एशियाई पैरा खेल: भारत 62 पदकों के साथ पांचवें स्थान पर, शॉट पुट में क्लीन स्वीप
Asian Para Games 2026: India climbs to fifth with 62 medals; clean sweep in men's shot put F46
Kanpur Live News Desk ·

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियाई पैरा खेल 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। तीसरे दिन के अंत तक भारत ने 14 स्वर्ण, 22 रजत और 26 कांस्य समेत कुल 62 पदक जीत लिए हैं। इसके साथ भारत पदक तालिका में छठे से पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। तीसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने कई स्वर्ण पदक जीते और खेलों के नए रिकॉर्ड भी बनाए। पुरुषों की शॉट पुट एफ46 स्पर्धा में तीनों पदक भारत के नाम रहे।
पदक तालिका (तीसरे दिन के अंत तक)
स्वर्ण: 14
रजत: 22
कांस्य: 26
कुल: 62
स्थान: पांचवां
सचिन खिलारी का रिकॉर्ड थ्रो
पुरुषों की शॉट पुट एफ46 स्पर्धा में सचिन खिलारी ने अपने पहले ही प्रयास में 15.79 मीटर का थ्रो कर स्वर्ण पदक जीता। यह नया खेल रिकॉर्ड है। सचिन पेरिस पैरालंपिक में भी पदक जीत चुके हैं और लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं।
शॉट पुट में क्लीन स्वीप
इसी स्पर्धा में मोहम्मद यासिर ने 15.06 मीटर के थ्रो के साथ रजत और प्रवीण ने 13.83 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता। यानी पोडियम पर तीनों स्थान भारतीय खिलाड़ियों के रहे। किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में एक ही स्पर्धा के तीनों पदक जीतना बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
प्रवीण कुमार ने बचाया खिताब
पुरुषों की ऊंची कूद टी44 स्पर्धा में प्रवीण कुमार ने 2.05 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता और नया खेल रिकॉर्ड बनाया। प्रवीण पिछले एशियाई पैरा खेलों के भी चैंपियन थे और उन्होंने अपना खिताब सफलतापूर्वक बचाया। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर से आने वाले प्रवीण टोक्यो पैरालंपिक में रजत और पेरिस पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। इसी स्पर्धा में बंटी ने 1.92 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ रजत पदक जीता।
आयुष वर्मा और दिलीप गावित का स्वर्ण
आयुष वर्मा: पुरुषों की शॉट पुट एफ53 स्पर्धा में 8.16 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण
दिलीप गावित महादु: पुरुषों की 100 मीटर टी47 दौड़ में 10.69 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण
100 मीटर टी47 में मोहम्मद बासिल ने 10.72 सेकंड के साथ रजत पदक जीता, यानी इस स्पर्धा में भी भारत ने दो पदक अपने नाम किए।
शीतल देवी को रजत
तीरंदाजी में दुनियाभर में मशहूर शीतल देवी ने पायल नाग के साथ महिला कंपाउंड डबल्स में रजत पदक जीता। फाइनल में भारतीय जोड़ी को चीन की शू शुएछिंग और झाओ जिंग की जोड़ी ने 150-141 से हराया। शीतल देवी बिना हाथों के पैरों से तीरंदाजी करती हैं और उनकी कहानी दुनियाभर के लोगों को प्रेरित करती है।
रजत पदक विजेता
मोहम्मद यासिर: शॉट पुट एफ46 (15.06 मीटर)
भाग्यश्री जाधव: शॉट पुट एफ34 (8.19 मीटर, व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ)
मंजीत: भाला फेंक एफ13 (61.03 मीटर, करियर सर्वश्रेष्ठ)
बंटी: ऊंची कूद टी44 (1.92 मीटर, व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ)
मोहम्मद बासिल: 100 मीटर टी47 (10.72 सेकंड)
