शेयर बाजार में बड़ा बदलाव: 7 दिसंबर से 3:30 से 3:40 बजे तक होगा क्लोजिंग ऑक्शन
SEBI revises Closing Auction Session to 3:30–3:40 pm from December 7; derivatives expiry settlement changed
Kanpur Live News Desk ·

शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग करने वालों के लिए एक अहम खबर है। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) के नियमों और समय में बदलाव किया है। सेबी के 15 अक्टूबर 2026 के सर्कुलर के अनुसार अब क्लोजिंग ऑक्शन सेशन एक अलग 10 मिनट का सत्र होगा, जो दोपहर 3:30 बजे से 3:40 बजे तक चलेगा। साथ ही डेरिवेटिव्स यानी एफएंडओ कॉन्ट्रैक्ट्स के एक्सपायरी सेटलमेंट के तरीके में भी बदलाव किया गया है। ज्यादातर बदलाव 7 दिसंबर 2026 से लागू होंगे।
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन क्या है
हर शेयर का दिन के अंत में एक क्लोजिंग प्राइस यानी बंद भाव तय होता है। यही भाव अगले दिन की तुलना, म्यूचुअल फंड के एनएवी, इंडेक्स की गणना और कई दूसरे कामों में इस्तेमाल होता है। अगर बाजार बंद होने से ठीक पहले कोई बड़ा ऑर्डर देकर कीमत को ऊपर या नीचे किया जाए, तो क्लोजिंग प्राइस में हेरफेर हो सकता है।
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें बाजार बंद होने के बाद कुछ मिनट के लिए खरीद और बिक्री के ऑर्डर इकट्ठा किए जाते हैं और फिर उनके मिलान से एक संतुलित क्लोजिंग प्राइस तय होता है। इससे बंद भाव ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बनता है।
नया समय और तीन चरण
अभी सीएएस दोपहर 3:15 बजे से 3:35 बजे के बीच होता है। 7 दिसंबर से यह 3:30 बजे से 3:40 बजे तक अलग सत्र के रूप में चलेगा:
पहला चरण (3:30 से 3:31 बजे): संदर्भ मूल्य (रेफरेंस प्राइस) की गणना
दूसरा चरण (3:31 से 3:36 बजे): लिमिट और मार्केट, दोनों तरह के ऑर्डर दिए जा सकेंगे
तीसरा चरण (3:36 से 3:40 बजे): केवल लिमिट ऑर्डर। इस दौरान मार्केट ऑर्डर में बदलाव या उन्हें रद्द नहीं किया जा सकेगा
सबसे खास बात यह है कि ऑर्डर लेना 3:38 से 3:40 बजे के बीच किसी भी समय अचानक (रैंडम तरीके से) बंद होगा। इससे आखिरी सेकंड में ऑर्डर डालकर कीमत को प्रभावित करने की कोशिशों पर रोक लगेगी, क्योंकि किसी को पता नहीं होगा कि सत्र ठीक कब खत्म होगा।
कुछ ऑर्डर पर रोक
सीएएस के दौरान नए आइसबर्ग ऑर्डर (बड़े ऑर्डर को छोटे हिस्सों में दिखाना) और स्टॉप-लॉस ऑर्डर देने की अनुमति नहीं होगी। एक्सचेंजों को ऑर्डर मिलान से तय क्लोजिंग प्राइस और कारोबार की मात्रा की जानकारी जारी करनी होगी।
संदर्भ मूल्य कैसे तय होगा
सीएएस का संदर्भ मूल्य लगातार कारोबार के आखिरी 15 मिनट के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (वीडब्ल्यूएपी) पर आधारित होगा।
अगर उन 15 मिनट में कोई कारोबार नहीं हुआ, तो दिन का आखिरी कारोबारी भाव लिया जाएगा।
अगर पूरे दिन कोई कारोबार नहीं हुआ, तो पिछले कारोबारी दिन का क्लोजिंग प्राइस (कॉर्पोरेट एक्शन के हिसाब से समायोजित) लिया जाएगा।
वीडब्ल्यूएपी क्या है
वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस यानी किसी तय समय में हुए सभी सौदों का ऐसा औसत भाव, जिसमें ज्यादा मात्रा वाले सौदों को ज्यादा महत्व दिया जाता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी शेयर में 100 रुपये पर 1,000 शेयर और 102 रुपये पर 100 शेयर बिके, तो वीडब्ल्यूएपी 100 रुपये के करीब होगा, क्योंकि ज्यादा शेयर 100 रुपये पर बिके।
