होर्मुज में टैंकर पर ड्रोन हमला: पहले 21 साथियों को बचाया, फिर खुद कूदे कानपुर के नितिन
Kanpur chief engineer Nitin Shukla saved 21 crew before leaving burning tanker in Hormuz drone attack
Kanpur Live News Desk ·

कानपुर के श्याम नगर में शनिवार को खुशी का माहौल था। मर्चेंट नेवी में चीफ इंजीनियर नितिन शुक्ला होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकर पर हुए ड्रोन हमले के बाद सुरक्षित घर लौट आए। हमले के बाद जहाज पर अफरा-तफरी मच गई थी, लेकिन ऐसे मुश्किल समय में नितिन ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने पहले जहाज पर मौजूद 21 क्रू सदस्यों को लाइफबोट के जरिये सुरक्षित निकाला और सबसे आखिर में खुद लाइफबोट में कूदे। उनकी इस बहादुरी की चर्चा पूरे शहर में हो रही है।
9 अक्टूबर की शाम हुआ हमला
जानकारी के अनुसार नितिन शुक्ला पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर "एमटी जेम नंबर 2" पर चीफ इंजीनियर के रूप में तैनात थे। वे जून में तेल लेने के लिए संयुक्त अरब अमीरात गए थे। जहाज कई महीनों से होर्मुज जलडमरूमध्य के पास फंसा हुआ था। 9 अक्टूबर की शाम जहाज पर ड्रोन से हमला हुआ। हमले के बाद जहाज पर आग और दहशत का माहौल बन गया। रिपोर्टों के अनुसार इस हमले में टैंकर पूरी तरह तबाह हो गया।
पहले साथियों की जान, फिर अपनी
ऐसे हालात में जहाज के वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी सबसे बड़ी होती है। नितिन ने यह जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाई। उन्होंने घबराहट के बीच क्रू सदस्यों को संभाला और एक-एक कर सभी 21 साथियों को लाइफबोट तक पहुंचाया। जब सभी सुरक्षित लाइफबोट में आ गए, तब वे खुद उसमें कूदे। समुद्र में आपात स्थिति के दौरान "पहले क्रू, फिर खुद" का यह सिद्धांत मर्चेंट नेवी की परंपरा का हिस्सा माना जाता है, और नितिन ने इसे सच कर दिखाया।
पासपोर्ट और दस्तावेज जल गए
हमले में नितिन का पासपोर्ट और दूसरे जरूरी दस्तावेज भी जल गए। इसकी वजह से उनकी वतन वापसी में मुश्किल आई। विदेश में बिना पासपोर्ट के फंसना किसी के लिए भी बड़ी परेशानी होती है। परिवार ने दस्तावेज दोबारा बनवाने और नितिन को जल्द भारत लाने के लिए स्थानीय सांसद रमेश अवस्थी से संपर्क किया।
आधी रात को आया फोन
नितिन की पत्नी अंकिता शुक्ला प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं। 10 अक्टूबर की आधी रात के आसपास उन्हें फोन आया कि जहाज पर हमला हुआ है। यह खबर सुनकर पूरा परिवार सहम गया। चंडीगढ़ स्थित कंपनी कार्यालय ने परिवार से संपर्क किया। कुछ समय बाद नितिन ने खुद पत्नी को फोन कर बताया कि वे सुरक्षित हैं, जिसके बाद परिवार ने राहत की सांस ली। नितिन और अंकिता के छह साल की बेटी शानवी और दो साल का बेटा वरदान है।
पिता ने लगाई थी गुहार
नितिन के पिता राजेश शुक्ला कानपुर नगर निगम से सेवानिवृत्त राजस्व निरीक्षक हैं। हमले की खबर मिलने के बाद उन्होंने सांसद और प्रशासन से बेटे को जल्द से जल्द सुरक्षित भारत लाने की अपील की थी। बेटे के सकुशल लौटने पर राजेश शुक्ला भावुक हो गए। उन्होंने नवरात्र के दिनों में बेटे की वापसी को माता रानी का आशीर्वाद बताया।
लखनऊ एयरपोर्ट से घर तक
