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एशियाई पैरा खेल में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन: रिकॉर्ड 114 पदक, 30 स्वर्ण

India end Asian Para Games 2026 with record 114 medals, including 30 golds

Kanpur Live News Desk ·

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एशियाई पैरा खेल में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन: रिकॉर्ड 114 पदक, 30 स्वर्ण
भारतीय पैरा खिलाड़ियों ने जापान के आइची-नागोया में इतिहास रच दिया है। एशियाई पैरा खेल 2026 में भारत ने 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य समेत कुल 114 पदक जीते हैं। यह एशियाई पैरा खेलों में भारत का अब तक का सबसे बड़ा पदक संग्रह है। भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। आखिरी दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 9 स्वर्ण पदक जीते, जो इन खेलों में भारत का एक दिन का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। इस दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने तीन विश्व रिकॉर्ड भी बनाए। अंतिम पदक तालिका स्वर्ण: 30 रजत: 35 कांस्य: 49 कुल: 114 स्थान: चौथा छोटा दल, बड़ी कामयाबी इस बार भारत ने 168 सदस्यों का दल भेजा था, जो पिछले हांगझोउ खेलों के दल से लगभग आधा था। इसके बावजूद भारत ने पिछली बार से ज्यादा पदक और ज्यादा स्वर्ण पदक जीते। यह भारतीय पैरा खिलाड़ियों की बढ़ती गुणवत्ता और बेहतर तैयारी का सबूत है। सुमित अंतिल की अगुवाई में भाला फेंक में क्लीन स्वीप पैरालंपिक चैंपियन सुमित अंतिल ने पुरुषों की भाला फेंक एफ42-44/61-64 स्पर्धा में 72.46 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता। इस स्पर्धा में भारत ने तीनों पदक अपने नाम किए: स्वर्ण: सुमित अंतिल (72.46 मीटर) रजत: महेंद्र गुर्जर (59.03 मीटर) कांस्य: संजय संदीप सरगर (64.48 मीटर) दिलचस्प बात यह है कि सरगर ने गुर्जर से ज्यादा दूर भाला फेंका, लेकिन मिश्रित श्रेणी वाली इस स्पर्धा में दिव्यांगता के वर्गीकरण के आधार पर अंक तय होने के कारण गुर्जर को रजत मिला। तीन विश्व रिकॉर्ड संदीप: पुरुषों की 400 मीटर टी64 दौड़ में संदीप ने 52.28 सेकंड का समय निकालकर विश्व रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण जीता। इसी दौड़ में अजय कुमार ने 53.61 सेकंड के खेल रिकॉर्ड के साथ कांस्य पदक जीता। हैनी: भाला फेंक एफ37/38 में हैनी ने 60.49 मीटर का विश्व रिकॉर्ड बनाकर स्वर्ण पदक जीता। हैनी इससे पहले डिस्कस थ्रो में भी कांस्य जीत चुके थे। मोना अग्रवाल: महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन एसएच1 स्पर्धा में मोना अग्रवाल ने 357.5 अंकों के साथ विश्व रिकॉर्ड तोड़ा। यह इन खेलों में उनका दूसरा स्वर्ण पदक है। प्रणव सूरमा का खेल रिकॉर्ड पुरुषों की क्लब थ्रो एफ51 स्पर्धा में प्रणव सूरमा ने 32.87 मीटर के खेल रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले उन्होंने डिस्कस थ्रो में भी स्वर्ण जीतकर एशियाई रिकॉर्ड बनाया था। बैडमिंटन में चमके खिलाड़ी नितेश कुमार: पुरुष सिंगल्स एसएल3 में स्वर्ण। फाइनल में उन्होंने हमवतन प्रमोद भगत को 21-18, 21-16 से हराया। नवीन शिवकुमार: पहली बार इन खेलों में उतरे नवीन ने पुरुष सिंगल्स एसएल4 में स्वर्ण जीता। फाइनल में उन्होंने इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान को 21-9, 21-17 से हराया। थुलसीमति मुरुगेसन: मानसी जोशी के साथ महिला डबल्स एसएल3-एसयू5 में स्वर्ण, साथ ही मिक्स्ड डबल्स और महिला सिंगल्स एसयू5 में