कानपुर देहात में 11 अक्टूबर तक आंधी-बिजली का अलर्ट
Thunderstorm and lightning alert for Kanpur Dehat till October 11, winds up to 50 km/h
Kanpur Live News Desk ·

मानसून की विदाई के बाद भी मौसम का मिजाज पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के लखनऊ केंद्र ने कानपुर देहात जिले के लिए 7 से 11 अक्टूबर तक गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार इस दौरान हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। चेतावनी को देखते हुए जिला प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। कानपुर नगर के लोगों को भी मौसम पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि पड़ोसी जिलों का मौसम अक्सर एक साथ बदलता है।
प्रशासन की अपील
अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) दुष्यंत कुमार मौर्य ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आकाशीय बिजली और बेमौसम बारिश से बचाव के लिए पहले से तैयारी ही सबसे अच्छा उपाय है। प्रशासन ने लोगों को मौसम और बिजली की समय पर जानकारी के लिए "सचेत" और "दामिनी" मोबाइल ऐप डाउनलोड करने की सलाह दी है।
आपातकालीन संपर्क:
जिले का 24 घंटे चलने वाला टोल फ्री नंबर: 1077
मोबाइल नंबर: 9044070030 और 9454416429
किसी भी आपात स्थिति में लोग इन नंबरों पर संपर्क कर मदद ले सकते हैं।
सचेत और दामिनी ऐप क्या हैं
दामिनी ऐप: यह ऐप भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे ने विकसित किया है। यह आपके आसपास आकाशीय बिजली गिरने की आशंका के बारे में पहले से सूचना देता है। ऐप मोबाइल की लोकेशन के आधार पर बताता है कि आपके इलाके में कितनी दूरी पर बिजली गिरने का खतरा है।
सचेत ऐप: यह राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) का ऐप है। इसमें मौसम, बाढ़, आंधी और दूसरी आपदाओं से जुड़ी सरकारी चेतावनियां स्थानीय भाषा में मिलती हैं।
दोनों ऐप गूगल प्ले स्टोर और ऐपल ऐप स्टोर पर मुफ्त में उपलब्ध हैं। ग्रामीण इलाकों में खेतों में काम करने वाले लोगों के लिए ये ऐप खास तौर पर उपयोगी हैं।
आकाशीय बिजली सबसे बड़ा खतरा
उत्तर प्रदेश में हर साल आकाशीय बिजली गिरने से बड़ी संख्या में लोगों की जान जाती है। सबसे ज्यादा प्रभावित ग्रामीण इलाकों के किसान, मजदूर और पशुपालक होते हैं, जो खुले खेतों में काम करते हैं। आंधी के दौरान पेड़ गिरने, बिजली के खंभे और तार टूटने और कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचने का भी खतरा रहता है।
बिजली कड़कने पर क्या करें
घर के अंदर रहें: गरज सुनाई दे, तो तुरंत किसी पक्के मकान में चले जाएं।
पेड़ के नीचे न खड़े हों: प्रशासन ने खास तौर पर कहा है कि आंधी या बिजली के समय पेड़ के नीचे शरण न लें।
खुले मैदान में हों तो: दोनों पैर मिलाकर, सिर झुकाकर उकड़ूं बैठ जाएं। जमीन पर लेटें नहीं।
पानी से दूर रहें: तालाब, नदी और पानी भरे खेतों से दूर रहें।
धातु से दूरी: लोहे के खंभे, बिजली के तार, टावर और धातु की बाड़ से दूर रहें।
बिजली के उपकरण: टीवी, फ्रिज और दूसरे उपकरणों के प्लग निकाल दें।
समूह में न खड़े हों: खुले में लोग एक साथ झुंड बनाकर न खड़े हों।
वाहन में हों तो: बंद गाड़ी के अंदर रहें, खिड़कियां बंद रखें।
तेज हवा से कैसे बचें
40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की हवा कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंचा सकती है।
छत पर रखे ढीले सामान, टीन की चादरें और गमले सुरक्षित कर लें।
कच्चे या जर्जर मकानों में रहने वाले लोग आंधी के समय किसी सुरक्षित पक्के भवन में चले जाएं।
होर्डिंग, पुरानी दीवारों और कमजोर पेड़ों के पास वाहन खड़ा न करें।
दोपहिया वाहन चलाते समय सावधानी रखें, तेज हवा में संतुलन बिगड़ सकता है।
किसानों के लिए सलाह
अक्टूबर का महीना खेती के लिहाज से अहम है। इस समय धान की फसल पककर कटाई के लिए तैयार हो रही है और कई किसान रबी की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में बेमौसम बारिश और तेज हवा फसल को नुकसान पहुंचा सकती है।
कटी हुई फसल को खुले में न छोड़ें, उसे सुरक्षित और ढकी जगह पर रखें।
मौसम साफ होने तक कटाई टालना बेहतर हो सकता है, जहां संभव हो।