नितिन शनिवार, 17 अक्टूबर को लखनऊ के अमौसी हवाई अड्डे पहुंचे। वहां भाजपा उप कोषाध्यक्ष और उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष शैल शुक्ला ने उनका स्वागत किया और उन्हें कानपुर स्थित घर तक लेकर आए। घर पहुंचते ही परिवार, रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने उनका स्वागत किया।
20 साल का अनुभव आया काम
नितिन करीब 20 साल से मर्चेंट नेवी में सेवा दे रहे हैं। इतने लंबे अनुभव ने ही उन्हें संकट के समय सही फैसले लेने की ताकत दी। चीफ इंजीनियर जहाज के इंजन, बिजली और मशीनरी से जुड़ी पूरी व्यवस्था का प्रमुख होता है। आपात स्थिति में इंजन रूम से लेकर पूरे जहाज की सुरक्षा व्यवस्था में उसकी भूमिका बेहद अहम होती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है खतरनाक
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया के कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। भारत समेत कई देश अपनी तेल जरूरतों के लिए इस रास्ते पर निर्भर हैं। पिछले कुछ समय से पश्चिम एशिया में तनाव के कारण इस इलाके में जहाजों पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। रिपोर्टों के अनुसार 5 से 11 अक्टूबर के बीच ही इस क्षेत्र में 12 जहाजों पर हमले हुए। इससे वहां काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
भारतीय नाविकों की बड़ी संख्या
दुनिया भर के व्यापारिक जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं। भारत को समुद्री कर्मचारियों की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में गिना जाता है। उत्तर प्रदेश और कानपुर से भी कई युवा मर्चेंट नेवी में करियर बना रहे हैं। ऐसे हमले उनके परिवारों के लिए भारी चिंता का कारण बनते हैं। नाविक संगठन लगातार मांग करते रहे हैं कि खतरनाक समुद्री क्षेत्रों में काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएं।
विदेश में फंसे तो क्या करें
विदेश में काम करने वाले भारतीयों और उनके परिवारों के लिए कुछ जरूरी बातें:
पासपोर्ट, सीडीसी (कंटीन्यूअस डिस्चार्ज सर्टिफिकेट) और दूसरे जरूरी दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी ईमेल या डिजिलॉकर में सुरक्षित रखें।
जिस देश में काम कर रहे हैं, वहां के भारतीय दूतावास का आपातकालीन नंबर हमेशा पास रखें।
विदेश मंत्रालय के मदद पोर्टल पर शिकायत दर्ज की जा सकती है।
नाविक अपने शिपिंग कंपनी और भर्ती एजेंसी की पूरी जानकारी परिवार के साथ साझा करें।
आपात स्थिति में परिवार स्थानीय सांसद, जिला प्रशासन और नौवहन महानिदेशालय (डीजी शिपिंग) से संपर्क कर सकता है।
शहर को है गर्व
नितिन की बहादुरी की कहानी कानपुर के लोगों के लिए गर्व की बात है। संकट के समय अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जान बचाना सच्चे नेतृत्व की मिसाल है। श्याम नगर के लोग कहते हैं कि नितिन ने शहर का नाम रोशन किया है। युवाओं के लिए उनकी कहानी यह सीख देती है कि मुश्किल हालात में धैर्य और साहस सबसे बड़ा हथियार होता है।
निष्कर्ष
होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकर पर ड्रोन हमले के बाद नितिन शुक्ला की सुरक्षित वापसी परिवार और पूरे कानपुर के लिए राहत की खबर है। 21 साथियों को बचाने के बाद खुद जहाज छोड़ने का उनका फैसला उनकी जिम्मेदारी और साहस को दर्शाता है। यह घटना समुद्र में काम करने वाले नाविकों की चुनौतियों और उनकी सुरक्षा की जरूरत को भी सामने लाती है।
