Bikru Case: Allahabad High Court Grants Conditional Bail to Dismissed SI KK Sharma and Shivam Dubey After Six Years
up-politics - Thu Sep 24

मुख्य बातें:
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिकरू कांड में आरोपी बर्खास्त सब-इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार (केके) शर्मा और शिवम दुबे उर्फ दलाल को सशर्त जमानत दी।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने 23 सितंबर को दिया।
दोनों आरोपी जुलाई 2020 से यानी छह साल से ज्यादा समय से जेल में थे।
यह उनकी सातवीं जमानत अर्जी थी, इससे पहले छह अर्जियां खारिज हो चुकी थीं।
मुकदमे में 25 अभियोजन गवाहों के बयान हो चुके हैं, केवल नौ गवाह बाकी हैं।
कानपुर के चौबेपुर क्षेत्र के बहुचर्चित बिकरू कांड में छह साल बाद दो आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में नामजद आरोपी बर्खास्त पुलिसकर्मी कृष्ण कुमार शर्मा और शिवम दुबे उर्फ दलाल की सशर्त जमानत मंजूर कर ली है। दोनों जुलाई 2020 से जेल में बंद थे।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने दिया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार याचियों के खिलाफ चौबेपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उन पर बलवा, घातक हथियारों से लैस होना, हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती की संपत्ति का लेनदेन और डकैती के दौरान हत्या जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।
अदालत ने तीन मुख्य बातों को आधार बनाकर जमानत दी:
जेल में बिताई गई लंबी अवधि: दोनों आरोपी छह साल से ज्यादा समय से जेल में थे।
मुकदमे की मौजूदा स्थिति: ट्रायल काफी आगे बढ़ चुका है।
सह-आरोपियों को मिली जमानत: मामले के कुछ दूसरे आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
बचाव पक्ष की दलील
याचियों के वकील ने अदालत को बताया कि आरोपी जुलाई 2020 से लगातार जेल में हैं। मुकदमे में 25 अभियोजन गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं और अब केवल नौ गवाहों का परीक्षण बाकी है। वकील ने यह भी कहा कि अभियोजन के अहम साक्ष्य दर्ज हो चुके हैं और बाकी ज्यादातर गवाह डॉक्टर और पुलिस अधिकारी हैं, इसलिए अब गवाहों को प्रभावित करने की संभावना बहुत कम है।
राज्य सरकार की ओर से जमानत अर्जी का विरोध किया गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने सशर्त जमानत मंजूर कर ली।
यह दोनों आरोपियों की सातवीं जमानत अर्जी थी। इससे पहले उनकी छह जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं।
क्या था बिकरू कांड
बिकरू कांड उत्तर प्रदेश के हाल के इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक माना जाता है। 2 और 3 जुलाई 2020 की रात तत्कालीन सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में शिवराजपुर, चौबेपुर और बिठूर थानों की पुलिस टीम ने बिकरू गांव में कुख्यात अपराधी विकास दुबे के घर दबिश दी थी।
रिपोर्टों के अनुसार दबिश की सूचना पहले ही लीक हो गई थी। जैसे ही पुलिस टीम गांव पहुंची, विकास दुबे के गिरोह ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस हमले में सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों की जान चली गई थी। इस घटना से पूरे देश में हड़कंप मच गया था। बाद में जुलाई 2020 में ही विकास दुबे पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।
40 आरोपी भेजे गए थे जेल
घटना के बाद हुई जांच में पुलिस ने कुल 40 आरोपियों को जेल भेजा था। इनमें तत्कालीन चौबेपुर थानाध्यक्ष विनय तिवारी और बिकरू के हल्का इंचार्ज एसआई केके शर्मा भी शामिल थे। जांच में यह सवाल उठा था कि दबिश की जानकारी गिरोह तक कैसे पहुंची।
