कानपुर: फोर स्टार होटल में ठहरा मेहमान 6,447 रुपये का बिल छोड़कर फरार, मैनेजर से भी ठगे रुपये, बैग में निकला कचरा
Kanpur hotel guest skips bill, cheats manager; FIR filed
Kanpur Live News Desk ·

कानपुर के स्वरूप नगर स्थित फोर स्टार होटल रीजेंटा सेंट्रल द क्रिस्टल में ठहरा एक मेहमान खाने और ठहरने का 6,447 रुपये का बिल चुकाए बिना फरार हो गया। इतना ही नहीं, फरार होने के बाद उसने फोन कर होटल के एक मैनेजर से 1,000 रुपये भी ठग लिए।
होटल के वरिष्ठ प्रबंधक की शिकायत पर डीसीपी सेंट्रल के आदेश पर स्वरूप नगर थाने में एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
कैसे दिया वारदात को अंजाम
रिपोर्ट के अनुसार:
18 अक्टूबर: आरोपी ने होटल का कमरा नंबर 205 बुक कराया। जीएसटी समेत कमरे का किराया 4,200 रुपये तय हुआ।
19 अक्टूबर, सुबह करीब 10 बजे: वह बिना बताए होटल से निकल गया। कमरे में अपना बैग छोड़ गया, ताकि किसी को शक न हो।
बिल: खाने और ठहरने का कुल बिल 6,447 रुपये था, जो उसने नहीं चुकाया।
मैनेजर को भी लगाया चूना
होटल से निकलने के बाद आरोपी ने होटल के दूसरे मैनेजर को फोन किया और पैसों की जरूरत बताई। मैनेजर ने उस पर भरोसा कर उसके बताए एक क्यूआर कोड पर 1,000 रुपये भेज दिए। यह क्यूआर कोड किसी दूसरे व्यक्ति का था। दोपहर करीब 2 बजे उसने फिर फोन कर 700 रुपये और मांगे। इस बार मैनेजर को शक हुआ।
बैग में निकला कचरा
शक होने पर मैनेजर ने कमरे की जांच कराई। आरोपी जो बैग छोड़ गया था, उसमें कचरा और खाली पॉलीथिन भरी थी। यानी उसने पहले से योजना बनाकर बैग छोड़ा था, ताकि होटल स्टाफ यह समझे कि वह बाहर गया है और वापस लौटेगा।
पैसे मांगने पर दी धमकी
मैनेजर ने जब रुपये वापस मांगे, तो आरोपी ने फोन पर गाली-गलौज की और धमकी दी। इसके बाद होटल के वरिष्ठ प्रबंधक ने डीसीपी सेंट्रल से शिकायत की। डीसीपी के आदेश पर स्वरूप नगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई। इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
होटल ऐसे बचें ऐसी ठगी से
एडवांस भुगतान: चेक-इन के समय कमरे का किराया और कुछ सिक्योरिटी डिपॉजिट एडवांस में लें।
पहचान पत्र की जांच: मेहमान का असली पहचान पत्र लें और उसकी फोटो कॉपी रखें। संभव हो तो ऑनलाइन सत्यापन करें।
मोबाइल नंबर सत्यापन: चेक-इन के समय मोबाइल नंबर पर ओटीपी या कॉल से सत्यापन करें।
क्रेडिट कार्ड प्री-ऑथराइजेशन: बड़े होटल कार्ड पर पहले से रकम ब्लॉक करने की सुविधा का इस्तेमाल करें।
बिल का समय-समय पर भुगतान: रूम सर्विस और खाने का बिल रोज जुड़ने के साथ उसका भुगतान लेते रहें।
चेक-आउट निगरानी: रिसेप्शन पर मेहमानों के बाहर जाने पर नजर रखें।
सीसीटीवी: लॉबी, गेट और कॉरिडोर में कैमरे चालू रखें।
पथिक पोर्टल: उत्तर प्रदेश में होटलों को मेहमानों की जानकारी पुलिस के पोर्टल पर दर्ज करनी होती है।
फोन पर पैसे मांगने वालों से सावधान
इस मामले में आरोपी ने होटल से निकलने के बाद भी मैनेजर से फोन पर पैसे ठग लिए। आम लोगों के साथ भी ऐसी ठगी होती है, जब कोई परिचित बनकर या मजबूरी बताकर फोन पर पैसे मांगता है।
ध्यान रखें:
किसी के कहने पर तुरंत किसी अनजान क्यूआर कोड या नंबर पर पैसे न भेजें।
