कानपुर: अफीम कोठी में सीसीटीवी बंद कर 16 मिनट में दो शोरूम में चोरी, गमछे से ढका था चेहरा
Kanpur theft: CCTV disabled, showrooms looted in 16 minutes
Kanpur Live News Desk ·

कानपुर के रायपुरवा थाना क्षेत्र में अफीम कोठी स्थित शिवाय फर्नीचर और शिवाय इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम में एक चोर ने सीसीटीवी कैमरे बंद कर चोरी की वारदात को अंजाम दिया। चोर रात करीब दो बजे शटर का ताला तोड़कर अंदर घुसा और 2:16 बजे तक, यानी सिर्फ 16 मिनट में चोरी कर फरार हो गया।
दोनों शोरूम अफीम कोठी निवासी कारोबारी संदीप चौहान के हैं। वारदात रविवार रात की बताई गई है। पुलिस का कहना है कि अभी तक तहरीर नहीं मिली है, लेकिन वह अपने स्तर से मामले की जांच कर रही है।
चेहरा गमछे से ढका था
कारोबारी के भाई के अनुसार चोर ने अपना चेहरा गमछे (अंगोछे) से ढक रखा था, ताकि उसकी पहचान न हो सके। चोर ने पहले सीसीटीवी कैमरे बंद किए और फिर शटर का ताला तोड़ा। इससे साफ है कि चोर को शोरूम में लगे कैमरों की जानकारी थी और वह पूरी तैयारी के साथ आया था।
क्या चोरी हुआ, अभी साफ नहीं
कारोबारी के परिवार ने चोरी के बारे में ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया है। शोरूम से क्या-क्या सामान या कितनी नकदी चोरी हुई, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
पुलिस ने क्या कहा
रायपुरवा थाना प्रभारी अजय कुमार सिंह ने बताया कि मामले में अभी कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है। इसके बावजूद पुलिस अपने स्तर से घटना की जांच कर रही है। पुलिस आसपास के इलाकों में लगे दूसरे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के जरिए चोर तक पहुंचने की कोशिश कर सकती है।
सीसीटीवी बंद करना नया तरीका नहीं
दुकानों और घरों में सीसीटीवी कैमरे लगने के बाद चोरों ने भी अपने तरीके बदले हैं:
बिजली काटना: कई चोर पहले मेन स्विच या बिजली का तार काट देते हैं, जिससे कैमरे बंद हो जाते हैं।
कैमरे का मुंह मोड़ना: कुछ चोर कैमरे को घुमा देते हैं या उस पर कपड़ा डाल देते हैं।
डीवीआर उठा ले जाना: कई मामलों में चोर रिकॉर्डिंग वाला डीवीआर ही साथ ले जाते हैं।
चेहरा ढकना: मास्क, गमछा या हेलमेट से चेहरा छिपाना आम तरीका है।
दुकानदार ऐसे बढ़ाएं सुरक्षा
क्लाउड बैकअप: ऐसे कैमरे लगवाएं जिनकी रिकॉर्डिंग मोबाइल या क्लाउड पर भी सेव हो। डीवीआर चोरी होने पर भी फुटेज बची रहेगी।
पावर बैकअप: कैमरों के लिए यूपीएस या इन्वर्टर का अलग कनेक्शन रखें, ताकि बिजली कटने पर भी वे चलते रहें।
मोबाइल अलर्ट: कैमरा बंद होने या हलचल होने पर मोबाइल पर अलर्ट देने वाले सिस्टम लगवाएं।
छिपा हुआ कैमरा: एक-दो कैमरे ऐसी जगह लगाएं जो आसानी से नजर न आएं।
मजबूत ताले: शटर में सेंटर लॉक और अतिरिक्त मजबूत ताले लगवाएं।
अलार्म: शटर या दरवाजे से छेड़छाड़ होने पर बजने वाला सायरन लगवाएं।
नकदी न छोड़ें: रात में दुकान में बड़ी रकम न छोड़ें।
चौकीदार: बाजार के दुकानदार मिलकर रात के चौकीदार की व्यवस्था कर सकते हैं।
तहरीर देना क्यों जरूरी
कई बार कारोबारी चोरी की शिकायत करने से बचते हैं, लेकिन लिखित तहरीर और एफआईआर से पुलिस जांच को कानूनी आधार मिलता है। एफआईआर होने पर ही बरामद माल वापस पाने की प्रक्रिया आसान होती है। अगर दुकान का बीमा है, तो बीमा क्लेम के लिए भी एफआईआर की कॉपी जरूरी होती है। एफआईआर दर्ज होने से पुलिस के रिकॉर्ड में इलाके की आपराधिक घटनाएं भी दर्ज होती हैं, जिससे गश्त की योजना बनाने में मदद मिलती है।
त्योहारों में बढ़ता खतरा
करवा चौथ, धनतेरस और दीपावली के मौसम में दुकानों में नया माल और नकदी ज्यादा रहती है। ऐसे में चोरी की घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। पुलिस को त्योहारों के दौरान बाजारों में रात की गश्त बढ़ानी चाहिए। दुकानदारों को भी इस समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
शहर में हालिया घटनाएं
