जीएसटी काउंसिल: अफसरों की गिरफ्तारी की शक्ति खत्म, व्यापारियों को राहत
57th GST Council: Arrest powers scrapped, prosecution threshold raised to ₹5 crore, faster refunds
Kanpur Live News Desk ·

देश के करोड़ों व्यापारियों और कारोबारियों के लिए जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक से बड़ी राहत की खबर आई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुई बैठक में जीएसटी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई अहम फैसले लिए गए। इनमें जीएसटी अफसरों की गिरफ्तारी की शक्ति हटाने, अभियोजन (प्रॉसिक्यूशन) की सीमा एक करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने, पेनल्टी घटाने और रिफंड प्रक्रिया तेज करने जैसे फैसले शामिल हैं। ज्यादातर बदलाव 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे, क्योंकि इसके लिए जीएसटी कानून, नियमों और सिस्टम में संशोधन करना होगा।
गिरफ्तारी की शक्ति हटाने का प्रस्ताव
अब तक सीजीएसटी कानून की धारा 69 के तहत जीएसटी अधिकारियों को कुछ मामलों में गिरफ्तारी का अधिकार था। काउंसिल ने इस धारा को हटाने का प्रस्ताव किया है। व्यापारी संगठन लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे, क्योंकि उनका कहना था कि गिरफ्तारी के डर से ईमानदार कारोबारी भी परेशान होते हैं। इसके साथ ही धारा 132 के तहत अपराधों का दायरा सीमित करने और सजा के प्रावधानों को तर्कसंगत बनाने का भी फैसला हुआ है।
अभियोजन की सीमा 5 करोड़
अब तक एक करोड़ रुपये से ज्यादा की टैक्स गड़बड़ी पर अभियोजन यानी आपराधिक मुकदमे की कार्रवाई हो सकती थी। अब इस सीमा को बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का फैसला हुआ है। इसका मतलब है कि छोटी गलतियों या कम रकम के मामलों में कारोबारियों को आपराधिक मुकदमे का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके बजाय वसूली, ब्याज और अनुपात के हिसाब से पेनल्टी जैसे रास्ते अपनाए जाएंगे।
पेनल्टी और नोटिस में राहत
सामान्य पेनल्टी: धारा 125 के तहत अधिकतम सामान्य पेनल्टी 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये होगी।
छोटे नोटिस बंद: 10,000 रुपये से कम की रकम के लिए कारण बताओ नोटिस जारी नहीं होगा।
लेट फीस माफी: पांच करोड़ रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाले करदाता अगर रिटर्न की नियत तारीख वाले महीने के अंत तक रिटर्न दाखिल कर देते हैं, तो उनकी लेट फीस माफ होगी।
छोटे व्यापारियों के लिए यह बड़ी राहत है, क्योंकि उन्हें मामूली रकम के लिए भी नोटिस और दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे।
रिफंड होगा तेज
निर्यातकों और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर वाले कारोबारियों के लिए रिफंड एक बड़ी समस्या रही है। अब इसे आसान बनाने के कई फैसले हुए हैं:
जीरो-रेटेड सप्लाई और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के मामलों में जोखिम आकलन के आधार पर 90 प्रतिशत रिफंड प्रोविजनल रूप से दिया जा सकेगा।
कैश लेजर में जमा अतिरिक्त रकम के योग्य रिफंड सिस्टम के जरिये अपने आप मंजूर होंगे।
रिफंड आवेदन की पावती की अवधि 15 दिन से घटाकर 10 दिन होगी। अधिकारी जवाब नहीं देगा, तो पावती अपने आप मान ली जाएगी।
इनवर्टेड ड्यूटी के मामलों में इनपुट सेवाओं पर भी रिफंड मिलेगा। यह 1 नवंबर 2026 या उसके बाद लिए गए क्रेडिट पर लागू होगा।
कुछ खास कैपिटल गुड्स के आईटीसी के रिफंड की अनुमति भी दी जाएगी।
फेसलेस असेसमेंट
