केजीएमयू लखनऊ में दो महीने में शुरू होगा हार्ट ट्रांसप्लांट, पहले पांच प्रत्यारोपण पूरी तरह मुफ्त; डोनर और मरीजों का पंजीकरण शुरू
KGMU Lucknow to start heart transplants within two months, first five free of cost
Kanpur Live News Desk ·

उत्तर प्रदेश के हृदय रोगियों के लिए राहत भरी खबर है। लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी यानी केजीएमयू में जल्द ही हार्ट ट्रांसप्लांट यानी हृदय प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू होने जा रही है। संस्थान में इसकी तैयारियां अंतिम चरण में हैं और उम्मीद है कि अगले दो महीनों में यह सुविधा शुरू हो जाएगी। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि शुरुआती पांच हृदय प्रत्यारोपण पूरी तरह मुफ्त किए जाएंगे। कानपुर समेत प्रदेश के तमाम जिलों के उन मरीजों के लिए यह खबर उम्मीद की किरण है, जिन्हें अब तक इस इलाज के लिए बड़े शहरों या महंगे निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता था।
तैयारियां अंतिम दौर में
केजीएमयू में हार्ट ट्रांसप्लांट शुरू करने की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं और संस्थान को उम्मीद है कि दो महीने के भीतर यह सुविधा शुरू हो जाएगी। इसके लिए डोनर और मरीजों के पंजीकरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
पहले पांच ट्रांसप्लांट मुफ्त
कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद की अध्यक्षता में हुई कार्यपरिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि शुरुआती पांच हृदय प्रत्यारोपण पूरी तरह निःशुल्क होंगे। फिलहाल लखनऊ में यह सुविधा एसजीपीजीआई में उपलब्ध है। केजीएमयू में ट्रांसप्लांट की शुल्क दर अभी तय नहीं की गई है।
पहले पांच प्रत्यारोपण मुफ्त करने का फैसला उन गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बड़ी राहत है, जिनके लिए इतना महंगा इलाज करा पाना लगभग असंभव होता है।
निजी में एक करोड़, सरकारी में 15 लाख तक खर्च
हार्ट ट्रांसप्लांट दुनिया की सबसे महंगी चिकित्सा प्रक्रियाओं में से एक है। रिपोर्टों के अनुसार निजी अस्पतालों में इस पर करीब एक करोड़ रुपये तक का खर्च आ सकता है, जबकि सरकारी संस्थानों में यह खर्च 15 लाख रुपये तक रहता है। इसी साल मई में आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि सरकारी संस्थान में यह प्रत्यारोपण 12 से 15 लाख रुपये में हो सकता है।
यानी सरकारी संस्थान में इलाज की लागत निजी अस्पतालों के मुकाबले कई गुना कम है। केजीएमयू में यह सुविधा शुरू होने से प्रदेश के मरीजों को अपेक्षाकृत किफायती दर पर विश्वस्तरीय इलाज मिल सकेगा।
लोहिया संस्थान भी कर रहा तैयारी
केजीएमयू के अलावा लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में भी हार्ट ट्रांसप्लांट शुरू करने की तैयारी चल रही है। अगर यह भी शुरू होता है, तो लखनऊ में तीन सरकारी संस्थानों में यह सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे मरीजों के लिए इंतजार का समय कम हो सकता है।
हार्ट ट्रांसप्लांट क्या है
हार्ट ट्रांसप्लांट एक जटिल सर्जरी है, जिसमें मरीज के खराब हो चुके दिल को निकालकर उसकी जगह किसी डोनर का स्वस्थ दिल लगाया जाता है। यह इलाज आमतौर पर उन मरीजों के लिए होता है, जिनका दिल अंतिम चरण की विफलता यानी एंड-स्टेज हार्ट फेल्योर की स्थिति में पहुंच चुका होता है और दवाइयों या दूसरी सर्जरी से कोई फायदा नहीं हो रहा होता।
