कानपुर के जाजमऊ में आवारा कुत्तों का आतंक: दूध लेने निकले सिलाई कारीगर को झुंड ने नोचा, दो महीने में 20 लोग बने शिकार
Stray dog menace in Kanpur's Jajmau: Pack mauls tailor, around 20 attacked in two months
Kanpur Live News Desk ·

कानपुर के जाजमऊ इलाके में आवारा कुत्तों का आतंक लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। शनिवार सुबह तिवारीपुर इलाके में आवारा कुत्तों के झुंड ने दूध लेने निकले एक सिलाई कारीगर पर हमला कर दिया और उन्हें सड़क पर गिराकर बुरी तरह नोच डाला। स्थानीय लोगों ने लाठी-डंडों से कुत्तों को भगाकर किसी तरह उनकी जान बचाई। इलाके के लोगों का कहना है कि पिछले दो महीनों से यहां आवारा कुत्तों का खौफ बना हुआ है और अब तक कई लोग इनका शिकार हो चुके हैं। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।
सुबह साढ़े छह बजे हुआ हमला
जाजमऊ के ताड़बागिया निवासी 42 वर्षीय विनोद कुमार निषाद सिलाई का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि वह शनिवार सुबह करीब साढ़े छह बजे दूध लेने के लिए घर से निकले थे। घर से मुश्किल से 20 कदम की दूरी पर पहुंचे थे कि सात-आठ आवारा कुत्तों के झुंड ने उन्हें दौड़ा लिया।
भागने की कोशिश के दौरान एक कुत्ते ने उनका पैर दबोच लिया, जिससे वह सड़क पर गिर पड़े। इसके बाद पूरे झुंड ने उन्हें घेर लिया और नोचना शुरू कर दिया। कुत्तों ने उनके शरीर पर करीब एक दर्जन जगह काटकर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया।
पड़ोसियों ने बचाई जान
विनोद की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़ पड़े। स्थानीय निवासी अनिल कुमार और विशाल निषाद ने लाठी-डंडे फटकारकर कुत्तों को खदेड़ा और उनकी जान बचाई। इसके बाद गंभीर हालत में विनोद को इलाज के लिए कांशीराम अस्पताल ले जाया गया।
अगर समय पर पड़ोसी मदद के लिए न पहुंचते, तो यह हमला और भी गंभीर हो सकता था। कुत्तों का झुंड जब किसी व्यक्ति पर हमला करता है, तो अकेले व्यक्ति के लिए खुद को बचा पाना बेहद मुश्किल होता है।
दो महीने में करीब 20 लोग शिकार
स्थानीय लोगों के अनुसार तिवारीपुर और आसपास के इलाकों में पिछले दो महीनों से आवारा कुत्तों का भयंकर आतंक है। लोगों का कहना है कि इस दौरान स्कूली बच्चों समेत करीब 20 लोग कुत्तों के हमले का शिकार हो चुके हैं।
पांच दिन पहले मासूम पर हमला
इससे पहले बीते रविवार को कक्षा एक में पढ़ने वाले एक मासूम बच्चे को कुत्तों ने घेरकर 10 जगह काट लिया था। लगातार हो रही इन घटनाओं से इलाके के लोग डरे हुए हैं। अभिभावक बच्चों को अकेले स्कूल भेजने से कतराने लगे हैं और सुबह-शाम सड़कों पर निकलने में लोग डर महसूस कर रहे हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं हमले
विशेषज्ञ आवारा कुत्तों के आक्रामक होने के कई कारण बताते हैं। खुले में फेंका गया कचरा और मांस के टुकड़े कुत्तों को किसी खास इलाके में इकट्ठा करते हैं। झुंड में रहने पर कुत्तों का व्यवहार ज्यादा आक्रामक हो जाता है। भोजन की कमी, अपने इलाके की रक्षा की प्रवृत्ति, प्रजनन का मौसम और पिल्लों की सुरक्षा जैसी वजहें भी उन्हें हमलावर बना सकती हैं। सुबह जल्दी और देर शाम, जब सड़कों पर लोग कम होते हैं, तब ऐसे हमलों का खतरा ज्यादा रहता है।
जाजमऊ जैसे इलाकों में, जहां चमड़ा उद्योग और उससे जुड़े कचरे की समस्या रहती है, वहां कचरा प्रबंधन की कमी आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने की एक वजह हो सकती है।
कुत्ता काटे तो तुरंत करें ये काम
कुत्ते के काटने को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि इससे रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी हो सकती है। रेबीज के लक्षण दिखने के बाद यह बीमारी लगभग हमेशा जानलेवा साबित होती है, लेकिन समय पर इलाज से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है।
