कानपुर: कंपनी ने अटकाया पेंशन फॉर्म, ईपीएफओ के दखल से मिली पेंशन
Kanpur: EPFO steps in after employer fails to verify pension form, retired worker gets pension
Kanpur Live News Desk ·

रिटायरमेंट के बाद पेंशन किसी भी कर्मचारी के लिए सबसे बड़ा सहारा होती है। लेकिन कई बार कागजी अड़चनों के कारण बुजुर्गों को अपनी ही पेंशन के लिए महीनों भटकना पड़ता है। कानपुर में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के क्षेत्रीय कार्यालय के दखल के बाद एक पूर्व कर्मचारी की अटकी पेंशन शुरू हो गई। यह मामला उन हजारों लोगों के लिए उम्मीद की किरण है, जिनकी पेंशन किसी न किसी वजह से अटकी हुई है।
क्या था मामला
कानपुर की एक फर्म के पूर्व कर्मचारी दिनेश कुमार सिंह अपनी पेंशन का लाभ नहीं ले पा रहे थे। इसकी वजह यह थी कि उनके पेंशन फॉर्म का सत्यापन नियोक्ता यानी कंपनी की ओर से नहीं किया गया था। पेंशन प्रक्रिया में नियोक्ता का सत्यापन जरूरी होता है, इसलिए उनकी फाइल आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
ईपीएफओ ने कैसे की मदद
परेशान होकर दिनेश कुमार सिंह ने ईपीएफओ के कानपुर क्षेत्रीय कार्यालय से संपर्क किया। अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया। लेखा अधिकारी संतोष गुप्ता ने नियोक्ता से संपर्क कर फॉर्म का सत्यापन कराया। इसके बाद फॉर्म संबंधित कार्यालय को भेजा गया और जरूरी प्रक्रिया पूरी होने पर पेंशन स्वीकृत हो गई। बुधवार को उनकी पेंशन का भुगतान भी शुरू हो गया।
अक्सर क्यों अटकती है पेंशन
पीएफ पेंशन अटकने के कई आम कारण होते हैं:
नियोक्ता का सत्यापन न होना: कंपनी बंद हो जाने, मालिक बदलने या लापरवाही के कारण फॉर्म सत्यापित नहीं हो पाता।
नाम और जन्मतिथि में अंतर: आधार, पैन और पीएफ रिकॉर्ड में नाम या जन्मतिथि मेल न खाना।
बैंक खाते की समस्या: बैंक खाता आधार से न जुड़ा होना या आईएफएससी कोड गलत होना।
सेवा अवधि का रिकॉर्ड: पुरानी नौकरियों का पीएफ खाता नए खाते में ट्रांसफर न होना।
केवाईसी अधूरी: यूएएन में आधार, पैन और बैंक की केवाईसी पूरी न होना।
नियोक्ता की ओर से योगदान जमा न होना: कई बार कंपनी कर्मचारी का अंशदान समय पर जमा नहीं करती।
कर्मचारी पेंशन योजना क्या है
कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) 1995 में शुरू हुई थी। इसके तहत नियोक्ता के 12 प्रतिशत अंशदान में से एक हिस्सा पेंशन खाते में जाता है। आम तौर पर कम से कम 10 साल की सेवा पूरी करने और 58 वर्ष की उम्र होने पर कर्मचारी मासिक पेंशन का हकदार होता है। 50 वर्ष की उम्र के बाद कम दर पर जल्दी पेंशन लेने का विकल्प भी होता है। मासिक पेंशन के लिए आम तौर पर फॉर्म 10डी भरा जाता है।
पेंशन अटकी है तो क्या करें
अगर आपकी पीएफ पेंशन भी किसी कारण से अटकी है, तो ये कदम उठा सकते हैं:
पहले स्थिति जांचें: ईपीएफओ के यूनिफाइड मेंबर पोर्टल पर यूएएन से लॉगिन करके अपने दावे की स्थिति देखें।
केवाईसी पूरी करें: आधार, पैन और बैंक खाता यूएएन से जुड़े हों और सत्यापित हों।
नियोक्ता से संपर्क: कंपनी के एचआर या अकाउंट्स विभाग से फॉर्म सत्यापित करने का अनुरोध करें।
ऑनलाइन शिकायत: ईपीएफओ के शिकायत पोर्टल ईपीएफआईजीएमएस पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। शिकायत की संख्या संभालकर रखें।