डोनर का दिल आमतौर पर ब्रेन डेड घोषित किए गए व्यक्ति से मिलता है, जिसके परिवार ने अंगदान की सहमति दी हो। ब्रेन डेथ की स्थिति में व्यक्ति का मस्तिष्क स्थायी रूप से काम करना बंद कर देता है, लेकिन मशीनों की मदद से कुछ समय तक उसका दिल धड़कता रहता है। इसी दौरान अंगों को निकालकर जरूरतमंद मरीजों में प्रत्यारोपित किया जाता है।
किन मरीजों को पड़ती है जरूरत
डॉक्टर हर मरीज की विस्तृत जांच के बाद ही तय करते हैं कि उसे हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत है या नहीं और वह इस सर्जरी के लिए उपयुक्त है या नहीं। आम तौर पर गंभीर हृदय विफलता, कुछ तरह की दिल की मांसपेशियों की बीमारियां और ऐसे मामलों में, जहां बाकी इलाज कारगर न रहे हों, ट्रांसप्लांट पर विचार किया जाता है। मरीज की उम्र, अन्य अंगों की स्थिति और समग्र स्वास्थ्य भी इस फैसले में अहम भूमिका निभाते हैं।
समय की सबसे बड़ी चुनौती
हार्ट ट्रांसप्लांट में समय का बहुत बड़ा महत्व होता है। डोनर के शरीर से निकाले गए दिल को कुछ ही घंटों के भीतर मरीज में प्रत्यारोपित करना जरूरी होता है। इसी कारण कई बार अंगों को एक शहर से दूसरे शहर तक तेजी से पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाए जाते हैं, जिसमें पुलिस और प्रशासन मिलकर सड़क खाली कराते हैं, ताकि एंबुलेंस बिना रुके अस्पताल पहुंच सके।
ट्रांसप्लांट के बाद की जिंदगी
हार्ट ट्रांसप्लांट केवल एक सर्जरी नहीं, बल्कि जीवनभर चलने वाली देखभाल की शुरुआत है। प्रत्यारोपण के बाद मरीज को नियमित रूप से ऐसी दवाइयां लेनी होती हैं, जो शरीर को नए दिल को अस्वीकार करने से रोकती हैं। इन दवाइयों के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए साफ-सफाई और खान-पान का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। शुरुआती महीनों में अस्पताल में बार-बार जांच के लिए जाना होता है। डॉक्टरों की सलाह का पूरी तरह पालन करने पर कई मरीज ट्रांसप्लांट के बाद सामान्य जीवन जी पाते हैं, काम पर लौटते हैं और परिवार के साथ सक्रिय जीवन बिताते हैं।
परिवार की भूमिका अहम
ट्रांसप्लांट से पहले और बाद में मरीज के परिवार का सहयोग बेहद जरूरी होता है। लंबे इलाज, नियमित दवाइयों और जांचों के दौरान परिवार का भावनात्मक और व्यावहारिक साथ मरीज के ठीक होने में बड़ी भूमिका निभाता है।
अंगदान: एक व्यक्ति, कई जिंदगियां
किसी भी ट्रांसप्लांट कार्यक्रम की सफलता अंगदान पर निर्भर करती है। एक ब्रेन डेड व्यक्ति के अंगदान से कई लोगों को नई जिंदगी मिल सकती है। दिल, लिवर, किडनी, फेफड़े, अग्न्याशय और आंखों का कॉर्निया जैसे अंग दान किए जा सकते हैं। भारत में अंगदान की दर अभी भी कई देशों के मुकाबले कम है, जिसकी बड़ी वजह जागरूकता की कमी और सामाजिक भ्रांतियां हैं।
अंगदान से जुड़ी जरूरी बातें:
कोई भी व्यक्ति जीवित रहते हुए अंगदान की शपथ ले सकता है और इसके लिए पंजीकरण करा सकता है।
अंगदान की इच्छा के बारे में परिवार को जरूर बताएं, क्योंकि अंतिम सहमति परिवार की ही होती है।
अंगदान की पूरी प्रक्रिया कानून के तहत होती है और इसमें अंगों की खरीद-बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है।
राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन और राज्य स्तर के संगठन इस व्यवस्था की निगरानी करते हैं।
दिल को स्वस्थ रखने के उपाय
ट्रांसप्लांट जैसी स्थिति तक पहुंचने से बचने के लिए दिल की सेहत का ध्यान रखना सबसे अच्छा उपाय है। डॉक्टर कुछ आसान आदतों की सलाह देते हैं:
नियमित व्यायाम करें और रोज कुछ समय पैदल चलें।
तला-भुना, ज्यादा नमक और ज्यादा मीठा कम खाएं।
धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूर रहें।
ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं।
तनाव कम करें और पर्याप्त नींद लें।
सीने में दर्द, सांस फूलना, बेवजह थकान या पैरों में सूजन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से मिलें।
कानपुर के मरीजों को क्या फायदा
कानपुर से लखनऊ की दूरी कम है और नया एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद दोनों शहरों के बीच सफर और आसान हो गया है। ऐसे में केजीएमयू में हार्ट ट्रांसप्लांट शुरू होने का सीधा फायदा कानपुर और आसपास के जिलों के मरीजों को भी मिलेगा। अब तक ऐसे मरीजों को दिल्ली, मुंबई, चेन्नई या अन्य बड़े शहरों के अस्पतालों में जाना पड़ता था, जिससे इलाज के साथ-साथ रहने और आने-जाने का खर्च भी बढ़ जाता था।
पंजीकरण के लिए क्या करें
जिन मरीजों को डॉक्टरों ने हार्ट ट्रांसप्लांट की सलाह दी है, वे केजीएमयू के संबंधित विभाग से संपर्क कर पंजीकरण की प्रक्रिया की जानकारी ले सकते हैं। अपने सभी मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और डॉक्टर की सलाह के कागजात साथ रखें। किसी भी अनधिकृत व्यक्ति या दलाल के झांसे में न आएं। अंग प्रत्यारोपण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और कानूनी नियमों के तहत होती है, जिसमें प्रतीक्षा सूची और मेडिकल मानकों के आधार पर ही प्राथमिकता तय होती है।
सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं से मदद
गंभीर बीमारियों के महंगे इलाज में सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं बड़ी मदद कर सकती हैं। आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष जैसी व्यवस्थाओं के तहत पात्र मरीजों को इलाज में आर्थिक सहायता मिल सकती है। हार्ट ट्रांसप्लांट जैसे इलाज पर किस योजना के तहत कितनी मदद मिल सकती है, इसकी सटीक जानकारी संबंधित अस्पताल के प्रशासनिक विभाग या योजना हेल्पडेस्क से लें।
प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ा कदम
केजीएमयू प्रदेश के सबसे पुराने और बड़े चिकित्सा संस्थानों में से एक है। यहां प्रदेश ही नहीं, आसपास के राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। हार्ट ट्रांसप्लांट जैसी उन्नत सुविधा शुरू होना प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की क्षमता बढ़ने का संकेत है। इससे डॉक्टरों को भी उन्नत सर्जरी का अनुभव मिलेगा और मेडिकल छात्रों को सीखने का अवसर मिलेगा।
निष्कर्ष
केजीएमयू में हार्ट ट्रांसप्लांट की शुरुआत उत्तर प्रदेश के हजारों हृदय रोगियों के लिए उम्मीद की नई किरण है। पहले पांच मुफ्त प्रत्यारोपण का फैसला जरूरतमंद परिवारों को बड़ी राहत देगा। साथ ही यह जरूरी है कि समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़े, क्योंकि डोनर के बिना कोई भी ट्रांसप्लांट संभव नहीं है।
