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कानपुर: दादानगर पुल से ईंटों भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली नीचे बस्ती के मकान पर गिरी, सास-बहू की मौत, बाप-बेटी घायल

Kanpur Dadanagar bridge: tractor-trolley falls on house, 2 dead

Kanpur Live News Desk ·

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कानपुर: दादानगर पुल से ईंटों भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली नीचे बस्ती के मकान पर गिरी, सास-बहू की मौत, बाप-बेटी घायल
कानपुर के फजलगंज थाना क्षेत्र में गुरुवार 29 अक्टूबर की रात दादानगर पुल पर ईंटों से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली बिजली के खंभे से टकराकर अनियंत्रित हो गई और पुल से नीचे बस्ती के एक कच्चे मकान पर जा गिरी। मलबे में दबकर मकान में मौजूद सास-बहू की मौत हो गई, जबकि बाप-बेटी घायल हो गए। ट्रैक्टर-ट्रॉली विजय नगर की ओर जा रही थी। पुलिस ने घायलों को अस्पताल भिजवाया और क्रेन की मदद से ट्रैक्टर-ट्रॉली को हटाने का काम शुरू कराया। कैसे हुआ हादसा रिपोर्ट के अनुसार ईंटों से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली दादानगर पुल से गुजर रही थी। पुल पर अचानक ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर खंभे से टकराया और ट्रॉली समेत पुल से नीचे गिर गया। पुल के नीचे बसी बस्ती में एक कच्चा मकान था, जिस पर ट्रैक्टर-ट्रॉली और ईंटें आ गिरीं। मकान पूरी तरह ढह गया और अंदर मौजूद लोग मलबे में दब गए। हादसे में किनकी गई जान दियावती (70 वर्ष) अंजना (दियावती की बहू) दोनों मलबे में दब गईं और उनकी मौत हो गई। घायल: मकान में मौजूद बउवा और उनकी बेटी घायल हुए हैं। बउवा का बेटा बाल-बाल बच गया। रिपोर्ट के शीर्षक में तीन लोगों के घायल होने की बात कही गई है, जबकि विवरण में दो घायलों के नाम दिए गए हैं। नशे में होने का आरोप स्थानीय लोगों के अनुसार ट्रैक्टर पर तीन लोग सवार थे। लोगों का आरोप है कि तीनों नशे में थे। हादसे के बाद दो लोग मौके से भाग निकले, जबकि एक युवक को लोगों ने पकड़ लिया और उसकी पिटाई कर दी। ट्रैक्टर कौन चला रहा था, यह अभी साफ नहीं है। नशे के आरोप की पुलिस ने पुष्टि नहीं की है। हादसे की आधिकारिक वजह भी अभी सामने नहीं आई है। कानून हाथ में न लें: हादसे के बाद गुस्सा स्वाभाविक है, लेकिन किसी आरोपी को पीटना भी अपराध है। पकड़े गए व्यक्ति को पुलिस के हवाले करना चाहिए, ताकि मेडिकल जांच से नशे की पुष्टि हो सके और कानूनी कार्रवाई मजबूत हो। पुल के नीचे की बस्तियां खतरे में कानपुर में कई पुलों और फ्लाईओवरों के नीचे या ठीक बगल में बस्तियां बसी हैं। इन बस्तियों में रहने वाले ज्यादातर लोग गरीब परिवार हैं, जो कच्चे या कमजोर मकानों में रहते हैं। पुल से कोई वाहन गिरने या कोई भारी सामान नीचे आने पर इन परिवारों की जान को सीधा खतरा रहता है। दादानगर का हादसा इसी खतरे की भयावह तस्वीर है। ट्रैक्टर-ट्रॉली क्यों बनते हैं हादसों की वजह ओवरलोडिंग: ईंटों, बालू और मौरंग से भरी ट्रॉलियां अक्सर क्षमता से ज्यादा भरी होती हैं, जिससे ब्रेक लगाने और मोड़ने में दिक्कत होती है। रिफ्लेक्टर और लाइट की कमी: कई ट्रॉलियों के पीछे न लाइट होती है, न रिफ्लेक्टर। रात में ये दूसरे वाहनों को दिखाई नहीं देतीं। अप्रशिक्षित चालक: कई बार कम उम्र या बिना लाइसेंस वाले लोग ट्रैक्टर चलाते हैं। नशा: रात