केके शर्मा और वायरल वीडियो
जांच अधिकारियों ने पाया था कि एसआई केके शर्मा के विकास दुबे और उसके गिरोह के सदस्य अमर दुबे से संबंध थे। रिपोर्टों के अनुसार मई 2020 में अमर दुबे की शादी का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें केके शर्मा भी मौजूद दिखे थे। इस वीडियो में विकास दुबे और गिरोह के अन्य सदस्य भी नजर आए थे। यह वीडियो बिकरू कांड के बाद सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था और इसी आधार पर केके शर्मा पर कार्रवाई की गई थी।
शिवम दुबे पर क्या आरोप
शिवम दुबे उर्फ दलाल पर मुखबिरी, आपराधिक षड्यंत्र रचने, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए थे। उसे भी अब हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है।
जमानत का मतलब बरी होना नहीं
आम लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि जमानत मिलने का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है। जमानत केवल इतना तय करती है कि मुकदमे के दौरान आरोपी को जेल में रखने की जरूरत है या नहीं। मुकदमा आगे चलता रहेगा और अंतिम फैसला सबूतों और गवाहों के आधार पर ट्रायल कोर्ट में होगा।
सशर्त जमानत में अदालत आम तौर पर कुछ शर्तें लगाती है, जैसे:
मुकदमे की हर तारीख पर अदालत में हाजिर होना
गवाहों से संपर्क न करना या उन्हें प्रभावित न करना
बिना अनुमति शहर या देश से बाहर न जाना
किसी नए अपराध में शामिल न होना
इनमें से किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर जमानत रद्द की जा सकती है।
लंबी सुनवाई और न्याय का सवाल
बिकरू कांड को छह साल से ज्यादा हो चुके हैं और मुकदमा अभी पूरा नहीं हुआ है। कानूनी जानकार अक्सर कहते हैं कि लंबे समय तक विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में रहना अपने आप में एक गंभीर मुद्दा है। अदालतें कई बार यह मानती रही हैं कि अगर ट्रायल में ज्यादा समय लग रहा है और आरोपी लंबे समय से जेल में है, तो जमानत पर विचार किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, शहीद पुलिसकर्मियों के परिवार भी इस मामले में जल्द और सख्त फैसले की उम्मीद लगाए हुए हैं।
इसलिए अब यह अहम है कि बाकी नौ गवाहों की गवाही जल्द पूरी हो और मामले में अंतिम फैसला आ सके।
आगे क्या
दोनों आरोपियों की रिहाई की प्रक्रिया अदालत के आदेश के बाद पूरी होगी। ट्रायल कोर्ट में मुकदमा जारी रहेगा। बाकी गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद बहस होगी और फिर फैसला आएगा।
kanpur.live बिकरू कांड से जुड़े हर कानूनी अपडेट पर नजर रखेगा।
मामले की टाइमलाइन
मई 2020: अमर दुबे की शादी, जिसका वीडियो बाद में वायरल हुआ।
2-3 जुलाई 2020 की रात: बिकरू गांव में दबिश के दौरान पुलिस टीम पर फायरिंग, आठ पुलिसकर्मियों की मौत।
जुलाई 2020: विकास दुबे पुलिस मुठभेड़ में मारा गया; कुल 40 आरोपी जेल भेजे गए।
2020 से 2026 तक: दोनों आरोपियों की छह जमानत अर्जियां खारिज हुईं।
23 सितंबर 2026: हाईकोर्ट से सातवीं अर्जी पर सशर्त जमानत मंजूर।
पुलिस व्यवस्था के लिए सबक
बिकरू कांड के बाद प्रदेश में पुलिस और अपराधियों के गठजोड़ को लेकर गंभीर बहस हुई थी। इस घटना ने दिखाया था कि अगर किसी दबिश की गोपनीय जानकारी बाहर पहुंच जाए, तो इसका नतीजा कितना भयावह हो सकता है। इसके बाद पुलिस विभाग में आंतरिक निगरानी, संदिग्ध संपर्कों की जांच और छापेमारी से जुड़ी सूचनाओं की गोपनीयता पर ज्यादा ध्यान देने की बात कही गई थी। शहीद पुलिसकर्मियों की याद आज भी कानपुर के लोगों के मन में ताजा है।
कानूनी जानकारों की नजर में
