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दिवाली से पहले अवैध पटाखों पर शिकंजा: कानपुर में ई-ऑटो से 77 किलो पटाखे बरामद, दो युवक गिरफ्तार; उन्नाव से लाकर गांवों में बेचने की थी तैयारी

Crackdown on Illegal Firecrackers Ahead of Diwali: 77 kg Seized From E-Auto in Kanpur, Two Arrested

Kanpur Live News Desk ·

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दिवाली से पहले अवैध पटाखों पर शिकंजा: कानपुर में ई-ऑटो से 77 किलो पटाखे बरामद, दो युवक गिरफ्तार; उन्नाव से लाकर गांवों में बेचने की थी तैयारी
मुख्य बातें: चकेरी पुलिस ने रविवार देर रात अहिरवां इलाके में चेकिंग के दौरान एक ई-ऑटो से अवैध पटाखे बरामद किए। बरामद पटाखों का वजन 77 किलो 270 ग्राम है। इनकी कीमत करीब एक लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने दो युवकों धीरेंद्र और मोहित यादव को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों उन्नाव से पटाखे खरीदकर कानपुर के आसपास के गांवों में महंगे दाम पर बेचने की तैयारी में थे। दिवाली से पहले अवैध पटाखों के भंडारण और बिक्री पर पुलिस की सख्ती बढ़ी है। दिवाली में अभी कुछ हफ्ते बाकी हैं, लेकिन अवैध पटाखों का कारोबार करने वाले अभी से सक्रिय हो गए हैं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार कानपुर की चकेरी पुलिस ने रविवार देर रात अहिरवां इलाके में चेकिंग के दौरान एक ई-ऑटो से 77 किलो से ज्यादा अवैध पटाखे बरामद किए। पुलिस ने मौके से दो युवकों को गिरफ्तार किया है। कैसे पकड़े गए आरोपी? रिपोर्टों के अनुसार रविवार देर रात चकेरी पुलिस अहिरवां इलाके में नियमित चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान एक ई-ऑटो (बैटरी से चलने वाला ऑटो रिक्शा) को रोका गया। तलाशी लेने पर उसमें भारी मात्रा में पटाखे रखे मिले। जब ई-ऑटो में सवार युवकों से पटाखों का लाइसेंस और दस्तावेज मांगे गए, तो वे कोई कागज नहीं दिखा सके। इसके बाद पुलिस ने पटाखे जब्त कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। कौन हैं आरोपी? थाना प्रभारी अजय प्रकाश मिश्रा के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई: धीरेंद्र, निवासी गंगागंज, महाराजपुर मोहित यादव, निवासी लालपुरवा उन्नाव से लाए थे पटाखे पुलिस के अनुसार पूछताछ में सामने आया कि दोनों युवक उन्नाव से पटाखे खरीदकर लाए थे। उनकी योजना इन्हें कानपुर के आसपास के गांवों में ऊंचे दाम पर बेचने की थी। बरामद पटाखों का वजन 77 किलो 270 ग्राम है और इनकी कीमत करीब एक लाख रुपये आंकी गई है। ई-ऑटो में पटाखे: कितना खतरनाक? इस मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पटाखे एक ई-ऑटो में ले जाए जा रहे थे। ई-ऑटो बैटरी से चलते हैं और उनमें बिजली के तार और बैटरी होती है। अगर किसी कारण से बैटरी में शॉर्ट सर्किट होता या चिंगारी निकलती, तो 77 किलो पटाखे एक साथ फट सकते थे। इससे न सिर्फ वाहन में सवार लोगों की जान जाती, बल्कि आसपास से गुजर रहे लोग भी चपेट में आ सकते थे। भीड़भाड़ वाले इलाकों से ऐसे वाहन का गुजरना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है। पटाखे बेचने के