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भारत-कनाडा व्यापार समझौते की ओर बड़ा कदम: ओटावा में पांचवें दौर की वार्ता शुरू, 2026 के अंत तक

India-Canada CEPA: Fifth round of trade talks begins in Ottawa,

Kanpur Live News Desk ·

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भारत-कनाडा व्यापार समझौते की ओर बड़ा कदम: ओटावा में पांचवें दौर की वार्ता शुरू, 2026 के अंत तक
भारत और कनाडा के आर्थिक रिश्तों में एक नया अध्याय लिखे जाने की तैयारी है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी सीईपीए को लेकर पांचवें दौर की बातचीत सोमवार से कनाडा की राजधानी ओटावा में शुरू हो रही है। दोनों सरकारों ने इस साल के अंत तक इस व्यापार समझौते को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। कुछ समय पहले तक जिन दो देशों के रिश्तों में तनाव की चर्चा होती थी, वे अब व्यापार, ऊर्जा और निवेश के क्षेत्र में तेजी से करीब आते दिख रहे हैं। यह वार्ता न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था, बल्कि कनाडा में बसे लाखों भारतीयों के लिए भी अहम मानी जा रही है। पांच दिन चलेगी बातचीत सीईपीए पर पांचवें दौर की वार्ता सोमवार से ओटावा में शुरू होगी और पांच दिनों तक यानी 9 अक्टूबर तक चलेगी। इसमें दोनों देशों के मुख्य वार्ताकार हिस्सा लेंगे। इससे पहले वार्ता का चौथा दौर 18 सितंबर को नई दिल्ली में समाप्त हुआ था। अब दोनों पक्ष अंतिम समझौते की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने पर जोर दे रहे हैं। चौथे और पांचवें दौर के बीच तीन हफ्ते से भी कम का अंतर होना बताता है कि दोनों देश इस समझौते को लेकर कितनी गंभीरता से काम कर रहे हैं। सीईपीए क्या है व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानी कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट एक तरह का व्यापक व्यापार समझौता होता है। इसमें केवल वस्तुओं के आयात-निर्यात पर शुल्क घटाने की बात ही नहीं होती, बल्कि सेवाओं, निवेश, बौद्धिक संपदा, सरकारी खरीद, पेशेवरों की आवाजाही और नियमों में तालमेल जैसे कई विषय भी शामिल होते हैं। सरल शब्दों में कहें तो सीईपीए दो देशों के बीच कारोबार को आसान, सस्ता और तेज बनाने का एक व्यापक ढांचा है। भारत इससे पहले संयुक्त अरब अमीरात समेत कुछ देशों के साथ ऐसे समझौते कर चुका है। दिसंबर में कनाडा जा सकते हैं पीएम मोदी व्यापार वार्ता को ऐसे समय में गति मिली है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसंबर के आसपास कनाडा जाने की संभावना है। दोनों देश इसी दौरान अंतिम व्यापार समझौते को पूरा करने की योजना बना रहे हैं। इससे पहले कनाडा के व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू इस महीने के आखिर में 300 सदस्यों वाले कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ नई दिल्ली आने वाले हैं। 300 सदस्यीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल का आना यह दर्शाता है कि कनाडा का उद्योग जगत भारत में निवेश और कारोबार के अवसरों को लेकर उत्साहित है। मार्च में तय हुआ था लक्ष्य मार्च में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई बैठक में दोनों नेताओं ने सीईपीए वार्ता को साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया था। दोनों देशों ने ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई थी। प्रधानमंत्री कार्नी की भारत यात्रा को दोनों देशों के राजनयिक रिश्तों में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया। पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान दोनों देशों के संबंधों में काफी तनाव देखा गया था। अब नई सरकार के साथ रिश्ते पटरी पर लौटते दिख रहे हैं। 