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कानपुर में 24 घंटे से लगातार बारिश, पारा सामान्य से 8 डिग्री नीचे; कानपुर समेत 14 जिलों में स्कूल बंद

Kanpur: Non-stop rain for 24 hours, schools shut in 14 districts

Kanpur Live News Desk ·

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कानपुर में 24 घंटे से लगातार बारिश, पारा सामान्य से 8 डिग्री नीचे; कानपुर समेत 14 जिलों में स्कूल बंद
कानपुर में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। सितंबर के आखिरी हफ्ते में जहां लोग मानसून की विदाई की उम्मीद कर रहे थे, वहीं शहर में बीते 24 घंटे से रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी है। आसमान में घने बादल छाए हुए हैं, तेज हवाएं चल रही हैं और धूप का नामोनिशान नहीं है। इस बदले मौसम का असर शहर की दिनचर्या, यातायात, स्कूलों और बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है। बंगाल की खाड़ी का तंत्र और पश्चिमी विक्षोभ, दोनों का असर मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार की बारिश के पीछे दो मौसमी तंत्रों का मेल है। बंगाल की खाड़ी में बना नया मौसम तंत्र जब पश्चिमी विक्षोभ से मिला, तो उत्तर प्रदेश में बारिश और तेज हो गई। कानपुर और बुंदेलखंड समेत पूरे प्रदेश में तेज हवाओं के साथ रुक-रुककर बारिश हो रही है, जिससे दिन का तापमान सामान्य से 8.4 डिग्री और रात का न्यूनतम तापमान 2.2 डिग्री नीचे चला गया। amarujala आमतौर पर सितंबर के अंत में कानपुर में दिन का तापमान 33 से 34 डिग्री के आसपास रहता है और उमस लोगों को परेशान करती है। लेकिन इस बार तापमान में आई इस गिरावट ने मौसम को अचानक ठंडा और नम बना दिया है। सुबह और शाम के समय हल्की ठंडक भी महसूस की जा रही है। सूरज के दर्शन नहीं, सनशाइन आवर शून्य इस बारिश की सबसे खास बात यह रही कि पूरे दिन सूरज एक बार भी बादलों से बाहर नहीं निकला। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की मौसम वेधशाला में धूप के घंटे (सनशाइन आवर) शून्य दर्ज किए गए, और मौसम विभाग ने अगले दो दिन भी इसी तरह के मौसम का अनुमान जताया है। amarujala विशेषज्ञ बताते हैं कि जब किसी दिन सनशाइन आवर शून्य दर्ज होता है, तो इसका मतलब है कि बादलों की परत बेहद घनी है और वातावरण में नमी का स्तर काफी ऊंचा है। ऐसी स्थिति में बारिश लंबे समय तक रुक-रुककर होती रहती है। कानपुर समेत 14 जिलों में स्कूलों में छुट्टी लगातार बारिश और खराब मौसम को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। बुंदेलखंड के पांच जिलों के साथ-साथ कानपुर, कानपुर देहात, फतेहपुर, कन्नौज, फर्रुखाबाद, इटावा, औरैया, उन्नाव और हरदोई में शनिवार को स्कूल बंद रखने की घोषणा की गई। amarujala अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने बच्चों के स्कूल की ओर से आने वाले संदेशों और जिला प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखें, क्योंकि मौसम की स्थिति के अनुसार आगे भी फैसले लिए जा सकते हैं। प्रदेश में बारिश से जुड़े हादसे बारिश के दौरान प्रदेश के कुछ हिस्सों से दुखद घटनाओं की खबरें भी आई हैं। हरदोई में बारिश के बीच एक दीवार पर पेड़ गिर जाने से मलबे में दबकर एक बच्चे की जान चली गई, वहीं सीतापुर में भी एक युवक की मौत हुई। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी शाम को खतरे के निशान से करीब आधा मीटर ऊपर पहुंच गई, और पत्थर गिरने की आशंका के चलते गुप्त गोदावरी गुफा को बंद करना पड़ा। amarujala amarujala ये घटनाएं बताती हैं कि तेज बारिश और हवाओं के दौरान पुराने पेड़ों, जर्जर दीवारों और कच्चे मकानों के पास रहना कितना जोखिम भरा हो सकता है। सितंबर में सामान्य से कहीं ज्यादा बारिश इस साल सितंबर का महीना कानपुर के लिए औसत से ज्यादा बरसाती साबित हुआ है। विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 23 सितंबर तक इस महीने में 232.8 मिमी बारिश हो चुकी थी, जबकि पूरे सितंबर का सामान्य औसत 169 मिमी है, यानी सामान्य से 63.8 मिमी ज्यादा पानी बरस चुका था। उसके