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1 अक्टूबर से बदल गए कई बड़े नियम: एलपीजी सब्सिडी, बैंक एफडी, एसबीआई एटीएम से लेकर एनपीएस तक, जानें आपकी जेब पर क्या असर

New rules from October 1, 2026: LPG subsidy, FD, SBI ATM, NPS and more

Kanpur Live News Desk ·

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1 अक्टूबर से बदल गए कई बड़े नियम: एलपीजी सब्सिडी, बैंक एफडी, एसबीआई एटीएम से लेकर एनपीएस तक, जानें आपकी जेब पर क्या असर
हर महीने की पहली तारीख आम लोगों की जेब से जुड़े कई बदलाव लेकर आती है। 1 अक्टूबर 2026 भी ऐसी ही तारीख है, जिस दिन से रसोई गैस, बैंक जमा, एटीएम, पेंशन, संपत्ति खरीद और जन्म-मृत्यु पंजीकरण से जुड़े कई नियम बदल गए हैं। त्योहारों का मौसम शुरू होने वाला है, ऐसे में इन बदलावों की जानकारी होना हर परिवार के लिए जरूरी है, ताकि खर्च की योजना बनाते समय किसी तरह की परेशानी न हो। आइए एक-एक करके समझते हैं कि क्या बदला है और इसका आप पर क्या असर पड़ेगा। 1. एलपीजी सब्सिडी के लिए बायोमेट्रिक आधार जरूरी सबसे बड़ा बदलाव रसोई गैस की सब्सिडी से जुड़ा है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार 1 अक्टूबर 2026 से बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन यानी ई-केवाईसी के बिना घरेलू गैस सिलेंडर पर सब्सिडी नहीं मिलेगी। यहां एक बात साफ समझ लेनी चाहिए। ई-केवाईसी न होने पर सिलेंडर मिलना बंद नहीं होगा, लेकिन उस पर मिलने वाली सब्सिडी नहीं मिलेगी। यानी आपको सिलेंडर की पूरी बाजार कीमत चुकानी पड़ सकती है। क्या करें: अगर आपकी ई-केवाईसी अभी तक नहीं हुई है, तो आधार कार्ड और गैस पासबुक लेकर अपनी गैस एजेंसी जाएं। बायोमेट्रिक यानी अंगूठे के निशान से यह प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है। तेल कंपनियों के आधिकारिक मोबाइल ऐप पर भी यह सुविधा मिलती है। ई-केवाईसी पूरी तरह निःशुल्क है, इसके नाम पर किसी को पैसे न दें। 2. दो सिलेंडर बुकिंग के बीच 25 दिन का अंतर नए नियम के तहत अब दो सिलेंडर बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अंतर रखना जरूरी होगा। यह नियम शहर और गांव दोनों जगह लागू होगा और पिछली डिलीवरी के 25 दिन बाद ही अगली बुकिंग की जा सकेगी। बड़े परिवारों या ज्यादा गैस इस्तेमाल करने वाले घरों को अब अपनी बुकिंग पहले से योजना बनाकर करनी होगी। सिलेंडर खत्म होने से कुछ दिन पहले ही बुकिंग की तारीख नोट कर लें, ताकि बीच में दिक्कत न आए। 3. कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर हुआ महंगा त्योहारी सीजन से पहले होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और छोटे खाद्य कारोबारियों के लिए बुरी खबर है। तेल कंपनियों ने 1 अक्टूबर को 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 70 रुपये से ज्यादा बढ़ा दी है। रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली में इसकी कीमत 2,810 रुपये तक पहुंच गई है। कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने का असर होटल-रेस्टोरेंट के खाने की कीमतों, मिठाई की दुकानों और कैटरिंग सेवाओं पर पड़ सकता है। दीपावली के आसपास मिठाइयों की मांग बढ़ती है, ऐसे में दुकानदारों की लागत बढ़ना ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है। घरेलू सिलेंडर की कीमत में बदलाव की जानकारी के लिए अपनी गैस एजेंसी या तेल कंपनी की वेबसाइट देखें। 