घाव को तुरंत धोएं: काटे गए स्थान को बहते पानी और साबुन से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं। यह सबसे जरूरी पहला कदम है।
एंटीसेप्टिक लगाएं: धोने के बाद घाव पर एंटीसेप्टिक लगाएं।
घाव पर कुछ न बांधें: घाव पर मिर्च, हल्दी, तेल या कोई घरेलू लेप न लगाएं और उसे कसकर न बांधें।
तुरंत अस्पताल जाएं: बिना देर किए नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र जाएं। डॉक्टर घाव की गंभीरता देखकर एंटी-रेबीज टीका और जरूरत होने पर इम्युनोग्लोबुलिन देते हैं।
टीके का पूरा कोर्स लें: डॉक्टर के बताए अनुसार टीके की सभी खुराकें समय पर लें। बीच में कोर्स न छोड़ें।
सरकारी अस्पतालों में एंटी-रेबीज टीका आम तौर पर उपलब्ध रहता है। झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों के चक्कर में बिल्कुल न पड़ें, क्योंकि इससे कीमती समय बर्बाद होता है।
रेबीज: जानलेवा पर पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी
रेबीज एक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित जानवर की लार के जरिये इंसान में पहुंचती है। ज्यादातर मामलों में यह कुत्ते के काटने या खरोंच से फैलती है। वायरस शरीर में पहुंचने के बाद धीरे-धीरे तंत्रिका तंत्र की ओर बढ़ता है। इसके लक्षण कुछ दिनों से लेकर कई हफ्तों या महीनों बाद दिख सकते हैं। एक बार लक्षण शुरू हो जाएं, तो बचाव लगभग असंभव हो जाता है। यही वजह है कि डॉक्टर कुत्ते के काटने के बाद बिना देर किए टीका लगवाने पर जोर देते हैं, भले ही घाव छोटा क्यों न हो।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया में रेबीज से होने वाली मौतों का बड़ा हिस्सा एशिया और अफ्रीका के देशों में होता है और भारत उन देशों में शामिल है, जहां यह बीमारी अब भी गंभीर चुनौती बनी हुई है। जागरूकता और समय पर टीकाकरण से इन मौतों को रोका जा सकता है।
पालतू कुत्तों का भी कराएं टीकाकरण
जिन घरों में पालतू कुत्ते हैं, उन्हें भी अपने पालतू का नियमित रूप से एंटी-रेबीज टीकाकरण कराना चाहिए। पालतू जानवर का पंजीकरण नगर निगम में कराना और उसे सार्वजनिक जगहों पर पट्टे के साथ घुमाना जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है। इससे न केवल दूसरों की सुरक्षा होती है, बल्कि आपके पालतू की सेहत भी सुरक्षित रहती है।
आवारा कुत्तों से बचाव के उपाय
कुत्तों के झुंड को देखकर भागें नहीं, क्योंकि भागने से वे पीछा करते हैं। धीरे-धीरे पीछे हटें।
कुत्तों की आंखों में सीधे घूरकर न देखें, इसे वे चुनौती समझ सकते हैं।
सुबह-शाम सुनसान रास्तों पर अकेले जाने से बचें। हाथ में छड़ी रखें।
खाते हुए, सोते हुए या पिल्लों के साथ बैठे कुत्ते को परेशान न करें।
बच्चों को कुत्तों को छेड़ने या उनके पास जाने से रोकें और उन्हें बचाव के तरीके सिखाएं।
दोपहिया वाहन पर कुत्ते पीछा करें, तो घबराकर तेज भगाने के बजाय नियंत्रित गति बनाए रखें।
बच्चों पर रखें खास नजर
आवारा कुत्तों के हमलों में बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, क्योंकि वे कुत्तों का सामना नहीं कर पाते और कई बार डरकर भागते हैं। छोटे कद के कारण बच्चों के चेहरे और सिर पर चोट लगने का खतरा भी ज्यादा रहता है। अभिभावकों को चाहिए कि जिन इलाकों में कुत्तों का आतंक है, वहां बच्चों को अकेले बाहर न भेजें और स्कूल आने-जाने के दौरान किसी बड़े को साथ रखें।
नगर निगम की भूमिका
शहरी क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से नगर निगम की होती है। पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम के तहत कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया जाता है, ताकि उनकी संख्या नियंत्रित हो और रेबीज का खतरा कम हो। नियमों के अनुसार नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को उसी इलाके में छोड़ा जाता है। आक्रामक या बीमार कुत्तों के मामलों में विशेष प्रक्रिया अपनाई जाती है।