2030 तक 70 अरब कनाडाई डॉलर का लक्ष्य दोनों नेताओं ने कहा था कि व्यापक व्यापार ढांचा भारत और कनाडा की साझेदारी के लिए लंबे समय तक टिकाऊ आर्थिक आधार तैयार कर सकता है। इससे 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर यानी करीब 4.65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने के साझा लक्ष्य को समर्थन मिलेगा। अभी कितना है व्यापार 2024-25 में भारत और कनाडा के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 8.66 अरब डॉलर रहा। इसमें कनाडा को भारत का निर्यात 4.22 अरब डॉलर का रहा। इन आंकड़ों से साफ है कि मौजूदा व्यापार और 2030 के लक्ष्य के बीच बड़ा अंतर है। यही वजह है कि दोनों देश सीईपीए को व्यापार बढ़ाने का सबसे अहम जरिया मान रहे हैं। समझौता होने के बाद शुल्क घटने और नियम आसान होने से व्यापार में तेज बढ़ोतरी की उम्मीद है। भारत कनाडा को क्या बेचता है भारत से कनाडा को निर्यात होने वाली प्रमुख वस्तुओं में ये शामिल हैं: दवा उत्पाद मशीनरी के पुर्जे और यांत्रिक उपकरण लोहे और इस्पात से बनी वस्तुएं इलेक्ट्रॉनिक सामान जैविक रसायन आभूषण, रत्न और कीमती पत्थर कपड़े और वस्त्र समुद्री खाद्य उत्पाद इंजीनियरिंग सामान और ऑटो पार्ट्स सेवा क्षेत्र में भारत का आईटी सेक्टर कनाडा को होने वाले सेवा निर्यात में सबसे बड़ा योगदान देता है। कनाडा से भारत क्या खरीदता है कनाडा से भारत आने वाली प्रमुख वस्तुओं में दलहन, उर्वरक, खनिज ईंधन, लकड़ी का गूदा, रत्न और कीमती पत्थर, विमान के पुर्जे, मशीनरी के हिस्से तथा लोहे और एल्युमीनियम का स्क्रैप शामिल हैं। भारत दुनिया में दालों के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है और कनाडा दाल, खासकर मसूर और मटर का बड़ा उत्पादक और निर्यातक है। इसी तरह भारत की कृषि के लिए जरूरी उर्वरकों में पोटाश का बड़ा हिस्सा कनाडा से आता है। इसलिए कनाडा के साथ व्यापार भारत की खाद्य और कृषि सुरक्षा से भी जुड़ा है। ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज: भविष्य की साझेदारी दोनों देशों ने ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। महत्वपूर्ण खनिज यानी क्रिटिकल मिनरल्स वे खनिज हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी, सोलर पैनल, सेमीकंडक्टर और आधुनिक तकनीकों के लिए जरूरी होते हैं। लिथियम, कोबाल्ट, निकल और दुर्लभ मृदा तत्व इसके उदाहरण हैं। कनाडा इन खनिजों के मामले में समृद्ध देश है, जबकि भारत तेजी से इलेक्ट्रिक वाहन और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में यह साझेदारी भारत की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है। कनाडा यूरेनियम का भी बड़ा उत्पादक है, जो परमाणु ऊर्जा के लिए जरूरी है। कनाडा में भारतीय समुदाय कनाडा में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी रहती है। हर साल बड़ी संख्या में भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए कनाडा जाते हैं। पंजाब, गुजरात, हरियाणा के अलावा उत्तर प्रदेश से भी कई छात्र और पेशेवर कनाडा में पढ़ाई और नौकरी कर रहे हैं। दोनों देशों के रिश्ते सुधरने और व्यापार समझौता होने से छात्रों, पेशेवरों और कारोबारियों के लिए आवाजाही आसान होने की उम्मीद है। कनाडा के व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू खुद भारतीय मूल के हैं, जो दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है। कानपुर के उद्योगों के लिए क्या मायने कानपुर एक बड़ा औद्योगिक केंद्र है, जहां चमड़ा, कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान, रसायन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे उद्योग चलते हैं। भारत के निर्यात की सूची में शामिल कपड़े, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पार्ट्स और रसायन जैसे उत्पाद कानपुर के उद्योगों से भी जुड़े हैं। अगर सीईपीए के तहत इन उत्पादों पर शुल्क घटता है, तो कानपुर के निर्यातकों के लिए कनाडा का बाजार और आकर्षक बन सकता है। चमड़ा उद्योग, जो कानपुर की पहचान है, उसके लिए भी उत्तरी अमेरिका का बाजार अहम है। निर्यातकों के लिए सुझाव: सीईपीए वार्ता की प्रगति पर नजर रखें और अपने उत्पाद से जुड़े शुल्क बदलावों की जानकारी लेते रहें। निर्यात संवर्धन परिषदों और उद्योग संगठनों के माध्यम से कनाडाई बाजार की जरूरतों को समझें। गुणवत्ता मानकों और प्रमाणपत्रों की तैयारी पहले से रखें, ताकि समझौते के बाद तुरंत अवसर का लाभ उठाया जा सके। कनाडाई कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के दौरों और व्यापार मेलों में भागीदारी के मौके तलाशें। आम उपभोक्ताओं पर क्या