कानपुर: जाजमऊ के तिवारीपुर बगिया में मकान का छज्जा गिरा, तीन माह की बच्ची समेत सात लोग घायल
Kanpur Jajmau: balcony collapses, seven injured including infant
Kanpur Live News Desk ·

कानपुर के जाजमऊ स्थित तिवारीपुर बगिया में मंगलवार शाम एक मकान का छज्जा अचानक गिर गया, जिससे तीन माह की बच्ची समेत सात लोग घायल हो गए। हादसा उस समय हुआ जब मोहल्ले में एक शव आने पर लोगों की भीड़ जमा थी और कई लोग छज्जे पर खड़े थे।
सभी घायलों को पड़ोसियों की मदद से कांशीराम अस्पताल पहुंचाया गया। एक गंभीर घायल महिला को डॉक्टरों ने हैलट अस्पताल रेफर कर दिया।
कैसे हुआ हादसा
रिपोर्ट के अनुसार मोहल्ले में रहने वाले वायुसेना से सेवानिवृत्त कर्मचारी एके सिंह का कैंसर से निधन हो गया था। मंगलवार रात सर्वोदय नगर के एक अस्पताल से एंबुलेंस उनका शव लेकर मोहल्ले में पहुंची। शव को देखने के लिए आसपास के लोग बड़ी संख्या में जमा हो गए। कई लोग पास के एक मकान के छज्जे पर खड़े होकर देख रहे थे।
इसी दौरान छज्जा अचानक भरभराकर गिर गया। छज्जे पर खड़े लोग नीचे आ गिरे और नीचे खड़ी एक महिला मलबे की चपेट में आ गई। हादसे के बाद मोहल्ले में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई।
घायलों की स्थिति
हादसे में सात लोग घायल हुए:
सुनीता यादव (50 वर्ष)
खुशबू यादव (26 वर्ष)
माधुरी यादव (52 वर्ष)
19 वर्षीय युवती
17 वर्षीय किशोर
11 वर्षीय बच्ची
तीन माह की बच्ची
रिपोर्ट के अनुसार सुनीता, खुशबू और दो युवा छज्जे पर खड़े थे, जबकि माधुरी नीचे खड़ी थीं। माधुरी को छोड़कर बाकी सभी घायल एक ही परिवार के बताए गए हैं। डॉक्टरों ने माधुरी की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें हैलट अस्पताल रेफर कर दिया।
पुलिस ने क्या कहा
थाना प्रभारी संजय पांडेय ने बताया कि सभी घायलों को अस्पताल भिजवाया गया है। छज्जा गिरने की वजह, मकान की हालत और मकान मालिक के बारे में अभी जानकारी सामने नहीं आई है।
छज्जे क्यों गिरते हैं
छज्जा मकान का वह हिस्सा होता है जो दीवार से बाहर निकला रहता है और उसके नीचे कोई सहारा नहीं होता। इसलिए यह मकान का सबसे कमजोर हिस्सा माना जाता है। छज्जे गिरने की आम वजहें:
पुराना निर्माण: पुराने मकानों में सरिया जंग खाकर कमजोर हो जाता है।
सीलन और पानी: बारिश का पानी छज्जे में रिसता रहता है, जिससे कंक्रीट और सरिया दोनों कमजोर होते हैं।
क्षमता से ज्यादा वजन: छज्जे एक सीमित वजन के लिए बनाए जाते हैं। उस पर ज्यादा लोगों के खड़े होने या भारी सामान रखने से वह टूट सकता है।
खराब निर्माण: घटिया सामग्री या बिना इंजीनियर की सलाह के बने छज्जे जल्दी कमजोर होते हैं।
दरारें: छज्जे और दीवार के जोड़ पर दरार खतरे का संकेत है।
भीड़ में छज्जे पर न चढ़ें
इस हादसे से सबसे बड़ी सीख यह है कि किसी भी आयोजन, जुलूस, शोभायात्रा या भीड़ के समय छज्जे और छतों की मुंडेर पर बड़ी संख्या में लोगों को खड़ा नहीं होना चाहिए। त्योहारों के मौसम में, जब शोभायात्राएं और जुलूस निकलते हैं, यह खतरा और बढ़ जाता है। मकान मालिकों को भी अपने छज्जे पर भीड़ जमा नहीं होने देनी चाहिए।