स्वास्थ्य से जुड़ी हर जरूरी खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी इलाज से जुड़ा निर्णय योग्य डॉक्टर की सलाह से ही लें।
केजीएमयू लखनऊ में दो महीने में शुरू होगा हार्ट ट्रांसप्लांट, पहले पांच प्रत्यारोपण पूरी तरह मुफ्त; डोनर और मरीजों का पंजीकरण शुरू
उत्तर प्रदेश के हृदय रोगियों के लिए राहत भरी खबर है। लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी यानी केजीएमयू में जल्द ही हार्ट ट्रांसप्लांट यानी हृदय प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू होने जा रही है। संस्थान में इसकी तैयारियां अंतिम चरण में हैं और उम्मीद है कि अगले दो महीनों में यह सुविधा शुरू हो जाएगी। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि शुरुआती पांच हृदय प्रत्यारोपण पूरी तरह मुफ्त किए जाएंगे। कानपुर समेत प्रदेश के तमाम जिलों के उन मरीजों के लिए यह खबर उम्मीद की किरण है, जिन्हें अब तक इस इलाज के लिए बड़े शहरों या महंगे निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता था।
तैयारियां अंतिम दौर में
केजीएमयू में हार्ट ट्रांसप्लांट शुरू करने की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं और संस्थान को उम्मीद है कि दो महीने के भीतर यह सुविधा शुरू हो जाएगी। इसके लिए डोनर और मरीजों के पंजीकरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
पहले पांच ट्रांसप्लांट मुफ्त
कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद की अध्यक्षता में हुई कार्यपरिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि शुरुआती पांच हृदय प्रत्यारोपण पूरी तरह निःशुल्क होंगे। फिलहाल लखनऊ में यह सुविधा एसजीपीजीआई में उपलब्ध है। केजीएमयू में ट्रांसप्लांट की शुल्क दर अभी तय नहीं की गई है।
पहले पांच प्रत्यारोपण मुफ्त करने का फैसला उन गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बड़ी राहत है, जिनके लिए इतना महंगा इलाज करा पाना लगभग असंभव होता है।
निजी में एक करोड़, सरकारी में 15 लाख तक खर्च
हार्ट ट्रांसप्लांट दुनिया की सबसे महंगी चिकित्सा प्रक्रियाओं में से एक है। रिपोर्टों के अनुसार निजी अस्पतालों में इस पर करीब एक करोड़ रुपये तक का खर्च आ सकता है, जबकि सरकारी संस्थानों में यह खर्च 15 लाख रुपये तक रहता है। इसी साल मई में आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि सरकारी संस्थान में यह प्रत्यारोपण 12 से 15 लाख रुपये में हो सकता है।
यानी सरकारी संस्थान में इलाज की लागत निजी अस्पतालों के मुकाबले कई गुना कम है। केजीएमयू में यह सुविधा शुरू होने से प्रदेश के मरीजों को अपेक्षाकृत किफायती दर पर विश्वस्तरीय इलाज मिल सकेगा।
लोहिया संस्थान भी कर रहा तैयारी
केजीएमयू के अलावा लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में भी हार्ट ट्रांसप्लांट शुरू करने की तैयारी चल रही है। अगर यह भी शुरू होता है, तो लखनऊ में तीन सरकारी संस्थानों में यह सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे मरीजों के लिए इंतजार का समय कम हो सकता है।
हार्ट ट्रांसप्लांट क्या है
हार्ट ट्रांसप्लांट एक जटिल सर्जरी है, जिसमें मरीज के खराब हो चुके दिल को निकालकर उसकी जगह किसी डोनर का स्वस्थ दिल लगाया जाता है। यह इलाज आमतौर पर उन मरीजों के लिए होता है, जिनका दिल अंतिम चरण की विफलता यानी एंड-स्टेज हार्ट फेल्योर की स्थिति में पहुंच चुका होता है और दवाइयों या दूसरी सर्जरी से कोई फायदा नहीं हो रहा होता।