डेरिवेटिव्स के समय में बदलाव
इंडेक्स डेरिवेटिव्स: सामान्य दिनों में 3:45 बजे तक कारोबार होगा। एक्सपायर हो रहे इंडेक्स कॉन्ट्रैक्ट्स में कारोबार 3:30 बजे बंद होगा।
स्टॉक डेरिवेटिव्स: एक्सपायरी के दिन समेत 3:45 बजे तक कारोबार होगा।
कैश सेगमेंट पोस्ट-क्लोज सत्र: 3:50 से 4:00 बजे तक, जिसमें क्लोजिंग प्राइस पर सौदे होंगे।
एफएंडओ एक्सपायरी सेटलमेंट में बदलाव
एफएंडओ ट्रेडर्स के लिए यह बदलाव बेहद अहम है:
इंडेक्स डेरिवेटिव्स: एक्सपायर हो रहे इंडेक्स कॉन्ट्रैक्ट्स का सेटलमेंट इंडेक्स में शामिल शेयरों के आखिरी 30 मिनट के वीडब्ल्यूएपी से बने इंडेक्स मूल्य पर होगा।
स्टॉक डेरिवेटिव्स: एक्सपायर हो रहे स्टॉक कॉन्ट्रैक्ट्स का सेटलमेंट संबंधित शेयर के आखिरी 30 मिनट के वीडब्ल्यूएपी पर होगा, जो सभी एक्सचेंजों के सौदों को मिलाकर निकाला जाएगा।
एक्सचेंज लगातार सांकेतिक (इंडिकेटिव) मूल्य जारी करेंगे, ताकि ट्रेडर्स को अंदाजा रहे।
कब से लागू
ज्यादातर बदलाव: 7 दिसंबर 2026 से
बिना पूरे हुए ऑर्डर को सीएएस में ले जाने से जुड़े नियम: 8 फरवरी 2027 से
एक्सचेंजों और क्लियरिंग कॉर्पोरेशनों को सर्कुलर के सात दिन के भीतर सेबी के साथ मिलकर अपनी प्रक्रियाएं बदलनी होंगी और नई व्यवस्था के लिए सिस्टम तैयार करने होंगे।
क्यों हुआ बदलाव
सेबी ने जनवरी 2026 में शुरू हुए ढांचे की समीक्षा की और 12 सितंबर 2026 को जारी परामर्श पत्र पर लोगों की राय ली। इसके बाद यह संशोधित ढांचा जारी किया गया। उद्देश्य है कि क्लोजिंग प्राइस और एक्सपायरी सेटलमेंट ज्यादा निष्पक्ष, पारदर्शी और हेरफेर से मुक्त हो।
आम निवेशकों पर क्या असर
लंबी अवधि के निवेशकों, जो म्यूचुअल फंड या सीधे शेयरों में निवेश करते हैं, उन पर इसका सीधा बड़ा असर नहीं होगा। लेकिन फायदा यह होगा कि क्लोजिंग प्राइस ज्यादा भरोसेमंद होगा, जिससे फंड के एनएवी और पोर्टफोलियो मूल्य की गणना ज्यादा सही होगी।
वहीं इंट्राडे और एफएंडओ ट्रेडर्स को नए समय और नियमों के हिसाब से अपनी रणनीति बदलनी होगी।
ट्रेडर्स क्या करें
अपने ब्रोकर से नए समय और ऑर्डर नियमों की जानकारी लें।
3:30 के बाद सीएएस में मार्केट ऑर्डर देने से पहले नियम अच्छी तरह समझें।
एक्सपायरी के दिन पोजीशन रखने वाले ट्रेडर्स नए वीडब्ल्यूएपी आधारित सेटलमेंट को ध्यान में रखें।
एक्सचेंजों की ओर से जारी सांकेतिक मूल्यों पर नजर रखें।
एफएंडओ ट्रेडिंग जोखिम भरी होती है, इसलिए समझदारी और जोखिम प्रबंधन के साथ ही ट्रेड करें।
सेबी की भूमिका
सेबी देश के शेयर बाजार का नियामक है, जिसका काम निवेशकों के हितों की रक्षा करना और बाजार को निष्पक्ष बनाए रखना है।
निष्कर्ष
सेबी का नया क्लोजिंग ऑक्शन ढांचा शेयर बाजार के बंद भाव और डेरिवेटिव्स सेटलमेंट को ज्यादा पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम कदम है। रैंडम समय पर सत्र बंद होना और वीडब्ल्यूएपी आधारित सेटलमेंट से कीमतों में हेरफेर की गुंजाइश कम होगी। ट्रेडर्स को 7 दिसंबर से पहले नए नियमों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।
यह लेख केवल जानकारी के लिए है, इसे निवेश सलाह न माना जाए।
