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देश का सबसे बड़ा आईपीओ: जियो प्लेटफॉर्म्स को 22 गुना से ज्यादा बोलियां, 28 अक्टूबर को लिस्टिंग

Jio Platforms IPO, India's biggest ever, subscribed over 22 times; listing expected on October 28

Kanpur Live News Desk ·

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देश का सबसे बड़ा आईपीओ: जियो प्लेटफॉर्म्स को 22 गुना से ज्यादा बोलियां, 28 अक्टूबर को लिस्टिंग
भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ निवेशकों के जबरदस्त उत्साह के साथ बंद हुआ। मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के 30,213 करोड़ रुपये के आईपीओ को आखिरी दिन, 23 अक्टूबर को, एनएसई के शाम 7 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार 22.19 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। संस्थागत निवेशकों ने इस आईपीओ में सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। अब निवेशकों की नजर शेयरों के अलॉटमेंट और लिस्टिंग पर है। आईपीओ की मुख्य बातें इश्यू का आकार: 30,213 करोड़ रुपये इश्यू का प्रकार: पूरी तरह नए शेयर (फ्रेश इश्यू), 27 करोड़ शेयर। कोई ऑफर फॉर सेल नहीं। प्राइस बैंड: 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर लॉट साइज: 12 शेयर खुलने की तारीख: 21 अक्टूबर बंद होने की तारीख: 23 अक्टूबर संभावित अलॉटमेंट: 26 अक्टूबर संभावित लिस्टिंग: 28 अक्टूबर रिपोर्टों के अनुसार ऊपरी प्राइस बैंड पर कंपनी का मूल्यांकन करीब 10.30 लाख करोड़ रुपये बैठता है। किस श्रेणी में कितना सब्सक्रिप्शन एनएसई के आंकड़ों के अनुसार: क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी): 70.55 गुना गैर-संस्थागत निवेशक (एनआईआई): 14 गुना खुदरा निवेशक: 2.72 गुना कुल: 22.19 गुना 19.75 करोड़ से ज्यादा शेयरों के मुकाबले 438 करोड़ से ज्यादा शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। हुंडई का रिकॉर्ड टूटा जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ है। इससे पहले यह रिकॉर्ड 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के आईपीओ के नाम था। उससे पहले 2022 में आया एलआईसी का आईपीओ भी बड़े आईपीओ में शामिल रहा था। पैसा कहां इस्तेमाल होगा कंपनी आईपीओ से जुटाई गई रकम में से 27,500 करोड़ रुपये रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के कर्ज चुकाने में इस्तेमाल करेगी। बाकी रकम सामान्य कॉर्पोरेट कामों में लगाई जाएगी। कर्ज घटने से कंपनी पर ब्याज का बोझ कम होगा और उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। जियो का सफर रिलायंस जियो ने 2016 में मोबाइल सेवाएं शुरू की थीं। मुफ्त कॉल और सस्ते डेटा के साथ जियो ने भारत के टेलीकॉम बाजार की तस्वीर बदल दी। कुछ ही वर्षों में यह देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बन गई। आज जियो के करोड़ों ग्राहक हैं। मोबाइल के अलावा कंपनी ब्रॉडबैंड, डिजिटल सेवाओं और 5जी नेटवर्क के क्षेत्र में भी बड़ी खिलाड़ी है। 