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मानसून में डायबिटीज मरीजों को विशेष सावधानी — पैरों की देखभाल से लेकर इंसुलिन स्टोरेज तक, डॉक्टरों की जरूरी सलाह

Monsoon Special Care for Diabetes Patients Foot Care to Insulin Storage Doctors Essential Advice

Kanpur Live News Desk ·

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मानसून में डायबिटीज मरीजों को विशेष सावधानी — पैरों की देखभाल से लेकर इंसुलिन स्टोरेज तक, डॉक्टरों की जरूरी सलाह
कानपुर में मानसून आ चुका है और बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। यह मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं डायबिटीज (मधुमेह) के मरीजों के लिए कुछ खास चुनौतियां भी लेकर आता है। भारत में करोड़ों लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं और कानपुर जैसे शहरों में यह संख्या लगातार बढ़ रही है। मानसून में डायबिटिक मरीजों को कुछ अतिरिक्त सावधानियां बरतनी जरूरी हैं। मानसून में डायबिटीज मरीजों को खतरा क्यों? 1. संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है बारिश के मौसम में हवा में नमी ज्यादा होती है जिससे फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता वैसे भी कमजोर होती है, इसलिए उन पर यह खतरा दोगुना होता है। 2. घाव जल्दी नहीं भरते डायबिटीज में रक्त संचार धीमा हो जाता है। इसलिए कोई भी छोटा-सा घाव या चोट मानसून में और खतरनाक हो जाती है। 3. ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव मौसम बदलने से खान-पान और दिनचर्या में बदलाव होता है जिससे ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित हो सकता है। पैरों की देखभाल — सबसे जरूरी डायबिटीज मरीजों के लिए मानसून में पैरों की देखभाल सबसे महत्वपूर्ण है। यह करें: रोज पैर धोएं और अच्छी तरह सुखाएं — खासकर उंगलियों के बीच बंद और आरामदायक जूते पहनें — खुले चप्पल से बचें गीले मौसम में बाहर जाने पर वाटरप्रूफ जूते पहनें रोज पैरों को ध्यान से देखें — कोई भी छाला, कट या सूजन दिखे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं नाखून सावधानी से और सीधे काटें यह न करें: पानी भरी सड़कों पर नंगे पैर न चलें पैरों को लंबे समय तक गीला न रहने दें खुद से कोई दवा या पट्टी न लगाएं इंसुलिन स्टोरेज का ध्यान रखें मानसून में इंसुलिन स्टोर करना एक चुनौती बन सकता है। बिजली की कटौती होने पर फ्रिज बंद हो जाता है। सही तापमान: इंसुलिन को 2°C से 8°C पर रखना चाहिए (फ्रिज में)। खुली हुई इंसुलिन को कमरे के तापमान (15-25°C) पर रख सकते हैं। बिजली गुल होने पर: इंसुलिन को ठंडे पानी से भरे बर्तन में रखें सीधी धूप और गर्मी से बचाएं अगर बिजली 4-6 घंटे से ज्यादा गुल हो तो इंसुलिन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है — डॉक्टर से सलाह लें खान-पान में सावधानी मानसून में बाहर का खाना डायबिटीज मरीजों के लिए दोहरा खतरा है: बाहर का तला-भुना खाना ब्लड शुगर बढ़ाता है मानसून में बाहरी खाने में संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है क्या खाएं: घर का ताजा बना खाना हरी सब्जियां (उबली हुई) दाल और दलिया खूब पानी पिएं क्या न खाएं: बाहर का कटा हुआ फल स्ट्रीट फूड (चाट, गोलगप्पे) मीठे पेय ब्लड शुगर मॉनिटरिंग जरूरी मानसून में हर दिन ब्लड शुगर की जांच जरूरी है। अगर आप घर पर Glucometer से जांच करते हैं तो ध्यान रखें: Glucometer को नमी और पानी से बचाएं Test strips की expiry date चेक करें अचानक बहुत कम (Hypoglycemia) या बहुत ज्यादा (Hyperglycemia) ब्लड शुगर हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें कब डॉक्टर के पास जाएं? पैर में कोई भी घाव, कट, या छाला बुखार के साथ ब्लड शुगर का अनियंत्रित होना पेशाब में जलन या बार-बार पेशाब आना अचानक बहुत ज्यादा थकान या कमजोरी कानपुर में डायबिटीज सेवाएं: हैलट अस्पताल — Endocrinology विभाग जिला अस्पताल — OPD सुबह 8-2 बजे GSVM Medical College कानपुर में स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी जानकारी के लिए Kanpur Live Health पढ़ते रहें।