अपने मकान की जांच कैसे करें
छज्जे के नीचे की सतह पर दरारें, उखड़ता प्लास्टर या बाहर दिखता सरिया हो तो सतर्क हो जाएं।
छज्जे पर पानी जमा न होने दें, उसकी ढलान और निकासी ठीक रखें।
पुराने मकान की हर कुछ साल में किसी सिविल इंजीनियर से जांच कराएं।
कमजोर छज्जे की मरम्मत तुरंत कराएं या उस पर जाना बंद कर दें।
मरम्मत के दौरान नीचे से अस्थायी सहारा (टेक) लगाएं।
जर्जर भवनों पर कार्रवाई
कानपुर के पुराने इलाकों, जैसे जाजमऊ, चमनगंज, बेकनगंज, कलक्टरगंज और आसपास के मोहल्लों में बड़ी संख्या में पुराने मकान हैं। नगर निगम समय-समय पर जर्जर भवनों का सर्वे कर उन्हें नोटिस देता है। ऐसे हादसों के बाद जरूरी है कि नगर निगम और केडीए जर्जर भवनों की पहचान करें, मकान मालिकों को मरम्मत के लिए नोटिस दें और खतरनाक हिस्सों को खाली कराएं।
हादसा हो तो क्या करें
मलबे में दबे लोगों को सावधानी से निकालें, ताकि बचा हुआ हिस्सा और न गिरे।
तुरंत 112 और 108 एंबुलेंस को सूचना दें।
गंभीर घायलों को बिना देरी अस्पताल पहुंचाएं।
आसपास की भीड़ को हटाएं, ताकि राहत कार्य में बाधा न हो।
बिजली के तार टूटे हों तो बिजली विभाग को सूचना दें।
पड़ोसियों ने दिखाई मदद
हादसे के बाद मोहल्ले के लोगों ने तुरंत घायलों को उठाकर अस्पताल पहुंचाया। ऐसे मौकों पर तुरंत मदद से जान बचाई जा सकती है। गम के माहौल में हुए इस हादसे ने पूरे मोहल्ले को झकझोर दिया।
बारिश के मौसम में बढ़ता खतरा
मौसम विभाग ने 29 और 30 अक्टूबर को कानपुर में बारिश की संभावना जताई है। बारिश के दौरान पुराने मकानों की दीवारों और छज्जों में पानी रिसने से वे और कमजोर हो जाते हैं। इसलिए जिन लोगों के मकान पुराने हैं, वे बारिश से पहले और बाद में छज्जों और दीवारों की हालत जरूर जांच लें। जिस छज्जे में दरार दिखे, उस पर बारिश के दौरान और बाद में न जाएं।
बच्चों को छज्जे से दूर रखें
घायलों में तीन माह और 11 साल की बच्चियां भी शामिल हैं। छोटे बच्चों को पुराने छज्जों, बिना रेलिंग वाली छतों और कमजोर मुंडेरों से दूर रखना चाहिए। भीड़ या किसी आयोजन के दौरान बच्चों को गोद में लेकर छज्जे पर खड़े होना और भी खतरनाक है। माता-पिता को ऐसे मौकों पर बच्चों को सुरक्षित जगह पर रखना चाहिए।
किरायेदार भी रहें सतर्क
किराए के पुराने मकानों में रहने वाले लोग अक्सर मकान की हालत पर ध्यान नहीं देते। किरायेदारों को चाहिए कि अगर मकान में कहीं दरार या कमजोरी दिखे, तो तुरंत मकान मालिक को बताएं और मरम्मत की मांग करें।
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निष्कर्ष
जाजमऊ में छज्जा गिरने का हादसा याद दिलाता है कि पुराने मकानों के छज्जे और भीड़ का मेल कितना खतरनाक हो सकता है। गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई। अब जरूरी है कि लोग अपने मकानों की जांच कराएं और प्रशासन जर्जर भवनों पर सख्ती दिखाए, ताकि ऐसे हादसे दोबारा न हों।
