सीएसए में 15 से 17 अक्टूबर तक लगेगा किसान मेला, सात राज्यों से पहुंचेंगे 25-30 हजार किसान
CSA Kanpur to host Kisan Mela from October 15 to 17, farmers from seven states expected
Kanpur Live News Desk ·

कानपुर के किसानों और कृषि से जुड़े लोगों के लिए अच्छी खबर है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में अक्टूबर के मध्य में बड़ा किसान मेला लगने जा रहा है। इसमें उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तर भारत के कई राज्यों से किसान पहुंचेंगे। मेले की तैयारियों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने बैठक कर रूपरेखा तय कर ली है।
तीन दिन का मेला और प्रदर्शनी
सीएसए में 15 से 17 अक्टूबर तक किसान मेला और कृषि उद्योग प्रदर्शनी आयोजित होगी। शनिवार को कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की, जिसमें मेले में 200 स्टॉल लगाने का फैसला हुआ।
सात राज्यों से आएंगे हजारों किसान
प्रसार निदेशक डॉ. वी.के. त्रिपाठी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तर भारत के सात राज्यों से 25 से 30 हजार किसान मेले में पहुंचेंगे।
यह आंकड़ा बताता है कि सीएसए का किसान मेला केवल स्थानीय आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्तर का बड़ा कृषि कार्यक्रम है। इतनी बड़ी संख्या में किसानों का एक जगह जुटना नई तकनीक और अनुभवों के आदान-प्रदान का अच्छा मौका होता है।
किन विषयों पर मिलेगी जानकारी
मीडिया प्रभारी डॉ. खलील खान के मुताबिक मेले में किसानों को औषधीय गुणों वाली फसलों, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, मोटे अनाज और अन्य विषयों के बारे में जागरूक किया जाएगा।
इन विषयों का महत्व समझें:
जैविक खेती: रासायनिक खाद और कीटनाशकों की जगह जैविक खाद और प्राकृतिक तरीकों का इस्तेमाल। जैविक उत्पादों की बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है।
प्राकृतिक खेती: कम लागत वाली खेती की पद्धति, जिसमें गाय के गोबर-गोमूत्र आधारित घोल और स्थानीय संसाधनों का उपयोग होता है।
मोटे अनाज (श्री अन्न): बाजरा, ज्वार, रागी, कोदो, सांवा जैसी फसलें कम पानी में उगती हैं और पोषण से भरपूर होती हैं।
औषधीय फसलें: तुलसी, अश्वगंधा, शतावरी, एलोवेरा जैसी फसलें किसानों के लिए आय का अतिरिक्त स्रोत बन सकती हैं।
किसान मेले से क्या फायदा
किसान मेले में किसानों को एक ही जगह पर कई सुविधाएं मिलती हैं। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक सीधे किसानों से बात करते हैं और उनकी समस्याओं का समाधान बताते हैं। उन्नत बीज, नई कृषि मशीनें, सिंचाई के आधुनिक तरीके और फसल सुरक्षा के उपायों की जानकारी मिलती है। कृषि उद्योग प्रदर्शनी में कंपनियां अपने उत्पाद और तकनीक प्रदर्शित करती हैं, जिससे किसान नई चीजें देखकर समझ सकते हैं।
रबी सीजन से पहले सही समय
अक्टूबर का महीना रबी फसलों की बुआई की तैयारी का समय होता है। गेहूं, चना, मटर, सरसों और मसूर जैसी फसलों की बुआई इसी दौरान शुरू होती है। ऐसे में मध्य अक्टूबर में लगने वाला यह मेला किसानों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। वे बुआई से पहले उन्नत किस्मों, बीज उपचार और खाद प्रबंधन की जानकारी ले सकेंगे।
इस साल की बारिश और खेती
इस साल सितंबर में कानपुर क्षेत्र में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। इससे खेतों में नमी अच्छी है, जो रबी की बुआई के लिए फायदेमंद हो सकती है। वहीं, कई जगह जलभराव से खरीफ फसलों को नुकसान की आशंका भी है। किसान मेले में वैज्ञानिकों से इन हालात में सही फसल प्रबंधन की सलाह ली जा सकती है।
सीएसए: एक परिचय
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश के प्रमुख कृषि विश्वविद्यालयों में शामिल है। यहां कृषि, बागवानी, पशुपालन, खाद्य प्रौद्योगिकी और गृह विज्ञान जैसे विषयों की पढ़ाई और शोध होता है। विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र विभिन्न जिलों में किसानों तक नई तकनीक पहुंचाने का काम करते हैं। विश्वविद्यालय की मौसम वेधशाला कानपुर के मौसम के आंकड़े भी दर्ज करती है।
मेले में जाने वाले किसान ध्यान रखें
अपनी खेती से जुड़े सवाल पहले से लिखकर ले जाएं।
मिट्टी की जांच रिपोर्ट हो तो साथ रखें, सलाह लेने में आसानी होगी।
बीज और उपकरण खरीदते समय प्रमाणित विक्रेता से ही लें और रसीद जरूर लें।
सरकारी योजनाओं की जानकारी देने वाले स्टॉल पर जरूर जाएं।
युवाओं और महिला किसानों के लिए भी अवसर
किसान मेले केवल अनुभवी किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि खेती में नया करने की सोच रखने वाले युवाओं और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए भी उपयोगी होते हैं। खाद्य प्रसंस्करण, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन जैसे विषयों की जानकारी भी ऐसे आयोजनों में मिलती है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए रास्ते खोल सकती है।
मेले से जुड़ी आगे की जानकारी, कार्यक्रम सूची और विशेष सत्रों की अपडेट कानपुर लाइव पर मिलती रहेगी।