जिसके नाम पर पैसे मांगे जा रहे हैं, अगर वह किसी और का क्यूआर कोड भेजे, तो यह खतरे का संकेत है।
पैसे भेजने से पहले सामने वाले की पहचान दूसरे तरीके से पक्की करें।
यूपीआई ऐप पर भुगतान से पहले खाताधारक का नाम जरूर पढ़ें।
किसी भी तरह की ऑनलाइन ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें। जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ज्यादा होगी।
कानून क्या कहता है
बिना भुगतान के होटल में ठहरकर भाग जाना और झूठ बोलकर पैसे लेना धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। भारतीय न्याय संहिता में धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी के लिए सजा का प्रावधान है। पुलिस जांच में आरोपी के पहचान पत्र, मोबाइल नंबर और जिस खाते में पैसे गए, उसकी जानकारी से उस तक पहुंच सकती है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
देश के कई शहरों में होटलों में ठहरकर बिल चुकाए बिना फरार होने के मामले सामने आते रहे हैं। कई बार ऐसे लोग अलग-अलग शहरों में एक ही तरीके से वारदात करते हैं। इसलिए होटल कारोबारियों को आपस में ऐसे मामलों की जानकारी साझा करनी चाहिए और पुलिस को तुरंत सूचना देनी चाहिए।
होटल स्टाफ का प्रशिक्षण जरूरी
होटलों में रिसेप्शन और प्रबंधन स्टाफ को ठगी के ऐसे तरीकों के बारे में प्रशिक्षण देना चाहिए। स्टाफ को साफ निर्देश हों कि किसी भी मेहमान के कहने पर निजी तौर पर पैसे न भेजें। पैसों से जुड़ा हर लेन-देन होटल के आधिकारिक खाते और रिकॉर्ड के जरिए ही हो। संदिग्ध व्यवहार वाले मेहमानों की जानकारी तुरंत वरिष्ठ प्रबंधन और जरूरत पड़ने पर पुलिस को दें।
पर्यटन नगरी की साख
कानपुर कारोबारी शहर है और यहां रोजाना बड़ी संख्या में व्यापारी, अधिकारी और पर्यटक आते हैं। होटल उद्योग शहर की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। ऐसी ठगी की घटनाएं होटल कारोबारियों के लिए नुकसानदेह हैं। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से ऐसे लोगों पर लगाम लगेगी और कारोबारियों का भरोसा बढ़ेगा।
ग्राहक भी रखें ध्यान
होटल बुकिंग करते समय आम ग्राहक भी केवल होटल की आधिकारिक वेबसाइट या भरोसेमंद ऐप का इस्तेमाल करें और भुगतान की रसीद संभालकर रखें।
यह भी पढ़ें
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निष्कर्ष
होटल में ठहरकर बिल छोड़ भागने और फिर फोन पर मैनेजर से ठगी करने का यह मामला बताता है कि ठग कितनी चालाकी से योजना बनाते हैं। होटल कारोबारियों को एडवांस भुगतान और पहचान सत्यापन पर ध्यान देना चाहिए। आम लोग भी किसी के कहने पर अनजान क्यूआर कोड पर पैसे भेजने से बचें।
कानपुर की हर क्राइम खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
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कानपुर के स्वरूप नगर स्थित फोर स्टार होटल रीजेंटा सेंट्रल द क्रिस्टल में ठहरा एक मेहमान खाने और ठहरने का 6,447 रुपये का बिल चुकाए बिना फरार हो गया। इतना ही नहीं, फरार होने के बाद उसने फोन कर होटल के एक मैनेजर से 1,000 रुपये भी ठग लिए।
होटल के वरिष्ठ प्रबंधक की शिकायत पर डीसीपी सेंट्रल के आदेश पर स्वरूप नगर थाने में एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
