नवरात्र से पहले मिलावट पर सख्ती: कानपुर में कुट्टू-सिंघाड़े के आटे समेत 18 नमूने लिए, 3000 किलो कुट्टू समेत 1.60 लाख का माल सीज
Food Safety Drive Before Navratri: 18 Samples Including Kuttu and Singhara Flour Taken in Kanpur, Goods Worth ₹1.60 Lakh Seized
Kanpur Live News Desk ·

मुख्य बातें:
नवरात्र से पहले व्रत की सामग्री में मिलावट की आशंका पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने अभियान तेज किया।
शनिवार को शहर के अलग-अलग स्थानों से 18 नमूने लिए गए।
एक कोल्ड स्टोरेज से संदेह के आधार पर 3000 किलो साबुत कुट्टू सीज किया गया, जिसकी कीमत करीब 1.50 लाख रुपये है।
कुल मिलाकर 1.60 लाख रुपये से ज्यादा का माल सीज हुआ।
सभी नमूने लैब भेजे गए हैं, रिपोर्ट आने के बाद कानूनी कार्रवाई होगी।
नवरात्र शुरू होते ही घरों में व्रत की तैयारी जोरों पर है। कुट्टू की पूरी, सिंघाड़े के आटे के पकौड़े और फलाहारी नमकीन की मांग इन दिनों अचानक बढ़ जाती है। इसी मांग का फायदा उठाकर मिलावटखोर सक्रिय न हों, इसके लिए कानपुर में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने जांच अभियान तेज कर दिया है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार शनिवार, 10 अक्टूबर को विभाग की टीमों ने शहर के कई इलाकों में छापेमारी कर 18 नमूने लिए और 1.60 लाख रुपये से ज्यादा का माल सीज किया।
कहां-कहां हुई जांच
रिपोर्टों के अनुसार विभाग की टीमें शहर के कई हिस्सों में पहुंचीं, जिनमें बंगाली मोहाल, जूही कला, रूमा, रतनलाल नगर, लाजपत नगर, विष्णुपुरी, यशोदा नगर और कल्याणपुर शामिल हैं। इनमें थोक व्यापारी, गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और बड़े रिटेल स्टोर भी शामिल थे।
किन चीजों के नमूने लिए गए
जांच के दौरान इन खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए:
कुट्टू का आटा और साबुत कुट्टू
सिंघाड़े का आटा
फलाहारी मिक्सचर नमकीन
मूंगफली दाना
घी
मिर्च पाउडर
अमचूर
क्या-क्या सीज हुआ
एक कोल्ड स्टोरेज से संदेह के आधार पर 3000 किलो साबुत कुट्टू सीज किया गया, जिसकी कीमत करीब 1.50 लाख रुपये बताई गई है।
रूमा के एक प्रतिष्ठान से 25 किलो मिर्च पाउडर सीज किया गया, जिसकी कीमत करीब 5,000 रुपये है।
यशोदा नगर के एक प्रतिष्ठान से 5 किलो सिंघाड़े का आटा और 8 किलो कुट्टू का आटा सीज किया गया, जिसकी कीमत 7,000 रुपये से ज्यादा है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि नमूना लेने या माल सीज करने का मतलब यह नहीं है कि सामान मिलावटी साबित हो गया है। अंतिम फैसला लैब रिपोर्ट के बाद ही होगा।
विभाग ने क्या कहा
सहायक आयुक्त (खाद्य) संजय प्रताप सिंह ने बताया कि साबुत कुट्टू को संदेह के आधार पर सीज किया गया है। बाकी खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद नियमों के अनुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कुट्टू के आटे पर ही सबसे ज्यादा नजर क्यों?