2020 में फेसबुक (अब मेटा), गूगल और कई वैश्विक निवेशकों ने जियो प्लेटफॉर्म्स में बड़ा निवेश किया था। अलॉटमेंट स्टेटस कैसे चेक करें एनएसई की वेबसाइट पर: एनएसई की आईपीओ अलॉटमेंट स्टेटस पेज पर जाएं। "इक्विटी एंड एसएमई आईपीओ बिड डिटेल्स" चुनें। सिंबल ड्रॉपडाउन में "जेपीएल" चुनें। अपना पैन या आवेदन संख्या डालें। "सबमिट" पर क्लिक करें। केफिन टेक्नोलॉजीज (रजिस्ट्रार) की वेबसाइट पर: केफिन की आईपीओ स्टेटस पेज पर जाएं। "जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड" चुनें। आवेदन संख्या, पैन या डीमैट खाता संख्या डालें। "सबमिट" पर क्लिक करें। अलॉटमेंट न मिले तो खुदरा निवेशकों का हिस्सा 2.72 गुना भरा है, इसलिए सभी आवेदकों को शेयर नहीं मिल पाएंगे। ज्यादा मांग वाले आईपीओ में खुदरा निवेशकों को लॉटरी के जरिये शेयर दिए जाते हैं। अगर आपको शेयर नहीं मिलते, तो यूपीआई के जरिये ब्लॉक की गई रकम आपके खाते में वापस खुल जाएगी। आईपीओ में आवेदन के दौरान पैसा आपके खाते में ही ब्लॉक रहता है और अलॉटमेंट होने पर ही कटता है। आम निवेशकों के लिए सलाह लिस्टिंग गेन के पीछे न भागें: बड़े आईपीओ में लिस्टिंग के दिन कीमत ऊपर भी जा सकती है और नीचे भी। लंबी अवधि का नजरिया: किसी भी कंपनी में निवेश उसकी कमाई, कर्ज और भविष्य की संभावनाओं को देखकर करें। जोखिम समझें: शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा होता है। अपनी पूरी बचत एक ही शेयर में न लगाएं। सलाह लें: जरूरत हो तो सेबी पंजीकृत निवेश सलाहकार से सलाह लें। अफवाहों से बचें: सोशल मीडिया पर ग्रे मार्केट प्रीमियम और "पक्के मुनाफे" के दावों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। बाजार के लिए बड़ा संकेत इतने बड़े आईपीओ को मिला जबरदस्त समर्थन भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के भरोसे का संकेत है। विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की भारी मांग बताती है कि वे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की संभावनाओं पर भरोसा कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में डीमैट खातों की संख्या तेजी से बढ़ी है और छोटे शहरों से भी बड़ी संख्या में लोग शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं। कानपुर के निवेशक कानपुर समेत उत्तर प्रदेश के छोटे-बड़े शहरों से भी बड़ी संख्या में लोगों ने इस आईपीओ में आवेदन किया। जानकारों का कहना है कि आईपीओ में निवेश से पहले कंपनी का प्रॉस्पेक्टस पढ़ना और जोखिम को समझना जरूरी है। आईपीओ क्या होता है आईपीओ यानी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग वह प्रक्रिया है, जिसमें कोई निजी कंपनी पहली बार आम लोगों को अपने शेयर बेचकर शेयर बाजार में सूचीबद्ध होती है। इससे कंपनी को कारोबार बढ़ाने या कर्ज चुकाने के लिए पैसा मिलता है, और आम निवेशकों को कंपनी में हिस्सेदार बनने का मौका मिलता है। आईपीओ में आवेदन के लिए डीमैट खाता, पैन कार्ड और यूपीआई से जुड़ा बैंक खाता जरूरी होता है। सब्सक्रिप्शन का मतलब जब किसी आईपीओ को "22 गुना सब्सक्रिप्शन" मिलता है, तो इसका मतलब है कि जितने शेयर बेचे जा रहे थे, उनसे 22 गुना ज्यादा शेयरों के लिए बोलियां लगीं। यानी मांग आपूर्ति से कहीं ज्यादा थी। क्यूआईबी में बड़े बैंक, म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां और विदेशी संस्थागत निवेशक आते हैं। एनआईआई में ज्यादा रकम लगाने वाले व्यक्तिगत निवेशक और कंपनियां शामिल होती हैं, जबकि खुदरा श्रेणी में दो लाख रुपये तक लगाने वाले आम निवेशक आते हैं। लिस्टिंग के दिन क्या देखें लिस्टिंग के दिन शेयर किस भाव पर खुलता है, यह बाजार की स्थिति और मांग पर निर्भर करता है। निवेशक जल्दबाजी में फैसला न लें। निष्कर्ष जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक बड़ा पड़ाव है। 22 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन निवेशकों के भरोसे को दिखाता है। अब सबकी नजर 26 अक्टूबर के अलॉटमेंट और 28 अक्टूबर की संभावित लिस्टिंग पर है। यह लेख केवल जानकारी के लिए है, इसे निवेश सलाह न माना जाए। बिजनेस और शेयर बाजार की हर खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।