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होर्मुज में टैंकर पर ड्रोन हमला: पहले 21 साथियों को बचाया, फिर खुद कूदे कानपुर के नितिन
कानपुर के श्याम नगर में शनिवार को खुशी का माहौल था। मर्चेंट नेवी में चीफ इंजीनियर नितिन शुक्ला होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकर पर हुए ड्रोन हमले के बाद सुरक्षित घर लौट आए। हमले के बाद जहाज पर अफरा-तफरी मच गई थी, लेकिन ऐसे मुश्किल समय में नितिन ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने पहले जहाज पर मौजूद 21 क्रू सदस्यों को लाइफबोट के जरिये सुरक्षित निकाला और सबसे आखिर में खुद लाइफबोट में कूदे। उनकी इस बहादुरी की चर्चा पूरे शहर में हो रही है।
9 अक्टूबर की शाम हुआ हमला
जानकारी के अनुसार नितिन शुक्ला पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर "एमटी जेम नंबर 2" पर चीफ इंजीनियर के रूप में तैनात थे। वे जून में तेल लेने के लिए संयुक्त अरब अमीरात गए थे। जहाज कई महीनों से होर्मुज जलडमरूमध्य के पास फंसा हुआ था। 9 अक्टूबर की शाम जहाज पर ड्रोन से हमला हुआ। हमले के बाद जहाज पर आग और दहशत का माहौल बन गया। रिपोर्टों के अनुसार इस हमले में टैंकर पूरी तरह तबाह हो गया।
पहले साथियों की जान, फिर अपनी
ऐसे हालात में जहाज के वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी सबसे बड़ी होती है। नितिन ने यह जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाई। उन्होंने घबराहट के बीच क्रू सदस्यों को संभाला और एक-एक कर सभी 21 साथियों को लाइफबोट तक पहुंचाया। जब सभी सुरक्षित लाइफबोट में आ गए, तब वे खुद उसमें कूदे। समुद्र में आपात स्थिति के दौरान "पहले क्रू, फिर खुद" का यह सिद्धांत मर्चेंट नेवी की परंपरा का हिस्सा माना जाता है, और नितिन ने इसे सच कर दिखाया।
पासपोर्ट और दस्तावेज जल गए
हमले में नितिन का पासपोर्ट और दूसरे जरूरी दस्तावेज भी जल गए। इसकी वजह से उनकी वतन वापसी में मुश्किल आई। विदेश में बिना पासपोर्ट के फंसना किसी के लिए भी बड़ी परेशानी होती है। परिवार ने दस्तावेज दोबारा बनवाने और नितिन को जल्द भारत लाने के लिए स्थानीय सांसद रमेश अवस्थी से संपर्क किया।
आधी रात को आया फोन
नितिन की पत्नी अंकिता शुक्ला प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं। 10 अक्टूबर की आधी रात के आसपास उन्हें फोन आया कि जहाज पर हमला हुआ है। यह खबर सुनकर पूरा परिवार सहम गया। चंडीगढ़ स्थित कंपनी कार्यालय ने परिवार से संपर्क किया। कुछ समय बाद नितिन ने खुद पत्नी को फोन कर बताया कि वे सुरक्षित हैं, जिसके बाद परिवार ने राहत की सांस ली। नितिन और अंकिता के छह साल की बेटी शानवी और दो साल का बेटा वरदान है।
पिता ने लगाई थी गुहार
नितिन के पिता राजेश शुक्ला कानपुर नगर निगम से सेवानिवृत्त राजस्व निरीक्षक हैं। हमले की खबर मिलने के बाद उन्होंने सांसद और प्रशासन से बेटे को जल्द से जल्द सुरक्षित भारत लाने की अपील की थी। बेटे के सकुशल लौटने पर राजेश शुक्ला भावुक हो गए। उन्होंने नवरात्र के दिनों में बेटे की वापसी को माता रानी का आशीर्वाद बताया।
लखनऊ एयरपोर्ट से घर तक
