ब्रेकिंग न्यूज़
Kanpur: youth jumps from moving train for iPhone, dies | CSJMU Kanpur faculty recruitment 2026: 36 posts, apply by Oct 31 | Kanpur PRD scam: fake attendance, ₹3 lakh embezzled | Kanpur hotel guest skips bill, cheats manager; FIR filed | Jio Platforms listing: shares debut at 21% premium | India ODI, Test squads for NZ: Rohit, Kohli in; Bumrah for Tests | Kanpur rain today: Cyclone Arnab effect, temperature to drop | Kanpur Baradevi fire: eight makeshift shops gutted
K
Kanpur.live
कानपुर की आवाज़ | Voice of Kanpur

कानपुर: एक दिन की ड्यूटी, 15 हजार भुगतान, पीआरडी जवानों की फर्जी हाजिरी से 3 लाख से ज्यादा का गबन, जांच में पूर्व अधिकारी और बाबू दोषी

Kanpur PRD scam: fake attendance, ₹3 lakh embezzled

Kanpur Live News Desk ·

WhatsApp पर भेजेंFacebookX
कानपुर: एक दिन की ड्यूटी, 15 हजार भुगतान, पीआरडी जवानों की फर्जी हाजिरी से 3 लाख से ज्यादा का गबन, जांच में पूर्व अधिकारी और बाबू दोषी
कानपुर के विकास भवन स्थित युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) कार्यालय में जवानों की फर्जी हाजिरी के जरिए 3 लाख रुपये से ज्यादा के गबन का मामला सामने आया है। जांच में वित्तीय वर्ष 2025-26 में 35 पीआरडी जवानों की हाजिरी और भुगतान में गड़बड़ी मिली, जिसमें कुल 3,05,500 रुपये का भुगतान अनियमित पाया गया। लखनऊ से आईं युवा कल्याण विभाग की उप निदेशक ने जांच के बाद तत्कालीन जिला युवा कल्याण अधिकारी और कार्यालय के वरिष्ठ सहायक (बाबू) को दोषी पाया है और उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट महानिदेशक को भेज दी है। कैसे हुआ खेल पीआरडी जवान को एक दिन की ड्यूटी के लिए 500 रुपये मिलते हैं। लेकिन जांच में सामने आया कि: एक दिन, 15 हजार: एक जवान को कल्याणपुर थाने में एक दिन की ड्यूटी के लिए 500 रुपये की जगह 15,000 रुपये का भुगतान कर दिया गया। 15 की जगह 31 दिन: एक जवान को अक्टूबर 2025 में 15 दिन की जगह 31 दिन का भुगतान हुआ और दिसंबर 2025 में अलग से 11,000 रुपये ज्यादा दिए गए। 23 हजार ज्यादा: एक महिला जवान को 23,000 रुपये अधिक भुगतान किया गया। 5-6 दिन, 15,500: कुछ जवानों को पांच-छह दिन की ड्यूटी पर 15,500 रुपये तक दिए गए। कई और जवानों को भी छोटी-छोटी रकम ज्यादा दी गई। खेल प्रतियोगिताओं के नाम पर भी भुगतान जांच में यह भी सामने आया कि: विधायक खेल प्रतियोगिता के नाम पर 26 स्वयंसेवकों को 99,500 रुपये का भुगतान किया गया। किदवई नगर में एक खेल प्रतियोगिता के लिए 36 स्वयंसेवकों की ड्यूटी लगाई गई। इन दोनों भुगतानों के समर्थन में कोई दस्तावेज नहीं मिले। नियम भी तोड़े गए पीआरडी जवानों की ड्यूटी पोर्टल के जरिए लगती है और नियम के अनुसार हर दिन अलग ड्यूटी दर्ज होनी चाहिए। लेकिन जांच में पाया गया कि पांच जवानों को 7 से 17 महीने तक लगातार एक ही जगह पर तैनात रखा गया। कैसे पकड़ा गया घोटाला तत्कालीन जिला युवा कल्याण अधिकारी के खिलाफ लखनऊ में युवा कल्याण विभाग के उप निदेशक के पास शपथपत्र के साथ शिकायत की गई थी। उप निदेशक शिल्पी पांडेय ने कानपुर कार्यालय पहुंचकर जांच की। उन्हें 2025-26 का ड्यूटी रजिस्टर और कैशबुक नहीं मिली। मौजूदा जिला युवा कल्याण अधिकारी अमित सिंह ने हाजिरी पोर्टल की जांच की। बाबू ने मस्टर रोल और दूसरे दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। जांच अधूरी, दूसरे साल भी जांचे जाएंगे उप निदेशक शिल्पी पांडेय ने कहा कि बाबू की ओर से रिकॉर्ड न दिए जाने के कारण जांच अभी अधूरी है। उन्होंने बताया कि शासन की मंजूरी मिलने पर दूसरे वर्षों के रिकॉर्ड की भी जांच कराई जाएगी। यानी गबन