11 साल की बोधना शिवानंदन बनीं दुनिया की सबसे कम उम्र की महिला इंटरनेशनल मास्टर, तोड़ा जूडित पोल्गर का रिकॉर्ड
Bodhana Sivanandan becomes youngest female chess IM ever
Kanpur Live News Desk ·

भारतीय मूल की ब्रिटिश शतरंज खिलाड़ी बोधना शिवानंदन ने मोंटेनेग्रो के बुडवा में आयोजित यूरोपियन क्लब कप में इंटरनेशनल मास्टर (आईएम) का खिताब हासिल कर इतिहास रच दिया है। 11 साल 7 महीने 16 दिन की उम्र में यह खिताब पाकर वे दुनिया की सबसे कम उम्र की महिला इंटरनेशनल मास्टर बन गई हैं।
इसके साथ ही बोधना ने 1988 में बना हंगरी की दिग्गज शतरंज खिलाड़ी जूडित पोल्गर का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिन्होंने 12 साल की उम्र में यह खिताब हासिल किया था।
38 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा
जूडित पोल्गर का रिकॉर्ड करीब 38 साल तक कायम रहा। इस दौरान दुनियाभर से कई प्रतिभाशाली लड़कियां शतरंज में आईं, लेकिन कोई भी इस रिकॉर्ड को नहीं तोड़ सकी। बोधना ने यह कारनामा कर दिखाया।
एक और उपलब्धि: बोधना पुरुष और महिला, दोनों को मिलाकर दुनिया की सातवीं सबसे कम उम्र की इंटरनेशनल मास्टर भी बन गई हैं।
तीन नॉर्म का सफर
इंटरनेशनल मास्टर बनने के लिए खिलाड़ी को तीन 'आईएम नॉर्म' हासिल करने होते हैं और तय रेटिंग तक पहुंचना होता है। बोधना ने ये नॉर्म इन टूर्नामेंटों में हासिल किए:
डोल ओपन (फ्रांस)
चेस ओलंपियाड (समरकंद, उज्बेकिस्तान)
यूरोपियन क्लब कप (बुडवा, मोंटेनेग्रो)
शतरंज के खिताब क्या हैं
अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ (फिडे) खिलाड़ियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर खिताब देता है:
ग्रैंडमास्टर (जीएम): शतरंज का सबसे बड़ा खिताब। इसके लिए तीन जीएम नॉर्म और 2500 रेटिंग जरूरी है।
इंटरनेशनल मास्टर (आईएम): ग्रैंडमास्टर से ठीक नीचे का खिताब। इसके लिए तीन आईएम नॉर्म और 2400 रेटिंग जरूरी है।
फिडे मास्टर (एफएम): आईएम से नीचे का खिताब।
महिला ग्रैंडमास्टर (डब्ल्यूजीएम) और महिला इंटरनेशनल मास्टर (डब्ल्यूआईएम): केवल महिलाओं के लिए अलग खिताब।
खास बात यह है कि बोधना ने 'महिला इंटरनेशनल मास्टर' नहीं, बल्कि ओपन श्रेणी का 'इंटरनेशनल मास्टर' खिताब हासिल किया है, जो पुरुषों और महिलाओं, दोनों के लिए एक ही पैमाने पर मिलता है।
कौन हैं जूडित पोल्गर
जूडित पोल्गर हंगरी की शतरंज खिलाड़ी हैं और इतिहास की सबसे मजबूत महिला शतरंज खिलाड़ी मानी जाती हैं। उन्होंने कभी केवल महिलाओं के टूर्नामेंट में खेलना पसंद नहीं किया और हमेशा ओपन टूर्नामेंट में पुरुष खिलाड़ियों के साथ खेलीं। उन्होंने अपने करियर में गैरी कास्परोव, विश्वनाथन आनंद और मैग्नस कार्लसन जैसे विश्व चैंपियनों को हराया था। ऐसी दिग्गज का रिकॉर्ड तोड़ना बोधना की प्रतिभा का बड़ा प्रमाण है।
बोधना: कम उम्र, बड़ी उपलब्धियां
बोधना शिवानंदन इंग्लैंड में रहती हैं और उनका परिवार भारतीय मूल का है। बेहद कम उम्र से ही वे शतरंज में अपनी प्रतिभा के लिए सुर्खियों में रही हैं। उन्होंने इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम की ओर से चेस ओलंपियाड जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भी हिस्सा लिया है। इतनी कम उम्र में देश की राष्ट्रीय टीम में जगह बनाना अपने आप में बड़ी बात है।
भारतीय मूल की प्रतिभा
