कारों में ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेक होगा अनिवार्य, सड़क परिवहन मंत्रालय का मसौदा जारी
MoRTH draft proposes mandatory Advanced Emergency Braking System for cars from 2030, trucks from 2027
Kanpur Live News Desk ·

भारत में सड़क हादसों को कम करने की दिशा में केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) ने एक मसौदा अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत कारों और ट्रकों में एडवांस्ड इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम (एईबीएस) को अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। मसौदे के अनुसार नई कारों में 1 अक्टूबर 2030 से और मौजूदा मॉडलों में 1 अक्टूबर 2032 से यह सिस्टम जरूरी होगा। वहीं ट्रकों में 1 अक्टूबर 2027 से एईबीएस और इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ईएससी) अनिवार्य करने का प्रस्ताव है।
मसौदे के मुख्य प्रस्ताव
नई कारें (एम1 श्रेणी): 1 अक्टूबर 2030 से एईबीएस (एआईएस-185 मानक) अनिवार्य
मौजूदा कार मॉडल: 1 अक्टूबर 2032 से एईबीएस अनिवार्य
ट्रक: 1 अक्टूबर 2027 से एईबीएस और इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (एआईएस-162) अनिवार्य
सभी मोटर वाहन: एआईएस-193 मानक का पालन जरूरी, बिना स्टीयरिंग व्हील वाले मोटरसाइकिल और तिपहिया वाहनों को छोड़कर
ऑटोमेटेड कमांड स्टीयरिंग फंक्शन (एसीएसएफ) और इमरजेंसी लेन कीपिंग सिस्टम (ईएलकेएस): परिवहन वाहन के रूप में पंजीकृत एम1 वाहनों पर 1 अक्टूबर 2029 से अनिवार्य
एम1 श्रेणी में वे यात्री वाहन आते हैं, जिनमें चालक के अलावा अधिकतम आठ सीटें होती हैं, यानी आम कारें और एसयूवी।
एईबीएस क्या है
एडवांस्ड इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम एक ऐसी तकनीक है, जो टक्कर का खतरा भांपकर गाड़ी के ब्रेक अपने आप लगा देती है। इसमें गाड़ी में लगे कैमरे, रडार या दूसरे सेंसर लगातार आगे की सड़क पर नजर रखते हैं। अगर आगे कोई वाहन, पैदल यात्री या बाधा अचानक आ जाए और चालक समय पर ब्रेक न लगाए, तो सिस्टम पहले चेतावनी देता है और फिर जरूरत पड़ने पर खुद ब्रेक लगा देता है।
कैसे काम करता है एईबीएस
निगरानी: सेंसर आगे चल रहे वाहनों और रुकावटों की दूरी और रफ्तार मापते हैं।
खतरे की पहचान: अगर टक्कर का खतरा हो, तो सिस्टम उसकी गणना करता है।
चेतावनी: चालक को आवाज या स्क्रीन के जरिये चेतावनी दी जाती है।
आंशिक ब्रेक: कई सिस्टम पहले हल्के ब्रेक लगाते हैं।
पूरा ब्रेक: अगर चालक फिर भी प्रतिक्रिया न दे, तो सिस्टम पूरी ताकत से ब्रेक लगाकर टक्कर टालने या उसकी तीव्रता कम करने की कोशिश करता है।
इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल क्या है
इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ईएससी) वाहन को फिसलने या पलटने से बचाने वाली तकनीक है। तेज मोड़ या अचानक स्टीयरिंग घुमाने पर अगर वाहन का संतुलन बिगड़ने लगता है, तो ईएससी अलग-अलग पहियों पर ब्रेक लगाकर और इंजन की ताकत कम करके वाहन को नियंत्रण में रखता है। भारी ट्रकों के पलटने की घटनाओं को रोकने में यह तकनीक बेहद कारगर मानी जाती है।
लेन कीपिंग और स्टीयरिंग सहायता