काउंसिल ने एक केंद्रीकृत फेसलेस व्यवस्था की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। इसके तहत केंद्रीय जीएसटी के दायरे वाले, कई राज्यों में कारोबार करने वाले करीब दो लाख करदाताओं के लिए एक ही खिड़की होगी। जांच, ऑडिट, निर्णय, अपील, करदाता सेवाएं और शिकायतें, सब एक राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर होंगी। नोटिस, सुनवाई और आदेश ऑनलाइन जारी होंगे, जिससे अफसरों से आमने-सामने मिलने की जरूरत कम होगी। सीबीआईसी के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी के अनुसार इस ढांचे का मसौदा 2026 के अंत तक सार्वजनिक सलाह के लिए रखा जा सकता है।
आईटीसी का दायरा बढ़ा
आउटडोर कैटरिंग, स्वास्थ्य और जीवन बीमा, टेलीकॉम टावर और कुछ पाइपलाइनों पर आईटीसी से जुड़ी पाबंदियां हटाने का फैसला हुआ है। इससे इन सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों की लागत घटेगी। ई-कॉमर्स पर सामान बेचने वाले छोटे विक्रेताओं के लिए, जिनकी किसी राज्य में भौतिक मौजूदगी नहीं है, सरल पंजीकरण की व्यवस्था होगी।
ईमानदार खरीदारों की सुरक्षा
कई बार कारोबारी किसी सप्लायर से वैध बिल पर माल खरीदते हैं और पूरा भुगतान भी करते हैं, लेकिन बाद में सप्लायर के फर्जी निकलने पर उनका आईटीसी अटक जाता है। काउंसिल ने ऐसे वास्तविक खरीदारों को सुरक्षा देने के लिए अधिकारियों की एक समिति बनाई है। यह समिति तीन महीने में अपनी रिपोर्ट अगली काउंसिल बैठक में देगी। कानपुर में हाल में पकड़े गए फर्जी फर्म मामलों को देखते हुए यह फैसला स्थानीय कारोबारियों के लिए भी अहम है।
साल में एक बार बदलेंगी दरें
बताया गया है कि जीएसटी दरों में बदलाव अब साल में एक बार होगा। इससे कारोबारियों को अपनी कीमतें और योजनाएं तय करने में स्थिरता मिलेगी, क्योंकि बार-बार दर बदलने से बिलिंग और सॉफ्टवेयर में बदलाव करने पड़ते हैं।
वित्त मंत्री ने क्या कहा
रिपोर्टों के अनुसार वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले साल दरों को तर्कसंगत बनाने से राजस्व का नुकसान नहीं हुआ और टैक्स संग्रह लगातार बढ़ता रहा। उन्होंने संकेत दिया कि दरों, आईटीसी और ड्यूटी इनवर्जन से जुड़े ज्यादातर बुनियादी मुद्दों का समाधान हो चुका है। सरकार अब ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जिसमें गलती करने वाले करदाताओं से सख्त कार्रवाई के बजाय वसूली, ब्याज और उचित पेनल्टी ली जाए।
कानपुर के कारोबारियों पर असर
कानपुर चमड़ा, होजरी, इंजीनियरिंग, प्लास्टिक और खाद्य उत्पादों का बड़ा केंद्र है। यहां से बड़ी मात्रा में निर्यात भी होता है। निर्यातकों को तेज रिफंड से वर्किंग कैपिटल की समस्या में राहत मिलेगी। छोटे व्यापारियों को कम पेनल्टी, लेट फीस माफी और मामूली नोटिस बंद होने से फायदा होगा। साथ ही गिरफ्तारी के प्रावधान हटने से कारोबारी माहौल में भरोसा बढ़ने की उम्मीद है।
ध्यान रखें
ये फैसले काउंसिल की सिफारिशें हैं। इन्हें लागू करने के लिए जीएसटी कानून और नियमों में संशोधन होगा। ज्यादातर बदलाव 1 अप्रैल 2027 से लागू होने की बात कही गई है। तब तक मौजूदा नियम ही लागू रहेंगे। इसलिए कारोबारी अपने रिटर्न और भुगतान समय पर करते रहें और किसी बदलाव को लागू मानने से पहले सरकारी अधिसूचना जरूर देखें।
निष्कर्ष
57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक को व्यापारियों के लिए भरोसे वाला कदम माना जा रहा है। गिरफ्तारी की शक्ति हटाने, अभियोजन सीमा बढ़ाने, पेनल्टी घटाने और तेज रिफंड जैसे फैसलों से जीएसटी व्यवस्था ज्यादा सरल और करदाता हितैषी बनने की उम्मीद है।