सीएसए में 15 से 17 अक्टूबर तक लगेगा किसान मेला, सात राज्यों से पहुंचेंगे 25-30 हजार किसान
कानपुर के किसानों और कृषि से जुड़े लोगों के लिए अच्छी खबर है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में अक्टूबर के मध्य में बड़ा किसान मेला लगने जा रहा है। इसमें उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तर भारत के कई राज्यों से किसान पहुंचेंगे। मेले की तैयारियों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने बैठक कर रूपरेखा तय कर ली है।
तीन दिन का मेला और प्रदर्शनी
सीएसए में 15 से 17 अक्टूबर तक किसान मेला और कृषि उद्योग प्रदर्शनी आयोजित होगी। शनिवार को कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की, जिसमें मेले में 200 स्टॉल लगाने का फैसला हुआ।
सात राज्यों से आएंगे हजारों किसान
प्रसार निदेशक डॉ. वी.के. त्रिपाठी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तर भारत के सात राज्यों से 25 से 30 हजार किसान मेले में पहुंचेंगे।
यह आंकड़ा बताता है कि सीएसए का किसान मेला केवल स्थानीय आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्तर का बड़ा कृषि कार्यक्रम है। इतनी बड़ी संख्या में किसानों का एक जगह जुटना नई तकनीक और अनुभवों के आदान-प्रदान का अच्छा मौका होता है।
किन विषयों पर मिलेगी जानकारी
मीडिया प्रभारी डॉ. खलील खान के मुताबिक मेले में किसानों को औषधीय गुणों वाली फसलों, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, मोटे अनाज और अन्य विषयों के बारे में जागरूक किया जाएगा।
इन विषयों का महत्व समझें:
जैविक खेती: रासायनिक खाद और कीटनाशकों की जगह जैविक खाद और प्राकृतिक तरीकों का इस्तेमाल। जैविक उत्पादों की बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है।
प्राकृतिक खेती: कम लागत वाली खेती की पद्धति, जिसमें गाय के गोबर-गोमूत्र आधारित घोल और स्थानीय संसाधनों का उपयोग होता है।
मोटे अनाज (श्री अन्न): बाजरा, ज्वार, रागी, कोदो, सांवा जैसी फसलें कम पानी में उगती हैं और पोषण से भरपूर होती हैं।
औषधीय फसलें: तुलसी, अश्वगंधा, शतावरी, एलोवेरा जैसी फसलें किसानों के लिए आय का अतिरिक्त स्रोत बन सकती हैं।
किसान मेले से क्या फायदा
किसान मेले में किसानों को एक ही जगह पर कई सुविधाएं मिलती हैं। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक सीधे किसानों से बात करते हैं और उनकी समस्याओं का समाधान बताते हैं। उन्नत बीज, नई कृषि मशीनें, सिंचाई के आधुनिक तरीके और फसल सुरक्षा के उपायों की जानकारी मिलती है। कृषि उद्योग प्रदर्शनी में कंपनियां अपने उत्पाद और तकनीक प्रदर्शित करती हैं, जिससे किसान नई चीजें देखकर समझ सकते हैं।
रबी सीजन से पहले सही समय
अक्टूबर का महीना रबी फसलों की बुआई की तैयारी का समय होता है। गेहूं, चना, मटर, सरसों और मसूर जैसी फसलों की बुआई इसी दौरान शुरू होती है। ऐसे में मध्य अक्टूबर में लगने वाला यह मेला किसानों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। वे बुआई से पहले उन्नत किस्मों, बीज उपचार और खाद प्रबंधन की जानकारी ले सकेंगे।
इस साल की बारिश और खेती
इस साल सितंबर में कानपुर क्षेत्र में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। इससे खेतों में नमी अच्छी है, जो रबी की बुआई के लिए फायदेमंद हो सकती है। वहीं, कई जगह जलभराव से खरीफ फसलों को नुकसान की आशंका भी है। किसान मेले में वैज्ञानिकों से इन हालात में सही फसल प्रबंधन की सलाह ली जा सकती है।
सीएसए: एक परिचय
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश के प्रमुख कृषि विश्वविद्यालयों में शामिल है। यहां कृषि, बागवानी, पशुपालन, खाद्य प्रौद्योगिकी और गृह विज्ञान जैसे विषयों की पढ़ाई और शोध होता है। विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र विभिन्न जिलों में किसानों तक नई तकनीक पहुंचाने का काम करते हैं। विश्वविद्यालय की मौसम वेधशाला कानपुर के मौसम के आंकड़े भी दर्ज करती है।
मेले में जाने वाले किसान ध्यान रखें
अपनी खेती से जुड़े सवाल पहले से लिखकर ले जाएं।
मिट्टी की जांच रिपोर्ट हो तो साथ रखें, सलाह लेने में आसानी होगी।
बीज और उपकरण खरीदते समय प्रमाणित विक्रेता से ही लें और रसीद जरूर लें।
सरकारी योजनाओं की जानकारी देने वाले स्टॉल पर जरूर जाएं।
युवाओं और महिला किसानों के लिए भी अवसर
किसान मेले केवल अनुभवी किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि खेती में नया करने की सोच रखने वाले युवाओं और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए भी उपयोगी होते हैं। खाद्य प्रसंस्करण, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन जैसे विषयों की जानकारी भी ऐसे आयोजनों में मिलती है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए रास्ते खोल सकती है।
मेले से जुड़ी आगे की जानकारी, कार्यक्रम सूची और विशेष सत्रों की अपडेट कानपुर लाइव पर मिलती रहेगी।
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