Kanpur Weather: Cyclone Arnab Brings Storm and Rain Alert From Sept 24–27, Monsoon to Withdraw on October 3
weather - Thu Sep 24

मुख्य बातें:
बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात 'अर्णब' का असर 24 से 27 सितंबर के बीच कानपुर क्षेत्र में दिखेगा।
मौसम विभाग ने कानपुर समेत पूरे यूपी में भारी बारिश, आंधी और बिजली गिरने का यलो अलर्ट जारी किया है।
25 सितंबर को कानपुर में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने के साथ भारी बारिश की आशंका है।
कानपुर और लखनऊ से मानसून की वापसी की सामान्य तिथि 3 अक्टूबर तय की गई है, यानी इस बार मानसून करीब 13 दिन देर से लौटेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार चक्रवात से कानपुर को कोई सीधा खतरा नहीं है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है।
कानपुर में सितंबर का आखिरी हफ्ता मौसम के लिहाज से काफी हलचल भरा रहने वाला है। बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवाती तूफान 'अर्णब' का असर अब उत्तर प्रदेश तक पहुंचने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 24 से 27 सितंबर के बीच कानपुर परिक्षेत्र में आंधी के साथ तेज बारिश हो सकती है। इसी बीच मौसम विज्ञान केंद्र ने यह भी साफ कर दिया है कि कानपुर से मानसून की विदाई 3 अक्टूबर के आसपास होगी।
चक्रवात अर्णब क्या है और कहां बन रहा है?
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बन रहे इस चक्रवाती तूफान को 'अर्णब' नाम बांग्लादेश ने दिया है। यह सिस्टम 22 सितंबर के आसपास डिप्रेशन या गहरे डिप्रेशन में बदलने की स्थिति में था। अनुमान है कि अगले तीन से पांच दिनों में यह और ज्यादा ताकतवर हो सकता है।
इस चक्रवात का सबसे ज्यादा खतरा ओडिशा, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों पर माना जा रहा है। इन राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं की आशंका जताई गई है। हालांकि इसका सटीक रास्ता और ताकत अभी पूरी तरह तय नहीं है। तटीय इलाकों से आगे बढ़ते हुए इसका असर कमजोर रूप में उत्तर भारत तक पहुंचता है, जिसकी वजह से यूपी में भी बारिश का दौर बनता है।
कानपुर पर क्या होगा असर?
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के मौसम विभाग के नोडल अधिकारी अजय मिश्रा के अनुसार चक्रवात के प्रभाव से 24 से 27 सितंबर के बीच कानपुर का मौसम पूरी तरह बदल जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया है कि चक्रवात अर्णब से कानपुर या प्रदेश को कोई सीधा खतरा नहीं है, लेकिन इसके असर से बारिश और हवाओं का दौर जरूर देखने को मिलेगा।
मौसम विभाग ने इस अवधि के लिए कानपुर सहित पूरे उत्तर प्रदेश में भारी बारिश, आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने का यलो अलर्ट जारी किया है। खास तौर पर 25 सितंबर को कानपुर में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और भारी बारिश की आशंका जताई गई है।
इससे पहले ही शहर में उमस के बीच बारिश का सिलसिला शुरू हो चुका है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक बुधवार सुबह शहर में 7.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई और माहौल में नमी तेजी से बढ़ी है।
मानसून 13 दिन देर से लौटेगा
मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रदेश के 10 जिलों से मानसून लौटने की औसत सामान्य तिथि घोषित की है। इसमें कानपुर और लखनऊ से मानसून की वापसी 3 अक्टूबर को होने का अनुमान है। रिपोर्टों के अनुसार इस हिसाब से इस साल मानसून कानपुर परिक्षेत्र से करीब 13 दिन देर से विदा होगा।
दूसरी ओर राजस्थान, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी की घोषणा सोमवार को ही कर दी गई थी। यानी पश्चिम से मानसून का लौटना शुरू हो चुका है, लेकिन पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश में इसे अभी कुछ दिन और लगेंगे।
यलो अलर्ट का मतलब क्या होता है?
