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ब्राजील में लूला की ऐतिहासिक जीत, चौथी बार बने राष्ट्रपति, फ्लावियो बोल्सोनारो को हराया

Brazil election: Lula wins fourth term, defeats Flavio Bolsonaro

Kanpur Live News Desk ·

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ब्राजील में लूला की ऐतिहासिक जीत, चौथी बार बने राष्ट्रपति, फ्लावियो बोल्सोनारो को हराया
ब्राजील में 25 अक्टूबर को हुए राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर (रनऑफ) में मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने जीत दर्ज कर चौथी बार राष्ट्रपति पद हासिल किया है। लूला को 51.79% वोट मिले, जबकि लिबरल पार्टी (पीएल) के उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.21% वोट मिले। लूला को 5.14 करोड़ से ज्यादा वोट मिले। वे 5 जनवरी 2027 को पद की शपथ लेंगे। यह उनका चौथा, लेकिन गैर-लगातार कार्यकाल होगा। कड़ा मुकाबला ब्राजील का यह चुनाव बेहद कांटे का रहा। दोनों उम्मीदवारों के बीच करीब साढ़े तीन प्रतिशत अंकों का ही अंतर रहा। इससे साफ है कि ब्राजील की राजनीति दो खेमों में गहराई से बंटी हुई है, एक तरफ लूला की वामपंथी वर्कर्स पार्टी और दूसरी तरफ बोल्सोनारो परिवार की दक्षिणपंथी राजनीति। दो ऐतिहासिक रिकॉर्ड लूला की इस जीत के साथ दो खास रिकॉर्ड जुड़े हैं: सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति: 1989 में ब्राजील में लोकतंत्र की बहाली के बाद पद संभालने वाले वे सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति होंगे। पिछड़ने के बाद जीत: लोकतांत्रिक दौर में वे पहले ऐसे उम्मीदवार हैं, जिन्होंने पहले दौर में पीछे रहने के बाद दूसरे दौर में जीत हासिल की। ब्राजील की चुनाव प्रणाली ब्राजील में राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता करती है। अगर पहले दौर में किसी उम्मीदवार को 50% से ज्यादा वैध वोट नहीं मिलते, तो शीर्ष दो उम्मीदवारों के बीच दूसरे दौर का मुकाबला होता है। ब्राजील में मतदान अनिवार्य है और वोटिंग इलेक्ट्रॉनिक मशीनों से होती है। कौन हैं लूला गरीबी से राष्ट्रपति तक: लूला का जन्म ब्राजील के पूर्वोत्तर क्षेत्र के एक गरीब परिवार में हुआ। बचपन में उन्होंने जूते पॉलिश करने और फैक्ट्री में मजदूरी जैसे काम किए। मजदूर नेता: वे धातु कामगारों के यूनियन नेता बने और 1980 में वर्कर्स पार्टी (पीटी) की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। पहले दो कार्यकाल: 2003 से 2010 तक लगातार दो बार राष्ट्रपति रहे। इस दौरान 'बोल्सा फैमिलिया' जैसी योजनाओं से करोड़ों लोगों को गरीबी से निकालने का श्रेय उन्हें दिया जाता है। जेल और वापसी: भ्रष्टाचार के आरोपों में उन्हें जेल जाना पड़ा, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा रद्द कर दी। तीसरा कार्यकाल: 2022 के चुनाव में जायर बोल्सोनारो को हराकर उन्होंने 2023 में तीसरी बार पद संभाला। चौथा कार्यकाल: अब 2026 में फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर चौथी बार राष्ट्रपति बने हैं। कौन हैं फ्लावियो बोल्सोनारो फ्लावियो बोल्सोनारो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं और ब्राजील के सीनेटर हैं। उन्होंने लिबरल पार्टी (पीएल) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। उनके पिता जायर बोल्सोनारो 2019 से 2022 तक ब्राजील के राष्ट्रपति रहे थे। भारत के लिए क्या मायने भारत और ब्राजील के रिश्ते मजबूत रहे हैं। दोनों देश कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साथ हैं: ब्रिक्स: ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का यह समूह उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज है। भारत और ब्राजील इसके संस्थापक सदस्य हैं। आईबीएसए: भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका का त्रिपक्षीय मंच। जी-20: दोनों देश जी-20 के सदस्य हैं। 