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एशियाई पैरा खेल: भारत 88 पदकों के साथ चौथे स्थान पर, शीतल देवी को स्वर्ण

Asian Para Games 2026: India reach 88 medals and fourth place; Sheetal Devi wins mixed team gold, high jump sweep

Kanpur Live News Desk ·

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एशियाई पैरा खेल: भारत 88 पदकों के साथ चौथे स्थान पर, शीतल देवी को स्वर्ण
जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियाई पैरा खेल 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। गुरुवार, 22 अक्टूबर को भारत ने कई स्वर्ण पदक जीते और पदक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंच गया। भारत के कुल पदकों की संख्या 88 हो गई है, जिसमें 21 स्वर्ण, 26 रजत और 41 कांस्य पदक शामिल हैं। मशहूर तीरंदाज शीतल देवी ने तोमन कुमार के साथ मिलकर मिक्स्ड टीम स्पर्धा में स्वर्ण जीता, जबकि सोलैराज धर्मराज ने लंबी कूद में नया एशियाई रिकॉर्ड बनाया। पुरुषों की ऊंची कूद में तीनों पदक भारत के नाम रहे। पदक तालिका स्वर्ण: 21 रजत: 26 कांस्य: 41 कुल: 88 स्थान: चौथा तीसरे दिन के अंत में भारत के 62 पदक थे और वह पांचवें स्थान पर था। यानी एक ही दिन में भारत ने 26 पदक जोड़े और एक स्थान ऊपर चढ़ा। शीतल देवी और तोमन कुमार का सुनहरा निशाना पैरा तीरंदाजी की कंपाउंड मिक्स्ड टीम स्पर्धा में शीतल देवी और तोमन कुमार की जोड़ी ने फाइनल में इंडोनेशिया की जोड़ी को 151-148 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले शीतल देवी ने महिला कंपाउंड डबल्स में पायल नाग के साथ रजत पदक जीता था। शीतल देवी जन्म से बिना हाथों के हैं और पैरों से धनुष चलाकर निशाना साधती हैं। उनकी कहानी आज दुनियाभर के लोगों के लिए प्रेरणा है। सोलैराज धर्मराज का एशियाई रिकॉर्ड पुरुषों की लंबी कूद टी64 स्पर्धा में सोलैराज धर्मराज ने 7.15 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता। यह नया एशियाई रिकॉर्ड है। उन्होंने 2025 में बनाए अपने ही 7.08 मीटर के रिकॉर्ड को तोड़ा। सोलैराज ने इस स्पर्धा में अपना खिताब भी बचाया। ऊंची कूद में क्लीन स्वीप पुरुषों की ऊंची कूद टी63 स्पर्धा में भारत ने तीनों पदक जीतकर क्लीन स्वीप किया: स्वर्ण: शैलेश कुमार, 1.89 मीटर (नया खेल रिकॉर्ड) रजत: वरुण सिंह भाटी, 1.84 मीटर कांस्य: राहुल, 1.81 मीटर 2022 के एशियाई पैरा खेलों में भी भारत ने इस स्पर्धा में क्लीन स्वीप किया था। शैलेश कुमार का इन खेलों में यह दूसरा पदक है, इससे पहले उन्होंने लंबी कूद में कांस्य जीता था। वरुण सिंह भाटी रियो पैरालंपिक में कांस्य पदक जीत चुके हैं। दिलीप गावित का दूसरा स्वर्ण पुरुषों की 400 मीटर टी47 दौड़ में दिलीप महादु गावित ने 48.27 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता। यह इन खेलों में उनका दूसरा स्वर्ण है। इससे पहले उन्होंने 100 मीटर टी47 में भी स्वर्ण जीता था। सुवर्णा राज का स्वर्ण महिलाओं की डिस्कस थ्रो एफ54 स्पर्धा में सुवर्णा राज ने 15.66 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने 2022 के अपने प्रदर्शन में सुधार किया। स्वाति चौधरी का ऐतिहासिक रजत महिलाओं की डब्ल्यू1 व्यक्तिगत तीरंदाजी में स्वाति चौधरी ने रजत पदक जीता। फाइनल में उन्हें चीन की खिलाड़ी से 4-6 से