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कानपुर में 7 अक्टूबर को हल्की बारिश के आसार

Kanpur may see light rain on Oct 7 due to western disturbance

Kanpur Live News Desk ·

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कानपुर में 7 अक्टूबर को हल्की बारिश के आसार
कानपुर से मानसून की विदाई हुए अभी कुछ ही दिन हुए हैं, लेकिन मौसम एक बार फिर करवट लेने को तैयार है। मौसम विभाग के अनुसार 6 से 10 अक्टूबर के बीच उत्तर भारत में एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहेगा। इसका सीधा और ज्यादा असर कानपुर क्षेत्र पर तो नहीं पड़ेगा, लेकिन शहर में बादलों की आवाजाही बढ़ेगी और कहीं-कहीं बूंदाबांदी या हल्की बारिश हो सकती है। इसके बाद सुबह-शाम का मौसम सुहावना होगा और गुलाबी ठंड की दस्तक महसूस होने लगेगी। मानसून के बाद अब पश्चिमी विक्षोभ की बारी मौसम विभाग के अनुसार मानसून की विदाई के बाद अब पोस्ट मानसूनी बारिश के आसार बन रहे हैं। 6 से 10 अक्टूबर के बीच सक्रिय रहने वाले पश्चिमी विक्षोभ का असर कानपुर परिक्षेत्र पर ज्यादा नहीं होगा, लेकिन बादल छाने और स्थानीय स्तर पर बूंदाबांदी व हल्की बारिश की संभावना है। किस दिन कैसा रहेगा मौसम चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के नोडल एवं तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा के मुताबिक कानपुर क्षेत्र में इस विक्षोभ का सीधा असर नहीं दिखेगा। 5 अक्टूबर को आसमान पूरी तरह साफ रहा। विक्षोभ के आगे बढ़ने से 6 और 7 अक्टूबर को आंशिक बादल छाए रहेंगे और 7 अक्टूबर को गरज-चमक के साथ कहीं-कहीं बूंदाबांदी या हल्की बारिश हो सकती है। संक्षेप में मौसम का हाल: 6 अक्टूबर: आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। 7 अक्टूबर: बादल, गरज-चमक और कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी। इसके बाद: सुबह-शाम सुहावना मौसम और हल्की गुलाबी ठंड की शुरुआत। पोस्ट मानसून का पहला मजबूत विक्षोभ अजय मिश्रा ने बताया कि पोस्ट मानसून सीजन का यह पहला मजबूत पश्चिमी विक्षोभ होगा, जो उत्तर भारत के मौसम को प्रभावित करेगा। पहाड़ों पर बर्फबारी की भी संभावना है। पहाड़ों पर होने वाली बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों तक पहुंचता है। जब पहाड़ों से ठंडी हवाएं नीचे की ओर आती हैं, तो मैदानी इलाकों में तापमान गिरने लगता है। यही वजह है कि अक्टूबर के पहले पश्चिमी विक्षोभ को सर्दी के मौसम की शुरुआत का संकेत माना जाता है। तापमान का हाल कानपुर में अधिकतम तापमान 33.8 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिन में अभी भी धूप तेज है, लेकिन रातें धीरे-धीरे ठंडी होने लगी हैं। दिन और रात के तापमान में 11 डिग्री से ज्यादा का अंतर इस मौसम की खास पहचान है। पश्चिमी विक्षोभ क्या है पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर और आसपास के क्षेत्रों से उठने वाला कम दबाव का तंत्र है, जो पश्चिम से पूर्व की ओर चलते हुए ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान होते हुए भारत के उत्तरी हिस्सों तक पहुंचता है। अपने साथ यह नमी लेकर आता है, जिससे पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश होती है। सर्दियों की ज्यादातर बारिश, जिसे आम बोलचाल में मावठ भी कहा जाता