कानूनी जानकारों के अनुसार विचाराधीन कैदियों की जमानत पर फैसला करते समय अदालतें आम तौर पर कई बातों पर विचार करती हैं। इनमें अपराध की गंभीरता, आरोपी के भागने की आशंका, गवाहों को प्रभावित करने की संभावना, जेल में बिताया गया समय और मुकदमे की रफ्तार शामिल होती है। इस मामले में अदालत ने खास तौर पर यह माना कि अभियोजन के ज्यादातर अहम गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। यानी अब आरोपियों के बाहर आने से गवाही पर असर पड़ने का खतरा पहले के मुकाबले काफी कम है।
kanpur.live की राय
बिकरू कांड केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले आठ पुलिसकर्मियों के बलिदान की याद भी है। उनके परिवारों को न्याय मिलना चाहिए, और साथ ही हर आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार भी है। उम्मीद है कि मुकदमा जल्द अपने अंजाम तक पहुंचेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. बिकरू कांड में किसे जमानत मिली है? बर्खास्त एसआई कृष्ण कुमार शर्मा और शिवम दुबे उर्फ दलाल को।
प्रश्न 2. जमानत किस अदालत ने दी? इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने।
प्रश्न 3. आरोपी कब से जेल में थे? जुलाई 2020 से, यानी छह साल से ज्यादा समय से।
प्रश्न 4. बिकरू कांड कब हुआ था? 2 और 3 जुलाई 2020 की रात, कानपुर के चौबेपुर क्षेत्र के बिकरू गांव में।
प्रश्न 5. उस घटना में कितने पुलिसकर्मियों की जान गई थी? सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों की।
प्रश्न 6. क्या जमानत का मतलब आरोपों से बरी होना है? नहीं, मुकदमा जारी रहेगा और अंतिम फैसला ट्रायल के बाद होगा।
प्रश्न 7. मुकदमे में कितने गवाह बाकी हैं? रिपोर्टों के अनुसार केवल नौ गवाहों का परीक्षण बाकी है।
स्रोत: हाईकोर्ट के आदेश पर आधारित स्थानीय रिपोर्ट, 24 सितंबर 2026।
बिकरू कांड: छह साल बाद बर्खास्त एसआई केके शर्मा और शिवम दुबे को हाईकोर्ट से सशर्त जमानत
मुख्य बातें:
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिकरू कांड में आरोपी बर्खास्त सब-इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार (केके) शर्मा और शिवम दुबे उर्फ दलाल को सशर्त जमानत दी।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने 23 सितंबर को दिया।
दोनों आरोपी जुलाई 2020 से यानी छह साल से ज्यादा समय से जेल में थे।
यह उनकी सातवीं जमानत अर्जी थी, इससे पहले छह अर्जियां खारिज हो चुकी थीं।
मुकदमे में 25 अभियोजन गवाहों के बयान हो चुके हैं, केवल नौ गवाह बाकी हैं।
कानपुर के चौबेपुर क्षेत्र के बहुचर्चित बिकरू कांड में छह साल बाद दो आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में नामजद आरोपी बर्खास्त पुलिसकर्मी कृष्ण कुमार शर्मा और शिवम दुबे उर्फ दलाल की सशर्त जमानत मंजूर कर ली है। दोनों जुलाई 2020 से जेल में बंद थे।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने दिया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार याचियों के खिलाफ चौबेपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उन पर बलवा, घातक हथियारों से लैस होना, हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती की संपत्ति का लेनदेन और डकैती के दौरान हत्या जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।
अदालत ने तीन मुख्य बातों को आधार बनाकर जमानत दी:
जेल में बिताई गई लंबी अवधि: दोनों आरोपी छह साल से ज्यादा समय से जेल में थे।
मुकदमे की मौजूदा स्थिति: ट्रायल काफी आगे बढ़ चुका है।
सह-आरोपियों को मिली जमानत: मामले के कुछ दूसरे आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
