पोलैंड के पीएम टस्क का भारत दौरा: व्यापार दोगुना करने, रक्षा उद्योग और आतंकवाद पर बनी सहमति
Polish PM Donald Tusk's India visit: Plan to double trade by 2030, new defence industry and counter-terror dialogues
Kanpur Live News Desk ·

भारत और पोलैंड के रिश्तों को नई ऊंचाई देने के लिए पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने 21 से 23 अक्टूबर तक भारत का तीन दिवसीय आधिकारिक दौरा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर आए टस्क का बतौर प्रधानमंत्री यह दूसरा भारत दौरा था। उनके साथ वित्त मंत्री आंद्रेज डोमांस्की और करीब 100 कंपनियों के सीईओ का प्रतिनिधिमंडल भी आया। दौरे के दौरान दोनों देशों ने व्यापार को दोगुना करने, रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने जैसे कई अहम फैसले लिए।
दौरे के प्रमुख नतीजे
व्यापार दोगुना: रिपोर्टों के अनुसार दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा करीब 6 अरब डॉलर से दोगुना करने का लक्ष्य रखा।
रक्षा उद्योग संवाद: रक्षा उत्पादन में सहयोग के लिए नया डिफेंस इंडस्ट्री डायलॉग शुरू होगा।
आतंकवाद विरोधी बातचीत: आतंकवाद से निपटने के लिए दोनों देशों के बीच नियमित बातचीत होगी।
स्टार्टअप ब्रिज: दोनों देशों के स्टार्टअप को जोड़ने के लिए स्टार्टअप ब्रिज और टेक हैकथॉन।
सीडीआरआई में शामिल: पोलैंड भारत की पहल वाले आपदा रोधी बुनियादी ढांचा गठबंधन (सीडीआरआई) में शामिल हुआ।
साझेदारी दिवस: हर साल 30 मार्च को "पोलैंड-भारत साझेदारी दिवस" मनाया जाएगा। 1954 में इसी दिन दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे।
रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा
नई दिल्ली में दोनों नेताओं ने 2024 में हुई रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की। उन्होंने 2024-2028 की कार्ययोजना की मध्यावधि समीक्षा को मंजूरी दी। साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उभरती तकनीकों और रखरखाव प्रणालियों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। दोनों नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को जल्द लागू करने की जरूरत पर भी जोर दिया और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) के जरिये सहयोग बढ़ाने की बात कही।
दिल्ली और बेंगलुरु में बिजनेस फोरम
भारत-पोलैंड बिजनेस फोरम का आयोजन 22 अक्टूबर को नई दिल्ली और 23 अक्टूबर को बेंगलुरु में किया गया। इसे भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और पोलिश निवेश एवं व्यापार एजेंसी (पीएआईएच) ने मिलकर आयोजित किया। इसमें दोनों देशों की कंपनियों ने निवेश और व्यापार के नए अवसरों पर चर्चा की।
शिक्षा और शोध में सहयोग
दौरे के दौरान बेंगलुरु के आईआईआईटी और पोलैंड के क्राकोव स्थित एजीएच विश्वविद्यालय के बीच समझौता हुआ। इसके तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक और दूसरे उभरते क्षेत्रों में संयुक्त शोध, छात्र और शिक्षक आदान-प्रदान, सेमिनार और समर स्कूल जैसे कार्यक्रम होंगे। यह समझौता टस्क और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की मौजूदगी में हुआ।
भारत-पोलैंड रिश्तों का इतिहास
भारत और पोलैंड के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान गुजरात के नवानगर (जामनगर) के महाराजा जाम साहब दिग्विजयसिंहजी ने सैकड़ों पोलिश अनाथ बच्चों को शरण दी थी। पोलैंड आज भी इस मानवीय मदद को याद करता है। वारसॉ में "गुड महाराजा स्क्वायर" उनके सम्मान में बनाया गया है। 2024 में प्रधानमंत्री मोदी ने पोलैंड का दौरा किया था, जो 45 साल में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली पोलैंड यात्रा थी। उसी दौरान दोनों देशों के रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया।