बिजनेस और शेयर बाजार की हर खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
शेयर बाजार में बड़ा बदलाव: 7 दिसंबर से 3:30 से 3:40 बजे तक होगा क्लोजिंग ऑक्शन
शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग करने वालों के लिए एक अहम खबर है। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) के नियमों और समय में बदलाव किया है। सेबी के 15 अक्टूबर 2026 के सर्कुलर के अनुसार अब क्लोजिंग ऑक्शन सेशन एक अलग 10 मिनट का सत्र होगा, जो दोपहर 3:30 बजे से 3:40 बजे तक चलेगा। साथ ही डेरिवेटिव्स यानी एफएंडओ कॉन्ट्रैक्ट्स के एक्सपायरी सेटलमेंट के तरीके में भी बदलाव किया गया है। ज्यादातर बदलाव 7 दिसंबर 2026 से लागू होंगे।
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन क्या है
हर शेयर का दिन के अंत में एक क्लोजिंग प्राइस यानी बंद भाव तय होता है। यही भाव अगले दिन की तुलना, म्यूचुअल फंड के एनएवी, इंडेक्स की गणना और कई दूसरे कामों में इस्तेमाल होता है। अगर बाजार बंद होने से ठीक पहले कोई बड़ा ऑर्डर देकर कीमत को ऊपर या नीचे किया जाए, तो क्लोजिंग प्राइस में हेरफेर हो सकता है।
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें बाजार बंद होने के बाद कुछ मिनट के लिए खरीद और बिक्री के ऑर्डर इकट्ठा किए जाते हैं और फिर उनके मिलान से एक संतुलित क्लोजिंग प्राइस तय होता है। इससे बंद भाव ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बनता है।
नया समय और तीन चरण
अभी सीएएस दोपहर 3:15 बजे से 3:35 बजे के बीच होता है। 7 दिसंबर से यह 3:30 बजे से 3:40 बजे तक अलग सत्र के रूप में चलेगा:
पहला चरण (3:30 से 3:31 बजे): संदर्भ मूल्य (रेफरेंस प्राइस) की गणना
दूसरा चरण (3:31 से 3:36 बजे): लिमिट और मार्केट, दोनों तरह के ऑर्डर दिए जा सकेंगे
तीसरा चरण (3:36 से 3:40 बजे): केवल लिमिट ऑर्डर। इस दौरान मार्केट ऑर्डर में बदलाव या उन्हें रद्द नहीं किया जा सकेगा
सबसे खास बात यह है कि ऑर्डर लेना 3:38 से 3:40 बजे के बीच किसी भी समय अचानक (रैंडम तरीके से) बंद होगा। इससे आखिरी सेकंड में ऑर्डर डालकर कीमत को प्रभावित करने की कोशिशों पर रोक लगेगी, क्योंकि किसी को पता नहीं होगा कि सत्र ठीक कब खत्म होगा।
कुछ ऑर्डर पर रोक
सीएएस के दौरान नए आइसबर्ग ऑर्डर (बड़े ऑर्डर को छोटे हिस्सों में दिखाना) और स्टॉप-लॉस ऑर्डर देने की अनुमति नहीं होगी। एक्सचेंजों को ऑर्डर मिलान से तय क्लोजिंग प्राइस और कारोबार की मात्रा की जानकारी जारी करनी होगी।
संदर्भ मूल्य कैसे तय होगा
सीएएस का संदर्भ मूल्य लगातार कारोबार के आखिरी 15 मिनट के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (वीडब्ल्यूएपी) पर आधारित होगा।
अगर उन 15 मिनट में कोई कारोबार नहीं हुआ, तो दिन का आखिरी कारोबारी भाव लिया जाएगा।
अगर पूरे दिन कोई कारोबार नहीं हुआ, तो पिछले कारोबारी दिन का क्लोजिंग प्राइस (कॉर्पोरेट एक्शन के हिसाब से समायोजित) लिया जाएगा।
वीडब्ल्यूएपी क्या है
वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस यानी किसी तय समय में हुए सभी सौदों का ऐसा औसत भाव, जिसमें ज्यादा मात्रा वाले सौदों को ज्यादा महत्व दिया जाता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी शेयर में 100 रुपये पर 1,000 शेयर और 102 रुपये पर 100 शेयर बिके, तो वीडब्ल्यूएपी 100 रुपये के करीब होगा, क्योंकि ज्यादा शेयर 100 रुपये पर बिके।
