अयोध्या दीपोत्सव 2026: 56 घाटों पर जलेंगे करीब 30 लाख दीये
Ayodhya Deepotsav 2026: Around 30 lakh diyas on 56 ghats, Ramayana-themed decor
Kanpur Live News Desk ·

भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या एक बार फिर रोशनी के महापर्व के लिए तैयार हो रही है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने दीपोत्सव 2026 की तैयारियों का खाका तैयार कर लिया है। इस बार दीपोत्सव का आयोजन 6 से 8 नवंबर तक होगा, जबकि मुख्य कार्यक्रम 7 नवंबर को होगा। इस दिन सरयू नदी के 56 घाटों पर करीब 30 लाख दीये जलाने की योजना है। पूरे आयोजन को रामायण की थीम पर सजाया जाएगा, ताकि अयोध्या आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक भगवान राम की कथा को हर कदम पर महसूस कर सकें।
तीन दिन का भव्य आयोजन
दीपोत्सव अब अयोध्या की पहचान बन चुका है। हर साल इसकी भव्यता बढ़ती जा रही है और देश-विदेश से लाखों लोग इसे देखने पहुंचते हैं। इस बार तीन दिन चलने वाले आयोजन में धार्मिक, सांस्कृतिक और कलात्मक कार्यक्रमों का संगम होगा। 7 नवंबर की शाम जब सरयू के घाटों पर लाखों दीये एक साथ जलेंगे, तो पूरी अयोध्या स्वर्णिम रोशनी में नहा उठेगी।
रामायण थीम पर सजेगी नगरी
पर्यटन विभाग की योजना के अनुसार इस बार पूरी अयोध्या को रामायण के प्रसंगों पर आधारित सजावट से सजाया जाएगा। लता मंगेशकर चौक से लेकर राम की पैड़ी तक कई कलात्मक इंस्टॉलेशन लगाए जाएंगे। इनमें रामायण के अलग-अलग प्रसंगों को दर्शाया जाएगा।
सजावट की प्रमुख झलकियां:
राम रथ: भगवान राम के रथ की भव्य झांकी।
पुष्पक विमान: लंका विजय के बाद अयोध्या लौटने के प्रसंग से जुड़ा पुष्पक विमान का प्रतिरूप।
राम दरबार: भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान के दरबार की सजीव प्रस्तुति।
भरत मिलाप मंच: भाइयों के प्रेम के प्रतीक भरत मिलाप प्रसंग पर आधारित मंच।
20 सेल्फी प्वाइंट और थीम वे-फाइंडर
आज के दौर में पर्यटक अपनी यात्रा की यादें तस्वीरों में सहेजना पसंद करते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए 20 सेल्फी प्वाइंट बनाए जाएंगे। इनमें से 10 राम कथा पार्क में और 10 राम की पैड़ी पर होंगे। इसके अलावा करीब 10 थीम आधारित वे-फाइंडर यानी दिशा बताने वाले संकेतक और वर्टिकल स्क्रीन भी लगाए जाएंगे, जिनसे बाहर से आने वाले लोगों को रास्ता खोजने में आसानी होगी।
राम कथा पार्क का नया रूप
राम कथा पार्क के स्थायी मंच को नए सिरे से सजाया जा रहा है। इसमें आधुनिक एलईडी, साउंड और लाइटिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। इसी मंच पर दीपोत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम, रामलीला और कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी। बेहतर ध्वनि और प्रकाश व्यवस्था से दर्शकों को कार्यक्रमों का अनुभव और भी यादगार होगा।
सरयू में तैरती झांकियां
इस बार सरयू नदी में फ्लोटर्स यानी तैरती हुई झांकियां भी लगाई जाएंगी। रात के समय रोशनी से जगमगाती ये झांकियां नदी के पानी में प्रतिबिंबित होकर अद्भुत दृश्य बनाएंगी। घाटों पर बैठे श्रद्धालु दीयों की कतारों के साथ इन तैरती झांकियों का भी आनंद ले सकेंगे।
प्रवेश मार्गों पर 10 थीम गेट
अयोध्या आने वाले मुख्य रास्तों पर भी स्वागत की खास तैयारी है। लखनऊ, सुल्तानपुर और रायबरेली की ओर से आने वाले मार्गों और धर्म पथ पर कुल 10 थीम आधारित द्वार बनाए जाएंगे। शहर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को दीपोत्सव के माहौल का अहसास होगा।
पर्यटन मंत्री ने क्या कहा