4. बैंक एफडी पर आरबीआई के नए नियम भारतीय रिजर्व बैंक ने फिक्स्ड डिपॉजिट, खासकर बल्क डिपॉजिट से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं, जो 1 अक्टूबर से लागू हो गए हैं: बल्क डिपॉजिट की नई सीमा: अब 3 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की एफडी को बल्क डिपॉजिट माना जाएगा। पहले यह सीमा 2 करोड़ रुपये थी। हर दिन सुबह 10 बजे तक दरें प्रकाशित: बैंकों को अपने बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरें हर कार्यदिवस सुबह 10 बजे तक अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर डालनी होंगी, जिसमें 10:10 बजे तक की मोहलत है। शाखाओं में एक जैसी दर: बैंक अलग-अलग शाखाओं के आधार पर एक ही तरह के बल्क डिपॉजिट पर अलग ब्याज दर नहीं दे सकेंगे। आम छोटे निवेशकों पर इसका सीधा असर कम है, क्योंकि यह मुख्य रूप से बड़ी जमा राशियों से जुड़ा है। लेकिन इससे बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और जमाकर्ताओं को अलग-अलग बैंकों की दरों की तुलना करना आसान होगा। 5. एसबीआई सैलरी अकाउंट: दूसरे बैंक के एटीएम पर कम फ्री लेनदेन अगर आपका भारतीय स्टेट बैंक में सैलरी पैकेज अकाउंट है, तो ध्यान दें। 1 अक्टूबर 2026 से कुछ सैलरी पैकेज खातों के लिए दूसरे बैंकों के एटीएम पर मुफ्त लेनदेन की सीमा 10 से घटाकर 5 प्रति माह कर दी गई है। इसमें पैसे निकालना और बैलेंस देखना, दोनों तरह के लेनदेन गिने जाएंगे। क्या करें: जहां तक संभव हो, एसबीआई के अपने एटीएम का इस्तेमाल करें। बैलेंस चेक करने के लिए एटीएम के बजाय मोबाइल बैंकिंग ऐप, एसएमएस या मिस्ड कॉल सेवा का उपयोग करें। छोटे भुगतान के लिए यूपीआई का इस्तेमाल करके नकद निकासी की जरूरत कम की जा सकती है। अपने खाते पर लागू सटीक शर्तों की जानकारी बैंक से जरूर ले लें। 6. एनपीएस में नया शुल्क और नया फीचर नेशनल पेंशन सिस्टम में भी दो अहम बदलाव हुए हैं। पहला, अब पॉइंट ऑफ प्रेजेंस यानी पीओपी के जरिये नया एनपीएस खाता खोलने पर 200 रुपये का एकमुश्त ऑनबोर्डिंग शुल्क देना होगा। दूसरा, एनपीएस में 'एनपीएस स्वास्थ्य' नाम से एक नया फीचर जोड़ा गया है, जिसके तहत एनपीएस खाते के साथ फैमिली फ्लोटर सुपर टॉप-अप हेल्थ इंश्योरेंस का लाभ मिल सकेगा। इसकी शर्तें, प्रीमियम और कवरेज की पूरी जानकारी लेने के बाद ही कोई फैसला लें। 7. एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदना हुआ आसान किसी प्रवासी भारतीय यानी एनआरआई से मकान, दुकान या जमीन खरीदने वालों के लिए राहत की खबर है। अब व्यक्तिगत खरीदारों और एचयूएफ को टीडीएस काटने के लिए अलग से टैन नंबर लेने की जरूरत नहीं होगी। वे अपने पैन के आधार पर चालान के जरिये ही टीडीएस काटकर जमा कर सकेंगे। पहले एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदने पर टैन लेना एक अतिरिक्त कागजी झंझट था, जिसमें समय लगता था। नई व्यवस्था से यह प्रक्रिया आसान होगी। हालांकि टीडीएस की दरें और अन्य नियम जटिल हो सकते हैं, इसलिए बड़ी प्रॉपर्टी डील में किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट की सलाह जरूर लें। 8. जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नियम सख्त 1 अक्टूबर से जन्म और मृत्यु पंजीकरण से जुड़े संशोधित नियम लागू हो गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार अब देर से पंजीकरण कराना पहले से ज्यादा सख्त होगा। एक से दो साल की देरी होने पर जिलाधिकारी या उपजिलाधिकारी के आदेश की जरूरत होगी, जबकि दो साल से ज्यादा देरी के मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट स्तर की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। क्या करें: बच्चे के जन्म या परिवार में किसी की मृत्यु होने पर तय समय के भीतर ही नगर निगम, नगर पालिका या ग्राम पंचायत में पंजीकरण करा लें। जन्म प्रमाण पत्र आज स्कूल में दाखिले, पासपोर्ट, आधार और कई सरकारी योजनाओं के लिए जरूरी दस्तावेज है। मृत्यु प्रमाण पत्र संपत्ति, बीमा और बैंक खातों से जुड़े कामों में अनिवार्य होता है। 