असर व्यापार समझौतों का असर आखिरकार आम उपभोक्ताओं तक भी पहुंचता है। अगर कनाडा से आने वाली दालों और कुछ अन्य वस्तुओं पर शुल्क घटता है, तो बाजार में उनकी आपूर्ति बेहतर हो सकती है और कीमतों में स्थिरता आ सकती है। इसी तरह भारतीय उत्पाद कनाडा में सस्ते होने से भारतीय कंपनियों की बिक्री बढ़ेगी, जिससे देश में उत्पादन और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। हालांकि समझौते के अंतिम प्रावधान सामने आने के बाद ही इसके असर का सटीक आकलन किया जा सकेगा। व्यापार समझौतों में चुनौतियां भी किसी भी व्यापार समझौते में दोनों पक्षों को अपने-अपने हितों की रक्षा करनी होती है। कृषि, डेयरी, बौद्धिक संपदा, डेटा सुरक्षा और पेशेवरों की आवाजाही जैसे मुद्दों पर अक्सर लंबी बातचीत होती है। हर देश अपने संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखना चाहता है। यही वजह है कि ऐसे समझौतों में कई दौर की वार्ता होती है। हालांकि दोनों देशों के बीच बनी राजनीतिक इच्छाशक्ति को देखते हुए जानकार इस समझौते के समय पर पूरा होने की उम्मीद जता रहे हैं। वैश्विक परिदृश्य में भारत की व्यापार नीति हाल के वर्षों में भारत ने कई देशों के साथ व्यापार समझौतों की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। बदलते वैश्विक हालात, आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव और नए बाजारों की तलाश के बीच भारत अपने निर्यात को बढ़ाने और विविध बाजारों तक पहुंच बनाने पर जोर दे रहा है। कनाडा के साथ सीईपीए इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिससे भारत को उत्तरी अमेरिका के एक विकसित बाजार में बेहतर पहुंच मिल सकती है। निष्कर्ष भारत-कनाडा सीईपीए पर पांचवें दौर की वार्ता दोनों देशों के रिश्तों में आई नई गर्माहट का संकेत है। अगर साल के अंत तक यह समझौता पूरा होता है, तो इससे व्यापार, निवेश, ऊर्जा सहयोग और लोगों के आपसी संपर्क को नई ऊंचाई मिल सकती है। भारतीय उद्योगों, निर्यातकों और कनाडा में बसे भारतीयों के लिए यह एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है। देश-दुनिया की हर बड़ी खबर और कारोबार से जुड़ी अपडेट के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।

भारत-कनाडा व्यापार समझौते की ओर बड़ा कदम: ओटावा में पांचवें दौर की वार्ता शुरू, 2026 के अंत तक

भारत और कनाडा के आर्थिक रिश्तों में एक नया अध्याय लिखे जाने की तैयारी है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी सीईपीए को लेकर पांचवें दौर की बातचीत सोमवार से कनाडा की राजधानी ओटावा में शुरू हो रही है। दोनों सरकारों ने इस साल के अंत तक इस व्यापार समझौते को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। कुछ समय पहले तक जिन दो देशों के रिश्तों में तनाव की चर्चा होती थी, वे अब व्यापार, ऊर्जा और निवेश के क्षेत्र में तेजी से करीब आते दिख रहे हैं। यह वार्ता न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था, बल्कि कनाडा में बसे लाखों भारतीयों के लिए भी अहम मानी जा रही है। पांच दिन चलेगी बातचीत सीईपीए पर पांचवें दौर की वार्ता सोमवार से ओटावा में शुरू होगी और पांच दिनों तक यानी 9 अक्टूबर तक चलेगी। इसमें दोनों देशों के मुख्य वार्ताकार हिस्सा लेंगे। इससे पहले वार्ता का चौथा दौर 18 सितंबर को नई दिल्ली में समाप्त हुआ था। अब दोनों पक्ष अंतिम समझौते की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने पर जोर दे रहे हैं। चौथे और पांचवें दौर के बीच तीन हफ्ते से भी कम का अंतर होना बताता है कि दोनों देश इस समझौते को लेकर कितनी गंभीरता से काम कर रहे हैं। सीईपीए क्या है व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानी कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट एक तरह का व्यापक व्यापार समझौता होता है। इसमें केवल वस्तुओं के आयात-निर्यात पर शुल्क घटाने की बात ही नहीं होती, बल्कि सेवाओं, निवेश, बौद्धिक संपदा, सरकारी खरीद, पेशेवरों की आवाजाही और नियमों में तालमेल जैसे कई विषय भी शामिल होते हैं। सरल शब्दों में कहें तो सीईपीए दो देशों के बीच कारोबार को आसान, सस्ता और तेज बनाने का एक व्यापक ढांचा है। भारत इससे पहले संयुक्त अरब अमीरात समेत कुछ देशों के साथ ऐसे समझौते कर चुका है। दिसंबर में कनाडा जा सकते हैं पीएम मोदी व्यापार वार्ता को ऐसे समय में गति मिली है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसंबर के आसपास कनाडा जाने की संभावना है। दोनों देश इसी दौरान अंतिम व्यापार समझौते को पूरा करने की योजना बना रहे हैं। इससे पहले कनाडा के व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू इस महीने के आखिर में 300 सदस्यों वाले कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ नई दिल्ली आने वाले हैं। 