बारिश के बीच डेंगू पर अलर्ट: कानपुर में स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्र का किया निरीक्षण, फीवर हेल्प डेस्क की जांच
Kanpur health team inspects dengue-affected area, checks fever help desk
Kanpur Live News Desk ·

कानपुर में पिछले कई दिनों से रुक-रुककर बारिश हो रही है। बारिश जहां गर्मी से राहत देती है, वहीं जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के पनपने की सबसे बड़ी वजह बन जाता है। यही समय डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के फैलने का होता है। इसी को देखते हुए जिले का स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है।
स्वास्थ्य टीम ने किया लैब और हेल्प डेस्क का निरीक्षण
कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निर्देश पर नोडल अधिकारी (वीबीडी) डॉ. राजेश्वर सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी अरुण कुमार सिंह और सहयोगी संस्था पाथ के रीजनल कोऑर्डिनेटर डॉ. शिवकांत ने मान्यवर कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय एवं ट्रामा सेंटर में चल रही लैब का निरीक्षण किया और जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
univarta
इसके साथ ही टीम ने डीटीसी हरजेंदर नगर में बनी फीवर हेल्प डेस्क का औचक निरीक्षण भी किया।
univarta
वीबीडी का पूरा नाम 'वेक्टर बोर्न डिजीज' है, यानी मच्छर जैसे वाहकों से फैलने वाली बीमारियां। डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और जापानी इंसेफेलाइटिस इसी श्रेणी में आते हैं।
सफीपुर प्रथम में केस मिलने पर मौके पर पहुंची टीम
डीटीसी हरजेंदर नगर क्षेत्र के सफीपुर प्रथम में डेंगू का मामला सामने आने के बाद टीम ने प्रभावित इलाके का भौतिक निरीक्षण किया। इस दौरान बुखार सर्वे, जांच, सोर्स रिडक्शन और लार्वानाशक छिड़काव जैसी गतिविधियों का सत्यापन किया गया।
univarta
डेंगू का कोई केस मिलने पर स्वास्थ्य विभाग आसपास के घरों में बुखार के मरीजों की पहचान करता है, संदिग्ध लोगों की जांच कराता है और मच्छरों के पनपने की जगहों को खत्म करने का काम करता है। इसे 'सोर्स रिडक्शन' कहा जाता है।
सोर्स रिडक्शन क्या है
सोर्स रिडक्शन का मतलब है मच्छरों के पैदा होने की जगहों को ही खत्म कर देना। डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में अंडे देता है। कूलर का पानी, गमलों के नीचे की प्लेट, पुराने टायर, टूटे बर्तन, छत पर रखी टंकी, पानी की खुली बाल्टियां और फेंके गए प्लास्टिक के डिब्बे इसके लिए आदर्श जगह बनते हैं। इन जगहों से पानी हटाने पर मच्छर का जीवन चक्र वहीं टूट जाता है। यह डेंगू से बचाव का सबसे असरदार तरीका माना जाता है।
डेंगू के सामान्य लक्षण
डेंगू एक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलती है। इसके आम लक्षण हैं:
अचानक तेज बुखार
तेज सिरदर्द
आंखों के पीछे दर्द
मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द
जी मिचलाना या उल्टी
शरीर पर लाल चकत्ते (रैशेज)
इन खतरे के संकेतों को नजरअंदाज न करें
डेंगू के ज्यादातर मरीज सही देखभाल से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर हो सकता है। खासकर बुखार उतरने के आसपास के दिनों में इन संकेतों पर नजर रखें:
पेट में तेज दर्द
लगातार उल्टी
मसूड़ों या नाक से खून आना
उल्टी या मल में खून
बहुत ज्यादा थकान, बेचैनी या चिड़चिड़ापन
सांस लेने में तकलीफ
इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो बिना देर किए नजदीकी अस्पताल जाएं।
खुद से दवा न लें
डेंगू में खुद से दवा लेना नुकसानदेह हो सकता है। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार डेंगू के संदिग्ध मरीजों को एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दर्द निवारक दवाओं से बचना चाहिए, क्योंकि ये खून बहने का खतरा बढ़ा सकती हैं। बुखार होने पर डॉक्टर से संपर्क करें और जांच कराएं। पर्याप्त तरल पदार्थ लेते रहना, जैसे पानी, नारियल पानी, ओआरएस और सूप, शरीर में पानी की कमी को रोकने में मदद करता है।
सरकारी अस्पतालों में जांच की सुविधा
बुखार आने पर लोग सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में जांच करा सकते हैं। फीवर हेल्प डेस्क इसी मकसद से बनाई जाती हैं, ताकि बुखार के मरीजों की शुरुआती पहचान हो सके और समय पर इलाज शुरू किया जा सके। स्वास्थ्य विभाग द्वारा लैब का निरीक्षण भी इसीलिए किया जाता है, ताकि जांच की व्यवस्था सुचारू रहे।