इमरजेंसी लेन कीपिंग सिस्टम वाहन को अनजाने में अपनी लेन से बाहर जाने से रोकता है। अगर चालक को झपकी आ जाए या ध्यान भटक जाए और वाहन लेन से बाहर जाने लगे, तो सिस्टम स्टीयरिंग में हल्का सुधार करके उसे वापस लेन में ले आता है। ये सभी तकनीकें मिलकर एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (एडास) का हिस्सा हैं।
भारत में सड़क हादसों की स्थिति
भारत में हर साल लाखों सड़क हादसे होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की जान जाती है। सड़क हादसों में होने वाली मौतों के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है। इनमें से बड़ी संख्या में हादसे पीछे से टक्कर, अचानक ब्रेक न लगने और चालक की लापरवाही के कारण होते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि एईबीएस जैसी तकनीकें ऐसे हादसों को काफी हद तक रोक सकती हैं।
ट्रकों से शुरुआत क्यों
भारी वाहन, खासकर ट्रक, हाईवे पर होने वाले गंभीर हादसों की बड़ी वजह होते हैं। ट्रक भारी होने के कारण तेजी से रुक नहीं पाते और टक्कर होने पर भारी नुकसान करते हैं। रात में थकान और झपकी भी ट्रक हादसों का बड़ा कारण है। इसलिए ट्रकों में 2027 से ही एईबीएस और ईएससी अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। कानपुर में हाल ही में जीटी रोड पर हुए हादसे जैसी घटनाएं इस जरूरत को और साफ करती हैं।
कार कीमतों पर असर
नई तकनीक लगाने से कारों की कीमत कुछ बढ़ सकती है। हालांकि कई कार कंपनियां पहले से ही अपने महंगे मॉडलों में एडास फीचर दे रही हैं। समय के साथ तकनीक सस्ती होने और बड़े पैमाने पर उत्पादन से लागत कम होने की उम्मीद है। कंपनियों को तैयारी के लिए कई साल का समय दिया गया है।
अभी मसौदा, सुझाव मांगे जाएंगे
ध्यान रहे कि यह अभी मसौदा अधिसूचना है। आम तौर पर ऐसे मसौदों पर जनता, वाहन निर्माताओं और दूसरे हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी जाती हैं। इसके बाद अंतिम अधिसूचना जारी होती है। इसलिए अंतिम नियमों और तारीखों में बदलाव भी संभव है।
तकनीक के भरोसे न रहें
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि एईबीएस जैसी तकनीकें चालक की मदद के लिए हैं, उसकी जगह लेने के लिए नहीं। खराब मौसम, धूल या गंदे सेंसर की स्थिति में ये सिस्टम ठीक से काम नहीं भी कर सकते। इसलिए चालकों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए, गति सीमा का पालन करना चाहिए और सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए।
नई कार खरीदने वालों के लिए
कार खरीदते समय उसकी सुरक्षा रेटिंग जरूर देखें। भारत एनसीएपी के तहत कारों की क्रैश टेस्ट रेटिंग जारी की जाती है।
एयरबैग की संख्या, एबीएस, ईएससी और एडास फीचर्स की जानकारी लें।
सीट बेल्ट रिमाइंडर और चाइल्ड सीट माउंट जैसी सुविधाएं भी देखें।
केवल फीचर्स ही नहीं, कार की मजबूती और बनावट पर भी ध्यान दें।
दुनिया में पहले से लागू
यूरोपीय संघ समेत कई देशों में नई कारों के लिए ऐसे सुरक्षा फीचर पहले से अनिवार्य किए जा चुके हैं। भारत भी अब उसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
निष्कर्ष
सड़क परिवहन मंत्रालय का यह मसौदा भारत में वाहन सुरक्षा के स्तर को अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब ले जाने की दिशा में बड़ा कदम है। अगर एईबीएस, ईएससी और लेन कीपिंग जैसी तकनीकें अनिवार्य हो जाती हैं, तो सड़क हादसों और उनमें होने वाली मौतों में बड़ी कमी आ सकती है। अब सबकी नजर अंतिम नियमों पर रहेगी।