नितिन शनिवार, 17 अक्टूबर को लखनऊ के अमौसी हवाई अड्डे पहुंचे। वहां भाजपा उप कोषाध्यक्ष और उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष शैल शुक्ला ने उनका स्वागत किया और उन्हें कानपुर स्थित घर तक लेकर आए। घर पहुंचते ही परिवार, रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने उनका स्वागत किया।
20 साल का अनुभव आया काम
नितिन करीब 20 साल से मर्चेंट नेवी में सेवा दे रहे हैं। इतने लंबे अनुभव ने ही उन्हें संकट के समय सही फैसले लेने की ताकत दी। चीफ इंजीनियर जहाज के इंजन, बिजली और मशीनरी से जुड़ी पूरी व्यवस्था का प्रमुख होता है। आपात स्थिति में इंजन रूम से लेकर पूरे जहाज की सुरक्षा व्यवस्था में उसकी भूमिका बेहद अहम होती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है खतरनाक
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया के कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। भारत समेत कई देश अपनी तेल जरूरतों के लिए इस रास्ते पर निर्भर हैं। पिछले कुछ समय से पश्चिम एशिया में तनाव के कारण इस इलाके में जहाजों पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। रिपोर्टों के अनुसार 5 से 11 अक्टूबर के बीच ही इस क्षेत्र में 12 जहाजों पर हमले हुए। इससे वहां काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
भारतीय नाविकों की बड़ी संख्या
दुनिया भर के व्यापारिक जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं। भारत को समुद्री कर्मचारियों की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में गिना जाता है। उत्तर प्रदेश और कानपुर से भी कई युवा मर्चेंट नेवी में करियर बना रहे हैं। ऐसे हमले उनके परिवारों के लिए भारी चिंता का कारण बनते हैं। नाविक संगठन लगातार मांग करते रहे हैं कि खतरनाक समुद्री क्षेत्रों में काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएं।
विदेश में फंसे तो क्या करें
विदेश में काम करने वाले भारतीयों और उनके परिवारों के लिए कुछ जरूरी बातें:
पासपोर्ट, सीडीसी (कंटीन्यूअस डिस्चार्ज सर्टिफिकेट) और दूसरे जरूरी दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी ईमेल या डिजिलॉकर में सुरक्षित रखें।
जिस देश में काम कर रहे हैं, वहां के भारतीय दूतावास का आपातकालीन नंबर हमेशा पास रखें।
विदेश मंत्रालय के मदद पोर्टल पर शिकायत दर्ज की जा सकती है।
नाविक अपने शिपिंग कंपनी और भर्ती एजेंसी की पूरी जानकारी परिवार के साथ साझा करें।
आपात स्थिति में परिवार स्थानीय सांसद, जिला प्रशासन और नौवहन महानिदेशालय (डीजी शिपिंग) से संपर्क कर सकता है।
शहर को है गर्व
नितिन की बहादुरी की कहानी कानपुर के लोगों के लिए गर्व की बात है। संकट के समय अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जान बचाना सच्चे नेतृत्व की मिसाल है। श्याम नगर के लोग कहते हैं कि नितिन ने शहर का नाम रोशन किया है। युवाओं के लिए उनकी कहानी यह सीख देती है कि मुश्किल हालात में धैर्य और साहस सबसे बड़ा हथियार होता है।
निष्कर्ष
होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकर पर ड्रोन हमले के बाद नितिन शुक्ला की सुरक्षित वापसी परिवार और पूरे कानपुर के लिए राहत की खबर है। 21 साथियों को बचाने के बाद खुद जहाज छोड़ने का उनका फैसला उनकी जिम्मेदारी और साहस को दर्शाता है। यह घटना समुद्र में काम करने वाले नाविकों की चुनौतियों और उनकी सुरक्षा की जरूरत को भी सामने लाती है।
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