की रकम और बढ़ सकती है। रिपोर्ट के अनुसार संबंधित पूर्व अधिकारी करीब 10 साल तक कानपुर में तैनात रहीं। रिपोर्ट में आरोपियों का पक्ष नहीं आया है। कौन होते हैं पीआरडी जवान प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) उत्तर प्रदेश सरकार का एक स्वयंसेवी बल है, जो युवा कल्याण विभाग के अधीन काम करता है। पीआरडी जवानों को जरूरत के अनुसार थानों, यातायात व्यवस्था, मेलों, चुनाव, खेल आयोजनों और सरकारी कार्यक्रमों में ड्यूटी पर लगाया जाता है। उन्हें रोजाना के हिसाब से भत्ता मिलता है। कानपुर जिले में करीब 550 पीआरडी जवान हैं। ईमानदार जवानों के साथ अन्याय पीआरडी जवान कम भत्ते पर कठिन ड्यूटी करते हैं। ठंड, बारिश और धूप में सड़कों पर ट्रैफिक संभालना और मेलों में भीड़ नियंत्रित करना आसान काम नहीं है। जब फर्जी हाजिरी से कुछ लोगों को कई गुना भुगतान किया जाता है, तो यह उन ईमानदार जवानों के साथ अन्याय है जिन्हें कई बार समय पर भत्ता भी नहीं मिलता। सरकारी पैसा जनता का पैसा है और उसकी बर्बादी हर नागरिक का नुकसान है। ऐसे घोटाले कैसे रुकें डिजिटल हाजिरी: बायोमेट्रिक या जियो-टैग वाली मोबाइल हाजिरी से फर्जी उपस्थिति पर रोक लग सकती है। सीधा भुगतान: भुगतान सीधे जवानों के बैंक खाते में और हाजिरी पोर्टल से मिलान के बाद ही हो। नियमित ऑडिट: हर तिमाही भुगतान का ऑडिट हो। तबादले: एक ही अधिकारी या बाबू को लंबे समय तक एक जगह तैनात न रखा जाए। रिकॉर्ड सुरक्षित: कैशबुक और ड्यूटी रजिस्टर का डिजिटल बैकअप अनिवार्य हो। शिकायत तंत्र: जवानों के लिए गोपनीय शिकायत की व्यवस्था हो। भ्रष्टाचार की शिकायत कहां करें अगर किसी सरकारी विभाग में भ्रष्टाचार या गबन की जानकारी हो, तो इसकी शिकायत संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों, जिलाधिकारी कार्यालय, आईजीआरएस पोर्टल या मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर की जा सकती है। रिश्वत मांगे जाने की शिकायत भ्रष्टाचार निवारण संगठन से भी की जा सकती है। इस मामले में भी एक शिकायत के बाद ही जांच शुरू हुई और गड़बड़ी पकड़ी गई। पीआरडी जवानों की ड्यूटी कहां-कहां पीआरडी जवानों को जरूरत के अनुसार कई तरह की ड्यूटी पर लगाया जाता है, जैसे थानों पर सहायता, चौराहों पर यातायात व्यवस्था, मेलों और धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण, खेल प्रतियोगिताओं, सरकारी कार्यक्रमों और चुनाव ड्यूटी। इन सभी ड्यूटी का रिकॉर्ड पोर्टल पर दर्ज होता है और उसी के आधार पर भत्ता दिया जाता है। इसलिए हाजिरी में गड़बड़ी से सीधे सरकारी खजाने को नुकसान होता है। जनता के पैसे की निगरानी ऐसे मामलों में दोषियों से गबन की गई रकम की वसूली और विभागीय व कानूनी कार्रवाई जरूरी है, ताकि दूसरे विभागों में भी संदेश जाए। सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत आम नागरिक भी सरकारी विभागों के खर्च की जानकारी मांग सकते हैं। पारदर्शिता बढ़ने से ऐसे घोटालों पर लगाम लगती है। यह भी पढ़ें कानपुर: शारदा नगर में अवैध कूड़ा संग्रहण केंद्र के खिलाफ धरना (एडिटर: kanpur.live पर इस खबर का लिंक जोड़ें) कानपुर: सड़क सुरक्षा में लापरवाही पर डीएम ने चार अफसरों को नोटिस दिलाया (लिंक जोड़ें) कानपुर: अंबेडकर सेवा यात्रा में 103 मेडिकल कैंप (लिंक जोड़ें) निष्कर्ष पीआरडी जवानों की फर्जी हाजिरी से गबन का यह मामला सरकारी दफ्तरों में निगरानी की कमी को उजागर करता है। जांच में दोषी पाए गए अधिकारियों पर अब शासन स्तर से कार्रवाई होनी है। दूसरे वर्षों के रिकॉर्ड की जांच से और भी गड़बड़ियां सामने आ सकती हैं। कानपुर लाइव इस मामले पर नजर रखेगा। कानपुर की हर बड़ी खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।

