02 sports asian games archery teen gold · MD एशियन गेम्स 2026: तीरंदाजी में भारत का क्लीन स्वीप, कंपाउंड टीम के तीनों गोल्ड जीते; चीन को फाइनल में दो बार हराया
Asian Games 2026: India sweep all three compound archery team golds, beat China in two finals
Kanpur Live News Desk ·

जापान के आइची-नागोया में चल रहे 20वें एशियन गेम्स में भारतीय तीरंदाजों ने ऐसा कमाल किया है, जिस पर पूरा देश गर्व कर रहा है। 30 सितंबर का दिन भारत के लिए इन खेलों का अब तक का सबसे सफल दिन साबित हुआ, जब कंपाउंड तीरंदाजी में भारत ने तीनों टीम स्पर्धाओं के स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिए। खास बात यह रही कि दो फाइनल मुकाबलों में भारत ने एशिया की सबसे बड़ी खेल शक्ति चीन को मात दी। इतना ही नहीं, इस जीत के साथ भारत ने 2028 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए एक कोटा भी हासिल कर लिया।
महिला टीम ने की वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी
दिन की पहली बड़ी कामयाबी महिला कंपाउंड टीम ने दिलाई। ज्योति सुरेखा वेन्नम, चिकिता तनिपर्थी और प्रिथिका प्रदीप की तिकड़ी ने फाइनल में चीन को 238-234 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। इस स्कोर के साथ भारतीय टीम ने 24 तीरों वाले महिला कंपाउंड टीम मुकाबले के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी कर ली।
भारतीय तिकड़ी ने फाइनल की शुरुआत से ही बढ़त बना ली थी और आखिर में लगातार तीन परफेक्ट 10 लगाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने बेहद कड़े मुकाबले में दक्षिण कोरिया को 234-233 से हराया था। दक्षिण कोरिया को तीरंदाजी की दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में गिना जाता है, इसलिए यह जीत अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी।
ज्योति का चौथा एशियाड गोल्ड
इस जीत के साथ अनुभवी तीरंदाज ज्योति सुरेखा वेन्नम ने अपने करियर का चौथा एशियन गेम्स स्वर्ण पदक जीता, जबकि उनकी दोनों साथी खिलाड़ियों ने अपने पहले ही एशियाड में सोने का तमगा हासिल किया। एक अनुभवी खिलाड़ी के साथ दो युवा तीरंदाजों का यह तालमेल भारतीय तीरंदाजी के उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करता है।
मिक्स्ड टीम ने दिलाया ओलंपिक कोटा
दूसरा स्वर्ण कंपाउंड मिक्स्ड टीम स्पर्धा में आया। चिकिता तनिपर्थी और साहिल जाधव की जोड़ी ने फाइनल जीतकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया और इसके साथ ही एलए 2028 ओलंपिक के लिए कोटा भी पक्का कर लिया। सेमीफाइनल में इस जोड़ी ने थाईलैंड को 156-155 के बेहद करीबी अंतर से हराया था।
यह ओलंपिक कोटा भारतीय तीरंदाजी के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है। लंबे समय तक कंपाउंड तीरंदाजी ओलंपिक का हिस्सा नहीं रही, जबकि भारत इस विधा में दुनिया की अग्रणी टीमों में रहा है। 2028 ओलंपिक में कंपाउंड मिक्स्ड टीम स्पर्धा को शामिल किए जाने से भारत के लिए पदक जीतने का एक नया और मजबूत अवसर बना है।
चिकिता के लिए यह दिन यादगार रहा, क्योंकि उन्होंने एक ही दिन में दो स्वर्ण पदक जीते।
पुरुष टीम की रोमांचक वापसी