घर पर ऐसे करें बचाव
हफ्ते में एक दिन 'ड्राई डे': कूलर, टंकी, गमलों की प्लेट और बर्तनों का पानी खाली करके सुखाएं।
पानी ढककर रखें: पानी की टंकियों और बाल्टियों को हमेशा ढककर रखें।
कबाड़ हटाएं: छत और आंगन में पड़े पुराने टायर, डिब्बे और टूटे बर्तन हटा दें।
पूरी बांह के कपड़े: खासकर सुबह और शाम के समय, जब एडीज मच्छर ज्यादा सक्रिय होता है।
मच्छरदानी और रिपेलेंट: सोते समय मच्छरदानी लगाएं और मच्छर भगाने वाली क्रीम या उपकरण इस्तेमाल करें।
खिड़कियों पर जाली: घर की खिड़की-दरवाजों पर जाली लगवाएं।
एडीज मच्छर दिन में काटता है
बहुत से लोगों को लगता है कि मच्छर केवल रात में काटते हैं, लेकिन डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर मुख्य रूप से दिन के समय, खासकर सुबह और शाम को काटता है। इसलिए दिन में भी बचाव जरूरी है। स्कूल जाने वाले बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनाकर भेजना फायदेमंद है।
बारिश के बाद बढ़ती है सतर्कता की जरूरत
इस साल कानपुर में सितंबर में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है और मौसम विभाग ने मानसून की वापसी अक्टूबर की शुरुआत में होने का अनुमान जताया है। बारिश थमने के बाद के दो-तीन हफ्ते मच्छरों के पनपने के लिहाज से सबसे संवेदनशील माने जाते हैं, क्योंकि तब जगह-जगह ठहरा हुआ पानी रह जाता है। इसलिए आने वाले दिनों में सभी को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
सामूहिक जिम्मेदारी
डेंगू से बचाव केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। अगर हर परिवार अपने घर और आसपास पानी जमा न होने दे, तो मच्छरों की संख्या में बड़ी कमी आ सकती है। मोहल्ले में कहीं पानी जमा हो रहा हो या नाली चोक हो, तो इसकी सूचना नगर निगम को दें। बुखार के किसी भी मरीज को नजरअंदाज न करें और समय पर जांच कराएं।
सावधानी ही डेंगू से सबसे बड़ा बचाव है। स्वास्थ्य से जुड़ी हर जरूरी जानकारी के लिए कानपुर लाइव से जुड़े रहें।
बारिश के बीच डेंगू पर अलर्ट: कानपुर में स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्र का किया निरीक्षण, फीवर हेल्प डेस्क की जांच
कानपुर में पिछले कई दिनों से रुक-रुककर बारिश हो रही है। बारिश जहां गर्मी से राहत देती है, वहीं जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के पनपने की सबसे बड़ी वजह बन जाता है। यही समय डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के फैलने का होता है। इसी को देखते हुए जिले का स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है।
स्वास्थ्य टीम ने किया लैब और हेल्प डेस्क का निरीक्षण
कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निर्देश पर नोडल अधिकारी (वीबीडी) डॉ. राजेश्वर सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी अरुण कुमार सिंह और सहयोगी संस्था पाथ के रीजनल कोऑर्डिनेटर डॉ. शिवकांत ने मान्यवर कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय एवं ट्रामा सेंटर में चल रही लैब का निरीक्षण किया और जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
univarta
इसके साथ ही टीम ने डीटीसी हरजेंदर नगर में बनी फीवर हेल्प डेस्क का औचक निरीक्षण भी किया।
univarta
वीबीडी का पूरा नाम 'वेक्टर बोर्न डिजीज' है, यानी मच्छर जैसे वाहकों से फैलने वाली बीमारियां। डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और जापानी इंसेफेलाइटिस इसी श्रेणी में आते हैं।
सफीपुर प्रथम में केस मिलने पर मौके पर पहुंची टीम
डीटीसी हरजेंदर नगर क्षेत्र के सफीपुर प्रथम में डेंगू का मामला सामने आने के बाद टीम ने प्रभावित इलाके का भौतिक निरीक्षण किया। इस दौरान बुखार सर्वे, जांच, सोर्स रिडक्शन और लार्वानाशक छिड़काव जैसी गतिविधियों का सत्यापन किया गया।
univarta
डेंगू का कोई केस मिलने पर स्वास्थ्य विभाग आसपास के घरों में बुखार के मरीजों की पहचान करता है, संदिग्ध लोगों की जांच कराता है और मच्छरों के पनपने की जगहों को खत्म करने का काम करता है। इसे 'सोर्स रिडक्शन' कहा जाता है।
सोर्स रिडक्शन क्या है