कानपुर में हाल के दिनों में कई चोरी की घटनाएं सामने आई हैं। अहिरवां में पुलिस चौकी के पास दो दुकानों में चोरी हुई थी। इन घटनाओं ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। व्यापारी संगठनों का कहना है कि बाजारों में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई जानी चाहिए।
सूचना कहां दें
किसी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत 112 पर दें।
चोरी होने पर नजदीकी थाने में लिखित तहरीर दें।
यूपी पुलिस के यूपीकॉप ऐप पर भी ई-एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है।
बाजारों में पुलिस गश्त की मांग
व्यापारियों का कहना है कि रात के समय बाजारों में पुलिस की गश्त बढ़नी चाहिए। रात 12 बजे से सुबह 4 बजे तक का समय चोरी की घटनाओं के लिहाज से सबसे संवेदनशील माना जाता है, जब सड़कें सुनसान रहती हैं। पुलिस की पीआरवी गाड़ियों और बीट सिपाहियों की नियमित मौजूदगी से चोरों में डर रहता है।
व्यापारी संगठनों की भूमिका
बाजारों के व्यापारी संगठन पुलिस के साथ मिलकर सुरक्षा व्यवस्था बेहतर कर सकते हैं:
बाजार के प्रवेश और निकास पर साझा सीसीटीवी कैमरे लगवाना।
रात के चौकीदारों का खर्च मिलकर उठाना।
व्हाट्सऐप ग्रुप बनाकर किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना साझा करना।
दुकानों पर काम करने वाले कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराना।
बीट पुलिस से नियमित संपर्क में रहना।
कर्मचारियों का सत्यापन जरूरी
कई चोरी के मामलों में पुराने या मौजूदा कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आती है, क्योंकि उन्हें दुकान के कैमरों, तालों और नकदी की जानकारी होती है। इसलिए दुकान पर किसी को नौकरी पर रखने से पहले उसका पुलिस सत्यापन जरूर कराएं। यह सत्यापन यूपीकॉप ऐप के जरिए भी कराया जा सकता है।
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निष्कर्ष
अफीम कोठी की यह वारदात दिखाती है कि चोर अब सीसीटीवी को भी चकमा देने लगे हैं। सिर्फ कैमरे लगाना काफी नहीं, उनके पावर बैकअप और क्लाउड रिकॉर्डिंग की व्यवस्था भी जरूरी है। पुलिस से उम्मीद है कि वह जल्द चोर की पहचान कर मामले का खुलासा करेगी।
कानपुर की हर क्राइम खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
कानपुर: अफीम कोठी में सीसीटीवी बंद कर 16 मिनट में दो शोरूम में चोरी, गमछे से ढका था चेहरा
कानपुर के रायपुरवा थाना क्षेत्र में अफीम कोठी स्थित शिवाय फर्नीचर और शिवाय इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम में एक चोर ने सीसीटीवी कैमरे बंद कर चोरी की वारदात को अंजाम दिया। चोर रात करीब दो बजे शटर का ताला तोड़कर अंदर घुसा और 2:16 बजे तक, यानी सिर्फ 16 मिनट में चोरी कर फरार हो गया।
दोनों शोरूम अफीम कोठी निवासी कारोबारी संदीप चौहान के हैं। वारदात रविवार रात की बताई गई है। पुलिस का कहना है कि अभी तक तहरीर नहीं मिली है, लेकिन वह अपने स्तर से मामले की जांच कर रही है।
चेहरा गमछे से ढका था
कारोबारी के भाई के अनुसार चोर ने अपना चेहरा गमछे (अंगोछे) से ढक रखा था, ताकि उसकी पहचान न हो सके। चोर ने पहले सीसीटीवी कैमरे बंद किए और फिर शटर का ताला तोड़ा। इससे साफ है कि चोर को शोरूम में लगे कैमरों की जानकारी थी और वह पूरी तैयारी के साथ आया था।
क्या चोरी हुआ, अभी साफ नहीं
कारोबारी के परिवार ने चोरी के बारे में ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया है। शोरूम से क्या-क्या सामान या कितनी नकदी चोरी हुई, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
पुलिस ने क्या कहा
रायपुरवा थाना प्रभारी अजय कुमार सिंह ने बताया कि मामले में अभी कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है। इसके बावजूद पुलिस अपने स्तर से घटना की जांच कर रही है। पुलिस आसपास के इलाकों में लगे दूसरे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के जरिए चोर तक पहुंचने की कोशिश कर सकती है।
सीसीटीवी बंद करना नया तरीका नहीं
दुकानों और घरों में सीसीटीवी कैमरे लगने के बाद चोरों ने भी अपने तरीके बदले हैं:
