सरस्वती विहार में महीनों से जलभराव, लोगों ने डीएम से लगाई गुहार
Kanpur: Saraswati Vihar residents meet DM over prolonged waterlogging
Kanpur Live News Desk ·

कानपुर में मानसून भले ही विदा हो चुका हो, लेकिन शहर के कुछ इलाकों में बारिश का पानी अब भी लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। इंदिरा नगर के पास स्थित सरस्वती विहार (वार्ड 17) के निवासी पिछले काफी समय से जलभराव की गंभीर समस्या झेल रहे हैं। परेशान होकर बुधवार को क्षेत्र के लोग जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर से मिले और उन्हें ज्ञापन सौंपकर समस्या के स्थायी समाधान की मांग की। लोगों का कहना है कि कई साल से इलाके में पक्का नाला नहीं बना है, जिसकी वजह से हर बारिश में पानी भर जाता है और इस बार तो पानी निकला ही नहीं।
वर्षों से नहीं बना पक्का नाला
स्थानीय निवासियों के अनुसार सरस्वती विहार में जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। पक्का नाला न होने से बारिश का पानी गलियों और खाली प्लॉटों में जमा हो जाता है। हर साल बरसात में यही हाल होता है, लेकिन इस बार हालात और खराब हैं। बारिश बंद होने के बाद भी पानी नहीं निकल पाया और इलाके के कई हिस्से अब भी पानी में डूबे हैं।
लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभागों से शिकायत की, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। इसलिए उन्हें सीधे जिलाधिकारी के पास जाना पड़ा।
गंदे पानी से बच्चे बीमार
जलभराव का सबसे बुरा असर बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर पड़ रहा है। लंबे समय से जमा पानी सड़ने लगा है और उसमें गंदगी फैल गई है। निवासियों के अनुसार इस दूषित पानी के कारण कई बच्चे बीमार हो रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ा है, क्योंकि पानी भरे रास्तों से स्कूल जाना मुश्किल हो गया है और बीमारी की वजह से कई बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे।
जमा पानी मच्छरों के पनपने की सबसे बड़ी जगह होता है। अक्टूबर का महीना वैसे भी डेंगू और मलेरिया के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में इलाके के लोगों को मच्छरजनित बीमारियों का डर सता रहा है।
मगरमच्छ और जहरीले सांप दिखने का दावा
निवासियों ने ज्ञापन में यह भी बताया कि जलभराव वाले इलाके में मगरमच्छ और जहरीले सांप देखे गए हैं। इससे लोगों में दहशत का माहौल है। बच्चे घर से बाहर निकलने में डर रहे हैं और रात के समय लोगों को खास सावधानी बरतनी पड़ रही है। लोगों ने प्रशासन से वन विभाग की मदद लेकर इस खतरे से निपटने की भी मांग की है।
सबमर्सिबल का पानी भी दूषित
समस्या केवल सड़कों पर भरे पानी तक सीमित नहीं है। निवासियों का कहना है कि लंबे समय से जमा गंदा पानी जमीन में रिसकर भूजल को भी दूषित कर रहा है। इलाके के घरों में लगे सबमर्सिबल पंपों से आने वाला पानी भी साफ नहीं रहा। पीने और खाना बनाने के लिए लोगों को बोतलबंद पानी या दूर से पानी लाना पड़ रहा है, जिससे उनका खर्च भी बढ़ गया है।
क्या है लोगों की मांग
निवासियों ने जिलाधिकारी को सौंपे ज्ञापन में मुख्य रूप से ये मांगें रखी हैं:
तुरंत राहत: जमा पानी निकालने के लिए चार हाई-कैपेसिटी जेट पंप लगाए जाएं।
स्थायी समाधान: इलाके में पक्के नाले का निर्माण कराया जाए, ताकि हर साल यह समस्या न हो।
स्वास्थ्य सुरक्षा: इलाके में फॉगिंग, एंटी-लार्वा छिड़काव और स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएं।
सुरक्षा: मगरमच्छ और सांपों के खतरे से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।
ज्ञापन देने वालों में सचिन सक्सेना, बन्नू मिश्रा, अभिषेक दीक्षित, तृप्ति, सुनील सक्सेना, आयुष तिवारी, शिखा और राजकिशोर समेत कई निवासी शामिल रहे।
शहर की पुरानी समस्या
सरस्वती विहार की समस्या कानपुर के कई इलाकों की कहानी है। शहर के बाहरी हिस्सों में तेजी से नई कॉलोनियां बस रही हैं, लेकिन वहां सड़क, नाली और सीवर जैसी बुनियादी सुविधाएं उतनी तेजी से नहीं पहुंच पा रहीं। कई कॉलोनियां बिना योजना के विकसित हुई हैं, जहां जल निकासी की व्यवस्था पहले से नहीं सोची गई। बारिश के मौसम में ऐसे इलाके तालाब में बदल जाते हैं।
शहरी योजना के जानकारों का कहना है कि नई कॉलोनियों को मंजूरी देते समय जल निकासी की योजना अनिवार्य होनी चाहिए। साथ ही प्राकृतिक जल निकासी के रास्तों और तालाबों पर अतिक्रमण रोकना भी जरूरी है, क्योंकि इन्हीं के बंद होने से पानी का निकास रुक जाता है।
प्रशासन से उम्मीद