9. बुजुर्ग पेंशनभोगी अभी से जमा कर सकेंगे जीवन प्रमाण पत्र बुजुर्ग पेंशनभोगी 1 अक्टूबर 2026 से ही अपना डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकेंगे, जबकि सामान्य पेंशनभोगियों के लिए यह विंडो नवंबर में खुलेगी। इसे फेस आरडी ऐप, कॉमन सर्विस सेंटर या बैंक के जरिये जमा किया जा सकता है। समय पर जीवन प्रमाण पत्र जमा करने से पेंशन बिना रुकावट मिलती रहती है। बुजुर्गों को सलाह है कि आखिरी दिनों की भीड़ से बचने के लिए इसे जल्द जमा कर दें। 10. 15 अक्टूबर से यूपीआई पर एमडीआर डिजिटल भुगतान से जुड़ा एक बदलाव 15 अक्टूबर से लागू होगा। चुनिंदा व्यापारी लेनदेन में 2,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लागू होगा। वहीं 2,000 रुपये तक के भुगतान और छोटे व्यापारियों के लिए जीरो-एमडीआर की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी। एमडीआर वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारी को बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को देना होता है। आम ग्राहकों के लिए यूपीआई से भुगतान करना पहले की तरह ही रहेगा। इसका असर मुख्य रूप से कुछ बड़े व्यापारियों पर पड़ सकता है। दिल्ली-एनसीआर से जुड़े बदलाव दिल्ली में डीटीसी और क्लस्टर बसों में महिलाओं के मुफ्त सफर के लिए अब सहेली पिंक स्मार्ट कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है और कागजी पिंक टिकट बंद हो गए हैं। कार्ड न होने पर महिलाओं को सामान्य किराया देना होगा। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर में बिना पीयूसी प्रमाण पत्र के वाहनों को पेट्रोल-डीजल न देने का नियम भी चर्चा में है। जो कानपुरवासी काम या पढ़ाई के सिलसिले में दिल्ली-एनसीआर जाते हैं, उन्हें इन नियमों की जानकारी रखनी चाहिए। निर्यातकों के लिए भी बदलाव निर्यात से जुड़े कारोबारियों के लिए भी कुछ नियम बदले हैं। पुराने सॉफ्टेक्स फॉर्म की जगह अब एक ही एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन फॉर्म लाया गया है। कानपुर जैसे औद्योगिक शहर में चमड़ा और अन्य उत्पादों के निर्यातकों को इन बदलावों की जानकारी अपने कस्टम एजेंट और चार्टर्ड अकाउंटेंट से ले लेनी चाहिए। त्योहारी सीजन में खर्च की योजना कैसे बनाएं अक्टूबर-नवंबर में दशहरा, दीपावली और छठ जैसे बड़े त्योहार आते हैं। इन बदलावों को ध्यान में रखते हुए परिवार अपने बजट की योजना पहले से बना सकते हैं। गैस की ई-केवाईसी तुरंत पूरी करें, एटीएम का इस्तेमाल सोच-समझकर करें, डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता दें और बड़े वित्तीय फैसलों से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें। ठगों से सावधान रहें हर नियम बदलाव के साथ साइबर ठग भी सक्रिय हो जाते हैं। "आपकी गैस सब्सिडी बंद हो जाएगी, इस लिंक पर क्लिक करें" या "एटीएम कार्ड अपडेट करें" जैसे संदेशों पर भरोसा न करें। कोई भी बैंक या गैस एजेंसी फोन पर ओटीपी, पिन या पासवर्ड नहीं मांगती। ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें। निष्कर्ष 1 अक्टूबर से लागू ये बदलाव रसोई से लेकर बैंक खाते तक, हर जगह असर डालते हैं। इनमें से कुछ नियम राहत देने वाले हैं, तो कुछ के लिए अतिरिक्त सावधानी और तैयारी की जरूरत है। समय रहते जरूरी काम पूरे कर लेने से आप अनावश्यक खर्च और परेशानी दोनों से बच सकते हैं। आपकी जेब और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी हर जरूरी खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।