रजत। तीरंदाजी में स्वर्ण हरविंदर सिंह और विजय सुंडी की जोड़ी ने पुरुष रिकर्व डबल्स में स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले शीतल देवी ने तोमन कुमार के साथ कंपाउंड मिक्स्ड टीम में स्वर्ण जीता था। हरविंदर सिंह टोक्यो पैरालंपिक में तीरंदाजी में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने थे। एथलेटिक्स में 65 पदक पैरा एथलेटिक्स भारत की सबसे बड़ी ताकत रहा। भारत ने एथलेटिक्स में कुल 65 पदक जीते, जो हांगझोउ के मुकाबले 12 ज्यादा हैं। निमिषा चक्कुंगलपरंबिल ने महिला लंबी कूद टी47 में और परमोद बिजारनिया ने पुरुष 1500 मीटर टी46 में रजत पदक जीता। तैराकी में 11 पदक तैराकी में भारत ने 11 पदक जीते, जिनमें तीन रजत शामिल हैं। हिमांशु नांदल ने पुरुष 100 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 में कांस्य जीतकर इन खेलों में कांस्य पदकों की हैट्रिक पूरी की। रवि बुडिगिना ने दो रजत और एक कांस्य पदक जीते। पैरा तैराकी में यह प्रदर्शन भारत के लिए नई उम्मीद है। सफलता के पीछे की वजहें भारत की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे कई कारण हैं: टॉप्स योजना: टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम के तहत खिलाड़ियों को व्यक्तिगत कोच, विदेश में प्रशिक्षण और आर्थिक मदद। खेलो इंडिया: जमीनी स्तर पर प्रतिभा की पहचान और प्रशिक्षण। बेहतर उपकरण: व्हीलचेयर, कृत्रिम अंग और खेल उपकरणों में सुधार। खेल विज्ञान: फिजियोथेरेपी, पोषण और फिटनेस पर ध्यान। अंतरराष्ट्रीय अनुभव: विदेशी प्रतियोगिताओं में लगातार भागीदारी। पैरालंपिक की तैयारी एशियाई पैरा खेलों में यह प्रदर्शन 2028 के लॉस एंजिलिस पैरालंपिक खेलों के लिए भारत की तैयारी का अहम पड़ाव है। सुमित अंतिल, शीतल देवी, प्रवीण कुमार और मोना अग्रवाल जैसे खिलाड़ी पैरालंपिक में भी पदक के दावेदार हैं। युवा खिलाड़ियों के उभरने से भारत की पदक उम्मीदें और बढ़ी हैं। देशभर में जश्न भारतीय पैरा खिलाड़ियों की इस ऐतिहासिक सफलता पर देशभर में खुशी का माहौल है। खेल प्रेमी सोशल मीडिया पर खिलाड़ियों को बधाई दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश के प्रवीण कुमार समेत कई राज्यों के खिलाड़ियों ने अपने प्रदेशों का नाम रोशन किया है। कुछ और यादगार प्रदर्शन इन खेलों में कई खिलाड़ियों ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। दीप्ति जीवनजी और सिमरन ने दौड़ में खेलों के रिकॉर्ड बनाए। सचिन खिलारी और प्रवीण कुमार ने भी रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण जीते। सोलैराज धर्मराज ने लंबी कूद में एशियाई रिकॉर्ड बनाया। शॉट पुट एफ46, ऊंची कूद टी63 और भाला फेंक जैसी स्पर्धाओं में भारत ने क्लीन स्वीप कर पूरे पोडियम पर कब्जा किया। स्वाति चौधरी ने तीरंदाजी की डब्ल्यू1 श्रेणी में भारत का पहला पदक जीता। इन उपलब्धियों से साफ है कि भारत की पैरा खेलों में ताकत केवल कुछ स्पर्धाओं तक सीमित नहीं, बल्कि हर खेल में फैल रही है। खिलाड़ियों का स्वागत भारत लौटने पर पदक विजेता खिलाड़ियों का भव्य स्वागत होने की उम्मीद है। कई राज्य सरकारें अपने पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए पुरस्कार राशि की घोषणा करती हैं। निष्कर्ष एशियाई पैरा खेल 2026 भारतीय खेल इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज होगा। 114 पदक, 30 स्वर्ण, तीन विश्व रिकॉर्ड और कई खेल रिकॉर्ड इस बात का सबूत हैं कि भारत के पैरा खिलाड़ी एशिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में शुमार हैं। उनकी कामयाबी हर भारतीय के लिए प्रेरणा है कि हौसले के आगे कोई बाधा बड़ी नहीं होती। खेल जगत की हर बड़ी खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।