हर साल नवरात्र के दौरान देश के कई हिस्सों से कुट्टू का आटा खाने के बाद लोगों के बीमार होने की खबरें आती रही हैं। इसकी कुछ मुख्य वजहें मानी जाती हैं:
पुराना या खराब आटा: कुट्टू के आटे में तेल की मात्रा होती है, इसलिए यह जल्दी खराब होता है। लंबे समय तक रखा पुराना आटा फफूंद लगने से नुकसान कर सकता है।
मिलावट: कई बार इसमें सस्ते अनाज का आटा या दूसरी चीजें मिलाए जाने की शिकायतें आती हैं।
गलत भंडारण: नमी वाली जगह पर रखा आटा जल्दी खराब हो जाता है।
इसलिए खाद्य विभाग हर साल नवरात्र से पहले कुट्टू और सिंघाड़े के आटे की खास जांच करता है।
मिलावटी या खराब आटे की पहचान कैसे करें
घर पर कुछ आसान तरीकों से आप आटे की गुणवत्ता का अंदाजा लगा सकते हैं:
रंग देखें: असली कुट्टू का आटा हल्का भूरा-धूसर होता है। बहुत सफेद या असामान्य रंग पर शक करें।
गंध सूंघें: बासी, खट्टी या फफूंद जैसी गंध आए तो इस्तेमाल न करें।
गांठें देखें: आटे में गांठें या कीड़े हों तो वह पुराना हो सकता है।
गूंधकर देखें: खराब आटा गूंधने पर अजीब तरह से चिपचिपा या भुरभुरा हो सकता है।
पैकिंग जांचें: पैकिंग की तारीख, एक्सपायरी, FSSAI नंबर और निर्माता का पता जरूर देखें।
खरीदारी करते समय सावधानियां
खुला आटा खरीदने की बजाय भरोसेमंद ब्रांड का सील बंद पैकेट लें।
जरूरत जितना ही आटा खरीदें, ज्यादा मात्रा में स्टॉक न करें।
हाल ही में पैक हुआ आटा चुनें।
खरीदने के बाद आटे को एयरटाइट डिब्बे में सूखी और ठंडी जगह पर रखें।
बहुत सस्ते दाम पर मिल रहे आटे से सावधान रहें।
कुट्टू खाने के बाद तबीयत बिगड़े तो?
अगर कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीज खाने के बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चक्कर या घबराहट हो, तो तुरंत नजदीकी डॉक्टर या अस्पताल जाएं। बचा हुआ आटा फेंकें नहीं, बल्कि संभालकर रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर उसकी जांच कराई जा सके।
मिलावट की शिकायत कहां करें
अगर आपको किसी दुकान पर मिलावटी खाद्य पदार्थ बिकने का शक है, तो आप इसकी शिकायत जिले के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन कार्यालय में कर सकते हैं। FSSAI की ओर से उपभोक्ताओं की शिकायत के लिए ऑनलाइन व्यवस्था भी उपलब्ध है। शिकायत करते समय दुकान का नाम, पता, खरीदारी की तारीख और बिल की जानकारी जरूर दें।
कानून क्या कहता है
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत मिलावटी या असुरक्षित खाद्य पदार्थ बेचना दंडनीय अपराध है। लैब रिपोर्ट में नमूना फेल होने पर जुर्माना, लाइसेंस निलंबन और गंभीर मामलों में मुकदमा और सजा का भी प्रावधान है। अगर मिलावटी खाना खाने से किसी की जान को खतरा हो, तो सजा और सख्त हो जाती है।
kanpur.live की राय
व्रत आस्था से जुड़ा होता है और लोग पूरे विश्वास के साथ व्रत की सामग्री खरीदते हैं। ऐसे में मिलावट न सिर्फ सेहत के साथ खिलवाड़ है, बल्कि लोगों की भावनाओं के साथ भी धोखा है। खाद्य विभाग की यह सक्रियता स्वागत योग्य है। हम लैब रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जानकारी आप तक पहुंचाएंगे।
व्रत में खाई जाने वाली चीजें और उनकी सही पहचान
कुट्टू और सिंघाड़े के आटे के अलावा व्रत में साबूदाना, मखाना, सेंधा नमक, मूंगफली, राजगिरा और समा के चावल भी खूब इस्तेमाल होते हैं। इनमें भी कई बार मिलावट या खराब गुणवत्ता की शिकायतें आती हैं:
साबूदाना: अच्छे साबूदाने के दाने एक जैसे और चमकदार सफेद होते हैं। बहुत ज्यादा सफेद और चमक वाले दानों पर केमिकल पॉलिश का शक हो सकता है।
सेंधा नमक: असली सेंधा नमक हल्का गुलाबी या सफेद होता है। पैकिंग पर निर्माता की जानकारी जरूर देखें।
मखाना: अच्छे मखाने हल्के, कुरकुरे और बिना काले धब्बों वाले होते हैं।
मूंगफली: बदबूदार या फफूंद लगी मूंगफली कभी न खाएं।
घी: बहुत सस्ता घी मिलावटी हो सकता है। भरोसेमंद ब्रांड ही खरीदें।
व्यापारियों के लिए जरूरी बातें
खाद्य कारोबार करने वाले सभी व्यापारियों के लिए FSSAI लाइसेंस या पंजीकरण अनिवार्य है। व्यापारियों को चाहिए कि वे सामान भरोसेमंद सप्लायर से ही खरीदें, खरीद के बिल संभालकर रखें और भंडारण साफ-सुथरी, सूखी जगह पर करें। पुराना या खराब हो चुका स्टॉक बेचने की बजाय नष्ट कर दें। ईमानदार व्यापारियों के लिए ऐसे अभियान बाजार में भरोसा बढ़ाने का काम करते हैं।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
