कानपुर: पीएसआईटी टेक एक्सपो में दिखा छात्रों का हुनर, सेना के लिए एआई वॉकी-टॉकी से लेकर स्वचालित ड्रोन तक बनाए
Kanpur PSIT Tech Expo 2026: AI walkie-talkie, autonomous drone
Kanpur Live News Desk ·

कानपुर के प्रणवीर सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (पीएसआईटी) में शुक्रवार 30 अक्टूबर से शुरू हुए दो दिवसीय 'टेक एक्सपो 2026' में छात्रों ने एक से बढ़कर एक नवाचार पेश किए। सेना के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से चलने वाला वॉकी-टॉकी और रक्षा क्षेत्र के लिए स्वचालित (ऑटोनॉमस) ड्रोन प्रदर्शनी के मुख्य आकर्षण रहे।
एक्सपो का उद्घाटन आईआईटी कानपुर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर निश्चल के. वर्मा और प्रोफेसर ए. रंगनाथ हरीश ने किया। उन्होंने छात्रों के प्रोजेक्ट देखे और उनकी उपयोगिता व संभावित इस्तेमाल पर चर्चा की।
एक्सपो एक नजर में
नाम: टेक एक्सपो 2026
स्थान: पीएसआईटी, कानपुर
अवधि: दो दिन, 30 अक्टूबर से
थीम: 'इग्नाइटिंग इनोवेशन, इंजीनियरिंग द फ्यूचर'
प्रतिभागी: बीटेक, एमटेक, एमबीए और एमसीए के छात्र
टीमें: पहले चरण में करीब 300 टीमें, फाइनल के लिए 90 टीमें चुनी गईं, पहले दिन 45 टीमों ने प्रोजेक्ट दिखाए
सेना के लिए एआई वॉकी-टॉकी
कंप्यूटर साइंस (एआई) के चौथे वर्ष के छात्र स्पर्श वर्मा ने सेना के जवानों के लिए एआई आधारित वॉकी-टॉकी बनाया है।
कैसे काम करता है:
कमजोर नेटवर्क में अक्सर संदेश अधूरे पहुंचते हैं। यह वॉकी-टॉकी एआई और मशीन लर्निंग की मदद से संदर्भ के आधार पर अधूरे संदेश को पूरा कर देता है।
यह आसपास के शोर को भी कम करता है, जिससे बातचीत साफ सुनाई देती है।
क्यों उपयोगी: पहाड़ों, जंगलों और सीमा जैसे दुर्गम इलाकों में नेटवर्क कमजोर रहता है। वहां एक अधूरा या गलत समझा गया संदेश बड़ी गलती की वजह बन सकता है। ऐसे में यह तकनीक जवानों के बीच संचार को बेहतर बना सकती है।
रक्षा क्षेत्र के लिए स्वचालित ड्रोन
तीसरे वर्ष के छात्र रयान यूनुस ने रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल के लिए स्वचालित ड्रोन तैयार किया है। स्वचालित ड्रोन बिना लगातार इंसानी नियंत्रण के, पहले से तय निर्देशों और सेंसर की मदद से खुद उड़ान भर सकते हैं। ऐसे ड्रोन निगरानी, टोही और दुर्गम इलाकों तक सामान पहुंचाने जैसे कामों में उपयोगी माने जाते हैं।
क्यूआर कोड प्रिंटिंग मशीन
प्रदर्शनी में क्यूआर कोड आधारित प्रिंटिंग मशीन भी आकर्षण का केंद्र रही। इस तरह की मशीनों में उपयोगकर्ता मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर दस्तावेज भेज सकता है और बिना किसी के मदद के प्रिंट निकाल सकता है।
'नवाचार से हल होंगी सामाजिक समस्याएं'
पीएसआईटी के चेयरमैन प्रणवीर सिंह ने कहा कि छात्रों के नवाचार सामाजिक समस्याओं को हल कर सकते हैं और रोजगार व उद्यमिता के नए अवसर पैदा कर सकते हैं। संस्थान के उपाध्यक्ष प्रोफेसर मनमोहन शुक्ला ने कहा कि ऐसे आयोजन छात्रों के विचारों को शोध से निकालकर व्यावहारिक इस्तेमाल और स्टार्टअप तक ले जाने में मदद करते हैं।
रक्षा तकनीक में बढ़ती रुचि
हाल के वर्षों में ड्रोन और एआई रक्षा क्षेत्र की सबसे अहम तकनीकें बनकर उभरी हैं। भारतीय सेना भी आधुनिक युद्ध के लिए ड्रोन, एआई और मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस पर जोर दे रही है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा उपकरणों का देश में निर्माण बढ़ाने पर भी जोर है। ऐसे में इंजीनियरिंग छात्रों का रक्षा तकनीक पर काम करना एक सकारात्मक संकेत है।