लिए क्या हैं नियम? भारत में पटाखों का निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री विस्फोटक अधिनियम और विस्फोटक नियमों के तहत नियंत्रित होती है। सामान्य तौर पर: लाइसेंस जरूरी: पटाखे बेचने या तय मात्रा से ज्यादा रखने के लिए लाइसेंस जरूरी है। त्योहारों के समय जिला प्रशासन अस्थायी लाइसेंस जारी करता है। तय जगह पर बिक्री: अस्थायी दुकानें आम तौर पर प्रशासन द्वारा तय खुले स्थानों पर ही लगाई जा सकती हैं, जहां सुरक्षा के इंतजाम हों। भंडारण की सीमा: लाइसेंस में तय मात्रा से ज्यादा पटाखे नहीं रखे जा सकते। रिहायशी इलाकों में भंडारण पर रोक: घरों, गोदामों या भीड़भाड़ वाले बाजारों में बिना अनुमति पटाखे रखना गैरकानूनी है। ग्रीन पटाखे: प्रदूषण कम करने के लिए कई जगहों पर केवल ग्रीन पटाखों की बिक्री की अनुमति होती है। प्रतिबंधित पटाखे: कुछ खास तरह के तेज आवाज वाले और खतरनाक पटाखे पूरी तरह प्रतिबंधित होते हैं। बिना लाइसेंस पटाखों का भंडारण, परिवहन या बिक्री दंडनीय अपराध है, जिसमें जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है। क्यों बढ़ता है अवैध पटाखों का कारोबार? दिवाली के आसपास पटाखों की मांग अचानक बहुत बढ़ जाती है। लाइसेंसी दुकानें सीमित होती हैं और कई बार ग्रामीण इलाकों तक नहीं पहुंचतीं। इसका फायदा उठाकर कुछ लोग बिना लाइसेंस के पटाखे खरीदकर गांवों और गलियों में बेचते हैं। ऐसे पटाखे अक्सर: घटिया गुणवत्ता के होते हैं। बिना सुरक्षा मानकों के बनाए जाते हैं। असुरक्षित तरीके से रखे और ले जाए जाते हैं। ऊंचे दाम पर बेचे जाते हैं। हर साल होते हैं हादसे देश भर में हर साल पटाखों के अवैध भंडारण और निर्माण के कारण कई बड़े हादसे होते हैं। घरों और गोदामों में रखे पटाखों में आग लगने से कई लोगों की जान जाती है। दिवाली के दौरान पटाखों से जलने के मामलों में भी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। इसलिए प्रशासन हर साल त्योहारों से पहले अवैध पटाखों के खिलाफ अभियान चलाता है। पटाखे खरीदते और जलाते समय सावधानियां अगर आप दिवाली पर पटाखे जलाने की योजना बना रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें: लाइसेंसी दुकान से ही खरीदें: सड़क किनारे या घरों से बिक रहे अवैध पटाखे न खरीदें। ग्रीन पटाखे चुनें: कम प्रदूषण वाले प्रमाणित ग्रीन पटाखे लें। खुली जगह पर जलाएं: घर के अंदर, बालकनी या भीड़ वाली जगह पर पटाखे न जलाएं। पानी की बाल्टी पास रखें: किसी भी आपात स्थिति के लिए पानी और रेत तैयार रखें। बच्चों की निगरानी: बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें। सूती कपड़े पहनें: सिंथेटिक कपड़े जल्दी आग पकड़ते हैं। फुस्स पटाखे को दोबारा न जलाएं: न जलने वाले पटाखे पर पानी डाल दें। तय समय का पालन करें: प्रशासन द्वारा तय समय में ही पटाखे जलाएं। जलने पर प्राथमिक उपचार जले हुए हिस्से पर तुरंत 10 से 15 मिनट तक साफ बहता ठंडा पानी डालें। बर्फ, टूथपेस्ट, तेल या घी न लगाएं। छाले को न फोड़ें। गंभीर जलने पर तुरंत अस्पताल जाएं या 108 एंबुलेंस बुलाएं। अवैध पटाखों की सूचना कहां दें? अगर आपके इलाके में कोई घर, दुकान या गोदाम में अवैध रूप से पटाखे रख रहा