2023 में भारत और 2024 में ब्राजील ने जी-20 की अध्यक्षता की थी। ग्लोबल साउथ: लूला और भारत, दोनों विकासशील देशों के हितों की वकालत करते रहे हैं। व्यापार: ब्राजील भारत को कच्चा तेल, चीनी और सोयाबीन तेल जैसे उत्पाद निर्यात करता है, जबकि भारत से दवाइयां, रसायन और वाहन जाते हैं। एथेनॉल और जैव ईंधन: ब्राजील एथेनॉल उत्पादन में दुनिया के अग्रणी देशों में है और भारत के एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावना है। लूला के फिर से राष्ट्रपति बनने से भारत-ब्राजील संबंधों में निरंतरता बनी रहने की उम्मीद है। लूला के सामने चुनौतियां चौथे कार्यकाल में लूला के सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी: बंटा हुआ समाज: करीब आधे मतदाताओं ने उनके खिलाफ वोट दिया है। सबको साथ लेकर चलना बड़ी चुनौती होगी। अर्थव्यवस्था: महंगाई, रोजगार और आर्थिक विकास पर लोगों की नजर रहेगी। अमेजन वर्षावन: दुनिया के सबसे बड़े वर्षावन को कटाई से बचाना पर्यावरण के लिहाज से अहम मुद्दा है। कांग्रेस में बहुमत: नीतियां लागू करने के लिए संसद में समर्थन जुटाना जरूरी होगा। उम्र: सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति होने के नाते उनके स्वास्थ्य और ऊर्जा पर भी लोगों की नजर रहेगी। ब्राजील: एक नजर में राजधानी: ब्रासीलिया सबसे बड़ा शहर: साओ पाउलो भाषा: पुर्तगाली मुद्रा: ब्राजीलियन रियाल खास पहचान: दक्षिण अमेरिका का सबसे बड़ा देश, अमेजन वर्षावन, फुटबॉल और कार्निवल के लिए दुनियाभर में मशहूर। दुनिया की नजर ब्राजील पर ब्राजील दक्षिण अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और दुनिया के प्रमुख कृषि निर्यातकों में से एक है। कॉफी, सोयाबीन, चीनी और मांस के निर्यात में उसकी बड़ी हिस्सेदारी है। इसलिए वहां की राजनीतिक स्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ता है। अमेजन वर्षावन के कारण जलवायु परिवर्तन से जुड़ी वैश्विक बहस में भी ब्राजील की भूमिका अहम है। ऐसे में नई सरकार की नीतियों पर दुनियाभर की नजर रहेगी। बोल्सोनारो खेमे की प्रतिक्रिया पर नजर कड़े मुकाबले के बाद हारने वाले पक्ष की प्रतिक्रिया लोकतंत्र में अहम होती है। 2022 के चुनाव के बाद ब्राजील में राजनीतिक तनाव देखा गया था। इस बार भी नतीजों के बाद दोनों खेमों के रुख पर देश और दुनिया की नजर रहेगी। भारतीय समुदाय ब्राजील में भारतीय मूल के लोगों की संख्या कम है, लेकिन योग, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति वहां लोकप्रिय हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच शिक्षा, खेल और पर्यटन के क्षेत्र में भी आदान-प्रदान बढ़ाने की संभावनाएं हैं। यह भी पढ़ें पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क का भारत दौरा (एडिटर: kanpur.live पर इस खबर का लिंक जोड़ें) साहित्य का नोबेल पुरस्कार 2026: कनाडाई कवयित्री ऐन कार्सन को सम्मान (लिंक जोड़ें) भारत ने लद्दाख में कई रणनीतिक परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित कीं (लिंक जोड़ें) निष्कर्ष लूला की जीत ब्राजील की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ है। पहले दौर में पिछड़ने के बाद वापसी कर चौथी बार राष्ट्रपति बनना उनकी राजनीतिक पकड़ को दिखाता है। भारत के लिए यह जीत ब्रिक्स और ग्लोबल साउथ में सहयोग जारी रहने का संकेत है। अब नजर इस पर रहेगी कि वे बंटे हुए देश को कैसे साथ लेकर चलते हैं। देश-दुनिया की हर बड़ी खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।