क्षेत्रीय कार्यालय जाएं: समस्या न सुलझे, तो अपने क्षेत्रीय ईपीएफओ कार्यालय में जाकर अधिकारियों से मिलें, जैसा इस मामले में किया गया।
हेल्पलाइन: ईपीएफओ की टोल फ्री हेल्पलाइन 14470 पर भी जानकारी ली जा सकती है।
कंपनी बंद हो गई हो तो
कई कर्मचारियों की परेशानी यह होती है कि जिस कंपनी में उन्होंने काम किया, वह बंद हो चुकी है। ऐसे मामलों में ईपीएफओ के नियमों के तहत वैकल्पिक सत्यापन की व्यवस्था होती है। इसके लिए क्षेत्रीय कार्यालय में संपर्क कर जरूरी दस्तावेज, जैसे वेतन पर्ची, नियुक्ति पत्र या सेवा प्रमाण, जमा किए जा सकते हैं। अधिकारी रिकॉर्ड की जांच के बाद आगे की प्रक्रिया बताते हैं।
पेंशनभोगी इन बातों का रखें ध्यान
जीवन प्रमाणपत्र: पेंशन लगातार पाने के लिए हर साल जीवन प्रमाणपत्र जमा करना जरूरी है। इसे डिजिटल रूप से जीवन प्रमाण के जरिये या बैंक, सीएससी केंद्र और ईपीएफओ कार्यालय से जमा किया जा सकता है।
पीपीओ संभालें: पेंशन पेमेंट ऑर्डर (पीपीओ) नंबर एक जरूरी दस्तावेज है, इसे सुरक्षित रखें।
बैंक खाता: पेंशन वाले बैंक खाते को सक्रिय रखें और उसमें बदलाव की सूचना ईपीएफओ को दें।
नामांकन: परिवार के सदस्यों का नामांकन (ई-नॉमिनेशन) जरूर कराएं, ताकि किसी अनहोनी में परिवार को परेशानी न हो।
ठगों से सावधान
पीएफ और पेंशन दिलाने के नाम पर कई ठग सक्रिय रहते हैं। वे फोन कर खुद को ईपीएफओ अधिकारी बताते हैं और ओटीपी, बैंक की जानकारी या फीस मांगते हैं। याद रखें कि ईपीएफओ कभी फोन पर आपकी निजी जानकारी या पैसे नहीं मांगता। पेंशन से जुड़ी सारी सेवाएं मुफ्त हैं। किसी भी संदिग्ध कॉल की शिकायत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर करें।
कानपुर में बड़ी संख्या में पीएफ खाताधारक
कानपुर औद्योगिक शहर है, जहां कपड़ा मिलों, चमड़ा उद्योग, होजरी, इंजीनियरिंग और दूसरी फैक्ट्रियों में हजारों लोग काम करते रहे हैं। पुरानी मिलों के बंद होने से कई पूर्व कर्मचारियों को पेंशन और पीएफ से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में ईपीएफओ कार्यालय की ओर से इस तरह की सक्रिय मदद से लोगों का भरोसा बढ़ता है।
नियोक्ताओं की जिम्मेदारी
कानून के तहत नियोक्ता की जिम्मेदारी है कि वह कर्मचारियों का पीएफ अंशदान समय पर जमा करे और जरूरत पड़ने पर उनके दावे के फॉर्म सत्यापित करे। फॉर्म सत्यापित करने में देरी से एक बुजुर्ग की आजीविका प्रभावित होती है। नियोक्ताओं को चाहिए कि वे पूर्व कर्मचारियों के दावों को प्राथमिकता से निपटाएं।
निधि आपके निकट कार्यक्रम
ईपीएफओ हर महीने "निधि आपके निकट" जैसे जनसंपर्क कार्यक्रम भी आयोजित करता है, जिनमें सदस्य और पेंशनभोगी सीधे अधिकारियों से मिलकर अपनी शिकायतें रख सकते हैं। कानपुर के लोग ऐसे कार्यक्रमों की जानकारी क्षेत्रीय कार्यालय या ईपीएफओ की वेबसाइट से ले सकते हैं।
निष्कर्ष
कानपुर में दिनेश कुमार सिंह को ईपीएफओ के दखल के बाद पेंशन मिलना यह बताता है कि सही जगह आवाज उठाने पर समाधान मिल सकता है। अगर आपकी पेंशन भी अटकी है, तो घबराएं नहीं। अपने दस्तावेज और केवाईसी ठीक रखें, ऑनलाइन शिकायत करें और जरूरत पड़ने पर क्षेत्रीय कार्यालय से संपर्क करें।