खेत में पानी निकासी की व्यवस्था ठीक रखें, ताकि बारिश का पानी जमा न हो।
कीटनाशक या खाद का छिड़काव बारिश की आशंका वाले दिनों में न करें, वरना दवा बह जाएगी।
पशुओं को पेड़ों के नीचे या खुले में न बांधें, उन्हें सुरक्षित बाड़े में रखें।
फसल बीमा कराया है, तो नुकसान होने पर तय समय में बीमा कंपनी या कृषि विभाग को सूचना दें।
मौसम में बदलाव क्यों
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की वापसी के बाद के दिनों में वातावरण में नमी बनी रहती है। दिन में तापमान बढ़ने से स्थानीय स्तर पर बादल बनते हैं, जिससे गरज-चमक और तेज हवा के साथ छिटपुट बारिश हो सकती है। ऐसे स्थानीय तूफान अक्सर अचानक आते हैं और कम समय में काफी नुकसान कर सकते हैं। इसलिए इन दिनों में मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेना जरूरी है।
कानपुर नगर पर भी नजर रखें
कानपुर नगर और कानपुर देहात एक-दूसरे से सटे जिले हैं। शहर के लोगों को भी मौसम विभाग के ताजा अपडेट पर नजर रखनी चाहिए। बिजली कड़कने के दौरान छत पर जाने, खुले पार्क में रहने या ऊंची इमारतों की छत पर मोबाइल इस्तेमाल करने से बचें। स्कूल जाने वाले बच्चों के अभिभावक भी मौसम के हिसाब से तैयारी रखें।
बिजली गिरने पर प्राथमिक उपचार
अगर किसी व्यक्ति पर बिजली गिर जाए, तो उसे छूने से डरें नहीं। बिजली गिरने के बाद शरीर में करंट नहीं रहता। तुरंत एंबुलेंस के लिए 108 या 112 पर कॉल करें। अगर व्यक्ति की सांस नहीं चल रही, तो प्रशिक्षित व्यक्ति सीपीआर दे सकता है। जलने के घावों को साफ कपड़े से ढकें और व्यक्ति को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाएं।
निष्कर्ष
कानपुर देहात में 11 अक्टूबर तक मौसम बिगड़ने की आशंका है। सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। सचेत और दामिनी ऐप डाउनलोड करें, बिजली कड़कने पर पक्के मकान में रहें, पेड़ों के नीचे शरण न लें और किसी भी आपात स्थिति में 1077 पर संपर्क करें। किसान अपनी कटी फसल और पशुओं को सुरक्षित रखें।
मौसम और आपकी सुरक्षा से जुड़ी हर अपडेट के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
कानपुर देहात में 11 अक्टूबर तक आंधी-बिजली का अलर्ट
मानसून की विदाई के बाद भी मौसम का मिजाज पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के लखनऊ केंद्र ने कानपुर देहात जिले के लिए 7 से 11 अक्टूबर तक गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार इस दौरान हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। चेतावनी को देखते हुए जिला प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। कानपुर नगर के लोगों को भी मौसम पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि पड़ोसी जिलों का मौसम अक्सर एक साथ बदलता है।
प्रशासन की अपील
अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) दुष्यंत कुमार मौर्य ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आकाशीय बिजली और बेमौसम बारिश से बचाव के लिए पहले से तैयारी ही सबसे अच्छा उपाय है। प्रशासन ने लोगों को मौसम और बिजली की समय पर जानकारी के लिए "सचेत" और "दामिनी" मोबाइल ऐप डाउनलोड करने की सलाह दी है।
आपातकालीन संपर्क:
जिले का 24 घंटे चलने वाला टोल फ्री नंबर: 1077
मोबाइल नंबर: 9044070030 और 9454416429
किसी भी आपात स्थिति में लोग इन नंबरों पर संपर्क कर मदद ले सकते हैं।
सचेत और दामिनी ऐप क्या हैं
दामिनी ऐप: यह ऐप भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे ने विकसित किया है। यह आपके आसपास आकाशीय बिजली गिरने की आशंका के बारे में पहले से सूचना देता है। ऐप मोबाइल की लोकेशन के आधार पर बताता है कि आपके इलाके में कितनी दूरी पर बिजली गिरने का खतरा है।
सचेत ऐप: यह राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) का ऐप है। इसमें मौसम, बाढ़, आंधी और दूसरी आपदाओं से जुड़ी सरकारी चेतावनियां स्थानीय भाषा में मिलती हैं।
दोनों ऐप गूगल प्ले स्टोर और ऐपल ऐप स्टोर पर मुफ्त में उपलब्ध हैं। ग्रामीण इलाकों में खेतों में काम करने वाले लोगों के लिए ये ऐप खास तौर पर उपयोगी हैं।
आकाशीय बिजली सबसे बड़ा खतरा