कानपुर की हर खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
कानपुर: जाजमऊ के तिवारीपुर बगिया में मकान का छज्जा गिरा, तीन माह की बच्ची समेत सात लोग घायल
कानपुर के जाजमऊ स्थित तिवारीपुर बगिया में मंगलवार शाम एक मकान का छज्जा अचानक गिर गया, जिससे तीन माह की बच्ची समेत सात लोग घायल हो गए। हादसा उस समय हुआ जब मोहल्ले में एक शव आने पर लोगों की भीड़ जमा थी और कई लोग छज्जे पर खड़े थे।
सभी घायलों को पड़ोसियों की मदद से कांशीराम अस्पताल पहुंचाया गया। एक गंभीर घायल महिला को डॉक्टरों ने हैलट अस्पताल रेफर कर दिया।
कैसे हुआ हादसा
रिपोर्ट के अनुसार मोहल्ले में रहने वाले वायुसेना से सेवानिवृत्त कर्मचारी एके सिंह का कैंसर से निधन हो गया था। मंगलवार रात सर्वोदय नगर के एक अस्पताल से एंबुलेंस उनका शव लेकर मोहल्ले में पहुंची। शव को देखने के लिए आसपास के लोग बड़ी संख्या में जमा हो गए। कई लोग पास के एक मकान के छज्जे पर खड़े होकर देख रहे थे।
इसी दौरान छज्जा अचानक भरभराकर गिर गया। छज्जे पर खड़े लोग नीचे आ गिरे और नीचे खड़ी एक महिला मलबे की चपेट में आ गई। हादसे के बाद मोहल्ले में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई।
घायलों की स्थिति
हादसे में सात लोग घायल हुए:
सुनीता यादव (50 वर्ष)
खुशबू यादव (26 वर्ष)
माधुरी यादव (52 वर्ष)
19 वर्षीय युवती
17 वर्षीय किशोर
11 वर्षीय बच्ची
तीन माह की बच्ची
रिपोर्ट के अनुसार सुनीता, खुशबू और दो युवा छज्जे पर खड़े थे, जबकि माधुरी नीचे खड़ी थीं। माधुरी को छोड़कर बाकी सभी घायल एक ही परिवार के बताए गए हैं। डॉक्टरों ने माधुरी की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें हैलट अस्पताल रेफर कर दिया।
पुलिस ने क्या कहा
थाना प्रभारी संजय पांडेय ने बताया कि सभी घायलों को अस्पताल भिजवाया गया है। छज्जा गिरने की वजह, मकान की हालत और मकान मालिक के बारे में अभी जानकारी सामने नहीं आई है।
छज्जे क्यों गिरते हैं
छज्जा मकान का वह हिस्सा होता है जो दीवार से बाहर निकला रहता है और उसके नीचे कोई सहारा नहीं होता। इसलिए यह मकान का सबसे कमजोर हिस्सा माना जाता है। छज्जे गिरने की आम वजहें:
पुराना निर्माण: पुराने मकानों में सरिया जंग खाकर कमजोर हो जाता है।
सीलन और पानी: बारिश का पानी छज्जे में रिसता रहता है, जिससे कंक्रीट और सरिया दोनों कमजोर होते हैं।
क्षमता से ज्यादा वजन: छज्जे एक सीमित वजन के लिए बनाए जाते हैं। उस पर ज्यादा लोगों के खड़े होने या भारी सामान रखने से वह टूट सकता है।
खराब निर्माण: घटिया सामग्री या बिना इंजीनियर की सलाह के बने छज्जे जल्दी कमजोर होते हैं।
दरारें: छज्जे और दीवार के जोड़ पर दरार खतरे का संकेत है।
भीड़ में छज्जे पर न चढ़ें
इस हादसे से सबसे बड़ी सीख यह है कि किसी भी आयोजन, जुलूस, शोभायात्रा या भीड़ के समय छज्जे और छतों की मुंडेर पर बड़ी संख्या में लोगों को खड़ा नहीं होना चाहिए। त्योहारों के मौसम में, जब शोभायात्राएं और जुलूस निकलते हैं, यह खतरा और बढ़ जाता है। मकान मालिकों को भी अपने छज्जे पर भीड़ जमा नहीं होने देनी चाहिए।