में नशे में भारी वाहन चलाना जानलेवा साबित होता है। व्यावसायिक इस्तेमाल: ट्रैक्टर मूल रूप से खेती के लिए होते हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल शहरों में निर्माण सामग्री ढोने के लिए धड़ल्ले से होता है। पुलों पर सुरक्षा के इंतजाम जरूरी पुलों पर मजबूत क्रैश बैरियर और रेलिंग होनी चाहिए, जो वाहन को नीचे गिरने से रोक सके। पुल पर पर्याप्त रोशनी और गति सीमा के बोर्ड हों। पुलों पर बने बिजली के खंभे सुरक्षित दूरी पर हों या उन्हें बैरियर से सुरक्षित किया जाए। रात में भारी वाहनों की गति और ओवरलोडिंग की जांच हो। पुलिस और प्रशासन से अपेक्षा फरार लोगों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई हो। ट्रैक्टर मालिक की जिम्मेदारी तय की जाए। शहर में ओवरलोड और बिना रिफ्लेक्टर वाली ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के खिलाफ अभियान चले। नशे में वाहन चलाने वालों की नियमित जांच हो। पीड़ित परिवार को सरकारी सहायता दिलाई जाए। पीड़ित परिवार को मुआवजा सड़क हादसे में मौत या घायल होने पर पीड़ित परिवार मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण में मुआवजे का दावा कर सकता है। वाहन का बीमा होने पर बीमा कंपनी मुआवजा देती है। इसके लिए एफआईआर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और इलाज से जुड़े कागजात जरूरी होते हैं। मकान ढहने से हुए नुकसान का दावा भी इसमें शामिल किया जा सकता है। गरीब परिवार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से मुफ्त कानूनी मदद ले सकते हैं। कानपुर में लगातार हादसे बीते कुछ दिनों में कानपुर में कई बड़े सड़क हादसे हुए हैं। जीटी रोड पर कार्डियोलॉजी कट के पास डीसीएम की टक्कर से तीन साल की बच्ची की मौत हुई। बिल्हौर में जीटी रोड पर एक युवक की जान गई। लगातार हो रहे हादसे शहर की सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। हादसा दिखे तो क्या करें तुरंत 112 पर पुलिस और 108 पर एंबुलेंस को सूचना दें। मलबे में दबे लोगों को निकालने में सावधानी बरतें, ताकि बचा हिस्सा और न गिरे। घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाएं। मदद करने वाले 'नेक मददगार' को कानूनन परेशान नहीं किया जा सकता। ईंट-भट्ठों से शहर तक का सफर कानपुर के आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में ईंट-भट्ठे हैं, जहां से रोज सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां ईंटें लेकर शहर में आती हैं। ये वाहन अक्सर रात में चलते हैं, जब शहर की सड़कें खाली रहती हैं। रात में थकान, तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग मिलकर हादसों का खतरा बढ़ा देते हैं। परिवहन विभाग को इन वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा और चालकों के लाइसेंस की नियमित जांच करनी चाहिए। यह भी पढ़ें कानपुर: जीटी रोड पर डीसीएम की टक्कर से तीन साल की बच्ची की मौत (एडिटर: kanpur.live पर इस खबर का लिंक जोड़ें) कानपुर: जाजमऊ में मकान का छज्जा गिरा, सात घायल (लिंक जोड़ें) कानपुर: सड़क सुरक्षा में लापरवाही पर डीएम ने चार अफसरों को नोटिस दिलाया (लिंक जोड़ें) निष्कर्ष दादानगर पुल का हादसा एक गरीब परिवार पर कहर बनकर टूटा, जिसके दो सदस्य अपने ही घर में मलबे में दबकर मारे गए। हादसे की असली वजह पुलिस जांच से साफ होगी, लेकिन ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां, रात की लापरवाही और पुलों पर सुरक्षा की कमी पर अब सख्ती जरूरी है। कानपुर की हर बड़ी खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।