पोलैंड: यूरोप का उभरता देश
पोलैंड मध्य यूरोप का एक प्रमुख देश और यूरोपीय संघ का सदस्य है। पिछले तीन दशकों में पोलैंड की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ी है। यह यूरोप में भारत के महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदारों में से एक है। बड़ी संख्या में भारतीय कंपनियों ने पोलैंड में निवेश किया है, खासकर आईटी, ऑटो पार्ट्स और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में। पोलैंड में भारतीय छात्रों की संख्या भी बढ़ रही है।
रक्षा सहयोग की संभावना
पोलैंड पिछले कुछ वर्षों में अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने पर भारी निवेश कर रहा है। वहीं भारत आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत अपना रक्षा उत्पादन तेजी से बढ़ा रहा है। नया डिफेंस इंडस्ट्री डायलॉग दोनों देशों की कंपनियों को संयुक्त उत्पादन और तकनीक साझा करने का मौका दे सकता है। उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर, जिसमें कानपुर भी शामिल है, जैसे क्षेत्रों के लिए भी इससे नए अवसर बन सकते हैं।
भारत-यूरोप रिश्तों में तेजी
हाल के महीनों में भारत ने यूरोप के कई देशों के साथ रिश्ते मजबूत किए हैं। ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौता लागू हो चुका है और यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर काम आगे बढ़ रहा है। पोलैंड जैसे देशों के साथ गहरे रिश्ते भारत को यूरोप में नए बाजार और निवेश दिलाने में मदद करेंगे।
कारोबारियों के लिए अवसर
पोलैंड यूरोपीय संघ का सदस्य होने के कारण भारतीय कंपनियों के लिए यूरोप के बड़े बाजार का प्रवेश द्वार बन सकता है। कानपुर का चमड़ा, कपड़ा, इंजीनियरिंग और खाद्य उत्पाद उद्योग यूरोपीय बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए ऐसे अवसरों का लाभ उठा सकता है। भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता लागू होने के बाद यह अवसर और बढ़ेंगे।
छात्रों के लिए अवसर
पोलैंड यूरोप में पढ़ाई के लिए भारतीय छात्रों के बीच लोकप्रिय होता जा रहा है। यहां मेडिकल, इंजीनियरिंग और प्रबंधन की पढ़ाई अपेक्षाकृत कम खर्च में हो जाती है। दोनों देशों के बीच शिक्षा और शोध सहयोग बढ़ने से भारतीय छात्रों को और अवसर मिलने की उम्मीद है। एजीएच विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के साथ समझौते से संयुक्त शोध कार्यक्रम शुरू होंगे।
आपदा प्रबंधन में साथ
पोलैंड का आपदा रोधी बुनियादी ढांचा गठबंधन (सीडीआरआई) में शामिल होना भारत के लिए कूटनीतिक उपलब्धि है। सीडीआरआई की शुरुआत भारत ने 2019 में की थी। इसका उद्देश्य ऐसे बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देना है, जो बाढ़, भूकंप और चक्रवात जैसी आपदाओं को झेल सके।
कौन हैं डोनाल्ड टस्क
डोनाल्ड टस्क पोलैंड के अनुभवी नेता हैं। वे पहले भी पोलैंड के प्रधानमंत्री रह चुके हैं और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। यूरोप की राजनीति में उनकी गिनती प्रभावशाली नेताओं में होती है।
निष्कर्ष
डोनाल्ड टस्क का भारत दौरा दोनों देशों के रिश्तों में नया अध्याय है। व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य, रक्षा उद्योग संवाद, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और शिक्षा-शोध में साझेदारी से भारत और पोलैंड के संबंध और मजबूत होंगे। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी दोनों देशों के लोगों और कारोबारियों के लिए नए अवसर लेकर आएगी।