शिकायत कैसे करें
अगर आपके इलाके में भी आवारा कुत्तों का आतंक है, तो आप इन तरीकों से शिकायत कर सकते हैं:
नगर निगम के जोनल कार्यालय में लिखित शिकायत दें।
अपने वार्ड पार्षद को समस्या की जानकारी दें।
उत्तर प्रदेश सरकार के आईजीआरएस (जनसुनवाई) पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
शिकायत में इलाके का सटीक पता, कुत्तों की अनुमानित संख्या और हुई घटनाओं का विवरण जरूर दें।
पशु प्रेम और जनसुरक्षा में संतुलन
आवारा कुत्तों का मुद्दा संवेदनशील है। एक ओर पशु प्रेमी उनके संरक्षण और मानवीय व्यवहार की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर आम लोगों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि नियमित नसबंदी, टीकाकरण, बेहतर कचरा प्रबंधन और जागरूकता के जरिये ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकल सकता है। जो लोग कुत्तों को खाना खिलाते हैं, उन्हें भी चाहिए कि वे तय जगहों पर ही ऐसा करें और कुत्तों के टीकाकरण में सहयोग करें।
स्थानीय लोगों की मांग
तिवारीपुर और आसपास के लोगों ने मांग की है कि इलाके में आवारा कुत्तों को लेकर जल्द से जल्द प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि लोग बिना डर के सड़कों पर निकल सकें। लगातार हो रही घटनाओं से लोगों में चिंता बढ़ रही है, खासकर उन परिवारों में जिनके बच्चे रोज पैदल स्कूल जाते हैं।
निष्कर्ष
जाजमऊ की यह घटना शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या की ओर गंभीर इशारा करती है। दो महीनों में करीब 20 लोगों का शिकार होना बताता है कि इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। तब तक लोगों को सतर्क रहने, बच्चों का खास ध्यान रखने और कुत्ते के काटने पर तुरंत इलाज कराने की सलाह दी जाती है।
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कानपुर के जाजमऊ में आवारा कुत्तों का आतंक: दूध लेने निकले सिलाई कारीगर को झुंड ने नोचा, दो महीने में 20 लोग बने शिकार
कानपुर के जाजमऊ इलाके में आवारा कुत्तों का आतंक लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। शनिवार सुबह तिवारीपुर इलाके में आवारा कुत्तों के झुंड ने दूध लेने निकले एक सिलाई कारीगर पर हमला कर दिया और उन्हें सड़क पर गिराकर बुरी तरह नोच डाला। स्थानीय लोगों ने लाठी-डंडों से कुत्तों को भगाकर किसी तरह उनकी जान बचाई। इलाके के लोगों का कहना है कि पिछले दो महीनों से यहां आवारा कुत्तों का खौफ बना हुआ है और अब तक कई लोग इनका शिकार हो चुके हैं। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।
सुबह साढ़े छह बजे हुआ हमला
जाजमऊ के ताड़बागिया निवासी 42 वर्षीय विनोद कुमार निषाद सिलाई का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि वह शनिवार सुबह करीब साढ़े छह बजे दूध लेने के लिए घर से निकले थे। घर से मुश्किल से 20 कदम की दूरी पर पहुंचे थे कि सात-आठ आवारा कुत्तों के झुंड ने उन्हें दौड़ा लिया।
भागने की कोशिश के दौरान एक कुत्ते ने उनका पैर दबोच लिया, जिससे वह सड़क पर गिर पड़े। इसके बाद पूरे झुंड ने उन्हें घेर लिया और नोचना शुरू कर दिया। कुत्तों ने उनके शरीर पर करीब एक दर्जन जगह काटकर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया।
पड़ोसियों ने बचाई जान
विनोद की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़ पड़े। स्थानीय निवासी अनिल कुमार और विशाल निषाद ने लाठी-डंडे फटकारकर कुत्तों को खदेड़ा और उनकी जान बचाई। इसके बाद गंभीर हालत में विनोद को इलाज के लिए कांशीराम अस्पताल ले जाया गया।
अगर समय पर पड़ोसी मदद के लिए न पहुंचते, तो यह हमला और भी गंभीर हो सकता था। कुत्तों का झुंड जब किसी व्यक्ति पर हमला करता है, तो अकेले व्यक्ति के लिए खुद को बचा पाना बेहद मुश्किल होता है।
