कानपुर समेत पूरे यूपी से मानसून की विदाई, तय समय से दो दिन पहले लौटा; दिन-रात के पारे में 10 डिग्री का अंतर,
Monsoon withdraws from Kanpur and entire UP two days early, 10-degree gap
Kanpur Live News Desk ·

करीब चार महीने तक झमाझम बारिश, उमस और जलभराव के बाद अब उत्तर प्रदेश से मानसून पूरी तरह विदा हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने कानपुर समेत पूरे प्रदेश से मानसून की वापसी की औपचारिक घोषणा कर दी है। इस साल मानसून अपनी अनुमानित वापसी तिथि से दो दिन पहले ही लौट गया। मानसून की विदाई के साथ ही मौसम ने करवट लेनी शुरू कर दी है। सुबह और शाम हवा में हल्की ठंडक घुलने लगी है, जबकि दिन में तेज धूप अभी भी गर्मी का एहसास करा रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में सर्दी की आहट और साफ महसूस होने लगेगी।
तय समय से दो दिन पहले लौटा मानसून
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार कानपुर सहित पूरे उत्तर प्रदेश से शनिवार यानी 3 अक्टूबर को मानसून की आधिकारिक विदाई हो गई। इस वर्ष प्रदेश से मानसून की वापसी की संभावित तारीख 5 अक्टूबर थी, लेकिन यह दो दिन पहले ही लौट गया।
आमतौर पर मानसून की वापसी का सिलसिला राजस्थान के पश्चिमी हिस्से से शुरू होता है और धीरे-धीरे पूर्व और दक्षिण की ओर बढ़ता है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में पश्चिमी जिलों से वापसी पहले होती है और फिर पूर्वी जिलों तक पहुंचती है। इस बार यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेजी से पूरी हुई।
सात राज्यों से एक साथ विदाई
मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और गुजरात से भी मानसून लौट गया है। यानी उत्तर और पश्चिम भारत के बड़े हिस्से से बरसात का मौसम अब समाप्त हो चुका है।
सुबह-शाम हल्की ठंडक, कहीं-कहीं कोहरा
मानसून की विदाई के साथ ही मौसम में शरद ऋतु का हल्का असर दिखने लगा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदायूं और सहारनपुर में शनिवार सुबह हल्के कोहरे की चादर दिखाई दी। प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी सुबह-शाम हवा में ठंडक महसूस होने लगी है।
अक्टूबर की शुरुआत में कोहरा दिखना इस बात का संकेत है कि वातावरण में नमी अभी भी मौजूद है और रात का तापमान धीरे-धीरे गिर रहा है। जैसे-जैसे अक्टूबर आगे बढ़ेगा, सुबह की ठंडक और बढ़ती जाएगी।
दिन और रात के तापमान में 10 डिग्री का फर्क
मानसून लौटने के बाद आसमान साफ होने से दिन में धूप तेज हो गई है, जबकि रात में तापमान गिरने लगा है। लखनऊ में शनिवार को दिन और रात के तापमान में करीब 10 डिग्री सेल्सियस का अंतर दर्ज किया गया। वहां अधिकतम तापमान 34 डिग्री और न्यूनतम तापमान 24.2 डिग्री सेल्सियस रहा।
दिन और रात के तापमान में इतना बड़ा अंतर इस मौसम की खास पहचान है। मानसून के दौरान बादलों की परत दिन की गर्मी को रोकती है और रात में गर्मी को बाहर जाने नहीं देती, जिससे दोनों के बीच अंतर कम रहता है। आसमान साफ होते ही दिन में सूरज की किरणें सीधे धरती को गर्म करती हैं और रात में यह गर्मी तेजी से वातावरण में निकल जाती है। इसी वजह से दिन गर्म और रातें ठंडी होने लगती हैं।
अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार अगले दो दिनों तक तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने बताया कि पुरवा हवाओं के असर से बादलों की सक्रियता कुछ बढ़ सकती है, जिसके कारण सोमवार और मंगलवार को तराई के जिलों में छिटपुट बूंदाबांदी हो सकती है। हालांकि प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से साफ बना रहेगा।
बादलों की मौजूदगी से तापमान में मामूली गिरावट भी देखने को मिल सकती है। कानपुर और आसपास के जिलों में आसमान ज्यादातर साफ रहने और दिन में धूप खिली रहने की संभावना है।
