इन्फैंट्री दिवस: 27 अक्टूबर 1947 को श्रीनगर में उतरे थे सिख रेजिमेंट के जवान, आज 80वां शौर्य दिवस
Infantry Day 2026: 80th Shaurya Diwas, history of 1947
Kanpur Live News Desk ·

भारतीय सेना 27 अक्टूबर 2026 को 80वां इन्फैंट्री दिवस मना रही है, जिसे 'शौर्य दिवस' भी कहा जाता है। 27 अक्टूबर 1947 को सिख रेजिमेंट की पहली बटालियन श्रीनगर हवाई अड्डे पर उतरी थी और पाकिस्तान समर्थित कबायली हमलावरों से कश्मीर की रक्षा की थी, उसी की याद में यह दिन मनाया जाता है।
यह दिन भारतीय सेना की पैदल सेना, यानी इन्फैंट्री के साहस, बलिदान और समर्पण को समर्पित है। इन्फैंट्री को 'क्वीन ऑफ द बैटल' यानी युद्ध की रानी कहा जाता है।
1947: क्या हुआ था
आजादी के कुछ ही महीने बाद अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान समर्थित हजारों कबायली हमलावरों ने जम्मू-कश्मीर पर हमला कर दिया। वे तेजी से श्रीनगर की ओर बढ़ रहे थे। रास्ते में उन्होंने कई इलाकों में लूटपाट और हिंसा की।
घटनाक्रम:
22 अक्टूबर 1947: कबायली हमलावरों ने जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ शुरू की।
26 अक्टूबर 1947: जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय पत्र (इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन) पर हस्ताक्षर किए।
27 अक्टूबर 1947: सिख रेजिमेंट की पहली बटालियन (1 सिख) विमान से श्रीनगर हवाई अड्डे पर उतरी।
सिख रेजिमेंट का साहस
विलय के बाद भारतीय सेना को तुरंत कश्मीर भेजा गया। सिख रेजिमेंट की पहली बटालियन विमानों से श्रीनगर पहुंची। उस समय हमलावर श्रीनगर के बेहद करीब पहुंच चुके थे। अगर श्रीनगर हवाई अड्डा हमलावरों के कब्जे में चला जाता, तो भारत के लिए कश्मीर तक सेना और रसद पहुंचाना बेहद मुश्किल हो जाता।
1 सिख के जवानों ने उतरते ही मोर्चा संभाला और हमलावरों को आगे बढ़ने से रोक दिया। उनके इस साहस ने कश्मीर की रक्षा की नींव रखी।
लेफ्टिनेंट कर्नल दीवान रंजीत राय का बलिदान
1 सिख बटालियन की कमान लेफ्टिनेंट कर्नल दीवान रंजीत राय के हाथ में थी। उन्होंने बारामूला के पास हमलावरों को रोकने के लिए मोर्चा संभाला। इस लड़ाई में वे वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी बहादुरी के लिए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। वे आजाद भारत में महावीर चक्र पाने वाले पहले सैनिकों में शामिल हैं।
उनके और उनके साथियों के बलिदान से हमलावरों की रफ्तार थम गई और भारतीय सेना को और टुकड़ियां श्रीनगर पहुंचाने का समय मिल गया।
क्यों मनाया जाता है इन्फैंट्री दिवस
1947 में सिख रेजिमेंट का श्रीनगर में उतरना आजाद भारत की पहली बड़ी सैन्य कार्रवाई थी। इसी ऐतिहासिक घटना और पैदल सेना के योगदान को याद करने के लिए हर साल 27 अक्टूबर को इन्फैंट्री दिवस मनाया जाता है। इस दिन देशभर में सैन्य छावनियों में शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है और दिल्ली के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किए जाते हैं।
इन्फैंट्री: सेना की रीढ़
पैदल सेना भारतीय थल सेना की सबसे बड़ी शाखा है। चाहे सियाचिन की बर्फीली चोटियां हों, राजस्थान का रेगिस्तान हो या पूर्वोत्तर के घने जंगल, इन्फैंट्री के जवान हर मुश्किल हालात में देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं।
इन्फैंट्री की खास भूमिकाएं:
दुश्मन की जमीन पर कब्जा करना और अपनी जमीन की रक्षा करना।
आतंकवाद विरोधी अभियान।
सीमा पर निगरानी।
प्राकृतिक आपदाओं में राहत और बचाव।
संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भागीदारी।
प्रमुख इन्फैंट्री रेजिमेंट: सिख रेजिमेंट, गोरखा राइफल्स, राजपूताना राइफल्स, पंजाब रेजिमेंट, मद्रास रेजिमेंट, ग्रेनेडियर्स, कुमाऊं रेजिमेंट, गढ़वाल राइफल्स, जाट रेजिमेंट, डोगरा रेजिमेंट, बिहार रेजिमेंट, महार रेजिमेंट, जम्मू-कश्मीर राइफल्स, असम रेजिमेंट और पैराशूट रेजिमेंट समेत कई रेजिमेंट।
बदलते युद्ध के लिए नई तैयारी