शीतल देवी और पायल नाग: तीरंदाजी कंपाउंड महिला डबल्स
कांस्य पदक विजेता
प्रवीण: शॉट पुट एफ46 (13.83 मीटर)
रवि रोंगाली: शॉट पुट एफ40 (10.02 मीटर)
सुखचैन: भाला फेंक एफ55 (29.94 मीटर)
करमज्योति: डिस्कस थ्रो एफ55 (21.60 मीटर, व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ)
हैनी: डिस्कस थ्रो एफ37 (57.04 मीटर, व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ)
शैलेश कुमार: लंबी कूद टी42 (5.57 मीटर, खेल रिकॉर्ड)
अनुभव चौधरी: 100 मीटर टी35 (12.72 सेकंड, व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ)
प्रणव देसाई: 100 मीटर टी64 (11.96 सेकंड)
शरत मकनहल्ली: 1500 मीटर टी12 (4:11.01)
हैनी का बड़ा सुधार
डिस्कस थ्रो एफ37 में हैनी का कांस्य पदक खास है। 2022 के एशियाई पैरा खेलों में भारत इस स्पर्धा में सातवें स्थान पर रहा था। इस बार 57.04 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ पदक जीतना भारत के पैरा एथलेटिक्स में आए सुधार को दिखाता है।
तेजी से बढ़ रही पदकों की संख्या
20 अक्टूबर तक भारत के 30 पदक थे, जो तीसरे दिन के अंत तक बढ़कर 62 हो गए। यानी कुछ ही दिनों में पदकों की संख्या दोगुने से ज्यादा हो गई। एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों ने सबसे ज्यादा पदक बटोरे हैं। अभी तीरंदाजी, बैडमिंटन, निशानेबाजी और पावरलिफ्टिंग जैसी कई स्पर्धाएं बाकी हैं, जिनमें भारत को और पदकों की उम्मीद है।
पिछली बार का रिकॉर्ड
2022 में चीन के हांगझोउ में हुए एशियाई पैरा खेलों में भारत ने 111 पदक जीतकर अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। इस बार भारतीय दल उस रिकॉर्ड को बेहतर करने के इरादे से उतरा है। खेल 24 अक्टूबर तक चलेंगे।
उत्तर प्रदेश के लिए गर्व
प्रवीण कुमार जैसे उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार स्वर्ण जीतना प्रदेश के लिए गर्व की बात है। प्रदेश में पैरा खेलों के लिए सुविधाएं बढ़ने से और युवाओं को आगे आने का मौका मिल रहा है। कानपुर समेत प्रदेश के दिव्यांग युवा इन खिलाड़ियों से प्रेरणा लेकर खेलों में करियर बना सकते हैं।
पैरा एथलेटिक्स में भारत की ताकत
भारत के पैरा खिलाड़ियों ने पिछले कुछ वर्षों में सबसे ज्यादा सफलता एथलेटिक्स में हासिल की है। शॉट पुट, भाला फेंक, डिस्कस थ्रो, ऊंची कूद और छोटी दूरी की दौड़ में भारतीय खिलाड़ी लगातार अंतरराष्ट्रीय पदक जीत रहे हैं। इसके पीछे बेहतर प्रशिक्षण, विदेशी अनुभव, आधुनिक उपकरण और खेल विज्ञान की मदद है। सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम के तहत कई पैरा खिलाड़ियों को व्यक्तिगत कोच और विदेश में प्रशिक्षण की सुविधा मिली है। पैरालंपिक खेलों में मिली सफलताओं ने भी नई पीढ़ी के खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाया है।
व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
इन खेलों में कई भारतीय खिलाड़ियों ने अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। भाग्यश्री जाधव, मंजीत, बंटी, करमज्योति, हैनी और अनुभव चौधरी जैसे खिलाड़ियों ने अपने करियर का सबसे अच्छा प्रदर्शन कर पदक जीते। यह दिखाता है कि खिलाड़ी बड़े मंच पर दबाव में भी बेहतर करने की क्षमता रखते हैं।
निष्कर्ष
एशियाई पैरा खेल 2026 में भारत का प्रदर्शन लगातार निखर रहा है। 62 पदक, कई खेल रिकॉर्ड और शॉट पुट में क्लीन स्वीप इस बात का सबूत हैं कि भारतीय पैरा खिलाड़ी एशिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और बढ़ेगा।