आम तौर पर खाद्य सुरक्षा विभाग नवरात्र से लेकर दिवाली तक पूरे त्योहारी सीजन में ऐसा अभियान जारी रखता है। दिवाली से पहले मिठाई, खोया, पनीर और दूध से बने उत्पादों की जांच भी तेज की जाती है।
घर पर व्रत का आटा कैसे रखें
कुट्टू और सिंघाड़े का आटा खरीदने के बाद उसे कांच या स्टील के एयरटाइट डिब्बे में रखें। डिब्बा रसोई में गैस के पास या नमी वाली जगह पर न रखें। जरूरत हो तो आटे को फ्रिज में भी रखा जा सकता है। पिछले साल का बचा आटा इस बार इस्तेमाल न करें। आटा गूंधने के बाद तुरंत इस्तेमाल करें, गूंधा हुआ आटा लंबे समय तक न रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. कानपुर में कितने नमूने लिए गए? शनिवार को कुल 18 नमूने।
प्रश्न 2. कितना माल सीज हुआ? 1.60 लाख रुपये से ज्यादा का, जिसमें 3000 किलो साबुत कुट्टू शामिल है।
प्रश्न 3. क्या सीज किया गया सामान मिलावटी साबित हुआ है? अभी नहीं। नमूने लैब भेजे गए हैं, रिपोर्ट के बाद ही स्थिति साफ होगी।
प्रश्न 4. कुट्टू का आटा जल्दी खराब क्यों होता है? इसमें तेल की मात्रा होती है, इसलिए नमी और लंबे भंडारण से यह जल्दी खराब हो सकता है।
प्रश्न 5. अच्छे आटे की पहचान कैसे करें? रंग, गंध और पैकिंग पर तारीख व FSSAI नंबर जांचें।
प्रश्न 6. कुट्टू खाने के बाद बीमार हों तो क्या करें? तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और बचा हुआ आटा जांच के लिए संभालकर रखें।
प्रश्न 7. मिलावट की शिकायत कहां करें? जिले के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन कार्यालय या FSSAI की ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था पर।
स्रोत: खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के बयान पर आधारित स्थानीय रिपोर्ट, 10 अक्टूबर 2026।
नवरात्र से पहले मिलावट पर सख्ती: कानपुर में कुट्टू-सिंघाड़े के आटे समेत 18 नमूने लिए, 3000 किलो कुट्टू समेत 1.60 लाख का माल सीज
मुख्य बातें:
नवरात्र से पहले व्रत की सामग्री में मिलावट की आशंका पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने अभियान तेज किया।
शनिवार को शहर के अलग-अलग स्थानों से 18 नमूने लिए गए।
एक कोल्ड स्टोरेज से संदेह के आधार पर 3000 किलो साबुत कुट्टू सीज किया गया, जिसकी कीमत करीब 1.50 लाख रुपये है।
कुल मिलाकर 1.60 लाख रुपये से ज्यादा का माल सीज हुआ।
सभी नमूने लैब भेजे गए हैं, रिपोर्ट आने के बाद कानूनी कार्रवाई होगी।
नवरात्र शुरू होते ही घरों में व्रत की तैयारी जोरों पर है। कुट्टू की पूरी, सिंघाड़े के आटे के पकौड़े और फलाहारी नमकीन की मांग इन दिनों अचानक बढ़ जाती है। इसी मांग का फायदा उठाकर मिलावटखोर सक्रिय न हों, इसके लिए कानपुर में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने जांच अभियान तेज कर दिया है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार शनिवार, 10 अक्टूबर को विभाग की टीमों ने शहर के कई इलाकों में छापेमारी कर 18 नमूने लिए और 1.60 लाख रुपये से ज्यादा का माल सीज किया।
कहां-कहां हुई जांच
रिपोर्टों के अनुसार विभाग की टीमें शहर के कई हिस्सों में पहुंचीं, जिनमें बंगाली मोहाल, जूही कला, रूमा, रतनलाल नगर, लाजपत नगर, विष्णुपुरी, यशोदा नगर और कल्याणपुर शामिल हैं। इनमें थोक व्यापारी, गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और बड़े रिटेल स्टोर भी शामिल थे।
किन चीजों के नमूने लिए गए
जांच के दौरान इन खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए:
कुट्टू का आटा और साबुत कुट्टू
सिंघाड़े का आटा
फलाहारी मिक्सचर नमकीन
मूंगफली दाना
घी
मिर्च पाउडर
अमचूर
क्या-क्या सीज हुआ
एक कोल्ड स्टोरेज से संदेह के आधार पर 3000 किलो साबुत कुट्टू सीज किया गया, जिसकी कीमत करीब 1.50 लाख रुपये बताई गई है।
रूमा के एक प्रतिष्ठान से 25 किलो मिर्च पाउडर सीज किया गया, जिसकी कीमत करीब 5,000 रुपये है।
यशोदा नगर के एक प्रतिष्ठान से 5 किलो सिंघाड़े का आटा और 8 किलो कुट्टू का आटा सीज किया गया, जिसकी कीमत 7,000 रुपये से ज्यादा है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि नमूना लेने या माल सीज करने का मतलब यह नहीं है कि सामान मिलावटी साबित हो गया है। अंतिम फैसला लैब रिपोर्ट के बाद ही होगा।
विभाग ने क्या कहा
सहायक आयुक्त (खाद्य) संजय प्रताप सिंह ने बताया कि साबुत कुट्टू को संदेह के आधार पर सीज किया गया है। बाकी खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद नियमों के अनुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कुट्टू के आटे पर ही सबसे ज्यादा नजर क्यों?