हार मिली। यह एशियाई पैरा खेलों में इस स्पर्धा में भारत का पहला पदक है। अन्य पदक विजेता रजत: तेजलबेन डामोर: महिला 400 मीटर टी12 (57.60 सेकंड) कपिल कुमार: पुरुष 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस10 (4:38.44) कांस्य: तेजस नंदकुमार: पुरुष 100 मीटर बैकस्ट्रोक एस7 (1:18.58), तैराकी में भारत का 10वां पदक स्वातिक पाटिल: पुरुष 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एसबी9 (1:13.77) रवि बुडिगिना: पुरुष 50 मीटर फ्रीस्टाइल एस13 (25.89 सेकंड), इन खेलों में उनका तीसरा पदक नवीन शिवकुमार और सूर्यकांत यादव: पैरा बैडमिंटन पुरुष डबल्स एसएल3-एसयू5 तैराकी में भी दम भारत को पारंपरिक रूप से पैरा एथलेटिक्स में ज्यादा पदक मिलते रहे हैं, लेकिन इस बार तैराकी में भी भारतीय खिलाड़ी चमक रहे हैं। तैराकी में भारत के 10 पदक हो चुके हैं। यह भारत में पैरा तैराकी के बढ़ते स्तर को दिखाता है। 100 पदकों का लक्ष्य कोच सत्यनारायण ने भरोसा जताया है कि भारत इन खेलों के खत्म होने से पहले 100 पदकों का आंकड़ा पार कर लेगा। खेल 24 अक्टूबर तक चलेंगे। 2022 में हांगझोउ में हुए एशियाई पैरा खेलों में भारत ने 111 पदक जीतकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। अब देखना होगा कि भारतीय दल उस रिकॉर्ड के कितना करीब पहुंचता है। पैरा खिलाड़ियों का संघर्ष हर पैरा खिलाड़ी की कहानी संघर्ष और हौसले की कहानी है। किसी ने दुर्घटना में अपना अंग खोया, तो कोई जन्म से दिव्यांगता के साथ जी रहा है। सामाजिक बाधाओं, आर्थिक तंगी और सुविधाओं की कमी के बावजूद इन खिलाड़ियों ने कड़ी मेहनत से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर तय किया है। उनकी सफलता बताती है कि सही मौका और प्रशिक्षण मिले, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। युवाओं के लिए संदेश कानपुर और उत्तर प्रदेश के दिव्यांग युवा इन खिलाड़ियों से प्रेरणा ले सकते हैं। जिला खेल कार्यालय, खेलो इंडिया पैरा गेम्स और राज्य पैरा खेल संघों के जरिये प्रतिभावान खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका मिलता है। परिवार और समाज का साथ मिले, तो ये युवा भी देश के लिए पदक जीत सकते हैं। पैरा तीरंदाजी में बढ़ता दबदबा पैरा तीरंदाजी में भारत का प्रदर्शन लगातार बेहतर हो रहा है। शीतल देवी, तोमन कुमार, पायल नाग और स्वाति चौधरी जैसे खिलाड़ियों ने इन खेलों में भारत के लिए कई पदक जीते हैं। खास बात यह है कि इनमें से कई खिलाड़ी बेहद साधारण परिवारों से आते हैं। सही प्रशिक्षण और सुविधाएं मिलने पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित की है। पैरा तीरंदाजी में मिली यह सफलता आने वाले पैरालंपिक खेलों के लिए भी उम्मीद जगाती है। रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन इन खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने कई खेल रिकॉर्ड और एशियाई रिकॉर्ड बनाए हैं। सोलैराज धर्मराज का एशियाई रिकॉर्ड, शैलेश कुमार, प्रवीण कुमार और सचिन खिलारी के खेल रिकॉर्ड बताते हैं कि भारतीय खिलाड़ी केवल पदक ही नहीं जीत रहे, बल्कि नए मानक भी स्थापित कर रहे हैं। निष्कर्ष एशियाई पैरा खेल 2026 में भारत का प्रदर्शन ऐतिहासिक बनता जा रहा है। 88 पदक, चौथा स्थान, एशियाई रिकॉर्ड और ऊंची कूद में क्लीन स्वीप भारतीय पैरा खेलों की बढ़ती ताकत का सबूत हैं। शीतल देवी जैसी खिलाड़ी पूरी दुनिया को प्रेरित कर रही हैं। अब पूरे देश की नजर 100 पदकों के आंकड़े पर है। खेल जगत की हर बड़ी खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।