कानपुर: रक्षा उत्पादन का केंद्र
कानपुर पहले से रक्षा उत्पादन का बड़ा केंद्र रहा है। यहां की आयुध फैक्ट्रियां लंबे समय से सेना की जरूरतें पूरी करती रही हैं। यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में भी कानपुर एक प्रमुख नोड है। आईआईटी कानपुर जैसे संस्थान रक्षा, ड्रोन और एआई तकनीक पर शोध कर रहे हैं। ऐसे माहौल में शहर के इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों के लिए रक्षा तकनीक के क्षेत्र में स्टार्टअप और रोजगार के बड़े अवसर हैं।
छात्रों के लिए आगे का रास्ता
अच्छे प्रोजेक्ट को स्टार्टअप में बदलने के लिए छात्र ये कदम उठा सकते हैं:
इनक्यूबेशन सेंटर: कॉलेज या आईआईटी कानपुर जैसे संस्थानों के इनक्यूबेशन केंद्र से जुड़ें।
पेटेंट: अपने नवाचार का पेटेंट कराने की प्रक्रिया समझें।
सरकारी योजनाएं: स्टार्टअप इंडिया और रक्षा मंत्रालय के आईडेक्स (iDEX) जैसे कार्यक्रम नवाचार को आर्थिक मदद और मंच देते हैं।
हैकाथॉन: राष्ट्रीय स्तर के हैकाथॉन और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लें।
उद्योग से जुड़ाव: उद्योग के विशेषज्ञों से सलाह लें, ताकि प्रोजेक्ट बाजार की जरूरत के अनुसार बने।
सिर्फ डिग्री नहीं, हुनर जरूरी
आज के समय में नौकरी और कारोबार, दोनों में व्यावहारिक हुनर की मांग है। टेक एक्सपो जैसे आयोजन छात्रों को किताबी ज्ञान को असली समस्याओं के हल में बदलने का मौका देते हैं। टीम में काम करना, प्रोजेक्ट पेश करना और विशेषज्ञों के सवालों का जवाब देना छात्रों के आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है।
कानपुर में तकनीकी शिक्षा का माहौल
कानपुर में आईआईटी कानपुर, हार्कोर्ट बटलर तकनीकी विश्वविद्यालय (एचबीटीयू), छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय और कई निजी इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। हर साल हजारों छात्र यहां से इंजीनियरिंग, प्रबंधन और कंप्यूटर की डिग्री लेकर निकलते हैं। संस्थानों के बीच सहयोग, जैसे आईआईटी कानपुर के प्रोफेसरों का निजी कॉलेजों के छात्रों के प्रोजेक्ट देखना, छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन देता है और शहर के तकनीकी माहौल को मजबूत करता है।
एआई का बढ़ता इस्तेमाल
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है। खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग, यातायात और सुरक्षा जैसे हर क्षेत्र में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। एआई और मशीन लर्निंग में दक्ष युवाओं की मांग देश और दुनिया में तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में छात्रों का इस क्षेत्र में व्यावहारिक प्रोजेक्ट बनाना उनके करियर के लिए भी फायदेमंद है।
अभिभावकों के लिए संदेश
बच्चों को केवल अंक लाने के दबाव में रखने की बजाय उन्हें प्रोजेक्ट, प्रतियोगिताओं और नए प्रयोगों के लिए प्रोत्साहित करें। यही अनुभव उन्हें भविष्य में बेहतर इंजीनियर और उद्यमी बनाता है।
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निष्कर्ष
पीएसआईटी के टेक एक्सपो में छात्रों के एआई वॉकी-टॉकी और स्वचालित ड्रोन जैसे नवाचार दिखाते हैं कि कानपुर के युवा इंजीनियर देश की जरूरतों को समझकर तकनीक बना रहे हैं। सही मार्गदर्शन और सहयोग मिले, तो ये प्रोजेक्ट कल के स्टार्टअप और रक्षा क्षेत्र के उपयोगी उत्पाद बन सकते हैं।
कानपुर की शिक्षा और तकनीक से जुड़ी हर खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