एशियाई पैरा खेल में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन: रिकॉर्ड 114 पदक, 30 स्वर्ण

भारतीय पैरा खिलाड़ियों ने जापान के आइची-नागोया में इतिहास रच दिया है। एशियाई पैरा खेल 2026 में भारत ने 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य समेत कुल 114 पदक जीते हैं। यह एशियाई पैरा खेलों में भारत का अब तक का सबसे बड़ा पदक संग्रह है। भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। आखिरी दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 9 स्वर्ण पदक जीते, जो इन खेलों में भारत का एक दिन का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। इस दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने तीन विश्व रिकॉर्ड भी बनाए। अंतिम पदक तालिका स्वर्ण: 30 रजत: 35 कांस्य: 49 कुल: 114 स्थान: चौथा छोटा दल, बड़ी कामयाबी इस बार भारत ने 168 सदस्यों का दल भेजा था, जो पिछले हांगझोउ खेलों के दल से लगभग आधा था। इसके बावजूद भारत ने पिछली बार से ज्यादा पदक और ज्यादा स्वर्ण पदक जीते। यह भारतीय पैरा खिलाड़ियों की बढ़ती गुणवत्ता और बेहतर तैयारी का सबूत है। सुमित अंतिल की अगुवाई में भाला फेंक में क्लीन स्वीप पैरालंपिक चैंपियन सुमित अंतिल ने पुरुषों की भाला फेंक एफ42-44/61-64 स्पर्धा में 72.46 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता। इस स्पर्धा में भारत ने तीनों पदक अपने नाम किए: स्वर्ण: सुमित अंतिल (72.46 मीटर) रजत: महेंद्र गुर्जर (59.03 मीटर) कांस्य: संजय संदीप सरगर (64.48 मीटर) दिलचस्प बात यह है कि सरगर ने गुर्जर से ज्यादा दूर भाला फेंका, लेकिन मिश्रित श्रेणी वाली इस स्पर्धा में दिव्यांगता के वर्गीकरण के आधार पर अंक तय होने के कारण गुर्जर को रजत मिला। तीन विश्व रिकॉर्ड संदीप: पुरुषों की 400 मीटर टी64 दौड़ में संदीप ने 52.28 सेकंड का समय निकालकर विश्व रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण जीता। इसी दौड़ में अजय कुमार ने 53.61 सेकंड के खेल रिकॉर्ड के साथ कांस्य पदक जीता। हैनी: भाला फेंक एफ37/38 में हैनी ने 60.49 मीटर का विश्व रिकॉर्ड बनाकर स्वर्ण पदक जीता। हैनी इससे पहले डिस्कस थ्रो में भी कांस्य जीत चुके थे। मोना अग्रवाल: महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन एसएच1 स्पर्धा में मोना अग्रवाल ने 357.5 अंकों के साथ विश्व रिकॉर्ड तोड़ा। यह इन खेलों में उनका दूसरा स्वर्ण पदक है। प्रणव सूरमा का खेल रिकॉर्ड पुरुषों की क्लब थ्रो एफ51 स्पर्धा में प्रणव सूरमा ने 32.87 मीटर के खेल रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले उन्होंने डिस्कस थ्रो में भी स्वर्ण जीतकर एशियाई रिकॉर्ड बनाया था। बैडमिंटन में चमके खिलाड़ी नितेश कुमार: पुरुष सिंगल्स एसएल3 में स्वर्ण। फाइनल में उन्होंने हमवतन प्रमोद भगत को 21-18, 21-16 से हराया। नवीन शिवकुमार: पहली बार इन खेलों में उतरे नवीन ने पुरुष सिंगल्स एसएल4 में स्वर्ण जीता। फाइनल में उन्होंने इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान को 21-9, 21-17 से हराया। थुलसीमति मुरुगेसन: मानसी जोशी के साथ महिला डबल्स एसएल3-एसयू5 में स्वर्ण, साथ ही मिक्स्ड डबल्स और महिला सिंगल्स एसयू5 में रजत। तीरंदाजी में स्वर्ण हरविंदर सिंह और विजय सुंडी की जोड़ी ने पुरुष रिकर्व डबल्स में स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले शीतल देवी ने तोमन कुमार के साथ कंपाउंड