मौसम विभाग रंगों के जरिए अलर्ट जारी करता है, ताकि आम लोग आसानी से समझ सकें कि खतरा कितना है:
ग्रीन: कोई खास चेतावनी नहीं, मौसम सामान्य।
यलो: सतर्क रहें। मौसम बिगड़ सकता है, इसलिए ताजा अपडेट पर नजर रखें।
ऑरेंज: तैयार रहें। मौसम से नुकसान की संभावना ज्यादा है।
रेड: तुरंत कार्रवाई करें। गंभीर खतरा।
कानपुर के लिए अभी यलो अलर्ट है, यानी घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन लापरवाही भी नहीं करनी चाहिए।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
सितंबर के आखिर में होने वाली बारिश खेती पर दोहरा असर डालती है। धान की फसल के लिए यह नमी फायदेमंद हो सकती है, लेकिन तेज हवा के साथ भारी बारिश से पकने की ओर बढ़ रही फसल गिर सकती है। कानपुर देहात, बिल्हौर, घाटमपुर और आसपास के किसान इन बातों का ध्यान रखें:
खेतों में पानी निकासी की नालियां साफ रखें, ताकि पानी जमा न हो।
कटी हुई फसल या भूसे को खुले में न छोड़ें, तिरपाल से ढकें।
आंधी के दौरान कीटनाशक या खाद का छिड़काव न करें, क्योंकि बारिश में यह बह जाता है।
सब्जी उगाने वाले किसान बेल वाली फसलों के सहारे (मचान) मजबूत कर लें।
पशुओं को खुले मैदान या पेड़ के नीचे न बांधें।
आम लोगों के लिए सावधानियां
तेज हवा और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए शहरवासियों को कुछ सामान्य सावधानियां बरतनी चाहिए:
बिजली कड़कने पर पेड़, बिजली के खंभे और टिन शेड के नीचे खड़े न हों। किसी पक्की इमारत में शरण लें।
घर में बिजली के उपकरणों को प्लग से निकाल दें और गीले हाथों से स्विच न छुएं।
वाहन चलाते समय जलभराव वाली सड़कों पर धीरे चलें। अंडरपास में पानी भरा हो तो उसमें गाड़ी न उतारें।
छत पर रखी ढीली चीजें, गमले और टीन की चादरें सुरक्षित कर लें, ताकि तेज हवा में उड़कर किसी को चोट न पहुंचाएं।
बच्चों को बारिश के दौरान खुले नालों और गड्ढों के पास न जाने दें।
जलभराव की पुरानी समस्या
कानपुर में तेज बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव एक पुरानी परेशानी रही है। निचले इलाकों, पुराने बाजारों और कुछ प्रमुख चौराहों पर थोड़ी देर की बारिश में ही पानी भर जाता है। ऐसे में आने वाले चार दिनों में लोगों को ट्रैफिक और आवागमन में दिक्कत हो सकती है। दफ्तर और स्कूल जाने वाले लोग घर से थोड़ा पहले निकलें और रास्ते की जानकारी लेकर चलें।
मौसम बदलने से सेहत पर असर
बारिश और उमस के इस दौर में मच्छर तेजी से पनपते हैं। डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार के मामले इस मौसम में आम तौर पर बढ़ जाते हैं। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, कूलर और गमलों का पानी बदलते रहें और पूरी बांह के कपड़े पहनें। बुखार होने पर खुद दवा लेने की बजाय डॉक्टर से सलाह लें।
मानसून की विदाई के बाद कैसा रहेगा मौसम?