1 अक्टूबर से बदल गए कई बड़े नियम: एलपीजी सब्सिडी, बैंक एफडी, एसबीआई एटीएम से लेकर एनपीएस तक, जानें आपकी जेब पर क्या असर

हर महीने की पहली तारीख आम लोगों की जेब से जुड़े कई बदलाव लेकर आती है। 1 अक्टूबर 2026 भी ऐसी ही तारीख है, जिस दिन से रसोई गैस, बैंक जमा, एटीएम, पेंशन, संपत्ति खरीद और जन्म-मृत्यु पंजीकरण से जुड़े कई नियम बदल गए हैं। त्योहारों का मौसम शुरू होने वाला है, ऐसे में इन बदलावों की जानकारी होना हर परिवार के लिए जरूरी है, ताकि खर्च की योजना बनाते समय किसी तरह की परेशानी न हो। आइए एक-एक करके समझते हैं कि क्या बदला है और इसका आप पर क्या असर पड़ेगा। 1. एलपीजी सब्सिडी के लिए बायोमेट्रिक आधार जरूरी सबसे बड़ा बदलाव रसोई गैस की सब्सिडी से जुड़ा है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार 1 अक्टूबर 2026 से बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन यानी ई-केवाईसी के बिना घरेलू गैस सिलेंडर पर सब्सिडी नहीं मिलेगी। यहां एक बात साफ समझ लेनी चाहिए। ई-केवाईसी न होने पर सिलेंडर मिलना बंद नहीं होगा, लेकिन उस पर मिलने वाली सब्सिडी नहीं मिलेगी। यानी आपको सिलेंडर की पूरी बाजार कीमत चुकानी पड़ सकती है। क्या करें: अगर आपकी ई-केवाईसी अभी तक नहीं हुई है, तो आधार कार्ड और गैस पासबुक लेकर अपनी गैस एजेंसी जाएं। बायोमेट्रिक यानी अंगूठे के निशान से यह प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है। तेल कंपनियों के आधिकारिक मोबाइल ऐप पर भी यह सुविधा मिलती है। ई-केवाईसी पूरी तरह निःशुल्क है, इसके नाम पर किसी को पैसे न दें। 2. दो सिलेंडर बुकिंग के बीच 25 दिन का अंतर नए नियम के तहत अब दो सिलेंडर बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अंतर रखना जरूरी होगा। यह नियम शहर और गांव दोनों जगह लागू होगा और पिछली डिलीवरी के 25 दिन बाद ही अगली बुकिंग की जा सकेगी। बड़े परिवारों या ज्यादा गैस इस्तेमाल करने वाले घरों को अब अपनी बुकिंग पहले से योजना बनाकर करनी होगी। सिलेंडर खत्म होने से कुछ दिन पहले ही बुकिंग की तारीख नोट कर लें, ताकि बीच में दिक्कत न आए। 3. कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर हुआ महंगा त्योहारी सीजन से पहले होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और छोटे खाद्य कारोबारियों के लिए बुरी खबर है। तेल कंपनियों ने 1 अक्टूबर को 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 70 रुपये से ज्यादा बढ़ा दी है। रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली में इसकी कीमत 2,810 रुपये तक पहुंच गई है। कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने का असर होटल-रेस्टोरेंट के खाने की कीमतों, मिठाई की दुकानों और कैटरिंग सेवाओं पर पड़ सकता है। दीपावली के आसपास मिठाइयों की मांग बढ़ती है, ऐसे में दुकानदारों की लागत बढ़ना ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है। घरेलू सिलेंडर की कीमत में बदलाव की जानकारी के लिए अपनी गैस एजेंसी या तेल कंपनी की वेबसाइट देखें। 