हर साल नवरात्र के दौरान देश के कई हिस्सों से कुट्टू का आटा खाने के बाद लोगों के बीमार होने की खबरें आती रही हैं। इसकी कुछ मुख्य वजहें मानी जाती हैं:
पुराना या खराब आटा: कुट्टू के आटे में तेल की मात्रा होती है, इसलिए यह जल्दी खराब होता है। लंबे समय तक रखा पुराना आटा फफूंद लगने से नुकसान कर सकता है।
मिलावट: कई बार इसमें सस्ते अनाज का आटा या दूसरी चीजें मिलाए जाने की शिकायतें आती हैं।
गलत भंडारण: नमी वाली जगह पर रखा आटा जल्दी खराब हो जाता है।
इसलिए खाद्य विभाग हर साल नवरात्र से पहले कुट्टू और सिंघाड़े के आटे की खास जांच करता है।
मिलावटी या खराब आटे की पहचान कैसे करें
घर पर कुछ आसान तरीकों से आप आटे की गुणवत्ता का अंदाजा लगा सकते हैं:
रंग देखें: असली कुट्टू का आटा हल्का भूरा-धूसर होता है। बहुत सफेद या असामान्य रंग पर शक करें।
गंध सूंघें: बासी, खट्टी या फफूंद जैसी गंध आए तो इस्तेमाल न करें।
गांठें देखें: आटे में गांठें या कीड़े हों तो वह पुराना हो सकता है।
गूंधकर देखें: खराब आटा गूंधने पर अजीब तरह से चिपचिपा या भुरभुरा हो सकता है।
पैकिंग जांचें: पैकिंग की तारीख, एक्सपायरी, FSSAI नंबर और निर्माता का पता जरूर देखें।
खरीदारी करते समय सावधानियां
खुला आटा खरीदने की बजाय भरोसेमंद ब्रांड का सील बंद पैकेट लें।
जरूरत जितना ही आटा खरीदें, ज्यादा मात्रा में स्टॉक न करें।
हाल ही में पैक हुआ आटा चुनें।
खरीदने के बाद आटे को एयरटाइट डिब्बे में सूखी और ठंडी जगह पर रखें।
बहुत सस्ते दाम पर मिल रहे आटे से सावधान रहें।
कुट्टू खाने के बाद तबीयत बिगड़े तो?