एशियाई पैरा खेल: भारत 88 पदकों के साथ चौथे स्थान पर, शीतल देवी को स्वर्ण

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियाई पैरा खेल 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। गुरुवार, 22 अक्टूबर को भारत ने कई स्वर्ण पदक जीते और पदक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंच गया। भारत के कुल पदकों की संख्या 88 हो गई है, जिसमें 21 स्वर्ण, 26 रजत और 41 कांस्य पदक शामिल हैं। मशहूर तीरंदाज शीतल देवी ने तोमन कुमार के साथ मिलकर मिक्स्ड टीम स्पर्धा में स्वर्ण जीता, जबकि सोलैराज धर्मराज ने लंबी कूद में नया एशियाई रिकॉर्ड बनाया। पुरुषों की ऊंची कूद में तीनों पदक भारत के नाम रहे। पदक तालिका स्वर्ण: 21 रजत: 26 कांस्य: 41 कुल: 88 स्थान: चौथा तीसरे दिन के अंत में भारत के 62 पदक थे और वह पांचवें स्थान पर था। यानी एक ही दिन में भारत ने 26 पदक जोड़े और एक स्थान ऊपर चढ़ा। शीतल देवी और तोमन कुमार का सुनहरा निशाना पैरा तीरंदाजी की कंपाउंड मिक्स्ड टीम स्पर्धा में शीतल देवी और तोमन कुमार की जोड़ी ने फाइनल में इंडोनेशिया की जोड़ी को 151-148 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले शीतल देवी ने महिला कंपाउंड डबल्स में पायल नाग के साथ रजत पदक जीता था। शीतल देवी जन्म से बिना हाथों के हैं और पैरों से धनुष चलाकर निशाना साधती हैं। उनकी कहानी आज दुनियाभर के लोगों के लिए प्रेरणा है। सोलैराज धर्मराज का एशियाई रिकॉर्ड पुरुषों की लंबी कूद टी64 स्पर्धा में सोलैराज धर्मराज ने 7.15 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता। यह नया एशियाई रिकॉर्ड है। उन्होंने 2025 में बनाए अपने ही 7.08 मीटर के रिकॉर्ड को तोड़ा। सोलैराज ने इस स्पर्धा में अपना खिताब भी बचाया। ऊंची कूद में क्लीन स्वीप पुरुषों की ऊंची कूद टी63 स्पर्धा में भारत ने तीनों पदक जीतकर क्लीन स्वीप किया: स्वर्ण: शैलेश कुमार, 1.89 मीटर (नया खेल रिकॉर्ड) रजत: वरुण सिंह भाटी, 1.84 मीटर कांस्य: राहुल, 1.81 मीटर 2022 के एशियाई पैरा खेलों में भी भारत ने इस स्पर्धा में क्लीन स्वीप किया था। शैलेश कुमार का इन खेलों में यह दूसरा पदक है, इससे पहले उन्होंने लंबी कूद में कांस्य जीता था। वरुण सिंह भाटी रियो पैरालंपिक में कांस्य पदक जीत चुके हैं। दिलीप गावित का दूसरा स्वर्ण पुरुषों की 400 मीटर टी47 दौड़ में दिलीप महादु गावित ने 48.27 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता। यह इन खेलों में उनका दूसरा स्वर्ण है। इससे पहले उन्होंने 100 मीटर टी47 में भी स्वर्ण जीता था। सुवर्णा राज का स्वर्ण महिलाओं की डिस्कस थ्रो एफ54 स्पर्धा में सुवर्णा राज ने 15.66 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने 2022 के अपने प्रदर्शन में सुधार किया। स्वाति चौधरी का ऐतिहासिक रजत महिलाओं की डब्ल्यू1 व्यक्तिगत तीरंदाजी में स्वाति चौधरी ने रजत पदक जीता। फाइनल में उन्हें चीन की खिलाड़ी से 4-6 से हार मिली। यह एशियाई पैरा खेलों में इस स्पर्धा में भारत का पहला पदक है। अन्य पदक विजेता रजत: तेजलबेन डामोर: महिला 400 