डेरिवेटिव्स के समय में बदलाव
इंडेक्स डेरिवेटिव्स: सामान्य दिनों में 3:45 बजे तक कारोबार होगा। एक्सपायर हो रहे इंडेक्स कॉन्ट्रैक्ट्स में कारोबार 3:30 बजे बंद होगा।
स्टॉक डेरिवेटिव्स: एक्सपायरी के दिन समेत 3:45 बजे तक कारोबार होगा।
कैश सेगमेंट पोस्ट-क्लोज सत्र: 3:50 से 4:00 बजे तक, जिसमें क्लोजिंग प्राइस पर सौदे होंगे।
एफएंडओ एक्सपायरी सेटलमेंट में बदलाव
एफएंडओ ट्रेडर्स के लिए यह बदलाव बेहद अहम है:
इंडेक्स डेरिवेटिव्स: एक्सपायर हो रहे इंडेक्स कॉन्ट्रैक्ट्स का सेटलमेंट इंडेक्स में शामिल शेयरों के आखिरी 30 मिनट के वीडब्ल्यूएपी से बने इंडेक्स मूल्य पर होगा।
स्टॉक डेरिवेटिव्स: एक्सपायर हो रहे स्टॉक कॉन्ट्रैक्ट्स का सेटलमेंट संबंधित शेयर के आखिरी 30 मिनट के वीडब्ल्यूएपी पर होगा, जो सभी एक्सचेंजों के सौदों को मिलाकर निकाला जाएगा।
एक्सचेंज लगातार सांकेतिक (इंडिकेटिव) मूल्य जारी करेंगे, ताकि ट्रेडर्स को अंदाजा रहे।
कब से लागू
ज्यादातर बदलाव: 7 दिसंबर 2026 से
बिना पूरे हुए ऑर्डर को सीएएस में ले जाने से जुड़े नियम: 8 फरवरी 2027 से
एक्सचेंजों और क्लियरिंग कॉर्पोरेशनों को सर्कुलर के सात दिन के भीतर सेबी के साथ मिलकर अपनी प्रक्रियाएं बदलनी होंगी और नई व्यवस्था के लिए सिस्टम तैयार करने होंगे।
क्यों हुआ बदलाव
सेबी ने जनवरी 2026 में शुरू हुए ढांचे की समीक्षा की और 12 सितंबर 2026 को जारी परामर्श पत्र पर लोगों की राय ली। इसके बाद यह संशोधित ढांचा जारी किया गया। उद्देश्य है कि क्लोजिंग प्राइस और एक्सपायरी सेटलमेंट ज्यादा निष्पक्ष, पारदर्शी और हेरफेर से मुक्त हो।
आम निवेशकों पर क्या असर
लंबी अवधि के निवेशकों, जो म्यूचुअल फंड या सीधे शेयरों में निवेश करते हैं, उन पर इसका सीधा बड़ा असर नहीं होगा। लेकिन फायदा यह होगा कि क्लोजिंग प्राइस ज्यादा भरोसेमंद होगा, जिससे फंड के एनएवी और पोर्टफोलियो मूल्य की गणना ज्यादा सही होगी।
वहीं इंट्राडे और एफएंडओ ट्रेडर्स को नए समय और नियमों के हिसाब से अपनी रणनीति बदलनी होगी।
ट्रेडर्स क्या करें
अपने ब्रोकर से नए समय और ऑर्डर नियमों की जानकारी लें।
3:30 के बाद सीएएस में मार्केट ऑर्डर देने से पहले नियम अच्छी तरह समझें।
एक्सपायरी के दिन पोजीशन रखने वाले ट्रेडर्स नए वीडब्ल्यूएपी आधारित सेटलमेंट को ध्यान में रखें।
एक्सचेंजों की ओर से जारी सांकेतिक मूल्यों पर नजर रखें।
एफएंडओ ट्रेडिंग जोखिम भरी होती है, इसलिए समझदारी और जोखिम प्रबंधन के साथ ही ट्रेड करें।
सेबी की भूमिका
सेबी देश के शेयर बाजार का नियामक है, जिसका काम निवेशकों के हितों की रक्षा करना और बाजार को निष्पक्ष बनाए रखना है।
निष्कर्ष
सेबी का नया क्लोजिंग ऑक्शन ढांचा शेयर बाजार के बंद भाव और डेरिवेटिव्स सेटलमेंट को ज्यादा पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम कदम है। रैंडम समय पर सत्र बंद होना और वीडब्ल्यूएपी आधारित सेटलमेंट से कीमतों में हेरफेर की गुंजाइश कम होगी। ट्रेडर्स को 7 दिसंबर से पहले नए नियमों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।
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