कानपुर: जीटी रोड पर कार्डियोलॉजी कट के पास डीसीएम ने स्कूटी को मारी टक्कर, तीन साल की बच्ची की मौत, माता-पिता घायल
Kanpur GT Road accident: DCM kills 3-year-old girl near Cardiology
Kanpur Live News Desk ·

कानपुर में मंगलवार रात करीब 11:15 बजे जीटी रोड पर कार्डियोलॉजी के सामने वाले कट से मुड़ रही एक स्कूटी को तेज रफ्तार डीसीएम ने टक्कर मार दी, जिसमें तीन साल की बच्ची नाया की मौत हो गई। हादसे में बच्ची के पिता विशाल गुप्ता और मां हर्षिता गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
स्वरूप नगर थाना क्षेत्र में हुए इस हादसे के बाद मौके पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और घायल दंपती को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है।
कैसे हुआ हादसा
पुलिस और रिपोर्ट के अनुसार इटावा के औरंगाबाद निवासी विशाल गुप्ता आरओ का काम करते हैं। वे करीब एक साल से पत्नी हर्षिता और बेटी नाया के साथ नवाबगंज में किराए के मकान में रह रहे थे।
मंगलवार रात तीनों स्कूटी से रावतपुर क्रॉसिंग के पास एक होटल से खाना लेकर गोल चौराहे की ओर जा रहे थे। कार्डियोलॉजी के सामने बने कट से बाएं मुड़ते समय रावतपुर क्रॉसिंग की तरफ से आ रही तेज रफ्तार डीसीएम ने स्कूटी को टक्कर मार दी।
टक्कर लगते ही तीनों सड़क पर गिर पड़े। इसी दौरान डीसीएम का पिछला पहिया मासूम नाया के ऊपर से गुजर गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
पुलिस का क्या कहना है
स्वरूप नगर थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह के अनुसार कट से अचानक बिना देखे मुड़ने के दौरान डीसीएम से हादसा हुआ। उन्होंने बताया कि परिजनों की ओर से तहरीर मिलने पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। खबर लिखे जाने तक एफआईआर दर्ज होने या चालक की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई थी।
भीड़ ने चालक को पीटा
हादसे के बाद मौके पर जमा भीड़ ने डीसीएम चालक और क्लीनर को पकड़ लिया और उनकी पिटाई कर दी। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि चालक नशे में था, हालांकि पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है। बताया गया है कि चालक बनारस का रहने वाला है।
कानून अपने हाथ में न लें: किसी भी हादसे के बाद गुस्सा स्वाभाविक है, लेकिन आरोपी को पीटना भी अपराध है। भीड़ की हिंसा से जांच भी प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में आरोपी को पकड़कर तुरंत पुलिस के हवाले करना चाहिए। नशे की जांच मेडिकल परीक्षण से ही साबित हो सकती है।
कट बने हादसों की वजह
जीटी रोड कानपुर की सबसे व्यस्त सड़कों में से एक है। रावतपुर से गोल चौराहे के बीच कार्डियोलॉजी, हैलट और मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े संस्थान होने के कारण यहां दिन-रात वाहनों और एंबुलेंस की आवाजाही रहती है।
डिवाइडर में बने कट अक्सर हादसों की वजह बनते हैं:
अचानक मुड़ना: कट से मुड़ने वाले वाहन चालक कई बार पीछे से आ रहे वाहनों को नहीं देखते।
तेज रफ्तार: रात में खाली सड़क देखकर भारी वाहन तेज रफ्तार में चलते हैं और अचानक ब्रेक नहीं लगा पाते।
अंधेरा: कई कट पर पर्याप्त रोशनी नहीं होती।
संकेत की कमी: कट से पहले चेतावनी बोर्ड या रंबल स्ट्रिप नहीं होतीं।
दोपहिया पर बच्चों की सुरक्षा
इस हादसे ने एक बार फिर दोपहिया वाहन पर बच्चों की सुरक्षा का सवाल खड़ा किया है:
छोटे बच्चों को दोपहिया पर ले जाते समय उन्हें बीच में बैठाएं और कसकर पकड़ें।
चार साल से बड़े बच्चों के लिए हेलमेट जरूरी है। नियमों के अनुसार नौ महीने से चार साल तक के बच्चों के लिए क्रैश हेलमेट और सेफ्टी हार्नेस का प्रावधान है।
बच्चों के साथ दोपहिया की रफ्तार 40 किमी प्रति घंटा से ज्यादा न रखें।