कानपुर के लिए यादगार रहा यह मानसून
कानपुर के लिए इस साल का मानसून कई मायनों में खास रहा। सितंबर के महीने में शहर में 23 साल बाद सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी। महीने के आखिरी दिनों में लगातार बारिश के कारण स्कूलों में अवकाश घोषित करना पड़ा, विश्वविद्यालय की परीक्षाएं टालनी पड़ीं और पांडु नदी के उफान से कई बस्तियों में पानी भर गया। अब मानसून की विदाई के साथ लोगों ने राहत की सांस ली है।
मानसून की वापसी कैसे तय होती है
मौसम विभाग किसी इलाके से मानसून की वापसी की घोषणा कुछ तय मानकों के आधार पर करता है। इनमें लगातार कुछ दिनों तक बारिश न होना, निचले वायुमंडल में हवा की दिशा का बदलना और हवा में नमी का स्तर घटना शामिल हैं। जब ये सभी स्थितियां एक साथ बनती हैं, तब विभाग उस क्षेत्र से मानसून की आधिकारिक विदाई की घोषणा करता है। इसलिए कई बार वापसी के बाद भी कहीं-कहीं छिटपुट बूंदाबांदी हो सकती है, जिसे मानसूनी बारिश नहीं माना जाता।
पुरवा हवा क्या होती है
पुरवा यानी पूर्व दिशा से चलने वाली हवा। उत्तर भारत में पूर्व की ओर से आने वाली ये हवाएं बंगाल की खाड़ी की ओर से नमी लेकर आती हैं। यही वजह है कि जब पुरवा हवा चलती है, तो आसमान में बादल छाने और हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना बढ़ जाती है। इसके विपरीत पछुआ यानी पश्चिम से चलने वाली हवाएं आमतौर पर शुष्क होती हैं और मौसम को साफ रखती हैं।
किसानों के लिए अहम समय
मानसून की विदाई के साथ खेती-किसानी का नया दौर शुरू होता है। खरीफ फसलों जैसे धान, बाजरा, ज्वार, उड़द और मूंग की कटाई का समय आ गया है। वहीं रबी फसलों जैसे गेहूं, चना, मटर, सरसों और मसूर की बुआई की तैयारी शुरू हो जाती है।
किसानों के लिए जरूरी सुझाव:
कटी हुई फसल को सुरक्षित और सूखी जगह पर रखें, ताकि अचानक बूंदाबांदी से नुकसान न हो।
इस साल अच्छी बारिश के कारण मिट्टी में नमी भरपूर है, इसलिए खेत की नमी देखकर ही बुआई का समय तय करें।
बुआई से पहले मिट्टी की जांच करा लें और संतुलित खाद का इस्तेमाल करें।
उन्नत और प्रमाणित बीजों का ही चयन करें।
पराली जलाने के बजाय उसके प्रबंधन के वैकल्पिक तरीके अपनाएं, ताकि प्रदूषण न फैले।
मौसम बदलने पर सेहत का रखें ध्यान
मौसम के इस बदलाव के दौरान बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। दिन में गर्मी और रात में ठंडक के कारण सर्दी-जुकाम, गले में खराश, खांसी और वायरल बुखार के मामले बढ़ने लगते हैं। बारिश के बाद जगह-जगह जमा पानी में मच्छर पनपते हैं, इसलिए डेंगू और मलेरिया का खतरा अभी भी बना हुआ है।
सेहत के लिए जरूरी सावधानियां:
सुबह और देर शाम हल्के गर्म कपड़े पहनना शुरू करें, खासकर बच्चे और बुजुर्ग।
ठंडा पानी और ठंडी चीजें अचानक ज्यादा न लें।
घर के आसपास पानी जमा न होने दें और मच्छरों से बचाव करें।
पर्याप्त पानी पिएं, क्योंकि दिन की धूप में शरीर में पानी की कमी हो सकती है।
मौसमी फल जैसे अमरूद, संतरा और सेब खाएं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं।
बुखार या सांस से जुड़ी परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
प्रदूषण पर भी रखनी होगी नजर
मानसून की विदाई के बाद उत्तर भारत में वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ने लगती है। बारिश के दौरान हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक कण धुल जाते हैं, लेकिन बारिश बंद होते ही ये फिर से हवा में जमा होने लगते हैं। अक्टूबर-नवंबर में हवा की गति कम होने, तापमान गिरने और पराली जलाने जैसी वजहों से कई शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है। कानपुर जैसे औद्योगिक शहर में भी इस दौरान प्रदूषण पर नजर रखना जरूरी होता है। सांस के मरीजों और बुजुर्गों को इस समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