उत्तर प्रदेश में हर साल आकाशीय बिजली गिरने से बड़ी संख्या में लोगों की जान जाती है। सबसे ज्यादा प्रभावित ग्रामीण इलाकों के किसान, मजदूर और पशुपालक होते हैं, जो खुले खेतों में काम करते हैं। आंधी के दौरान पेड़ गिरने, बिजली के खंभे और तार टूटने और कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचने का भी खतरा रहता है।
बिजली कड़कने पर क्या करें
घर के अंदर रहें: गरज सुनाई दे, तो तुरंत किसी पक्के मकान में चले जाएं।
पेड़ के नीचे न खड़े हों: प्रशासन ने खास तौर पर कहा है कि आंधी या बिजली के समय पेड़ के नीचे शरण न लें।
खुले मैदान में हों तो: दोनों पैर मिलाकर, सिर झुकाकर उकड़ूं बैठ जाएं। जमीन पर लेटें नहीं।
पानी से दूर रहें: तालाब, नदी और पानी भरे खेतों से दूर रहें।
धातु से दूरी: लोहे के खंभे, बिजली के तार, टावर और धातु की बाड़ से दूर रहें।
बिजली के उपकरण: टीवी, फ्रिज और दूसरे उपकरणों के प्लग निकाल दें।
समूह में न खड़े हों: खुले में लोग एक साथ झुंड बनाकर न खड़े हों।
वाहन में हों तो: बंद गाड़ी के अंदर रहें, खिड़कियां बंद रखें।
तेज हवा से कैसे बचें
40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की हवा कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंचा सकती है।
छत पर रखे ढीले सामान, टीन की चादरें और गमले सुरक्षित कर लें।
कच्चे या जर्जर मकानों में रहने वाले लोग आंधी के समय किसी सुरक्षित पक्के भवन में चले जाएं।
होर्डिंग, पुरानी दीवारों और कमजोर पेड़ों के पास वाहन खड़ा न करें।
दोपहिया वाहन चलाते समय सावधानी रखें, तेज हवा में संतुलन बिगड़ सकता है।
किसानों के लिए सलाह
अक्टूबर का महीना खेती के लिहाज से अहम है। इस समय धान की फसल पककर कटाई के लिए तैयार हो रही है और कई किसान रबी की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में बेमौसम बारिश और तेज हवा फसल को नुकसान पहुंचा सकती है।
कटी हुई फसल को खुले में न छोड़ें, उसे सुरक्षित और ढकी जगह पर रखें।
मौसम साफ होने तक कटाई टालना बेहतर हो सकता है, जहां संभव हो।
खेत में पानी निकासी की व्यवस्था ठीक रखें, ताकि बारिश का पानी जमा न हो।
कीटनाशक या खाद का छिड़काव बारिश की आशंका वाले दिनों में न करें, वरना दवा बह जाएगी।
पशुओं को पेड़ों के नीचे या खुले में न बांधें, उन्हें सुरक्षित बाड़े में रखें।
फसल बीमा कराया है, तो नुकसान होने पर तय समय में बीमा कंपनी या कृषि विभाग को सूचना दें।
मौसम में बदलाव क्यों
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की वापसी के बाद के दिनों में वातावरण में नमी बनी रहती है। दिन में तापमान बढ़ने से स्थानीय स्तर पर बादल बनते हैं, जिससे गरज-चमक और तेज हवा के साथ छिटपुट बारिश हो सकती है। ऐसे स्थानीय तूफान अक्सर अचानक आते हैं और कम समय में काफी नुकसान कर सकते हैं। इसलिए इन दिनों में मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेना जरूरी है।
कानपुर नगर पर भी नजर रखें
कानपुर नगर और कानपुर देहात एक-दूसरे से सटे जिले हैं। शहर के लोगों को भी मौसम विभाग के ताजा अपडेट पर नजर रखनी चाहिए। बिजली कड़कने के दौरान छत पर जाने, खुले पार्क में रहने या ऊंची इमारतों की छत पर मोबाइल इस्तेमाल करने से बचें। स्कूल जाने वाले बच्चों के अभिभावक भी मौसम के हिसाब से तैयारी रखें।
बिजली गिरने पर प्राथमिक उपचार
अगर किसी व्यक्ति पर बिजली गिर जाए, तो उसे छूने से डरें नहीं। बिजली गिरने के बाद शरीर में करंट नहीं रहता। तुरंत एंबुलेंस के लिए 108 या 112 पर कॉल करें। अगर व्यक्ति की सांस नहीं चल रही, तो प्रशिक्षित व्यक्ति सीपीआर दे सकता है। जलने के घावों को साफ कपड़े से ढकें और व्यक्ति को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाएं।
निष्कर्ष
कानपुर देहात में 11 अक्टूबर तक मौसम बिगड़ने की आशंका है। सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। सचेत और दामिनी ऐप डाउनलोड करें, बिजली कड़कने पर पक्के मकान में रहें, पेड़ों के नीचे शरण न लें और किसी भी आपात स्थिति में 1077 पर संपर्क करें। किसान अपनी कटी फसल और पशुओं को सुरक्षित रखें।
मौसम और आपकी सुरक्षा से जुड़ी हर अपडेट के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
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