प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि दीपोत्सव अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने रखने का माध्यम बन चुका है। उनके अनुसार इस बार सजावट और व्यवस्थाओं को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि आने वाले हर श्रद्धालु और पर्यटक को रामायण की भावना से जुड़ा अनुभव मिले।
दीपोत्सव का बढ़ता कद
अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत 2017 में हुई थी। तब से हर साल दीयों की संख्या और आयोजन का स्तर बढ़ता गया है। कई बार दीपोत्सव में सबसे ज्यादा दीये एक साथ जलाने के रिकॉर्ड भी बने हैं। राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अयोध्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे दीपोत्सव का महत्व और बढ़ गया है।
स्थानीय लोगों को रोजगार
दीपोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हजारों लोगों के लिए रोजगार का जरिया भी है। दीये बनाने वाले कुम्हार, सजावट करने वाले कारीगर, होटल, ढाबे, नाव चलाने वाले, ई-रिक्शा चालक और छोटे दुकानदार, सभी को इस आयोजन से कमाई का मौका मिलता है। दीये जलाने में बड़ी संख्या में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के स्वयंसेवक भी हिस्सा लेते हैं, जिनके लिए यह एक यादगार अनुभव होता है।
दीपोत्सव का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि भगवान राम जब 14 वर्ष का वनवास पूरा कर और लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटे थे, तब अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीयों से सजाकर उनका स्वागत किया था। इसी परंपरा की याद में दीपावली मनाई जाती है। अयोध्या का दीपोत्सव इसी भाव को भव्य रूप में जीवंत करता है। सरयू के घाटों पर जलते लाखों दीये उस ऐतिहासिक स्वागत की झलक दिखाते हैं, जिसका वर्णन रामायण में मिलता है। यही वजह है कि श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि आस्था का अनुभव है।
कानपुर से अयोध्या कैसे पहुंचें
कानपुर से बड़ी संख्या में लोग हर साल दीपोत्सव देखने अयोध्या जाते हैं। कानपुर से अयोध्या की दूरी सड़क मार्ग से लगभग सवा दो सौ किलोमीटर है।
सड़क मार्ग: लखनऊ होते हुए अयोध्या पहुंचा जा सकता है। रोडवेज की बसें भी नियमित चलती हैं।
रेल मार्ग: कानपुर से अयोध्या धाम के लिए सीधी और लखनऊ होकर ट्रेनें उपलब्ध हैं।
हवाई मार्ग: अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जहां कई शहरों से उड़ानें आती हैं।
श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सलाह
दीपोत्सव के दिनों में भारी भीड़ रहती है, इसलिए होटल और यात्रा की बुकिंग पहले से कर लें।
मुख्य कार्यक्रम के दिन यातायात डायवर्जन लागू हो सकता है, प्रशासन की ट्रैफिक एडवाइजरी जरूर देखें।
बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें, भीड़ में उनका हाथ न छोड़ें।
अपना पहचान पत्र साथ रखें और कीमती सामान संभालकर रखें।
घाटों पर सुरक्षाकर्मियों और स्वयंसेवकों के निर्देशों का पालन करें।
आधिकारिक कार्यक्रम और समय की जानकारी के लिए यूपी पर्यटन विभाग के आधिकारिक माध्यमों पर नजर रखें।
निष्कर्ष
अयोध्या दीपोत्सव 2026 आस्था, संस्कृति और आधुनिक प्रस्तुति का अनूठा संगम बनने जा रहा है। 56 घाटों पर करीब 30 लाख दीयों की रोशनी, रामायण थीम पर सजावट, सरयू में तैरती झांकियां और भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम इसे यादगार बनाएंगे। अगर आप इस बार दीपोत्सव देखने की योजना बना रहे हैं, तो तैयारी अभी से शुरू कर दें।