युद्ध के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में थल सेना का नया 'लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन' जारी किया है, जो दिसंबर 2018 के पुराने डॉक्ट्रिन की जगह लेगा। नए डॉक्ट्रिन में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस, यानी जमीन, हवा, साइबर और अंतरिक्ष में एक साथ होने वाले अभियानों पर जोर दिया गया है। थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के नेतृत्व में सेना आधुनिक तकनीक को अपनाने पर काम कर रही है। इन्फैंट्री के जवानों को भी ड्रोन, आधुनिक हथियारों और संचार उपकरणों से लैस किया जा रहा है।
कानपुर और सेना का नाता
कानपुर का भारतीय सेना से गहरा रिश्ता रहा है। कानपुर में सैन्य छावनी है और यह शहर रक्षा उत्पादन का भी प्रमुख केंद्र है। यहां की आयुध फैक्ट्रियां और रक्षा उपकरण बनाने वाले संस्थान सेना की जरूरतें पूरी करने में अहम योगदान देते हैं। यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में भी कानपुर एक प्रमुख नोड है। कानपुर और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में युवा सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करते हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा
इन्फैंट्री दिवस युवाओं को देश सेवा के लिए प्रेरित करने का दिन है। सेना में भर्ती के लिए एनडीए, सीडीएस और अग्निपथ योजना जैसे कई रास्ते हैं। सेना केवल नौकरी नहीं, बल्कि देश सेवा का सम्मानजनक माध्यम है।
शहीदों को कैसे दें श्रद्धांजलि
आम नागरिक भी इन्फैंट्री दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि दे सकते हैं। नजदीकी युद्ध स्मारक पर जाकर पुष्प अर्पित किए जा सकते हैं। 'राष्ट्रीय युद्ध स्मारक' की वेबसाइट पर शहीदों की जानकारी उपलब्ध है। पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिवारों का सम्मान करना और उनकी मदद करना भी सच्ची श्रद्धांजलि है। सशस्त्र सेना झंडा दिवस कोष में योगदान देकर भी सैनिकों के कल्याण में भागीदारी की जा सकती है।
1947 के युद्ध का नतीजा
1947-48 का युद्ध करीब एक साल से ज्यादा चला। भारतीय सेना ने श्रीनगर, बारामूला, उरी और आसपास के इलाकों से हमलावरों को खदेड़ा। 1 जनवरी 1949 को संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम लागू हुआ। इस युद्ध में कई भारतीय सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। मेजर सोमनाथ शर्मा को बडगाम की लड़ाई के लिए देश का पहला परमवीर चक्र मरणोपरांत दिया गया था।
यह भी पढ़ें
नौसेना की ताकत बढ़ाएगा जीसैट-7सी, स्वदेशी 'वरुणास्त्र' टॉरपीडो का सफल परीक्षण (एडिटर: kanpur.live पर इस खबर का लिंक जोड़ें)
भारत ने लद्दाख में कई रणनीतिक परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित कीं (लिंक जोड़ें)
नागास्त्र-2: सेना को मिले स्वदेशी आत्मघाती ड्रोन (लिंक जोड़ें)
निष्कर्ष
इन्फैंट्री दिवस उन वीर जवानों को याद करने का दिन है, जिन्होंने 1947 में कश्मीर की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। लेफ्टिनेंट कर्नल दीवान रंजीत राय और सिख रेजिमेंट के जवानों का साहस आज भी हर भारतीय सैनिक को प्रेरित करता है। 80वें शौर्य दिवस पर देश अपनी पैदल सेना के अदम्य साहस को सलाम करता है।
देश और सेना से जुड़ी हर खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
इन्फैंट्री दिवस: 27 अक्टूबर 1947 को श्रीनगर में उतरे थे सिख रेजिमेंट के जवान, आज 80वां शौर्य दिवस
भारतीय सेना 27 अक्टूबर 2026 को 80वां इन्फैंट्री दिवस मना रही है, जिसे 'शौर्य दिवस' भी कहा जाता है। 27 अक्टूबर 1947 को सिख रेजिमेंट की पहली बटालियन श्रीनगर हवाई अड्डे पर उतरी थी और पाकिस्तान समर्थित कबायली हमलावरों से कश्मीर की रक्षा की थी, उसी की याद में यह दिन मनाया जाता है।
यह दिन भारतीय सेना की पैदल सेना, यानी इन्फैंट्री के साहस, बलिदान और समर्पण को समर्पित है। इन्फैंट्री को 'क्वीन ऑफ द बैटल' यानी युद्ध की रानी कहा जाता है।
1947: क्या हुआ था