4. बैंक एफडी पर आरबीआई के नए नियम भारतीय रिजर्व बैंक ने फिक्स्ड डिपॉजिट, खासकर बल्क डिपॉजिट से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं, जो 1 अक्टूबर से लागू हो गए हैं: बल्क डिपॉजिट की नई सीमा: अब 3 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की एफडी को बल्क डिपॉजिट माना जाएगा। पहले यह सीमा 2 करोड़ रुपये थी। हर दिन सुबह 10 बजे तक दरें प्रकाशित: बैंकों को अपने बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरें हर कार्यदिवस सुबह 10 बजे तक अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर डालनी होंगी, जिसमें 10:10 बजे तक की मोहलत है। शाखाओं में एक जैसी दर: बैंक अलग-अलग शाखाओं के आधार पर एक ही तरह के बल्क डिपॉजिट पर अलग ब्याज दर नहीं दे सकेंगे। आम छोटे निवेशकों पर इसका सीधा असर कम है, क्योंकि यह मुख्य रूप से बड़ी जमा राशियों से जुड़ा है। लेकिन इससे बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और जमाकर्ताओं को अलग-अलग बैंकों की दरों की तुलना करना आसान होगा। 5. एसबीआई सैलरी अकाउंट: दूसरे बैंक के एटीएम पर कम फ्री लेनदेन अगर आपका भारतीय स्टेट बैंक में सैलरी पैकेज अकाउंट है, तो ध्यान दें। 1 अक्टूबर 2026 से कुछ सैलरी पैकेज खातों के लिए दूसरे बैंकों के एटीएम पर मुफ्त लेनदेन की सीमा 10 से घटाकर 5 प्रति माह कर दी गई है। इसमें पैसे निकालना और बैलेंस देखना, दोनों तरह के लेनदेन गिने जाएंगे। क्या करें: जहां तक संभव हो, एसबीआई के अपने एटीएम का इस्तेमाल करें। बैलेंस चेक करने के लिए एटीएम के बजाय मोबाइल बैंकिंग ऐप, एसएमएस या मिस्ड कॉल सेवा का उपयोग करें। छोटे भुगतान के लिए यूपीआई का इस्तेमाल करके नकद निकासी की जरूरत कम की जा सकती है। अपने खाते पर लागू सटीक शर्तों की जानकारी बैंक से जरूर ले लें। 6. एनपीएस में नया शुल्क और नया फीचर नेशनल पेंशन सिस्टम में भी दो अहम बदलाव हुए हैं। पहला, अब पॉइंट ऑफ प्रेजेंस यानी पीओपी के जरिये नया एनपीएस खाता खोलने पर 200 रुपये का एकमुश्त ऑनबोर्डिंग शुल्क देना होगा। दूसरा, एनपीएस में 'एनपीएस स्वास्थ्य' नाम से एक नया फीचर जोड़ा गया है, जिसके तहत एनपीएस खाते के साथ फैमिली फ्लोटर सुपर टॉप-अप हेल्थ इंश्योरेंस का लाभ मिल सकेगा। इसकी शर्तें, प्रीमियम और कवरेज की पूरी जानकारी लेने के बाद ही कोई फैसला लें। 7. एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदना हुआ आसान किसी प्रवासी भारतीय यानी एनआरआई से मकान, दुकान या जमीन खरीदने वालों के लिए राहत की खबर है। अब व्यक्तिगत खरीदारों और एचयूएफ को टीडीएस काटने के लिए अलग से टैन नंबर लेने की जरूरत नहीं होगी। वे अपने पैन के आधार पर चालान के जरिये ही टीडीएस काटकर जमा कर सकेंगे। पहले एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदने पर टैन लेना एक अतिरिक्त कागजी झंझट था, जिसमें समय लगता था। नई व्यवस्था से यह प्रक्रिया आसान होगी। हालांकि टीडीएस की दरें और अन्य नियम जटिल हो सकते हैं, इसलिए बड़ी प्रॉपर्टी डील में किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट की सलाह जरूर लें। 8. जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नियम सख्त 1 अक्टूबर से जन्म और मृत्यु पंजीकरण से जुड़े संशोधित नियम लागू हो गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार अब देर से पंजीकरण कराना पहले से ज्यादा सख्त होगा। एक से दो साल की देरी होने पर जिलाधिकारी या उपजिलाधिकारी के आदेश की जरूरत होगी, जबकि दो साल से ज्यादा देरी के मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट स्तर की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। क्या करें: बच्चे के जन्म या परिवार में किसी की मृत्यु होने पर तय समय के भीतर ही नगर निगम, नगर पालिका या ग्राम पंचायत में पंजीकरण करा लें। जन्म प्रमाण पत्र आज स्कूल में दाखिले, पासपोर्ट, आधार और कई सरकारी योजनाओं के लिए जरूरी दस्तावेज है। मृत्यु प्रमाण पत्र संपत्ति, बीमा और बैंक खातों से जुड़े कामों में अनिवार्य होता है। 