कानपुर: एक दिन की ड्यूटी, 15 हजार भुगतान, पीआरडी जवानों की फर्जी हाजिरी से 3 लाख से ज्यादा का गबन, जांच में पूर्व अधिकारी और बाबू दोषी

कानपुर के विकास भवन स्थित युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) कार्यालय में जवानों की फर्जी हाजिरी के जरिए 3 लाख रुपये से ज्यादा के गबन का मामला सामने आया है। जांच में वित्तीय वर्ष 2025-26 में 35 पीआरडी जवानों की हाजिरी और भुगतान में गड़बड़ी मिली, जिसमें कुल 3,05,500 रुपये का भुगतान अनियमित पाया गया। लखनऊ से आईं युवा कल्याण विभाग की उप निदेशक ने जांच के बाद तत्कालीन जिला युवा कल्याण अधिकारी और कार्यालय के वरिष्ठ सहायक (बाबू) को दोषी पाया है और उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट महानिदेशक को भेज दी है। कैसे हुआ खेल पीआरडी जवान को एक दिन की ड्यूटी के लिए 500 रुपये मिलते हैं। लेकिन जांच में सामने आया कि: एक दिन, 15 हजार: एक जवान को कल्याणपुर थाने में एक दिन की ड्यूटी के लिए 500 रुपये की जगह 15,000 रुपये का भुगतान कर दिया गया। 15 की जगह 31 दिन: एक जवान को अक्टूबर 2025 में 15 दिन की जगह 31 दिन का भुगतान हुआ और दिसंबर 2025 में अलग से 11,000 रुपये ज्यादा दिए गए। 23 हजार ज्यादा: एक महिला जवान को 23,000 रुपये अधिक भुगतान किया गया। 5-6 दिन, 15,500: कुछ जवानों को पांच-छह दिन की ड्यूटी पर 15,500 रुपये तक दिए गए। कई और जवानों को भी छोटी-छोटी रकम ज्यादा दी गई। खेल प्रतियोगिताओं के नाम पर भी भुगतान जांच में यह भी सामने आया कि: विधायक खेल प्रतियोगिता के नाम पर 26 स्वयंसेवकों को 99,500 रुपये का भुगतान किया गया। किदवई नगर में एक खेल प्रतियोगिता के लिए 36 स्वयंसेवकों की ड्यूटी लगाई गई। इन दोनों भुगतानों के समर्थन में कोई दस्तावेज नहीं मिले। नियम भी तोड़े गए पीआरडी जवानों की ड्यूटी पोर्टल के जरिए लगती है और नियम के अनुसार हर दिन अलग ड्यूटी दर्ज होनी चाहिए। लेकिन जांच में पाया गया कि पांच जवानों को 7 से 17 महीने तक लगातार एक ही जगह पर तैनात रखा गया। कैसे पकड़ा गया घोटाला तत्कालीन जिला युवा कल्याण अधिकारी के खिलाफ लखनऊ में युवा कल्याण विभाग के उप निदेशक के पास शपथपत्र के साथ शिकायत की गई थी। उप निदेशक शिल्पी पांडेय ने कानपुर कार्यालय पहुंचकर जांच की। उन्हें 2025-26 का ड्यूटी रजिस्टर और कैशबुक नहीं मिली। मौजूदा जिला युवा कल्याण अधिकारी अमित सिंह ने हाजिरी पोर्टल की जांच की। बाबू ने मस्टर रोल और दूसरे दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। जांच अधूरी, दूसरे साल भी जांचे जाएंगे उप निदेशक शिल्पी पांडेय ने कहा कि बाबू की ओर से रिकॉर्ड न दिए जाने के कारण जांच अभी अधूरी है। उन्होंने बताया कि शासन की मंजूरी मिलने पर दूसरे वर्षों के रिकॉर्ड की भी जांच कराई जाएगी। यानी गबन की रकम और बढ़ सकती है। रिपोर्ट के अनुसार संबंधित पूर्व अधिकारी करीब 10 साल तक कानपुर में तैनात रहीं। रिपोर्ट में आरोपियों का पक्ष नहीं आया है। कौन होते हैं पीआरडी जवान प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) उत्तर प्रदेश सरकार का एक स्वयंसेवी बल है, जो युवा कल्याण विभाग के अधीन काम करता है। पीआरडी जवानों को जरूरत के अनुसार थानों, यातायात व्यवस्था, मेलों, चुनाव, खेल आयोजनों और सरकारी कार्यक्रमों में ड्यूटी पर लगाया जाता है। उन्हें रोजाना के हिसाब से भत्ता मिलता है। कानपुर जिले में करीब 550 पीआरडी जवान हैं। ईमानदार जवानों के साथ अन्याय पीआरडी जवान कम भत्ते पर कठिन ड्यूटी करते हैं। ठंड, बारिश और धूप में सड़कों पर ट्रैफिक संभालना और मेलों में भीड़ नियंत्रित करना आसान काम नहीं है। जब फर्जी हाजिरी से कुछ लोगों को कई गुना भुगतान किया जाता है, तो यह उन ईमानदार जवानों के साथ अन्याय है जिन्हें कई बार समय पर भत्ता भी नहीं मिलता। सरकारी पैसा जनता का पैसा है और उसकी बर्बादी हर नागरिक का नुकसान है। ऐसे घोटाले कैसे रुकें डिजिटल हाजिरी: बायोमेट्रिक या जियो-टैग वाली मोबाइल हाजिरी से फर्जी उपस्थिति पर रोक लग सकती है। सीधा भुगतान: भुगतान सीधे जवानों के बैंक खाते में और हाजिरी पोर्टल से मिलान के बाद ही हो। नियमित ऑडिट: हर तिमाही भुगतान का ऑडिट हो। तबादले: एक ही अधिकारी या बाबू को लंबे समय तक एक जगह तैनात न रखा जाए। रिकॉर्ड सुरक्षित: कैशबुक और ड्यूटी रजिस्टर का डिजिटल बैकअप अनिवार्य हो। शिकायत तंत्र: जवानों के लिए गोपनीय शिकायत की व्यवस्था हो। भ्रष्टाचार की शिकायत कहां करें अगर किसी सरकारी विभाग में भ्रष्टाचार या गबन की जानकारी हो, तो इसकी शिकायत संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों, जिलाधिकारी कार्यालय, आईजीआरएस पोर्टल या मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर की जा सकती है। रिश्वत मांगे जाने की शिकायत भ्रष्टाचार निवारण संगठन से भी की जा सकती है। इस मामले में भी एक शिकायत के बाद ही जांच शुरू हुई और गड़बड़ी पकड़ी गई। पीआरडी जवानों की ड्यूटी