है या बेच रहा है, तो इसकी सूचना तुरंत: स्थानीय पुलिस थाने को दें। आपात स्थिति में 112 पर कॉल करें। आग की स्थिति में फायर ब्रिगेड को 101 पर कॉल करें। आपकी एक सूचना किसी बड़े हादसे को रोक सकती है। पुलिस की आगे की तैयारी आम तौर पर दिवाली से पहले पुलिस और प्रशासन मिलकर अवैध पटाखों के खिलाफ विशेष अभियान चलाते हैं। इसमें गोदामों की जांच, वाहनों की चेकिंग और बिना लाइसेंस वाली दुकानों पर कार्रवाई की जाती है। इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि आरोपियों ने पटाखे किससे खरीदे और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क है। kanpur.live की राय त्योहार खुशियों के लिए होते हैं, हादसों के लिए नहीं। अवैध पटाखे न सिर्फ कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि लोगों की जान के लिए भी खतरा हैं। चकेरी पुलिस की यह कार्रवाई समय पर उठाया गया सही कदम है। हम पाठकों से अपील करते हैं कि केवल लाइसेंसी दुकानों से ग्रीन पटाखे खरीदें और सुरक्षित तरीके से दिवाली मनाएं। ग्रीन पटाखे क्या होते हैं? ग्रीन पटाखे ऐसे पटाखे हैं, जिन्हें कम प्रदूषण फैलाने के लिए विकसित किया गया है। इनमें हानिकारक रसायनों की मात्रा कम होती है और ये सामान्य पटाखों की तुलना में कम धुआं और कम शोर करते हैं। इन्हें वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की प्रयोगशाला नीरी (NEERI) ने विकसित किया है। असली ग्रीन पटाखों के डिब्बे पर एक खास लोगो और QR कोड होता है, जिसे स्कैन कर उनकी असलियत जांची जा सकती है। प्रदूषण और सेहत पर असर दिवाली के बाद हर साल उत्तर भारत के कई शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है। कानपुर में भी इस दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बढ़ने की खबरें आती रही हैं। पटाखों का धुआं बुजुर्गों, बच्चों, दमा और सांस के मरीजों के लिए खास तौर पर नुकसानदायक होता है। तेज आवाज वाले पटाखे पालतू जानवरों और पक्षियों को भी परेशान करते हैं। इसलिए कम और सुरक्षित पटाखे जलाना सभी के हित में है। बच्चों को जागरूक करें बच्चे पटाखों को लेकर सबसे ज्यादा उत्साहित रहते हैं, लेकिन वही सबसे ज्यादा जोखिम में भी होते हैं। उन्हें पहले से समझाएं कि पटाखों को हाथ में पकड़कर न जलाएं, जेब में न रखें और जलते पटाखे के पास झुककर न देखें। स्कूलों और मोहल्लों में भी सुरक्षित दिवाली को लेकर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा सकते हैं। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल प्रश्न 1. कितने पटाखे बरामद हुए? 77 किलो 270 ग्राम, जिनकी कीमत करीब एक लाख रुपये है। प्रश्न 2. पटाखे कहां से बरामद हुए? चकेरी थाना क्षेत्र के अहिरवां इलाके में एक ई-ऑटो से। प्रश्न 3. किन्हें गिरफ्तार किया गया? महाराजपुर के गंगागंज निवासी धीरेंद्र और लालपुरवा निवासी मोहित यादव को। प्रश्न 4. पटाखे कहां से लाए गए थे? पुलिस के अनुसार उन्नाव से। प्रश्न 5. क्या पटाखे बेचने के लिए लाइसेंस जरूरी है? हां, बिना लाइसेंस पटाखों का भंडारण और बिक्री गैरकानूनी है। प्रश्न 6. अवैध पटाखों की सूचना कहां दें? स्थानीय थाने या 112 पर। प्रश्न 7. पटाखे से जलने पर क्या करें? जले हिस्से पर 10-15 मिनट ठंडा पानी डालें और गंभीर स्थिति में अस्पताल जाएं। स्रोत: चकेरी पुलिस के बयान पर आधारित स्थानीय रिपोर्ट, 12 अक्टूबर 2026।