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कारों में ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेक होगा अनिवार्य, सड़क परिवहन मंत्रालय का मसौदा जारी
भारत में सड़क हादसों को कम करने की दिशा में केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) ने एक मसौदा अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत कारों और ट्रकों में एडवांस्ड इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम (एईबीएस) को अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। मसौदे के अनुसार नई कारों में 1 अक्टूबर 2030 से और मौजूदा मॉडलों में 1 अक्टूबर 2032 से यह सिस्टम जरूरी होगा। वहीं ट्रकों में 1 अक्टूबर 2027 से एईबीएस और इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ईएससी) अनिवार्य करने का प्रस्ताव है।
मसौदे के मुख्य प्रस्ताव
नई कारें (एम1 श्रेणी): 1 अक्टूबर 2030 से एईबीएस (एआईएस-185 मानक) अनिवार्य
मौजूदा कार मॉडल: 1 अक्टूबर 2032 से एईबीएस अनिवार्य
ट्रक: 1 अक्टूबर 2027 से एईबीएस और इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (एआईएस-162) अनिवार्य
सभी मोटर वाहन: एआईएस-193 मानक का पालन जरूरी, बिना स्टीयरिंग व्हील वाले मोटरसाइकिल और तिपहिया वाहनों को छोड़कर
ऑटोमेटेड कमांड स्टीयरिंग फंक्शन (एसीएसएफ) और इमरजेंसी लेन कीपिंग सिस्टम (ईएलकेएस): परिवहन वाहन के रूप में पंजीकृत एम1 वाहनों पर 1 अक्टूबर 2029 से अनिवार्य
एम1 श्रेणी में वे यात्री वाहन आते हैं, जिनमें चालक के अलावा अधिकतम आठ सीटें होती हैं, यानी आम कारें और एसयूवी।
एईबीएस क्या है
एडवांस्ड इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम एक ऐसी तकनीक है, जो टक्कर का खतरा भांपकर गाड़ी के ब्रेक अपने आप लगा देती है। इसमें गाड़ी में लगे कैमरे, रडार या दूसरे सेंसर लगातार आगे की सड़क पर नजर रखते हैं। अगर आगे कोई वाहन, पैदल यात्री या बाधा अचानक आ जाए और चालक समय पर ब्रेक न लगाए, तो सिस्टम पहले चेतावनी देता है और फिर जरूरत पड़ने पर खुद ब्रेक लगा देता है।
कैसे काम करता है एईबीएस
निगरानी: सेंसर आगे चल रहे वाहनों और रुकावटों की दूरी और रफ्तार मापते हैं।
खतरे की पहचान: अगर टक्कर का खतरा हो, तो सिस्टम उसकी गणना करता है।
चेतावनी: चालक को आवाज या स्क्रीन के जरिये चेतावनी दी जाती है।
आंशिक ब्रेक: कई सिस्टम पहले हल्के ब्रेक लगाते हैं।
पूरा ब्रेक: अगर चालक फिर भी प्रतिक्रिया न दे, तो सिस्टम पूरी ताकत से ब्रेक लगाकर टक्कर टालने या उसकी तीव्रता कम करने की कोशिश करता है।
इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल क्या है
इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ईएससी) वाहन को फिसलने या पलटने से बचाने वाली तकनीक है। तेज मोड़ या अचानक स्टीयरिंग घुमाने पर अगर वाहन का संतुलन बिगड़ने लगता है, तो ईएससी अलग-अलग पहियों पर ब्रेक लगाकर और इंजन की ताकत कम करके वाहन को नियंत्रण में रखता है। भारी ट्रकों के पलटने की घटनाओं को रोकने में यह तकनीक बेहद कारगर मानी जाती है।
लेन कीपिंग और स्टीयरिंग सहायता
इमरजेंसी लेन कीपिंग सिस्टम वाहन को अनजाने में अपनी लेन से बाहर जाने से रोकता है। अगर चालक को झपकी आ जाए या ध्यान भटक जाए और वाहन लेन से बाहर जाने लगे, तो सिस्टम स्टीयरिंग में हल्का सुधार करके उसे वापस लेन में ले आता है। ये सभी तकनीकें मिलकर एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (एडास) का हिस्सा हैं।