दिन का सबसे रोमांचक मुकाबला पुरुष कंपाउंड टीम का फाइनल रहा। साहिल जाधव, गणेश मणि रत्नम तिरुमुरु और कुशल दलाल की टीम ने फाइनल में चीन को महज एक अंक से 238-237 से हराकर भारत को दिन का तीसरा स्वर्ण दिलाया।
यह जीत आसान नहीं थी। पहले एंड में दो बार 9 लगने के बाद भारत 58-60 से पीछे हो गया था। लेकिन इसके बाद भारतीय तिकड़ी ने बाकी बचे 18 तीरों में से हर तीर पर 10 का निशाना लगाया और कुल 180 में से पूरे 180 अंक बटोरे। आखिरी एंड से पहले चीन 179-178 से आगे था, लेकिन चीन का एक तीर 8 पर लगा, जो उसे भारी पड़ गया। भारत ने लगातार छह 10 लगाकर एक अंक से खिताब छीन लिया।
साहिल जाधव फाइनल में पूरी तरह अचूक रहे और उनके आठों तीर 10 पर लगे। सेमीफाइनल में पुरुष टीम ने दक्षिण कोरिया को 236-229 से हराया था।
साहिल और चिकिता के नाम दो-दो गोल्ड
इन नतीजों के साथ साहिल जाधव और चिकिता तनिपर्थी, दोनों ने बुधवार को दो-दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। एक ही दिन में दो गोल्ड जीतना किसी भी खिलाड़ी के करियर का यादगार पल होता है।
हांगझोऊ की सफलता को दोहराया
इन जीतों के साथ भारत ने हांगझोऊ 2023 एशियन गेम्स में जीते गए पांच कंपाउंड तीरंदाजी खिताबों में से तीन का सफलतापूर्वक बचाव कर लिया है। पुरुष और महिला व्यक्तिगत स्पर्धाओं के पदकों का फैसला अभी होना बाकी है, जहां भारत को और पदकों की उम्मीद है।
याद रहे कि हांगझोऊ में भारत ने एशियन गेम्स तीरंदाजी में अपना अब तक का सबसे सफल प्रदर्शन किया था, जहां रिकॉर्ड नौ पदक जीते गए थे, जिनमें पांच स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य शामिल थे।
कंपाउंड तीरंदाजी क्या है
तीरंदाजी में मुख्य रूप से दो तरह के धनुष इस्तेमाल होते हैं, रिकर्व और कंपाउंड। रिकर्व धनुष पारंपरिक बनावट वाला होता है और लंबे समय से ओलंपिक का हिस्सा रहा है। वहीं कंपाउंड धनुष में पुली और केबल की व्यवस्था होती है, जिससे धनुष खींचना अपेक्षाकृत आसान होता है और तीर ज्यादा रफ्तार से निकलता है। कंपाउंड धनुष में मैग्निफाइंग स्कोप भी लगा होता है, जिससे निशाना बेहद सटीक होता है। यही कारण है कि कंपाउंड स्पर्धाओं में स्कोर बहुत ऊंचे होते हैं और एक अंक का अंतर भी जीत-हार तय कर देता है।
भारत पिछले कुछ वर्षों से कंपाउंड तीरंदाजी में विश्व स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहा है। विश्व कप और विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े टूर्नामेंटों में भी भारतीय कंपाउंड तीरंदाज कई पदक जीत चुके हैं।
एशियन गेम्स 2026: एक नजर में
20वें एशियन गेम्स की मेजबानी इस बार जापान कर रहा है, जिसके मुकाबले आइची प्रांत और नागोया शहर में आयोजित हो रहे हैं। एशिया के दर्जनों देशों के हजारों खिलाड़ी इन खेलों में हिस्सा ले रहे हैं। एशियन गेम्स को ओलंपिक के बाद दुनिया के सबसे बड़े बहु-खेल आयोजनों में गिना जाता है। भारत इन खेलों में बड़ी टीम के साथ उतरा है और एथलेटिक्स, शूटिंग, कबड्डी, क्रिकेट, हॉकी, बैडमिंटन, कुश्ती, बॉक्सिंग, तीरंदाजी समेत कई खेलों में पदक की उम्मीदें लगाए हुए है। हांगझोऊ 2023 में भारत ने 100 से ज्यादा पदक जीतकर अपना अब तक का सबसे शानदार प्रदर्शन किया था, इसलिए इस बार भी खिलाड़ियों से काफी उम्मीदें हैं। देशभर में खेल प्रेमी टीवी और मोबाइल पर हर मुकाबले को उत्साह के साथ देख रहे हैं और खिलाड़ियों का हौसला बढ़ा रहे हैं।