बचाव पक्ष की दलील
याचियों के वकील ने अदालत को बताया कि आरोपी जुलाई 2020 से लगातार जेल में हैं। मुकदमे में 25 अभियोजन गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं और अब केवल नौ गवाहों का परीक्षण बाकी है। वकील ने यह भी कहा कि अभियोजन के अहम साक्ष्य दर्ज हो चुके हैं और बाकी ज्यादातर गवाह डॉक्टर और पुलिस अधिकारी हैं, इसलिए अब गवाहों को प्रभावित करने की संभावना बहुत कम है।
राज्य सरकार की ओर से जमानत अर्जी का विरोध किया गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने सशर्त जमानत मंजूर कर ली।
यह दोनों आरोपियों की सातवीं जमानत अर्जी थी। इससे पहले उनकी छह जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं।
क्या था बिकरू कांड
बिकरू कांड उत्तर प्रदेश के हाल के इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक माना जाता है। 2 और 3 जुलाई 2020 की रात तत्कालीन सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में शिवराजपुर, चौबेपुर और बिठूर थानों की पुलिस टीम ने बिकरू गांव में कुख्यात अपराधी विकास दुबे के घर दबिश दी थी।
रिपोर्टों के अनुसार दबिश की सूचना पहले ही लीक हो गई थी। जैसे ही पुलिस टीम गांव पहुंची, विकास दुबे के गिरोह ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस हमले में सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों की जान चली गई थी। इस घटना से पूरे देश में हड़कंप मच गया था। बाद में जुलाई 2020 में ही विकास दुबे पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।
40 आरोपी भेजे गए थे जेल
घटना के बाद हुई जांच में पुलिस ने कुल 40 आरोपियों को जेल भेजा था। इनमें तत्कालीन चौबेपुर थानाध्यक्ष विनय तिवारी और बिकरू के हल्का इंचार्ज एसआई केके शर्मा भी शामिल थे। जांच में यह सवाल उठा था कि दबिश की जानकारी गिरोह तक कैसे पहुंची।
केके शर्मा और वायरल वीडियो
जांच अधिकारियों ने पाया था कि एसआई केके शर्मा के विकास दुबे और उसके गिरोह के सदस्य अमर दुबे से संबंध थे। रिपोर्टों के अनुसार मई 2020 में अमर दुबे की शादी का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें केके शर्मा भी मौजूद दिखे थे। इस वीडियो में विकास दुबे और गिरोह के अन्य सदस्य भी नजर आए थे। यह वीडियो बिकरू कांड के बाद सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था और इसी आधार पर केके शर्मा पर कार्रवाई की गई थी।
शिवम दुबे पर क्या आरोप
शिवम दुबे उर्फ दलाल पर मुखबिरी, आपराधिक षड्यंत्र रचने, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए थे। उसे भी अब हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है।
जमानत का मतलब बरी होना नहीं
आम लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि जमानत मिलने का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है। जमानत केवल इतना तय करती है कि मुकदमे के दौरान आरोपी को जेल में रखने की जरूरत है या नहीं। मुकदमा आगे चलता रहेगा और अंतिम फैसला सबूतों और गवाहों के आधार पर ट्रायल कोर्ट में होगा।
सशर्त जमानत में अदालत आम तौर पर कुछ शर्तें लगाती है, जैसे:
मुकदमे की हर तारीख पर अदालत में हाजिर होना
गवाहों से संपर्क न करना या उन्हें प्रभावित न करना
बिना अनुमति शहर या देश से बाहर न जाना
किसी नए अपराध में शामिल न होना
इनमें से किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर जमानत रद्द की जा सकती है।
लंबी सुनवाई और न्याय का सवाल