आम तौर पर मानसून लौटने के बाद आसमान साफ होने लगता है और दिन में धूप तीखी हो जाती है, जबकि रातें धीरे-धीरे ठंडी होने लगती हैं। अक्टूबर के पहले पखवाड़े में उमस घटेगी और मौसम सुहावना होने लगेगा। त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले यह बदलाव शहरवासियों के लिए राहत भरा रहेगा।
kanpur.live मौसम से जुड़ी हर ताजा जानकारी आप तक पहुंचाता रहेगा। मौसम विभाग के अगले अपडेट के लिए हमारे साथ बने रहें।
बिजली विभाग और प्रशासन की तैयारी
तेज हवा और बारिश के दौरान पेड़ों की डालियां टूटकर बिजली की लाइनों पर गिरने से कई इलाकों में आपूर्ति बाधित हो सकती है। ऐसे में बिजली कटौती की स्थिति में घबराने की बजाय संबंधित उपकेंद्र या हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। गिरे हुए बिजली के तारों से दूर रहें और उन्हें खुद हटाने की कोशिश बिल्कुल न करें।
kanpur.live की राय
मौसम का पूर्वानुमान पहले से मिल जाना अपने आप में राहत की बात है। थोड़ी सी सावधानी से बारिश और आंधी के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अपने परिवार, बुजुर्गों और पड़ोसियों को भी इस अलर्ट की जानकारी जरूर दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. कानपुर में कब तक बारिश होगी? मौसम विभाग के अनुसार 24 से 27 सितंबर के बीच आंधी के साथ तेज बारिश की संभावना है।
प्रश्न 2. सबसे ज्यादा असर किस दिन रहेगा? 25 सितंबर को 40-50 किमी प्रति घंटे की हवाओं के साथ भारी बारिश की आशंका जताई गई है।
प्रश्न 3. क्या चक्रवात अर्णब से कानपुर को खतरा है? विशेषज्ञों के अनुसार कोई सीधा खतरा नहीं है, केवल इसका असर बारिश और हवाओं के रूप में दिखेगा।
प्रश्न 4. कानपुर से मानसून कब लौटेगा? मानसून की वापसी की सामान्य तिथि 3 अक्टूबर तय की गई है।
प्रश्न 5. चक्रवात का नाम अर्णब किसने रखा? रिपोर्टों के अनुसार यह नाम बांग्लादेश ने दिया है।
प्रश्न 6. यलो अलर्ट में क्या करें? सतर्क रहें, मौसम अपडेट देखते रहें और बिजली कड़कने पर सुरक्षित पक्की जगह पर रहें।
प्रश्न 7. बिजली गिरने के दौरान सबसे सुरक्षित जगह कौन सी है? कोई पक्की इमारत। पेड़, खंभे और खुले मैदान से दूर रहें।
स्रोत: मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर आधारित स्थानीय रिपोर्ट, 22–23 सितंबर 2026।
कानपुर मौसम: चक्रवात 'अर्णब' का असर, 24 से 27 सितंबर तक आंधी-बारिश का यलो अलर्ट; 3 अक्टूबर को लौटेगा मानसून
मुख्य बातें:
बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात 'अर्णब' का असर 24 से 27 सितंबर के बीच कानपुर क्षेत्र में दिखेगा।
मौसम विभाग ने कानपुर समेत पूरे यूपी में भारी बारिश, आंधी और बिजली गिरने का यलो अलर्ट जारी किया है।
25 सितंबर को कानपुर में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने के साथ भारी बारिश की आशंका है।
कानपुर और लखनऊ से मानसून की वापसी की सामान्य तिथि 3 अक्टूबर तय की गई है, यानी इस बार मानसून करीब 13 दिन देर से लौटेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार चक्रवात से कानपुर को कोई सीधा खतरा नहीं है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है।
कानपुर में सितंबर का आखिरी हफ्ता मौसम के लिहाज से काफी हलचल भरा रहने वाला है। बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवाती तूफान 'अर्णब' का असर अब उत्तर प्रदेश तक पहुंचने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 24 से 27 सितंबर के बीच कानपुर परिक्षेत्र में आंधी के साथ तेज बारिश हो सकती है। इसी बीच मौसम विज्ञान केंद्र ने यह भी साफ कर दिया है कि कानपुर से मानसून की विदाई 3 अक्टूबर के आसपास होगी।
चक्रवात अर्णब क्या है और कहां बन रहा है?
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बन रहे इस चक्रवाती तूफान को 'अर्णब' नाम बांग्लादेश ने दिया है। यह सिस्टम 22 सितंबर के आसपास डिप्रेशन या गहरे डिप्रेशन में बदलने की स्थिति में था। अनुमान है कि अगले तीन से पांच दिनों में यह और ज्यादा ताकतवर हो सकता है।
इस चक्रवात का सबसे ज्यादा खतरा ओडिशा, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों पर माना जा रहा है। इन राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं की आशंका जताई गई है। हालांकि इसका सटीक रास्ता और ताकत अभी पूरी तरह तय नहीं है। तटीय इलाकों से आगे बढ़ते हुए इसका असर कमजोर रूप में उत्तर भारत तक पहुंचता है, जिसकी वजह से यूपी में भी बारिश का दौर बनता है।
कानपुर पर क्या होगा असर?