आपके काम की हर जरूरी खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
कानपुर: कंपनी ने अटकाया पेंशन फॉर्म, ईपीएफओ के दखल से मिली पेंशन
रिटायरमेंट के बाद पेंशन किसी भी कर्मचारी के लिए सबसे बड़ा सहारा होती है। लेकिन कई बार कागजी अड़चनों के कारण बुजुर्गों को अपनी ही पेंशन के लिए महीनों भटकना पड़ता है। कानपुर में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के क्षेत्रीय कार्यालय के दखल के बाद एक पूर्व कर्मचारी की अटकी पेंशन शुरू हो गई। यह मामला उन हजारों लोगों के लिए उम्मीद की किरण है, जिनकी पेंशन किसी न किसी वजह से अटकी हुई है।
क्या था मामला
कानपुर की एक फर्म के पूर्व कर्मचारी दिनेश कुमार सिंह अपनी पेंशन का लाभ नहीं ले पा रहे थे। इसकी वजह यह थी कि उनके पेंशन फॉर्म का सत्यापन नियोक्ता यानी कंपनी की ओर से नहीं किया गया था। पेंशन प्रक्रिया में नियोक्ता का सत्यापन जरूरी होता है, इसलिए उनकी फाइल आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
ईपीएफओ ने कैसे की मदद
परेशान होकर दिनेश कुमार सिंह ने ईपीएफओ के कानपुर क्षेत्रीय कार्यालय से संपर्क किया। अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया। लेखा अधिकारी संतोष गुप्ता ने नियोक्ता से संपर्क कर फॉर्म का सत्यापन कराया। इसके बाद फॉर्म संबंधित कार्यालय को भेजा गया और जरूरी प्रक्रिया पूरी होने पर पेंशन स्वीकृत हो गई। बुधवार को उनकी पेंशन का भुगतान भी शुरू हो गया।
अक्सर क्यों अटकती है पेंशन
पीएफ पेंशन अटकने के कई आम कारण होते हैं:
नियोक्ता का सत्यापन न होना: कंपनी बंद हो जाने, मालिक बदलने या लापरवाही के कारण फॉर्म सत्यापित नहीं हो पाता।
नाम और जन्मतिथि में अंतर: आधार, पैन और पीएफ रिकॉर्ड में नाम या जन्मतिथि मेल न खाना।
बैंक खाते की समस्या: बैंक खाता आधार से न जुड़ा होना या आईएफएससी कोड गलत होना।
सेवा अवधि का रिकॉर्ड: पुरानी नौकरियों का पीएफ खाता नए खाते में ट्रांसफर न होना।
केवाईसी अधूरी: यूएएन में आधार, पैन और बैंक की केवाईसी पूरी न होना।
नियोक्ता की ओर से योगदान जमा न होना: कई बार कंपनी कर्मचारी का अंशदान समय पर जमा नहीं करती।
कर्मचारी पेंशन योजना क्या है
कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) 1995 में शुरू हुई थी। इसके तहत नियोक्ता के 12 प्रतिशत अंशदान में से एक हिस्सा पेंशन खाते में जाता है। आम तौर पर कम से कम 10 साल की सेवा पूरी करने और 58 वर्ष की उम्र होने पर कर्मचारी मासिक पेंशन का हकदार होता है। 50 वर्ष की उम्र के बाद कम दर पर जल्दी पेंशन लेने का विकल्प भी होता है। मासिक पेंशन के लिए आम तौर पर फॉर्म 10डी भरा जाता है।
पेंशन अटकी है तो क्या करें
अगर आपकी पीएफ पेंशन भी किसी कारण से अटकी है, तो ये कदम उठा सकते हैं:
पहले स्थिति जांचें: ईपीएफओ के यूनिफाइड मेंबर पोर्टल पर यूएएन से लॉगिन करके अपने दावे की स्थिति देखें।
केवाईसी पूरी करें: आधार, पैन और बैंक खाता यूएएन से जुड़े हों और सत्यापित हों।
नियोक्ता से संपर्क: कंपनी के एचआर या अकाउंट्स विभाग से फॉर्म सत्यापित करने का अनुरोध करें।
ऑनलाइन शिकायत: ईपीएफओ के शिकायत पोर्टल ईपीएफआईजीएमएस पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। शिकायत की संख्या संभालकर रखें।