भारत में सड़क हादसों की स्थिति
भारत में हर साल लाखों सड़क हादसे होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की जान जाती है। सड़क हादसों में होने वाली मौतों के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है। इनमें से बड़ी संख्या में हादसे पीछे से टक्कर, अचानक ब्रेक न लगने और चालक की लापरवाही के कारण होते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि एईबीएस जैसी तकनीकें ऐसे हादसों को काफी हद तक रोक सकती हैं।
ट्रकों से शुरुआत क्यों
भारी वाहन, खासकर ट्रक, हाईवे पर होने वाले गंभीर हादसों की बड़ी वजह होते हैं। ट्रक भारी होने के कारण तेजी से रुक नहीं पाते और टक्कर होने पर भारी नुकसान करते हैं। रात में थकान और झपकी भी ट्रक हादसों का बड़ा कारण है। इसलिए ट्रकों में 2027 से ही एईबीएस और ईएससी अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। कानपुर में हाल ही में जीटी रोड पर हुए हादसे जैसी घटनाएं इस जरूरत को और साफ करती हैं।
कार कीमतों पर असर
नई तकनीक लगाने से कारों की कीमत कुछ बढ़ सकती है। हालांकि कई कार कंपनियां पहले से ही अपने महंगे मॉडलों में एडास फीचर दे रही हैं। समय के साथ तकनीक सस्ती होने और बड़े पैमाने पर उत्पादन से लागत कम होने की उम्मीद है। कंपनियों को तैयारी के लिए कई साल का समय दिया गया है।
अभी मसौदा, सुझाव मांगे जाएंगे
ध्यान रहे कि यह अभी मसौदा अधिसूचना है। आम तौर पर ऐसे मसौदों पर जनता, वाहन निर्माताओं और दूसरे हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी जाती हैं। इसके बाद अंतिम अधिसूचना जारी होती है। इसलिए अंतिम नियमों और तारीखों में बदलाव भी संभव है।
तकनीक के भरोसे न रहें
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि एईबीएस जैसी तकनीकें चालक की मदद के लिए हैं, उसकी जगह लेने के लिए नहीं। खराब मौसम, धूल या गंदे सेंसर की स्थिति में ये सिस्टम ठीक से काम नहीं भी कर सकते। इसलिए चालकों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए, गति सीमा का पालन करना चाहिए और सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए।
नई कार खरीदने वालों के लिए
कार खरीदते समय उसकी सुरक्षा रेटिंग जरूर देखें। भारत एनसीएपी के तहत कारों की क्रैश टेस्ट रेटिंग जारी की जाती है।
एयरबैग की संख्या, एबीएस, ईएससी और एडास फीचर्स की जानकारी लें।
सीट बेल्ट रिमाइंडर और चाइल्ड सीट माउंट जैसी सुविधाएं भी देखें।
केवल फीचर्स ही नहीं, कार की मजबूती और बनावट पर भी ध्यान दें।
दुनिया में पहले से लागू
यूरोपीय संघ समेत कई देशों में नई कारों के लिए ऐसे सुरक्षा फीचर पहले से अनिवार्य किए जा चुके हैं। भारत भी अब उसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
निष्कर्ष
सड़क परिवहन मंत्रालय का यह मसौदा भारत में वाहन सुरक्षा के स्तर को अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब ले जाने की दिशा में बड़ा कदम है। अगर एईबीएस, ईएससी और लेन कीपिंग जैसी तकनीकें अनिवार्य हो जाती हैं, तो सड़क हादसों और उनमें होने वाली मौतों में बड़ी कमी आ सकती है। अब सबकी नजर अंतिम नियमों पर रहेगी।
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