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एशियाई पैरा खेल: भारत 62 पदकों के साथ पांचवें स्थान पर, शॉट पुट में क्लीन स्वीप
जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियाई पैरा खेल 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। तीसरे दिन के अंत तक भारत ने 14 स्वर्ण, 22 रजत और 26 कांस्य समेत कुल 62 पदक जीत लिए हैं। इसके साथ भारत पदक तालिका में छठे से पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। तीसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने कई स्वर्ण पदक जीते और खेलों के नए रिकॉर्ड भी बनाए। पुरुषों की शॉट पुट एफ46 स्पर्धा में तीनों पदक भारत के नाम रहे।
पदक तालिका (तीसरे दिन के अंत तक)
स्वर्ण: 14
रजत: 22
कांस्य: 26
कुल: 62
स्थान: पांचवां
सचिन खिलारी का रिकॉर्ड थ्रो
पुरुषों की शॉट पुट एफ46 स्पर्धा में सचिन खिलारी ने अपने पहले ही प्रयास में 15.79 मीटर का थ्रो कर स्वर्ण पदक जीता। यह नया खेल रिकॉर्ड है। सचिन पेरिस पैरालंपिक में भी पदक जीत चुके हैं और लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं।
शॉट पुट में क्लीन स्वीप
इसी स्पर्धा में मोहम्मद यासिर ने 15.06 मीटर के थ्रो के साथ रजत और प्रवीण ने 13.83 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता। यानी पोडियम पर तीनों स्थान भारतीय खिलाड़ियों के रहे। किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में एक ही स्पर्धा के तीनों पदक जीतना बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
प्रवीण कुमार ने बचाया खिताब
पुरुषों की ऊंची कूद टी44 स्पर्धा में प्रवीण कुमार ने 2.05 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता और नया खेल रिकॉर्ड बनाया। प्रवीण पिछले एशियाई पैरा खेलों के भी चैंपियन थे और उन्होंने अपना खिताब सफलतापूर्वक बचाया। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर से आने वाले प्रवीण टोक्यो पैरालंपिक में रजत और पेरिस पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। इसी स्पर्धा में बंटी ने 1.92 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ रजत पदक जीता।
आयुष वर्मा और दिलीप गावित का स्वर्ण
आयुष वर्मा: पुरुषों की शॉट पुट एफ53 स्पर्धा में 8.16 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण
दिलीप गावित महादु: पुरुषों की 100 मीटर टी47 दौड़ में 10.69 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण
100 मीटर टी47 में मोहम्मद बासिल ने 10.72 सेकंड के साथ रजत पदक जीता, यानी इस स्पर्धा में भी भारत ने दो पदक अपने नाम किए।
शीतल देवी को रजत
तीरंदाजी में दुनियाभर में मशहूर शीतल देवी ने पायल नाग के साथ महिला कंपाउंड डबल्स में रजत पदक जीता। फाइनल में भारतीय जोड़ी को चीन की शू शुएछिंग और झाओ जिंग की जोड़ी ने 150-141 से हराया। शीतल देवी बिना हाथों के पैरों से तीरंदाजी करती हैं और उनकी कहानी दुनियाभर के लोगों को प्रेरित करती है।
रजत पदक विजेता
मोहम्मद यासिर: शॉट पुट एफ46 (15.06 मीटर)
भाग्यश्री जाधव: शॉट पुट एफ34 (8.19 मीटर, व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ)
मंजीत: भाला फेंक एफ13 (61.03 मीटर, करियर सर्वश्रेष्ठ)
बंटी: ऊंची कूद टी44 (1.92 मीटर, व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ)
मोहम्मद बासिल: 100 मीटर टी47 (10.72 सेकंड)
शीतल देवी और पायल नाग: तीरंदाजी कंपाउंड महिला डबल्स
कांस्य पदक विजेता