9. बुजुर्ग पेंशनभोगी अभी से जमा कर सकेंगे जीवन प्रमाण पत्र बुजुर्ग पेंशनभोगी 1 अक्टूबर 2026 से ही अपना डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकेंगे, जबकि सामान्य पेंशनभोगियों के लिए यह विंडो नवंबर में खुलेगी। इसे फेस आरडी ऐप, कॉमन सर्विस सेंटर या बैंक के जरिये जमा किया जा सकता है। समय पर जीवन प्रमाण पत्र जमा करने से पेंशन बिना रुकावट मिलती रहती है। बुजुर्गों को सलाह है कि आखिरी दिनों की भीड़ से बचने के लिए इसे जल्द जमा कर दें। 10. 15 अक्टूबर से यूपीआई पर एमडीआर डिजिटल भुगतान से जुड़ा एक बदलाव 15 अक्टूबर से लागू होगा। चुनिंदा व्यापारी लेनदेन में 2,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लागू होगा। वहीं 2,000 रुपये तक के भुगतान और छोटे व्यापारियों के लिए जीरो-एमडीआर की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी। एमडीआर वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारी को बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को देना होता है। आम ग्राहकों के लिए यूपीआई से भुगतान करना पहले की तरह ही रहेगा। इसका असर मुख्य रूप से कुछ बड़े व्यापारियों पर पड़ सकता है। दिल्ली-एनसीआर से जुड़े बदलाव दिल्ली में डीटीसी और क्लस्टर बसों में महिलाओं के मुफ्त सफर के लिए अब सहेली पिंक स्मार्ट कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है और कागजी पिंक टिकट बंद हो गए हैं। कार्ड न होने पर महिलाओं को सामान्य किराया देना होगा। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर में बिना पीयूसी प्रमाण पत्र के वाहनों को पेट्रोल-डीजल न देने का नियम भी चर्चा में है। जो कानपुरवासी काम या पढ़ाई के सिलसिले में दिल्ली-एनसीआर जाते हैं, उन्हें इन नियमों की जानकारी रखनी चाहिए। निर्यातकों के लिए भी बदलाव निर्यात से जुड़े कारोबारियों के लिए भी कुछ नियम बदले हैं। पुराने सॉफ्टेक्स फॉर्म की जगह अब एक ही एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन फॉर्म लाया गया है। कानपुर जैसे औद्योगिक शहर में चमड़ा और अन्य उत्पादों के निर्यातकों को इन बदलावों की जानकारी अपने कस्टम एजेंट और चार्टर्ड अकाउंटेंट से ले लेनी चाहिए। त्योहारी सीजन में खर्च की योजना कैसे बनाएं अक्टूबर-नवंबर में दशहरा, दीपावली और छठ जैसे बड़े त्योहार आते हैं। इन बदलावों को ध्यान में रखते हुए परिवार अपने बजट की योजना पहले से बना सकते हैं। गैस की ई-केवाईसी तुरंत पूरी करें, एटीएम का इस्तेमाल सोच-समझकर करें, डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता दें और बड़े वित्तीय फैसलों से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें। ठगों से सावधान रहें हर नियम बदलाव के साथ साइबर ठग भी सक्रिय हो जाते हैं। "आपकी गैस सब्सिडी बंद हो जाएगी, इस लिंक पर क्लिक करें" या "एटीएम कार्ड अपडेट करें" जैसे संदेशों पर भरोसा न करें। कोई भी बैंक या गैस एजेंसी फोन पर ओटीपी, पिन या पासवर्ड नहीं मांगती। ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें। निष्कर्ष 1 अक्टूबर से लागू ये बदलाव रसोई से लेकर बैंक खाते तक, हर जगह असर डालते हैं। इनमें से कुछ नियम राहत देने वाले हैं, तो कुछ के लिए अतिरिक्त सावधानी और तैयारी की जरूरत है। समय रहते जरूरी काम पूरे कर लेने से आप अनावश्यक खर्च और परेशानी दोनों से बच सकते 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