दो महीने में करीब 20 लोग शिकार
स्थानीय लोगों के अनुसार तिवारीपुर और आसपास के इलाकों में पिछले दो महीनों से आवारा कुत्तों का भयंकर आतंक है। लोगों का कहना है कि इस दौरान स्कूली बच्चों समेत करीब 20 लोग कुत्तों के हमले का शिकार हो चुके हैं।
पांच दिन पहले मासूम पर हमला
इससे पहले बीते रविवार को कक्षा एक में पढ़ने वाले एक मासूम बच्चे को कुत्तों ने घेरकर 10 जगह काट लिया था। लगातार हो रही इन घटनाओं से इलाके के लोग डरे हुए हैं। अभिभावक बच्चों को अकेले स्कूल भेजने से कतराने लगे हैं और सुबह-शाम सड़कों पर निकलने में लोग डर महसूस कर रहे हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं हमले
विशेषज्ञ आवारा कुत्तों के आक्रामक होने के कई कारण बताते हैं। खुले में फेंका गया कचरा और मांस के टुकड़े कुत्तों को किसी खास इलाके में इकट्ठा करते हैं। झुंड में रहने पर कुत्तों का व्यवहार ज्यादा आक्रामक हो जाता है। भोजन की कमी, अपने इलाके की रक्षा की प्रवृत्ति, प्रजनन का मौसम और पिल्लों की सुरक्षा जैसी वजहें भी उन्हें हमलावर बना सकती हैं। सुबह जल्दी और देर शाम, जब सड़कों पर लोग कम होते हैं, तब ऐसे हमलों का खतरा ज्यादा रहता है।
जाजमऊ जैसे इलाकों में, जहां चमड़ा उद्योग और उससे जुड़े कचरे की समस्या रहती है, वहां कचरा प्रबंधन की कमी आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने की एक वजह हो सकती है।
कुत्ता काटे तो तुरंत करें ये काम
कुत्ते के काटने को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि इससे रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी हो सकती है। रेबीज के लक्षण दिखने के बाद यह बीमारी लगभग हमेशा जानलेवा साबित होती है, लेकिन समय पर इलाज से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है।
घाव को तुरंत धोएं: काटे गए स्थान को बहते पानी और साबुन से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं। यह सबसे जरूरी पहला कदम है।
एंटीसेप्टिक लगाएं: धोने के बाद घाव पर एंटीसेप्टिक लगाएं।
घाव पर कुछ न बांधें: घाव पर मिर्च, हल्दी, तेल या कोई घरेलू लेप न लगाएं और उसे कसकर न बांधें।
तुरंत अस्पताल जाएं: बिना देर किए नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र जाएं। डॉक्टर घाव की गंभीरता देखकर एंटी-रेबीज टीका और जरूरत होने पर इम्युनोग्लोबुलिन देते हैं।
टीके का पूरा कोर्स लें: डॉक्टर के बताए अनुसार टीके की सभी खुराकें समय पर लें। बीच में कोर्स न छोड़ें।
सरकारी अस्पतालों में एंटी-रेबीज टीका आम तौर पर उपलब्ध रहता है। झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों के चक्कर में बिल्कुल न पड़ें, क्योंकि इससे कीमती समय बर्बाद होता है।
रेबीज: जानलेवा पर पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी
रेबीज एक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित जानवर की लार के जरिये इंसान में पहुंचती है। ज्यादातर मामलों में यह कुत्ते के काटने या खरोंच से फैलती है। वायरस शरीर में पहुंचने के बाद धीरे-धीरे तंत्रिका तंत्र की ओर बढ़ता है। इसके लक्षण कुछ दिनों से लेकर कई हफ्तों या महीनों बाद दिख सकते हैं। एक बार लक्षण शुरू हो जाएं, तो बचाव लगभग असंभव हो जाता है। यही वजह है कि डॉक्टर कुत्ते के काटने के बाद बिना देर किए टीका लगवाने पर जोर देते हैं, भले ही घाव छोटा क्यों न हो।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया में रेबीज से होने वाली मौतों का बड़ा हिस्सा एशिया और अफ्रीका के देशों में होता है और भारत उन देशों में शामिल है, जहां यह बीमारी अब भी गंभीर चुनौती बनी हुई है। जागरूकता और समय पर टीकाकरण से इन मौतों को रोका जा सकता है।
पालतू कुत्तों का भी कराएं टीकाकरण
