नया वायरस फैलने से पहले पकड़ेंगी 22 हाई-सिक्योरिटी लैब
India's 22 high-security labs to detect new viruses before outbreaks
Kanpur Live News Desk ·

कोविड महामारी ने दुनिया को सिखाया कि किसी नए वायरस का समय पर पता न चल पाना कितना भारी पड़ सकता है। इसी सबक से आगे बढ़ते हुए भारत अब अगली महामारी का इंतजार करने के बजाय नए संक्रमण के शुरुआती संकेत पहले पकड़ने की तैयारी कर रहा है। केंद्र सरकार ने नेशनल वन हेल्थ मिशन के तहत देश में 22 बीएसएल-3 और बीएसएल-4 हाई-कंटेनमेंट लैब का नेटवर्क तैयार किया है। इन लैब्स में केवल इंसानों के ही नहीं, बल्कि पशुओं और वन्यजीवों में फैलने वाले वायरस और असामान्य बीमारियों की भी जांच होगी।
क्या है उद्देश्य
इस पहल का मकसद किसी नए वायरस या दूसरे खतरनाक संक्रमण के इंसानों में बड़े पैमाने पर फैलने से पहले उसके खतरे को समझना और समय रहते कार्रवाई शुरू करना है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार दुनिया में कई गंभीर संक्रमण ऐसे हैं जो पशुओं से फैले हैं। ऐसे संक्रमणों को इंसानों तक पहुंचने से पहले पकड़ने की तैयारी की जा रही है।
वन हेल्थ क्या है
वन हेल्थ का सीधा मतलब है कि इंसान, पशु और पर्यावरण की सेहत को अलग-अलग नहीं देखा जाए। कोई नया संक्रमण पशुओं या वन्यजीवों में शुरू होकर बाद में इंसानों तक पहुंच सकता है। इसलिए बीमारी की निगरानी केवल अस्पतालों तक सीमित रखने के बजाय सभी क्षेत्रों को जोड़कर करने पर जोर है। उदाहरण के लिए, अगर किसी इलाके में पशुओं में अचानक असामान्य बीमारी बढ़े और वहीं इंसानों में मिलते-जुलते लक्षण दिखें, तो दोनों को जोड़कर जांच की जा सकेगी।
जूनोटिक बीमारियां क्या हैं
जो बीमारियां जानवरों से इंसानों में फैलती हैं, उन्हें जूनोटिक बीमारियां कहा जाता है। रेबीज, बर्ड फ्लू, निपाह, स्वाइन फ्लू, प्लेग, एंथ्रेक्स और कई अन्य बीमारियां इसी श्रेणी में आती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इंसानों में पाई जाने वाली कई नई संक्रामक बीमारियों का स्रोत जानवर ही रहे हैं। जंगलों की कटाई, वन्यजीवों के इलाकों में इंसानी दखल, पशुपालन का बढ़ता दायरा और अंतरराष्ट्रीय यात्रा ऐसी बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ाते हैं।
बीएसएल-3 और बीएसएल-4 लैब क्या होती हैं
बीएसएल यानी बायो सेफ्टी लेवल प्रयोगशालाओं की सुरक्षा का स्तर बताता है। यह स्तर 1 से 4 तक होता है।
बीएसएल-3 लैब: यहां ऐसे रोगाणुओं पर काम होता है, जो हवा के जरिये फैल सकते हैं और गंभीर बीमारी पैदा कर सकते हैं। इनमें विशेष वेंटिलेशन, नियंत्रित प्रवेश और सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था होती है।
बीएसएल-4 लैब: यह सबसे ऊंचे स्तर की सुरक्षा वाली लैब होती है, जहां बेहद खतरनाक और जानलेवा वायरसों पर काम होता है, जिनका कोई पक्का इलाज या टीका उपलब्ध नहीं होता। यहां वैज्ञानिक पूरे शरीर को ढकने वाले विशेष सूट पहनकर काम करते हैं।
ऐसी लैब में संक्रमण के बाहर फैलने का जोखिम न्यूनतम रखने के लिए कई स्तरों की सुरक्षा होती है।
22 लैब एक नेटवर्क की तरह
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार देश में 22 बीएसएल-3 और बीएसएल-4 लैब का भौगोलिक रूप से फैला नेटवर्क मौजूद है। इनका इस्तेमाल इंसान, पशु और वन्यजीवों से जुड़े बीमारी के प्रकोप के संदिग्ध नमूनों की जांच के लिए किया जा सकता है।