मीटर टी12 (57.60 सेकंड) कपिल कुमार: पुरुष 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस10 (4:38.44) कांस्य: तेजस नंदकुमार: पुरुष 100 मीटर बैकस्ट्रोक एस7 (1:18.58), तैराकी में भारत का 10वां पदक स्वातिक पाटिल: पुरुष 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एसबी9 (1:13.77) रवि बुडिगिना: पुरुष 50 मीटर फ्रीस्टाइल एस13 (25.89 सेकंड), इन खेलों में उनका तीसरा पदक नवीन शिवकुमार और सूर्यकांत यादव: पैरा बैडमिंटन पुरुष डबल्स एसएल3-एसयू5 तैराकी में भी दम भारत को पारंपरिक रूप से पैरा एथलेटिक्स में ज्यादा पदक मिलते रहे हैं, लेकिन इस बार तैराकी में भी भारतीय खिलाड़ी चमक रहे हैं। तैराकी में भारत के 10 पदक हो चुके हैं। यह भारत में पैरा तैराकी के बढ़ते स्तर को दिखाता है। 100 पदकों का लक्ष्य कोच सत्यनारायण ने भरोसा जताया है कि भारत इन खेलों के खत्म होने से पहले 100 पदकों का आंकड़ा पार कर लेगा। खेल 24 अक्टूबर तक चलेंगे। 2022 में हांगझोउ में हुए एशियाई पैरा खेलों में भारत ने 111 पदक जीतकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। अब देखना होगा कि भारतीय दल उस रिकॉर्ड के कितना करीब पहुंचता है। पैरा खिलाड़ियों का संघर्ष हर पैरा खिलाड़ी की कहानी संघर्ष और हौसले की कहानी है। किसी ने दुर्घटना में अपना अंग खोया, तो कोई जन्म से दिव्यांगता के साथ जी रहा है। सामाजिक बाधाओं, आर्थिक तंगी और सुविधाओं की कमी के बावजूद इन खिलाड़ियों ने कड़ी मेहनत से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर तय किया है। उनकी सफलता बताती है कि सही मौका और प्रशिक्षण मिले, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। युवाओं के लिए संदेश कानपुर और उत्तर प्रदेश के दिव्यांग युवा इन खिलाड़ियों से प्रेरणा ले सकते हैं। जिला खेल कार्यालय, खेलो इंडिया पैरा गेम्स और राज्य पैरा खेल संघों के जरिये प्रतिभावान खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका मिलता है। परिवार और समाज का साथ मिले, तो ये युवा भी देश के लिए पदक जीत सकते हैं। पैरा तीरंदाजी में बढ़ता दबदबा पैरा तीरंदाजी में भारत का प्रदर्शन लगातार बेहतर हो रहा है। शीतल देवी, तोमन कुमार, पायल नाग और स्वाति चौधरी जैसे खिलाड़ियों ने इन खेलों में भारत के लिए कई पदक जीते हैं। खास बात यह है कि इनमें से कई खिलाड़ी बेहद साधारण परिवारों से आते हैं। सही प्रशिक्षण और सुविधाएं मिलने पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित की है। पैरा तीरंदाजी में मिली यह सफलता आने वाले पैरालंपिक खेलों के लिए भी उम्मीद जगाती है। रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन इन खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने कई खेल रिकॉर्ड और एशियाई रिकॉर्ड बनाए हैं। सोलैराज धर्मराज का एशियाई रिकॉर्ड, शैलेश कुमार, प्रवीण कुमार और सचिन खिलारी के खेल रिकॉर्ड बताते हैं कि भारतीय खिलाड़ी केवल पदक ही नहीं जीत रहे, बल्कि नए मानक भी स्थापित कर रहे हैं। निष्कर्ष एशियाई पैरा खेल 2026 में भारत का प्रदर्शन ऐतिहासिक बनता जा रहा है। 88 पदक, चौथा स्थान, एशियाई रिकॉर्ड और ऊंची कूद में क्लीन स्वीप भारतीय पैरा खेलों की बढ़ती ताकत का सबूत हैं। शीतल देवी जैसी खिलाड़ी पूरी दुनिया को 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