आजादी के कुछ ही महीने बाद अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान समर्थित हजारों कबायली हमलावरों ने जम्मू-कश्मीर पर हमला कर दिया। वे तेजी से श्रीनगर की ओर बढ़ रहे थे। रास्ते में उन्होंने कई इलाकों में लूटपाट और हिंसा की।
घटनाक्रम:
22 अक्टूबर 1947: कबायली हमलावरों ने जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ शुरू की।
26 अक्टूबर 1947: जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय पत्र (इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन) पर हस्ताक्षर किए।
27 अक्टूबर 1947: सिख रेजिमेंट की पहली बटालियन (1 सिख) विमान से श्रीनगर हवाई अड्डे पर उतरी।
सिख रेजिमेंट का साहस
विलय के बाद भारतीय सेना को तुरंत कश्मीर भेजा गया। सिख रेजिमेंट की पहली बटालियन विमानों से श्रीनगर पहुंची। उस समय हमलावर श्रीनगर के बेहद करीब पहुंच चुके थे। अगर श्रीनगर हवाई अड्डा हमलावरों के कब्जे में चला जाता, तो भारत के लिए कश्मीर तक सेना और रसद पहुंचाना बेहद मुश्किल हो जाता।
1 सिख के जवानों ने उतरते ही मोर्चा संभाला और हमलावरों को आगे बढ़ने से रोक दिया। उनके इस साहस ने कश्मीर की रक्षा की नींव रखी।
लेफ्टिनेंट कर्नल दीवान रंजीत राय का बलिदान
1 सिख बटालियन की कमान लेफ्टिनेंट कर्नल दीवान रंजीत राय के हाथ में थी। उन्होंने बारामूला के पास हमलावरों को रोकने के लिए मोर्चा संभाला। इस लड़ाई में वे वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी बहादुरी के लिए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। वे आजाद भारत में महावीर चक्र पाने वाले पहले सैनिकों में शामिल हैं।
उनके और उनके साथियों के बलिदान से हमलावरों की रफ्तार थम गई और भारतीय सेना को और टुकड़ियां श्रीनगर पहुंचाने का समय मिल गया।
क्यों मनाया जाता है इन्फैंट्री दिवस
1947 में सिख रेजिमेंट का श्रीनगर में उतरना आजाद भारत की पहली बड़ी सैन्य कार्रवाई थी। इसी ऐतिहासिक घटना और पैदल सेना के योगदान को याद करने के लिए हर साल 27 अक्टूबर को इन्फैंट्री दिवस मनाया जाता है। इस दिन देशभर में सैन्य छावनियों में शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है और दिल्ली के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किए जाते हैं।
इन्फैंट्री: सेना की रीढ़
पैदल सेना भारतीय थल सेना की सबसे बड़ी शाखा है। चाहे सियाचिन की बर्फीली चोटियां हों, राजस्थान का रेगिस्तान हो या पूर्वोत्तर के घने जंगल, इन्फैंट्री के जवान हर मुश्किल हालात में देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं।
इन्फैंट्री की खास भूमिकाएं:
दुश्मन की जमीन पर कब्जा करना और अपनी जमीन की रक्षा करना।
आतंकवाद विरोधी अभियान।
सीमा पर निगरानी।
प्राकृतिक आपदाओं में राहत और बचाव।
संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भागीदारी।
प्रमुख इन्फैंट्री रेजिमेंट: सिख रेजिमेंट, गोरखा राइफल्स, राजपूताना राइफल्स, पंजाब रेजिमेंट, मद्रास रेजिमेंट, ग्रेनेडियर्स, कुमाऊं रेजिमेंट, गढ़वाल राइफल्स, जाट रेजिमेंट, डोगरा रेजिमेंट, बिहार रेजिमेंट, महार रेजिमेंट, जम्मू-कश्मीर राइफल्स, असम रेजिमेंट और पैराशूट रेजिमेंट समेत कई रेजिमेंट।
बदलते युद्ध के लिए नई तैयारी
युद्ध के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में थल सेना का नया 'लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन' जारी किया है, जो दिसंबर 2018 के पुराने डॉक्ट्रिन की जगह लेगा। नए डॉक्ट्रिन में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस, यानी जमीन, हवा, साइबर और अंतरिक्ष में एक साथ होने वाले अभियानों पर जोर दिया गया है। थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के नेतृत्व में सेना आधुनिक तकनीक को अपनाने पर काम कर रही है। इन्फैंट्री के जवानों को भी ड्रोन, आधुनिक हथियारों और संचार उपकरणों से लैस किया जा रहा है।
कानपुर और सेना का नाता