पदक तालिका में भारत की स्थिति
तीरंदाजी और शूटिंग में शानदार प्रदर्शन के बाद पदक तालिका में भारत की स्थिति और मजबूत हुई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत अब तक 63 पदक जीत चुका है, जिनमें 10 स्वर्ण, 21 रजत और 30 कांस्य शामिल हैं। भारत को स्वर्ण पदक कबड्डी, शूटिंग, क्रिकेट और तीरंदाजी में मिले हैं, जबकि अकेले एथलेटिक्स से 24 पदक आए हैं। चीन 152 स्वर्ण पदकों के साथ तालिका में सबसे ऊपर बना हुआ है।
पदक तालिका के आंकड़े लगातार बदल रहे हैं, क्योंकि रोज नई स्पर्धाओं के नतीजे आ रहे हैं। इसके अलावा भारतीय क्रिकेट और हॉकी टीमों ने फाइनल में जगह बनाकर पदक तालिका में और स्वर्ण जुड़ने की उम्मीद जगा दी है।
खिलाड़ियों के पीछे की मेहनत
ऐसी जीतों के पीछे सालों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और त्याग छिपा होता है। तीरंदाजी में एकाग्रता, धैर्य और मानसिक मजबूती सबसे अहम होती है। फाइनल जैसे दबाव वाले मुकाबले में, जब एक अंक से हार-जीत तय होनी हो, तब शांत रहकर लगातार 10 का निशाना लगाना असाधारण कौशल का प्रमाण है। पुरुष टीम का पिछड़ने के बाद लगातार 18 तीरों पर 10 लगाना इसी मानसिक मजबूती की मिसाल है।
उत्तर प्रदेश और कानपुर के युवाओं के लिए प्रेरणा
भारतीय तीरंदाजों की यह कामयाबी देश के हर कोने के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है। उत्तर प्रदेश में भी तीरंदाजी समेत कई खेलों के प्रति युवाओं का रुझान बढ़ रहा है। कानपुर जैसे शहरों में खेल सुविधाओं और प्रशिक्षण केंद्रों के विस्तार से नई प्रतिभाएं सामने आ सकती हैं। जो युवा तीरंदाजी में करियर बनाना चाहते हैं, वे जिला खेल कार्यालय, स्टेडियम और मान्यता प्राप्त खेल अकादमियों से प्रशिक्षण की जानकारी ले सकते हैं। खेलो इंडिया जैसी योजनाएं भी उभरते खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मंच देती हैं।
अभिभावकों के लिए संदेश
अक्सर अभिभावक बच्चों को खेल में करियर बनाने से हिचकते हैं। लेकिन आज खेल केवल शौक नहीं, बल्कि एक सम्मानजनक करियर विकल्प बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सम्मान, पुरस्कार और कई बार सरकारी नौकरी के अवसर भी मिलते हैं। बच्चों की रुचि को पहचानकर उन्हें सही मार्गदर्शन देना उनके भविष्य को नई दिशा दे सकता है।
आगे की उम्मीदें
एशियन गेम्स के बाकी दिनों में भारत को तीरंदाजी की व्यक्तिगत स्पर्धाओं, क्रिकेट, हॉकी और अन्य खेलों में और पदकों की उम्मीद है। जिस तरह भारतीय खिलाड़ी लगातार दबाव के क्षणों में बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं, उससे देश की पदक संख्या में अच्छी बढ़ोतरी की उम्मीद है। 2028 ओलंपिक कोटा मिलने के बाद अब पूरे देश की निगाहें लॉस एंजिलिस पर भी टिक गई हैं।
निष्कर्ष
30 सितंबर 2026 का दिन भारतीय तीरंदाजी के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। तीन टीम स्पर्धाएं, तीन स्वर्ण पदक, विश्व रिकॉर्ड की बराबरी और ओलंपिक कोटा, इस एक दिन ने भारतीय खेल प्रेमियों को जश्न मनाने के कई कारण दिए हैं। ज्योति, चिकिता, प्रिथिका, साहिल, गणेश और कुशल ने साबित कर दिया है कि भारतीय तीरंदाज एशिया में किसी से कम नहीं हैं।