जिन घरों में पालतू कुत्ते हैं, उन्हें भी अपने पालतू का नियमित रूप से एंटी-रेबीज टीकाकरण कराना चाहिए। पालतू जानवर का पंजीकरण नगर निगम में कराना और उसे सार्वजनिक जगहों पर पट्टे के साथ घुमाना जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है। इससे न केवल दूसरों की सुरक्षा होती है, बल्कि आपके पालतू की सेहत भी सुरक्षित रहती है।
आवारा कुत्तों से बचाव के उपाय
कुत्तों के झुंड को देखकर भागें नहीं, क्योंकि भागने से वे पीछा करते हैं। धीरे-धीरे पीछे हटें।
कुत्तों की आंखों में सीधे घूरकर न देखें, इसे वे चुनौती समझ सकते हैं।
सुबह-शाम सुनसान रास्तों पर अकेले जाने से बचें। हाथ में छड़ी रखें।
खाते हुए, सोते हुए या पिल्लों के साथ बैठे कुत्ते को परेशान न करें।
बच्चों को कुत्तों को छेड़ने या उनके पास जाने से रोकें और उन्हें बचाव के तरीके सिखाएं।
दोपहिया वाहन पर कुत्ते पीछा करें, तो घबराकर तेज भगाने के बजाय नियंत्रित गति बनाए रखें।
बच्चों पर रखें खास नजर
आवारा कुत्तों के हमलों में बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, क्योंकि वे कुत्तों का सामना नहीं कर पाते और कई बार डरकर भागते हैं। छोटे कद के कारण बच्चों के चेहरे और सिर पर चोट लगने का खतरा भी ज्यादा रहता है। अभिभावकों को चाहिए कि जिन इलाकों में कुत्तों का आतंक है, वहां बच्चों को अकेले बाहर न भेजें और स्कूल आने-जाने के दौरान किसी बड़े को साथ रखें।
नगर निगम की भूमिका
शहरी क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से नगर निगम की होती है। पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम के तहत कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया जाता है, ताकि उनकी संख्या नियंत्रित हो और रेबीज का खतरा कम हो। नियमों के अनुसार नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को उसी इलाके में छोड़ा जाता है। आक्रामक या बीमार कुत्तों के मामलों में विशेष प्रक्रिया अपनाई जाती है।
शिकायत कैसे करें
अगर आपके इलाके में भी आवारा कुत्तों का आतंक है, तो आप इन तरीकों से शिकायत कर सकते हैं:
नगर निगम के जोनल कार्यालय में लिखित शिकायत दें।
अपने वार्ड पार्षद को समस्या की जानकारी दें।
उत्तर प्रदेश सरकार के आईजीआरएस (जनसुनवाई) पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
शिकायत में इलाके का सटीक पता, कुत्तों की अनुमानित संख्या और हुई घटनाओं का विवरण जरूर दें।
पशु प्रेम और जनसुरक्षा में संतुलन
आवारा कुत्तों का मुद्दा संवेदनशील है। एक ओर पशु प्रेमी उनके संरक्षण और मानवीय व्यवहार की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर आम लोगों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि नियमित नसबंदी, टीकाकरण, बेहतर कचरा प्रबंधन और जागरूकता के जरिये ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकल सकता है। जो लोग कुत्तों को खाना खिलाते हैं, उन्हें भी चाहिए कि वे तय जगहों पर ही ऐसा करें और कुत्तों के टीकाकरण में सहयोग करें।
स्थानीय लोगों की मांग
तिवारीपुर और आसपास के लोगों ने मांग की है कि इलाके में आवारा कुत्तों को लेकर जल्द से जल्द प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि लोग बिना डर के सड़कों पर निकल सकें। लगातार हो रही घटनाओं से लोगों में चिंता बढ़ रही है, खासकर उन परिवारों में जिनके बच्चे रोज पैदल स्कूल जाते हैं।
निष्कर्ष
जाजमऊ की यह घटना शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या की ओर गंभीर इशारा करती है। दो महीनों में करीब 20 लोगों का शिकार होना बताता है कि इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। तब तक लोगों को सतर्क रहने, बच्चों का खास ध्यान रखने और कुत्ते के काटने पर तुरंत इलाज कराने की सलाह दी जाती है।
कानपुर की हर खबर और आपकी सुरक्षा से जुड़ी जानकारियों के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
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