फास्टैग से दो बार कटा टोल, उपभोक्ता आयोग ने दिलाया हर्जाना
Double FASTag toll deduction: Consumer commission orders Rs 6,800 compensation
Kanpur Live News Desk ·

हाईवे पर सफर करने वाले लगभग हर वाहन चालक के लिए फास्टैग अब रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। इससे टोल प्लाजा पर लंबी लाइन में लगने की परेशानी काफी हद तक खत्म हुई है। लेकिन कई बार तकनीकी गड़बड़ी या लापरवाही की वजह से एक ही यात्रा के लिए दो बार पैसे कट जाते हैं। ज्यादातर लोग छोटी रकम समझकर इसे नजरअंदाज कर देते हैं। हरियाणा के पानीपत से आया एक मामला बताता है कि अगर आप अपने अधिकारों के लिए खड़े हों, तो छोटी रकम के लिए भी न्याय और हर्जाना दोनों मिल सकते हैं।
क्या था पूरा मामला
जून 2023 में शिकायतकर्ता अपने परिवार के साथ गोहाना की ओर जा रहे थे। टोल प्लाजा पर कर्मचारी ने कहा कि उनके पेटीएम वॉलेट में पर्याप्त बैलेंस नहीं है और तय टोल 65 रुपये की जगह 130 रुपये की दोगुनी पेनल्टी फीस डिजिटल माध्यम से वसूल ली। शिकायतकर्ता ने इसका विरोध किया, क्योंकि उनके वॉलेट में पर्याप्त बैलेंस था। ठीक 5 मिनट बाद उनके मोबाइल पर संदेश आया कि पेटीएम फास्टैग वॉलेट से भी 65 रुपये कट गए हैं।
यानी एक ही यात्रा के लिए उनसे कुल 195 रुपये वसूल लिए गए, जबकि तय टोल केवल 65 रुपये था।
रिफंड मांगा तो मिला इनकार
पैसे दोबारा कटने की पुष्टि होते ही वाहन चालक ने टोल प्लाजा स्टाफ से संपर्क किया और अतिरिक्त राशि लौटाने का अनुरोध किया। आरोप है कि कर्मचारियों ने रिफंड देने से मना कर दिया और उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने टोल प्लाजा और संबंधित निर्माण कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा। जब वहां से भी कोई समाधान नहीं निकला, तो उन्होंने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप लगाते हुए पानीपत जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया।
टोल ऑपरेटर की दलील
आयोग के सामने टोल प्लाजा और निर्माण कंपनी ने सभी आरोपों से इनकार किया। उनका कहना था कि वाहन का फास्टैग ठीक से काम नहीं कर रहा था और स्कैन करने पर वॉलेट बैलेंस नहीं दिख रहा था। कंपनी ने यह भी दावा किया कि चालक ने खुद इस समस्या को स्वीकार किया था और उपभोक्ता आयोग आने से पहले रिफंड के लिए उनसे संपर्क नहीं किया था।
आयोग का फैसला
पानीपत उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष आर.के. डोगरा, सदस्य रेखा चौधरी और विनीत कौशिक की पीठ ने 29 सितंबर को फैसला सुनाया। आयोग ने शिकायतकर्ता द्वारा पेश पेटीएम ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और टोल रसीद की जांच की, जिससे साफ हुआ कि 5 मिनट के भीतर 65 रुपये की राशि दो बार काटी गई थी।
आयोग ने कहा कि गलत कटौती साबित होने के बाद अतिरिक्त राशि लौटाना टोल ऑपरेटर की जिम्मेदारी थी। साथ ही टोल ऑपरेटर को कई मौके दिए गए, लेकिन वह अपने पक्ष में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया। आयोग ने इसे सेवा में स्पष्ट लापरवाही माना और कुल 6,800 रुपये के भुगतान का आदेश दिया:
1,300 रुपये: काटी गई अतिरिक्त राशि और उससे जुड़े हर्जाने के रूप में।
5,500 रुपये: मानसिक उत्पीड़न, असुविधा और कानूनी खर्च के मुआवजे के रूप में।
सबूत ही सबसे बड़ी ताकत