एशियन गेम्स 2026 की हर अपडेट और भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन की ताजा जानकारी के लिए कानपुर लाइव के साथ बने र
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जापान के आइची-नागोया में चल रहे 20वें एशियन गेम्स में भारतीय तीरंदाजों ने ऐसा कमाल किया है, जिस पर पूरा देश गर्व कर रहा है। 30 सितंबर का दिन भारत के लिए इन खेलों का अब तक का सबसे सफल दिन साबित हुआ, जब कंपाउंड तीरंदाजी में भारत ने तीनों टीम स्पर्धाओं के स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिए। खास बात यह रही कि दो फाइनल मुकाबलों में भारत ने एशिया की सबसे बड़ी खेल शक्ति चीन को मात दी। इतना ही नहीं, इस जीत के साथ भारत ने 2028 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए एक कोटा भी हासिल कर लिया।
महिला टीम ने की वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी
दिन की पहली बड़ी कामयाबी महिला कंपाउंड टीम ने दिलाई। ज्योति सुरेखा वेन्नम, चिकिता तनिपर्थी और प्रिथिका प्रदीप की तिकड़ी ने फाइनल में चीन को 238-234 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। इस स्कोर के साथ भारतीय टीम ने 24 तीरों वाले महिला कंपाउंड टीम मुकाबले के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी कर ली।
भारतीय तिकड़ी ने फाइनल की शुरुआत से ही बढ़त बना ली थी और आखिर में लगातार तीन परफेक्ट 10 लगाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने बेहद कड़े मुकाबले में दक्षिण कोरिया को 234-233 से हराया था। दक्षिण कोरिया को तीरंदाजी की दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में गिना जाता है, इसलिए यह जीत अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी।
ज्योति का चौथा एशियाड गोल्ड
इस जीत के साथ अनुभवी तीरंदाज ज्योति सुरेखा वेन्नम ने अपने करियर का चौथा एशियन गेम्स स्वर्ण पदक जीता, जबकि उनकी दोनों साथी खिलाड़ियों ने अपने पहले ही एशियाड में सोने का तमगा हासिल किया। एक अनुभवी खिलाड़ी के साथ दो युवा तीरंदाजों का यह तालमेल भारतीय तीरंदाजी के उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करता है।
मिक्स्ड टीम ने दिलाया ओलंपिक कोटा
दूसरा स्वर्ण कंपाउंड मिक्स्ड टीम स्पर्धा में आया। चिकिता तनिपर्थी और साहिल जाधव की जोड़ी ने फाइनल जीतकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया और इसके साथ ही एलए 2028 ओलंपिक के लिए कोटा भी पक्का कर लिया। सेमीफाइनल में इस जोड़ी ने थाईलैंड को 156-155 के बेहद करीबी अंतर से हराया था।
यह ओलंपिक कोटा भारतीय तीरंदाजी के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है। लंबे समय तक कंपाउंड तीरंदाजी ओलंपिक का हिस्सा नहीं रही, जबकि भारत इस विधा में दुनिया की अग्रणी टीमों में रहा है। 2028 ओलंपिक में कंपाउंड मिक्स्ड टीम स्पर्धा को शामिल किए जाने से भारत के लिए पदक जीतने का एक नया और मजबूत अवसर बना है।
चिकिता के लिए यह दिन यादगार रहा, क्योंकि उन्होंने एक ही दिन में दो स्वर्ण पदक जीते।
पुरुष टीम की रोमांचक वापसी
दिन का सबसे रोमांचक मुकाबला पुरुष कंपाउंड टीम का फाइनल रहा। साहिल जाधव, गणेश मणि रत्नम तिरुमुरु और कुशल दलाल की टीम ने फाइनल में चीन को महज एक अंक से 238-237 से हराकर भारत को दिन का तीसरा स्वर्ण दिलाया।