त्योहारों के लिए सुहावना मौसम
मानसून की विदाई के बाद आने वाला मौसम त्योहारों के लिए सबसे सुहावना माना जाता है। नवरात्र, दशहरा, दीपावली और छठ जैसे बड़े त्योहार इसी मौसम में आते हैं। न ज्यादा गर्मी, न ज्यादा ठंड, यह मौसम मेलों, पूजा-पंडालों और बाजारों की रौनक के लिए आदर्श होता है। साफ आसमान और खुशनुमा मौसम में लोग त्योहारों की तैयारियों में जुट जाते हैं।
कब से शुरू होगी असली सर्दी
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अक्टूबर के आखिर तक रातें और ठंडी होने लगेंगी। नवंबर में सर्दी का असर साफ दिखने लगेगा, जबकि दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। हालांकि सर्दी कितनी पड़ेगी, यह पश्चिमी विक्षोभों की सक्रियता और पहाड़ों पर बर्फबारी पर निर्भर करेगा। पहाड़ों पर जितनी ज्यादा बर्फबारी होती है, मैदानी इलाकों में उतनी ही ज्यादा ठंड पड़ती है।
घर की तैयारी अभी से करें
मानसून खत्म होने के बाद घर की देखभाल का भी यह सही समय है। बारिश के कारण दीवारों में आई सीलन को ठीक कराएं, छत की सफाई करें और पानी की निकासी की व्यवस्था जांच लें। गर्म कपड़े और रजाई-कंबल को धूप दिखाकर तैयार रखें। कूलर का पानी पूरी तरह खाली करके उसे सुखाकर रख दें, ताकि उसमें मच्छर न पनपें।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश से मानसून की विदाई के साथ ही बरसात का एक लंबा और यादगार दौर खत्म हो गया है। अब शरद ऋतु दस्तक दे चुकी है और आने वाले हफ्तों में धीरे-धीरे सर्दी अपना असर दिखाएगी। इस बदलते मौसम में सेहत, खेती और घर की देखभाल पर ध्यान देकर हम इस खूबसूरत मौसम का पूरा आनंद ले सकते हैं।
मौसम से जुड़ी हर ताजा जानकारी के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
कानपुर समेत पूरे यूपी से मानसून की विदाई, तय समय से दो दिन पहले लौटा; दिन-रात के पारे में 10 डिग्री का अंतर,
करीब चार महीने तक झमाझम बारिश, उमस और जलभराव के बाद अब उत्तर प्रदेश से मानसून पूरी तरह विदा हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने कानपुर समेत पूरे प्रदेश से मानसून की वापसी की औपचारिक घोषणा कर दी है। इस साल मानसून अपनी अनुमानित वापसी तिथि से दो दिन पहले ही लौट गया। मानसून की विदाई के साथ ही मौसम ने करवट लेनी शुरू कर दी है। सुबह और शाम हवा में हल्की ठंडक घुलने लगी है, जबकि दिन में तेज धूप अभी भी गर्मी का एहसास करा रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में सर्दी की आहट और साफ महसूस होने लगेगी।
तय समय से दो दिन पहले लौटा मानसून
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार कानपुर सहित पूरे उत्तर प्रदेश से शनिवार यानी 3 अक्टूबर को मानसून की आधिकारिक विदाई हो गई। इस वर्ष प्रदेश से मानसून की वापसी की संभावित तारीख 5 अक्टूबर थी, लेकिन यह दो दिन पहले ही लौट गया।
आमतौर पर मानसून की वापसी का सिलसिला राजस्थान के पश्चिमी हिस्से से शुरू होता है और धीरे-धीरे पूर्व और दक्षिण की ओर बढ़ता है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में पश्चिमी जिलों से वापसी पहले होती है और फिर पूर्वी जिलों तक पहुंचती है। इस बार यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेजी से पूरी हुई।
सात राज्यों से एक साथ विदाई
मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और गुजरात से भी मानसून लौट गया है। यानी उत्तर और पश्चिम भारत के बड़े हिस्से से बरसात का मौसम अब समाप्त हो चुका है।
सुबह-शाम हल्की ठंडक, कहीं-कहीं कोहरा