इस मामले में शिकायतकर्ता की जीत की सबसे बड़ी वजह उनके पास मौजूद डिजिटल सबूत थे। पेटीएम का ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और टोल की रसीद ने साफ कर दिया कि पैसे दो बार कटे थे। डिजिटल भुगतान के दौर में हर लेनदेन का रिकॉर्ड रहता है, जो जरूरत पड़ने पर आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।
अगर आपके साथ भी ऐसा हो तो क्या करें
1. तुरंत सबूत संभालें: जैसे ही दोहरी कटौती का संदेश आए, उसका स्क्रीनशॉट ले लें। टोल की रसीद, बैंक या वॉलेट का ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और यात्रा का समय नोट कर लें।
2. फास्टैग जारी करने वाले बैंक से शिकायत करें: हर फास्टैग किसी बैंक या भुगतान कंपनी द्वारा जारी किया जाता है। उसके ग्राहक सेवा नंबर या ऐप पर गलत कटौती की शिकायत दर्ज कराएं। कई मामलों में जांच के बाद पैसा अपने आप वापस आ जाता है।
3. राष्ट्रीय राजमार्ग हेल्पलाइन: राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ी शिकायतों के लिए हेल्पलाइन 1033 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
4. राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन: अगर समाधान न मिले, तो राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर शिकायत करें।
5. उपभोक्ता आयोग: इसके बाद भी न्याय न मिले, तो जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। अब ई-दाखिल पोर्टल के जरिये ऑनलाइन शिकायत करने की सुविधा भी उपलब्ध है।
फास्टैग इस्तेमाल करते समय सावधानियां
फास्टैग वाले खाते या वॉलेट में हमेशा पर्याप्त बैलेंस रखें।
फास्टैग का स्टिकर विंडशील्ड पर सही जगह और ठीक से लगा होना चाहिए, ताकि स्कैनर आसानी से पढ़ सके।
फास्टैग से जुड़े हर लेनदेन के एसएमएस अलर्ट चालू रखें।
एक वाहन पर एक से ज्यादा फास्टैग न रखें, इससे दोहरी कटौती का खतरा रहता है।
पुरानी गाड़ी बेचने पर उसका फास्टैग बंद कराना न भूलें।
समय-समय पर अपना फास्टैग स्टेटमेंट जांचते रहें।
छोटी रकम, बड़ा संदेश
बहुत से लोग सोचते हैं कि 50-100 रुपये के लिए इतनी मेहनत करना बेकार है। लेकिन इस मामले से साफ है कि उपभोक्ता कानून छोटी से छोटी गड़बड़ी को भी गंभीरता से लेता है। जब उपभोक्ता अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, तो कंपनियों और सेवा प्रदाताओं पर भी जवाबदेही का दबाव बढ़ता है। इससे पूरी व्यवस्था बेहतर होती है।
उपभोक्ता संरक्षण कानून क्या कहता है
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत हर उपभोक्ता को सही सेवा पाने, अनुचित व्यापार व्यवहार से सुरक्षा और शिकायत के निवारण का अधिकार है। सेवा में कमी साबित होने पर उपभोक्ता आयोग नुकसान की भरपाई के साथ मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च का मुआवजा भी दिला सकता है। जिला स्तर पर उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल है और कई मामलों में वकील की जरूरत भी नहीं होती।
कानपुर के वाहन चालकों के लिए
कानपुर से लखनऊ, आगरा, झांसी, प्रयागराज और दिल्ली की ओर जाने वाले हाईवे और एक्सप्रेसवे पर रोजाना हजारों वाहन टोल प्लाजा से गुजरते हैं। ऐसे में यह जानकारी शहर के वाहन चालकों के लिए भी बेहद उपयोगी है। अगर आपके साथ भी गलत कटौती हो, तो चुप न बैठें और सही माध्यम से शिकायत जरूर करें।
निष्कर्ष
पानीपत उपभोक्ता आयोग का यह फैसला हर फास्टैग उपयोगकर्ता के लिए एक सबक है। अपने डिजिटल लेनदेन का रिकॉर्ड संभालकर रखें और गलत कटौती होने पर अपने अधिकारों का इस्तेमाल करें। छोटी रकम भी आपकी मेहनत की कमाई है और उसे वापस पाना आपका हक है।
उपभोक्ता अधिकार और आपकी जेब से जुड़ी हर खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