यह जीत आसान नहीं थी। पहले एंड में दो बार 9 लगने के बाद भारत 58-60 से पीछे हो गया था। लेकिन इसके बाद भारतीय तिकड़ी ने बाकी बचे 18 तीरों में से हर तीर पर 10 का निशाना लगाया और कुल 180 में से पूरे 180 अंक बटोरे। आखिरी एंड से पहले चीन 179-178 से आगे था, लेकिन चीन का एक तीर 8 पर लगा, जो उसे भारी पड़ गया। भारत ने लगातार छह 10 लगाकर एक अंक से खिताब छीन लिया।
साहिल जाधव फाइनल में पूरी तरह अचूक रहे और उनके आठों तीर 10 पर लगे। सेमीफाइनल में पुरुष टीम ने दक्षिण कोरिया को 236-229 से हराया था।
साहिल और चिकिता के नाम दो-दो गोल्ड
इन नतीजों के साथ साहिल जाधव और चिकिता तनिपर्थी, दोनों ने बुधवार को दो-दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। एक ही दिन में दो गोल्ड जीतना किसी भी खिलाड़ी के करियर का यादगार पल होता है।
हांगझोऊ की सफलता को दोहराया
इन जीतों के साथ भारत ने हांगझोऊ 2023 एशियन गेम्स में जीते गए पांच कंपाउंड तीरंदाजी खिताबों में से तीन का सफलतापूर्वक बचाव कर लिया है। पुरुष और महिला व्यक्तिगत स्पर्धाओं के पदकों का फैसला अभी होना बाकी है, जहां भारत को और पदकों की उम्मीद है।
याद रहे कि हांगझोऊ में भारत ने एशियन गेम्स तीरंदाजी में अपना अब तक का सबसे सफल प्रदर्शन किया था, जहां रिकॉर्ड नौ पदक जीते गए थे, जिनमें पांच स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य शामिल थे।
कंपाउंड तीरंदाजी क्या है
तीरंदाजी में मुख्य रूप से दो तरह के धनुष इस्तेमाल होते हैं, रिकर्व और कंपाउंड। रिकर्व धनुष पारंपरिक बनावट वाला होता है और लंबे समय से ओलंपिक का हिस्सा रहा है। वहीं कंपाउंड धनुष में पुली और केबल की व्यवस्था होती है, जिससे धनुष खींचना अपेक्षाकृत आसान होता है और तीर ज्यादा रफ्तार से निकलता है। कंपाउंड धनुष में मैग्निफाइंग स्कोप भी लगा होता है, जिससे निशाना बेहद सटीक होता है। यही कारण है कि कंपाउंड स्पर्धाओं में स्कोर बहुत ऊंचे होते हैं और एक अंक का अंतर भी जीत-हार तय कर देता है।
भारत पिछले कुछ वर्षों से कंपाउंड तीरंदाजी में विश्व स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहा है। विश्व कप और विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े टूर्नामेंटों में भी भारतीय कंपाउंड तीरंदाज कई पदक जीत चुके हैं।
एशियन गेम्स 2026: एक नजर में
20वें एशियन गेम्स की मेजबानी इस बार जापान कर रहा है, जिसके मुकाबले आइची प्रांत और नागोया शहर में आयोजित हो रहे हैं। एशिया के दर्जनों देशों के हजारों खिलाड़ी इन खेलों में हिस्सा ले रहे हैं। एशियन गेम्स को ओलंपिक के बाद दुनिया के सबसे बड़े बहु-खेल आयोजनों में गिना जाता है। भारत इन खेलों में बड़ी टीम के साथ उतरा है और एथलेटिक्स, शूटिंग, कबड्डी, क्रिकेट, हॉकी, बैडमिंटन, कुश्ती, बॉक्सिंग, तीरंदाजी समेत कई खेलों में पदक की उम्मीदें लगाए हुए है। हांगझोऊ 2023 में भारत ने 100 से ज्यादा पदक जीतकर अपना अब तक का सबसे शानदार प्रदर्शन किया था, इसलिए इस बार भी खिलाड़ियों से काफी उम्मीदें हैं। देशभर में खेल प्रेमी टीवी और मोबाइल पर हर मुकाबले को उत्साह के साथ देख रहे हैं और खिलाड़ियों का हौसला बढ़ा रहे हैं।
पदक तालिका में भारत की स्थिति