ब्राजील में लूला की ऐतिहासिक जीत, चौथी बार बने राष्ट्रपति, फ्लावियो बोल्सोनारो को हराया

ब्राजील में 25 अक्टूबर को हुए राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर (रनऑफ) में मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने जीत दर्ज कर चौथी बार राष्ट्रपति पद हासिल किया है। लूला को 51.79% वोट मिले, जबकि लिबरल पार्टी (पीएल) के उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.21% वोट मिले। लूला को 5.14 करोड़ से ज्यादा वोट मिले। वे 5 जनवरी 2027 को पद की शपथ लेंगे। यह उनका चौथा, लेकिन गैर-लगातार कार्यकाल होगा। कड़ा मुकाबला ब्राजील का यह चुनाव बेहद कांटे का रहा। दोनों उम्मीदवारों के बीच करीब साढ़े तीन प्रतिशत अंकों का ही अंतर रहा। इससे साफ है कि ब्राजील की राजनीति दो खेमों में गहराई से बंटी हुई है, एक तरफ लूला की वामपंथी वर्कर्स पार्टी और दूसरी तरफ बोल्सोनारो परिवार की दक्षिणपंथी राजनीति। दो ऐतिहासिक रिकॉर्ड लूला की इस जीत के साथ दो खास रिकॉर्ड जुड़े हैं: सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति: 1989 में ब्राजील में लोकतंत्र की बहाली के बाद पद संभालने वाले वे सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति होंगे। पिछड़ने के बाद जीत: लोकतांत्रिक दौर में वे पहले ऐसे उम्मीदवार हैं, जिन्होंने पहले दौर में पीछे रहने के बाद दूसरे दौर में जीत हासिल की। ब्राजील की चुनाव प्रणाली ब्राजील में राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता करती है। अगर पहले दौर में किसी उम्मीदवार को 50% से ज्यादा वैध वोट नहीं मिलते, तो शीर्ष दो उम्मीदवारों के बीच दूसरे दौर का मुकाबला होता है। ब्राजील में मतदान अनिवार्य है और वोटिंग इलेक्ट्रॉनिक मशीनों से होती है। कौन हैं लूला गरीबी से राष्ट्रपति तक: लूला का जन्म ब्राजील के पूर्वोत्तर क्षेत्र के एक गरीब परिवार में हुआ। बचपन में उन्होंने जूते पॉलिश करने और फैक्ट्री में मजदूरी जैसे काम किए। मजदूर नेता: वे धातु कामगारों के यूनियन नेता बने और 1980 में वर्कर्स पार्टी (पीटी) की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। पहले दो कार्यकाल: 2003 से 2010 तक लगातार दो बार राष्ट्रपति रहे। इस दौरान 'बोल्सा फैमिलिया' जैसी योजनाओं से करोड़ों लोगों को गरीबी से निकालने का श्रेय उन्हें दिया जाता है। जेल और वापसी: भ्रष्टाचार के आरोपों में उन्हें जेल जाना पड़ा, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा रद्द कर दी। तीसरा कार्यकाल: 2022 के चुनाव में जायर बोल्सोनारो को हराकर उन्होंने 2023 में तीसरी बार पद संभाला। चौथा कार्यकाल: अब 2026 में फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर चौथी बार राष्ट्रपति बने हैं। कौन हैं फ्लावियो बोल्सोनारो फ्लावियो बोल्सोनारो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं और ब्राजील के सीनेटर हैं। उन्होंने लिबरल पार्टी (पीएल) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। उनके पिता जायर बोल्सोनारो 2019 से 2022 तक ब्राजील के राष्ट्रपति रहे थे। भारत के लिए क्या मायने भारत और ब्राजील के रिश्ते मजबूत रहे हैं। दोनों देश कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साथ हैं: ब्रिक्स: ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का यह समूह उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज है। भारत और ब्राजील इसके संस्थापक सदस्य हैं। आईबीएसए: भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका का त्रिपक्षीय मंच। जी-20: दोनों देश जी-20 के सदस्य हैं। 