रात में सफर करते समय और ज्यादा सावधानी बरतें।
मुड़ने से पहले इंडिकेटर दें और पीछे देख लें।
भारी वाहन चालक भी बरतें सावधानी
शहर के भीतर तय गति सीमा का पालन करें।
अस्पताल और भीड़ वाले इलाकों में रफ्तार धीमी रखें।
नशे में वाहन चलाना गंभीर अपराध है और जानलेवा भी।
रात में लंबी ड्यूटी के बाद थकान में वाहन न चलाएं।
प्रशासन से अपेक्षा
कानपुर में सड़क सुरक्षा को लेकर हाल ही में जिलाधिकारी ने लापरवाह अफसरों पर सख्ती दिखाई थी। जीटी रोड के कट पर लगातार हो रहे हादसों को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम को:
कट पर रोशनी और चेतावनी बोर्ड लगाने चाहिए।
खतरनाक कट की पहचान कर उन्हें बंद करने या सुरक्षित बनाने पर विचार करना चाहिए।
रात में भारी वाहनों की रफ्तार पर निगरानी और जांच बढ़ानी चाहिए।
नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ अभियान चलाना चाहिए।
हादसा होने पर क्या करें
घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाएं या 108 एंबुलेंस बुलाएं।
पुलिस को 112 पर सूचना दें।
घायलों की मदद करने वाले 'नेक मददगार' को कानूनन परेशान नहीं किया जा सकता।
वाहन का नंबर नोट कर लें और मौके के फोटो पुलिस को दें।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
विशाल और हर्षिता करीब एक साल पहले ही कानपुर आकर बसे थे। रिपोर्ट के अनुसार दोनों ने परिवार की नाराजगी के बावजूद शादी की थी। रोजी-रोटी के लिए शहर आए इस परिवार की खुशियां एक रात में उजड़ गईं। ऐसे परिवारों को इस मुश्किल घड़ी में सामाजिक और प्रशासनिक मदद की जरूरत होती है।
मुआवजे का प्रावधान
सड़क हादसे में मौत या गंभीर चोट होने पर पीड़ित परिवार मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) में मुआवजे का दावा कर सकता है। वाहन का बीमा होने पर मुआवजा बीमा कंपनी देती है। इसके लिए एफआईआर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और इलाज के कागजात जरूरी होते हैं। हिट एंड रन के मामलों में सरकार की ओर से अलग मुआवजा योजना भी है।
जीटी रोड पर पहले भी हादसे
कानपुर से गुजरने वाली जीटी रोड पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। हाल ही में बिल्हौर में जीटी रोड पर एक युवक की मौत हुई थी।
यह भी पढ़ें
कानपुर: सड़क सुरक्षा में लापरवाही पर डीएम ने चार अफसरों को नोटिस दिलाया (एडिटर: kanpur.live पर इस खबर का लिंक जोड़ें)
कानपुर: बिल्हौर में जीटी रोड पर अज्ञात वाहन की टक्कर से युवक की मौत (लिंक जोड़ें)
कानपुर: जीटी रोड पर नगर निगम का वाहन पलटा (लिंक जोड़ें)
निष्कर्ष
जीटी रोड पर हुए इस हादसे में एक परिवार ने अपनी तीन साल की बेटी को खो दिया। हादसे की वजह तेज रफ्तार थी या अचानक मुड़ना, यह पुलिस जांच में साफ होगा। लेकिन यह घटना बताती है कि शहर की व्यस्त सड़कों के कट और रात की तेज रफ्तार कितनी खतरनाक हो सकती है। प्रशासन और वाहन चालकों, दोनों को सड़क सुरक्षा को गंभीरता से लेना होगा।
कानपुर की हर बड़ी खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
कानपुर: जीटी रोड पर कार्डियोलॉजी कट के पास डीसीएम ने स्कूटी को मारी टक्कर, तीन साल की बच्ची की मौत, माता-पिता घायल
कानपुर में मंगलवार रात करीब 11:15 बजे जीटी रोड पर कार्डियोलॉजी के सामने वाले कट से मुड़ रही एक स्कूटी को तेज रफ्तार डीसीएम ने टक्कर मार दी, जिसमें तीन साल की बच्ची नाया की मौत हो गई। हादसे में बच्ची के पिता विशाल गुप्ता और मां हर्षिता गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
स्वरूप नगर थाना क्षेत्र में हुए इस हादसे के बाद मौके पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और घायल दंपती को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है।
कैसे हुआ हादसा