इसका फायदा यह होगा कि किसी बड़े प्रकोप की स्थिति में जांच की क्षमता किसी एक संस्थान या शहर तक सीमित नहीं रहेगी। अलग-अलग जगहों की हाई-सिक्योरिटी सुविधाओं का जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल हो सकेगा। सरकार इन लैब्स के बीच बेहतर तालमेल और साझा मानकों पर जोर दे रही है।
एक डैशबोर्ड पर पूरी जानकारी
मिशन के तहत सरकार एक इंटरऑपरेबल वन हेल्थ डैशबोर्ड भी तैयार कर रही है, जिसमें इंसान, पशु और पर्यावरण से जुड़ी बीमारियों की जानकारी एक ही जगह दिखेगी। अभी ऐसी सूचनाएं अलग-अलग विभागों और प्रणालियों में होती हैं। इन्हें जोड़ने से बीमारी के बढ़ते संकेत जल्दी दिखने की उम्मीद है।
कोविड से मिला सबक
कोविड-19 महामारी के दौरान दुनियाभर में जांच क्षमता की कमी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई थी। शुरुआती दिनों में नमूनों की जांच के लिए गिनी-चुनी प्रयोगशालाएं थीं, जिससे रिपोर्ट आने में देरी होती थी। बाद में भारत ने तेजी से अपनी जांच क्षमता बढ़ाई। अब सरकार चाहती है कि अगली किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति के लिए देश पहले से तैयार रहे।
आम लोग क्या कर सकते हैं
महामारी की रोकथाम में आम लोगों की भूमिका भी अहम है:
पालतू और दुधारू पशुओं का नियमित टीकाकरण कराएं।
बीमार या मृत पशुओं और पक्षियों को नंगे हाथ न छुएं, इसकी सूचना पशुपालन विभाग को दें।
मांस और अंडे अच्छी तरह पकाकर ही खाएं।
जंगली जानवरों के संपर्क से बचें।
किसी इलाके में पशुओं या पक्षियों की असामान्य मौतें दिखें, तो प्रशासन को तुरंत सूचित करें।
हाथ धोने और साफ-सफाई की आदतें बनाए रखें।
उत्तर प्रदेश के लिए अहमियत
उत्तर प्रदेश बड़ी आबादी और विशाल पशुधन वाला राज्य है। यहां ग्रामीण इलाकों में इंसान और पशु काफी नजदीक रहते हैं। ऐसे में पशुओं में फैलने वाली बीमारियों पर नजर रखना राज्य के लिए भी बेहद जरूरी है। वन हेल्थ जैसी पहल से पशुओं में फैलने वाले संक्रमण की समय पर पहचान हो सकेगी, जिससे इंसानों तक उनके पहुंचने का खतरा कम होगा।
वैज्ञानिक शोध को भी मिलेगा बढ़ावा
हाई-सिक्योरिटी लैब का यह नेटवर्क केवल निगरानी तक सीमित नहीं रहेगा। इससे देश में खतरनाक रोगाणुओं पर सुरक्षित तरीके से शोध, नए टीकों और जांच किट के विकास तथा वैज्ञानिकों के प्रशिक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। देश में ऐसी उच्च स्तरीय प्रयोगशालाओं की कमी को लंबे समय से महसूस किया जाता रहा है। अब इनके एक नेटवर्क के रूप में काम करने से शोधकर्ताओं को भी अपने प्रयोगों के लिए जरूरी सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी। इससे भारत स्वास्थ्य सुरक्षा के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
निष्कर्ष
22 हाई-सिक्योरिटी लैब का नेटवर्क और वन हेल्थ डैशबोर्ड भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। इंसान, पशु और पर्यावरण की सेहत को जोड़कर देखने की यह सोच भविष्य की महामारियों से बचाव में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
स्वास्थ्य और विज्ञान से जुड़ी हर जरूरी खबर को आसान भाषा में समझने के लिए कानपुर लाइव के साथ लगातार जुड़े रहें।