फास्टैग से दो बार कटा टोल, उपभोक्ता आयोग ने दिलाया हर्जाना
हाईवे पर सफर करने वाले लगभग हर वाहन चालक के लिए फास्टैग अब रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। इससे टोल प्लाजा पर लंबी लाइन में लगने की परेशानी काफी हद तक खत्म हुई है। लेकिन कई बार तकनीकी गड़बड़ी या लापरवाही की वजह से एक ही यात्रा के लिए दो बार पैसे कट जाते हैं। ज्यादातर लोग छोटी रकम समझकर इसे नजरअंदाज कर देते हैं। हरियाणा के पानीपत से आया एक मामला बताता है कि अगर आप अपने अधिकारों के लिए खड़े हों, तो छोटी रकम के लिए भी न्याय और हर्जाना दोनों मिल सकते हैं।
क्या था पूरा मामला
जून 2023 में शिकायतकर्ता अपने परिवार के साथ गोहाना की ओर जा रहे थे। टोल प्लाजा पर कर्मचारी ने कहा कि उनके पेटीएम वॉलेट में पर्याप्त बैलेंस नहीं है और तय टोल 65 रुपये की जगह 130 रुपये की दोगुनी पेनल्टी फीस डिजिटल माध्यम से वसूल ली। शिकायतकर्ता ने इसका विरोध किया, क्योंकि उनके वॉलेट में पर्याप्त बैलेंस था। ठीक 5 मिनट बाद उनके मोबाइल पर संदेश आया कि पेटीएम फास्टैग वॉलेट से भी 65 रुपये कट गए हैं।
यानी एक ही यात्रा के लिए उनसे कुल 195 रुपये वसूल लिए गए, जबकि तय टोल केवल 65 रुपये था।
रिफंड मांगा तो मिला इनकार
पैसे दोबारा कटने की पुष्टि होते ही वाहन चालक ने टोल प्लाजा स्टाफ से संपर्क किया और अतिरिक्त राशि लौटाने का अनुरोध किया। आरोप है कि कर्मचारियों ने रिफंड देने से मना कर दिया और उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने टोल प्लाजा और संबंधित निर्माण कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा। जब वहां से भी कोई समाधान नहीं निकला, तो उन्होंने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप लगाते हुए पानीपत जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया।
टोल ऑपरेटर की दलील
आयोग के सामने टोल प्लाजा और निर्माण कंपनी ने सभी आरोपों से इनकार किया। उनका कहना था कि वाहन का फास्टैग ठीक से काम नहीं कर रहा था और स्कैन करने पर वॉलेट बैलेंस नहीं दिख रहा था। कंपनी ने यह भी दावा किया कि चालक ने खुद इस समस्या को स्वीकार किया था और उपभोक्ता आयोग आने से पहले रिफंड के लिए उनसे संपर्क नहीं किया था।
आयोग का फैसला
पानीपत उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष आर.के. डोगरा, सदस्य रेखा चौधरी और विनीत कौशिक की पीठ ने 29 सितंबर को फैसला सुनाया। आयोग ने शिकायतकर्ता द्वारा पेश पेटीएम ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और टोल रसीद की जांच की, जिससे साफ हुआ कि 5 मिनट के भीतर 65 रुपये की राशि दो बार काटी गई थी।
आयोग ने कहा कि गलत कटौती साबित होने के बाद अतिरिक्त राशि लौटाना टोल ऑपरेटर की जिम्मेदारी थी। साथ ही टोल ऑपरेटर को कई मौके दिए गए, लेकिन वह अपने पक्ष में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया। आयोग ने इसे सेवा में स्पष्ट लापरवाही माना और कुल 6,800 रुपये के भुगतान का आदेश दिया:
1,300 रुपये: काटी गई अतिरिक्त राशि और उससे जुड़े हर्जाने के रूप में।
5,500 रुपये: मानसिक उत्पीड़न, असुविधा और कानूनी खर्च के मुआवजे के रूप में।
सबूत ही सबसे बड़ी ताकत
इस मामले में शिकायतकर्ता की जीत की सबसे बड़ी वजह उनके पास मौजूद डिजिटल सबूत थे। पेटीएम का ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और टोल की रसीद ने साफ कर दिया कि पैसे दो बार कटे थे। डिजिटल भुगतान के दौर में हर लेनदेन का रिकॉर्ड रहता है, जो जरूरत पड़ने पर आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।