कानपुर: दादानगर पुल से ईंटों भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली नीचे बस्ती के मकान पर गिरी, सास-बहू की मौत, बाप-बेटी घायल

कानपुर के फजलगंज थाना क्षेत्र में गुरुवार 29 अक्टूबर की रात दादानगर पुल पर ईंटों से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली बिजली के खंभे से टकराकर अनियंत्रित हो गई और पुल से नीचे बस्ती के एक कच्चे मकान पर जा गिरी। मलबे में दबकर मकान में मौजूद सास-बहू की मौत हो गई, जबकि बाप-बेटी घायल हो गए। ट्रैक्टर-ट्रॉली विजय नगर की ओर जा रही थी। पुलिस ने घायलों को अस्पताल भिजवाया और क्रेन की मदद से ट्रैक्टर-ट्रॉली को हटाने का काम शुरू कराया। कैसे हुआ हादसा रिपोर्ट के अनुसार ईंटों से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली दादानगर पुल से गुजर रही थी। पुल पर अचानक ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर खंभे से टकराया और ट्रॉली समेत पुल से नीचे गिर गया। पुल के नीचे बसी बस्ती में एक कच्चा मकान था, जिस पर ट्रैक्टर-ट्रॉली और ईंटें आ गिरीं। मकान पूरी तरह ढह गया और अंदर मौजूद लोग मलबे में दब गए। हादसे में किनकी गई जान दियावती (70 वर्ष) अंजना (दियावती की बहू) दोनों मलबे में दब गईं और उनकी मौत हो गई। घायल: मकान में मौजूद बउवा और उनकी बेटी घायल हुए हैं। बउवा का बेटा बाल-बाल बच गया। रिपोर्ट के शीर्षक में तीन लोगों के घायल होने की बात कही गई है, जबकि विवरण में दो घायलों के नाम दिए गए हैं। नशे में होने का आरोप स्थानीय लोगों के अनुसार ट्रैक्टर पर तीन लोग सवार थे। लोगों का आरोप है कि तीनों नशे में थे। हादसे के बाद दो लोग मौके से भाग निकले, जबकि एक युवक को लोगों ने पकड़ लिया और उसकी पिटाई कर दी। ट्रैक्टर कौन चला रहा था, यह अभी साफ नहीं है। नशे के आरोप की पुलिस ने पुष्टि नहीं की है। हादसे की आधिकारिक वजह भी अभी सामने नहीं आई है। कानून हाथ में न लें: हादसे के बाद गुस्सा स्वाभाविक है, लेकिन किसी आरोपी को पीटना भी अपराध है। पकड़े गए व्यक्ति को पुलिस के हवाले करना चाहिए, ताकि मेडिकल जांच से नशे की पुष्टि हो सके और कानूनी कार्रवाई मजबूत हो। पुल के नीचे की बस्तियां खतरे में कानपुर में कई पुलों और फ्लाईओवरों के नीचे या ठीक बगल में बस्तियां बसी हैं। इन बस्तियों में रहने वाले ज्यादातर लोग गरीब परिवार हैं, जो कच्चे या कमजोर मकानों में रहते हैं। पुल से कोई वाहन गिरने या कोई भारी सामान नीचे आने पर इन परिवारों की जान को सीधा खतरा रहता है। दादानगर का हादसा इसी खतरे की भयावह तस्वीर है। ट्रैक्टर-ट्रॉली क्यों बनते हैं हादसों की वजह ओवरलोडिंग: ईंटों, बालू और मौरंग से भरी ट्रॉलियां अक्सर क्षमता से ज्यादा भरी होती हैं, जिससे ब्रेक लगाने और मोड़ने में दिक्कत होती है। रिफ्लेक्टर और लाइट की कमी: कई ट्रॉलियों के पीछे न लाइट होती है, न रिफ्लेक्टर। रात में ये दूसरे वाहनों को दिखाई नहीं देतीं। अप्रशिक्षित चालक: कई बार कम उम्र या बिना लाइसेंस वाले लोग ट्रैक्टर चलाते हैं। नशा: रात में नशे में भारी वाहन चलाना जानलेवा साबित होता है। व्यावसायिक इस्तेमाल: ट्रैक्टर मूल रूप से खेती के लिए होते हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल शहरों में निर्माण सामग्री ढोने