नया वायरस फैलने से पहले पकड़ेंगी 22 हाई-सिक्योरिटी लैब
कोविड महामारी ने दुनिया को सिखाया कि किसी नए वायरस का समय पर पता न चल पाना कितना भारी पड़ सकता है। इसी सबक से आगे बढ़ते हुए भारत अब अगली महामारी का इंतजार करने के बजाय नए संक्रमण के शुरुआती संकेत पहले पकड़ने की तैयारी कर रहा है। केंद्र सरकार ने नेशनल वन हेल्थ मिशन के तहत देश में 22 बीएसएल-3 और बीएसएल-4 हाई-कंटेनमेंट लैब का नेटवर्क तैयार किया है। इन लैब्स में केवल इंसानों के ही नहीं, बल्कि पशुओं और वन्यजीवों में फैलने वाले वायरस और असामान्य बीमारियों की भी जांच होगी।
क्या है उद्देश्य
इस पहल का मकसद किसी नए वायरस या दूसरे खतरनाक संक्रमण के इंसानों में बड़े पैमाने पर फैलने से पहले उसके खतरे को समझना और समय रहते कार्रवाई शुरू करना है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार दुनिया में कई गंभीर संक्रमण ऐसे हैं जो पशुओं से फैले हैं। ऐसे संक्रमणों को इंसानों तक पहुंचने से पहले पकड़ने की तैयारी की जा रही है।
वन हेल्थ क्या है
वन हेल्थ का सीधा मतलब है कि इंसान, पशु और पर्यावरण की सेहत को अलग-अलग नहीं देखा जाए। कोई नया संक्रमण पशुओं या वन्यजीवों में शुरू होकर बाद में इंसानों तक पहुंच सकता है। इसलिए बीमारी की निगरानी केवल अस्पतालों तक सीमित रखने के बजाय सभी क्षेत्रों को जोड़कर करने पर जोर है। उदाहरण के लिए, अगर किसी इलाके में पशुओं में अचानक असामान्य बीमारी बढ़े और वहीं इंसानों में मिलते-जुलते लक्षण दिखें, तो दोनों को जोड़कर जांच की जा सकेगी।
जूनोटिक बीमारियां क्या हैं
जो बीमारियां जानवरों से इंसानों में फैलती हैं, उन्हें जूनोटिक बीमारियां कहा जाता है। रेबीज, बर्ड फ्लू, निपाह, स्वाइन फ्लू, प्लेग, एंथ्रेक्स और कई अन्य बीमारियां इसी श्रेणी में आती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इंसानों में पाई जाने वाली कई नई संक्रामक बीमारियों का स्रोत जानवर ही रहे हैं। जंगलों की कटाई, वन्यजीवों के इलाकों में इंसानी दखल, पशुपालन का बढ़ता दायरा और अंतरराष्ट्रीय यात्रा ऐसी बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ाते हैं।
बीएसएल-3 और बीएसएल-4 लैब क्या होती हैं
बीएसएल यानी बायो सेफ्टी लेवल प्रयोगशालाओं की सुरक्षा का स्तर बताता है। यह स्तर 1 से 4 तक होता है।
बीएसएल-3 लैब: यहां ऐसे रोगाणुओं पर काम होता है, जो हवा के जरिये फैल सकते हैं और गंभीर बीमारी पैदा कर सकते हैं। इनमें विशेष वेंटिलेशन, नियंत्रित प्रवेश और सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था होती है।
बीएसएल-4 लैब: यह सबसे ऊंचे स्तर की सुरक्षा वाली लैब होती है, जहां बेहद खतरनाक और जानलेवा वायरसों पर काम होता है, जिनका कोई पक्का इलाज या टीका उपलब्ध नहीं होता। यहां वैज्ञानिक पूरे शरीर को ढकने वाले विशेष सूट पहनकर काम करते हैं।
ऐसी लैब में संक्रमण के बाहर फैलने का जोखिम न्यूनतम रखने के लिए कई स्तरों की सुरक्षा होती है।
22 लैब एक नेटवर्क की तरह
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार देश में 22 बीएसएल-3 और बीएसएल-4 लैब का भौगोलिक रूप से फैला नेटवर्क मौजूद है। इनका इस्तेमाल इंसान, पशु और वन्यजीवों से जुड़े बीमारी के प्रकोप के संदिग्ध नमूनों की जांच के लिए किया जा सकता है।