दिवाली से पहले अवैध पटाखों पर शिकंजा: कानपुर में ई-ऑटो से 77 किलो पटाखे बरामद, दो युवक गिरफ्तार; उन्नाव से लाकर गांवों में बेचने की थी तैयारी

मुख्य बातें: चकेरी पुलिस ने रविवार देर रात अहिरवां इलाके में चेकिंग के दौरान एक ई-ऑटो से अवैध पटाखे बरामद किए। बरामद पटाखों का वजन 77 किलो 270 ग्राम है। इनकी कीमत करीब एक लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने दो युवकों धीरेंद्र और मोहित यादव को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों उन्नाव से पटाखे खरीदकर कानपुर के आसपास के गांवों में महंगे दाम पर बेचने की तैयारी में थे। दिवाली से पहले अवैध पटाखों के भंडारण और बिक्री पर पुलिस की सख्ती बढ़ी है। दिवाली में अभी कुछ हफ्ते बाकी हैं, लेकिन अवैध पटाखों का कारोबार करने वाले अभी से सक्रिय हो गए हैं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार कानपुर की चकेरी पुलिस ने रविवार देर रात अहिरवां इलाके में चेकिंग के दौरान एक ई-ऑटो से 77 किलो से ज्यादा अवैध पटाखे बरामद किए। पुलिस ने मौके से दो युवकों को गिरफ्तार किया है। कैसे पकड़े गए आरोपी? रिपोर्टों के अनुसार रविवार देर रात चकेरी पुलिस अहिरवां इलाके में नियमित चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान एक ई-ऑटो (बैटरी से चलने वाला ऑटो रिक्शा) को रोका गया। तलाशी लेने पर उसमें भारी मात्रा में पटाखे रखे मिले। जब ई-ऑटो में सवार युवकों से पटाखों का लाइसेंस और दस्तावेज मांगे गए, तो वे कोई कागज नहीं दिखा सके। इसके बाद पुलिस ने पटाखे जब्त कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। कौन हैं आरोपी? थाना प्रभारी अजय प्रकाश मिश्रा के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई: धीरेंद्र, निवासी गंगागंज, महाराजपुर मोहित यादव, निवासी लालपुरवा उन्नाव से लाए थे पटाखे पुलिस के अनुसार पूछताछ में सामने आया कि दोनों युवक उन्नाव से पटाखे खरीदकर लाए थे। उनकी योजना इन्हें कानपुर के आसपास के गांवों में ऊंचे दाम पर बेचने की थी। बरामद पटाखों का वजन 77 किलो 270 ग्राम है और इनकी कीमत करीब एक लाख रुपये आंकी गई है। ई-ऑटो में पटाखे: कितना खतरनाक? इस मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पटाखे एक ई-ऑटो में ले जाए जा रहे थे। ई-ऑटो बैटरी से चलते हैं और उनमें बिजली के तार और बैटरी होती है। अगर किसी कारण से बैटरी में शॉर्ट सर्किट होता या चिंगारी निकलती, तो 77 किलो पटाखे एक साथ फट सकते थे। इससे न सिर्फ वाहन में सवार लोगों की जान जाती, बल्कि आसपास से गुजर रहे लोग भी चपेट में आ सकते थे। भीड़भाड़ वाले इलाकों से ऐसे वाहन का गुजरना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है। पटाखे बेचने के लिए क्या हैं नियम? भारत में पटाखों का निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री विस्फोटक अधिनियम और विस्फोटक नियमों के तहत नियंत्रित होती है। सामान्य तौर पर: लाइसेंस जरूरी: पटाखे बेचने या तय मात्रा