बिजनेस, टैक्स और आपकी जेब से जुड़ी हर खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
जीएसटी काउंसिल: अफसरों की गिरफ्तारी की शक्ति खत्म, व्यापारियों को राहत
देश के करोड़ों व्यापारियों और कारोबारियों के लिए जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक से बड़ी राहत की खबर आई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुई बैठक में जीएसटी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई अहम फैसले लिए गए। इनमें जीएसटी अफसरों की गिरफ्तारी की शक्ति हटाने, अभियोजन (प्रॉसिक्यूशन) की सीमा एक करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने, पेनल्टी घटाने और रिफंड प्रक्रिया तेज करने जैसे फैसले शामिल हैं। ज्यादातर बदलाव 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे, क्योंकि इसके लिए जीएसटी कानून, नियमों और सिस्टम में संशोधन करना होगा।
गिरफ्तारी की शक्ति हटाने का प्रस्ताव
अब तक सीजीएसटी कानून की धारा 69 के तहत जीएसटी अधिकारियों को कुछ मामलों में गिरफ्तारी का अधिकार था। काउंसिल ने इस धारा को हटाने का प्रस्ताव किया है। व्यापारी संगठन लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे, क्योंकि उनका कहना था कि गिरफ्तारी के डर से ईमानदार कारोबारी भी परेशान होते हैं। इसके साथ ही धारा 132 के तहत अपराधों का दायरा सीमित करने और सजा के प्रावधानों को तर्कसंगत बनाने का भी फैसला हुआ है।
अभियोजन की सीमा 5 करोड़
अब तक एक करोड़ रुपये से ज्यादा की टैक्स गड़बड़ी पर अभियोजन यानी आपराधिक मुकदमे की कार्रवाई हो सकती थी। अब इस सीमा को बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का फैसला हुआ है। इसका मतलब है कि छोटी गलतियों या कम रकम के मामलों में कारोबारियों को आपराधिक मुकदमे का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके बजाय वसूली, ब्याज और अनुपात के हिसाब से पेनल्टी जैसे रास्ते अपनाए जाएंगे।
पेनल्टी और नोटिस में राहत
सामान्य पेनल्टी: धारा 125 के तहत अधिकतम सामान्य पेनल्टी 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये होगी।
छोटे नोटिस बंद: 10,000 रुपये से कम की रकम के लिए कारण बताओ नोटिस जारी नहीं होगा।
लेट फीस माफी: पांच करोड़ रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाले करदाता अगर रिटर्न की नियत तारीख वाले महीने के अंत तक रिटर्न दाखिल कर देते हैं, तो उनकी लेट फीस माफ होगी।
छोटे व्यापारियों के लिए यह बड़ी राहत है, क्योंकि उन्हें मामूली रकम के लिए भी नोटिस और दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे।
रिफंड होगा तेज
निर्यातकों और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर वाले कारोबारियों के लिए रिफंड एक बड़ी समस्या रही है। अब इसे आसान बनाने के कई फैसले हुए हैं:
जीरो-रेटेड सप्लाई और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के मामलों में जोखिम आकलन के आधार पर 90 प्रतिशत रिफंड प्रोविजनल रूप से दिया जा सकेगा।
कैश लेजर में जमा अतिरिक्त रकम के योग्य रिफंड सिस्टम के जरिये अपने आप मंजूर होंगे।
रिफंड आवेदन की पावती की अवधि 15 दिन से घटाकर 10 दिन होगी। अधिकारी जवाब नहीं देगा, तो पावती अपने आप मान ली जाएगी।
इनवर्टेड ड्यूटी के मामलों में इनपुट सेवाओं पर भी रिफंड मिलेगा। यह 1 नवंबर 2026 या उसके बाद लिए गए क्रेडिट पर लागू होगा।
कुछ खास कैपिटल गुड्स के आईटीसी के रिफंड की अनुमति भी दी जाएगी।
फेसलेस असेसमेंट