बिकरू कांड को छह साल से ज्यादा हो चुके हैं और मुकदमा अभी पूरा नहीं हुआ है। कानूनी जानकार अक्सर कहते हैं कि लंबे समय तक विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में रहना अपने आप में एक गंभीर मुद्दा है। अदालतें कई बार यह मानती रही हैं कि अगर ट्रायल में ज्यादा समय लग रहा है और आरोपी लंबे समय से जेल में है, तो जमानत पर विचार किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, शहीद पुलिसकर्मियों के परिवार भी इस मामले में जल्द और सख्त फैसले की उम्मीद लगाए हुए हैं।
इसलिए अब यह अहम है कि बाकी नौ गवाहों की गवाही जल्द पूरी हो और मामले में अंतिम फैसला आ सके।
आगे क्या
दोनों आरोपियों की रिहाई की प्रक्रिया अदालत के आदेश के बाद पूरी होगी। ट्रायल कोर्ट में मुकदमा जारी रहेगा। बाकी गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद बहस होगी और फिर फैसला आएगा।
kanpur.live बिकरू कांड से जुड़े हर कानूनी अपडेट पर नजर रखेगा।
मामले की टाइमलाइन
मई 2020: अमर दुबे की शादी, जिसका वीडियो बाद में वायरल हुआ।
2-3 जुलाई 2020 की रात: बिकरू गांव में दबिश के दौरान पुलिस टीम पर फायरिंग, आठ पुलिसकर्मियों की मौत।
जुलाई 2020: विकास दुबे पुलिस मुठभेड़ में मारा गया; कुल 40 आरोपी जेल भेजे गए।
2020 से 2026 तक: दोनों आरोपियों की छह जमानत अर्जियां खारिज हुईं।
23 सितंबर 2026: हाईकोर्ट से सातवीं अर्जी पर सशर्त जमानत मंजूर।
पुलिस व्यवस्था के लिए सबक
बिकरू कांड के बाद प्रदेश में पुलिस और अपराधियों के गठजोड़ को लेकर गंभीर बहस हुई थी। इस घटना ने दिखाया था कि अगर किसी दबिश की गोपनीय जानकारी बाहर पहुंच जाए, तो इसका नतीजा कितना भयावह हो सकता है। इसके बाद पुलिस विभाग में आंतरिक निगरानी, संदिग्ध संपर्कों की जांच और छापेमारी से जुड़ी सूचनाओं की गोपनीयता पर ज्यादा ध्यान देने की बात कही गई थी। शहीद पुलिसकर्मियों की याद आज भी कानपुर के लोगों के मन में ताजा है।
कानूनी जानकारों की नजर में
कानूनी जानकारों के अनुसार विचाराधीन कैदियों की जमानत पर फैसला करते समय अदालतें आम तौर पर कई बातों पर विचार करती हैं। इनमें अपराध की गंभीरता, आरोपी के भागने की आशंका, गवाहों को प्रभावित करने की संभावना, जेल में बिताया गया समय और मुकदमे की रफ्तार शामिल होती है। इस मामले में अदालत ने खास तौर पर यह माना कि अभियोजन के ज्यादातर अहम गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। यानी अब आरोपियों के बाहर आने से गवाही पर असर पड़ने का खतरा पहले के मुकाबले काफी कम है।
kanpur.live की राय
बिकरू कांड केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले आठ पुलिसकर्मियों के बलिदान की याद भी है। उनके परिवारों को न्याय मिलना चाहिए, और साथ ही हर आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार भी है। उम्मीद है कि मुकदमा जल्द अपने अंजाम तक पहुंचेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. बिकरू कांड में किसे जमानत मिली है? बर्खास्त एसआई कृष्ण कुमार शर्मा और शिवम दुबे उर्फ दलाल को।
प्रश्न 2. जमानत किस अदालत ने दी? इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने।
प्रश्न 3. आरोपी कब से जेल में थे? जुलाई 2020 से, यानी छह साल से ज्यादा समय से।
प्रश्न 4. बिकरू कांड कब हुआ था? 2 और 3 जुलाई 2020 की रात, कानपुर के चौबेपुर क्षेत्र के बिकरू गांव में।
प्रश्न 5. उस घटना में कितने पुलिसकर्मियों की जान गई थी? सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों की।
प्रश्न 6. क्या जमानत का मतलब आरोपों से बरी होना है? नहीं, मुकदमा जारी रहेगा और अंतिम फैसला ट्रायल के बाद होगा।
प्रश्न 7. मुकदमे में कितने गवाह बाकी हैं? रिपोर्टों के अनुसार केवल नौ गवाहों का परीक्षण बाकी है।
स्रोत: हाईकोर्ट के आदेश पर आधारित स्थानीय रिपोर्ट, 24 सितंबर 2026।