के लिए धड़ल्ले से होता है। पुलों पर सुरक्षा के इंतजाम जरूरी पुलों पर मजबूत क्रैश बैरियर और रेलिंग होनी चाहिए, जो वाहन को नीचे गिरने से रोक सके। पुल पर पर्याप्त रोशनी और गति सीमा के बोर्ड हों। पुलों पर बने बिजली के खंभे सुरक्षित दूरी पर हों या उन्हें बैरियर से सुरक्षित किया जाए। रात में भारी वाहनों की गति और ओवरलोडिंग की जांच हो। पुलिस और प्रशासन से अपेक्षा फरार लोगों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई हो। ट्रैक्टर मालिक की जिम्मेदारी तय की जाए। शहर में ओवरलोड और बिना रिफ्लेक्टर वाली ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के खिलाफ अभियान चले। नशे में वाहन चलाने वालों की नियमित जांच हो। पीड़ित परिवार को सरकारी सहायता दिलाई जाए। पीड़ित परिवार को मुआवजा सड़क हादसे में मौत या घायल होने पर पीड़ित परिवार मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण में मुआवजे का दावा कर सकता है। वाहन का बीमा होने पर बीमा कंपनी मुआवजा देती है। इसके लिए एफआईआर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और इलाज से जुड़े कागजात जरूरी होते हैं। मकान ढहने से हुए नुकसान का दावा भी इसमें शामिल किया जा सकता है। गरीब परिवार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से मुफ्त कानूनी मदद ले सकते हैं। कानपुर में लगातार हादसे बीते कुछ दिनों में कानपुर में कई बड़े सड़क हादसे हुए हैं। जीटी रोड पर कार्डियोलॉजी कट के पास डीसीएम की टक्कर से तीन साल की बच्ची की मौत हुई। बिल्हौर में जीटी रोड पर एक युवक की जान गई। लगातार हो रहे हादसे शहर की सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। हादसा दिखे तो क्या करें तुरंत 112 पर पुलिस और 108 पर एंबुलेंस को सूचना दें। मलबे में दबे लोगों को निकालने में सावधानी बरतें, ताकि बचा हिस्सा और न गिरे। घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाएं। मदद करने वाले 'नेक मददगार' को कानूनन परेशान नहीं किया जा सकता। ईंट-भट्ठों से शहर तक का सफर कानपुर के आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में ईंट-भट्ठे हैं, जहां से रोज सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां ईंटें लेकर शहर में आती हैं। ये वाहन अक्सर रात में चलते हैं, जब शहर की सड़कें खाली रहती हैं। रात में थकान, तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग मिलकर हादसों का खतरा बढ़ा देते हैं। परिवहन विभाग को इन वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा और चालकों के लाइसेंस की नियमित जांच करनी चाहिए। यह भी पढ़ें कानपुर: जीटी रोड पर डीसीएम की टक्कर से तीन साल की बच्ची की मौत (एडिटर: kanpur.live पर इस खबर का लिंक जोड़ें) कानपुर: जाजमऊ में मकान का छज्जा गिरा, सात घायल (लिंक जोड़ें) कानपुर: सड़क सुरक्षा में लापरवाही पर डीएम ने चार अफसरों को नोटिस दिलाया (लिंक जोड़ें) निष्कर्ष दादानगर पुल का हादसा एक गरीब परिवार पर कहर बनकर टूटा, जिसके दो सदस्य अपने ही घर में मलबे में दबकर मारे गए। हादसे की असली वजह पुलिस जांच से साफ होगी, लेकिन ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां, रात की लापरवाही और पुलों पर सुरक्षा की कमी पर अब सख्ती जरूरी है। कानपुर की हर बड़ी खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।

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