300 सदस्यीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल का आना यह दर्शाता है कि कनाडा का उद्योग जगत भारत में निवेश और कारोबार के अवसरों को लेकर उत्साहित है। मार्च में तय हुआ था लक्ष्य मार्च में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई बैठक में दोनों नेताओं ने सीईपीए वार्ता को साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया था। दोनों देशों ने ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई थी। प्रधानमंत्री कार्नी की भारत यात्रा को दोनों देशों के राजनयिक रिश्तों में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया। पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान दोनों देशों के संबंधों में काफी तनाव देखा गया था। अब नई सरकार के साथ रिश्ते पटरी पर लौटते दिख रहे हैं। 2030 तक 70 अरब कनाडाई डॉलर का लक्ष्य दोनों नेताओं ने कहा था कि व्यापक व्यापार ढांचा भारत और कनाडा की साझेदारी के लिए लंबे समय तक टिकाऊ आर्थिक आधार तैयार कर सकता है। इससे 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर यानी करीब 4.65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने के साझा लक्ष्य को समर्थन मिलेगा। अभी कितना है व्यापार 2024-25 में भारत और कनाडा के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 8.66 अरब डॉलर रहा। इसमें कनाडा को भारत का निर्यात 4.22 अरब डॉलर का रहा। इन आंकड़ों से साफ है कि मौजूदा व्यापार और 2030 के लक्ष्य के बीच बड़ा अंतर है। यही वजह है कि दोनों देश सीईपीए को व्यापार बढ़ाने का सबसे अहम जरिया मान रहे हैं। समझौता होने के बाद शुल्क घटने और नियम आसान होने से व्यापार में तेज बढ़ोतरी की उम्मीद है। भारत कनाडा को क्या बेचता है भारत से कनाडा को निर्यात होने वाली प्रमुख वस्तुओं में ये शामिल हैं: दवा उत्पाद मशीनरी के पुर्जे और यांत्रिक उपकरण लोहे और इस्पात से बनी वस्तुएं इलेक्ट्रॉनिक सामान जैविक रसायन आभूषण, रत्न और कीमती पत्थर कपड़े और वस्त्र समुद्री खाद्य उत्पाद इंजीनियरिंग सामान और ऑटो पार्ट्स सेवा क्षेत्र में भारत का आईटी सेक्टर कनाडा को होने वाले सेवा निर्यात में सबसे बड़ा योगदान देता है। कनाडा से भारत क्या खरीदता है कनाडा से भारत आने वाली प्रमुख वस्तुओं में दलहन, उर्वरक, खनिज ईंधन, लकड़ी का गूदा, रत्न और कीमती पत्थर, विमान के पुर्जे, मशीनरी के हिस्से तथा लोहे और एल्युमीनियम का स्क्रैप शामिल हैं। भारत दुनिया में दालों के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है और कनाडा दाल, खासकर मसूर और मटर का बड़ा उत्पादक और निर्यातक है। इसी तरह भारत की कृषि के लिए जरूरी उर्वरकों में पोटाश का बड़ा हिस्सा कनाडा से आता है। इसलिए कनाडा के साथ व्यापार भारत की खाद्य और कृषि सुरक्षा से भी जुड़ा है। ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज: भविष्य की साझेदारी दोनों देशों ने ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। महत्वपूर्ण खनिज यानी क्रिटिकल मिनरल्स वे खनिज हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी, सोलर पैनल, सेमीकंडक्टर और आधुनिक तकनीकों के लिए जरूरी होते हैं। लिथियम, कोबाल्ट, निकल और दुर्लभ मृदा तत्व इसके उदाहरण हैं। कनाडा इन खनिजों के मामले में समृद्ध देश है, जबकि भारत तेजी से इलेक्ट्रिक वाहन और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में यह साझेदारी भारत की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है। कनाडा यूरेनियम का भी बड़ा उत्पादक है, जो परमाणु ऊर्जा के लिए जरूरी