2023 में भारत और 2024 में ब्राजील ने जी-20 की अध्यक्षता की थी। ग्लोबल साउथ: लूला और भारत, दोनों विकासशील देशों के हितों की वकालत करते रहे हैं। व्यापार: ब्राजील भारत को कच्चा तेल, चीनी और सोयाबीन तेल जैसे उत्पाद निर्यात करता है, जबकि भारत से दवाइयां, रसायन और वाहन जाते हैं। एथेनॉल और जैव ईंधन: ब्राजील एथेनॉल उत्पादन में दुनिया के अग्रणी देशों में है और भारत के एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावना है। लूला के फिर से राष्ट्रपति बनने से भारत-ब्राजील संबंधों में निरंतरता बनी रहने की उम्मीद है। लूला के सामने चुनौतियां चौथे कार्यकाल में लूला के सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी: बंटा हुआ समाज: करीब आधे मतदाताओं ने उनके खिलाफ वोट दिया है। सबको साथ लेकर चलना बड़ी चुनौती होगी। अर्थव्यवस्था: महंगाई, रोजगार और आर्थिक विकास पर लोगों की नजर रहेगी। अमेजन वर्षावन: दुनिया के सबसे बड़े वर्षावन को कटाई से बचाना पर्यावरण के लिहाज से अहम मुद्दा है। कांग्रेस में बहुमत: नीतियां लागू करने के लिए संसद में समर्थन जुटाना जरूरी होगा। उम्र: सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति होने के नाते उनके स्वास्थ्य और ऊर्जा पर भी लोगों की नजर रहेगी। ब्राजील: एक नजर में राजधानी: ब्रासीलिया सबसे बड़ा शहर: साओ पाउलो भाषा: पुर्तगाली मुद्रा: ब्राजीलियन रियाल खास पहचान: दक्षिण अमेरिका का सबसे बड़ा देश, अमेजन वर्षावन, फुटबॉल और कार्निवल के लिए दुनियाभर में मशहूर। दुनिया की नजर ब्राजील पर ब्राजील दक्षिण अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और दुनिया के प्रमुख कृषि निर्यातकों में से एक है। कॉफी, सोयाबीन, चीनी और मांस के निर्यात में उसकी बड़ी हिस्सेदारी है। इसलिए वहां की राजनीतिक स्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ता है। अमेजन वर्षावन के कारण जलवायु परिवर्तन से जुड़ी वैश्विक बहस में भी ब्राजील की भूमिका अहम है। ऐसे में नई सरकार की नीतियों पर दुनियाभर की नजर रहेगी। बोल्सोनारो खेमे की प्रतिक्रिया पर नजर कड़े मुकाबले के बाद हारने वाले पक्ष की प्रतिक्रिया लोकतंत्र में अहम होती है। 2022 के चुनाव के बाद ब्राजील में राजनीतिक तनाव देखा गया था। इस बार भी नतीजों के बाद दोनों खेमों के रुख पर देश और दुनिया की नजर रहेगी। भारतीय समुदाय ब्राजील में भारतीय मूल के लोगों की संख्या कम है, लेकिन योग, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति वहां लोकप्रिय हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच शिक्षा, खेल और पर्यटन के क्षेत्र में भी आदान-प्रदान बढ़ाने की संभावनाएं हैं। यह भी पढ़ें पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क का भारत दौरा (एडिटर: kanpur.live पर इस खबर का लिंक जोड़ें) साहित्य का नोबेल पुरस्कार 2026: कनाडाई कवयित्री ऐन कार्सन को सम्मान (लिंक जोड़ें) भारत ने लद्दाख में कई रणनीतिक परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित कीं (लिंक जोड़ें) निष्कर्ष लूला की जीत ब्राजील की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ है। पहले दौर में पिछड़ने के बाद वापसी कर चौथी बार राष्ट्रपति बनना उनकी राजनीतिक पकड़ को दिखाता है। भारत के लिए यह जीत ब्रिक्स और ग्लोबल साउथ में सहयोग जारी रहने का संकेत है। अब नजर इस पर रहेगी कि वे बंटे हुए देश को कैसे साथ लेकर चलते हैं। देश-दुनिया की हर बड़ी खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।

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