भारत और भारतीय मूल के खिलाड़ी आज शतरंज की दुनिया में छाए हुए हैं। विश्वनाथन आनंद ने भारत में शतरंज क्रांति की शुरुआत की थी। आज डी. गुकेश, आर. प्रज्ञानानंद, अर्जुन एरिगैसी, कोनेरू हम्पी, हरिका द्रोणावल्ली, आर. वैशाली और दिव्या देशमुख जैसे खिलाड़ी दुनिया में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। बोधना भले ही इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करती हैं, लेकिन भारतीय मूल की होने के कारण भारत में भी उनकी उपलब्धि पर गर्व किया जा रहा है।
अब ग्रैंडमास्टर बनने का सपना
इंटरनेशनल मास्टर बनने के बाद बोधना का अगला लक्ष्य ग्रैंडमास्टर बनना होगा। जूडित पोल्गर 15 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर बनी थीं, जो उस समय का रिकॉर्ड था। अगर बोधना इसी रफ्तार से आगे बढ़ती रहीं, तो वे सबसे कम उम्र की महिला ग्रैंडमास्टर बनने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर सकती हैं।
बच्चों के लिए शतरंज क्यों फायदेमंद
शतरंज केवल खेल नहीं, बल्कि दिमाग की कसरत भी है:
एकाग्रता: लंबे समय तक ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है।
योजना बनाना: आगे की चालों के बारे में सोचने से योजना बनाने का कौशल विकसित होता है।
धैर्य: हार-जीत से धैर्य और भावनाओं पर नियंत्रण सीखते हैं।
गणित और तर्क: तर्कशक्ति और समस्या सुलझाने की क्षमता बढ़ती है।
स्क्रीन टाइम का विकल्प: मोबाइल और टीवी की जगह बच्चों के लिए बेहतर विकल्प।
कानपुर में भी कई शतरंज क्लब और अकादमियां हैं, जहां बच्चे शतरंज सीख सकते हैं। जिला और राज्य स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताएं बच्चों को आगे बढ़ने का मौका देती हैं।
फिडे रेटिंग कैसे बढ़ती है
हर खिलाड़ी की एक फिडे रेटिंग होती है, जो उसके प्रदर्शन के आधार पर ऊपर-नीचे होती है। मजबूत खिलाड़ी को हराने पर रेटिंग ज्यादा बढ़ती है, जबकि कमजोर खिलाड़ी से हारने पर ज्यादा घटती है। रेटेड टूर्नामेंट में खेलकर ही रेटिंग हासिल की जा सकती है। भारत में अखिल भारतीय शतरंज महासंघ (एआईसीएफ) से जुड़े राज्य और जिला संघ ऐसे टूर्नामेंट आयोजित करते हैं। बच्चे पहले जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में खेलकर अनुभव हासिल कर सकते हैं और फिर रेटेड टूर्नामेंट में हिस्सा ले सकते हैं।
माता-पिता की भूमिका
बोधना जैसी कम उम्र की खिलाड़ियों की सफलता के पीछे परिवार का बड़ा योगदान होता है। बच्चों को टूर्नामेंट में ले जाना, कोचिंग की व्यवस्था करना और हार के बाद हौसला बढ़ाना माता-पिता की अहम जिम्मेदारी है। बच्चों पर दबाव डालने के बजाय खेल का आनंद लेने देना ज्यादा जरूरी है।
लड़कियों के लिए प्रेरणा
शतरंज में लड़कियों की भागीदारी अब भी लड़कों से कम है। बोधना और भारत की दिव्या देशमुख व कोनेरू हम्पी जैसी खिलाड़ियों की सफलता यह संदेश देती है कि लड़कियां भी इस खेल में शीर्ष तक पहुंच सकती हैं। स्कूलों में शतरंज को बढ़ावा देकर ज्यादा लड़कियों को इस खेल से जोड़ा जा सकता है।
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तिलक वर्मा और नीतीश रेड्डी ने पलटी बाजी, भारत 2-0 से आगे (लिंक जोड़ें)
निष्कर्ष
11 साल की बोधना शिवानंदन ने जूडित पोल्गर जैसी दिग्गज का 38 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़कर शतरंज की दुनिया में इतिहास रच दिया है। उनकी यह उपलब्धि दुनियाभर की लड़कियों के लिए प्रेरणा है कि उम्र और लिंग किसी प्रतिभा की सीमा नहीं होते।