बिजली काटना: कई चोर पहले मेन स्विच या बिजली का तार काट देते हैं, जिससे कैमरे बंद हो जाते हैं।
कैमरे का मुंह मोड़ना: कुछ चोर कैमरे को घुमा देते हैं या उस पर कपड़ा डाल देते हैं।
डीवीआर उठा ले जाना: कई मामलों में चोर रिकॉर्डिंग वाला डीवीआर ही साथ ले जाते हैं।
चेहरा ढकना: मास्क, गमछा या हेलमेट से चेहरा छिपाना आम तरीका है।
दुकानदार ऐसे बढ़ाएं सुरक्षा
क्लाउड बैकअप: ऐसे कैमरे लगवाएं जिनकी रिकॉर्डिंग मोबाइल या क्लाउड पर भी सेव हो। डीवीआर चोरी होने पर भी फुटेज बची रहेगी।
पावर बैकअप: कैमरों के लिए यूपीएस या इन्वर्टर का अलग कनेक्शन रखें, ताकि बिजली कटने पर भी वे चलते रहें।
मोबाइल अलर्ट: कैमरा बंद होने या हलचल होने पर मोबाइल पर अलर्ट देने वाले सिस्टम लगवाएं।
छिपा हुआ कैमरा: एक-दो कैमरे ऐसी जगह लगाएं जो आसानी से नजर न आएं।
मजबूत ताले: शटर में सेंटर लॉक और अतिरिक्त मजबूत ताले लगवाएं।
अलार्म: शटर या दरवाजे से छेड़छाड़ होने पर बजने वाला सायरन लगवाएं।
नकदी न छोड़ें: रात में दुकान में बड़ी रकम न छोड़ें।
चौकीदार: बाजार के दुकानदार मिलकर रात के चौकीदार की व्यवस्था कर सकते हैं।
तहरीर देना क्यों जरूरी
कई बार कारोबारी चोरी की शिकायत करने से बचते हैं, लेकिन लिखित तहरीर और एफआईआर से पुलिस जांच को कानूनी आधार मिलता है। एफआईआर होने पर ही बरामद माल वापस पाने की प्रक्रिया आसान होती है। अगर दुकान का बीमा है, तो बीमा क्लेम के लिए भी एफआईआर की कॉपी जरूरी होती है। एफआईआर दर्ज होने से पुलिस के रिकॉर्ड में इलाके की आपराधिक घटनाएं भी दर्ज होती हैं, जिससे गश्त की योजना बनाने में मदद मिलती है।
त्योहारों में बढ़ता खतरा
करवा चौथ, धनतेरस और दीपावली के मौसम में दुकानों में नया माल और नकदी ज्यादा रहती है। ऐसे में चोरी की घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। पुलिस को त्योहारों के दौरान बाजारों में रात की गश्त बढ़ानी चाहिए। दुकानदारों को भी इस समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
शहर में हालिया घटनाएं
कानपुर में हाल के दिनों में कई चोरी की घटनाएं सामने आई हैं। अहिरवां में पुलिस चौकी के पास दो दुकानों में चोरी हुई थी। इन घटनाओं ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। व्यापारी संगठनों का कहना है कि बाजारों में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई जानी चाहिए।
सूचना कहां दें
किसी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत 112 पर दें।
चोरी होने पर नजदीकी थाने में लिखित तहरीर दें।
यूपी पुलिस के यूपीकॉप ऐप पर भी ई-एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है।
बाजारों में पुलिस गश्त की मांग
व्यापारियों का कहना है कि रात के समय बाजारों में पुलिस की गश्त बढ़नी चाहिए। रात 12 बजे से सुबह 4 बजे तक का समय चोरी की घटनाओं के लिहाज से सबसे संवेदनशील माना जाता है, जब सड़कें सुनसान रहती हैं। पुलिस की पीआरवी गाड़ियों और बीट सिपाहियों की नियमित मौजूदगी से चोरों में डर रहता है।
व्यापारी संगठनों की भूमिका
बाजारों के व्यापारी संगठन पुलिस के साथ मिलकर सुरक्षा व्यवस्था बेहतर कर सकते हैं:
बाजार के प्रवेश और निकास पर साझा सीसीटीवी कैमरे लगवाना।
रात के चौकीदारों का खर्च मिलकर उठाना।
व्हाट्सऐप ग्रुप बनाकर किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना साझा करना।
दुकानों पर काम करने वाले कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराना।
बीट पुलिस से नियमित संपर्क में रहना।
कर्मचारियों का सत्यापन जरूरी
कई चोरी के मामलों में पुराने या मौजूदा कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आती है, क्योंकि उन्हें दुकान के कैमरों, तालों और नकदी की जानकारी होती है। इसलिए दुकान पर किसी को नौकरी पर रखने से पहले उसका पुलिस सत्यापन जरूर कराएं। यह सत्यापन यूपीकॉप ऐप के जरिए भी कराया जा सकता है।
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