मानसून में डायबिटीज मरीजों को विशेष सावधानी — पैरों की देखभाल से लेकर इंसुलिन स्टोरेज तक, डॉक्टरों की जरूरी सलाह

कानपुर में मानसून आ चुका है और बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। यह मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं डायबिटीज (मधुमेह) के मरीजों के लिए कुछ खास चुनौतियां भी लेकर आता है। भारत में करोड़ों लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं और कानपुर जैसे शहरों में यह संख्या लगातार बढ़ रही है। मानसून में डायबिटिक मरीजों को कुछ अतिरिक्त सावधानियां बरतनी जरूरी हैं। मानसून में डायबिटीज मरीजों को खतरा क्यों? 1. संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है बारिश के मौसम में हवा में नमी ज्यादा होती है जिससे फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता वैसे भी कमजोर होती है, इसलिए उन पर यह खतरा दोगुना होता है। 2. घाव जल्दी नहीं भरते डायबिटीज में रक्त संचार धीमा हो जाता है। इसलिए कोई भी छोटा-सा घाव या चोट मानसून में और खतरनाक हो जाती है। 3. ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव मौसम बदलने से खान-पान और दिनचर्या में बदलाव होता है जिससे ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित हो सकता है। पैरों की देखभाल — सबसे जरूरी डायबिटीज मरीजों के लिए मानसून में पैरों की देखभाल सबसे महत्वपूर्ण है। यह करें: रोज पैर धोएं और अच्छी तरह सुखाएं — खासकर उंगलियों के बीच बंद और आरामदायक जूते पहनें — खुले चप्पल से बचें गीले मौसम में बाहर जाने पर वाटरप्रूफ जूते पहनें रोज पैरों को ध्यान से देखें — कोई भी छाला, कट या सूजन दिखे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं नाखून सावधानी से और सीधे काटें यह न करें: पानी भरी सड़कों पर नंगे पैर न चलें पैरों को लंबे समय तक गीला न रहने दें खुद से कोई दवा या पट्टी न लगाएं इंसुलिन स्टोरेज का ध्यान रखें मानसून में इंसुलिन स्टोर करना एक चुनौती बन सकता है। बिजली की कटौती होने पर फ्रिज बंद हो जाता है। सही तापमान: इंसुलिन को 2°C से 8°C पर रखना चाहिए (फ्रिज में)। खुली हुई इंसुलिन को कमरे के तापमान (15-25°C) पर रख सकते हैं। बिजली गुल होने पर: इंसुलिन को ठंडे पानी से भरे बर्तन में रखें सीधी धूप और गर्मी से बचाएं अगर बिजली 4-6 घंटे से ज्यादा गुल हो तो इंसुलिन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है — डॉक्टर से सलाह लें खान-पान में सावधानी मानसून में बाहर का खाना डायबिटीज मरीजों के लिए दोहरा खतरा है: बाहर का तला-भुना खाना ब्लड शुगर बढ़ाता है मानसून में बाहरी खाने में संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है क्या खाएं: घर का ताजा बना खाना हरी सब्जियां (उबली हुई) दाल और दलिया खूब पानी पिएं क्या न खाएं: बाहर का कटा हुआ फल स्ट्रीट फूड (चाट, गोलगप्पे) मीठे पेय ब्लड शुगर मॉनिटरिंग जरूरी मानसून में हर दिन ब्लड शुगर की जांच जरूरी है। अगर आप घर पर Glucometer से जांच करते हैं तो ध्यान रखें: Glucometer को नमी और पानी से बचाएं Test strips की expiry date चेक करें अचानक बहुत कम (Hypoglycemia) या बहुत ज्यादा (Hyperglycemia) ब्लड शुगर हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें कब डॉक्टर के पास जाएं? पैर में कोई भी घाव, कट, या छाला बुखार के साथ ब्लड शुगर का अनियंत्रित होना पेशाब में जलन या बार-बार पेशाब आना अचानक बहुत ज्यादा थकान या कमजोरी कानपुर में डायबिटीज सेवाएं: हैलट अस्पताल — Endocrinology विभाग जिला अस्पताल — OPD सुबह 8-2 बजे GSVM Medical College कानपुर में स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी जानकारी के लिए Kanpur Live Health पढ़ते रहें।

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