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11 साल की बोधना शिवानंदन बनीं दुनिया की सबसे कम उम्र की महिला इंटरनेशनल मास्टर, तोड़ा जूडित पोल्गर का रिकॉर्ड
भारतीय मूल की ब्रिटिश शतरंज खिलाड़ी बोधना शिवानंदन ने मोंटेनेग्रो के बुडवा में आयोजित यूरोपियन क्लब कप में इंटरनेशनल मास्टर (आईएम) का खिताब हासिल कर इतिहास रच दिया है। 11 साल 7 महीने 16 दिन की उम्र में यह खिताब पाकर वे दुनिया की सबसे कम उम्र की महिला इंटरनेशनल मास्टर बन गई हैं।
इसके साथ ही बोधना ने 1988 में बना हंगरी की दिग्गज शतरंज खिलाड़ी जूडित पोल्गर का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिन्होंने 12 साल की उम्र में यह खिताब हासिल किया था।
38 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा
जूडित पोल्गर का रिकॉर्ड करीब 38 साल तक कायम रहा। इस दौरान दुनियाभर से कई प्रतिभाशाली लड़कियां शतरंज में आईं, लेकिन कोई भी इस रिकॉर्ड को नहीं तोड़ सकी। बोधना ने यह कारनामा कर दिखाया।
एक और उपलब्धि: बोधना पुरुष और महिला, दोनों को मिलाकर दुनिया की सातवीं सबसे कम उम्र की इंटरनेशनल मास्टर भी बन गई हैं।
तीन नॉर्म का सफर
इंटरनेशनल मास्टर बनने के लिए खिलाड़ी को तीन 'आईएम नॉर्म' हासिल करने होते हैं और तय रेटिंग तक पहुंचना होता है। बोधना ने ये नॉर्म इन टूर्नामेंटों में हासिल किए:
डोल ओपन (फ्रांस)
चेस ओलंपियाड (समरकंद, उज्बेकिस्तान)
यूरोपियन क्लब कप (बुडवा, मोंटेनेग्रो)
शतरंज के खिताब क्या हैं
अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ (फिडे) खिलाड़ियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर खिताब देता है:
ग्रैंडमास्टर (जीएम): शतरंज का सबसे बड़ा खिताब। इसके लिए तीन जीएम नॉर्म और 2500 रेटिंग जरूरी है।
इंटरनेशनल मास्टर (आईएम): ग्रैंडमास्टर से ठीक नीचे का खिताब। इसके लिए तीन आईएम नॉर्म और 2400 रेटिंग जरूरी है।
फिडे मास्टर (एफएम): आईएम से नीचे का खिताब।
महिला ग्रैंडमास्टर (डब्ल्यूजीएम) और महिला इंटरनेशनल मास्टर (डब्ल्यूआईएम): केवल महिलाओं के लिए अलग खिताब।
खास बात यह है कि बोधना ने 'महिला इंटरनेशनल मास्टर' नहीं, बल्कि ओपन श्रेणी का 'इंटरनेशनल मास्टर' खिताब हासिल किया है, जो पुरुषों और महिलाओं, दोनों के लिए एक ही पैमाने पर मिलता है।
कौन हैं जूडित पोल्गर
जूडित पोल्गर हंगरी की शतरंज खिलाड़ी हैं और इतिहास की सबसे मजबूत महिला शतरंज खिलाड़ी मानी जाती हैं। उन्होंने कभी केवल महिलाओं के टूर्नामेंट में खेलना पसंद नहीं किया और हमेशा ओपन टूर्नामेंट में पुरुष खिलाड़ियों के साथ खेलीं। उन्होंने अपने करियर में गैरी कास्परोव, विश्वनाथन आनंद और मैग्नस कार्लसन जैसे विश्व चैंपियनों को हराया था। ऐसी दिग्गज का रिकॉर्ड तोड़ना बोधना की प्रतिभा का बड़ा प्रमाण है।
बोधना: कम उम्र, बड़ी उपलब्धियां
बोधना शिवानंदन इंग्लैंड में रहती हैं और उनका परिवार भारतीय मूल का है। बेहद कम उम्र से ही वे शतरंज में अपनी प्रतिभा के लिए सुर्खियों में रही हैं। उन्होंने इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम की ओर से चेस ओलंपियाड जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भी हिस्सा लिया है। इतनी कम उम्र में देश की राष्ट्रीय टीम में जगह बनाना अपने आप में बड़ी बात है।
भारतीय मूल की प्रतिभा