धर्म, संस्कृति और उत्तर प्रदेश की हर बड़ी खबर के लिए कानपुर लाइव के साथ जुड़े रहें।
अयोध्या दीपोत्सव 2026: 56 घाटों पर जलेंगे करीब 30 लाख दीये
भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या एक बार फिर रोशनी के महापर्व के लिए तैयार हो रही है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने दीपोत्सव 2026 की तैयारियों का खाका तैयार कर लिया है। इस बार दीपोत्सव का आयोजन 6 से 8 नवंबर तक होगा, जबकि मुख्य कार्यक्रम 7 नवंबर को होगा। इस दिन सरयू नदी के 56 घाटों पर करीब 30 लाख दीये जलाने की योजना है। पूरे आयोजन को रामायण की थीम पर सजाया जाएगा, ताकि अयोध्या आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक भगवान राम की कथा को हर कदम पर महसूस कर सकें।
तीन दिन का भव्य आयोजन
दीपोत्सव अब अयोध्या की पहचान बन चुका है। हर साल इसकी भव्यता बढ़ती जा रही है और देश-विदेश से लाखों लोग इसे देखने पहुंचते हैं। इस बार तीन दिन चलने वाले आयोजन में धार्मिक, सांस्कृतिक और कलात्मक कार्यक्रमों का संगम होगा। 7 नवंबर की शाम जब सरयू के घाटों पर लाखों दीये एक साथ जलेंगे, तो पूरी अयोध्या स्वर्णिम रोशनी में नहा उठेगी।
रामायण थीम पर सजेगी नगरी
पर्यटन विभाग की योजना के अनुसार इस बार पूरी अयोध्या को रामायण के प्रसंगों पर आधारित सजावट से सजाया जाएगा। लता मंगेशकर चौक से लेकर राम की पैड़ी तक कई कलात्मक इंस्टॉलेशन लगाए जाएंगे। इनमें रामायण के अलग-अलग प्रसंगों को दर्शाया जाएगा।
सजावट की प्रमुख झलकियां:
राम रथ: भगवान राम के रथ की भव्य झांकी।
पुष्पक विमान: लंका विजय के बाद अयोध्या लौटने के प्रसंग से जुड़ा पुष्पक विमान का प्रतिरूप।
राम दरबार: भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान के दरबार की सजीव प्रस्तुति।
भरत मिलाप मंच: भाइयों के प्रेम के प्रतीक भरत मिलाप प्रसंग पर आधारित मंच।
20 सेल्फी प्वाइंट और थीम वे-फाइंडर
आज के दौर में पर्यटक अपनी यात्रा की यादें तस्वीरों में सहेजना पसंद करते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए 20 सेल्फी प्वाइंट बनाए जाएंगे। इनमें से 10 राम कथा पार्क में और 10 राम की पैड़ी पर होंगे। इसके अलावा करीब 10 थीम आधारित वे-फाइंडर यानी दिशा बताने वाले संकेतक और वर्टिकल स्क्रीन भी लगाए जाएंगे, जिनसे बाहर से आने वाले लोगों को रास्ता खोजने में आसानी होगी।
राम कथा पार्क का नया रूप
राम कथा पार्क के स्थायी मंच को नए सिरे से सजाया जा रहा है। इसमें आधुनिक एलईडी, साउंड और लाइटिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। इसी मंच पर दीपोत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम, रामलीला और कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी। बेहतर ध्वनि और प्रकाश व्यवस्था से दर्शकों को कार्यक्रमों का अनुभव और भी यादगार होगा।
सरयू में तैरती झांकियां
इस बार सरयू नदी में फ्लोटर्स यानी तैरती हुई झांकियां भी लगाई जाएंगी। रात के समय रोशनी से जगमगाती ये झांकियां नदी के पानी में प्रतिबिंबित होकर अद्भुत दृश्य बनाएंगी। घाटों पर बैठे श्रद्धालु दीयों की कतारों के साथ इन तैरती झांकियों का भी आनंद ले सकेंगे।
प्रवेश मार्गों पर 10 थीम गेट
अयोध्या आने वाले मुख्य रास्तों पर भी स्वागत की खास तैयारी है। लखनऊ, सुल्तानपुर और रायबरेली की ओर से आने वाले मार्गों और धर्म पथ पर कुल 10 थीम आधारित द्वार बनाए जाएंगे। शहर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को दीपोत्सव के माहौल का अहसास होगा।
पर्यटन मंत्री ने क्या कहा