प्रवीण: शॉट पुट एफ46 (13.83 मीटर)
रवि रोंगाली: शॉट पुट एफ40 (10.02 मीटर)
सुखचैन: भाला फेंक एफ55 (29.94 मीटर)
करमज्योति: डिस्कस थ्रो एफ55 (21.60 मीटर, व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ)
हैनी: डिस्कस थ्रो एफ37 (57.04 मीटर, व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ)
शैलेश कुमार: लंबी कूद टी42 (5.57 मीटर, खेल रिकॉर्ड)
अनुभव चौधरी: 100 मीटर टी35 (12.72 सेकंड, व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ)
प्रणव देसाई: 100 मीटर टी64 (11.96 सेकंड)
शरत मकनहल्ली: 1500 मीटर टी12 (4:11.01)
हैनी का बड़ा सुधार
डिस्कस थ्रो एफ37 में हैनी का कांस्य पदक खास है। 2022 के एशियाई पैरा खेलों में भारत इस स्पर्धा में सातवें स्थान पर रहा था। इस बार 57.04 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ पदक जीतना भारत के पैरा एथलेटिक्स में आए सुधार को दिखाता है।
तेजी से बढ़ रही पदकों की संख्या
20 अक्टूबर तक भारत के 30 पदक थे, जो तीसरे दिन के अंत तक बढ़कर 62 हो गए। यानी कुछ ही दिनों में पदकों की संख्या दोगुने से ज्यादा हो गई। एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों ने सबसे ज्यादा पदक बटोरे हैं। अभी तीरंदाजी, बैडमिंटन, निशानेबाजी और पावरलिफ्टिंग जैसी कई स्पर्धाएं बाकी हैं, जिनमें भारत को और पदकों की उम्मीद है।
पिछली बार का रिकॉर्ड
2022 में चीन के हांगझोउ में हुए एशियाई पैरा खेलों में भारत ने 111 पदक जीतकर अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। इस बार भारतीय दल उस रिकॉर्ड को बेहतर करने के इरादे से उतरा है। खेल 24 अक्टूबर तक चलेंगे।
उत्तर प्रदेश के लिए गर्व
प्रवीण कुमार जैसे उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार स्वर्ण जीतना प्रदेश के लिए गर्व की बात है। प्रदेश में पैरा खेलों के लिए सुविधाएं बढ़ने से और युवाओं को आगे आने का मौका मिल रहा है। कानपुर समेत प्रदेश के दिव्यांग युवा इन खिलाड़ियों से प्रेरणा लेकर खेलों में करियर बना सकते हैं।
पैरा एथलेटिक्स में भारत की ताकत
भारत के पैरा खिलाड़ियों ने पिछले कुछ वर्षों में सबसे ज्यादा सफलता एथलेटिक्स में हासिल की है। शॉट पुट, भाला फेंक, डिस्कस थ्रो, ऊंची कूद और छोटी दूरी की दौड़ में भारतीय खिलाड़ी लगातार अंतरराष्ट्रीय पदक जीत रहे हैं। इसके पीछे बेहतर प्रशिक्षण, विदेशी अनुभव, आधुनिक उपकरण और खेल विज्ञान की मदद है। सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम के तहत कई पैरा खिलाड़ियों को व्यक्तिगत कोच और विदेश में प्रशिक्षण की सुविधा मिली है। पैरालंपिक खेलों में मिली सफलताओं ने भी नई पीढ़ी के खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाया है।
व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
इन खेलों में कई भारतीय खिलाड़ियों ने अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। भाग्यश्री जाधव, मंजीत, बंटी, करमज्योति, हैनी और अनुभव चौधरी जैसे खिलाड़ियों ने अपने करियर का सबसे अच्छा प्रदर्शन कर पदक जीते। यह दिखाता है कि खिलाड़ी बड़े मंच पर दबाव में भी बेहतर करने की क्षमता रखते हैं।
निष्कर्ष
एशियाई पैरा खेल 2026 में भारत का प्रदर्शन लगातार निखर रहा है। 62 पदक, कई खेल रिकॉर्ड और शॉट पुट में क्लीन स्वीप इस बात का सबूत हैं कि भारतीय पैरा खिलाड़ी एशिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और बढ़ेगा।
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