अगर आपके साथ भी ऐसा हो तो क्या करें
1. तुरंत सबूत संभालें: जैसे ही दोहरी कटौती का संदेश आए, उसका स्क्रीनशॉट ले लें। टोल की रसीद, बैंक या वॉलेट का ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और यात्रा का समय नोट कर लें।
2. फास्टैग जारी करने वाले बैंक से शिकायत करें: हर फास्टैग किसी बैंक या भुगतान कंपनी द्वारा जारी किया जाता है। उसके ग्राहक सेवा नंबर या ऐप पर गलत कटौती की शिकायत दर्ज कराएं। कई मामलों में जांच के बाद पैसा अपने आप वापस आ जाता है।
3. राष्ट्रीय राजमार्ग हेल्पलाइन: राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ी शिकायतों के लिए हेल्पलाइन 1033 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
4. राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन: अगर समाधान न मिले, तो राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर शिकायत करें।
5. उपभोक्ता आयोग: इसके बाद भी न्याय न मिले, तो जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। अब ई-दाखिल पोर्टल के जरिये ऑनलाइन शिकायत करने की सुविधा भी उपलब्ध है।
फास्टैग इस्तेमाल करते समय सावधानियां
फास्टैग वाले खाते या वॉलेट में हमेशा पर्याप्त बैलेंस रखें।
फास्टैग का स्टिकर विंडशील्ड पर सही जगह और ठीक से लगा होना चाहिए, ताकि स्कैनर आसानी से पढ़ सके।
फास्टैग से जुड़े हर लेनदेन के एसएमएस अलर्ट चालू रखें।
एक वाहन पर एक से ज्यादा फास्टैग न रखें, इससे दोहरी कटौती का खतरा रहता है।
पुरानी गाड़ी बेचने पर उसका फास्टैग बंद कराना न भूलें।
समय-समय पर अपना फास्टैग स्टेटमेंट जांचते रहें।
छोटी रकम, बड़ा संदेश
बहुत से लोग सोचते हैं कि 50-100 रुपये के लिए इतनी मेहनत करना बेकार है। लेकिन इस मामले से साफ है कि उपभोक्ता कानून छोटी से छोटी गड़बड़ी को भी गंभीरता से लेता है। जब उपभोक्ता अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, तो कंपनियों और सेवा प्रदाताओं पर भी जवाबदेही का दबाव बढ़ता है। इससे पूरी व्यवस्था बेहतर होती है।
उपभोक्ता संरक्षण कानून क्या कहता है
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत हर उपभोक्ता को सही सेवा पाने, अनुचित व्यापार व्यवहार से सुरक्षा और शिकायत के निवारण का अधिकार है। सेवा में कमी साबित होने पर उपभोक्ता आयोग नुकसान की भरपाई के साथ मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च का मुआवजा भी दिला सकता है। जिला स्तर पर उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल है और कई मामलों में वकील की जरूरत भी नहीं होती।
कानपुर के वाहन चालकों के लिए
कानपुर से लखनऊ, आगरा, झांसी, प्रयागराज और दिल्ली की ओर जाने वाले हाईवे और एक्सप्रेसवे पर रोजाना हजारों वाहन टोल प्लाजा से गुजरते हैं। ऐसे में यह जानकारी शहर के वाहन चालकों के लिए भी बेहद उपयोगी है। अगर आपके साथ भी गलत कटौती हो, तो चुप न बैठें और सही माध्यम से शिकायत जरूर करें।
निष्कर्ष
पानीपत उपभोक्ता आयोग का यह फैसला हर फास्टैग उपयोगकर्ता के लिए एक सबक है। अपने डिजिटल लेनदेन का रिकॉर्ड संभालकर रखें और गलत कटौती होने पर अपने अधिकारों का इस्तेमाल करें। छोटी रकम भी आपकी मेहनत की कमाई है और उसे वापस पाना आपका हक है।
उपभोक्ता अधिकार और आपकी जेब से जुड़ी हर खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
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