प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि दीपोत्सव अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने रखने का माध्यम बन चुका है। उनके अनुसार इस बार सजावट और व्यवस्थाओं को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि आने वाले हर श्रद्धालु और पर्यटक को रामायण की भावना से जुड़ा अनुभव मिले।
दीपोत्सव का बढ़ता कद
अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत 2017 में हुई थी। तब से हर साल दीयों की संख्या और आयोजन का स्तर बढ़ता गया है। कई बार दीपोत्सव में सबसे ज्यादा दीये एक साथ जलाने के रिकॉर्ड भी बने हैं। राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अयोध्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे दीपोत्सव का महत्व और बढ़ गया है।
स्थानीय लोगों को रोजगार
दीपोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हजारों लोगों के लिए रोजगार का जरिया भी है। दीये बनाने वाले कुम्हार, सजावट करने वाले कारीगर, होटल, ढाबे, नाव चलाने वाले, ई-रिक्शा चालक और छोटे दुकानदार, सभी को इस आयोजन से कमाई का मौका मिलता है। दीये जलाने में बड़ी संख्या में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के स्वयंसेवक भी हिस्सा लेते हैं, जिनके लिए यह एक यादगार अनुभव होता है।
दीपोत्सव का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि भगवान राम जब 14 वर्ष का वनवास पूरा कर और लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटे थे, तब अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीयों से सजाकर उनका स्वागत किया था। इसी परंपरा की याद में दीपावली मनाई जाती है। अयोध्या का दीपोत्सव इसी भाव को भव्य रूप में जीवंत करता है। सरयू के घाटों पर जलते लाखों दीये उस ऐतिहासिक स्वागत की झलक दिखाते हैं, जिसका वर्णन रामायण में मिलता है। यही वजह है कि श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि आस्था का अनुभव है।
कानपुर से अयोध्या कैसे पहुंचें
कानपुर से बड़ी संख्या में लोग हर साल दीपोत्सव देखने अयोध्या जाते हैं। कानपुर से अयोध्या की दूरी सड़क मार्ग से लगभग सवा दो सौ किलोमीटर है।
सड़क मार्ग: लखनऊ होते हुए अयोध्या पहुंचा जा सकता है। रोडवेज की बसें भी नियमित चलती हैं।
रेल मार्ग: कानपुर से अयोध्या धाम के लिए सीधी और लखनऊ होकर ट्रेनें उपलब्ध हैं।
हवाई मार्ग: अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जहां कई शहरों से उड़ानें आती हैं।
श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सलाह
दीपोत्सव के दिनों में भारी भीड़ रहती है, इसलिए होटल और यात्रा की बुकिंग पहले से कर लें।
मुख्य कार्यक्रम के दिन यातायात डायवर्जन लागू हो सकता है, प्रशासन की ट्रैफिक एडवाइजरी जरूर देखें।
बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें, भीड़ में उनका हाथ न छोड़ें।
अपना पहचान पत्र साथ रखें और कीमती सामान संभालकर रखें।
घाटों पर सुरक्षाकर्मियों और स्वयंसेवकों के निर्देशों का पालन करें।
आधिकारिक कार्यक्रम और समय की जानकारी के लिए यूपी पर्यटन विभाग के आधिकारिक माध्यमों पर नजर रखें।
निष्कर्ष
अयोध्या दीपोत्सव 2026 आस्था, संस्कृति और आधुनिक प्रस्तुति का अनूठा संगम बनने जा रहा है। 56 घाटों पर करीब 30 लाख दीयों की रोशनी, रामायण थीम पर सजावट, सरयू में तैरती झांकियां और भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम इसे यादगार बनाएंगे। अगर आप इस बार दीपोत्सव देखने की योजना बना रहे हैं, तो तैयारी अभी से शुरू कर दें।
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