कैसे दिया वारदात को अंजाम
रिपोर्ट के अनुसार:
18 अक्टूबर: आरोपी ने होटल का कमरा नंबर 205 बुक कराया। जीएसटी समेत कमरे का किराया 4,200 रुपये तय हुआ।
19 अक्टूबर, सुबह करीब 10 बजे: वह बिना बताए होटल से निकल गया। कमरे में अपना बैग छोड़ गया, ताकि किसी को शक न हो।
बिल: खाने और ठहरने का कुल बिल 6,447 रुपये था, जो उसने नहीं चुकाया।
मैनेजर को भी लगाया चूना
होटल से निकलने के बाद आरोपी ने होटल के दूसरे मैनेजर को फोन किया और पैसों की जरूरत बताई। मैनेजर ने उस पर भरोसा कर उसके बताए एक क्यूआर कोड पर 1,000 रुपये भेज दिए। यह क्यूआर कोड किसी दूसरे व्यक्ति का था। दोपहर करीब 2 बजे उसने फिर फोन कर 700 रुपये और मांगे। इस बार मैनेजर को शक हुआ।
बैग में निकला कचरा
शक होने पर मैनेजर ने कमरे की जांच कराई। आरोपी जो बैग छोड़ गया था, उसमें कचरा और खाली पॉलीथिन भरी थी। यानी उसने पहले से योजना बनाकर बैग छोड़ा था, ताकि होटल स्टाफ यह समझे कि वह बाहर गया है और वापस लौटेगा।
पैसे मांगने पर दी धमकी
मैनेजर ने जब रुपये वापस मांगे, तो आरोपी ने फोन पर गाली-गलौज की और धमकी दी। इसके बाद होटल के वरिष्ठ प्रबंधक ने डीसीपी सेंट्रल से शिकायत की। डीसीपी के आदेश पर स्वरूप नगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई। इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
होटल ऐसे बचें ऐसी ठगी से
एडवांस भुगतान: चेक-इन के समय कमरे का किराया और कुछ सिक्योरिटी डिपॉजिट एडवांस में लें।
पहचान पत्र की जांच: मेहमान का असली पहचान पत्र लें और उसकी फोटो कॉपी रखें। संभव हो तो ऑनलाइन सत्यापन करें।
मोबाइल नंबर सत्यापन: चेक-इन के समय मोबाइल नंबर पर ओटीपी या कॉल से सत्यापन करें।
क्रेडिट कार्ड प्री-ऑथराइजेशन: बड़े होटल कार्ड पर पहले से रकम ब्लॉक करने की सुविधा का इस्तेमाल करें।
बिल का समय-समय पर भुगतान: रूम सर्विस और खाने का बिल रोज जुड़ने के साथ उसका भुगतान लेते रहें।
चेक-आउट निगरानी: रिसेप्शन पर मेहमानों के बाहर जाने पर नजर रखें।
सीसीटीवी: लॉबी, गेट और कॉरिडोर में कैमरे चालू रखें।
पथिक पोर्टल: उत्तर प्रदेश में होटलों को मेहमानों की जानकारी पुलिस के पोर्टल पर दर्ज करनी होती है।
फोन पर पैसे मांगने वालों से सावधान
इस मामले में आरोपी ने होटल से निकलने के बाद भी मैनेजर से फोन पर पैसे ठग लिए। आम लोगों के साथ भी ऐसी ठगी होती है, जब कोई परिचित बनकर या मजबूरी बताकर फोन पर पैसे मांगता है।
ध्यान रखें:
किसी के कहने पर तुरंत किसी अनजान क्यूआर कोड या नंबर पर पैसे न भेजें।
जिसके नाम पर पैसे मांगे जा रहे हैं, अगर वह किसी और का क्यूआर कोड भेजे, तो यह खतरे का संकेत है।
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बिना भुगतान के होटल में ठहरकर भाग जाना और झूठ बोलकर पैसे लेना धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। भारतीय न्याय संहिता में धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी के लिए सजा का प्रावधान है। पुलिस जांच में आरोपी के पहचान पत्र, मोबाइल नंबर और जिस खाते में पैसे गए, उसकी जानकारी से उस तक पहुंच सकती है।
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