पुलिस और रिपोर्ट के अनुसार इटावा के औरंगाबाद निवासी विशाल गुप्ता आरओ का काम करते हैं। वे करीब एक साल से पत्नी हर्षिता और बेटी नाया के साथ नवाबगंज में किराए के मकान में रह रहे थे।
मंगलवार रात तीनों स्कूटी से रावतपुर क्रॉसिंग के पास एक होटल से खाना लेकर गोल चौराहे की ओर जा रहे थे। कार्डियोलॉजी के सामने बने कट से बाएं मुड़ते समय रावतपुर क्रॉसिंग की तरफ से आ रही तेज रफ्तार डीसीएम ने स्कूटी को टक्कर मार दी।
टक्कर लगते ही तीनों सड़क पर गिर पड़े। इसी दौरान डीसीएम का पिछला पहिया मासूम नाया के ऊपर से गुजर गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
पुलिस का क्या कहना है
स्वरूप नगर थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह के अनुसार कट से अचानक बिना देखे मुड़ने के दौरान डीसीएम से हादसा हुआ। उन्होंने बताया कि परिजनों की ओर से तहरीर मिलने पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। खबर लिखे जाने तक एफआईआर दर्ज होने या चालक की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई थी।
भीड़ ने चालक को पीटा
हादसे के बाद मौके पर जमा भीड़ ने डीसीएम चालक और क्लीनर को पकड़ लिया और उनकी पिटाई कर दी। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि चालक नशे में था, हालांकि पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है। बताया गया है कि चालक बनारस का रहने वाला है।
कानून अपने हाथ में न लें: किसी भी हादसे के बाद गुस्सा स्वाभाविक है, लेकिन आरोपी को पीटना भी अपराध है। भीड़ की हिंसा से जांच भी प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में आरोपी को पकड़कर तुरंत पुलिस के हवाले करना चाहिए। नशे की जांच मेडिकल परीक्षण से ही साबित हो सकती है।
कट बने हादसों की वजह
जीटी रोड कानपुर की सबसे व्यस्त सड़कों में से एक है। रावतपुर से गोल चौराहे के बीच कार्डियोलॉजी, हैलट और मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े संस्थान होने के कारण यहां दिन-रात वाहनों और एंबुलेंस की आवाजाही रहती है।
डिवाइडर में बने कट अक्सर हादसों की वजह बनते हैं:
अचानक मुड़ना: कट से मुड़ने वाले वाहन चालक कई बार पीछे से आ रहे वाहनों को नहीं देखते।
तेज रफ्तार: रात में खाली सड़क देखकर भारी वाहन तेज रफ्तार में चलते हैं और अचानक ब्रेक नहीं लगा पाते।
अंधेरा: कई कट पर पर्याप्त रोशनी नहीं होती।
संकेत की कमी: कट से पहले चेतावनी बोर्ड या रंबल स्ट्रिप नहीं होतीं।
दोपहिया पर बच्चों की सुरक्षा
इस हादसे ने एक बार फिर दोपहिया वाहन पर बच्चों की सुरक्षा का सवाल खड़ा किया है:
छोटे बच्चों को दोपहिया पर ले जाते समय उन्हें बीच में बैठाएं और कसकर पकड़ें।
चार साल से बड़े बच्चों के लिए हेलमेट जरूरी है। नियमों के अनुसार नौ महीने से चार साल तक के बच्चों के लिए क्रैश हेलमेट और सेफ्टी हार्नेस का प्रावधान है।
बच्चों के साथ दोपहिया की रफ्तार 40 किमी प्रति घंटा से ज्यादा न रखें।
रात में सफर करते समय और ज्यादा सावधानी बरतें।
मुड़ने से पहले इंडिकेटर दें और पीछे देख लें।
भारी वाहन चालक भी बरतें सावधानी
शहर के भीतर तय गति सीमा का पालन करें।
अस्पताल और भीड़ वाले इलाकों में रफ्तार धीमी रखें।
नशे में वाहन चलाना गंभीर अपराध है और जानलेवा भी।
रात में लंबी ड्यूटी के बाद थकान में वाहन न चलाएं।
प्रशासन से अपेक्षा
कानपुर में सड़क सुरक्षा को लेकर हाल ही में जिलाधिकारी ने लापरवाह अफसरों पर सख्ती दिखाई थी। जीटी रोड के कट पर लगातार हो रहे हादसों को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम को:
कट पर रोशनी और चेतावनी बोर्ड लगाने चाहिए।
खतरनाक कट की पहचान कर उन्हें बंद करने या सुरक्षित बनाने पर विचार करना चाहिए।
रात में भारी वाहनों की रफ्तार पर निगरानी और जांच बढ़ानी चाहिए।
नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ अभियान चलाना चाहिए।
हादसा होने पर क्या करें
घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाएं या 108 एंबुलेंस बुलाएं।
पुलिस को 112 पर सूचना दें।
घायलों की मदद करने वाले 'नेक मददगार' को कानूनन परेशान नहीं किया जा सकता।
वाहन का नंबर नोट कर लें और मौके के फोटो पुलिस को दें।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
विशाल और हर्षिता करीब एक साल पहले ही कानपुर आकर बसे थे। रिपोर्ट के अनुसार दोनों ने परिवार की नाराजगी के बावजूद शादी की थी। रोजी-रोटी के लिए शहर आए इस परिवार की खुशियां एक रात में उजड़ गईं। ऐसे परिवारों को इस मुश्किल घड़ी में सामाजिक और प्रशासनिक मदद की जरूरत होती है।
मुआवजे का प्रावधान
सड़क हादसे में मौत या गंभीर चोट होने पर पीड़ित परिवार मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) में मुआवजे का दावा कर सकता है। वाहन का बीमा होने पर मुआवजा बीमा कंपनी देती है। इसके लिए एफआईआर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और इलाज के कागजात जरूरी होते हैं। हिट एंड रन के मामलों में सरकार की ओर से अलग मुआवजा योजना भी है।
जीटी रोड पर पहले भी हादसे
कानपुर से गुजरने वाली जीटी रोड पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। हाल ही में बिल्हौर में जीटी रोड पर एक युवक की मौत हुई थी।
यह भी पढ़ें
कानपुर: सड़क सुरक्षा में लापरवाही पर डीएम ने चार अफसरों को नोटिस दिलाया (एडिटर: kanpur.live पर इस खबर का लिंक जोड़ें)
कानपुर: बिल्हौर में जीटी रोड पर अज्ञात वाहन की टक्कर से युवक की मौत (लिंक जोड़ें)
कानपुर: जीटी रोड पर नगर निगम का वाहन पलटा (लिंक जोड़ें)
निष्कर्ष
जीटी रोड पर हुए इस हादसे में एक परिवार ने अपनी तीन साल की बेटी को खो दिया। हादसे की वजह तेज रफ्तार थी या अचानक मुड़ना, यह पुलिस जांच में साफ होगा। लेकिन यह घटना बताती है कि शहर की व्यस्त सड़कों के कट और रात की तेज रफ्तार कितनी खतरनाक हो सकती है। प्रशासन और वाहन चालकों, दोनों को सड़क सुरक्षा को गंभीरता से लेना होगा।
कानपुर की हर बड़ी खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
यह खबर अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करें:
किसी तथ्य में गलती दिखे तो हमें बताएं — हमारी संपादकीय नीति पढ़ें।
और पढ़ें | Related News
कारों में ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेक होगा अनिवार्य, सड़क परिवहन मंत्रालय का मसौदा जारी
कानपुर आरटीओ में दलालों की वापसी: दोपहर में हटाए गए स्टॉल, घंटेभर में फिर सजे; अफसरों ने गेटों पर निगरानी के दिए निर्देश
कानपुर कैंट में अतिक्रमण हटा, अगले ही दिन फिर सजी दुकानें: छह दिन में 250 अतिक्रमण हटाए, जयपुरिया पुल पर लगा जाम; अगले हफ्ते फिर चलेगा बुलडोजर
हाईवे पर खड़े वाहनों से हादसे, सुप्रीम कोर्ट ने NHAI से पूछे सवाल
हाईवे पर खड़े वाहनों से हादसे, सुप्रीम कोर्ट ने NHAI से पूछे सवाल
यूपी में बाइक पर पीछे बैठने वाले के लिए भी हेलमेट अनिवार्य, न लगाने पर कटेगा ई-चालान; नया सिस्टम जल्द होगा लागू
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई | Most Read
- 1कानपुर: बिधनू में डीईसी कॉलेज के बाहर युवक की लात-घूंसों से पिटाई, वीडियो वायरल
- 2ऑस्ट्रेलिया वीजा के लिए अब भारत में फिंगरप्रिंट और फोटो जरूरी, 26 अक्टूबर से नए आवेदनों पर लागू हुआ नियम
- 3भारत-न्यूजीलैंड: 30 अक्टूबर को ऑकलैंड में चौथा टी20, अब क्लीन स्वीप पर नजर, 4 नवंबर से वनडे सीरीज, जानें पूरा शेड्यूल
- 4कानपुर: 29 और 30 अक्टूबर को बारिश के आसार, बंगाल की खाड़ी के चक्रवाती सिस्टम का असर
- 511 साल की बोधना शिवानंदन बनीं दुनिया की सबसे कम उम्र की महिला इंटरनेशनल मास्टर, तोड़ा जूडित पोल्गर का रिकॉर्ड