से ज्यादा रखने के लिए लाइसेंस जरूरी है। त्योहारों के समय जिला प्रशासन अस्थायी लाइसेंस जारी करता है। तय जगह पर बिक्री: अस्थायी दुकानें आम तौर पर प्रशासन द्वारा तय खुले स्थानों पर ही लगाई जा सकती हैं, जहां सुरक्षा के इंतजाम हों। भंडारण की सीमा: लाइसेंस में तय मात्रा से ज्यादा पटाखे नहीं रखे जा सकते। रिहायशी इलाकों में भंडारण पर रोक: घरों, गोदामों या भीड़भाड़ वाले बाजारों में बिना अनुमति पटाखे रखना गैरकानूनी है। ग्रीन पटाखे: प्रदूषण कम करने के लिए कई जगहों पर केवल ग्रीन पटाखों की बिक्री की अनुमति होती है। प्रतिबंधित पटाखे: कुछ खास तरह के तेज आवाज वाले और खतरनाक पटाखे पूरी तरह प्रतिबंधित होते हैं। बिना लाइसेंस पटाखों का भंडारण, परिवहन या बिक्री दंडनीय अपराध है, जिसमें जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है। क्यों बढ़ता है अवैध पटाखों का कारोबार? दिवाली के आसपास पटाखों की मांग अचानक बहुत बढ़ जाती है। लाइसेंसी दुकानें सीमित होती हैं और कई बार ग्रामीण इलाकों तक नहीं पहुंचतीं। इसका फायदा उठाकर कुछ लोग बिना लाइसेंस के पटाखे खरीदकर गांवों और गलियों में बेचते हैं। ऐसे पटाखे अक्सर: घटिया गुणवत्ता के होते हैं। बिना सुरक्षा मानकों के बनाए जाते हैं। असुरक्षित तरीके से रखे और ले जाए जाते हैं। ऊंचे दाम पर बेचे जाते हैं। हर साल होते हैं हादसे देश भर में हर साल पटाखों के अवैध भंडारण और निर्माण के कारण कई बड़े हादसे होते हैं। घरों और गोदामों में रखे पटाखों में आग लगने से कई लोगों की जान जाती है। दिवाली के दौरान पटाखों से जलने के मामलों में भी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। इसलिए प्रशासन हर साल त्योहारों से पहले अवैध पटाखों के खिलाफ अभियान चलाता है। पटाखे खरीदते और जलाते समय सावधानियां अगर आप दिवाली पर पटाखे जलाने की योजना बना रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें: लाइसेंसी दुकान से ही खरीदें: सड़क किनारे या घरों से बिक रहे अवैध पटाखे न खरीदें। ग्रीन पटाखे चुनें: कम प्रदूषण वाले प्रमाणित ग्रीन पटाखे लें। खुली जगह पर जलाएं: घर के अंदर, बालकनी या भीड़ वाली जगह पर पटाखे न जलाएं। पानी की बाल्टी पास रखें: किसी भी आपात स्थिति के लिए पानी और रेत तैयार रखें। बच्चों की निगरानी: बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें। सूती कपड़े पहनें: सिंथेटिक कपड़े जल्दी आग पकड़ते हैं। फुस्स पटाखे को दोबारा न जलाएं: न जलने वाले पटाखे पर पानी डाल दें। तय समय का पालन करें: प्रशासन द्वारा तय समय में ही पटाखे जलाएं। जलने पर प्राथमिक उपचार जले हुए हिस्से पर तुरंत 10 से 15 मिनट तक साफ बहता ठंडा पानी डालें। बर्फ, टूथपेस्ट, तेल या घी न लगाएं। छाले को न फोड़ें। गंभीर जलने पर तुरंत अस्पताल जाएं या 108 एंबुलेंस बुलाएं। अवैध पटाखों की सूचना कहां दें? अगर आपके इलाके में कोई घर, दुकान या गोदाम में अवैध रूप से पटाखे रख रहा है या बेच रहा है, तो इसकी सूचना तुरंत: स्थानीय पुलिस थाने को दें। आपात स्थिति में 112 पर कॉल करें। आग की स्थिति में फायर ब्रिगेड को 101 पर कॉल करें। आपकी एक सूचना किसी बड़े हादसे को रोक सकती है। पुलिस की आगे की