काउंसिल ने एक केंद्रीकृत फेसलेस व्यवस्था की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। इसके तहत केंद्रीय जीएसटी के दायरे वाले, कई राज्यों में कारोबार करने वाले करीब दो लाख करदाताओं के लिए एक ही खिड़की होगी। जांच, ऑडिट, निर्णय, अपील, करदाता सेवाएं और शिकायतें, सब एक राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर होंगी। नोटिस, सुनवाई और आदेश ऑनलाइन जारी होंगे, जिससे अफसरों से आमने-सामने मिलने की जरूरत कम होगी। सीबीआईसी के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी के अनुसार इस ढांचे का मसौदा 2026 के अंत तक सार्वजनिक सलाह के लिए रखा जा सकता है।
आईटीसी का दायरा बढ़ा
आउटडोर कैटरिंग, स्वास्थ्य और जीवन बीमा, टेलीकॉम टावर और कुछ पाइपलाइनों पर आईटीसी से जुड़ी पाबंदियां हटाने का फैसला हुआ है। इससे इन सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों की लागत घटेगी। ई-कॉमर्स पर सामान बेचने वाले छोटे विक्रेताओं के लिए, जिनकी किसी राज्य में भौतिक मौजूदगी नहीं है, सरल पंजीकरण की व्यवस्था होगी।
ईमानदार खरीदारों की सुरक्षा
कई बार कारोबारी किसी सप्लायर से वैध बिल पर माल खरीदते हैं और पूरा भुगतान भी करते हैं, लेकिन बाद में सप्लायर के फर्जी निकलने पर उनका आईटीसी अटक जाता है। काउंसिल ने ऐसे वास्तविक खरीदारों को सुरक्षा देने के लिए अधिकारियों की एक समिति बनाई है। यह समिति तीन महीने में अपनी रिपोर्ट अगली काउंसिल बैठक में देगी। कानपुर में हाल में पकड़े गए फर्जी फर्म मामलों को देखते हुए यह फैसला स्थानीय कारोबारियों के लिए भी अहम है।
साल में एक बार बदलेंगी दरें
बताया गया है कि जीएसटी दरों में बदलाव अब साल में एक बार होगा। इससे कारोबारियों को अपनी कीमतें और योजनाएं तय करने में स्थिरता मिलेगी, क्योंकि बार-बार दर बदलने से बिलिंग और सॉफ्टवेयर में बदलाव करने पड़ते हैं।
वित्त मंत्री ने क्या कहा
रिपोर्टों के अनुसार वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले साल दरों को तर्कसंगत बनाने से राजस्व का नुकसान नहीं हुआ और टैक्स संग्रह लगातार बढ़ता रहा। उन्होंने संकेत दिया कि दरों, आईटीसी और ड्यूटी इनवर्जन से जुड़े ज्यादातर बुनियादी मुद्दों का समाधान हो चुका है। सरकार अब ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जिसमें गलती करने वाले करदाताओं से सख्त कार्रवाई के बजाय वसूली, ब्याज और उचित पेनल्टी ली जाए।
कानपुर के कारोबारियों पर असर
कानपुर चमड़ा, होजरी, इंजीनियरिंग, प्लास्टिक और खाद्य उत्पादों का बड़ा केंद्र है। यहां से बड़ी मात्रा में निर्यात भी होता है। निर्यातकों को तेज रिफंड से वर्किंग कैपिटल की समस्या में राहत मिलेगी। छोटे व्यापारियों को कम पेनल्टी, लेट फीस माफी और मामूली नोटिस बंद होने से फायदा होगा। साथ ही गिरफ्तारी के प्रावधान हटने से कारोबारी माहौल में भरोसा बढ़ने की उम्मीद है।
ध्यान रखें
ये फैसले काउंसिल की सिफारिशें हैं। इन्हें लागू करने के लिए जीएसटी कानून और नियमों में संशोधन होगा। ज्यादातर बदलाव 1 अप्रैल 2027 से लागू होने की बात कही गई है। तब तक मौजूदा नियम ही लागू रहेंगे। इसलिए कारोबारी अपने रिटर्न और भुगतान समय पर करते रहें और किसी बदलाव को लागू मानने से पहले सरकारी अधिसूचना जरूर देखें।
निष्कर्ष
57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक को व्यापारियों के लिए भरोसे वाला कदम माना जा रहा है। गिरफ्तारी की शक्ति हटाने, अभियोजन सीमा बढ़ाने, पेनल्टी घटाने और तेज रिफंड जैसे फैसलों से जीएसटी व्यवस्था ज्यादा सरल और करदाता हितैषी बनने की उम्मीद है।
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