अगर कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीज खाने के बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चक्कर या घबराहट हो, तो तुरंत नजदीकी डॉक्टर या अस्पताल जाएं। बचा हुआ आटा फेंकें नहीं, बल्कि संभालकर रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर उसकी जांच कराई जा सके।
मिलावट की शिकायत कहां करें
अगर आपको किसी दुकान पर मिलावटी खाद्य पदार्थ बिकने का शक है, तो आप इसकी शिकायत जिले के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन कार्यालय में कर सकते हैं। FSSAI की ओर से उपभोक्ताओं की शिकायत के लिए ऑनलाइन व्यवस्था भी उपलब्ध है। शिकायत करते समय दुकान का नाम, पता, खरीदारी की तारीख और बिल की जानकारी जरूर दें।
कानून क्या कहता है
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत मिलावटी या असुरक्षित खाद्य पदार्थ बेचना दंडनीय अपराध है। लैब रिपोर्ट में नमूना फेल होने पर जुर्माना, लाइसेंस निलंबन और गंभीर मामलों में मुकदमा और सजा का भी प्रावधान है। अगर मिलावटी खाना खाने से किसी की जान को खतरा हो, तो सजा और सख्त हो जाती है।
kanpur.live की राय
व्रत आस्था से जुड़ा होता है और लोग पूरे विश्वास के साथ व्रत की सामग्री खरीदते हैं। ऐसे में मिलावट न सिर्फ सेहत के साथ खिलवाड़ है, बल्कि लोगों की भावनाओं के साथ भी धोखा है। खाद्य विभाग की यह सक्रियता स्वागत योग्य है। हम लैब रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जानकारी आप तक पहुंचाएंगे।
व्रत में खाई जाने वाली चीजें और उनकी सही पहचान
कुट्टू और सिंघाड़े के आटे के अलावा व्रत में साबूदाना, मखाना, सेंधा नमक, मूंगफली, राजगिरा और समा के चावल भी खूब इस्तेमाल होते हैं। इनमें भी कई बार मिलावट या खराब गुणवत्ता की शिकायतें आती हैं:
साबूदाना: अच्छे साबूदाने के दाने एक जैसे और चमकदार सफेद होते हैं। बहुत ज्यादा सफेद और चमक वाले दानों पर केमिकल पॉलिश का शक हो सकता है।
सेंधा नमक: असली सेंधा नमक हल्का गुलाबी या सफेद होता है। पैकिंग पर निर्माता की जानकारी जरूर देखें।
मखाना: अच्छे मखाने हल्के, कुरकुरे और बिना काले धब्बों वाले होते हैं।
मूंगफली: बदबूदार या फफूंद लगी मूंगफली कभी न खाएं।
घी: बहुत सस्ता घी मिलावटी हो सकता है। भरोसेमंद ब्रांड ही खरीदें।
व्यापारियों के लिए जरूरी बातें
खाद्य कारोबार करने वाले सभी व्यापारियों के लिए FSSAI लाइसेंस या पंजीकरण अनिवार्य है। व्यापारियों को चाहिए कि वे सामान भरोसेमंद सप्लायर से ही खरीदें, खरीद के बिल संभालकर रखें और भंडारण साफ-सुथरी, सूखी जगह पर करें। पुराना या खराब हो चुका स्टॉक बेचने की बजाय नष्ट कर दें। ईमानदार व्यापारियों के लिए ऐसे अभियान बाजार में भरोसा बढ़ाने का काम करते हैं।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
आम तौर पर खाद्य सुरक्षा विभाग नवरात्र से लेकर दिवाली तक पूरे त्योहारी सीजन में ऐसा अभियान जारी रखता है। दिवाली से पहले मिठाई, खोया, पनीर और दूध से बने उत्पादों की जांच भी तेज की जाती है।
घर पर व्रत का आटा कैसे रखें
कुट्टू और सिंघाड़े का आटा खरीदने के बाद उसे कांच या स्टील के एयरटाइट डिब्बे में रखें। डिब्बा रसोई में गैस के पास या नमी वाली जगह पर न रखें। जरूरत हो तो आटे को फ्रिज में भी रखा जा सकता है। पिछले साल का बचा आटा इस बार इस्तेमाल न करें। आटा गूंधने के बाद तुरंत इस्तेमाल करें, गूंधा हुआ आटा लंबे समय तक न रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. कानपुर में कितने नमूने लिए गए? शनिवार को कुल 18 नमूने।
प्रश्न 2. कितना माल सीज हुआ? 1.60 लाख रुपये से ज्यादा का, जिसमें 3000 किलो साबुत कुट्टू शामिल है।
प्रश्न 3. क्या सीज किया गया सामान मिलावटी साबित हुआ है? अभी नहीं। नमूने लैब भेजे गए हैं, रिपोर्ट के बाद ही स्थिति साफ होगी।
प्रश्न 4. कुट्टू का आटा जल्दी खराब क्यों होता है? इसमें तेल की मात्रा होती है, इसलिए नमी और लंबे भंडारण से यह जल्दी खराब हो सकता है।
प्रश्न 5. अच्छे आटे की पहचान कैसे करें? रंग, गंध और पैकिंग पर तारीख व FSSAI नंबर जांचें।
प्रश्न 6. कुट्टू खाने के बाद बीमार हों तो क्या करें? तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और बचा हुआ आटा जांच के लिए संभालकर रखें।
प्रश्न 7. मिलावट की शिकायत कहां करें? जिले के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन कार्यालय या FSSAI की ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था पर।
स्रोत: खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के बयान पर आधारित स्थानीय रिपोर्ट, 10 अक्टूबर 2026।
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