डोनर का दिल आमतौर पर ब्रेन डेड घोषित किए गए व्यक्ति से मिलता है, जिसके परिवार ने अंगदान की सहमति दी हो। ब्रेन डेथ की स्थिति में व्यक्ति का मस्तिष्क स्थायी रूप से काम करना बंद कर देता है, लेकिन मशीनों की मदद से कुछ समय तक उसका दिल धड़कता रहता है। इसी दौरान अंगों को निकालकर जरूरतमंद मरीजों में प्रत्यारोपित किया जाता है।
किन मरीजों को पड़ती है जरूरत
डॉक्टर हर मरीज की विस्तृत जांच के बाद ही तय करते हैं कि उसे हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत है या नहीं और वह इस सर्जरी के लिए उपयुक्त है या नहीं। आम तौर पर गंभीर हृदय विफलता, कुछ तरह की दिल की मांसपेशियों की बीमारियां और ऐसे मामलों में, जहां बाकी इलाज कारगर न रहे हों, ट्रांसप्लांट पर विचार किया जाता है। मरीज की उम्र, अन्य अंगों की स्थिति और समग्र स्वास्थ्य भी इस फैसले में अहम भूमिका निभाते हैं।
समय की सबसे बड़ी चुनौती
हार्ट ट्रांसप्लांट में समय का बहुत बड़ा महत्व होता है। डोनर के शरीर से निकाले गए दिल को कुछ ही घंटों के भीतर मरीज में प्रत्यारोपित करना जरूरी होता है। इसी कारण कई बार अंगों को एक शहर से दूसरे शहर तक तेजी से पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाए जाते हैं, जिसमें पुलिस और प्रशासन मिलकर सड़क खाली कराते हैं, ताकि एंबुलेंस बिना रुके अस्पताल पहुंच सके।
ट्रांसप्लांट के बाद की जिंदगी
हार्ट ट्रांसप्लांट केवल एक सर्जरी नहीं, बल्कि जीवनभर चलने वाली देखभाल की शुरुआत है। प्रत्यारोपण के बाद मरीज को नियमित रूप से ऐसी दवाइयां लेनी होती हैं, जो शरीर को नए दिल को अस्वीकार करने से रोकती हैं। इन दवाइयों के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए साफ-सफाई और खान-पान का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। शुरुआती महीनों में अस्पताल में बार-बार जांच के लिए जाना होता है। डॉक्टरों की सलाह का पूरी तरह पालन करने पर कई मरीज ट्रांसप्लांट के बाद सामान्य जीवन जी पाते हैं, काम पर लौटते हैं और परिवार के साथ सक्रिय जीवन बिताते हैं।
परिवार की भूमिका अहम
ट्रांसप्लांट से पहले और बाद में मरीज के परिवार का सहयोग बेहद जरूरी होता है। लंबे इलाज, नियमित दवाइयों और जांचों के दौरान परिवार का भावनात्मक और व्यावहारिक साथ मरीज के ठीक होने में बड़ी भूमिका निभाता है।
अंगदान: एक व्यक्ति, कई जिंदगियां
किसी भी ट्रांसप्लांट कार्यक्रम की सफलता अंगदान पर निर्भर करती है। एक ब्रेन डेड व्यक्ति के अंगदान से कई लोगों को नई जिंदगी मिल सकती है। दिल, लिवर, किडनी, फेफड़े, अग्न्याशय और आंखों का कॉर्निया जैसे अंग दान किए जा सकते हैं। भारत में अंगदान की दर अभी भी कई देशों के मुकाबले कम है, जिसकी बड़ी वजह जागरूकता की कमी और सामाजिक भ्रांतियां हैं।
अंगदान से जुड़ी जरूरी बातें:
कोई भी व्यक्ति जीवित रहते हुए अंगदान की शपथ ले सकता है और इसके लिए पंजीकरण करा सकता है।
अंगदान की इच्छा के बारे में परिवार को जरूर बताएं, क्योंकि अंतिम सहमति परिवार की ही होती है।
अंगदान की पूरी प्रक्रिया कानून के तहत होती है और इसमें अंगों की खरीद-बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है।
राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन और राज्य स्तर के संगठन इस व्यवस्था की निगरानी करते हैं।
दिल को स्वस्थ रखने के उपाय
ट्रांसप्लांट जैसी स्थिति तक पहुंचने से बचने के लिए दिल की सेहत का ध्यान रखना सबसे अच्छा उपाय है। डॉक्टर कुछ आसान आदतों की सलाह देते हैं:
नियमित व्यायाम करें और रोज कुछ समय पैदल चलें।
तला-भुना, ज्यादा नमक और ज्यादा मीठा कम खाएं।
धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूर रहें।
ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं।
तनाव कम करें और पर्याप्त नींद लें।
सीने में दर्द, सांस फूलना, बेवजह थकान या पैरों में सूजन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से मिलें।
कानपुर के मरीजों को क्या फायदा
कानपुर से लखनऊ की दूरी कम है और नया एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद दोनों शहरों के बीच सफर और आसान हो गया है। ऐसे में केजीएमयू में हार्ट ट्रांसप्लांट शुरू होने का सीधा फायदा कानपुर और आसपास के जिलों के मरीजों को भी मिलेगा। अब तक ऐसे मरीजों को दिल्ली, मुंबई, चेन्नई या अन्य बड़े शहरों के अस्पतालों में जाना पड़ता था, जिससे इलाज के साथ-साथ रहने और आने-जाने का खर्च भी बढ़ जाता था।
पंजीकरण के लिए क्या करें
जिन मरीजों को डॉक्टरों ने हार्ट ट्रांसप्लांट की सलाह दी है, वे केजीएमयू के संबंधित विभाग से संपर्क कर पंजीकरण की प्रक्रिया की जानकारी ले सकते हैं। अपने सभी मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और डॉक्टर की सलाह के कागजात साथ रखें। किसी भी अनधिकृत व्यक्ति या दलाल के झांसे में न आएं। अंग प्रत्यारोपण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और कानूनी नियमों के तहत होती है, जिसमें प्रतीक्षा सूची और मेडिकल मानकों के आधार पर ही प्राथमिकता तय होती है।
सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं से मदद
गंभीर बीमारियों के महंगे इलाज में सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं बड़ी मदद कर सकती हैं। आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष जैसी व्यवस्थाओं के तहत पात्र मरीजों को इलाज में आर्थिक सहायता मिल सकती है। हार्ट ट्रांसप्लांट जैसे इलाज पर किस योजना के तहत कितनी मदद मिल सकती है, इसकी सटीक जानकारी संबंधित अस्पताल के प्रशासनिक विभाग या योजना हेल्पडेस्क से लें।
प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ा कदम
केजीएमयू प्रदेश के सबसे पुराने और बड़े चिकित्सा संस्थानों में से एक है। यहां प्रदेश ही नहीं, आसपास के राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। हार्ट ट्रांसप्लांट जैसी उन्नत सुविधा शुरू होना प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की क्षमता बढ़ने का संकेत है। इससे डॉक्टरों को भी उन्नत सर्जरी का अनुभव मिलेगा और मेडिकल छात्रों को सीखने का अवसर मिलेगा।
निष्कर्ष
केजीएमयू में हार्ट ट्रांसप्लांट की शुरुआत उत्तर प्रदेश के हजारों हृदय रोगियों के लिए उम्मीद की नई किरण है। पहले पांच मुफ्त प्रत्यारोपण का फैसला जरूरतमंद परिवारों को बड़ी राहत देगा। साथ ही यह जरूरी है कि समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़े, क्योंकि डोनर के बिना कोई भी ट्रांसप्लांट संभव नहीं है।
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