इसका फायदा यह होगा कि किसी बड़े प्रकोप की स्थिति में जांच की क्षमता किसी एक संस्थान या शहर तक सीमित नहीं रहेगी। अलग-अलग जगहों की हाई-सिक्योरिटी सुविधाओं का जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल हो सकेगा। सरकार इन लैब्स के बीच बेहतर तालमेल और साझा मानकों पर जोर दे रही है।
एक डैशबोर्ड पर पूरी जानकारी
मिशन के तहत सरकार एक इंटरऑपरेबल वन हेल्थ डैशबोर्ड भी तैयार कर रही है, जिसमें इंसान, पशु और पर्यावरण से जुड़ी बीमारियों की जानकारी एक ही जगह दिखेगी। अभी ऐसी सूचनाएं अलग-अलग विभागों और प्रणालियों में होती हैं। इन्हें जोड़ने से बीमारी के बढ़ते संकेत जल्दी दिखने की उम्मीद है।
कोविड से मिला सबक
कोविड-19 महामारी के दौरान दुनियाभर में जांच क्षमता की कमी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई थी। शुरुआती दिनों में नमूनों की जांच के लिए गिनी-चुनी प्रयोगशालाएं थीं, जिससे रिपोर्ट आने में देरी होती थी। बाद में भारत ने तेजी से अपनी जांच क्षमता बढ़ाई। अब सरकार चाहती है कि अगली किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति के लिए देश पहले से तैयार रहे।
आम लोग क्या कर सकते हैं
महामारी की रोकथाम में आम लोगों की भूमिका भी अहम है:
पालतू और दुधारू पशुओं का नियमित टीकाकरण कराएं।
बीमार या मृत पशुओं और पक्षियों को नंगे हाथ न छुएं, इसकी सूचना पशुपालन विभाग को दें।
मांस और अंडे अच्छी तरह पकाकर ही खाएं।
जंगली जानवरों के संपर्क से बचें।
किसी इलाके में पशुओं या पक्षियों की असामान्य मौतें दिखें, तो प्रशासन को तुरंत सूचित करें।
हाथ धोने और साफ-सफाई की आदतें बनाए रखें।
उत्तर प्रदेश के लिए अहमियत
उत्तर प्रदेश बड़ी आबादी और विशाल पशुधन वाला राज्य है। यहां ग्रामीण इलाकों में इंसान और पशु काफी नजदीक रहते हैं। ऐसे में पशुओं में फैलने वाली बीमारियों पर नजर रखना राज्य के लिए भी बेहद जरूरी है। वन हेल्थ जैसी पहल से पशुओं में फैलने वाले संक्रमण की समय पर पहचान हो सकेगी, जिससे इंसानों तक उनके पहुंचने का खतरा कम होगा।
वैज्ञानिक शोध को भी मिलेगा बढ़ावा
हाई-सिक्योरिटी लैब का यह नेटवर्क केवल निगरानी तक सीमित नहीं रहेगा। इससे देश में खतरनाक रोगाणुओं पर सुरक्षित तरीके से शोध, नए टीकों और जांच किट के विकास तथा वैज्ञानिकों के प्रशिक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। देश में ऐसी उच्च स्तरीय प्रयोगशालाओं की कमी को लंबे समय से महसूस किया जाता रहा है। अब इनके एक नेटवर्क के रूप में काम करने से शोधकर्ताओं को भी अपने प्रयोगों के लिए जरूरी सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी। इससे भारत स्वास्थ्य सुरक्षा के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
निष्कर्ष
22 हाई-सिक्योरिटी लैब का नेटवर्क और वन हेल्थ डैशबोर्ड भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। इंसान, पशु और पर्यावरण की सेहत को जोड़कर देखने की यह सोच भविष्य की महामारियों से बचाव में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
स्वास्थ्य और विज्ञान से जुड़ी हर जरूरी खबर को आसान भाषा में समझने के लिए कानपुर लाइव के साथ लगातार जुड़े रहें।
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