बाद हुई बारिश से यह आंकड़ा और ऊपर गया है। amarujala 23 सितंबर को ही शाम पांच बजे तक 33.6 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, जब तेज उमस के बाद बने कम दबाव से चक्रवाती स्थिति बनी और तेज हवाओं के साथ पानी बरसा। amarujala क्या कहते हैं मौसम वैज्ञानिक मौसम विभाग के नोडल एवं तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा के मुताबिक प्रदेश के ऊपर मानसून अभी सक्रिय है, नमी वाली पूर्वी हवाएं चल रही हैं, और वायुमंडल के निचले स्तर पर बनी ट्रफ लाइन के कारण आसमान में घने बादल बने रहते हैं। उनके अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव से जुड़ा चक्रवात अर्णब नमी को इस ओर खींच रहा है, जिससे बारिश का दौर बना हुआ है। amarujala amarujala चक्रवात को 'अर्णब' नाम किसने दिया लोगों के मन में यह सवाल भी है कि इस चक्रवात का नाम 'अर्णब' क्यों पड़ा। बंगाल की खाड़ी में बने इस चक्रवाती तूफान का नाम बांग्लादेश ने तय किया है। हिंद महासागर क्षेत्र के चक्रवातों के नाम पहले से तय एक सूची के आधार पर रखे जाते हैं, जिसमें भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड समेत कई देश अपनी ओर से नाम सुझाते हैं। बारी-बारी से इन्हीं नामों का इस्तेमाल होता है। amarujala मानसून कब लौटेगा मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक 24 से 27 सितंबर के बीच आंधी-पानी का दौर रह सकता है, 25 सितंबर को कानपुर में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की आशंका जताई गई थी, और मानसून की वापसी 3 अक्टूबर के आसपास होने का अनुमान है। यानी अक्टूबर के पहले हफ्ते तक बीच-बीच में बादल और बारिश का असर रह सकता है। amarujala शहर की सड़कों और यातायात पर असर लगातार बारिश का असर शहर की सड़कों पर भी दिख रहा है। कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनती है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को परेशानी होती है। ऑफिस जाने वाले लोगों और छात्रों को सुबह के समय ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ता है। बारिश में गड्ढे पानी से भर जाते हैं और दिखाई नहीं देते, इसलिए वाहन धीरे और सावधानी से चलाना जरूरी है। किसानों के लिए क्या मायने कृषि के लिहाज से यह बारिश मिली-जुली है। जिन खेतों में धान की फसल पकने के करीब है, वहां तेज हवा के साथ बारिश से फसल गिरने का खतरा रहता है। वहीं रबी की बुआई की तैयारी कर रहे किसानों के लिए मिट्टी में नमी फायदेमंद हो सकती है। किसानों को सलाह है कि वे खेतों में जल निकासी का ध्यान रखें और कटी हुई फसल को सुरक्षित, ढकी हुई जगह पर रखें। सेहत का ध्यान रखें मौसम में अचानक ठंडक और नमी बढ़ने से सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार और गले की खराश जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। साथ ही जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के पनपने की वजह बनता है, जिससे डेंगू और मलेरिया का खतरा बढ़ता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, कूलर, गमलों और टायरों में भरा पानी खाली करें, और बुखार होने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करें। बारिश के दौरान इन बातों का रखें ध्यान तेज हवा और बारिश के समय पुराने पेड़ों, होर्डिंग्स और जर्जर दीवारों के नीचे खड़े न हों। बिजली के खंभों, लटकते तारों और ट्रांसफार्मर से दूरी बनाए रखें। जलभराव वाली सड़कों पर वाहन धीरे चलाएं, खुले नालों और मैनहोल का ध्यान रखें। बच्चों को बारिश के पानी में खेलने न दें। मौसम विभाग और जिला प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों पर नजर रखें। आगे कैसा रहेगा मौसम मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक अगले दो दिनों तक बादल छाए रहने और रुक-रुककर बारिश होने की संभावना है। तापमान सामान्य से नीचे बना रह सकता है। अक्टूबर की शुरुआत में मानसून की वापसी के बाद आसमान साफ होने और धीरे-धीरे तापमान में स्थिरता आने की उम्मीद है। तब तक कानपुरवासियों को छाता साथ रखने और सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। कानपुर लाइव आपको मौसम से जुड़ी हर अपडेट देता रहेगा। ताजा जानकारी के लिए जुड़े रहें।