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के मौसम विभाग के नोडल अधिकारी अजय मिश्रा के अनुसार चक्रवात के प्रभाव से 24 से 27 सितंबर के बीच कानपुर का मौसम पूरी तरह बदल जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया है कि चक्रवात अर्णब से कानपुर या प्रदेश को कोई सीधा खतरा नहीं है, लेकिन इसके असर से बारिश और हवाओं का दौर जरूर देखने को मिलेगा।
मौसम विभाग ने इस अवधि के लिए कानपुर सहित पूरे उत्तर प्रदेश में भारी बारिश, आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने का यलो अलर्ट जारी किया है। खास तौर पर 25 सितंबर को कानपुर में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और भारी बारिश की आशंका जताई गई है।
इससे पहले ही शहर में उमस के बीच बारिश का सिलसिला शुरू हो चुका है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक बुधवार सुबह शहर में 7.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई और माहौल में नमी तेजी से बढ़ी है।
मानसून 13 दिन देर से लौटेगा
मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रदेश के 10 जिलों से मानसून लौटने की औसत सामान्य तिथि घोषित की है। इसमें कानपुर और लखनऊ से मानसून की वापसी 3 अक्टूबर को होने का अनुमान है। रिपोर्टों के अनुसार इस हिसाब से इस साल मानसून कानपुर परिक्षेत्र से करीब 13 दिन देर से विदा होगा।
दूसरी ओर राजस्थान, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी की घोषणा सोमवार को ही कर दी गई थी। यानी पश्चिम से मानसून का लौटना शुरू हो चुका है, लेकिन पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश में इसे अभी कुछ दिन और लगेंगे।
यलो अलर्ट का मतलब क्या होता है?
मौसम विभाग रंगों के जरिए अलर्ट जारी करता है, ताकि आम लोग आसानी से समझ सकें कि खतरा कितना है:
ग्रीन: कोई खास चेतावनी नहीं, मौसम सामान्य।
यलो: सतर्क रहें। मौसम बिगड़ सकता है, इसलिए ताजा अपडेट पर नजर रखें।
ऑरेंज: तैयार रहें। मौसम से नुकसान की संभावना ज्यादा है।
रेड: तुरंत कार्रवाई करें। गंभीर खतरा।
कानपुर के लिए अभी यलो अलर्ट है, यानी घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन लापरवाही भी नहीं करनी चाहिए।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
सितंबर के आखिर में होने वाली बारिश खेती पर दोहरा असर डालती है। धान की फसल के लिए यह नमी फायदेमंद हो सकती है, लेकिन तेज हवा के साथ भारी बारिश से पकने की ओर बढ़ रही फसल गिर सकती है। कानपुर देहात, बिल्हौर, घाटमपुर और आसपास के किसान इन बातों का ध्यान रखें:
खेतों में पानी निकासी की नालियां साफ रखें, ताकि पानी जमा न हो।
कटी हुई फसल या भूसे को खुले में न छोड़ें, तिरपाल से ढकें।
आंधी के दौरान कीटनाशक या खाद का छिड़काव न करें, क्योंकि बारिश में यह बह जाता है।
सब्जी उगाने वाले किसान बेल वाली फसलों के सहारे (मचान) मजबूत कर लें।
पशुओं को खुले मैदान या पेड़ के नीचे न बांधें।
आम लोगों के लिए सावधानियां
तेज हवा और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए शहरवासियों को कुछ सामान्य सावधानियां बरतनी चाहिए:
बिजली कड़कने पर पेड़, बिजली के खंभे और टिन शेड के नीचे खड़े न हों। किसी पक्की इमारत में शरण लें।
घर में बिजली के उपकरणों को प्लग से निकाल दें और गीले हाथों से स्विच न छुएं।
वाहन चलाते समय जलभराव वाली सड़कों पर धीरे चलें। अंडरपास में पानी भरा हो तो उसमें गाड़ी न उतारें।