कहां-कहां पीआरडी जवानों को जरूरत के अनुसार कई तरह की ड्यूटी पर लगाया जाता है, जैसे थानों पर सहायता, चौराहों पर यातायात व्यवस्था, मेलों और धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण, खेल प्रतियोगिताओं, सरकारी कार्यक्रमों और चुनाव ड्यूटी। इन सभी ड्यूटी का रिकॉर्ड पोर्टल पर दर्ज होता है और उसी के आधार पर भत्ता दिया जाता है। इसलिए हाजिरी में गड़बड़ी से सीधे सरकारी खजाने को नुकसान होता है। जनता के पैसे की निगरानी ऐसे मामलों में दोषियों से गबन की गई रकम की वसूली और विभागीय व कानूनी कार्रवाई जरूरी है, ताकि दूसरे विभागों में भी संदेश जाए। सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत आम नागरिक भी सरकारी विभागों के खर्च की जानकारी मांग सकते हैं। पारदर्शिता बढ़ने से ऐसे घोटालों पर लगाम लगती है। यह भी पढ़ें कानपुर: शारदा नगर में अवैध कूड़ा संग्रहण केंद्र के खिलाफ धरना (एडिटर: kanpur.live पर इस खबर का लिंक जोड़ें) कानपुर: सड़क सुरक्षा में लापरवाही पर डीएम ने चार अफसरों को नोटिस दिलाया (लिंक जोड़ें) कानपुर: अंबेडकर सेवा यात्रा में 103 मेडिकल कैंप (लिंक जोड़ें) निष्कर्ष पीआरडी जवानों की फर्जी हाजिरी से गबन का यह मामला सरकारी दफ्तरों में निगरानी की कमी को उजागर करता है। जांच में दोषी पाए गए अधिकारियों पर अब शासन स्तर से कार्रवाई होनी है। दूसरे वर्षों के रिकॉर्ड की जांच से और भी गड़बड़ियां सामने आ सकती हैं। कानपुर लाइव इस मामले पर नजर रखेगा। कानपुर की हर बड़ी खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।

यह खबर अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करें:

WhatsApp पर भेजेंFacebookX

किसी तथ्य में गलती दिखे तो हमें बताएं — हमारी संपादकीय नीति पढ़ें।

और पढ़ें | Related News

सबसे ज़्यादा पढ़ी गई | Most Read

  1. 1कानपुर: बिधनू में डीईसी कॉलेज के बाहर युवक की लात-घूंसों से पिटाई, वीडियो वायरल
  2. 2करवा चौथ 2026: कानपुर में रात 8:10 बजे निकलेगा चांद, जानें पूजा मुहूर्त और शुक्र के बालत्वकाल पर विद्वानों की राय
  3. 3कानपुर: जीटी रोड पर कार्डियोलॉजी कट के पास डीसीएम ने स्कूटी को मारी टक्कर, तीन साल की बच्ची की मौत, माता-पिता घायल
  4. 4कानपुर: 29 और 30 अक्टूबर को बारिश के आसार, बंगाल की खाड़ी के चक्रवाती सिस्टम का असर
  5. 5कानपुर: बारादेवी मंदिर के पास शॉर्ट सर्किट से लगी आग, आठ अस्थायी दुकानें खाक, केस्को पर लापरवाही का आरोप