है। कनाडा में भारतीय समुदाय कनाडा में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी रहती है। हर साल बड़ी संख्या में भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए कनाडा जाते हैं। पंजाब, गुजरात, हरियाणा के अलावा उत्तर प्रदेश से भी कई छात्र और पेशेवर कनाडा में पढ़ाई और नौकरी कर रहे हैं। दोनों देशों के रिश्ते सुधरने और व्यापार समझौता होने से छात्रों, पेशेवरों और कारोबारियों के लिए आवाजाही आसान होने की उम्मीद है। कनाडा के व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू खुद भारतीय मूल के हैं, जो दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है। कानपुर के उद्योगों के लिए क्या मायने कानपुर एक बड़ा औद्योगिक केंद्र है, जहां चमड़ा, कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान, रसायन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे उद्योग चलते हैं। भारत के निर्यात की सूची में शामिल कपड़े, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पार्ट्स और रसायन जैसे उत्पाद कानपुर के उद्योगों से भी जुड़े हैं। अगर सीईपीए के तहत इन उत्पादों पर शुल्क घटता है, तो कानपुर के निर्यातकों के लिए कनाडा का बाजार और आकर्षक बन सकता है। चमड़ा उद्योग, जो कानपुर की पहचान है, उसके लिए भी उत्तरी अमेरिका का बाजार अहम है। निर्यातकों के लिए सुझाव: सीईपीए वार्ता की प्रगति पर नजर रखें और अपने उत्पाद से जुड़े शुल्क बदलावों की जानकारी लेते रहें। निर्यात संवर्धन परिषदों और उद्योग संगठनों के माध्यम से कनाडाई बाजार की जरूरतों को समझें। गुणवत्ता मानकों और प्रमाणपत्रों की तैयारी पहले से रखें, ताकि समझौते के बाद तुरंत अवसर का लाभ उठाया जा सके। कनाडाई कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के दौरों और व्यापार मेलों में भागीदारी के मौके तलाशें। आम उपभोक्ताओं पर क्या असर व्यापार समझौतों का असर आखिरकार आम उपभोक्ताओं तक भी पहुंचता है। अगर कनाडा से आने वाली दालों और कुछ अन्य वस्तुओं पर शुल्क घटता है, तो बाजार में उनकी आपूर्ति बेहतर हो सकती है और कीमतों में स्थिरता आ सकती है। इसी तरह भारतीय उत्पाद कनाडा में सस्ते होने से भारतीय कंपनियों की बिक्री बढ़ेगी, जिससे देश में उत्पादन और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। हालांकि समझौते के अंतिम प्रावधान सामने आने के बाद ही इसके असर का सटीक आकलन किया जा सकेगा। व्यापार समझौतों में चुनौतियां भी किसी भी व्यापार समझौते में दोनों पक्षों को अपने-अपने हितों की रक्षा करनी होती है। कृषि, डेयरी, बौद्धिक संपदा, डेटा सुरक्षा और पेशेवरों की आवाजाही जैसे मुद्दों पर अक्सर लंबी बातचीत होती है। हर देश अपने संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखना चाहता है। यही वजह है कि ऐसे समझौतों में कई दौर की वार्ता होती है। हालांकि दोनों देशों के बीच बनी राजनीतिक इच्छाशक्ति को देखते हुए जानकार इस समझौते के समय पर पूरा होने की उम्मीद जता रहे हैं। वैश्विक परिदृश्य में भारत की व्यापार नीति हाल के वर्षों में भारत ने कई देशों के साथ व्यापार समझौतों की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। बदलते वैश्विक हालात, आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव और नए बाजारों की तलाश के बीच भारत अपने निर्यात को बढ़ाने और विविध बाजारों तक पहुंच बनाने पर जोर दे रहा है। कनाडा के साथ सीईपीए इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिससे भारत को उत्तरी अमेरिका के एक विकसित बाजार में बेहतर पहुंच मिल सकती है। निष्कर्ष भारत-कनाडा सीईपीए पर पांचवें दौर की वार्ता दोनों देशों के रिश्तों में आई नई गर्माहट का संकेत है। अगर साल के अंत तक यह समझौता पूरा होता है, तो इससे व्यापार, निवेश, ऊर्जा सहयोग और लोगों के आपसी संपर्क को नई ऊंचाई मिल सकती है। भारतीय उद्योगों, निर्यातकों और कनाडा में बसे भारतीयों के लिए यह एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है। देश-दुनिया की हर बड़ी खबर और कारोबार से जुड़ी अपडेट के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।

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