कानपुर का भारतीय सेना से गहरा रिश्ता रहा है। कानपुर में सैन्य छावनी है और यह शहर रक्षा उत्पादन का भी प्रमुख केंद्र है। यहां की आयुध फैक्ट्रियां और रक्षा उपकरण बनाने वाले संस्थान सेना की जरूरतें पूरी करने में अहम योगदान देते हैं। यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में भी कानपुर एक प्रमुख नोड है। कानपुर और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में युवा सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करते हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा
इन्फैंट्री दिवस युवाओं को देश सेवा के लिए प्रेरित करने का दिन है। सेना में भर्ती के लिए एनडीए, सीडीएस और अग्निपथ योजना जैसे कई रास्ते हैं। सेना केवल नौकरी नहीं, बल्कि देश सेवा का सम्मानजनक माध्यम है।
शहीदों को कैसे दें श्रद्धांजलि
आम नागरिक भी इन्फैंट्री दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि दे सकते हैं। नजदीकी युद्ध स्मारक पर जाकर पुष्प अर्पित किए जा सकते हैं। 'राष्ट्रीय युद्ध स्मारक' की वेबसाइट पर शहीदों की जानकारी उपलब्ध है। पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिवारों का सम्मान करना और उनकी मदद करना भी सच्ची श्रद्धांजलि है। सशस्त्र सेना झंडा दिवस कोष में योगदान देकर भी सैनिकों के कल्याण में भागीदारी की जा सकती है।
1947 के युद्ध का नतीजा
1947-48 का युद्ध करीब एक साल से ज्यादा चला। भारतीय सेना ने श्रीनगर, बारामूला, उरी और आसपास के इलाकों से हमलावरों को खदेड़ा। 1 जनवरी 1949 को संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम लागू हुआ। इस युद्ध में कई भारतीय सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। मेजर सोमनाथ शर्मा को बडगाम की लड़ाई के लिए देश का पहला परमवीर चक्र मरणोपरांत दिया गया था।
यह भी पढ़ें
नौसेना की ताकत बढ़ाएगा जीसैट-7सी, स्वदेशी 'वरुणास्त्र' टॉरपीडो का सफल परीक्षण (एडिटर: kanpur.live पर इस खबर का लिंक जोड़ें)
भारत ने लद्दाख में कई रणनीतिक परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित कीं (लिंक जोड़ें)
नागास्त्र-2: सेना को मिले स्वदेशी आत्मघाती ड्रोन (लिंक जोड़ें)
निष्कर्ष
इन्फैंट्री दिवस उन वीर जवानों को याद करने का दिन है, जिन्होंने 1947 में कश्मीर की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। लेफ्टिनेंट कर्नल दीवान रंजीत राय और सिख रेजिमेंट के जवानों का साहस आज भी हर भारतीय सैनिक को प्रेरित करता है। 80वें शौर्य दिवस पर देश अपनी पैदल सेना के अदम्य साहस को सलाम करता है।
देश और सेना से जुड़ी हर खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
यह खबर अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करें:
किसी तथ्य में गलती दिखे तो हमें बताएं — हमारी संपादकीय नीति पढ़ें।
और पढ़ें | Related News
सेना को मिला स्वदेशी 'नागास्त्र-2' एंटी-टैंक ड्रोन, 50 किमी तक दुश्मन के टैंक पर करेगा वार
देश का सबसे बड़ा आईपीओ: जियो प्लेटफॉर्म्स को 22 गुना से ज्यादा बोलियां, 28 अक्टूबर को लिस्टिंग
भारतीय स्टार्टअप स्काईरूट को अमेरिकी कंपनी से दो लॉन्च का ऑर्डर
लद्दाख को 3,350 करोड़ की सौगात: नया एयरपोर्ट टर्मिनल, 298 किमी सड़क और देश का पहला पेट्रोग्लिफ पार्क
सितंबर में निर्यात 23% उछला, 44.4 अरब डॉलर पहुंचा
दिवाली से पहले अवैध पटाखों पर शिकंजा: कानपुर में ई-ऑटो से 77 किलो पटाखे बरामद, दो युवक गिरफ्तार; उन्नाव से लाकर गांवों में बेचने की थी तैयारी
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई | Most Read
- 1कानपुर: बिधनू में डीईसी कॉलेज के बाहर युवक की लात-घूंसों से पिटाई, वीडियो वायरल
- 2कानपुर: 29 और 30 अक्टूबर को बारिश के आसार, बंगाल की खाड़ी के चक्रवाती सिस्टम का असर
- 311 साल की बोधना शिवानंदन बनीं दुनिया की सबसे कम उम्र की महिला इंटरनेशनल मास्टर, तोड़ा जूडित पोल्गर का रिकॉर्ड
- 4भौतिक विज्ञानी अशोक सेन को ऑस्कर क्लाइन मेडल 2026, यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय
- 5पोलैंड के पीएम टस्क का भारत दौरा: व्यापार दोगुना करने, रक्षा उद्योग और आतंकवाद पर बनी सहमति