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कानपुर के प्रणवीर सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (पीएसआईटी) में शुक्रवार 30 अक्टूबर से शुरू हुए दो दिवसीय 'टेक एक्सपो 2026' में छात्रों ने एक से बढ़कर एक नवाचार पेश किए। सेना के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से चलने वाला वॉकी-टॉकी और रक्षा क्षेत्र के लिए स्वचालित (ऑटोनॉमस) ड्रोन प्रदर्शनी के मुख्य आकर्षण रहे।
एक्सपो का उद्घाटन आईआईटी कानपुर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर निश्चल के. वर्मा और प्रोफेसर ए. रंगनाथ हरीश ने किया। उन्होंने छात्रों के प्रोजेक्ट देखे और उनकी उपयोगिता व संभावित इस्तेमाल पर चर्चा की।
एक्सपो एक नजर में
नाम: टेक एक्सपो 2026
स्थान: पीएसआईटी, कानपुर
अवधि: दो दिन, 30 अक्टूबर से
थीम: 'इग्नाइटिंग इनोवेशन, इंजीनियरिंग द फ्यूचर'
प्रतिभागी: बीटेक, एमटेक, एमबीए और एमसीए के छात्र
टीमें: पहले चरण में करीब 300 टीमें, फाइनल के लिए 90 टीमें चुनी गईं, पहले दिन 45 टीमों ने प्रोजेक्ट दिखाए
सेना के लिए एआई वॉकी-टॉकी
कंप्यूटर साइंस (एआई) के चौथे वर्ष के छात्र स्पर्श वर्मा ने सेना के जवानों के लिए एआई आधारित वॉकी-टॉकी बनाया है।
कैसे काम करता है:
कमजोर नेटवर्क में अक्सर संदेश अधूरे पहुंचते हैं। यह वॉकी-टॉकी एआई और मशीन लर्निंग की मदद से संदर्भ के आधार पर अधूरे संदेश को पूरा कर देता है।
यह आसपास के शोर को भी कम करता है, जिससे बातचीत साफ सुनाई देती है।
क्यों उपयोगी: पहाड़ों, जंगलों और सीमा जैसे दुर्गम इलाकों में नेटवर्क कमजोर रहता है। वहां एक अधूरा या गलत समझा गया संदेश बड़ी गलती की वजह बन सकता है। ऐसे में यह तकनीक जवानों के बीच संचार को बेहतर बना सकती है।
रक्षा क्षेत्र के लिए स्वचालित ड्रोन
तीसरे वर्ष के छात्र रयान यूनुस ने रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल के लिए स्वचालित ड्रोन तैयार किया है। स्वचालित ड्रोन बिना लगातार इंसानी नियंत्रण के, पहले से तय निर्देशों और सेंसर की मदद से खुद उड़ान भर सकते हैं। ऐसे ड्रोन निगरानी, टोही और दुर्गम इलाकों तक सामान पहुंचाने जैसे कामों में उपयोगी माने जाते हैं।
क्यूआर कोड प्रिंटिंग मशीन
प्रदर्शनी में क्यूआर कोड आधारित प्रिंटिंग मशीन भी आकर्षण का केंद्र रही। इस तरह की मशीनों में उपयोगकर्ता मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर दस्तावेज भेज सकता है और बिना किसी के मदद के प्रिंट निकाल सकता है।
'नवाचार से हल होंगी सामाजिक समस्याएं'
पीएसआईटी के चेयरमैन प्रणवीर सिंह ने कहा कि छात्रों के नवाचार सामाजिक समस्याओं को हल कर सकते हैं और रोजगार व उद्यमिता के नए अवसर पैदा कर सकते हैं। संस्थान के उपाध्यक्ष प्रोफेसर मनमोहन शुक्ला ने कहा कि ऐसे आयोजन छात्रों के विचारों को शोध से निकालकर व्यावहारिक इस्तेमाल और स्टार्टअप तक ले जाने में मदद करते हैं।
रक्षा तकनीक में बढ़ती रुचि
हाल के वर्षों में ड्रोन और एआई रक्षा क्षेत्र की सबसे अहम तकनीकें बनकर उभरी हैं। भारतीय सेना भी आधुनिक युद्ध के लिए ड्रोन, एआई और मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस पर जोर दे रही है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा उपकरणों का देश में निर्माण बढ़ाने पर भी जोर है। ऐसे में इंजीनियरिंग छात्रों का रक्षा तकनीक पर काम करना एक सकारात्मक संकेत है।
कानपुर: रक्षा उत्पादन का केंद्र
