिरी दर्ज हुई? 3,713 श्रमिकों की, यानी लक्ष्य का 12.59%।
प्रश्न 4. कितनी पंचायतों में शून्य हाजिरी रही? 590 में से 195 ग्राम पंचायतों में।
प्रश्न 5. कम आंकड़ों की वजह क्या बताई गई? वीबीजी-रामजी पोर्टल में तकनीकी खराबी और दूसरे पोर्टल (जनग्राम) पर हाजिरी का अपडेशन बाकी होना।
प्रश्न 6. विभाग का दावा क्या है? प्रभारी उपायुक्त (मनरेगा) के अनुसार करीब 20 हजार श्रमिकों को रोजगार मिला।
प्रश्न 7. कानपुर में कितने सक्रिय जॉब कार्ड हैं? 48,740।
स्रोत: विभागीय आंकड़ों और अधिकारियों के बयानों पर आधारित स्थानीय रिपोर्ट, 14 अक्टूबर 2026।
वीबीजी-रामजी रोजगार दिवस: कानपुर की 195 ग्राम पंचायतों में एक भी श्रमिक नहीं पहुंचा, 29,500 के लक्ष्य में से 3,713 को ही मिला काम; पोर्टल की खराबी बनी वजह
मुख्य बातें:
कानपुर जिले की सभी 590 ग्राम पंचायतों में सोमवार को वीबीजी-रामजी योजना के तहत विशेष रोजगार दिवस मनाया गया।
29,500 श्रमिकों को काम देने का लक्ष्य था, लेकिन पोर्टल पर केवल 3,713 श्रमिकों (12.59%) की हाजिरी दर्ज हुई।
195 ग्राम पंचायतों में एक भी श्रमिक की हाजिरी दर्ज नहीं हुई।
जिले में 48,740 सक्रिय जॉब कार्ड हैं।
प्रभारी उपायुक्त (मनरेगा) के अनुसार पोर्टल में तकनीकी खराबी के कारण हाजिरी पूरी दर्ज नहीं हो पाई। उनका दावा है कि करीब 20 हजार श्रमिकों को रोजगार मिला।
ग्रामीण इलाकों में रोजगार बढ़ाने के लिए शुरू की गई वीबीजी-रामजी योजना के विशेष रोजगार दिवस के आंकड़े कानपुर में उम्मीद से काफी कम रहे। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार सोमवार को जिले की सभी 590 ग्राम पंचायतों में रोजगार दिवस आयोजित करने के निर्देश थे, लेकिन पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों में लक्ष्य का केवल 12.59 प्रतिशत ही पूरा हो सका। दूसरी ओर, विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पोर्टल में तकनीकी खराबी के कारण असली संख्या दर्ज नहीं हो पाई।
वीबीजी-रामजी योजना क्या है?
वीबीजी-रामजी (VB-G RAM G) का पूरा नाम "विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)" है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को रोजगार और आजीविका देने के लिए चलाई जा रही योजना है। इसके तहत गांवों में पौधरोपण, सड़क निर्माण, पोषण वाटिका, तालाब और दूसरे सामुदायिक कार्य कराए जाते हैं, जिनमें जॉब कार्ड धारक श्रमिकों को काम मिलता है।
आंकड़ों में रोजगार दिवस
विवरण आंकड़ा
कुल ग्राम पंचायतें 590
श्रमिकों का लक्ष्य 29,500
पोर्टल पर दर्ज श्रमिक 3,713 (12.59%)
लक्ष्य से कम 25,787 (87.41%)
शून्य हाजिरी वाली पंचायतें 195
जिले में सक्रिय जॉब कार्ड 48,740
प्रति पंचायत औसत लक्ष्य करीब 50 श्रमिक
ब्लॉकवार स्थिति
रिपोर्ट में दिए गए ब्लॉकवार आंकड़े इस प्रकार हैं:
ब्लॉक ग्राम पंचायतें श्रमिक
भीतरगांव 49 349
बिल्हौर 43 483
चौबेपुर 13 62
घाटमपुर 85 736
ककवन 22 470
कल्याणपुर 49 237
पतारा 51 560
सरसौल 24 122
शिवराजपुर 24 236
बिधनू 35 458
इन आंकड़ों में घाटमपुर ब्लॉक में सबसे ज्यादा 736 और चौबेपुर में सबसे कम 62 श्रमिकों की हाजिरी दर्ज हुई।
दो पंचायतों की तस्वीर
बगदौधी बांगर (कल्याणपुर ब्लॉक): रिपोर्टों के अनुसार यहां मनरेगा के 121 सक्रिय जॉब कार्ड हैं, लेकिन पोर्टल पर केवल 8 श्रमिकों की हाजिरी दर्ज हुई। इन सभी को पोषण वाटिका के काम पर लगाया गया।
टिकवापुर (घाटमपुर ब्लॉक): यहां 70 सक्रिय जॉब कार्ड हैं, लेकिन केवल एक श्रमिक की हाजिरी दर्ज हुई, जिसे अमृत सरोवर योजना के तहत पौधरोपण के काम पर लगाया गया।
रिपोर्टों के अनुसार कुछ पंचायतों में 50 से 70 जॉब कार्ड सक्रिय होने के बावजूद केवल एक श्रमिक पहुंचा।
पोर्टल की खराबी बनी बड़ी वजह
ब्लॉक स्तर के अधिकारियों के अनुसार वीबीजी-रामजी पोर्टल सुबह कुछ देर चला और फिर बंद हो गया। रिपोर्टों के अनुसार ऐसी समस्या दूसरे जिलों में भी आई। इसके बाद "जनग्राम" नाम का दूसरा पोर्टल शुरू किया गया, लेकिन कर्मचारी उससे परिचित नहीं थे। इस वजह से हाजिरी दो अलग-अलग पोर्टल पर बंट गई और कई श्रमिकों की हाजिरी अपडेट नहीं हो पाई।
यानी कुछ पंचायतों में श्रमिक वास्तव में नहीं पहुंचे, जबकि कुछ जगह श्रमिक काम पर थे, लेकिन तकनीकी दिक्कत के कारण उनकी हाजिरी दर्ज नहीं हो सकी।
अधिकारी का पक्ष
कानपुर के प्रभारी उपायुक्त (मनरेगा) आलोक कुमार ने बताया कि विभाग ने ज्यादा से ज्यादा श्रमिकों को रोजगार देने की कोशिश की। उनके अनुसार वीबीजी-रामजी पोर्टल में तकनीकी खराबी आने से हाजिरी दूसरे पोर्टल पर दर्ज की गई, जिसका अपडेशन चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि जिले में करीब 20 हजार श्रमिकों को रोजगार मिला।
यानी पोर्टल पर दर्ज 3,713 और विभाग के दावे वाले करीब 20 हजार के आंकड़े में बड़ा अंतर है। दूसरे पोर्टल का अपडेशन पूरा होने के बाद ही सही तस्वीर सामने आ पाएगी।
किन कामों पर लगे श्रमिक?