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पोलैंड के पीएम टस्क का भारत दौरा: व्यापार दोगुना करने, रक्षा उद्योग और आतंकवाद पर बनी सहमति
भारत और पोलैंड के रिश्तों को नई ऊंचाई देने के लिए पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने 21 से 23 अक्टूबर तक भारत का तीन दिवसीय आधिकारिक दौरा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर आए टस्क का बतौर प्रधानमंत्री यह दूसरा भारत दौरा था। उनके साथ वित्त मंत्री आंद्रेज डोमांस्की और करीब 100 कंपनियों के सीईओ का प्रतिनिधिमंडल भी आया। दौरे के दौरान दोनों देशों ने व्यापार को दोगुना करने, रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने जैसे कई अहम फैसले लिए।
दौरे के प्रमुख नतीजे
व्यापार दोगुना: रिपोर्टों के अनुसार दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा करीब 6 अरब डॉलर से दोगुना करने का लक्ष्य रखा।
रक्षा उद्योग संवाद: रक्षा उत्पादन में सहयोग के लिए नया डिफेंस इंडस्ट्री डायलॉग शुरू होगा।
आतंकवाद विरोधी बातचीत: आतंकवाद से निपटने के लिए दोनों देशों के बीच नियमित बातचीत होगी।
स्टार्टअप ब्रिज: दोनों देशों के स्टार्टअप को जोड़ने के लिए स्टार्टअप ब्रिज और टेक हैकथॉन।
सीडीआरआई में शामिल: पोलैंड भारत की पहल वाले आपदा रोधी बुनियादी ढांचा गठबंधन (सीडीआरआई) में शामिल हुआ।
साझेदारी दिवस: हर साल 30 मार्च को "पोलैंड-भारत साझेदारी दिवस" मनाया जाएगा। 1954 में इसी दिन दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे।
रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा
नई दिल्ली में दोनों नेताओं ने 2024 में हुई रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की। उन्होंने 2024-2028 की कार्ययोजना की मध्यावधि समीक्षा को मंजूरी दी। साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उभरती तकनीकों और रखरखाव प्रणालियों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। दोनों नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को जल्द लागू करने की जरूरत पर भी जोर दिया और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) के जरिये सहयोग बढ़ाने की बात कही।
दिल्ली और बेंगलुरु में बिजनेस फोरम
भारत-पोलैंड बिजनेस फोरम का आयोजन 22 अक्टूबर को नई दिल्ली और 23 अक्टूबर को बेंगलुरु में किया गया। इसे भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और पोलिश निवेश एवं व्यापार एजेंसी (पीएआईएच) ने मिलकर आयोजित किया। इसमें दोनों देशों की कंपनियों ने निवेश और व्यापार के नए अवसरों पर चर्चा की।
शिक्षा और शोध में सहयोग
दौरे के दौरान बेंगलुरु के आईआईआईटी और पोलैंड के क्राकोव स्थित एजीएच विश्वविद्यालय के बीच समझौता हुआ। इसके तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक और दूसरे उभरते क्षेत्रों में संयुक्त शोध, छात्र और शिक्षक आदान-प्रदान, सेमिनार और समर स्कूल जैसे कार्यक्रम होंगे। यह समझौता टस्क और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की मौजूदगी में हुआ।
भारत-पोलैंड रिश्तों का इतिहास
भारत और पोलैंड के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान गुजरात के नवानगर (जामनगर) के महाराजा जाम साहब दिग्विजयसिंहजी ने सैकड़ों पोलिश अनाथ बच्चों को शरण दी थी। पोलैंड आज भी इस मानवीय मदद को याद करता है। वारसॉ में "गुड महाराजा स्क्वायर" उनके सम्मान में बनाया गया है। 2024 में प्रधानमंत्री मोदी ने पोलैंड का दौरा किया था, जो 45 साल में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली पोलैंड यात्रा थी। उसी दौरान दोनों देशों के रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया।