कानपुर पहले से रक्षा उत्पादन का बड़ा केंद्र रहा है। यहां की आयुध फैक्ट्रियां लंबे समय से सेना की जरूरतें पूरी करती रही हैं। यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में भी कानपुर एक प्रमुख नोड है। आईआईटी कानपुर जैसे संस्थान रक्षा, ड्रोन और एआई तकनीक पर शोध कर रहे हैं। ऐसे माहौल में शहर के इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों के लिए रक्षा तकनीक के क्षेत्र में स्टार्टअप और रोजगार के बड़े अवसर हैं।
छात्रों के लिए आगे का रास्ता
अच्छे प्रोजेक्ट को स्टार्टअप में बदलने के लिए छात्र ये कदम उठा सकते हैं:
इनक्यूबेशन सेंटर: कॉलेज या आईआईटी कानपुर जैसे संस्थानों के इनक्यूबेशन केंद्र से जुड़ें।
पेटेंट: अपने नवाचार का पेटेंट कराने की प्रक्रिया समझें।
सरकारी योजनाएं: स्टार्टअप इंडिया और रक्षा मंत्रालय के आईडेक्स (iDEX) जैसे कार्यक्रम नवाचार को आर्थिक मदद और मंच देते हैं।
हैकाथॉन: राष्ट्रीय स्तर के हैकाथॉन और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लें।
उद्योग से जुड़ाव: उद्योग के विशेषज्ञों से सलाह लें, ताकि प्रोजेक्ट बाजार की जरूरत के अनुसार बने।
सिर्फ डिग्री नहीं, हुनर जरूरी
आज के समय में नौकरी और कारोबार, दोनों में व्यावहारिक हुनर की मांग है। टेक एक्सपो जैसे आयोजन छात्रों को किताबी ज्ञान को असली समस्याओं के हल में बदलने का मौका देते हैं। टीम में काम करना, प्रोजेक्ट पेश करना और विशेषज्ञों के सवालों का जवाब देना छात्रों के आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है।
कानपुर में तकनीकी शिक्षा का माहौल
कानपुर में आईआईटी कानपुर, हार्कोर्ट बटलर तकनीकी विश्वविद्यालय (एचबीटीयू), छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय और कई निजी इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। हर साल हजारों छात्र यहां से इंजीनियरिंग, प्रबंधन और कंप्यूटर की डिग्री लेकर निकलते हैं। संस्थानों के बीच सहयोग, जैसे आईआईटी कानपुर के प्रोफेसरों का निजी कॉलेजों के छात्रों के प्रोजेक्ट देखना, छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन देता है और शहर के तकनीकी माहौल को मजबूत करता है।
एआई का बढ़ता इस्तेमाल
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है। खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग, यातायात और सुरक्षा जैसे हर क्षेत्र में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। एआई और मशीन लर्निंग में दक्ष युवाओं की मांग देश और दुनिया में तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में छात्रों का इस क्षेत्र में व्यावहारिक प्रोजेक्ट बनाना उनके करियर के लिए भी फायदेमंद है।
अभिभावकों के लिए संदेश
बच्चों को केवल अंक लाने के दबाव में रखने की बजाय उन्हें प्रोजेक्ट, प्रतियोगिताओं और नए प्रयोगों के लिए प्रोत्साहित करें। यही अनुभव उन्हें भविष्य में बेहतर इंजीनियर और उद्यमी बनाता है।
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इसरो ने लॉन्च किया नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 (लिंक जोड़ें)
इन्फैंट्री दिवस: 80वां शौर्य दिवस (लिंक जोड़ें)
निष्कर्ष
पीएसआईटी के टेक एक्सपो में छात्रों के एआई वॉकी-टॉकी और स्वचालित ड्रोन जैसे नवाचार दिखाते हैं कि कानपुर के युवा इंजीनियर देश की जरूरतों को समझकर तकनीक बना रहे हैं। सही मार्गदर्शन और सहयोग मिले, तो ये प्रोजेक्ट कल के स्टार्टअप और रक्षा क्षेत्र के उपयोगी उत्पाद बन सकते हैं।
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