देश का सबसे बड़ा आईपीओ: जियो प्लेटफॉर्म्स को 22 गुना से ज्यादा बोलियां, 28 अक्टूबर को लिस्टिंग

भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ निवेशकों के जबरदस्त उत्साह के साथ बंद हुआ। मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के 30,213 करोड़ रुपये के आईपीओ को आखिरी दिन, 23 अक्टूबर को, एनएसई के शाम 7 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार 22.19 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। संस्थागत निवेशकों ने इस आईपीओ में सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। अब निवेशकों की नजर शेयरों के अलॉटमेंट और लिस्टिंग पर है। आईपीओ की मुख्य बातें इश्यू का आकार: 30,213 करोड़ रुपये इश्यू का प्रकार: पूरी तरह नए शेयर (फ्रेश इश्यू), 27 करोड़ शेयर। कोई ऑफर फॉर सेल नहीं। प्राइस बैंड: 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर लॉट साइज: 12 शेयर खुलने की तारीख: 21 अक्टूबर बंद होने की तारीख: 23 अक्टूबर संभावित अलॉटमेंट: 26 अक्टूबर संभावित लिस्टिंग: 28 अक्टूबर रिपोर्टों के अनुसार ऊपरी प्राइस बैंड पर कंपनी का मूल्यांकन करीब 10.30 लाख करोड़ रुपये बैठता है। किस श्रेणी में कितना सब्सक्रिप्शन एनएसई के आंकड़ों के अनुसार: क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी): 70.55 गुना गैर-संस्थागत निवेशक (एनआईआई): 14 गुना खुदरा निवेशक: 2.72 गुना कुल: 22.19 गुना 19.75 करोड़ से ज्यादा शेयरों के मुकाबले 438 करोड़ से ज्यादा शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। हुंडई का रिकॉर्ड टूटा जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ है। इससे पहले यह रिकॉर्ड 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के आईपीओ के नाम था। उससे पहले 2022 में आया एलआईसी का आईपीओ भी बड़े आईपीओ में शामिल रहा था। पैसा कहां इस्तेमाल होगा कंपनी आईपीओ से जुटाई गई रकम में से 27,500 करोड़ रुपये रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के कर्ज चुकाने में इस्तेमाल करेगी। बाकी रकम सामान्य कॉर्पोरेट कामों में लगाई जाएगी। कर्ज घटने से कंपनी पर ब्याज का बोझ कम होगा और उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। जियो का सफर रिलायंस जियो ने 2016 में मोबाइल सेवाएं शुरू की थीं। मुफ्त कॉल और सस्ते डेटा के साथ जियो ने भारत के टेलीकॉम बाजार की तस्वीर बदल दी। कुछ ही वर्षों में यह देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बन गई। आज जियो के करोड़ों ग्राहक हैं। मोबाइल के अलावा कंपनी ब्रॉडबैंड, डिजिटल सेवाओं और 5जी नेटवर्क के क्षेत्र में भी बड़ी खिलाड़ी है। 2020 में फेसबुक (अब मेटा), गूगल और कई वैश्विक निवेशकों ने जियो प्लेटफॉर्म्स में बड़ा निवेश किया था। अलॉटमेंट स्टेटस कैसे चेक करें एनएसई की वेबसाइट पर: एनएसई की आईपीओ अलॉटमेंट स्टेटस पेज पर जाएं। "इक्विटी एंड एसएमई आईपीओ बिड डिटेल्स" चुनें। सिंबल ड्रॉपडाउन में "जेपीएल" चुनें। अपना पैन या आवेदन संख्या डालें। "सबमिट" पर क्लिक करें। केफिन टेक्नोलॉजीज (रजिस्ट्रार) की वेबसाइट पर: केफिन की आईपीओ स्टेटस पेज पर जाएं। "जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड" चुनें। आवेदन संख्या, पैन या डीमैट खाता संख्या डालें। "सबमिट" पर क्लिक करें। अलॉटमेंट न मिले तो खुदरा निवेशकों का हिस्सा 2.72 गुना भरा