छत पर रखी ढीली चीजें, गमले और टीन की चादरें सुरक्षित कर लें, ताकि तेज हवा में उड़कर किसी को चोट न पहुंचाएं।
बच्चों को बारिश के दौरान खुले नालों और गड्ढों के पास न जाने दें।
जलभराव की पुरानी समस्या
कानपुर में तेज बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव एक पुरानी परेशानी रही है। निचले इलाकों, पुराने बाजारों और कुछ प्रमुख चौराहों पर थोड़ी देर की बारिश में ही पानी भर जाता है। ऐसे में आने वाले चार दिनों में लोगों को ट्रैफिक और आवागमन में दिक्कत हो सकती है। दफ्तर और स्कूल जाने वाले लोग घर से थोड़ा पहले निकलें और रास्ते की जानकारी लेकर चलें।
मौसम बदलने से सेहत पर असर
बारिश और उमस के इस दौर में मच्छर तेजी से पनपते हैं। डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार के मामले इस मौसम में आम तौर पर बढ़ जाते हैं। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, कूलर और गमलों का पानी बदलते रहें और पूरी बांह के कपड़े पहनें। बुखार होने पर खुद दवा लेने की बजाय डॉक्टर से सलाह लें।
मानसून की विदाई के बाद कैसा रहेगा मौसम?
आम तौर पर मानसून लौटने के बाद आसमान साफ होने लगता है और दिन में धूप तीखी हो जाती है, जबकि रातें धीरे-धीरे ठंडी होने लगती हैं। अक्टूबर के पहले पखवाड़े में उमस घटेगी और मौसम सुहावना होने लगेगा। त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले यह बदलाव शहरवासियों के लिए राहत भरा रहेगा।
kanpur.live मौसम से जुड़ी हर ताजा जानकारी आप तक पहुंचाता रहेगा। मौसम विभाग के अगले अपडेट के लिए हमारे साथ बने रहें।
बिजली विभाग और प्रशासन की तैयारी
तेज हवा और बारिश के दौरान पेड़ों की डालियां टूटकर बिजली की लाइनों पर गिरने से कई इलाकों में आपूर्ति बाधित हो सकती है। ऐसे में बिजली कटौती की स्थिति में घबराने की बजाय संबंधित उपकेंद्र या हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। गिरे हुए बिजली के तारों से दूर रहें और उन्हें खुद हटाने की कोशिश बिल्कुल न करें।
kanpur.live की राय
मौसम का पूर्वानुमान पहले से मिल जाना अपने आप में राहत की बात है। थोड़ी सी सावधानी से बारिश और आंधी के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अपने परिवार, बुजुर्गों और पड़ोसियों को भी इस अलर्ट की जानकारी जरूर दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. कानपुर में कब तक बारिश होगी? मौसम विभाग के अनुसार 24 से 27 सितंबर के बीच आंधी के साथ तेज बारिश की संभावना है।
प्रश्न 2. सबसे ज्यादा असर किस दिन रहेगा? 25 सितंबर को 40-50 किमी प्रति घंटे की हवाओं के साथ भारी बारिश की आशंका जताई गई है।
प्रश्न 3. क्या चक्रवात अर्णब से कानपुर को खतरा है? विशेषज्ञों के अनुसार कोई सीधा खतरा नहीं है, केवल इसका असर बारिश और हवाओं के रूप में दिखेगा।
प्रश्न 4. कानपुर से मानसून कब लौटेगा? मानसून की वापसी की सामान्य तिथि 3 अक्टूबर तय की गई है।
प्रश्न 5. चक्रवात का नाम अर्णब किसने रखा? रिपोर्टों के अनुसार यह नाम बांग्लादेश ने दिया है।
प्रश्न 6. यलो अलर्ट में क्या करें? सतर्क रहें, मौसम अपडेट देखते रहें और बिजली कड़कने पर सुरक्षित पक्की जगह पर रहें।
प्रश्न 7. बिजली गिरने के दौरान सबसे सुरक्षित जगह कौन सी है? कोई पक्की इमारत। पेड़, खंभे और खुले मैदान से दूर रहें।
स्रोत: मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर आधारित स्थानीय रिपोर्ट, 22–23 सितंबर 2026।