मिक्स्ड टीम में स्वर्ण जीता था। हरविंदर सिंह टोक्यो पैरालंपिक में तीरंदाजी में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने थे। एथलेटिक्स में 65 पदक पैरा एथलेटिक्स भारत की सबसे बड़ी ताकत रहा। भारत ने एथलेटिक्स में कुल 65 पदक जीते, जो हांगझोउ के मुकाबले 12 ज्यादा हैं। निमिषा चक्कुंगलपरंबिल ने महिला लंबी कूद टी47 में और परमोद बिजारनिया ने पुरुष 1500 मीटर टी46 में रजत पदक जीता। तैराकी में 11 पदक तैराकी में भारत ने 11 पदक जीते, जिनमें तीन रजत शामिल हैं। हिमांशु नांदल ने पुरुष 100 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 में कांस्य जीतकर इन खेलों में कांस्य पदकों की हैट्रिक पूरी की। रवि बुडिगिना ने दो रजत और एक कांस्य पदक जीते। पैरा तैराकी में यह प्रदर्शन भारत के लिए नई उम्मीद है। सफलता के पीछे की वजहें भारत की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे कई कारण हैं: टॉप्स योजना: टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम के तहत खिलाड़ियों को व्यक्तिगत कोच, विदेश में प्रशिक्षण और आर्थिक मदद। खेलो इंडिया: जमीनी स्तर पर प्रतिभा की पहचान और प्रशिक्षण। बेहतर उपकरण: व्हीलचेयर, कृत्रिम अंग और खेल उपकरणों में सुधार। खेल विज्ञान: फिजियोथेरेपी, पोषण और फिटनेस पर ध्यान। अंतरराष्ट्रीय अनुभव: विदेशी प्रतियोगिताओं में लगातार भागीदारी। पैरालंपिक की तैयारी एशियाई पैरा खेलों में यह प्रदर्शन 2028 के लॉस एंजिलिस पैरालंपिक खेलों के लिए भारत की तैयारी का अहम पड़ाव है। सुमित अंतिल, शीतल देवी, प्रवीण कुमार और मोना अग्रवाल जैसे खिलाड़ी पैरालंपिक में भी पदक के दावेदार हैं। युवा खिलाड़ियों के उभरने से भारत की पदक उम्मीदें और बढ़ी हैं। देशभर में जश्न भारतीय पैरा खिलाड़ियों की इस ऐतिहासिक सफलता पर देशभर में खुशी का माहौल है। खेल प्रेमी सोशल मीडिया पर खिलाड़ियों को बधाई दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश के प्रवीण कुमार समेत कई राज्यों के खिलाड़ियों ने अपने प्रदेशों का नाम रोशन किया है। कुछ और यादगार प्रदर्शन इन खेलों में कई खिलाड़ियों ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। दीप्ति जीवनजी और सिमरन ने दौड़ में खेलों के रिकॉर्ड बनाए। सचिन खिलारी और प्रवीण कुमार ने भी रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण जीते। सोलैराज धर्मराज ने लंबी कूद में एशियाई रिकॉर्ड बनाया। शॉट पुट एफ46, ऊंची कूद टी63 और भाला फेंक जैसी स्पर्धाओं में भारत ने क्लीन स्वीप कर पूरे पोडियम पर कब्जा किया। स्वाति चौधरी ने तीरंदाजी की डब्ल्यू1 श्रेणी में भारत का पहला पदक जीता। इन उपलब्धियों से साफ है कि भारत की पैरा खेलों में ताकत केवल कुछ स्पर्धाओं तक सीमित नहीं, बल्कि हर खेल में फैल रही है। खिलाड़ियों का स्वागत भारत लौटने पर पदक विजेता खिलाड़ियों का भव्य स्वागत होने की उम्मीद है। कई राज्य सरकारें अपने पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए पुरस्कार राशि की घोषणा करती हैं। निष्कर्ष एशियाई पैरा खेल 2026 भारतीय खेल इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज होगा। 114 पदक, 30 स्वर्ण, तीन विश्व रिकॉर्ड और कई खेल रिकॉर्ड इस बात का सबूत हैं कि भारत के पैरा खिलाड़ी एशिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में शुमार हैं। उनकी कामयाबी हर भारतीय के लिए प्रेरणा है कि हौसले के आगे कोई बाधा बड़ी नहीं होती। खेल जगत की हर बड़ी खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।

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