है, इन्हीं विक्षोभों की वजह से होती है। किसानों के लिए सलाह यह समय खरीफ फसलों की कटाई और रबी की बुआई की तैयारी का है। हल्की बारिश का अनुमान होने से किसानों को कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए: कटी हुई फसल को खुले में न छोड़ें, उसे ढककर या सुरक्षित जगह पर रखें। धान की कटाई कर रहे किसान मौसम साफ होने पर ही मड़ाई करें। हल्की बारिश के बाद खेत में नमी बढ़ेगी, जो रबी की बुआई के लिए फायदेमंद हो सकती है। कीटनाशक या उर्वरक का छिड़काव बारिश वाले दिन न करें, वरना दवा बह जाएगी। त्योहारों की तैयारी पर असर अक्टूबर में नवरात्र और दशहरे की तैयारियां जोरों पर हैं। शहर में पूजा पंडालों और रामलीला मैदानों में काम चल रहा है। हल्की बारिश से इन तैयारियों पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि बारिश छिटपुट और कम समय के लिए होगी। फिर भी आयोजकों को सलाह है कि बिजली के कनेक्शन और सजावट को पानी से बचाने का इंतजाम रखें। अक्टूबर का मौसम क्यों होता है खास अक्टूबर को उत्तर भारत में मौसम के बदलाव का महीना माना जाता है। यह वह समय है जब बरसात खत्म होती है और सर्दी धीरे-धीरे दस्तक देती है। इस महीने में आसमान साफ रहता है, हवा में नमी कम होने लगती है और दिन सुहावने हो जाते हैं। यही कारण है कि इसे घूमने-फिरने, त्योहार मनाने और बाहरी गतिविधियों के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है। हालांकि बीच-बीच में आने वाले पश्चिमी विक्षोभ मौसम में अचानक बदलाव ला सकते हैं, जैसा इस बार देखने को मिल रहा है। सेहत का रखें ध्यान मौसम बदलने के इस दौर में सर्दी-जुकाम, गले में खराश और वायरल बुखार के मामले बढ़ जाते हैं। दिन में गर्मी और सुबह-शाम ठंडक के कारण शरीर को तालमेल बिठाने में समय लगता है। सुबह टहलने जाने वाले हल्के गर्म कपड़े पहनें। बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें। ठंडा पानी और फ्रिज की चीजें अचानक ज्यादा न लें। बारिश के बाद जमा पानी में मच्छर पनप सकते हैं, इसलिए डेंगू से बचाव जारी रखें। कब से शुरू होगी असली सर्दी मौसम जानकारों के अनुसार इस पश्चिमी विक्षोभ के बाद रात के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आएगी। अक्टूबर के आखिर तक सुबह-शाम की ठंडक साफ महसूस होगी, जबकि नवंबर में सर्दी अपना असर दिखाने लगेगी। दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है, जिसकी तीव्रता पहाड़ों पर होने वाली बर्फबारी पर निर्भर करती है। वायु गुणवत्ता पर नजर मानसून जाने के बाद हवा में धूल और प्रदूषण के कण बढ़ने लगते हैं। हल्की बारिश हवा को कुछ समय के लिए साफ जरूर करती है, लेकिन जैसे-जैसे तापमान गिरता है और हवा की रफ्तार कम होती है, प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगता है। सांस के मरीजों को इस मौसम में खास सावधानी बरतनी चाहिए और जरूरत होने पर मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। निष्कर्ष कानपुर में आने वाले दिनों में मौसम सुहावना रहने की उम्मीद है। 7 अक्टूबर को हल्की बारिश के बाद गुलाबी ठंड की शुरुआत होगी, जो त्योहारों के मौसम को और खुशनुमा बना देगी। किसानों और आम लोगों को मौसम के हिसाब से थोड़ी सावधानी रखने की जरूरत है। मौसम की हर ताजा जानकारी के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।