मानसून की विदाई के साथ ही मौसम में शरद ऋतु का हल्का असर दिखने लगा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदायूं और सहारनपुर में शनिवार सुबह हल्के कोहरे की चादर दिखाई दी। प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी सुबह-शाम हवा में ठंडक महसूस होने लगी है।
अक्टूबर की शुरुआत में कोहरा दिखना इस बात का संकेत है कि वातावरण में नमी अभी भी मौजूद है और रात का तापमान धीरे-धीरे गिर रहा है। जैसे-जैसे अक्टूबर आगे बढ़ेगा, सुबह की ठंडक और बढ़ती जाएगी।
दिन और रात के तापमान में 10 डिग्री का फर्क
मानसून लौटने के बाद आसमान साफ होने से दिन में धूप तेज हो गई है, जबकि रात में तापमान गिरने लगा है। लखनऊ में शनिवार को दिन और रात के तापमान में करीब 10 डिग्री सेल्सियस का अंतर दर्ज किया गया। वहां अधिकतम तापमान 34 डिग्री और न्यूनतम तापमान 24.2 डिग्री सेल्सियस रहा।
दिन और रात के तापमान में इतना बड़ा अंतर इस मौसम की खास पहचान है। मानसून के दौरान बादलों की परत दिन की गर्मी को रोकती है और रात में गर्मी को बाहर जाने नहीं देती, जिससे दोनों के बीच अंतर कम रहता है। आसमान साफ होते ही दिन में सूरज की किरणें सीधे धरती को गर्म करती हैं और रात में यह गर्मी तेजी से वातावरण में निकल जाती है। इसी वजह से दिन गर्म और रातें ठंडी होने लगती हैं।
अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार अगले दो दिनों तक तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने बताया कि पुरवा हवाओं के असर से बादलों की सक्रियता कुछ बढ़ सकती है, जिसके कारण सोमवार और मंगलवार को तराई के जिलों में छिटपुट बूंदाबांदी हो सकती है। हालांकि प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से साफ बना रहेगा।
बादलों की मौजूदगी से तापमान में मामूली गिरावट भी देखने को मिल सकती है। कानपुर और आसपास के जिलों में आसमान ज्यादातर साफ रहने और दिन में धूप खिली रहने की संभावना है।
कानपुर के लिए यादगार रहा यह मानसून
कानपुर के लिए इस साल का मानसून कई मायनों में खास रहा। सितंबर के महीने में शहर में 23 साल बाद सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी। महीने के आखिरी दिनों में लगातार बारिश के कारण स्कूलों में अवकाश घोषित करना पड़ा, विश्वविद्यालय की परीक्षाएं टालनी पड़ीं और पांडु नदी के उफान से कई बस्तियों में पानी भर गया। अब मानसून की विदाई के साथ लोगों ने राहत की सांस ली है।
मानसून की वापसी कैसे तय होती है
मौसम विभाग किसी इलाके से मानसून की वापसी की घोषणा कुछ तय मानकों के आधार पर करता है। इनमें लगातार कुछ दिनों तक बारिश न होना, निचले वायुमंडल में हवा की दिशा का बदलना और हवा में नमी का स्तर घटना शामिल हैं। जब ये सभी स्थितियां एक साथ बनती हैं, तब विभाग उस क्षेत्र से मानसून की आधिकारिक विदाई की घोषणा करता है। इसलिए कई बार वापसी के बाद भी कहीं-कहीं छिटपुट बूंदाबांदी हो सकती है, जिसे मानसूनी बारिश नहीं माना जाता।
पुरवा हवा क्या होती है
पुरवा यानी पूर्व दिशा से चलने वाली हवा। उत्तर भारत में पूर्व की ओर से आने वाली ये हवाएं बंगाल की खाड़ी की ओर से नमी लेकर आती हैं। यही वजह है कि जब पुरवा हवा चलती है, तो आसमान में बादल छाने और हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना बढ़ जाती है। इसके विपरीत पछुआ यानी पश्चिम से चलने वाली हवाएं आमतौर पर शुष्क होती हैं और मौसम को साफ रखती हैं।
किसानों के लिए अहम समय
मानसून की विदाई के साथ खेती-किसानी का नया दौर शुरू होता है। खरीफ फसलों जैसे धान, बाजरा, ज्वार, उड़द और मूंग की कटाई का समय आ गया है। वहीं रबी फसलों जैसे गेहूं, चना, मटर, सरसों और मसूर की बुआई की तैयारी शुरू हो जाती है।
किसानों के लिए जरूरी सुझाव:
कटी हुई फसल को सुरक्षित और सूखी जगह पर रखें, ताकि अचानक बूंदाबांदी से नुकसान न हो।