पोलैंड: यूरोप का उभरता देश
पोलैंड मध्य यूरोप का एक प्रमुख देश और यूरोपीय संघ का सदस्य है। पिछले तीन दशकों में पोलैंड की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ी है। यह यूरोप में भारत के महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदारों में से एक है। बड़ी संख्या में भारतीय कंपनियों ने पोलैंड में निवेश किया है, खासकर आईटी, ऑटो पार्ट्स और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में। पोलैंड में भारतीय छात्रों की संख्या भी बढ़ रही है।
रक्षा सहयोग की संभावना
पोलैंड पिछले कुछ वर्षों में अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने पर भारी निवेश कर रहा है। वहीं भारत आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत अपना रक्षा उत्पादन तेजी से बढ़ा रहा है। नया डिफेंस इंडस्ट्री डायलॉग दोनों देशों की कंपनियों को संयुक्त उत्पादन और तकनीक साझा करने का मौका दे सकता है। उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर, जिसमें कानपुर भी शामिल है, जैसे क्षेत्रों के लिए भी इससे नए अवसर बन सकते हैं।
भारत-यूरोप रिश्तों में तेजी
हाल के महीनों में भारत ने यूरोप के कई देशों के साथ रिश्ते मजबूत किए हैं। ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौता लागू हो चुका है और यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर काम आगे बढ़ रहा है। पोलैंड जैसे देशों के साथ गहरे रिश्ते भारत को यूरोप में नए बाजार और निवेश दिलाने में मदद करेंगे।
कारोबारियों के लिए अवसर
पोलैंड यूरोपीय संघ का सदस्य होने के कारण भारतीय कंपनियों के लिए यूरोप के बड़े बाजार का प्रवेश द्वार बन सकता है। कानपुर का चमड़ा, कपड़ा, इंजीनियरिंग और खाद्य उत्पाद उद्योग यूरोपीय बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए ऐसे अवसरों का लाभ उठा सकता है। भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता लागू होने के बाद यह अवसर और बढ़ेंगे।
छात्रों के लिए अवसर
पोलैंड यूरोप में पढ़ाई के लिए भारतीय छात्रों के बीच लोकप्रिय होता जा रहा है। यहां मेडिकल, इंजीनियरिंग और प्रबंधन की पढ़ाई अपेक्षाकृत कम खर्च में हो जाती है। दोनों देशों के बीच शिक्षा और शोध सहयोग बढ़ने से भारतीय छात्रों को और अवसर मिलने की उम्मीद है। एजीएच विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के साथ समझौते से संयुक्त शोध कार्यक्रम शुरू होंगे।
आपदा प्रबंधन में साथ
पोलैंड का आपदा रोधी बुनियादी ढांचा गठबंधन (सीडीआरआई) में शामिल होना भारत के लिए कूटनीतिक उपलब्धि है। सीडीआरआई की शुरुआत भारत ने 2019 में की थी। इसका उद्देश्य ऐसे बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देना है, जो बाढ़, भूकंप और चक्रवात जैसी आपदाओं को झेल सके।
कौन हैं डोनाल्ड टस्क
डोनाल्ड टस्क पोलैंड के अनुभवी नेता हैं। वे पहले भी पोलैंड के प्रधानमंत्री रह चुके हैं और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। यूरोप की राजनीति में उनकी गिनती प्रभावशाली नेताओं में होती है।
निष्कर्ष
डोनाल्ड टस्क का भारत दौरा दोनों देशों के रिश्तों में नया अध्याय है। व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य, रक्षा उद्योग संवाद, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और शिक्षा-शोध में साझेदारी से भारत और पोलैंड के संबंध और मजबूत होंगे। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी दोनों देशों के लोगों और कारोबारियों के लिए नए अवसर लेकर आएगी।
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