तीरंदाजी और शूटिंग में शानदार प्रदर्शन के बाद पदक तालिका में भारत की स्थिति और मजबूत हुई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत अब तक 63 पदक जीत चुका है, जिनमें 10 स्वर्ण, 21 रजत और 30 कांस्य शामिल हैं। भारत को स्वर्ण पदक कबड्डी, शूटिंग, क्रिकेट और तीरंदाजी में मिले हैं, जबकि अकेले एथलेटिक्स से 24 पदक आए हैं। चीन 152 स्वर्ण पदकों के साथ तालिका में सबसे ऊपर बना हुआ है।
पदक तालिका के आंकड़े लगातार बदल रहे हैं, क्योंकि रोज नई स्पर्धाओं के नतीजे आ रहे हैं। इसके अलावा भारतीय क्रिकेट और हॉकी टीमों ने फाइनल में जगह बनाकर पदक तालिका में और स्वर्ण जुड़ने की उम्मीद जगा दी है।
खिलाड़ियों के पीछे की मेहनत
ऐसी जीतों के पीछे सालों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और त्याग छिपा होता है। तीरंदाजी में एकाग्रता, धैर्य और मानसिक मजबूती सबसे अहम होती है। फाइनल जैसे दबाव वाले मुकाबले में, जब एक अंक से हार-जीत तय होनी हो, तब शांत रहकर लगातार 10 का निशाना लगाना असाधारण कौशल का प्रमाण है। पुरुष टीम का पिछड़ने के बाद लगातार 18 तीरों पर 10 लगाना इसी मानसिक मजबूती की मिसाल है।
उत्तर प्रदेश और कानपुर के युवाओं के लिए प्रेरणा
भारतीय तीरंदाजों की यह कामयाबी देश के हर कोने के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है। उत्तर प्रदेश में भी तीरंदाजी समेत कई खेलों के प्रति युवाओं का रुझान बढ़ रहा है। कानपुर जैसे शहरों में खेल सुविधाओं और प्रशिक्षण केंद्रों के विस्तार से नई प्रतिभाएं सामने आ सकती हैं। जो युवा तीरंदाजी में करियर बनाना चाहते हैं, वे जिला खेल कार्यालय, स्टेडियम और मान्यता प्राप्त खेल अकादमियों से प्रशिक्षण की जानकारी ले सकते हैं। खेलो इंडिया जैसी योजनाएं भी उभरते खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मंच देती हैं।
अभिभावकों के लिए संदेश
अक्सर अभिभावक बच्चों को खेल में करियर बनाने से हिचकते हैं। लेकिन आज खेल केवल शौक नहीं, बल्कि एक सम्मानजनक करियर विकल्प बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सम्मान, पुरस्कार और कई बार सरकारी नौकरी के अवसर भी मिलते हैं। बच्चों की रुचि को पहचानकर उन्हें सही मार्गदर्शन देना उनके भविष्य को नई दिशा दे सकता है।
आगे की उम्मीदें
एशियन गेम्स के बाकी दिनों में भारत को तीरंदाजी की व्यक्तिगत स्पर्धाओं, क्रिकेट, हॉकी और अन्य खेलों में और पदकों की उम्मीद है। जिस तरह भारतीय खिलाड़ी लगातार दबाव के क्षणों में बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं, उससे देश की पदक संख्या में अच्छी बढ़ोतरी की उम्मीद है। 2028 ओलंपिक कोटा मिलने के बाद अब पूरे देश की निगाहें लॉस एंजिलिस पर भी टिक गई हैं।
निष्कर्ष
30 सितंबर 2026 का दिन भारतीय तीरंदाजी के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। तीन टीम स्पर्धाएं, तीन स्वर्ण पदक, विश्व रिकॉर्ड की बराबरी और ओलंपिक कोटा, इस एक दिन ने भारतीय खेल प्रेमियों को जश्न मनाने के कई कारण दिए हैं। ज्योति, चिकिता, प्रिथिका, साहिल, गणेश और कुशल ने साबित कर दिया है कि भारतीय तीरंदाज एशिया में किसी से कम नहीं हैं।
एशियन गेम्स 2026 की हर अपडेट और भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन की ताजा जानकारी के लिए कानपुर लाइव के साथ बने र
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