पोर्टल पर दर्ज ज्यादातर काम इन श्रेणियों के रहे:
पौधरोपण: गांवों में हरियाली बढ़ाने और अमृत सरोवरों के किनारे पेड़ लगाने का काम।
सड़क निर्माण: गांवों की कच्ची सड़कों और संपर्क मार्गों का काम।
पोषण वाटिका: स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में सब्जी और फलों की वाटिका तैयार करना।
श्रमिकों के कम पहुंचने की संभावित वजहें
जानकारों के अनुसार कई कारणों से रोजगार दिवस पर श्रमिकों की संख्या प्रभावित हो सकती है:
खेती का मौसम: अक्टूबर में धान की कटाई और रबी की बुवाई की तैयारी चलती है, जिसमें ग्रामीण व्यस्त रहते हैं।
त्योहारों का समय: नवरात्र और आने वाले दशहरा-दीपावली के कारण लोग घरेलू कामों में लगे रहते हैं।
शहर में बेहतर मजदूरी: कानपुर जैसे औद्योगिक शहर के पास होने से कई ग्रामीण शहर में काम करना पसंद करते हैं।
जानकारी की कमी: कई श्रमिकों तक रोजगार दिवस की सूचना समय पर नहीं पहुंच पाती।
तकनीकी दिक्कतें: पोर्टल बंद होने से हाजिरी दर्ज न होना।
जॉब कार्ड धारकों के अधिकार
ग्रामीण रोजगार योजनाओं में जॉब कार्ड धारक श्रमिक को काम मांगने का अधिकार होता है। श्रमिक अपनी ग्राम पंचायत, ग्राम रोजगार सेवक या ब्लॉक कार्यालय में काम के लिए आवेदन कर सकते हैं। मजदूरी का भुगतान सीधे बैंक खाते में होता है। किसी तरह की शिकायत होने पर ब्लॉक कार्यालय या जिले के मनरेगा कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।
डिजिटल हाजिरी की चुनौती
ग्रामीण योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था लागू की गई है। इससे फर्जी हाजिरी पर रोक लगती है और भुगतान समय पर होता है। लेकिन गांवों में इंटरनेट की कमजोर कनेक्टिविटी, पोर्टल पर एक साथ ज्यादा लोड और कर्मचारियों के प्रशिक्षण की कमी जैसी चुनौतियां भी सामने आती हैं। इस रोजगार दिवस पर भी यही दिक्कतें दिखीं।
kanpur.live की राय
रोजगार दिवस का मकसद ग्रामीणों को उनके गांव में ही काम देना है। अगर पोर्टल की खराबी के कारण श्रमिकों की मेहनत रिकॉर्ड में नहीं आती, तो इससे उनके भुगतान पर भी असर पड़ सकता है। उम्मीद है कि दूसरे पोर्टल का अपडेशन जल्द पूरा होगा और सही आंकड़े सामने आएंगे। तकनीकी व्यवस्था मजबूत करना और कर्मचारियों को नए पोर्टल का प्रशिक्षण देना आगे के लिए जरूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. वीबीजी-रामजी का पूरा नाम क्या है? विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)।
प्रश्न 2. कानपुर में रोजगार दिवस पर कितना लक्ष्य था? 29,500 श्रमिकों को काम देने का।
प्रश्न 3. पोर्टल पर कितने श्रमिकों की हाजिरी दर्ज हुई? 3,713 श्रमिकों की, यानी लक्ष्य का 12.59%।
प्रश्न 4. कितनी पंचायतों में शून्य हाजिरी रही? 590 में से 195 ग्राम पंचायतों में।
प्रश्न 5. कम आंकड़ों की वजह क्या बताई गई? वीबीजी-रामजी पोर्टल में तकनीकी खराबी और दूसरे पोर्टल (जनग्राम) पर हाजिरी का अपडेशन बाकी होना।
प्रश्न 6. विभाग का दावा क्या है? प्रभारी उपायुक्त (मनरेगा) के अनुसार करीब 20 हजार श्रमिकों को रोजगार मिला।
प्रश्न 7. कानपुर में कितने सक्रिय जॉब कार्ड हैं? 48,740।
स्रोत: विभागीय आंकड़ों और अधिकारियों के बयानों पर आधारित स्थानीय रिपोर्ट, 14 अक्टूबर 2026।
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