भारत और भारतीय मूल के खिलाड़ी आज शतरंज की दुनिया में छाए हुए हैं। विश्वनाथन आनंद ने भारत में शतरंज क्रांति की शुरुआत की थी। आज डी. गुकेश, आर. प्रज्ञानानंद, अर्जुन एरिगैसी, कोनेरू हम्पी, हरिका द्रोणावल्ली, आर. वैशाली और दिव्या देशमुख जैसे खिलाड़ी दुनिया में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। बोधना भले ही इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करती हैं, लेकिन भारतीय मूल की होने के कारण भारत में भी उनकी उपलब्धि पर गर्व किया जा रहा है।
अब ग्रैंडमास्टर बनने का सपना
इंटरनेशनल मास्टर बनने के बाद बोधना का अगला लक्ष्य ग्रैंडमास्टर बनना होगा। जूडित पोल्गर 15 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर बनी थीं, जो उस समय का रिकॉर्ड था। अगर बोधना इसी रफ्तार से आगे बढ़ती रहीं, तो वे सबसे कम उम्र की महिला ग्रैंडमास्टर बनने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर सकती हैं।
बच्चों के लिए शतरंज क्यों फायदेमंद
शतरंज केवल खेल नहीं, बल्कि दिमाग की कसरत भी है:
एकाग्रता: लंबे समय तक ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है।
योजना बनाना: आगे की चालों के बारे में सोचने से योजना बनाने का कौशल विकसित होता है।
धैर्य: हार-जीत से धैर्य और भावनाओं पर नियंत्रण सीखते हैं।
गणित और तर्क: तर्कशक्ति और समस्या सुलझाने की क्षमता बढ़ती है।
स्क्रीन टाइम का विकल्प: मोबाइल और टीवी की जगह बच्चों के लिए बेहतर विकल्प।
कानपुर में भी कई शतरंज क्लब और अकादमियां हैं, जहां बच्चे शतरंज सीख सकते हैं। जिला और राज्य स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताएं बच्चों को आगे बढ़ने का मौका देती हैं।
फिडे रेटिंग कैसे बढ़ती है
हर खिलाड़ी की एक फिडे रेटिंग होती है, जो उसके प्रदर्शन के आधार पर ऊपर-नीचे होती है। मजबूत खिलाड़ी को हराने पर रेटिंग ज्यादा बढ़ती है, जबकि कमजोर खिलाड़ी से हारने पर ज्यादा घटती है। रेटेड टूर्नामेंट में खेलकर ही रेटिंग हासिल की जा सकती है। भारत में अखिल भारतीय शतरंज महासंघ (एआईसीएफ) से जुड़े राज्य और जिला संघ ऐसे टूर्नामेंट आयोजित करते हैं। बच्चे पहले जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में खेलकर अनुभव हासिल कर सकते हैं और फिर रेटेड टूर्नामेंट में हिस्सा ले सकते हैं।
माता-पिता की भूमिका
बोधना जैसी कम उम्र की खिलाड़ियों की सफलता के पीछे परिवार का बड़ा योगदान होता है। बच्चों को टूर्नामेंट में ले जाना, कोचिंग की व्यवस्था करना और हार के बाद हौसला बढ़ाना माता-पिता की अहम जिम्मेदारी है। बच्चों पर दबाव डालने के बजाय खेल का आनंद लेने देना ज्यादा जरूरी है।
लड़कियों के लिए प्रेरणा
शतरंज में लड़कियों की भागीदारी अब भी लड़कों से कम है। बोधना और भारत की दिव्या देशमुख व कोनेरू हम्पी जैसी खिलाड़ियों की सफलता यह संदेश देती है कि लड़कियां भी इस खेल में शीर्ष तक पहुंच सकती हैं। स्कूलों में शतरंज को बढ़ावा देकर ज्यादा लड़कियों को इस खेल से जोड़ा जा सकता है।
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11 साल की बोधना शिवानंदन ने जूडित पोल्गर जैसी दिग्गज का 38 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़कर शतरंज की दुनिया में इतिहास रच दिया है। उनकी यह उपलब्धि दुनियाभर की लड़कियों के लिए प्रेरणा है कि उम्र और लिंग किसी प्रतिभा की सीमा नहीं होते।
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