कानपुर में 24 घंटे से लगातार बारिश, पारा सामान्य से 8 डिग्री नीचे; कानपुर समेत 14 जिलों में स्कूल बंद

कानपुर में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। सितंबर के आखिरी हफ्ते में जहां लोग मानसून की विदाई की उम्मीद कर रहे थे, वहीं शहर में बीते 24 घंटे से रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी है। आसमान में घने बादल छाए हुए हैं, तेज हवाएं चल रही हैं और धूप का नामोनिशान नहीं है। इस बदले मौसम का असर शहर की दिनचर्या, यातायात, स्कूलों और बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है। बंगाल की खाड़ी का तंत्र और पश्चिमी विक्षोभ, दोनों का असर मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार की बारिश के पीछे दो मौसमी तंत्रों का मेल है। बंगाल की खाड़ी में बना नया मौसम तंत्र जब पश्चिमी विक्षोभ से मिला, तो उत्तर प्रदेश में बारिश और तेज हो गई। कानपुर और बुंदेलखंड समेत पूरे प्रदेश में तेज हवाओं के साथ रुक-रुककर बारिश हो रही है, जिससे दिन का तापमान सामान्य से 8.4 डिग्री और रात का न्यूनतम तापमान 2.2 डिग्री नीचे चला गया। amarujala आमतौर पर सितंबर के अंत में कानपुर में दिन का तापमान 33 से 34 डिग्री के आसपास रहता है और उमस लोगों को परेशान करती है। लेकिन इस बार तापमान में आई इस गिरावट ने मौसम को अचानक ठंडा और नम बना दिया है। सुबह और शाम के समय हल्की ठंडक भी महसूस की जा रही है। सूरज के दर्शन नहीं, सनशाइन आवर शून्य इस बारिश की सबसे खास बात यह रही कि पूरे दिन सूरज एक बार भी बादलों से बाहर नहीं निकला। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की मौसम वेधशाला में धूप के घंटे (सनशाइन आवर) शून्य दर्ज किए गए, और मौसम विभाग ने अगले दो दिन भी इसी तरह के मौसम का अनुमान जताया है। amarujala विशेषज्ञ बताते हैं कि जब किसी दिन सनशाइन आवर शून्य दर्ज होता है, तो इसका मतलब है कि बादलों की परत बेहद घनी है और वातावरण में नमी का स्तर काफी ऊंचा है। ऐसी स्थिति में बारिश लंबे समय तक रुक-रुककर होती रहती है। कानपुर समेत 14 जिलों में स्कूलों में छुट्टी लगातार बारिश और खराब मौसम को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। बुंदेलखंड के पांच जिलों के साथ-साथ कानपुर, कानपुर देहात, फतेहपुर, कन्नौज, फर्रुखाबाद, इटावा, औरैया, उन्नाव और हरदोई में शनिवार को स्कूल बंद रखने की घोषणा की गई। amarujala अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने बच्चों के स्कूल की ओर से आने वाले संदेशों और जिला प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखें, क्योंकि मौसम की स्थिति के अनुसार आगे भी फैसले लिए जा सकते हैं। प्रदेश में बारिश से जुड़े हादसे बारिश के दौरान प्रदेश के कुछ हिस्सों से दुखद घटनाओं की खबरें भी आई हैं। हरदोई में बारिश के बीच एक दीवार पर पेड़ गिर जाने से मलबे में दबकर एक बच्चे की जान चली गई, वहीं सीतापुर में भी एक युवक की मौत हुई। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी शाम को खतरे के निशान से करीब आधा मीटर ऊपर पहुंच गई, और पत्थर गिरने की आशंका के चलते गुप्त गोदावरी गुफा को बंद करना पड़ा। amarujala amarujala ये घटनाएं बताती हैं कि तेज बारिश और हवाओं के दौरान पुराने पेड़ों, जर्जर दीवारों और कच्चे मकानों के पास रहना कितना जोखिम भरा हो सकता है। सितंबर में सामान्य से कहीं ज्यादा बारिश इस साल सितंबर का महीना कानपुर के लिए औसत से ज्यादा बरसाती साबित हुआ है। विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 23 सितंबर तक इस महीने में 232.8 मिमी बारिश हो चुकी थी, जबकि पूरे सितंबर का सामान्य औसत 169 मिमी है, यानी सामान्य से 63.8 मिमी ज्यादा पानी बरस चुका था। उसके बाद हुई बारिश से यह आंकड़ा और ऊपर गया है। amarujala 23 सितंबर को ही शाम पांच बजे तक 33.6 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, जब तेज उमस के बाद बने कम दबाव से