कानपुर में 7 अक्टूबर को हल्की बारिश के आसार

कानपुर से मानसून की विदाई हुए अभी कुछ ही दिन हुए हैं, लेकिन मौसम एक बार फिर करवट लेने को तैयार है। मौसम विभाग के अनुसार 6 से 10 अक्टूबर के बीच उत्तर भारत में एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहेगा। इसका सीधा और ज्यादा असर कानपुर क्षेत्र पर तो नहीं पड़ेगा, लेकिन शहर में बादलों की आवाजाही बढ़ेगी और कहीं-कहीं बूंदाबांदी या हल्की बारिश हो सकती है। इसके बाद सुबह-शाम का मौसम सुहावना होगा और गुलाबी ठंड की दस्तक महसूस होने लगेगी। मानसून के बाद अब पश्चिमी विक्षोभ की बारी मौसम विभाग के अनुसार मानसून की विदाई के बाद अब पोस्ट मानसूनी बारिश के आसार बन रहे हैं। 6 से 10 अक्टूबर के बीच सक्रिय रहने वाले पश्चिमी विक्षोभ का असर कानपुर परिक्षेत्र पर ज्यादा नहीं होगा, लेकिन बादल छाने और स्थानीय स्तर पर बूंदाबांदी व हल्की बारिश की संभावना है। किस दिन कैसा रहेगा मौसम चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के नोडल एवं तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा के मुताबिक कानपुर क्षेत्र में इस विक्षोभ का सीधा असर नहीं दिखेगा। 5 अक्टूबर को आसमान पूरी तरह साफ रहा। विक्षोभ के आगे बढ़ने से 6 और 7 अक्टूबर को आंशिक बादल छाए रहेंगे और 7 अक्टूबर को गरज-चमक के साथ कहीं-कहीं बूंदाबांदी या हल्की बारिश हो सकती है। संक्षेप में मौसम का हाल: 6 अक्टूबर: आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। 7 अक्टूबर: बादल, गरज-चमक और कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी। इसके बाद: सुबह-शाम सुहावना मौसम और हल्की गुलाबी ठंड की शुरुआत। पोस्ट मानसून का पहला मजबूत विक्षोभ अजय मिश्रा ने बताया कि पोस्ट मानसून सीजन का यह पहला मजबूत पश्चिमी विक्षोभ होगा, जो उत्तर भारत के मौसम को प्रभावित करेगा। पहाड़ों पर बर्फबारी की भी संभावना है। पहाड़ों पर होने वाली बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों तक पहुंचता है। जब पहाड़ों से ठंडी हवाएं नीचे की ओर आती हैं, तो मैदानी इलाकों में तापमान गिरने लगता है। यही वजह है कि अक्टूबर के पहले पश्चिमी विक्षोभ को सर्दी के मौसम की शुरुआत का संकेत माना जाता है। तापमान का हाल कानपुर में अधिकतम तापमान 33.8 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिन में अभी भी धूप तेज है, लेकिन रातें धीरे-धीरे ठंडी होने लगी हैं। दिन और रात के तापमान में 11 डिग्री से ज्यादा का अंतर इस मौसम की खास पहचान है। पश्चिमी विक्षोभ क्या है पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर और आसपास के क्षेत्रों से उठने वाला कम दबाव का तंत्र है, जो पश्चिम से पूर्व की ओर चलते हुए ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान होते हुए भारत के उत्तरी हिस्सों तक पहुंचता है। अपने साथ यह नमी लेकर आता है, जिससे पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश होती है। सर्दियों की ज्यादातर बारिश, जिसे आम बोलचाल में मावठ भी कहा जाता है, इन्हीं विक्षोभों की वजह से होती है। किसानों के लिए सलाह यह समय खरीफ फसलों की कटाई और रबी की बुआई की तैयारी का है। हल्की बारिश का अनुमान होने से किसानों को कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए: कटी हुई फसल को खुले में न छोड़ें, उसे ढककर या सुरक्षित जगह पर रखें। धान की कटाई कर रहे किसान मौसम साफ होने पर ही मड़ाई करें। हल्की बारिश के बाद खेत में नमी बढ़ेगी, जो रबी की बुआई के लिए फायदेमंद हो सकती है। कीटनाशक या उर्वरक का छिड़काव बारिश वाले दिन न करें, वरना दवा बह जाएगी। त्योहारों की तैयारी पर असर अक्टूबर में नवरात्र और दशहरे की तैयारियां जोरों पर हैं। शहर में पूजा पंडालों और रामलीला मैदानों में काम चल रहा है। हल्की बारिश से इन तैयारियों पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि बारिश छिटपुट और कम समय के लिए होगी। फिर भी आयोजकों को सलाह है कि बिजली के कनेक्शन और सजावट को पानी से बचाने का इंतजाम रखें। अक्टूबर का मौसम क्यों होता है खास अक्टूबर को उत्तर भारत में मौसम के बदलाव का महीना माना जाता है। यह वह समय है जब बरसात खत्म होती है और सर्दी धीरे-धीरे दस्तक देती है। इस महीने में आसमान साफ रहता है, हवा में नमी कम होने लगती है और दिन सुहावने हो जाते हैं। यही कारण है कि इसे घूमने-फिरने, त्योहार मनाने और बाहरी गतिविधियों के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है। हालांकि बीच-बीच में आने वाले पश्चिमी विक्षोभ मौसम में अचानक बदलाव ला सकते हैं, जैसा इस बार देखने को मिल रहा है। सेहत का रखें ध्यान मौसम बदलने के इस दौर में सर्दी-जुकाम, गले में खराश और वायरल बुखार के मामले बढ़ जाते हैं। दिन में गर्मी और सुबह-शाम ठंडक के कारण शरीर को तालमेल बिठाने में समय लगता है। सुबह टहलने जाने वाले हल्के गर्म कपड़े पहनें। बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें। ठंडा पानी और फ्रिज की चीजें अचानक ज्यादा न लें। बारिश के बाद जमा पानी में मच्छर पनप सकते हैं, इसलिए डेंगू से बचाव जारी रखें। कब से शुरू होगी असली सर्दी मौसम जानकारों के अनुसार इस पश्चिमी विक्षोभ के बाद रात के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आएगी। अक्टूबर के आखिर तक सुबह-शाम की ठंडक साफ महसूस होगी, जबकि नवंबर में सर्दी अपना असर दिखाने लगेगी। दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है, जिसकी तीव्रता पहाड़ों पर होने वाली बर्फबारी पर निर्भर करती है। वायु गुणवत्ता पर नजर मानसून जाने के बाद हवा में धूल और प्रदूषण के कण बढ़ने लगते हैं। हल्की बारिश हवा को कुछ समय के लिए साफ जरूर करती है, लेकिन जैसे-जैसे तापमान गिरता है और हवा की रफ्तार कम होती है, प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगता है। सांस के मरीजों को इस मौसम में खास सावधानी बरतनी चाहिए और जरूरत होने पर मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। निष्कर्ष कानपुर में आने वाले दिनों में मौसम सुहावना रहने की उम्मीद है। 7 अक्टूबर को हल्की बारिश के बाद गुलाबी ठंड की शुरुआत होगी, जो त्योहारों के मौसम को और खुशनुमा बना देगी। किसानों और आम लोगों को मौसम के हिसाब से थोड़ी सावधानी रखने की जरूरत है। मौसम की हर ताजा जानकारी के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।

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