क्षेत्रीय कार्यालय जाएं: समस्या न सुलझे, तो अपने क्षेत्रीय ईपीएफओ कार्यालय में जाकर अधिकारियों से मिलें, जैसा इस मामले में किया गया।
हेल्पलाइन: ईपीएफओ की टोल फ्री हेल्पलाइन 14470 पर भी जानकारी ली जा सकती है।
कंपनी बंद हो गई हो तो
कई कर्मचारियों की परेशानी यह होती है कि जिस कंपनी में उन्होंने काम किया, वह बंद हो चुकी है। ऐसे मामलों में ईपीएफओ के नियमों के तहत वैकल्पिक सत्यापन की व्यवस्था होती है। इसके लिए क्षेत्रीय कार्यालय में संपर्क कर जरूरी दस्तावेज, जैसे वेतन पर्ची, नियुक्ति पत्र या सेवा प्रमाण, जमा किए जा सकते हैं। अधिकारी रिकॉर्ड की जांच के बाद आगे की प्रक्रिया बताते हैं।
पेंशनभोगी इन बातों का रखें ध्यान
जीवन प्रमाणपत्र: पेंशन लगातार पाने के लिए हर साल जीवन प्रमाणपत्र जमा करना जरूरी है। इसे डिजिटल रूप से जीवन प्रमाण के जरिये या बैंक, सीएससी केंद्र और ईपीएफओ कार्यालय से जमा किया जा सकता है।
पीपीओ संभालें: पेंशन पेमेंट ऑर्डर (पीपीओ) नंबर एक जरूरी दस्तावेज है, इसे सुरक्षित रखें।
बैंक खाता: पेंशन वाले बैंक खाते को सक्रिय रखें और उसमें बदलाव की सूचना ईपीएफओ को दें।
नामांकन: परिवार के सदस्यों का नामांकन (ई-नॉमिनेशन) जरूर कराएं, ताकि किसी अनहोनी में परिवार को परेशानी न हो।
ठगों से सावधान
पीएफ और पेंशन दिलाने के नाम पर कई ठग सक्रिय रहते हैं। वे फोन कर खुद को ईपीएफओ अधिकारी बताते हैं और ओटीपी, बैंक की जानकारी या फीस मांगते हैं। याद रखें कि ईपीएफओ कभी फोन पर आपकी निजी जानकारी या पैसे नहीं मांगता। पेंशन से जुड़ी सारी सेवाएं मुफ्त हैं। किसी भी संदिग्ध कॉल की शिकायत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर करें।
कानपुर में बड़ी संख्या में पीएफ खाताधारक
कानपुर औद्योगिक शहर है, जहां कपड़ा मिलों, चमड़ा उद्योग, होजरी, इंजीनियरिंग और दूसरी फैक्ट्रियों में हजारों लोग काम करते रहे हैं। पुरानी मिलों के बंद होने से कई पूर्व कर्मचारियों को पेंशन और पीएफ से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में ईपीएफओ कार्यालय की ओर से इस तरह की सक्रिय मदद से लोगों का भरोसा बढ़ता है।
नियोक्ताओं की जिम्मेदारी
कानून के तहत नियोक्ता की जिम्मेदारी है कि वह कर्मचारियों का पीएफ अंशदान समय पर जमा करे और जरूरत पड़ने पर उनके दावे के फॉर्म सत्यापित करे। फॉर्म सत्यापित करने में देरी से एक बुजुर्ग की आजीविका प्रभावित होती है। नियोक्ताओं को चाहिए कि वे पूर्व कर्मचारियों के दावों को प्राथमिकता से निपटाएं।
निधि आपके निकट कार्यक्रम
ईपीएफओ हर महीने "निधि आपके निकट" जैसे जनसंपर्क कार्यक्रम भी आयोजित करता है, जिनमें सदस्य और पेंशनभोगी सीधे अधिकारियों से मिलकर अपनी शिकायतें रख सकते हैं। कानपुर के लोग ऐसे कार्यक्रमों की जानकारी क्षेत्रीय कार्यालय या ईपीएफओ की वेबसाइट से ले सकते हैं।
निष्कर्ष
कानपुर में दिनेश कुमार सिंह को ईपीएफओ के दखल के बाद पेंशन मिलना यह बताता है कि सही जगह आवाज उठाने पर समाधान मिल सकता है। अगर आपकी पेंशन भी अटकी है, तो घबराएं नहीं। अपने दस्तावेज और केवाईसी ठीक रखें, ऑनलाइन शिकायत करें और जरूरत पड़ने पर क्षेत्रीय कार्यालय से संपर्क करें।
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