तैयारी आम तौर पर दिवाली से पहले पुलिस और प्रशासन मिलकर अवैध पटाखों के खिलाफ विशेष अभियान चलाते हैं। इसमें गोदामों की जांच, वाहनों की चेकिंग और बिना लाइसेंस वाली दुकानों पर कार्रवाई की जाती है। इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि आरोपियों ने पटाखे किससे खरीदे और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क है। kanpur.live की राय त्योहार खुशियों के लिए होते हैं, हादसों के लिए नहीं। अवैध पटाखे न सिर्फ कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि लोगों की जान के लिए भी खतरा हैं। चकेरी पुलिस की यह कार्रवाई समय पर उठाया गया सही कदम है। हम पाठकों से अपील करते हैं कि केवल लाइसेंसी दुकानों से ग्रीन पटाखे खरीदें और सुरक्षित तरीके से दिवाली मनाएं। ग्रीन पटाखे क्या होते हैं? ग्रीन पटाखे ऐसे पटाखे हैं, जिन्हें कम प्रदूषण फैलाने के लिए विकसित किया गया है। इनमें हानिकारक रसायनों की मात्रा कम होती है और ये सामान्य पटाखों की तुलना में कम धुआं और कम शोर करते हैं। इन्हें वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की प्रयोगशाला नीरी (NEERI) ने विकसित किया है। असली ग्रीन पटाखों के डिब्बे पर एक खास लोगो और QR कोड होता है, जिसे स्कैन कर उनकी असलियत जांची जा सकती है। प्रदूषण और सेहत पर असर दिवाली के बाद हर साल उत्तर भारत के कई शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है। कानपुर में भी इस दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बढ़ने की खबरें आती रही हैं। पटाखों का धुआं बुजुर्गों, बच्चों, दमा और सांस के मरीजों के लिए खास तौर पर नुकसानदायक होता है। तेज आवाज वाले पटाखे पालतू जानवरों और पक्षियों को भी परेशान करते हैं। इसलिए कम और सुरक्षित पटाखे जलाना सभी के हित में है। बच्चों को जागरूक करें बच्चे पटाखों को लेकर सबसे ज्यादा उत्साहित रहते हैं, लेकिन वही सबसे ज्यादा जोखिम में भी होते हैं। उन्हें पहले से समझाएं कि पटाखों को हाथ में पकड़कर न जलाएं, जेब में न रखें और जलते पटाखे के पास झुककर न देखें। स्कूलों और मोहल्लों में भी सुरक्षित दिवाली को लेकर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा सकते हैं। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल प्रश्न 1. कितने पटाखे बरामद हुए? 77 किलो 270 ग्राम, जिनकी कीमत करीब एक लाख रुपये है। प्रश्न 2. पटाखे कहां से बरामद हुए? चकेरी थाना क्षेत्र के अहिरवां इलाके में एक ई-ऑटो से। प्रश्न 3. किन्हें गिरफ्तार किया गया? महाराजपुर के गंगागंज निवासी धीरेंद्र और लालपुरवा निवासी मोहित यादव को। प्रश्न 4. पटाखे कहां से लाए गए थे? पुलिस के अनुसार उन्नाव से। प्रश्न 5. क्या पटाखे बेचने के लिए लाइसेंस जरूरी है? हां, बिना लाइसेंस पटाखों का भंडारण और बिक्री गैरकानूनी है। प्रश्न 6. अवैध पटाखों की सूचना कहां दें? स्थानीय थाने या 112 पर। प्रश्न 7. पटाखे से जलने पर क्या करें? जले हिस्से पर 10-15 मिनट ठंडा पानी डालें और गंभीर स्थिति में अस्पताल जाएं। स्रोत: चकेरी पुलिस के बयान पर आधारित स्थानीय रिपोर्ट, 12 अक्टूबर 2026।

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