अपने मकान की जांच कैसे करें
छज्जे के नीचे की सतह पर दरारें, उखड़ता प्लास्टर या बाहर दिखता सरिया हो तो सतर्क हो जाएं।
छज्जे पर पानी जमा न होने दें, उसकी ढलान और निकासी ठीक रखें।
पुराने मकान की हर कुछ साल में किसी सिविल इंजीनियर से जांच कराएं।
कमजोर छज्जे की मरम्मत तुरंत कराएं या उस पर जाना बंद कर दें।
मरम्मत के दौरान नीचे से अस्थायी सहारा (टेक) लगाएं।
जर्जर भवनों पर कार्रवाई
कानपुर के पुराने इलाकों, जैसे जाजमऊ, चमनगंज, बेकनगंज, कलक्टरगंज और आसपास के मोहल्लों में बड़ी संख्या में पुराने मकान हैं। नगर निगम समय-समय पर जर्जर भवनों का सर्वे कर उन्हें नोटिस देता है। ऐसे हादसों के बाद जरूरी है कि नगर निगम और केडीए जर्जर भवनों की पहचान करें, मकान मालिकों को मरम्मत के लिए नोटिस दें और खतरनाक हिस्सों को खाली कराएं।
हादसा हो तो क्या करें
मलबे में दबे लोगों को सावधानी से निकालें, ताकि बचा हुआ हिस्सा और न गिरे।
तुरंत 112 और 108 एंबुलेंस को सूचना दें।
गंभीर घायलों को बिना देरी अस्पताल पहुंचाएं।
आसपास की भीड़ को हटाएं, ताकि राहत कार्य में बाधा न हो।
बिजली के तार टूटे हों तो बिजली विभाग को सूचना दें।
पड़ोसियों ने दिखाई मदद
हादसे के बाद मोहल्ले के लोगों ने तुरंत घायलों को उठाकर अस्पताल पहुंचाया। ऐसे मौकों पर तुरंत मदद से जान बचाई जा सकती है। गम के माहौल में हुए इस हादसे ने पूरे मोहल्ले को झकझोर दिया।
बारिश के मौसम में बढ़ता खतरा
मौसम विभाग ने 29 और 30 अक्टूबर को कानपुर में बारिश की संभावना जताई है। बारिश के दौरान पुराने मकानों की दीवारों और छज्जों में पानी रिसने से वे और कमजोर हो जाते हैं। इसलिए जिन लोगों के मकान पुराने हैं, वे बारिश से पहले और बाद में छज्जों और दीवारों की हालत जरूर जांच लें। जिस छज्जे में दरार दिखे, उस पर बारिश के दौरान और बाद में न जाएं।
बच्चों को छज्जे से दूर रखें
घायलों में तीन माह और 11 साल की बच्चियां भी शामिल हैं। छोटे बच्चों को पुराने छज्जों, बिना रेलिंग वाली छतों और कमजोर मुंडेरों से दूर रखना चाहिए। भीड़ या किसी आयोजन के दौरान बच्चों को गोद में लेकर छज्जे पर खड़े होना और भी खतरनाक है। माता-पिता को ऐसे मौकों पर बच्चों को सुरक्षित जगह पर रखना चाहिए।
किरायेदार भी रहें सतर्क
किराए के पुराने मकानों में रहने वाले लोग अक्सर मकान की हालत पर ध्यान नहीं देते। किरायेदारों को चाहिए कि अगर मकान में कहीं दरार या कमजोरी दिखे, तो तुरंत मकान मालिक को बताएं और मरम्मत की मांग करें।
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निष्कर्ष
जाजमऊ में छज्जा गिरने का हादसा याद दिलाता है कि पुराने मकानों के छज्जे और भीड़ का मेल कितना खतरनाक हो सकता है। गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई। अब जरूरी है कि लोग अपने मकानों की जांच कराएं और प्रशासन जर्जर भवनों पर सख्ती दिखाए, ताकि ऐसे हादसे दोबारा न हों।
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