सोर्स रिडक्शन का मतलब है मच्छरों के पैदा होने की जगहों को ही खत्म कर देना। डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में अंडे देता है। कूलर का पानी, गमलों के नीचे की प्लेट, पुराने टायर, टूटे बर्तन, छत पर रखी टंकी, पानी की खुली बाल्टियां और फेंके गए प्लास्टिक के डिब्बे इसके लिए आदर्श जगह बनते हैं। इन जगहों से पानी हटाने पर मच्छर का जीवन चक्र वहीं टूट जाता है। यह डेंगू से बचाव का सबसे असरदार तरीका माना जाता है।
डेंगू के सामान्य लक्षण
डेंगू एक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलती है। इसके आम लक्षण हैं:
अचानक तेज बुखार
तेज सिरदर्द
आंखों के पीछे दर्द
मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द
जी मिचलाना या उल्टी
शरीर पर लाल चकत्ते (रैशेज)
इन खतरे के संकेतों को नजरअंदाज न करें
डेंगू के ज्यादातर मरीज सही देखभाल से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर हो सकता है। खासकर बुखार उतरने के आसपास के दिनों में इन संकेतों पर नजर रखें:
पेट में तेज दर्द
लगातार उल्टी
मसूड़ों या नाक से खून आना
उल्टी या मल में खून
बहुत ज्यादा थकान, बेचैनी या चिड़चिड़ापन
सांस लेने में तकलीफ
इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो बिना देर किए नजदीकी अस्पताल जाएं।
खुद से दवा न लें
डेंगू में खुद से दवा लेना नुकसानदेह हो सकता है। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार डेंगू के संदिग्ध मरीजों को एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दर्द निवारक दवाओं से बचना चाहिए, क्योंकि ये खून बहने का खतरा बढ़ा सकती हैं। बुखार होने पर डॉक्टर से संपर्क करें और जांच कराएं। पर्याप्त तरल पदार्थ लेते रहना, जैसे पानी, नारियल पानी, ओआरएस और सूप, शरीर में पानी की कमी को रोकने में मदद करता है।
सरकारी अस्पतालों में जांच की सुविधा
बुखार आने पर लोग सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में जांच करा सकते हैं। फीवर हेल्प डेस्क इसी मकसद से बनाई जाती हैं, ताकि बुखार के मरीजों की शुरुआती पहचान हो सके और समय पर इलाज शुरू किया जा सके। स्वास्थ्य विभाग द्वारा लैब का निरीक्षण भी इसीलिए किया जाता है, ताकि जांच की व्यवस्था सुचारू रहे।
घर पर ऐसे करें बचाव
हफ्ते में एक दिन 'ड्राई डे': कूलर, टंकी, गमलों की प्लेट और बर्तनों का पानी खाली करके सुखाएं।
पानी ढककर रखें: पानी की टंकियों और बाल्टियों को हमेशा ढककर रखें।
कबाड़ हटाएं: छत और आंगन में पड़े पुराने टायर, डिब्बे और टूटे बर्तन हटा दें।
पूरी बांह के कपड़े: खासकर सुबह और शाम के समय, जब एडीज मच्छर ज्यादा सक्रिय होता है।
मच्छरदानी और रिपेलेंट: सोते समय मच्छरदानी लगाएं और मच्छर भगाने वाली क्रीम या उपकरण इस्तेमाल करें।
खिड़कियों पर जाली: घर की खिड़की-दरवाजों पर जाली लगवाएं।
एडीज मच्छर दिन में काटता है
बहुत से लोगों को लगता है कि मच्छर केवल रात में काटते हैं, लेकिन डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर मुख्य रूप से दिन के समय, खासकर सुबह और शाम को काटता है। इसलिए दिन में भी बचाव जरूरी है। स्कूल जाने वाले बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनाकर भेजना फायदेमंद है।
बारिश के बाद बढ़ती है सतर्कता की जरूरत
इस साल कानपुर में सितंबर में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है और मौसम विभाग ने मानसून की वापसी अक्टूबर की शुरुआत में होने का अनुमान जताया है। बारिश थमने के बाद के दो-तीन हफ्ते मच्छरों के पनपने के लिहाज से सबसे संवेदनशील माने जाते हैं, क्योंकि तब जगह-जगह ठहरा हुआ पानी रह जाता है। इसलिए आने वाले दिनों में सभी को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
सामूहिक जिम्मेदारी
डेंगू से बचाव केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। अगर हर परिवार अपने घर और आसपास पानी जमा न होने दे, तो मच्छरों की संख्या में बड़ी कमी आ सकती है। मोहल्ले में कहीं पानी जमा हो रहा हो या नाली चोक हो, तो इसकी सूचना नगर निगम को दें। बुखार के किसी भी मरीज को नजरअंदाज न करें और समय पर जांच कराएं।
सावधानी ही डेंगू से सबसे बड़ा बचाव है। स्वास्थ्य से जुड़ी हर जरूरी जानकारी के लिए कानपुर लाइव से जुड़े रहें।
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