निवासियों को उम्मीद है कि जिलाधिकारी से मुलाकात के बाद अब उनकी समस्या पर गंभीरता से ध्यान दिया जाएगा। आम तौर पर ऐसे मामलों में जिलाधिकारी नगर निगम और संबंधित विभागों को जांच कर कार्रवाई के निर्देश देते हैं। लोगों का कहना है कि तुरंत पंप लगाकर पानी निकाला जाए और फिर नाले के निर्माण के लिए बजट और समय सीमा तय की जाए।
जलभराव वाले इलाकों में क्या सावधानी बरतें
जब तक समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक प्रभावित इलाके के लोग इन बातों का ध्यान रखें:
पीने का पानी उबालकर या फिल्टर करके ही इस्तेमाल करें।
बच्चों को जमा पानी में खेलने या उसमें से गुजरने से रोकें।
घर में और आसपास मच्छरदानी, मच्छर भगाने वाली क्रीम और पूरी बांह के कपड़ों का इस्तेमाल करें।
बुखार, उल्टी, दस्त या त्वचा पर संक्रमण दिखे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
रात में टॉर्च लेकर निकलें और सांप दिखने पर खुद पकड़ने की कोशिश न करें, वन विभाग या हेल्पलाइन को सूचना दें।
घर के कूलर, गमलों और टंकियों में पानी जमा न होने दें।
पार्षद और नगर निगम की भूमिका
वार्ड स्तर की समस्याओं के समाधान में पार्षद और नगर निगम की भूमिका सबसे अहम होती है। नाला निर्माण, सफाई और जल निकासी जैसे काम नगर निगम के दायरे में आते हैं। निवासियों का कहना है कि सभी जनप्रतिनिधियों और विभागों को मिलकर इस समस्या का स्थायी हल निकालना चाहिए, ताकि अगली बरसात में फिर ऐसी स्थिति न बने।
निष्कर्ष
सरस्वती विहार के लोगों की परेशानी सिर्फ पानी भरने की नहीं, बल्कि सेहत, सुरक्षा और बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी है। महीनों से जमा पानी, बीमार होते बच्चे और जहरीले जीवों का डर किसी भी परिवार के लिए गंभीर चिंता है। अब देखना होगा कि प्रशासन कितनी जल्दी राहत पहुंचाता है और स्थायी नाले का निर्माण कब तक शुरू होता है। कानपुर लाइव इस मामले पर नजर बनाए रखेगा।
कानपुर की हर गली-मोहल्ले की आवाज और नगर से जुड़ी हर खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
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कानपुर में मानसून भले ही विदा हो चुका हो, लेकिन शहर के कुछ इलाकों में बारिश का पानी अब भी लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। इंदिरा नगर के पास स्थित सरस्वती विहार (वार्ड 17) के निवासी पिछले काफी समय से जलभराव की गंभीर समस्या झेल रहे हैं। परेशान होकर बुधवार को क्षेत्र के लोग जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर से मिले और उन्हें ज्ञापन सौंपकर समस्या के स्थायी समाधान की मांग की। लोगों का कहना है कि कई साल से इलाके में पक्का नाला नहीं बना है, जिसकी वजह से हर बारिश में पानी भर जाता है और इस बार तो पानी निकला ही नहीं।
वर्षों से नहीं बना पक्का नाला
स्थानीय निवासियों के अनुसार सरस्वती विहार में जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। पक्का नाला न होने से बारिश का पानी गलियों और खाली प्लॉटों में जमा हो जाता है। हर साल बरसात में यही हाल होता है, लेकिन इस बार हालात और खराब हैं। बारिश बंद होने के बाद भी पानी नहीं निकल पाया और इलाके के कई हिस्से अब भी पानी में डूबे हैं।
लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभागों से शिकायत की, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। इसलिए उन्हें सीधे जिलाधिकारी के पास जाना पड़ा।
गंदे पानी से बच्चे बीमार
जलभराव का सबसे बुरा असर बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर पड़ रहा है। लंबे समय से जमा पानी सड़ने लगा है और उसमें गंदगी फैल गई है। निवासियों के अनुसार इस दूषित पानी के कारण कई बच्चे बीमार हो रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ा है, क्योंकि पानी भरे रास्तों से स्कूल जाना मुश्किल हो गया है और बीमारी की वजह से कई बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे।
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सरस्वती विहार के लोगों की परेशानी सिर्फ पानी भरने की नहीं, बल्कि सेहत, सुरक्षा और बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी है। महीनों से जमा पानी, बीमार होते बच्चे और जहरीले जीवों का डर किसी भी परिवार के लिए गंभीर चिंता है। अब देखना होगा कि प्रशासन कितनी जल्दी राहत पहुंचाता है और स्थायी नाले का निर्माण कब तक शुरू होता है। कानपुर लाइव इस मामले पर नजर बनाए रखेगा।
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