है, इसलिए सभी आवेदकों को शेयर नहीं मिल पाएंगे। ज्यादा मांग वाले आईपीओ में खुदरा निवेशकों को लॉटरी के जरिये शेयर दिए जाते हैं। अगर आपको शेयर नहीं मिलते, तो यूपीआई के जरिये ब्लॉक की गई रकम आपके खाते में वापस खुल जाएगी। आईपीओ में आवेदन के दौरान पैसा आपके खाते में ही ब्लॉक रहता है और अलॉटमेंट होने पर ही कटता है। आम निवेशकों के लिए सलाह लिस्टिंग गेन के पीछे न भागें: बड़े आईपीओ में लिस्टिंग के दिन कीमत ऊपर भी जा सकती है और नीचे भी। लंबी अवधि का नजरिया: किसी भी कंपनी में निवेश उसकी कमाई, कर्ज और भविष्य की संभावनाओं को देखकर करें। जोखिम समझें: शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा होता है। अपनी पूरी बचत एक ही शेयर में न लगाएं। सलाह लें: जरूरत हो तो सेबी पंजीकृत निवेश सलाहकार से सलाह लें। अफवाहों से बचें: सोशल मीडिया पर ग्रे मार्केट प्रीमियम और "पक्के मुनाफे" के दावों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। बाजार के लिए बड़ा संकेत इतने बड़े आईपीओ को मिला जबरदस्त समर्थन भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के भरोसे का संकेत है। विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की भारी मांग बताती है कि वे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की संभावनाओं पर भरोसा कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में डीमैट खातों की संख्या तेजी से बढ़ी है और छोटे शहरों से भी बड़ी संख्या में लोग शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं। कानपुर के निवेशक कानपुर समेत उत्तर प्रदेश के छोटे-बड़े शहरों से भी बड़ी संख्या में लोगों ने इस आईपीओ में आवेदन किया। जानकारों का कहना है कि आईपीओ में निवेश से पहले कंपनी का प्रॉस्पेक्टस पढ़ना और जोखिम को समझना जरूरी है। आईपीओ क्या होता है आईपीओ यानी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग वह प्रक्रिया है, जिसमें कोई निजी कंपनी पहली बार आम लोगों को अपने शेयर बेचकर शेयर बाजार में सूचीबद्ध होती है। इससे कंपनी को कारोबार बढ़ाने या कर्ज चुकाने के लिए पैसा मिलता है, और आम निवेशकों को कंपनी में हिस्सेदार बनने का मौका मिलता है। आईपीओ में आवेदन के लिए डीमैट खाता, पैन कार्ड और यूपीआई से जुड़ा बैंक खाता जरूरी होता है। सब्सक्रिप्शन का मतलब जब किसी आईपीओ को "22 गुना सब्सक्रिप्शन" मिलता है, तो इसका मतलब है कि जितने शेयर बेचे जा रहे थे, उनसे 22 गुना ज्यादा शेयरों के लिए बोलियां लगीं। यानी मांग आपूर्ति से कहीं ज्यादा थी। क्यूआईबी में बड़े बैंक, म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां और विदेशी संस्थागत निवेशक आते हैं। एनआईआई में ज्यादा रकम लगाने वाले व्यक्तिगत निवेशक और कंपनियां शामिल होती हैं, जबकि खुदरा श्रेणी में दो लाख रुपये तक लगाने वाले आम निवेशक आते हैं। लिस्टिंग के दिन क्या देखें लिस्टिंग के दिन शेयर किस भाव पर खुलता है, यह बाजार की स्थिति और मांग पर निर्भर करता है। निवेशक जल्दबाजी में फैसला न लें। निष्कर्ष जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक बड़ा पड़ाव है। 22 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन निवेशकों के भरोसे को दिखाता है। अब सबकी नजर 26 अक्टूबर के अलॉटमेंट और 28 अक्टूबर की संभावित लिस्टिंग पर है। यह लेख केवल जानकारी के लिए है, इसे निवेश सलाह न माना जाए। बिजनेस और शेयर बाजार की हर खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।

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