इस साल अच्छी बारिश के कारण मिट्टी में नमी भरपूर है, इसलिए खेत की नमी देखकर ही बुआई का समय तय करें।
बुआई से पहले मिट्टी की जांच करा लें और संतुलित खाद का इस्तेमाल करें।
उन्नत और प्रमाणित बीजों का ही चयन करें।
पराली जलाने के बजाय उसके प्रबंधन के वैकल्पिक तरीके अपनाएं, ताकि प्रदूषण न फैले।
मौसम बदलने पर सेहत का रखें ध्यान
मौसम के इस बदलाव के दौरान बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। दिन में गर्मी और रात में ठंडक के कारण सर्दी-जुकाम, गले में खराश, खांसी और वायरल बुखार के मामले बढ़ने लगते हैं। बारिश के बाद जगह-जगह जमा पानी में मच्छर पनपते हैं, इसलिए डेंगू और मलेरिया का खतरा अभी भी बना हुआ है।
सेहत के लिए जरूरी सावधानियां:
सुबह और देर शाम हल्के गर्म कपड़े पहनना शुरू करें, खासकर बच्चे और बुजुर्ग।
ठंडा पानी और ठंडी चीजें अचानक ज्यादा न लें।
घर के आसपास पानी जमा न होने दें और मच्छरों से बचाव करें।
पर्याप्त पानी पिएं, क्योंकि दिन की धूप में शरीर में पानी की कमी हो सकती है।
मौसमी फल जैसे अमरूद, संतरा और सेब खाएं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं।
बुखार या सांस से जुड़ी परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
प्रदूषण पर भी रखनी होगी नजर
मानसून की विदाई के बाद उत्तर भारत में वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ने लगती है। बारिश के दौरान हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक कण धुल जाते हैं, लेकिन बारिश बंद होते ही ये फिर से हवा में जमा होने लगते हैं। अक्टूबर-नवंबर में हवा की गति कम होने, तापमान गिरने और पराली जलाने जैसी वजहों से कई शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है। कानपुर जैसे औद्योगिक शहर में भी इस दौरान प्रदूषण पर नजर रखना जरूरी होता है। सांस के मरीजों और बुजुर्गों को इस समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
त्योहारों के लिए सुहावना मौसम
मानसून की विदाई के बाद आने वाला मौसम त्योहारों के लिए सबसे सुहावना माना जाता है। नवरात्र, दशहरा, दीपावली और छठ जैसे बड़े त्योहार इसी मौसम में आते हैं। न ज्यादा गर्मी, न ज्यादा ठंड, यह मौसम मेलों, पूजा-पंडालों और बाजारों की रौनक के लिए आदर्श होता है। साफ आसमान और खुशनुमा मौसम में लोग त्योहारों की तैयारियों में जुट जाते हैं।
कब से शुरू होगी असली सर्दी
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अक्टूबर के आखिर तक रातें और ठंडी होने लगेंगी। नवंबर में सर्दी का असर साफ दिखने लगेगा, जबकि दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। हालांकि सर्दी कितनी पड़ेगी, यह पश्चिमी विक्षोभों की सक्रियता और पहाड़ों पर बर्फबारी पर निर्भर करेगा। पहाड़ों पर जितनी ज्यादा बर्फबारी होती है, मैदानी इलाकों में उतनी ही ज्यादा ठंड पड़ती है।
घर की तैयारी अभी से करें
मानसून खत्म होने के बाद घर की देखभाल का भी यह सही समय है। बारिश के कारण दीवारों में आई सीलन को ठीक कराएं, छत की सफाई करें और पानी की निकासी की व्यवस्था जांच लें। गर्म कपड़े और रजाई-कंबल को धूप दिखाकर तैयार रखें। कूलर का पानी पूरी तरह खाली करके उसे सुखाकर रख दें, ताकि उसमें मच्छर न पनपें।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश से मानसून की विदाई के साथ ही बरसात का एक लंबा और यादगार दौर खत्म हो गया है। अब शरद ऋतु दस्तक दे चुकी है और आने वाले हफ्तों में धीरे-धीरे सर्दी अपना असर दिखाएगी। इस बदलते मौसम में सेहत, खेती और घर की देखभाल पर ध्यान देकर हम इस खूबसूरत मौसम का पूरा आनंद ले सकते हैं।
मौसम से जुड़ी हर ताजा जानकारी के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
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