चक्रवाती स्थिति बनी और तेज हवाओं के साथ पानी बरसा। amarujala क्या कहते हैं मौसम वैज्ञानिक मौसम विभाग के नोडल एवं तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा के मुताबिक प्रदेश के ऊपर मानसून अभी सक्रिय है, नमी वाली पूर्वी हवाएं चल रही हैं, और वायुमंडल के निचले स्तर पर बनी ट्रफ लाइन के कारण आसमान में घने बादल बने रहते हैं। उनके अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव से जुड़ा चक्रवात अर्णब नमी को इस ओर खींच रहा है, जिससे बारिश का दौर बना हुआ है। amarujala amarujala चक्रवात को 'अर्णब' नाम किसने दिया लोगों के मन में यह सवाल भी है कि इस चक्रवात का नाम 'अर्णब' क्यों पड़ा। बंगाल की खाड़ी में बने इस चक्रवाती तूफान का नाम बांग्लादेश ने तय किया है। हिंद महासागर क्षेत्र के चक्रवातों के नाम पहले से तय एक सूची के आधार पर रखे जाते हैं, जिसमें भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड समेत कई देश अपनी ओर से नाम सुझाते हैं। बारी-बारी से इन्हीं नामों का इस्तेमाल होता है। amarujala मानसून कब लौटेगा मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक 24 से 27 सितंबर के बीच आंधी-पानी का दौर रह सकता है, 25 सितंबर को कानपुर में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की आशंका जताई गई थी, और मानसून की वापसी 3 अक्टूबर के आसपास होने का अनुमान है। यानी अक्टूबर के पहले हफ्ते तक बीच-बीच में बादल और बारिश का असर रह सकता है। amarujala शहर की सड़कों और यातायात पर असर लगातार बारिश का असर शहर की सड़कों पर भी दिख रहा है। कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनती है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को परेशानी होती है। ऑफिस जाने वाले लोगों और छात्रों को सुबह के समय ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ता है। बारिश में गड्ढे पानी से भर जाते हैं और दिखाई नहीं देते, इसलिए वाहन धीरे और सावधानी से चलाना जरूरी है। किसानों के लिए क्या मायने कृषि के लिहाज से यह बारिश मिली-जुली है। जिन खेतों में धान की फसल पकने के करीब है, वहां तेज हवा के साथ बारिश से फसल गिरने का खतरा रहता है। वहीं रबी की बुआई की तैयारी कर रहे किसानों के लिए मिट्टी में नमी फायदेमंद हो सकती है। किसानों को सलाह है कि वे खेतों में जल निकासी का ध्यान रखें और कटी हुई फसल को सुरक्षित, ढकी हुई जगह पर रखें। सेहत का ध्यान रखें मौसम में अचानक ठंडक और नमी बढ़ने से सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार और गले की खराश जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। साथ ही जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के पनपने की वजह बनता है, जिससे डेंगू और मलेरिया का खतरा बढ़ता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, कूलर, गमलों और टायरों में भरा पानी खाली करें, और बुखार होने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करें। बारिश के दौरान इन बातों का रखें ध्यान तेज हवा और बारिश के समय पुराने पेड़ों, होर्डिंग्स और जर्जर दीवारों के नीचे खड़े न हों। बिजली के खंभों, लटकते तारों और ट्रांसफार्मर से दूरी बनाए रखें। जलभराव वाली सड़कों पर वाहन धीरे चलाएं, खुले नालों और मैनहोल का ध्यान रखें। बच्चों को बारिश के पानी में खेलने न दें। मौसम विभाग और जिला प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों पर नजर रखें। आगे कैसा रहेगा मौसम मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक अगले दो दिनों तक बादल छाए रहने और रुक-रुककर बारिश होने की संभावना है। तापमान सामान्य से नीचे बना रह सकता है। अक्टूबर की शुरुआत में मानसून की वापसी के बाद आसमान साफ होने और धीरे-धीरे तापमान में स्थिरता आने की उम्मीद है। तब तक कानपुरवासियों को छाता साथ रखने और सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। कानपुर लाइव आपको मौसम से जुड़ी हर अपडेट देता रहेगा। ताजा जानकारी के लिए जुड़े रहें।

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